जी7 शिखर सम्मेलन

Donald Trumph Narendra MODI
2027 की शुरुआत में भारत आ सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वर्ष 2027 की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। इस संभावना का संकेत अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारी कर रहा है।   व्यापार समझौते को मिल सकता है अंतिम रूप   मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) पर बातचीत अंतिम चरण में है। उम्मीद है कि आने वाले महीनों में इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी और राष्ट्रपति ट्रंप की संभावित भारत यात्रा के दौरान इस पर बड़ा ऐलान हो सकता है।   भारत-अमेरिका रिश्तों को मिलेगी नई मजबूती   विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह यात्रा होती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  (AI) और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत होगा। यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत की पहली आधिकारिक यात्रा होगी।   जी-7 बैठक के बाद बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता   हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ा है। इसके बाद व्यापार समझौते और रणनीतिक साझेदारी पर बातचीत में भी तेजी आई है।   अभी आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं   हालांकि, व्हाइट हाउस या भारत सरकार की ओर से ट्रंप की यात्रा की अंतिम तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने केवल इतना कहा है कि यात्रा की तैयारी पर काम चल रहा है और समय तय होने पर औपचारिक घोषणा की जाएगी।

abhishek singh जून 28, 2026 0
US President Donald Trump and Indian Prime Minister Narendra Modi during a bilateral meeting at the G7 Summit in France.
'मोदी पर फिल्म बनी तो हॉलीवुड को हीरो नहीं मिलेगा', ट्रंप का दिलचस्प बयान; पीएम को बताया महान और सख्त नेता

  वॉशिंगटन/पेरिस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली और मजबूत नेताओं में से एक बताया है। ट्रंप ने कहा कि यदि कभी प्रधानमंत्री मोदी पर फिल्म बनाई जाती है, तो हॉलीवुड को उनके किरदार के लिए उपयुक्त अभिनेता ढूंढने में मुश्किल होगी, क्योंकि उनका व्यक्तित्व बिल्कुल अलग और अनूठा है। न्यूज वेबसाइट एक्सियोस (Axios) को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपने पसंदीदा वैश्विक नेताओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता प्रभावशाली, मजबूत और परिणाम देने की क्षमता रखने वाले हैं। 'मोदी एक महान नेता हैं' ताकत, प्रभाव और नेतृत्व क्षमता के आधार पर अपने पसंदीदा नेताओं के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि मोदी बहुत अच्छे हैं। भारत के कुछ बेहद अच्छे आंकड़े सामने आए हैं। वह युद्ध से दूर रहते हैं, जो एक समझदारी भरा कदम है। वह 1.5 अरब लोगों का नेतृत्व करते हैं। भारत वास्तव में दुनिया का सबसे बड़ा देश है और मोदी एक महान नेता हैं।" ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का वैश्विक स्तर पर काफी सम्मान है और उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर भी उन्हें बेहद सख्त और मजबूत नेता के रूप में पाया है। 'मोदी पर फिल्म बनी तो हीरो कहां से लाएगा हॉलीवुड?' इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी या राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर कोई फिल्म बनाई जाए, तो हॉलीवुड के लिए उनकी भूमिका निभाने के लिए सही अभिनेता ढूंढना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा, "मोदी का व्यक्तित्व बिल्कुल अलग है। दुनिया भर में उनका सम्मान किया जाता है। मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता हूं और वह बेहद मजबूत और सख्त नेता हैं।" भारत-अमेरिका व्यापार पर भी बोले ट्रंप ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार होता है, लेकिन पहले भारत को इसका ज्यादा फायदा मिलता था। उन्होंने इसके लिए भारत को दोषी नहीं ठहराया। ट्रंप ने कहा कि उस समय अमेरिका में ऐसे नेता थे, जिन्होंने व्यापारिक असंतुलन को बढ़ने दिया। उनके मुताबिक, अब परिस्थितियां बदल गई हैं और व्यापार अधिक निष्पक्ष तरीके से हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस बदलाव से पूरी तरह खुश नहीं है, क्योंकि पहले उसे व्यापारिक लाभ अधिक मिलता था। 'मोदी ने भारत की राजनीति की तस्वीर बदल दी' ट्रंप ने कहा कि वह कई वर्षों से भारत की राजनीति को देखते आ रहे हैं। उनके अनुसार, पहले भारत में नेतृत्व जल्दी-जल्दी बदलता था और कई नेता लंबे समय तक सत्ता में नहीं टिक पाते थे। उन्होंने कहा, "कोई छह महीने तो कोई एक साल तक ही पद पर रहता था, लेकिन मोदी के आने के बाद तस्वीर बदल गई। वह 12 साल से अधिक समय से सत्ता में हैं और उनकी पकड़ काफी मजबूत है।" ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को "शांत, संतुलित लेकिन बेहद सख्त नेता" बताते हुए कहा कि उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है। जी-7 शिखर सम्मेलन में हुई मुलाकात फ्रांस में आयोजित G7 Summit 2026 के दौरान ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Italian Prime Minister Giorgia Meloni responds to claims by US President Donald Trump after the G7 Summit controversy.
