कभी सफलता की पहचान थी छह अंकों वाली सैलरी, अब उठ रहे हैं सवाल
एक समय था जब हर महीने 1 लाख रुपये या उससे अधिक कमाना आर्थिक सफलता की पहचान माना जाता था। यह अच्छी नौकरी, स्थिर भविष्य और आरामदायक जीवन का प्रतीक समझा जाता था। लेकिन अब तेजी से बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच यह धारणा कमजोर पड़ती नजर आ रही है।
हाल ही में बेंगलुरु के एक आईटी प्रोफेशनल के अतिरिक्त आय के लिए टैक्सी चलाने की खबर ने देशभर के लाखों नौकरीपेशा लोगों का ध्यान खींचा। यह घटना केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि शहरी भारत के उस वर्ग की चिंता को दर्शाती है जो अच्छी कमाई के बावजूद आर्थिक सुरक्षा को लेकर असमंजस में है।
देश के बड़े शहरों जैसे बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद और पुणे में रहने की लागत पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है।
सबसे ज्यादा असर इन क्षेत्रों में देखने को मिला है:
नतीजतन, वेतन बढ़ने के बावजूद अधिकांश परिवारों के पास बचत के लिए अपेक्षाकृत कम पैसा बच रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज की पीढ़ी अपने माता-पिता की तुलना में कहीं अधिक कमाई कर रही है, लेकिन आर्थिक रूप से खुद को उतना सुरक्षित महसूस नहीं करती।
ईएमआई, स्कूल फीस, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल, स्वास्थ्य बीमा और अन्य जिम्मेदारियों के बाद आय का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। यही वजह है कि अच्छी सैलरी पाने वाले लोग भी भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं।
बेंगलुरु के आईटी प्रोफेशनल की तरह अब कई नौकरीपेशा लोग अतिरिक्त कमाई के रास्ते तलाश रहे हैं।
आज बड़ी संख्या में लोग:
इनमें से अधिकांश लोग आर्थिक संकट में नहीं हैं, बल्कि बढ़ती आकांक्षाओं और खर्चों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि केवल महंगाई ही समस्या नहीं है, बल्कि जीवनशैली की अपेक्षाएं भी काफी बदल गई हैं।
आज का शहरी मध्यम वर्ग एक साथ कई लक्ष्य हासिल करना चाहता है:
इन सभी जरूरतों को एक ही आय के जरिए पूरा करना पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने लोगों की जीवनशैली और सफलता की परिभाषा बदल दी है।
लक्जरी घर, विदेश यात्राएं, महंगी कारें और हाई-एंड लाइफस्टाइल अब लगातार लोगों की स्क्रीन पर दिखाई देती हैं। इससे कई बार लोग अपनी तुलना समाज के सबसे संपन्न वर्ग से करने लगते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक असंतोष का एक कारण यह भी है कि सफलता का पैमाना लगातार बदल रहा है।
आज के शहरी परिवारों के सामने कई वित्तीय जिम्मेदारियां एक साथ मौजूद हैं।
उन्हें:
इसी वजह से अच्छी आय होने के बावजूद आर्थिक असुरक्षा की भावना बनी रहती है।
मध्यम वर्ग के सपने आज भी वही हैं—स्थिर नौकरी, अपना घर, बच्चों की अच्छी शिक्षा और सुरक्षित रिटायरमेंट। लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल करने की लागत पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज आर्थिक सुरक्षा केवल अधिक कमाने से नहीं, बल्कि बेहतर वित्तीय योजना, अनुशासित बचत और समझदारी से निवेश करने से मिलेगी।
1 लाख रुपये महीना आज भी भारत के अधिकांश लोगों के लिए एक बड़ी आय मानी जाती है। लेकिन बड़े शहरों में बढ़ती महंगाई, जीवनशैली के खर्च और वित्तीय जिम्मेदारियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल अच्छी सैलरी ही आर्थिक सुरक्षा की गारंटी दे सकती है?
