Iran 300 Billion Dollar Fund: अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते में 300 अरब डॉलर (300 Billion Dollar) के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास फंड का प्रावधान सबसे अधिक चर्चा में है। यह फंड युद्ध से प्रभावित ईरान के पुनर्निर्माण, ऊर्जा, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक परियोजनाओं को दोबारा खड़ा करने के लिए प्रस्तावित किया गया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम आएगी कहां से और इसे देगा कौन? समझौते में क्या है प्रावधान? समझौते के छठे बिंदु के अनुसार अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना तैयार करेगा। इस योजना का विस्तृत ढांचा अगले 60 दिनों में अंतिम समझौते के दौरान तय किया जाएगा। क्या अमेरिका अपनी जेब से देगा पैसा? अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक इसका जवाब 'नहीं' है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन खबरों को खारिज किया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिका सीधे ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर देगा। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे से ईरान को कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। फिर पैसा देगा कौन? अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के मुताबिक, इस फंड का वित्तपोषण मुख्य रूप से खाड़ी देशों, क्षेत्रीय साझेदारों और वैश्विक निजी निवेशकों के जरिए किया जा सकता है। यानी वे खाड़ी देश, जिन्हें हालिया संघर्ष के दौरान ईरान के हमलों का सामना करना पड़ा, भविष्य में ईरान के पुनर्निर्माण में निवेश कर सकते हैं। आधे से ज्यादा फंड पहले ही जुटने का दावा रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित 300 अरब डॉलर के फंड का आधे से अधिक हिस्सा पहले ही कमिट किया जा चुका है। यह फंड किसी सरकारी राहत पैकेज की तरह नहीं, बल्कि एक प्राइवेट इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा, जिसमें ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, परिवहन और विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा। ईरान पहले मांग रहा था 400 अरब डॉलर रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने शुरुआत में अमेरिका से 400 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग की थी। अमेरिका की असहमति के बाद पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास फंड का विचार सामने आया। इसके तहत ऋण गारंटी, क्रेडिट लाइन और सीधे निवेश के जरिए ईरान की क्षतिग्रस्त परियोजनाओं को दोबारा खड़ा करने की योजना बनाई गई है। किन परियोजनाओं पर खर्च होगा पैसा? यह फंड ईरान के स्टील प्लांट, रिफाइनरी, एयरपोर्ट, परिवहन नेटवर्क, ऊर्जा परियोजनाओं और युद्ध में क्षतिग्रस्त अन्य बुनियादी ढांचों के पुनर्निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे बड़ा सवाल अभी भी बाकी 300 अरब डॉलर का यह फंड फिलहाल केवल प्रस्तावित स्तर पर है। इसके अस्तित्व में आने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम और बाध्यकारी समझौते का होना जरूरी है। साथ ही यह भी देखना होगा कि क्या ईरान समझौते की सभी शर्तों का पालन कर पाएगा और क्या खाड़ी देश एवं वैश्विक निवेशक वास्तव में इतनी बड़ी राशि निवेश करने के लिए तैयार होंगे। यदि यह योजना सफल होती है, तो यह न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की भू-राजनीति और ऊर्जा बाजार पर भी गहरा प्रभाव डाल सकती है।
एवियन (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखना और नाविकों की रक्षा करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के उच्चस्तरीय सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। यह सत्र ‘नई साझेदारियां विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करने’ विषय पर आयोजित किया गया था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता मौजूद थे। पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों का स्वागत, संघर्ष पर जताई चिंता प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हम पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं, लेकिन इस संघर्ष के कारण क्षेत्र के हमारे मित्र देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री व्यापार में आई बाधाओं का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।" उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं में कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है और ऐसे में समुद्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है। भारतीय नाविकों की मौत का किया उल्लेख प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "कई भारतीय नागरिकों की मृत्यु हुई है। वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी भय के अपना काम कर सकें।" जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीब 16 महीनों बाद मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। ओमान की खाड़ी की घटना के बाद बढ़ी चिंता प्रधानमंत्री का यह बयान ओमान की खाड़ी में हुई उस घटना के बाद आया है, जिसमें तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी। यह हादसा उस समय हुआ जब अमेरिकी बलों ने पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर 'सेटेबेलो' के खिलाफ कार्रवाई की थी। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने आरोप लगाया था कि यह टैंकर ईरान से तेल लेकर जा रहा था और अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। जहाज पर कुल 28 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 24 भारतीय, दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी नागरिक शामिल थे। कार्रवाई के दौरान आदित्य शर्मा, पटनाला सुरेश और शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई थी। वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा वाणिज्यिक माल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजरानी गतिविधियों पर खतरा बढ़ गया है। हाल के दिनों में भारतीय चालक दल वाले कई वाणिज्यिक जहाज अलग-अलग घटनाओं की चपेट में आ चुके हैं, जिससे नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं। 