ट्रंप के कथित दावे पर जॉर्जिया मेलोनी का पलटवार, बोलीं- इटली मिन्नतें नहीं करता

  रोम/वॉशिंगटन: जी7 शिखर सम्मेलन से जुड़ा एक कथित बयान अमेरिका और इटली के बीच नए विवाद की वजह बनता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कथित दावे पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने कथित तौर पर दावा किया था कि जी7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए आग्रह किया था। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे "मनगढ़ंत" और "तथ्यहीन" बताया। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने कभी ऐसी कोई गुजारिश की और न ही इटली को किसी से इस प्रकार की मिन्नतें करने की आवश्यकता है। वीडियो संदेश जारी कर दिया जवाब मेलोनी ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा, "डोनाल्ड ट्रंप के दावे पूरी तरह काल्पनिक हैं। इटली और मैं किसी से मिन्नतें नहीं करते।" उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर तत्काल प्रतिक्रिया देना आवश्यक होता है और इसलिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने का फैसला किया। इटली सरकार ने जताई नाराजगी इटली सरकार ने भी ट्रंप के कथित बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। इटली के विदेश मंत्री एंतोनियो ताजानी ने इसे इटली और उसके प्रधानमंत्री के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बयान बताया। उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों के नेताओं के प्रति इस तरह की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक, विरोध दर्ज कराने के लिए ताजानी ने अपनी प्रस्तावित अमेरिका यात्रा भी रद्द कर दी है। क्या था ट्रंप का कथित दावा? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने एक इंटरव्यू में यूक्रेन मुद्दे पर बातचीत के दौरान जॉर्जिया मेलोनी का जिक्र करते हुए दावा किया कि जी7 शिखर सम्मेलन में उन्होंने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए अनुरोध किया था। ट्रंप ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने "तरस खाकर" इसके लिए सहमति दी। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही व्हाइट हाउस की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया गया है। सहयोगी देशों के साथ व्यवहार पर सवाल मेलोनी ने अपने बयान में कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगी देशों के नेताओं के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों करते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध आपसी सम्मान और साझेदारी पर आधारित होने चाहिए। इस घटनाक्रम ने अमेरिका और इटली के बीच कूटनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। दोनों देशों की सरकारों की ओर से अभी तक द्विपक्षीय संबंधों पर किसी औपचारिक असर की घोषणा नहीं की गई है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Shashi Tharoor Narendra MODI
शशि थरूर की पीएम मोदी पर टिप्पणी से सियासी घमासान, बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस सांसद शशि थरूर  द्वारा नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक पहल की सराहना करने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय नाविकों की सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन करते हुए थरूर के बयान को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और राहुल गांधी  को निशाने पर लिया।   थरूर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  के साथ सार्वजनिक और निजी दोनों बैठकों में भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से रखा। उन्होंने कहा कि युद्ध की परिस्थितियों में वाणिज्यिक जहाजों पर तैनात नागरिक नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए, क्योंकि वे सैनिक नहीं होते। थरूर ने यह भी कहा कि भारतीय ध्वज वाले और अन्य जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक कार्यरत हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा भारत की प्राथमिक चिंता है।   कांग्रेस ने उठाए थे सवाल इससे पहले कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि ओमान की खाड़ी में एक व्यापारिक पोत पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। पार्टी ने सवाल उठाया था कि अमेरिका से इस घटना पर जवाब या खेद व्यक्त करने की मांग क्यों नहीं की गई।   भाजपा ने राहुल गांधी को घेरा थरूर के बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार किया। भाजपा प्रवक्ता Pradeep Bhandari ने कहा कि थरूर की टिप्पणी ने राहुल गांधी के आरोपों की पोल खोल दी है। उन्होंने दावा किया कि जब राष्ट्रीय हित की बात आती है तो प्रधानमंत्री मोदी मजबूती से भारत का पक्ष रखते हैं, जबकि कांग्रेस नेतृत्व लगातार सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाता रहा है।   गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह द्विपक्षीय मुलाकात जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान लगभग 16 महीने बाद हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, भारतीय नाविकों की सुरक्षा और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

abhishek singh जून 20, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump hold bilateral talks during the G7 Summit in France on maritime security and strategic cooperation.
