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Modi Raises Sailors' Safety Issue at G7

G7 में पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा, बोले- समुद्री मार्गों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना दुनिया की जिम्मेदारी

Deepshikha जून 17, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addresses the G7 Summit in France and raises concerns over Indian sailors' deaths and maritime security.
PM Modi Raises Maritime Security Concerns at G7 Summit

 

एवियन (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखना और नाविकों की रक्षा करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।

फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के उच्चस्तरीय सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। यह सत्र ‘नई साझेदारियां विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करने’ विषय पर आयोजित किया गया था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता मौजूद थे।

पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों का स्वागत, संघर्ष पर जताई चिंता

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हम पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं, लेकिन इस संघर्ष के कारण क्षेत्र के हमारे मित्र देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री व्यापार में आई बाधाओं का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।"

उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं में कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है और ऐसे में समुद्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है।

भारतीय नाविकों की मौत का किया उल्लेख

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "कई भारतीय नागरिकों की मृत्यु हुई है। वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी भय के अपना काम कर सकें।"

जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीब 16 महीनों बाद मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया।

ओमान की खाड़ी की घटना के बाद बढ़ी चिंता

प्रधानमंत्री का यह बयान ओमान की खाड़ी में हुई उस घटना के बाद आया है, जिसमें तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी। यह हादसा उस समय हुआ जब अमेरिकी बलों ने पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर 'सेटेबेलो' के खिलाफ कार्रवाई की थी।

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने आरोप लगाया था कि यह टैंकर ईरान से तेल लेकर जा रहा था और अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। जहाज पर कुल 28 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 24 भारतीय, दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी नागरिक शामिल थे। कार्रवाई के दौरान आदित्य शर्मा, पटनाला सुरेश और शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई थी।

वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा वाणिज्यिक माल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजरानी गतिविधियों पर खतरा बढ़ गया है। हाल के दिनों में भारतीय चालक दल वाले कई वाणिज्यिक जहाज अलग-अलग घटनाओं की चपेट में आ चुके हैं, जिससे नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं।

'दाता-प्राप्तकर्ता' मॉडल से आगे बढ़ने की जरूरत: मोदी

जी7 के आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक सहयोग अब पारंपरिक 'दाता और प्राप्तकर्ता' मॉडल से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशों के बीच संबंध समानता, साझी जिम्मेदारी और आपसी विश्वास पर आधारित होने चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' यानी 'मानवता सर्वोपरि' के सिद्धांत पर चला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन, ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस, मिशन लाइफ और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर टिकाऊ और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

'वसुधैव कुटुंबकम' भारत की विदेश नीति का आधार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की वैश्विक साझेदारी की सोच 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन से प्रेरित है, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और सामूहिक विकास के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

भारत की जी7 में 13वीं भागीदारी

जी7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं- अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा- का समूह है। यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में भाग लेता है। भारत इसका सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल होता रहा है।

इस बार भारत की जी7 में साझेदार देश के रूप में 13वीं भागीदारी रही, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सातवीं बार इस मंच पर पहुंचे हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Thousands of migrants attempt to enter Spain's Ceuta border from Morocco
स्पेन के स्यूटा में अवैध प्रवासियों की रिकॉर्ड घुसपैठ, 60 हजार पहुंचे; यूरोप में बढ़ी सुरक्षा चिंता