'दाता-प्राप्तकर्ता' मॉडल से आगे बढ़ने की जरूरत: मोदी जी7 के आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक सहयोग अब पारंपरिक 'दाता और प्राप्तकर्ता' मॉडल से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशों के बीच संबंध समानता, साझी जिम्मेदारी और आपसी विश्वास पर आधारित होने चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' यानी 'मानवता सर्वोपरि' के सिद्धांत पर चला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन, ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस, मिशन लाइफ और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर टिकाऊ और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। 'वसुधैव कुटुंबकम' भारत की विदेश नीति का आधार प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की वैश्विक साझेदारी की सोच 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन से प्रेरित है, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और सामूहिक विकास के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत की जी7 में 13वीं भागीदारी जी7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं- अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा- का समूह है। यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में भाग लेता है। भारत इसका सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल होता रहा है। इस बार भारत की जी7 में साझेदार देश के रूप में 13वीं भागीदारी रही, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सातवीं बार इस मंच पर पहुंचे हैं।
डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर बढ़ी अतिरिक्त उत्पाद शुल्क दर पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) यानी विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल निर्यात पर लगने वाला शुल्क 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं ATF निर्यात पर टैक्स 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। नई दरें 16 जून 2026 से लागू हो गई हैं। पेट्रोल निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं सरकार ने पेट्रोल निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है। पेट्रोल पर पहले की तरह 1.5 रुपये प्रति लीटर की दर से निर्यात शुल्क लागू रहेगा। इस फैसले से संकेत मिलता है कि सरकार फिलहाल डीजल और विमानन ईंधन की घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देना चाहती है, जबकि पेट्रोल के मामले में मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखा गया है। आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा तत्काल असर सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा उत्पाद शुल्क दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि इस फैसले का सीधा असर फिलहाल पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों पर नहीं पड़ेगा और आम उपभोक्ताओं को तत्काल किसी अतिरिक्त बोझ का सामना नहीं करना होगा। क्यों बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स? सरकार ने मार्च 2026 में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विंडफॉल टैक्स व्यवस्था को फिर से लागू किया था। उस समय क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया था। सरकार हर पंद्रह दिन में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन की समीक्षा कर निर्यात शुल्क में बदलाव करती रही है। 16 मई 2026 को पेट्रोल निर्यात को भी इस व्यवस्था के दायरे में शामिल किया गया था। घरेलू ईंधन आपूर्ति सुरक्षित रखना है लक्ष्य सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, तब रिफाइनरी कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए निर्यात बढ़ाने की कोशिश करती हैं। ऐसे में घरेलू आपूर्ति प्रभावित होने का जोखिम रहता है। इसी वजह से सरकार अतिरिक्त शुल्क लगाकर अत्यधिक निर्यात को नियंत्रित करना चाहती है। रिफाइनर कंपनियों की कमाई पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल और ATF निर्यात शुल्क बढ़ने से रिफाइनिंग कंपनियों के निर्यात लाभ में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। भारत दुनिया के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में शामिल है और बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है। ऐसे में सरकार संतुलन बनाते हुए घरेलू जरूरतों और वैश्विक व्यापार दोनों पर नजर बनाए हुए है। आगे क्या होगा? विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें और संभावित ईरान-अमेरिका समझौते की दिशा आने वाले दिनों में सरकार की कर नीति को प्रभावित कर सकती है। यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता जारी रहती है, तो विंडफॉल टैक्स में आगे भी संशोधन देखने को मिल सकता है।
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर बनी सहमति का भारत ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उम्मीद जताई कि इस पहल से पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और कई देशों में लोगों की जान भी गई है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति, स्थिरता, व्यापार और आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि शेष विवादित मुद्दों पर बातचीत के माध्यम से एक टिकाऊ और व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ना आवश्यक है। 19 जून को हो सकते हैं औपचारिक हस्ताक्षर मध्यस्थ देशों और अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर आगे अलग दौर की बातचीत होगी। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की घोषणा की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते पर सहमति की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जलडमरूमध्य को तत्काल प्रभाव से खोला जाएगा। अमेरिका पहले भी संकेत दे चुका था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पुनः खुलने के साथ ईरान पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है, ताकि वह तेल निर्यात बढ़ाकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सके। ईरान ने कहा- औपचारिक हस्ताक्षर के बाद ही होगा अमल ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने समझौते पर सहमति की पुष्टि करते हुए कहा कि तेहरान औपचारिक हस्ताक्षर से पहले समझौते को लागू नहीं करेगा। उनके अनुसार, कतर की मध्यस्थता में 14 घंटे से अधिक चली बातचीत के बाद दोनों पक्ष इस सहमति तक पहुंचे। ईरानी सरकारी मीडिया ने इस घटनाक्रम को अमेरिका के साथ युद्ध समाप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर हस्ताक्षर से पहले ईरानी मीडिया ने 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) का कथित मसौदा सार्वजनिक करने का दावा किया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में अमेरिका की ओर से ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कम करने जैसे कई बड़े प्रावधान शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इन दावों के कुछ हिस्सों पर अलग रुख अपनाते हुए कहा है कि ईरान की अवरुद्ध संपत्तियां तभी जारी की जाएंगी, जब तेहरान समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा। 