डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर बढ़ी अतिरिक्त उत्पाद शुल्क दर
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) यानी विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल निर्यात पर लगने वाला शुल्क 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं ATF निर्यात पर टैक्स 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
नई दरें 16 जून 2026 से लागू हो गई हैं।
सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है। पेट्रोल पर पहले की तरह 1.5 रुपये प्रति लीटर की दर से निर्यात शुल्क लागू रहेगा।
इस फैसले से संकेत मिलता है कि सरकार फिलहाल डीजल और विमानन ईंधन की घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देना चाहती है, जबकि पेट्रोल के मामले में मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखा गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा उत्पाद शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
इसका मतलब है कि इस फैसले का सीधा असर फिलहाल पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों पर नहीं पड़ेगा और आम उपभोक्ताओं को तत्काल किसी अतिरिक्त बोझ का सामना नहीं करना होगा।
सरकार ने मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विंडफॉल टैक्स व्यवस्था को फिर से लागू किया था। उस समय क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया था।
सरकार हर पंद्रह दिन में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा कर निर्यात शुल्क में बदलाव करती रही है। 16 मई 2026 को पेट्रोल निर्यात को भी इस व्यवस्था के दायरे में शामिल किया गया था।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, तब रिफाइनरी कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए निर्यात बढ़ाने की कोशिश करती हैं। ऐसे में घरेलू आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम रहता है। इसी वजह से सरकार अतिरिक्त शुल्क लगाकर अत्यधिक निर्यात को नियंत्रित करना चाहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल और ATF निर्यात शुल्क बढ़ने से रिफाइनिंग कंपनियों के निर्यात लाभ में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में शामिल है और बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। ऐसे में सरकार संतुलन बनाते हुए घरेलू जरूरतों और वैश्विक व्यापार दोनों पर नजर बनाए हुए है।
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें और संभावित ईरान-अमेरिका समझौते की दिशा आने वाले दिनों में सरकार की कर नीति को प्रभावित कर सकती है। यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता जारी रहती है, तो विंडफॉल टैक्स में आगे भी संशोधन देखने को मिल सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
मुंबई, एजेंसियां। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार ने लगातार तीसरे कारोबारी दिन मजबूत बढ़त दर्ज की। टेक्नोलॉजी और घरेलू मांग से जुड़े सेक्टर्स में जोरदार खरीदारी के दम पर बाजार हरे निशान में बंद हुआ। निवेशकों की सकारात्मक धारणा के चलते सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में अच्छी तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूत बढ़त बीएसई सेंसेक्स 544.15 अंक यानी 0.71% की छलांग लगाकर 76,808.48 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 135.25 अंक यानी 0.57% की बढ़त के साथ 23,989.15 पर पहुंच गया। यह लगातार तीसरा सत्र है जब भारतीय बाजार मजबूती के साथ बंद हुआ है, जिससे निवेशकों का भरोसा और बढ़ा है। आईटी और एफएमसीजी सेक्टर में तेजी बाजार की इस तेजी में आईटी सेक्टर ने सबसे अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही मीडिया सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। एफएमसीजी और फाइनेंशियल सेक्टर्स ने भी मामूली बढ़त के साथ बाजार को सहारा दिया। हिंदुस्तान यूनिलीवर और एनटीपीसी के शेयरों में करीब 2% की तेजी दर्ज की गई, जिससे बाजार को अतिरिक्त सपोर्ट मिला। कुछ सेक्टर्स में दबाव भी रहा जहां एक ओर बाजार में तेजी रही, वहीं मेटल, फार्मा, हेल्थकेयर और सीमेंट सेक्टर्स में कमजोरी देखने को मिली। इन सेक्टर्स में बिकवाली के दबाव ने बाजार की बढ़त को कुछ हद तक सीमित रखा। ग्लोबल बाजारों का मिला-जुला रुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आज मिला-जुला रुझान देखने को मिला। एशियाई बाजारों में जापान और हांगकांग में गिरावट रही, जबकि कुछ अन्य इंडेक्स स्थिर रहे। यूरोपीय बाजार भी लगभग सपाट बंद हुए। इसके बावजूद भारतीय बाजार ने घरेलू मांग और मजबूत सेक्टोरल सपोर्ट के दम पर बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार में घरेलू मांग का बढ़ता असर विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय बाजार अब वैश्विक सुस्ती के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था और टेक सेक्टर्स के दम पर मजबूती दिखा रहा है। यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में भी चुनिंदा सेक्टर्स बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ शुरुआत की। सकारात्मक वैश्विक संकेतों और ईरान-अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिससे बाजार में खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 300.03 अंक (0.39%) की बढ़त के साथ 76,564.36 अंक पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 75.15 अंक (0.32%) चढ़कर 23,929.05 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से रुपया भी डॉलर के मुकाबले पांच पैसे मजबूत होकर 94.53 पर पहुंच गया। आईटी और फाइनेंस शेयरों ने दिखाई मजबूती बाजार की तेजी में आईटी और वित्तीय कंपनियों की अहम भूमिका रही। शुरुआती कारोबार में एचसीएल टेक और बजाज फाइनेंस के शेयरों में करीब दो-दो फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। इन दिग्गज कंपनियों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली और निवेशकों का उत्साह बढ़ा। वेदांता डिमर्जर से खुली नई वैल्यू कॉर्पोरेट जगत में वेदांता समूह का डिमर्जर भी चर्चा का केंद्र रहा। समूह ने अपने कारोबार को अलग-अलग सूचीबद्ध कंपनियों में विभाजित कर निवेशकों के लिए लगभग 20 प्रतिशत अतिरिक्त वैल्यू अनलॉक करने का दावा किया है। हालांकि, डिमर्जर के बाद सूचीबद्ध हुई नई कंपनियों के शेयर शुरुआती बढ़त बरकरार नहीं रख सके और कारोबार के दौरान उनमें कुछ गिरावट देखने को मिली। इसके बावजूद बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्गठन की यह रणनीति लंबी अवधि में निवेशकों के लिए बेहतर मूल्य सृजित कर सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में और कमी आती है तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है।
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते के संकेतों के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत की उम्मीद बढ़ गई है। इस बीच भारत के लिए भी एक सकारात्मक खबर सामने आई है। पिछले तीन महीनों से अधिक समय से फारस की खाड़ी क्षेत्र में रुका भारतीय एलएनजी (Liquefied Natural Gas) टैंकर 'दिशा' (Disha) अब होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यदि समझौते के बाद होर्मुज जलमार्ग आधिकारिक रूप से खुलता है, तो यह भारतीय टैंकर इस रणनीतिक मार्ग से गुजरने वाला पहला जहाज बन सकता है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से एशिया और यूरोप तक पहुंचता है। फरवरी के अंत में क्षेत्र में बढ़े तनाव और अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद इस मार्ग पर गतिविधियां लगभग ठप हो गई थीं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई और ऊर्जा कीमतों में उछाल देखने को मिला। कहां पहुंच चुका है भारतीय टैंकर? शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, भारत की एक सरकारी आयातक कंपनी द्वारा दीर्घकालिक लीज पर लिया गया एलएनजी टैंकर 'दिशा' इस समय संयुक्त अरब अमीरात के उत्तर में ओमान के करीब पहुंच चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस जहाज ने लगभग 1 मार्च के आसपास कतर के रास लफ्फान एलएनजी टर्मिनल से गैस की खेप लोड की थी। इसके बाद क्षेत्रीय तनाव के कारण इसकी आवाजाही प्रभावित हुई। समझौते से वैश्विक बाजार को राहत यदि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरी तरह लागू होता है और दोनों ओर की नाकेबंदी समाप्त होती है, तो इसका सीधा फायदा— भारत सहित ऊर्जा आयात करने वाले देशों, यूरोप और एशिया के गैस बाजार, और वैश्विक तेल व्यापार को मिलेगा। मार्च से एलएनजी सप्लाई में आई कमी के कारण गैस की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई थी। अब सप्लाई सामान्य होने से कीमतों में नरमी आने की संभावना जताई जा रही है। कच्चे तेल की कीमतों पर भी असर होर्मुज के खुलने की उम्मीद के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान चार प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों का मानना है कि ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने से बाजार में स्थिरता लौट सकती है। अभी भी बनी हुई हैं चुनौतियां विशेषज्ञों के अनुसार, समझौते के बाद भी स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। कई जहाज अपनी वास्तविक लोकेशन छिपाने के लिए ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं, जिससे समुद्री गतिविधियों की सही तस्वीर सामने आना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का रणनीतिक प्रभाव भविष्य में भी इस मार्ग को संवेदनशील बनाए रख सकता है।