होर्मुज से लेकर ट्रेड तक, पीएम मोदी और ट्रंप की बैठक में कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। करीब 16 महीनों बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने की यह पहली मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेता फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में मिले थे। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की स्थिति, वैश्विक स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना दुनिया के लिए जरूरी : पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसे हर हाल में खुला और सुरक्षित बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लाखों नाविक समुद्री मार्गों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भी शामिल हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण : ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की बातों का समर्थन करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है और मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता बनाए रखने में उसकी भूमिका बेहद अहम है। आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पर भी हुई चर्चा बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका में भारतीय निवेश और भारतीय कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। व्यक्तिगत संबंधों का भी किया जिक्र राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी लंबे समय से उनके मित्र रहे हैं और उनसे मुलाकात हमेशा सुखद अनुभव रहती है। जी7 सम्मेलन के दौरान हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत और अमेरिका की बढ़ती साझेदारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump hold talks during the G7 Summit in France, discussing strategic ties and global security.
मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका पूरी ताकत से साथ खड़ा होगा, ट्रंप का बड़ा वादा

  फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। बैठक के दौरान ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों को बेहद मजबूत बताते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर कोई हमला होता है, तो अमेरिका पूरी ताकत के साथ भारत के समर्थन में खड़ा रहेगा। भारत की सुरक्षा को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "भारत और अमेरिका के बीच शानदार रिश्ते हैं। अगर भारत पर कोई हमला होता है, तो हम उसकी मदद के लिए खड़े रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर यदि कोई भी हमला करता है, तो अमेरिका पूरी ताकत से भारत के साथ दिखाई देगा।" पीएम मोदी को बताया सख्त नेगोशिएटर डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें बेहद सख्त और कुशल नेगोशिएटर बताया। उन्होंने कहा, "वह दिखने में बेहद शांत और सौम्य हैं, लेकिन बातचीत और डील्स के मामले में उतने ही सख्त और माहिर खिलाड़ी हैं। वह अक्सर सामने वाले को चौंका देते हैं।" ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी जितने कड़े वार्ताकार हैं, उतने ही बड़े देशभक्त भी हैं। वह भारत की जनता से बेहद प्यार करते हैं और अमेरिका के लिए भी उनके मन में सम्मान है। जल्द भारत दौरे का किया वादा अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वह भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं और भविष्य में जल्द ही भारत का दौरा करेंगे। 'व्हाइट हाउस में हूं, तब तक भारत का एक दोस्त अमेरिका में है' प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने कहा, "जब तक मैं व्हाइट हाउस में हूं, भारत का अमेरिका में एक दोस्त है।" उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया समेत कई अहम वैश्विक मुद्दों पर भारत बड़ी भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों के बीच रोजगार, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। ऊर्जा सहयोग पर भी बोले ट्रंप भारत की ओर से अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ाने के सवाल पर ट्रंप ने कहा, "भारत हमारे साथ जो चाहे कर सकता है। हमारे संबंध बेहद अच्छे हैं। मैं और प्रधानमंत्री मोदी तथा हमारे दोनों देश पहले से कहीं अधिक करीब हैं।" ईरान समझौते पर क्या बोले ट्रंप? ईरान के साथ संभावित समझौते पर ट्रंप ने कहा कि यह सिर्फ दो पैराग्राफ का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक विस्तृत मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) है, जो आगे चलकर एक नियमित समझौते का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ईरान इस समझौते को आगे बढ़ाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हमें प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी होगी। फिलहाल वे समझौते के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहे हैं।"  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi meets European leaders during the G7 Summit amid discussions on the India-European Union Free Trade Agreement.
भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साल के अंत तक लग सकती है मुहर, जी7 में बनी सहमति

  एवियन/नई दिल्ली: फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। दोनों पक्षों ने इस वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम करने पर जोर दिया है। भारत और यूरोपीय संघ ने जनवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते पर वार्ता पूरी होने की घोषणा की थी। अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग एक-चौथाई हिस्से को कवर करेगा, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक बन सकता है। निर्यात शुल्क में होगी बड़ी कमी प्रस्तावित समझौते के तहत यूरोपीय संघ को होने वाले भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क में कमी आएगी। वहीं, भारत में आने वाले 97 प्रतिशत से अधिक यूरोपीय निर्यात पर भी टैरिफ घटाए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय वस्तुओं को यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर पहुंचने का अवसर मिलेगा और भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिल सकता है। भारत-जर्मनी संबंधों को मिलेगी नई गति जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और हरित अर्थव्यवस्था सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों देशों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र लागू करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी। कई वैश्विक नेताओं से हुई द्विपक्षीय बैठकें जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, केन्या, मिस्र, जापान और दक्षिण कोरिया के नेताओं से भी मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा लाभ विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता लागू होने से भारतीय निर्यात को नई गति मिलेगी, विदेशी निवेश बढ़ेगा और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, वैश्विक व्यापार और निवेश परिदृश्य में भारत की आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
US President Donald Trump speaks during the G7 Summit in France while discussing the proposed Iran agreement and future military options.
G7 में ट्रंप की खुली चेतावनी: ईरान से समझौता नहीं हुआ तो फिर होगी बमबारी

  एवियन/वॉशिंगटन: फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि तेहरान के साथ प्रस्तावित समझौता अभी अंतिम रूप में नहीं पहुंचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) है और यदि उन्हें इसकी शर्तें पसंद नहीं आईं या ईरान ने अपेक्षित व्यवहार नहीं किया, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा। ट्रंप ने कहा, "यह कोई अंतिम समझौता नहीं है। अगर मुझे यह पसंद नहीं आया या ईरान ने सही तरीके से व्यवहार नहीं किया, तो हम फिर से उन पर कार्रवाई करेंगे।" उन्होंने ईरान पर पिछले 47 वर्षों से क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब उसे अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा। व्हाइट हाउस ने समझौते को बताया रणनीतिक सफलता व्हाइट हाउस की ओर से रिपब्लिकन सांसदों और ट्रंप समर्थकों को भेजे गए एक दस्तावेज में दावा किया गया है कि प्रस्तावित समझौते से अमेरिका अपने प्रमुख रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने में सफल रहा है। दस्तावेज के अनुसार, समझौते के प्रमुख बिंदु हैं— • ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। • होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही सामान्य बनी रहेगी। • पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। समझौते की गोपनीयता पर उठ रहे सवाल अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते का पूरा विवरण अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसके चलते अमेरिकी राजनीतिक हलकों में कई सवाल उठ रहे हैं। कई रिपब्लिकन नेताओं ने भी माना है कि शर्तों को गोपनीय रखने से भ्रम और अटकलें बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक समझौते का पूरा दस्तावेज सामने नहीं आता, तब तक यह स्पष्ट नहीं हो सकेगा कि दोनों देशों ने किन शर्तों पर सहमति बनाई है और उनकी वास्तविक प्रतिबद्धताएं क्या हैं। दुनिया की नजरें अमेरिका-ईरान वार्ता पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर पश्चिम एशिया की स्थिरता, वैश्विक तेल बाजार और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर पड़ सकता है। ट्रंप के ताजा बयान से यह भी संकेत मिला है कि कूटनीतिक बातचीत के साथ-साथ सैन्य विकल्प अभी भी अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बने हुए हैं।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and Italian Prime Minister Giorgia Meloni smile and greet each other during the G7 Summit in France.