24 अरब डॉलर जारी करने का दावा, 12 अरब डॉलर पहले देने की शर्त मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, 60 दिन की प्रस्तावित वार्ता अवधि के दौरान ईरान की कुल 24 अरब डॉलर की अवरुद्ध संपत्तियां जारी की जाएंगी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसमें से आधी राशि यानी 12 अरब डॉलर बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान को उपलब्ध कराई जाएगी। अमेरिकी अधिकारियों ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा है कि यह "प्रदर्शन के बदले भुगतान" (Payment for Performance) का मॉडल होगा और ईरान के दायित्वों के पालन के बाद ही वित्तीय रियायतें दी जाएंगी। प्रस्तावित 14 बिंदुओं में क्या-क्या शामिल? ईरानी मीडिया के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं: लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तत्काल और स्थायी रूप से समाप्त होंगे। अमेरिका ईरान की संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की प्रतिबद्धता देगा। अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिनों के भीतर समाप्त की जाएगी। अमेरिका ईरान के आसपास तैनात सैन्य बलों की वापसी शुरू करेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य को 30 दिनों के भीतर फिर से खोला जाएगा। ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को निलंबित किया जाएगा। ईरान को अपने वित्तीय संसाधनों तक पूर्ण पहुंच दी जाएगी। अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर तक की योजनाएं पेश करेंगे। परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों पर अंतिम समाधान के लिए 60 दिनों की वार्ता होगी। ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की प्रतिबद्धता दोहराएगा। वार्ता अवधि में अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा और अतिरिक्त सैन्य बल नहीं भेजेगा। 24 अरब डॉलर की अवरुद्ध संपत्तियां चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएंगी। समझौते की निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग मैकेनिज्म बनाया जाएगा। ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रतिरोधी समूहों को समर्थन जैसे मुद्दों को वार्ता के एजेंडे से बाहर रखा जाएगा। ट्रंप की घोषणा के बाद बढ़ी चर्चा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बन गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोले जाने की दिशा में प्रगति हुई है। ट्रंप ने कहा कि यह समझौता पश्चिम एशिया में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य बनाने में मदद करेगा। ईरान ने रखी अपनी शर्तें ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि अंतिम समझौते की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी, जब अमेरिका युद्ध समाप्त करने, नाकेबंदी हटाने और फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करने जैसे अपने वादों को पूरा करेगा। पाकिस्तान ने भी किया समझौते का दावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो चुका है और उस पर औपचारिक हस्ताक्षर स्विट्जरलैंड में किए जाएंगे। उन्होंने इस प्रक्रिया में कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की मध्यस्थता भूमिका की सराहना की। इजरायल की चुप्पी बनी चर्चा का विषय जहां कई देशों ने प्रस्तावित समझौते का स्वागत किया है, वहीं इजरायल की ओर से इस पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इजरायल लंबे समय से ईरान और उसके समर्थित समूहों को लेकर अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्रमुख मुद्दा बताता रहा है।
भारत समेत वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर साफ दिखाई देने लगा है। एक दिन की राहत भरी तेजी के बाद बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों की चिंता बढ़ने से शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,300 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 803.13 अंक यानी 1.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,846.71 अंक पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 209.35 अंक यानी 0.89 प्रतिशत गिरकर 23,274.20 अंक पर पहुंच गया। इससे पहले लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद मंगलवार को बाजार में मामूली रिकवरी देखने को मिली थी, लेकिन वैश्विक तनाव ने फिर से निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। आईटी शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 27 लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। आईटी दिग्गज कंपनियों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। सबसे अधिक गिरावट टीसीएस के शेयर में दर्ज की गई, जो 4 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। इसके अलावा इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, आईटीसी, बजाज फाइनेंस और अन्य बड़े शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा। हालांकि कुछ शेयरों ने बाजार को सीमित सहारा देने की कोशिश की। भारती एयरटेल, टाटा स्टील और एशियन पेंट्स में मजबूती देखने को मिली, लेकिन यह बढ़त समग्र बाजार की कमजोरी को संतुलित नहीं कर सकी। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी कमजोरी का माहौल रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 0.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स में आईटी सबसे कमजोर रहा, जहां 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा रियल्टी और पीएसयू बैंकिंग शेयरों में भी दबाव बना रहा। दूसरी ओर मेटल सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। रुपया भी कमजोर, डॉलर के मुकाबले फिसला शेयर बाजार में गिरावट के साथ-साथ भारतीय मुद्रा पर भी दबाव दिखाई दिया। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी के साथ खुला और 95.45 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले कारोबारी सत्र में भी रुपया 17 पैसे की गिरावट के साथ 95.36 पर बंद हुआ था। आखिर बाजार में गिरावट की वजह क्या है? बाजार की इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के बयान ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। उनके अनुसार ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बड़े हिस्से में माइन बिछा दी है और कुछ वाणिज्यिक जहाजों पर फायरिंग की घटनाएं भी सामने आई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। ऐसे में वहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल तनाव बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 96.90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव बढ़ा सकती हैं। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। आगे निवेशकों की नजर किस पर रहेगी? विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम बाजार की चाल तय करेंगे। यदि तनाव और बढ़ता है तो शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। वहीं किसी सकारात्मक कूटनीतिक समाधान की खबर बाजार को राहत दे सकती है।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाजा पट्टी के 70 प्रतिशत हिस्से पर सैन्य नियंत्रण स्थापित करने का संकेत देकर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। वेस्ट बैंक में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना धीरे-धीरे गाजा के बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में ले रही है और अब सैन्य दबाव को और बढ़ाया जाएगा। नेतन्याहू बोले- “एक-एक कदम आगे बढ़ेंगे” कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, “हम इस समय हमास को दबा रहे हैं। पहले हम गाजा के 50 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित कर रहे थे, अब यह बढ़कर 60 प्रतिशत हो चुका है।” उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने सैन्य नियंत्रण को और बढ़ाने का आदेश दिया है। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने “100 प्रतिशत” कब्जे की मांग करते हुए नारे लगाए। इस पर नेतन्याहू ने जवाब दिया, “एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं। पहले 70 प्रतिशत तक पहुंचते हैं। फिलहाल वहीं से शुरुआत करते हैं।” सीजफायर समझौते के खिलाफ माना जा रहा कदम विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि इजराइल का यह कदम अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते की शर्तों के विपरीत है। समझौते के तहत इजराइली सेना को एक तय “येलो लाइन” के पीछे हटना था। उस समय गाजा का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा इजराइली नियंत्रण में माना जा रहा था। हालांकि हमास का आरोप है कि इजराइल धीरे-धीरे इस सीमा को आगे बढ़ा रहा है और अब गाजा के लगभग 60 से 64 प्रतिशत हिस्से पर उसका नियंत्रण हो चुका है। शांति वार्ता ठप, दोनों पक्ष आमने-सामने इजराइल और हमास के बीच जारी शांति योजना के अगले चरण में हमास के हथियार छोड़ने और इजराइली सेना की वापसी का प्रस्ताव शामिल है। लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत फिलहाल पूरी तरह ठप पड़ी हुई है। इजराइल का कहना है कि वह हमास को पूरी तरह कमजोर किए बिना पीछे नहीं हटेगा, जबकि हमास इजराइली सैन्य कार्रवाई को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बता रहा है। गाजा में मानवीय संकट और गहरा सकता है विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इजराइल गाजा के 70 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तो वहां मानवीय संकट और गंभीर हो सकता है। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी स्थिति में गाजा की करीब 22 लाख आबादी को कुल जमीन के एक-तिहाई से भी कम हिस्से में रहने को मजबूर होना पड़ सकता है। युद्ध, बमबारी और लगातार विस्थापन के कारण गाजा के ज्यादातर इलाके पहले ही तबाह हो चुके हैं। “हर खाली जगह पर टेंट लगे हैं” यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विजिटिंग फेलो मुहम्मद शेहादा ने कहा कि हालात पहले से ही बेहद खराब हैं। उन्होंने कहा, “हर खाली जगह पर विस्थापित परिवारों के टेंट लगे हुए हैं। अगर इलाका और छोटा हो गया, तो बड़ी संख्या में लोगों के पास रहने की जगह नहीं बचेगी।” सीजफायर के बाद भी जारी हैं हमले इजराइल और हमास के बीच अक्टूबर 2025 में युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद गाजा में सैन्य कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक करीब 900 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इजराइली सेना ने “येलो लाइन” के आसपास के बड़े इलाके को नो-मैन्स-लैंड घोषित कर दिया है, जहां किसी भी गतिविधि को खतरा मानते हुए कार्रवाई की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई चिंता संयुक्त राष्ट्र की हालिया ब्रीफिंग में उत्तरी गाजा के जबालिया इलाके में इजराइली टैंकों की बढ़ती आवाजाही और ड्रोन हमलों को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध हलचल को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों में भय और असुरक्षा बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की संभावना गाजा में बढ़ती सैन्य कार्रवाई और संभावित क्षेत्रीय कब्जे की रणनीति को लेकर इजराइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है। मानवाधिकार संगठनों और कई देशों ने पहले भी गाजा में नागरिकों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो पश्चिम एशिया में संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
पटना, एजेंसियां। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव शुक्रवार 29 मई को रात 11 बजे सिंगापुर के लिए रवाना होंगे। वे दिल्ली से सिंगापुर के लिए फ्लाईट पकड़ेंगे। जानकारी के अनुसार लालू प्रसाद रूटीन हेल्थ चेकअप के लिए सिंगापुर जा रहे हैं। उनकी एक बेटी रोहिणी आचार्य सिंगापुर में ही रहती है। लालू प्रसाद 10 जून तक भारत लौट आयेंगे। 11 जून को लालू प्रसाद का जन्मदिन है, लिहाजा उनकी वापसी की तारीख 10 जून मानी जा रही है। रोहिणी की वापसी का प्रयास करेंगे चर्चा है कि सिंगापुर यात्रा के दौरान लालू प्रसाद अपनी पुत्री रोहिणी आचार्य को वापस पार्टी में लाने का भी प्रयास करेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान रोहिणी आचार्य पार्टी से और अपने भाई तेजस्वी यादव से नाराज हो गयीं थी। लालू प्रसाद रोहिणी को राजद में संगठन के किसी पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इधर, एक चर्चा यह भी है कि लालू प्रसाद के बडे बेटे तेजप्रताप यादव को पार्टी में वापस लाया जायेगा। उन्हें बिहार विधान परिषद में एमएसली बनाया जा सकता है। सन आफ लालू प्रसाद ने की पुष्टि इधर, लालू प्रसाद के बेहद करीबी और सन आफ लालू प्रसाद के नाम से चर्चित राजद नेता इरफान अहमद अंसारी ने लालू प्रसाद के सिंगापुर जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि रोहिणी आचार्या को पार्टी में वापस लाया जा रहा है।