Spain Migrant Crisis: स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी क्षेत्र स्यूटा (Ceuta) में अवैध प्रवासियों की रिकॉर्ड संख्या में घुसपैठ ने यूरोप की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। मोरक्को से बड़ी संख्या में लोगों के सीमा पार करने के बाद हालात गंभीर हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में करीब 60 हजार प्रवासी स्यूटा में दाखिल हुए हैं। वहीं, इस दौरान सीमा पार करने की कोशिश में 34 लोगों की मौत हो गई है। 60 हजार प्रवासियों के पहुंचने से बिगड़े हालात स्यूटा सरकार के प्रमुख जुआन जीसस विवास ने बताया कि एक दिन के भीतर लगभग 60 हजार लोग इस क्षेत्र में प्रवेश कर चुके हैं। गौरतलब है कि स्यूटा की कुल आबादी करीब 83 हजार है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में प्रवासियों के पहुंचने से प्रशासनिक व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ गया है। हालांकि, स्पेन के गृह मंत्रालय ने कहा कि लगभग 50 हजार प्रवासी स्यूटा पहुंचे थे, जिनमें से 25 हजार से अधिक लोग बाद में वापस मोरक्को लौट गए। हालात का जायजा लेने पहुंचे प्रधानमंत्री बढ़ते संकट के बीच स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज स्यूटा पहुंचे और स्थानीय अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मानव तस्करी करने वाले गिरोह युवाओं को बेहतर जीवन का झूठा सपना दिखाकर जोखिम भरे रास्तों पर भेज रहे हैं, जिससे कई लोगों की जान चली जाती है। प्रधानमंत्री ने सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए 400 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती का भी ऐलान किया। समुद्र और बाड़ पार कर पहुंचे प्रवासी स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बड़ी संख्या में प्रवासियों ने सीमा की बाड़ पार कर स्पेन में प्रवेश किया, जबकि कई लोग भूमध्य सागर के रास्ते घंटों तैरकर स्यूटा पहुंचे। प्रशासन का कहना है कि सीमा पार करने की कोशिश के दौरान कम से कम 34 लोगों की मौत हुई है। प्रवासियों ने बताई मजबूरी मोरक्को से आए कई युवाओं ने स्थानीय मीडिया से कहा कि बेरोजगारी और आर्थिक संकट के कारण उन्हें अपना देश छोड़ना पड़ा। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि मोरक्को के अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव बनाने के लिए सीमा खोल दी, जिससे हजारों लोग स्यूटा की ओर बढ़ गए। यूरोप में बढ़ी राजनीतिक हलचल स्यूटा में हुई इस घटना के बाद यूरोप के कई दक्षिणपंथी और प्रवासन-विरोधी दलों ने खुली सीमा (फ्री मूवमेंट) की नीति पर सवाल उठाए हैं। वहीं, स्पेन में विपक्षी दल भी प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज की प्रवासी नीति की आलोचना कर रहे हैं। पहले भी हो चुकी है ऐसी घटना यह पहली बार नहीं है जब स्यूटा में इस तरह की घुसपैठ हुई हो। साल 2021 में भी केवल दो दिनों के भीतर 10 हजार से अधिक प्रवासी मोरक्को से सीमा पार कर स्यूटा पहुंच गए थे। तब भी स्पेन और मोरक्को के बीच सीमा सुरक्षा और प्रवासन नीति को लेकर तनाव बढ़ गया था। क्यों अहम है स्यूटा? स्यूटा उत्तरी अफ्रीका में स्थित स्पेन का एक स्वायत्त क्षेत्र है, जिसकी सीमा सीधे मोरक्को से लगती है। यूरोप पहुंचने की कोशिश करने वाले अफ्रीकी और अन्य देशों के प्रवासियों के लिए यह सबसे प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। ऐसे में यहां होने वाली हर बड़ी घुसपैठ पूरे यूरोप की सुरक्षा और प्रवासन नीति पर असर डालती है।  

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Donald Trump claims Hamas disarmament and phased Israeli troop withdrawal under proposed Gaza ceasefire deal.
गाजा युद्ध खत्म होने की ओर? ट्रंप का दावा- हमास करेगा निशस्त्रीकरण, चरणबद्ध तरीके से हटेगी इजरायली सेना