G7 में फिर दिखी 'Melodi' की केमिस्ट्री, मेलोनी बोलीं- 'हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस कपल हैं'

  फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni के बीच हुई छोटी-सी मुलाकात इंटरनेट पर छा गई है। वैश्विक मुद्दों पर गंभीर बैठकों के बीच दोनों नेताओं की यह अनौपचारिक बातचीत सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। जब सभी नेता पारंपरिक ग्रुप फोटो के लिए एकत्रित हो रहे थे, तभी पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी ने एक-दूसरे का मुस्कुराते हुए अभिवादन किया। 'हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस कपल हैं' वीडियो में जॉर्जिया मेलोनी प्रधानमंत्री मोदी को देखकर मुस्कुराते हुए कहती हैं, "आपसे दोबारा मिलकर बहुत अच्छा लगा।" इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस कपल हैं।" बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी दोनों की सोशल मीडिया लोकप्रियता का जिक्र किया, जिस पर मेलोनी ने हंसते हुए सहमति जताई और अपनी बात दोहराई। दोनों नेताओं की यह हल्की-फुल्की बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। क्या है 'Melodi' ट्रेंड? सोशल मीडिया पर 'Melodi' (मेलोडी) नाम पिछले कुछ वर्षों से काफी लोकप्रिय है। यह शब्द 'Meloni' और 'Modi' के नामों को मिलाकर बनाया गया है। इस ट्रेंड की शुरुआत 2023 में दुबई में आयोजित COP28 के दौरान हुई थी। उस समय जॉर्जिया मेलोनी ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक सेल्फी साझा करते हुए कैप्शन लिखा था, "Good friends at COP28 #Melodi" इसके बाद 'Melodi' हैशटैग इंटरनेट पर वायरल हो गया और दोनों नेताओं की तस्वीरों और मुलाकातों पर मीम्स, फैन एडिट्स और मजेदार पोस्ट की बाढ़ आ गई। जब पीएम मोदी ने मेलोनी को गिफ्ट की थी 'Melody' टॉफी पिछले महीने प्रधानमंत्री मोदी के इटली दौरे के दौरान 'Melodi' ट्रेंड को एक नया और दिलचस्प मोड़ मिला था। रोम में मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी को 'Melody' नाम की टॉफी का पैकेट उपहार में दिया था। इस अनोखे तोहफे को देखकर मेलोनी हंस पड़ी थीं और उन्होंने कहा था, "प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए एक बहुत अच्छी टॉफी लाए हैं... मेलोडी।" यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था और कुछ ही घंटों में करोड़ों लोगों ने इसे देखा था। इंटरनेट पर फिर ट्रेंड कर रही है 'Melodi' जी7 शिखर सम्मेलन में हुई ताजा मुलाकात के बाद 'Melodi' एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंड कर रही है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों नेताओं के दोस्ताना और सहज व्यवहार को लेकर इंटरनेट यूजर्स लगातार मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। यह बातचीत पूरी तरह हल्के-फुल्के अंदाज में हुई, लेकिन इससे एक बार फिर यह साबित हो गया कि वैश्विक राजनीति की गंभीर बैठकों के बीच भी कुछ पल ऐसे होते हैं, जो लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Italian Prime Minister Giorgia Meloni smiles during the G7 Summit in France after revealing she quit smoking since May 1.