कांग्रेस ने इज़राइल और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी का इज़राइल के प्रति कथित रूप से एकतरफा समर्थन भारत की पारंपरिक विदेश नीति, मानवीय मूल्यों और ऐतिहासिक रुख के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति, संवाद और फिलिस्तीनी अधिकारों के समर्थन की नीति पर चलता रहा है, लेकिन मौजूदा सरकार इस परंपरा से दूर जाती दिखाई दे रही है। नेतन्याहू के कथित बयान का हवाला देकर कांग्रेस ने उठाए सवाल यह राजनीतिक विवाद उस समय और बढ़ गया जब जयराम रमेश ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के एक कथित बयान का हवाला दिया। कांग्रेस नेता के अनुसार, नेतन्याहू ने एक सम्मेलन में कहा था कि दुनिया के कई देशों में इज़राइल की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन भारत अब भी उसके समर्थन में खड़ा है। जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इज़राइल के सबसे मजबूत वैश्विक समर्थकों में शामिल नजर आते हैं। कांग्रेस ने लगाया गाजा और ईरान मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व की लक्षित हत्या की कभी सार्वजनिक निंदा नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि गाजा में जारी इज़राइली सैन्य अभियान, लेबनान पर हमलों और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के कथित विस्थापन जैसे मुद्दों पर भी केंद्र सरकार ने खुलकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जयराम रमेश ने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण की अपेक्षा की जाती है। फरवरी 2026 की मुलाकात का भी किया जिक्र कांग्रेस नेता ने अपने बयान में प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की फरवरी 2026 में हुई मुलाकात का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस मुलाकात के कुछ समय बाद इज़राइल और अमेरिका ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए। कांग्रेस ने सीधे तौर पर इन घटनाओं के बीच किसी संबंध का दावा नहीं किया, लेकिन सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल जरूर उठाए। ‘यह पूरे भारत की राय नहीं’, कांग्रेस ने कहा जयराम रमेश ने कहा कि नेतन्याहू का यह कहना कि भारत इज़राइल के समर्थन में खड़ा है, पूरी तरह सही नहीं है। उनके मुताबिक, यह प्रधानमंत्री मोदी और उनके राजनीतिक तंत्र का नजरिया हो सकता है, लेकिन देश के करोड़ों लोग फिलिस्तीनी जनता के प्रति सहानुभूति रखते हैं और पश्चिम एशिया में शांति तथा न्यायपूर्ण समाधान के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि भारत की जनता हमेशा मानवाधिकार, शांति और संतुलित कूटनीति के साथ खड़ी रही है। केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख बताने की मांग कांग्रेस ने केंद्र सरकार से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, गाजा की स्थिति, ईरान-इज़राइल तनाव और फिलिस्तीनी मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि भारत को अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाए रखना चाहिए और किसी भी अंतरराष्ट्रीय संघर्ष में मानवीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देनी चाहिए। सरकार की ओर से अभी नहीं आया जवाब कांग्रेस के आरोपों पर केंद्र सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत की विदेश नीति को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
Crisil Report: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारतीय कंपनियों की कमाई पर भी दिखाई देने लगा है। रेटिंग एजेंसी CRISIL की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में व्यवधान लंबे समय तक जारी रहता है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय कंपनियों के परिचालन लाभ (Operating Margin) में करीब 200 बेसिस पॉइंट यानी 2 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती ईंधन लागत, महंगा परिवहन, कमजोर होता रुपया और सप्लाई चेन की समस्याएं कंपनियों की लाभप्रदता पर दबाव बढ़ा रही हैं। 34 प्रमुख सेक्टरों का किया गया अध्ययन क्रिसिल ने 34 ऐसे उद्योग क्षेत्रों का स्ट्रेस टेस्ट किया, जो उसकी रेटेड कॉर्पोरेट ऋण का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा हैं। एजेंसी ने अनुमान लगाया है कि पश्चिम एशिया में संकट की स्थिति पूरे वित्त वर्ष में करीब नौ महीने तक बनी रह सकती है। रिपोर्ट में यह भी माना गया है कि इस दौरान कच्चे तेल की औसत कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल तक रह सकती है, जो पहले के 95 डॉलर प्रति बैरल के अनुमान से काफी अधिक है। कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी लागत नियंत्रण क्रिसिल रेटिंग्स के प्रबंध निदेशक Subodh Rai के अनुसार, कंपनियों के लिए बिक्री बढ़ाने से ज्यादा मुश्किल लागत और मुनाफे को संभालना होगा। उन्होंने कहा कि जिन 34 क्षेत्रों का अध्ययन किया गया, उनमें से 22 सेक्टरों की परिचालन लाभप्रदता में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ सकती है। इसकी मुख्य वजह बढ़ती इन्वेंट्री लागत और उपभोक्ताओं पर पूरा लागत बोझ तुरंत न डाल पाना है। किन कारणों से बढ़ रहा दबाव? पश्चिम एशिया संकट के चलते कई कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन में बदलाव करना पड़ रहा है। इसके अलावा उन्हें निम्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है- ईंधन और माल ढुलाई लागत में वृद्धि शिपमेंट में देरी कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रुपये में कमजोरी वैश्विक व्यापार मार्गों में बाधाएं इन कारणों से उत्पादन लागत बढ़ रही है और कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हो रहा है। राहत की बात: मजबूत बैलेंस शीट हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय कंपनियों की वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में काफी मजबूत है। घरेलू मांग, सरकारी पूंजीगत खर्च (Capex) और बेहतर बैलेंस शीट उन्हें इस संकट से निपटने में मदद कर सकती हैं। पिछले 10 वर्षों में भारत की कंपनियों का औसत कर्ज अनुपात (Gearing Ratio) घटकर 0.5 गुना रह गया है, जबकि ब्याज भुगतान क्षमता (Interest Coverage Ratio) दोगुनी होकर 5 गुना से अधिक हो गई है। केवल कुछ सेक्टरों की क्रेडिट गुणवत्ता पर असर क्रिसिल का अनुमान है कि मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद अधिकांश कंपनियां अपने क्रेडिट प्रोफाइल को स्थिर बनाए रखेंगी। एजेंसी के अनुसार केवल 8 सेक्टर, जो कुल रेटेड कॉर्पोरेट ऋण का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा हैं, उनकी क्रेडिट गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। MSME क्षेत्र के लिए राहत रिपोर्ट में सरकार की नई ECLGS 5.0 (Emergency Credit Line Guarantee Scheme) की भी सराहना की गई है। क्रिसिल का मानना है कि यह योजना विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को राहत देने में मदद करेगी, क्योंकि इस वर्ग की कंपनियों के पास बड़े कॉर्पोरेट्स की तुलना में कम वित्तीय सुरक्षा होती है। भारत इंक का आउटलुक स्थिर, लेकिन सतर्क क्रिसिल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत इंक की समग्र क्रेडिट गुणवत्ता फिलहाल स्थिर बनी हुई है। हालांकि कंपनियों को आने वाले महीनों में लागत प्रबंधन, आपूर्ति श्रृंखला और नकदी प्रवाह पर विशेष ध्यान देना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं और भू-राजनीतिक तनाव जारी रहता है, तो कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
पश्चिम एशिया इस समय बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है, जहां एक तरफ युद्धविराम और बातचीत की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी ओर हिंसा और अविश्वास कम होने का नाम नहीं ले रहे। इज़राइल और लेबनान के बीच लागू 10 दिन के युद्धविराम के बावजूद छिटपुट हमले जारी हैं, जिससे हालात पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाए हैं। दक्षिण लेबनान में इज़राइली हमले, 6 घायल दक्षिण लेबनान में इज़राइली हमले में कम से कम छह लोग घायल हो गए हैं। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला सीमा के पास हुआ, जहां पहले से ही तनाव बना हुआ है। युद्धविराम लागू होने के बावजूद ऐसी घटनाएं शांति प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही हैं। गाजा में फिर बढ़ी हिंसा गाज़ा पट्टी में हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। उत्तरी तट पर इज़राइली नौसेना की गोलीबारी में एक फलस्तीनी महिला की मौत हो गई। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सोमवार को अलग-अलग हमलों में कुल पांच लोगों की जान गई है। लगातार हो रही हिंसा से क्षेत्र में मानवीय संकट और गहरा सकता है। ईरान का सख्त रुख–‘धमकियों में बातचीत नहीं’ इस बीच ईरान ने अमेरिका के साथ संभावित वार्ता को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ईरानी नेतृत्व ने साफ कहा है कि वह किसी भी तरह की धमकी या दबाव के माहौल में बातचीत स्वीकार नहीं करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और समुद्री नाकाबंदी को लेकर टकराव चरम पर है। कूटनीतिक कोशिशें जारी, लेकिन अनिश्चितता बरकरार संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें जारी हैं, लेकिन हालिया घटनाओं ने वार्ता की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है। क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां शांति बहाल करने की कोशिश कर रही हैं, मगर जमीनी हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं।
मेष राशि : बाहर का और खुला खाना खाते वक़्त ख़ास तौर पर बचाव पर ध्यान देने की ज़रूरत है. हालाँकि बिना वजह तनाव न लें, क्योंकि यह आपको मानसिक कष्ट दे सकता है. आपका धन कहां खर्च हो रहा है इसपर आपको नजर बनाए रखने की जरुरत है नहीं तो आने वाले समय में आपको परेशानी हो सकती है. काम का तनाव आपके दिमाग़ पर छा सकता है जिसकी वजह से परिवार और मित्रों के लिए वक़्त नहीं निकाल सकेंगे. आज आप अपने जीवन की परेशानियों को अपने संगी से साझा करना चाहेंगे लेकिन वो अपनी परेशानियों के बारें में बता के आपको और ज्यादा परेशान कर देंगे. ऐसे लोगों से साथ जुड़ें जो स्थापित हैं और भविष्य के रुझानों को समझने में आपकी मदद कर सकते हैं. बातचीत में कुशलता आज आपका मज़बूत पक्ष साबित होगी. आपके और आपके जीवनसाथी के बीच कोई बाहरी व्यक्ति दूरी पैदा करने की कोशिश कर सकता है, लेकिन आप दोनों चीज़ें संभाल लेंगे। उपाय :- पारिवारिक जीवन में खुशहाली के लिए पुरुष मस्तक पर लाल टीके का व गृहणियाँ लाल सिंदूर का प्रयोग करें। वृषभ राशि : मानसिक तौर पर आप स्थिर महसूस नहीं करेंगे- इसलिए इस बात का ख़याल रखें कि दूसरों के सामने आप कैसे बर्ताव करते और बोलते हैं. माता-पिता की मदद से आप आर्थिक तंगी से बाहर निकलने में क़ामयाब रहेंगे. शाम के वक़्त अचानक मिली कोई अच्छी ख़बर पूरे परिवार की ख़ुशी और उत्साह की वजह साबित होगी. आज आपकी मुस्कान बेमानी है, हँसी में वो खनक नहीं है, दिल धड़कने में आनाकानी कर रहा है; क्योंकि आप किसी ख़ास के साथ की कमी महसूस कर रहे हैं. कुछ सहकर्मी कई अहम मुद्दों पर आपकी कार्यशैली से नाख़ुश होंगे, लेकिन यह वे आपको बताएंगे नहीं. अगर आपको लगता है कि परिणाम आपकी उम्मीद के मुताबिक़ नहीं आ रहे हैं, तो अपनी योजनाओं का फिर से विश्लेषण कर उनमें सुधार लाना बेहतर रहेगा. आज घर के लोगों के साथ बातचीत करते दौरान आपके मुंह से कोई ऐसी बात निकल सकती है जिससे घर के लोग नाराज हो सकते हैं. इसके बाद घर के लोगों को मनाने में आपका काफी समय जा सकता है. अगर आप अपने जीवनसाथी की छोटी-छोटी बातों को नज़रअन्दाज़ करेंगे, तो उन्हें बुरा लग सकता है। उपाय :- खीर का सेवन करने से स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। मिथुन राशि : बहुत ज़्यादा रोमांच और दीवानगी की ऊँचाई आपके तंत्रिका-तंत्र को नुक़सान पहुँचा सकती है. इन दिक़्क़तों से बचने के लिए अपने जज़्बात क़ाबू में रखें. आज आपके माता-पिता में से कोई आपको धन की बचत करने को लेकर लेक्चर दे सकता है, आपको उनकी बातोें को बहुत गौर से सुनने की जरुरत है नहीं तो आने वाले समय में परेशानी आपको ही उठानी पड़ेगी. अपने घर के वातावरण में कुछ बदलाव करने से पहले आपको सभी की राय जानने की कोशिश करनी चाहिए. काम के दबाव के चलते मानसिक उथल-पुथल और परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. दिन के उत्तरार्ध में ज़्यादा तनाव न लें और आराम करें. आप दफ़्तर में माहौल में बेहतरी और कामकाज के स्तर में सुधार को महसूस कर सकते हैं. अगर आपके पास हालात से उबरने के लिए दृढ़ इच्छा-शक्ति है, तो कुछ भी असंभव नहीं है. आज आपका जीवनसाथी आपकी सेहत के प्रति असंवेदनशील हो सकता है। उपाय :- अपने प्रेमी/प्रेमिका को सुगन्धित परफ्यूम या इत्र गिफ्ट करें इससे लव लाइफ अच्छी रहेगी। कर्क राशि : ख़ुद को किसी रचनात्मक काम में लगाएँ. मानसिक शांति के लिए आपकी