Gaza Ceasefire Deal: गाजा युद्ध को लेकर बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हमास के निशस्त्रीकरण (Disarmament) और गाजा से इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। हालांकि, इस समझौते पर अभी सभी पक्षों की औपचारिक मंजूरी और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। ट्रंप ने किया समझौते का दावा डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह समझौता गाजा में स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। उनके अनुसार, सभी पक्षों की औपचारिक मंजूरी मिलने के 14 दिनों के भीतर समझौते को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। ट्रंप का कहना है कि हमास के हथियार छोड़ने के साथ-साथ इजरायली सेना भी गाजा से चरणबद्ध तरीके से पीछे हटना शुरू करेगी। समझौते की प्रमुख बातें प्रस्तावित समझौते के अनुसार— हमास चरणबद्ध तरीके से अपने हथियार सौंपेगा। निशस्त्रीकरण की प्रक्रिया पूरी होने में 200 से 300 दिन लग सकते हैं। गाजा में बने सुरंगों के नेटवर्क को निष्क्रिय किया जाएगा। हमास के पूर्ण निशस्त्रीकरण के बाद इजरायली सेना चरणबद्ध तरीके से गाजा से हटेगी। करीब 5,000 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल सुरक्षा व्यवस्था संभालेगा। इस बल की निगरानी एक अमेरिकी जनरल करेंगे। नई फिलिस्तीनी पुलिस को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गाजा में नई फिलिस्तीनी सरकार के गठन की भी योजना है। हमास ने क्या कहा? रिपोर्टों के मुताबिक, हमास ने इस रोडमैप पर सिद्धांततः सहमति जताई है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि समझौते को लागू करने से पहले इजरायल को अपनी सैन्य कार्रवाई रोकनी होगी और गाजा से सेना हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। नई सरकार संभालेगी प्रशासन समझौते के तहत गाजा में एक नई फिलिस्तीनी सरकार का गठन किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल नई पुलिस व्यवस्था को प्रशिक्षित करेगा और सुरक्षा व्यवस्था स्थापित होने के बाद प्रशासन स्थानीय सरकार को सौंप दिया जाएगा। अभी आधिकारिक मंजूरी बाकी हालांकि ट्रंप ने समझौते का दावा किया है, लेकिन अभी तक सभी संबंधित पक्षों की ओर से इसकी आधिकारिक और संयुक्त पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस योजना के लागू होने की अंतिम स्थिति आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी। फिलहाल इसे गाजा युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक संभावित कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
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'ईरान में अभी भी कुछ ताकत बची है', ट्रंप का बड़ा बयान; परमाणु कार्यक्रम पर फिर दी चेतावनी

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Migrants attempting to cross the Spain-Morocco border near Ceuta amid rising border tensions
स्पेन की सीमा पर प्रवासियों का सैलाब, सियूटा पहुंचने की कोशिश में 34 की मौत; हालात तनावपूर्ण

Spain Migrant Crisis: स्पेन के स्वायत्त शहर सियूटा (Ceuta) में प्रवासियों की रिकॉर्ड संख्या पहुंचने से बड़ा मानवीय और सुरक्षा संकट पैदा हो गया है। मोरक्को से बड़ी संख्या में प्रवासियों ने सीमा पार करने की कोशिश की, जिसमें कम से कम 34 लोगों की मौत हो गई। हालात को देखते हुए स्पेन सरकार ने सीमा सुरक्षा और कड़ी करने के संकेत दिए हैं। हजारों प्रवासियों ने की सीमा पार करने की कोशिश स्पेन के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में दसियों हजार प्रवासी मोरक्को से सियूटा पहुंचने या वहां प्रवेश करने की कोशिश कर चुके हैं। बड़ी संख्या में लोग समुद्र के रास्ते तैरकर स्पेन की सीमा तक पहुंचे, जबकि कई ने सीमा पर लगे अवरोधों को पार करने का प्रयास किया। इस अभूतपूर्व प्रवासी संकट ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। 34 प्रवासियों की मौत सियूटा के प्रशासनिक प्रमुख जुआन जीसस विवास ने बताया कि सीमा पार करने की कोशिश के दौरान कम से कम 34 प्रवासियों की मौत हो गई। उन्होंने कहा, "सियूटा जिस स्थिति से गुजर रहा है, वह बेहद भयावह है।" प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने जताया दुख स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार सीमा सुरक्षा को और मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि समुद्री सीमा पर अवैध प्रवेश रोकने के लिए तैरने वाले बॉय (Buoys) लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को वापस भेजने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सके। सांचेज ने इस घटना को स्पेन की संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि सीमा पर इस तरह की घुसपैठ स्वीकार नहीं की जा सकती। मानव तस्करों को ठहराया जिम्मेदार प्रधानमंत्री ने मानव तस्करी करने वाले गिरोहों को इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मानव तस्कर बड़ी संख्या में युवाओं को झूठे सपने दिखाकर जोखिम भरे रास्तों पर भेजते हैं, जिसके कारण कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं। सीमा पर जारी है तनाव गुरुवार से शुरू हुआ सीमा संकट शुक्रवार को भी जारी रहा। मोरक्को की ओर सीमा क्षेत्र में सुरक्षाबलों और प्रवासियों के बीच झड़पें हुईं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सियूटा के पास पहाड़ी इलाके में बड़ी संख्या में प्रवासी एकत्र दिखाई दिए। प्रवासियों को रोकने के लिए मोरक्को की सुरक्षा एजेंसियों ने आंसू गैस के गोले भी दागे, लेकिन इसके बावजूद कई लोग सीमा पार करने की कोशिश करते रहे। फिलहाल स्पेन और मोरक्को दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।  

kalpana अगस्त 1, 2026 0
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