G7 Summit 2026: मेलोनी ने छोड़ी सिगरेट, बोलीं- एक महीने से नहीं किया धूम्रपान; अब नींद भगाने के लिए पी रहीं तीन-तीन कॉफी

  एवियन-ले-बैंस (फ्रांस): फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान जहां दुनिया के प्रमुख नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, यूक्रेन युद्ध, सुरक्षा और भू-राजनीतिक संकटों जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की, वहीं नेताओं की कुछ अनौपचारिक बातचीत भी सुर्खियों में रही। सबसे ज्यादा चर्चा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की रही, जिन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने पिछले एक महीने से सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया है। '1 मई के बाद से सिगरेट नहीं पी', मेलोनी ने किया खुलासा बैठक शुरू होने से पहले जॉर्जिया मेलोनी ने बताया कि उन्होंने उस दिन तीन कप कॉफी पी है। इस पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने उनसे पूछा कि इतनी कॉफी क्यों? जवाब में मेलोनी ने मुस्कुराते हुए कहा, "खुद को जगाए रखने के लिए।" इसके बाद जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने सुबह सिगरेट पी है? इस पर मेलोनी ने जवाब दिया, "मैंने 1 मई के बाद से सिगरेट नहीं पी है।" उनके इस जवाब पर बैठक में मौजूद नेताओं ने तालियां बजाकर और बधाई देकर उनका उत्साह बढ़ाया। मार्क कार्नी ने पूछा- निकोटीन पैच लगाया क्या? कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची और यूरोपीय संघ के अन्य प्रतिनिधियों ने मेलोनी को धूम्रपान छोड़ने के लिए बधाई दी। खुशी जाहिर करते हुए मेलोनी ने दोनों हाथ ऊपर उठा दिए। इसी दौरान मार्क कार्नी ने मजाकिया अंदाज में पूछा, "क्या आपने निकोटीन पैच लगाया है?" उनके इस सवाल पर वहां मौजूद सभी नेता हंस पड़े और माहौल हल्का-फुल्का हो गया। नेताओं ने साझा किए धूम्रपान छोड़ने के अनुभव सिगरेट छोड़ने को लेकर बातचीत आगे बढ़ी तो कई नेताओं ने अपने निजी अनुभव भी साझा किए। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने बताया कि उन्होंने 2005 में धूम्रपान छोड़ दिया था। इस पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने पूछा कि क्या उसके बाद कभी सिगरेट पी? कोस्टा ने जवाब दिया, "कभी नहीं, 21 साल हो गए।" इस बातचीत ने जी7 जैसे गंभीर मंच पर नेताओं का एक मानवीय और सहज पक्ष भी सामने ला दिया। जी7 में फिर चर्चा में आया 'मेलोडी' मोमेंट जी7 सम्मेलन के दौरान एक और दिलचस्प पल तब देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पारंपरिक 'फैमिली फोटो' से पहले आमने-सामने आए। दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री पहले भी सोशल मीडिया पर 'मेलोडी' (Meloni + Modi) नाम से वायरल हो चुकी है। मुलाकात के दौरान मेलोनी ने मुस्कुराते हुए कहा, "आपसे फिर मिलकर अच्छा लगा।" बताया जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान इंस्टाग्राम का जिक्र किया। इस पर मेलोनी ने तुरंत जवाब दिया, "हां, हम इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा मशहूर हैं।" उनकी इस टिप्पणी पर आसपास मौजूद लोग हंस पड़े। जी7 में कौन-कौन से देश हुए शामिल? जी7 समूह में दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जिनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में भाग लेता है। इस वर्ष मेजबान फ्रांस ने भारत, ब्राजील, केन्या, दक्षिण कोरिया, यूक्रेन और अन्य साझेदार देशों को भी विशेष आमंत्रित राष्ट्र के रूप में बुलाया था। सम्मेलन के एजेंडे में वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियां प्रमुख रहीं, लेकिन नेताओं के ये अनौपचारिक और हल्के-फुल्के पल भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump share a warm moment during the G7 Summit family photo session in France.
G7 समिट में ट्रंप ने थामी पीएम मोदी की कलाई, फोटोशूट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

  एवियन-ले-बैंस (फ्रांस): फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात एक बार फिर सुर्खियों में है। दोनों नेताओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ट्रंप सीढ़ियां चढ़ते समय प्रधानमंत्री मोदी की कलाई पकड़कर उनके साथ आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। यह मुलाकात करीब 16 महीने बाद दोनों नेताओं की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात थी। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में आमने-सामने मिले थे, जब ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की थी। फोटोशूट के दौरान दिखी दोनों नेताओं की गर्मजोशी वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप अन्य विश्व नेताओं के साथ पारंपरिक फैमिली फोटो के लिए जाते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक छोटी सी सीढ़ी चढ़ते समय ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की कलाई पकड़ते हैं और दोनों साथ आगे बढ़ते हैं। वीडियो में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी भी ट्रंप के पास खड़ी होने की कोशिश करती दिखाई देती हैं। इसी दौरान राष्ट्रपति मैक्रों कहते हैं, "Ready Everybody?" इस पर प्रधानमंत्री मोदी मुस्कुराते हुए जवाब देते हैं, "We are always ready." यह संवाद भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। हाथ मिलाने के बाद कुछ देर हुई बातचीत फोटोशूट से पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत भी की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब भारत और अमेरिका के संबंध व्यापार, रणनीतिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर नए दौर से गुजर रहे हैं। हाल के महीनों में कई मुद्दों पर बढ़ी थीं चुनौतियां भारत-अमेरिका संबंधों को हाल के महीनों में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर काउंटर टैरिफ लगाए थे। इसके अलावा ओमान तट के पास एक व्यापारी जहाज पर अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भी दोनों देशों के संबंधों को लेकर सवाल उठे थे। इन चुनौतियों के बावजूद नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच संवाद और सहयोग लगातार