खाली बैठने की आदत ख़तरनाक साबित हो सकती है. हालाँकि आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा, लेकिन पैसे का लगातार पानी की तरह बहते जाना आपकी योजनाओं में रुकावट पैदा कर सकता है. अपने सामाजिक जीवन को दरकिनार न करें. अपनी व्यस्त दिनचर्या में से थोड़ा-सा समय निकालकर अपने परिवार के साथ किसी आयोजन में शिरकत करें. यह न सिर्फ़ आपका दबाव कम करेगा, बल्कि आपकी झिझक भी मिटा देगा. आज आपकी कोई बुरी आदत आपके प्रेमी को बुरी लग सकती है और वो आपसे नाराज हो सकते हैं. काम पर लोगों के साथ मेलजोल में समझ और धैर्य से सावधानी बरतें. खाली समय में आज आप अपने मोबाइल पर कोई वेब सीरीज देख सकते हैं. आज आप अपने जीवनसाथी के साथ सैर-सपाटे का मज़ा ले सकते हैं. साथ में समय गुज़ारने का यह बढ़िया मौक़ा है। उपाय :- बड़/बरगद के पेड को मीठे दूध से सींचे, इससे नौकरी/बिज़नेस में तरक्की होगी। सिंह राशि : आँखों के मरीज़ प्रदूषित जगहों पर जाने से बचें, क्योंकि धूँआ आपकी आँखों को और नुक़सान पहुँचा सकता है. अगर मुमकिन हो तो सूरज की तेज़ रोशनी से भी बचे. रुका हुआ धन मिलेगा और आर्थिक हालात में सुधार आएगा. परिवार के सदस्य कई चीज़ों की मांग कर सकते हैं. आज प्यार के मामले में सामाजिक बंधन तोड़ने से बचें. नए ग्राहकों से बात करने के लिए बेहतरीन दिन है. आप अपनी छुपी ख़ासियत का इस्तेमाल कर दिन को बेहतरीन बनाएंगे. आपके जीवनसाथी की सुस्ती आपके कई कामों पर पानी फेर सकती है। उपाय :- बहन, बेटी, मौसी, बुआ या साली की सहायता करना पारिवारिक जीवन के लिए शुभ है। कन्या राशि : दोस्त या सहकर्मी का स्वार्थी बर्ताव आपका मानसिक सुकून ख़त्म कर सकता है. अतिरिक्त धन को रिअल एस्टेट में निवेश किया जा सकता है. पढ़ाई की क़ीमत पर घर से ज़्यादा देर तक बाहर रहना आपको माता-पिता के ग़ुस्से का शिकार बना सकता है. करिअर के लिए योजना बनाना उतना ही आवश्यक है, जितना कि खेलना-कूदना. इसलिए माता-पिता को ख़ुश करने के लिए दोनों में संतुलन बनाना ज़रूरी है. अपने प्रिय के बिना समय बिताने में दिक़्क़त महसूस करेंगे. आज फ़ायदा हो सकता है, बशर्ते आप अपनी बात भली-भांति रखें और काम में लगन व उत्साह दिखाएँ. अगर आप किसी विवाद में उलझ जाएँ तो तल्ख़ टिप्पणी करने से बचिए. आपका जीवनसाथी आपसे नाराज़ हो सकता है, क्योंकि आप उनसे कोई बात साझा करना भूल गए थे। उपाय :- काले व सफेद तिल बराबर मात्रा में लेकर चितकबरे कपड़े में बांधकर अपने पास रखने से हेल्थ अच्छी रहेगी। तुला राशि : आज के दिन आराम करना ज़रूरी साबित होगा, क्योंकि आप हाल के दिनों में भारी मानसिक दबाव से गुज़रे हैं. नयी गतिविधियाँ और मनोरंजन आपके लिए विश्राम करने में सहायक सिद्ध होंगे. आज धन आपके हाथ में नहीं टिकेगा, आपको धन संचय करने में आज बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. घर वालों के साथ मिलकर कुछ अलग और रोमांचक किया जाना चाहिए. आपको प्यार में ग़म का सामना करना पड़ सकता है. अपनी कोशिशों को सही दिशा दें और आपको असाधारण क़ामयाबी से नवाज़ा जाएगा. मुमकिन है कि आपके अतीत से जुड़ा कोई शख़्स आज आपसे संपर्क करेगा और इस दिन को यादगार बना देगा. जीवनसाथी से बहुत ज़्यादा उम्मीदें रखना आपको वैवाहिक जीवन में उदासी की तरफ़ ले जा सकता है। उपाय :- अच्युतं केशवं विष्णुं हरिं सत्यं जनार्दनम्. हंसं नारायणं चैवमेतन्नमाष्टकम् पठेत.. विष्णु जी के इन 8 नामों का जाप करने से आर्थिक उन्नति होगी। वृश्चिक राशि : स्वास्थ्य के लिहाज़ से बहुत अच्छा दिन है. आपकी ख़ुशमिज़ाजी ही आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी करेगी. नया आर्थिक क़रार अंतिम रूप लेगा और धन आपकी तरफ़ आएगा. आपको अपनी भावनाओं को नियन्त्रित करने में कठिनाई होगी, लेकिन आस-पास के लोगों से झगड़ा न करें नहीं तो आप अकेले रह जाएंगे. अटके कामों के बावजूद रोमांस और बाहर घूमना-फिरना आपके दिलो-दिमाग़ पर छाया रहेगा. सहकर्मियों और वरिष्ठों के पूरे सहयोग के चलते दफ़्तर में काम तेज़ रफ़्तार पकड़ लेगा. इस राशि के जातक आज लोगों से मिलने से ज्यादा अकेले में वक्त बिताना पसंद करेंगे. आज आपका खाली समय घर की सफाई में बीत सकता है. आप और आपका जीवनसाथी मिलकर वैवाहिक जीवन की बेहतरीन यादें रचेंगे। उपाय :- गणेश या विष्णु जी के मंदिर में कांसे की ज्योत दान में देने से पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा। धनु राशि : अपने जीवन को चिर-स्थायी न मानें और जीवन के प्रति सजगता को अपनाएँ. निवेश के लिए अच्छा दिन है, लेकिन उचित सलाह से ही निवेश करें. सामाजिक गतिविधियाँ मज़ेदार रहेंगी, लेकिन अपने रहस्य किसी के सामने उजागर न करें. फूल देकर अपने प्यार का इज़हार करें. भागीदार आपकी योजनाओं और व्यावसायिक ख़यालों के प्रति उत्साही होंगे. सफ़र के लिए दिन ज़्यादा अच्छा नहीं है. मुमकिन है कि आज आपका जीवनसाथी ख़ूबसूरत शब्दों में यह बताए कि आप उनके लिए कितने क़ीमती हैं। उपाय :- स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए खाना खाते समय तांबे या सोने (अगर संभव हो तो) के चम्मच का ही प्रयोग करें। मकर राशि : कुछ लोग सोच सकते हैं कि आप नया सीखने के लिए काफ़ी उम्रदराज़ हो चुके हैं- लेकिन यह सच्चाई से बहुत दूर है- आप अपने तेज़ और सक्रिय दिमाग़ की वजह से कुछ भी आसानी से सीख सकते हैं. संदिग्ध आर्थिक लेन-देन में फँसने से सावधान रहें. प्यार, मेलजोल और आपसी जुड़ाव में इज़ाफा होगा. आपको अपने प्रिय को ख़ुद के हालात समझाने में दिक़्क़त महसूस होगी. तब तक कोई वादा न करें, जब तक कि आप पूरी तरह उसे पूरा करने में सक्षम न हों. अगर आप अपने घर से बाहर रहकर अध्ययन या नौकरी करते हैं तो आज के दिन आप खाली समय में अपने घर वालों से बात कर सकते हैं. घर की किसी खबर को सुनकर आप भावुक भी हो सकते हैं. जन्मदिन भूलने जैसी किसी छोटी-सी बात को लेकर जीवनसाथी से तक़रार मुमकिन है. लेकिन अन्ततः सब ठीक हो जाएगा। उपाय :- आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए ॐ नीलवर्णाय विदमहे सैंहिकेयाय धीमहि तन्नों राहुः प्रचोदयात. इस मंत्र का 11 बार उच्चारण करें। कुम्भ राशि : अपना मूड बदलने के लिए सामाजिक मेलजोल का सहारा लें. आज बिना किसी की मदद के ही आप धन कमा पाने में सक्षम होंगे. शाम के समय अपने जीवनसाथी के साथ बाहर खाना या फ़िल्म देखना आपको सुकून देगा और ख़ुशमिज़ाज बनाए रखेगा. विवादित मुद्दों को उठाने से बचें, अगर आप आज 'डेट' पर जा रहे हैं तो. दफ़्तर में आपको कुछ ऐसा काम मिल सकता है, जिसे आप हमेशा से करना चाहते थे. आज आप अपने जीवनसाथी को सरप्राइज दे सकते हैं, अपने सारे कामों को छोड़कर आज आप उनके साथ वक्त बिता सकते हैं. अगर आपके