आज के भारत में जवाब शायद "नहीं" है। अब आर्थिक सफलता केवल कमाई पर नहीं, बल्कि उस कमाई को संभालने और बढ़ाने की क्षमता पर भी निर्भर करती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। रेलवे भर्ती परीक्षा (RRB) में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने रांची से विशेष परीक्षा स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। इस ट्रेन का उद्देश्य परीक्षा केंद्रों तक अभ्यर्थियों की आवाजाही को आसान बनाना और नियमित ट्रेनों पर बढ़ने वाले दबाव को कम करना है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त कोच और विशेष सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। परीक्षार्थियों की सुविधा पर विशेष ध्यान रेलवे ने बताया कि परीक्षा अवधि के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के यात्रा करने की संभावना को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। स्पेशल ट्रेन से झारखंड के साथ-साथ बिहार और अन्य राज्यों के उम्मीदवारों को भी लाभ मिलेगा। रेलवे ने अभ्यर्थियों से समय पर टिकट बुक कराने और यात्रा से पहले ट्रेन की समय-सारिणी की पुष्टि करने की अपील की है। RRB ने जारी किया संशोधित CBT शेड्यूल इसी बीच रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), रांची ने विभिन्न लेवल-1 पदों के लिए संशोधित संभावित CBT शेड्यूल भी जारी किया है। बोर्ड ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे परीक्षा तिथि, ई-कॉल लेटर और अन्य अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से नजर रखें। तीन चरणों में होगी परीक्षा परीक्षा 3 से 6 अगस्त, 9 से 14 अगस्त और 17 से 21 अगस्त तक विभिन्न चरणों में होगी। रांची, जमशेदपुर, धनबाद, और राउरकेला जैसे प्रमुख शहरों में परीक्षा केंद्र बनाये गये है।
मुंबई, एजेंसियां। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने हिंदू हृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मेडिकल कॉलेज और डॉ. रुस्तम नरसी कूपर अस्पताल, जुहू में ग्रुप-डी (क्लास-IV) के 115 संविदा पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस भर्ती में 10वीं पास उम्मीदवार विभिन्न तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन माध्यम से चल रही है और 30 जुलाई 2026 आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि है। 10वीं पास के लिए सुनहरा अवसर भर्ती के तहत प्रयोगशाला परिचारक, वार्ड सेवक, सफाईकर्मी, आया, माली, कुली, एम्बुलेंस परिचारक, दर्जी, इलेक्ट्रीशियन, वायरमैन और अन्य पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। तकनीकी पदों के लिए 10वीं के साथ आईटीआई, वायरमैन लाइसेंस या संबंधित ट्रेड का प्रमाणपत्र आवश्यक होगा, जबकि अधिकांश अन्य पदों के लिए 10वीं पास और मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य है। आयु सीमा और आवेदन प्रक्रिया उम्मीदवार की आयु 1 जुलाई 2026 को न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 38 वर्ष होनी चाहिए। आवेदन केवल ऑफलाइन स्वीकार किए जाएंगे। अभ्यर्थियों को निर्धारित आवेदन पत्र और आवश्यक दस्तावेजों के साथ कार्य दिवसों में सुबह 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक आवेदन जमा करना होगा। ये दस्तावेज होंगे जरूरी आवेदन के साथ 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, निवास प्रमाण, अनुभव प्रमाणपत्र (यदि लागू हो) तथा सभी आवश्यक दस्तावेजों की स्व-सत्यापित प्रतियां जमा करनी होंगी। संबंधित पदों के लिए परिषद पंजीकरण या ट्रेड प्रमाणपत्र भी आवश्यक होंगे। उम्मीदवारों को अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (ICAI) ने मई 2026 में सीए फाइनल परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों के लिए कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम का शेड्यूल जारी कर दिया है। इस बार देश के 29 शहरों में प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित होगी, जहां 78 प्रमुख कंपनियां कुल 5,339 पदों पर भर्ती करेंगी। इस पहल का उद्देश्य नए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को देश की अग्रणी कंपनियों में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। 29 शहरों में होंगे कैंपस इंटरव्यू आईसीएआई के अनुसार, दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता और अहमदाबाद समेत 29 शहरों में चरणबद्ध तरीके से इंटरव्यू आयोजित किए जाएंगे। रांची, रायपुर, राजकोट, रतलाम और वडोदरा जैसे उभरते शहरों को भी प्लेसमेंट सूची में शामिल किया गया है। 6,399 अभ्यर्थियों ने कराया पंजीकरण मई 2026 की सीए फाइनल परीक्षा में 7,931 अभ्यर्थी सफल हुए थे। इनमें से 6,399 नए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने कैंपस प्लेसमेंट प्रक्रिया के लिए पंजीकरण कराया है। भर्ती वित्त, ऑडिट, कराधान, कंसल्टिंग, बैंकिंग, जोखिम प्रबंधन, विनिर्माण और आईटी सहित कई क्षेत्रों में होगी। भर्ती प्रक्रिया को बनाया गया अधिक आधुनिक आईसीएआई अध्यक्ष सीए प्रसन्न कुमार डी ने बताया कि इस बार प्लेसमेंट प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए तकनीक आधारित भर्ती प्रणाली, साइकोमेट्रिक और एप्टीट्यूड टेस्ट, करियर काउंसलिंग, ओरिएंटेशन कार्यक्रम और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप स्किल डेवलपमेंट पर विशेष जोर दिया गया है। पिछली बार मिला था 27.50 लाख रुपये तक का पैकेज संस्थान के अनुसार, अप्रैल-मई 2026 में आयोजित 63वें कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम में 2,570 से अधिक उम्मीदवारों का चयन हुआ था। उस दौरान सबसे बड़ा घरेलू वार्षिक पैकेज 27.50 लाख रुपये रहा, जबकि चयनित अभ्यर्थियों का औसत वार्षिक सीटीसी 13 लाख रुपये दर्ज किया गया था। इस बार भी हजारों नए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को आकर्षक वेतन पैकेज मिलने की उम्मीद है।