जारी है। मार्को रुबियो ने दिया था ट्रंप का संदेश पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को निकट भविष्य में व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया था। रुबियो ने भारत को अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का "आधार स्तंभ" बताते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया था। जी7 मंच से पीएम मोदी ने उठाया समुद्री सुरक्षा का मुद्दा जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री व्यापार मार्गों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार पर पड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा, "वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी भय के अपना कर्तव्य निभा सकें।" ओमान की खाड़ी में तीन भारतीय नाविकों की हुई थी मौत प्रधानमंत्री का यह बयान उस घटना के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी बलों ने 8 जून को 'मारिवेक्स', 9 जून को 'सेटेबेलो' और 11 जून को 'जलवीर' नामक जहाजों के खिलाफ अभियान चलाया था। अमेरिका का आरोप था कि ये जहाज ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे थे। मोदी और ट्रंप की मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब दोनों देश व्यापार, समुद्री सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addresses the G7 Summit in France and raises concerns over Indian sailors' deaths and maritime security.
G7 में पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा, बोले- समुद्री मार्गों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना दुनिया की जिम्मेदारी

  एवियन (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखना और नाविकों की रक्षा करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के उच्चस्तरीय सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। यह सत्र ‘नई साझेदारियां विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करने’ विषय पर आयोजित किया गया था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता मौजूद थे। पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों का स्वागत, संघर्ष पर जताई चिंता प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हम पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं, लेकिन इस संघर्ष के कारण क्षेत्र के हमारे मित्र देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री व्यापार में आई बाधाओं का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।" उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं में कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है और ऐसे में समुद्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है। भारतीय नाविकों की मौत का किया उल्लेख प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "कई भारतीय नागरिकों की मृत्यु हुई है। वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी भय के अपना काम कर सकें।" जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीब 16 महीनों बाद मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। ओमान की खाड़ी की घटना के बाद बढ़ी चिंता प्रधानमंत्री का यह बयान ओमान की खाड़ी में हुई उस घटना के बाद आया है, जिसमें तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी। यह हादसा उस समय हुआ जब अमेरिकी बलों ने पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर 'सेटेबेलो' के खिलाफ कार्रवाई की थी। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने आरोप लगाया था कि यह टैंकर ईरान से तेल लेकर जा रहा था और अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। जहाज पर कुल 28 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 24 भारतीय, दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी नागरिक शामिल थे। कार्रवाई के दौरान आदित्य शर्मा, पटनाला सुरेश और शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई थी। वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा वाणिज्यिक माल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजरानी गतिविधियों पर खतरा बढ़ गया है। हाल के दिनों में भारतीय चालक दल वाले कई वाणिज्यिक जहाज अलग-अलग घटनाओं की चपेट में आ चुके हैं, जिससे नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं। 'दाता-प्राप्तकर्ता' मॉडल से आगे बढ़ने की जरूरत: मोदी जी7 के आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक सहयोग अब पारंपरिक 'दाता और प्राप्तकर्ता' मॉडल से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशों के बीच संबंध समानता, साझी जिम्मेदारी और आपसी विश्वास पर आधारित होने चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' यानी 'मानवता सर्वोपरि' के सिद्धांत पर चला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन, ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस, मिशन लाइफ और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर टिकाऊ और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। 'वसुधैव कुटुंबकम' भारत की विदेश नीति का आधार प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की वैश्विक साझेदारी की सोच 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन से प्रेरित है, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और सामूहिक विकास के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत की जी7 में 13वीं भागीदारी जी7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं- अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा- का समूह है। यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में भाग लेता है। भारत इसका सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल होता रहा है। इस बार भारत की जी7 में साझेदार देश के रूप में 13वीं भागीदारी रही, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सातवीं बार इस मंच पर पहुंचे हैं।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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