जीवनसाथी की सेहत कर चलते किसी से मिलने की योजना रद्द हो जाए तो चिंता न करें, आप साथ में अधिक समय व्यतीत कर सकेंगे। उपाय :- प्लैटिनम की बनी कोई भी वस्तु अपने प्रेमी/प्रेमिका को गिफ्ट में देने से प्रेम सम्बन्ध मजबूत होंगे। मीन राशि : ख़याली पुलाव पकाने में वक़्त ज़ाया न करें. सार्थक कामों में लगाने के लिए अपनी ऊर्जा बचाकर रखें. पैसों की कमी आज घर में कलह की वजह बन सकती है, ऐसी स्थिति में अपने घर के लोगों से सोच-समझकर बात करें और उनसे सलाह लें. बुज़ुर्ग रिश्तेदार अपनी बेजा मांगों से आपको परेशान कर सकते हैं. अपने साथी को भावनात्मक तौर पर ब्लैकमेल करने से बचें. आपको कार्यक्षेत्र में अच्छे फल पाने के लिए अपने काम करने के तरीके पर गौर करने की जरुरत है नहीं तो आप बॉस की नजरों में आपकी नकारात्मक छवि बन सकती है. आज इस राशि के कुछ छात्र लेपटॉप या टीवी पर कोई मूवी देखकर अपना कीमती समय जाया कर सकते हैं. जीवनसाथी की ओर से जानबूझ कर भावनात्मक चोट मिल सकती है, जिसके चलते आप उदास हो सकते हैं। उपाय :- आर्थिक स्थिति बेहतर करने के लिए गाय को गुड खिलाएँ। कृपया ध्यान दें यद्यपि शुद्ध राशिफल की पूरी कोशिश रही है फिर भी इन राशिफलों में और आपकी कुंडली व राशि के ग्रहों के आधार पर आपके जीवन में घटित हो रही घटनाओं में कुछ अन्तर हो सकता है। ऐसी स्थिति में आप किसी ज्योतिषी से अवश्य सम्पर्क करें। किसी भी भिन्नता के लिए IDTV इन्द्रधनुष उत्तरदायी नहीं हैं।
पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर अपनी सक्रियता तेज कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 5 अप्रैल 2026 को ईरान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के शीर्ष नेताओं से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और ऊर्जा आपूर्ति पर चर्चा की। ईरानी विदेश मंत्री अराघची से बातचीत जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव बल्कि द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी विचार-विमर्श किया। ईरानी दूतावास के अनुसार, बातचीत में मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता जताई गई। कतर के प्रधानमंत्री से भी चर्चा विदेश मंत्री ने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से भी फोन पर बात की। इस बातचीत में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके असर पर विस्तार से चर्चा हुई। यूएई के विदेश मंत्री से भी संपर्क इसके अलावा जयशंकर ने यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी बात की। उन्होंने पश्चिम एशिया की तेजी से बदलती स्थिति पर विचार साझा किए, हालांकि बातचीत का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया। ऊर्जा आपूर्ति बना मुख्य मुद्दा सूत्रों के मुताबिक, इन सभी बातचीतों में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर विशेष चिंता जताई गई। पश्चिम एशिया भारत के लिए तेल और गैस का प्रमुख स्रोत है, ऐसे में क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई सख्त चेतावनी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। ट्रंप ने कहा है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को जल्द नहीं खोला गया, तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाया जा सकता है। होर्मुज स्ट्रेट बंद, बढ़ीं तेल-गैस की कीमतें ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। यह समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट? भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। ऐसे में अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है, तो देश की ईंधन और उर्वरक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। कूटनीतिक प्रयास जारी भारत ने साफ किया है कि उसकी प्राथमिकता इस संघर्ष को जल्द खत्म कराना और ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखना है। पिछले कुछ हफ्तों से भारत लगातार कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है ताकि स्थिति और न बिगड़े।
अमेरिका में बढ़ती महंगाई के बीच अब डाक सेवाओं की कीमतों में भी इजाफा होने जा रहा है। United States Postal Service (USPS) ने ईंधन की बढ़ती लागत के चलते पैकेज डिलीवरी पर 8% सरचार्ज लगाने का ऐलान किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है, जिसका सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ रहा है। कब से लागू होगा नया शुल्क? USPS के अनुसार, यह नया सरचार्ज 26 अप्रैल 2026 से लागू होगा और 17 जनवरी 2027 तक जारी रहेगा। यह अतिरिक्त शुल्क कई प्रमुख सेवाओं पर लागू होगा, जिनमें शामिल हैं: Priority Mail Express Priority Mail USPS Ground Advantage Parcel Select इसका मतलब है कि अमेरिका में आम उपभोक्ताओं से लेकर छोटे कारोबारियों तक सभी के लिए पार्सल भेजना अब पहले से महंगा हो जाएगा। 55 साल में पहली बार लिया गया फैसला USPS के इतिहास में यह पहली बार है जब इस तरह का ईंधन-आधारित सरचार्ज लागू किया जा रहा है। पिछले 55 वर्षों में ऐसा कदम नहीं उठाया गया था। यह निर्णय इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय संकट किस तरह से घरेलू सेवाओं और रोजमर्रा की लागत को प्रभावित कर रहा है। USPS का पक्ष: प्रतिस्पर्धियों से कम बढ़ोतरी USPS ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि: अन्य निजी कंपनियां पहले ही इससे अधिक सरचार्ज लगा चुकी हैं USPS का यह शुल्क प्रतिस्पर्धियों की तुलना में एक-तिहाई से भी कम है इसके बावजूद उनकी सेवाएं अभी भी दुनिया के विकसित देशों में सबसे किफायती बनी हुई हैं संगठन का कहना है कि यह कदम देशभर में अपनी डिलीवरी नेटवर्क को बनाए रखने के लिए जरूरी है, ताकि सप्ताह में कम से कम छह दिन सेवाएं जारी रखी जा सकें। राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज इस फैसले पर अमेरिकी राजनीति में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। JB Pritzker ने इस बढ़ोतरी की आलोचना करते हुए इसे “ट्रंप मेल टैक्स” करार दिया। वहीं Raphael Warnock ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब डाक सेवाएं भी महंगी हो गई हैं। ईंधन की कीमतों में तेज उछाल पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगभग 1 डॉलर प्रति गैलन तक की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर सिर्फ शिपिंग लागत ही नहीं, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल आपूर्ति में बाधा और वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका ने चिंता और बढ़ा दी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।