फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। बैठक के दौरान ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों को बेहद मजबूत बताते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर कोई हमला होता है, तो अमेरिका पूरी ताकत के साथ भारत के समर्थन में खड़ा रहेगा।
भारत की सुरक्षा को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "भारत और अमेरिका के बीच शानदार रिश्ते हैं। अगर भारत पर कोई हमला होता है, तो हम उसकी मदद के लिए खड़े रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर यदि कोई भी हमला करता है, तो अमेरिका पूरी ताकत से भारत के साथ दिखाई देगा।"
पीएम मोदी को बताया सख्त नेगोशिएटर
डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें बेहद सख्त और कुशल नेगोशिएटर बताया। उन्होंने कहा, "वह दिखने में बेहद शांत और सौम्य हैं, लेकिन बातचीत और डील्स के मामले में उतने ही सख्त और माहिर खिलाड़ी हैं। वह अक्सर सामने वाले को चौंका देते हैं।"
ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी जितने कड़े वार्ताकार हैं, उतने ही बड़े देशभक्त भी हैं। वह भारत की जनता से बेहद प्यार करते हैं और अमेरिका के लिए भी उनके मन में सम्मान है।
जल्द भारत दौरे का किया वादा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वह भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं और भविष्य में जल्द ही भारत का दौरा करेंगे।
'व्हाइट हाउस में हूं, तब तक भारत का एक दोस्त अमेरिका में है'
प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने कहा, "जब तक मैं व्हाइट हाउस में हूं, भारत का अमेरिका में एक दोस्त है।" उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया समेत कई अहम वैश्विक मुद्दों पर भारत बड़ी भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों के बीच रोजगार, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
ऊर्जा सहयोग पर भी बोले ट्रंप
भारत की ओर से अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ाने के सवाल पर ट्रंप ने कहा, "भारत हमारे साथ जो चाहे कर सकता है। हमारे संबंध बेहद अच्छे हैं। मैं और प्रधानमंत्री मोदी तथा हमारे दोनों देश पहले से कहीं अधिक करीब हैं।"
ईरान समझौते पर क्या बोले ट्रंप?
ईरान के साथ संभावित समझौते पर ट्रंप ने कहा कि यह सिर्फ दो पैराग्राफ का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक विस्तृत मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) है, जो आगे चलकर एक नियमित समझौते का रूप ले सकता है।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ईरान इस समझौते को आगे बढ़ाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हमें प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी होगी। फिलहाल वे समझौते के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहे हैं।"
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कुलियाकान, एजेंसियां। मेक्सिको के सिनालोआ राज्य की राजधानी कुलियाकान में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सीज़र गैस्टेलुम की लाइवस्ट्रीमिंग के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई। 4 अगस्त 2026 को हुई इस वारदात के समय गैस्टेलुम अपने दो दोस्तों के साथ एक फास्ट-फूड रेस्तरां के बाहर मौजूद थे। स्थानीय अधिकारियों ने उनकी मौत की पुष्टि की है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है。 मोटरसाइकिल से पहुंचे हमलावर रिपोर्टों के मुताबिक, गैस्टेलुम अपने दोस्तों के साथ लाइव प्रसारण कर रहे थे, तभी हेलमेट पहने दो लोग मोटरसाइकिल से वहां पहुंचे। उनमें से एक हमलावर ने गैस्टेलुम पर गोली चला दी। गोली लगने के बाद उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में अभियान शुरू किया। हमले के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों ने अभी तक हत्या के किसी संभावित मकसद की पुष्टि नहीं की है। टिकटॉक पर लोकप्रिय थे गैस्टेलुम सीज़र गैस्टेलुम सोशल मीडिया पर कॉमेडी वीडियो के लिए लोकप्रिय थे। टिकटॉक पर उनके करीब 6 लाख फॉलोअर्स थे। लाइवस्ट्रीम के दौरान हुई हत्या ने सोशल मीडिया यूजर्स और उनके प्रशंसकों के बीच चिंता पैदा कर दी है। घटना ने मेक्सिको में सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। इससे पहले भी देश में एक इन्फ्लुएंसर की लाइवस्ट्रीम के दौरान हत्या का मामला सामने आ चुका है। सिनालोआ में संगठित अपराध बड़ी चुनौती गैस्टेलुम की हत्या ऐसे क्षेत्र में हुई है जहां संगठित अपराध और प्रतिद्वंद्वी आपराधिक गिरोहों के बीच हिंसा लंबे समय से बड़ी समस्या बनी हुई है। कुलियाकान को सिनालोआ में आपराधिक हिंसा के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है। हालांकि, गैस्टेलुम की हत्या को किसी आपराधिक गिरोह से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और हमलावरों की पहचान तथा हत्या के मकसद का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने जांच शुरू की घटना के बाद स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके में अभियान चलाया है। अधिकारियों की प्राथमिकता हमलावरों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करना और हत्या के पीछे की वजह का पता लगाना है। लाइवस्ट्रीम के दौरान हुई इस हत्या ने मेक्सिको में सार्वजनिक स्थानों पर सोशल मीडिया गतिविधियों के दौरान सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल जांच पूरी होने के बाद ही हत्या के पीछे की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर उड़ रहे Marine One हेलीकॉप्टर और एक यात्री विमान के बीच मंगलवार को वॉशिंगटन डीसी के ऊपर निर्धारित सुरक्षा दूरी बरकरार नहीं रह सकी। घटना के बाद अमेरिकी Federal Aviation Administration (FAA) और National Transportation Safety Board (NTSB) ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों विमान सुरक्षित रहे और राष्ट्रपति ट्रंप को कोई खतरा नहीं था। Marine One के उड़ान भरने के तुरंत बाद हुई घटना राष्ट्रपति ट्रंप को लेकर Marine One ने मंगलवार दोपहर करीब 2:33 बजे व्हाइट हाउस के पास से उड़ान भरी। इसके लगभग एक मिनट बाद Envoy Air Flight 3742 ने रोनाल्ड रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी। यह क्षेत्र वॉशिंगटन के सबसे व्यस्त हवाई क्षेत्रों में शामिल है। FAA के अनुसार, दोनों विमानों के बीच निर्धारित separation बरकरार नहीं रहा। नियमों के तहत इस क्षेत्र में विमानों के बीच कम से कम 1.5 मील क्षैतिज और 500 फीट ऊर्ध्वाधर दूरी रखी जानी चाहिए। प्रारंभिक जानकारी में हालांकि दोनों विमान एक-दूसरे की ओर सीधे नहीं बढ़ रहे थे। एयर ट्रैफिक कंट्रोल में हुई चूक जांच का प्रमुख बिंदु यह है कि Marine One के उड़ान भरने के दौरान रोनाल्ड रीगन नेशनल एयरपोर्ट से वाणिज्यिक उड़ानों को रोकने वाला सुरक्षा प्रोटोकॉल प्रभावी रूप से लागू नहीं हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, Marine One के उड़ान भरने के समय सामान्य प्रक्रिया के तहत वाणिज्यिक विमानों की आवाजाही रोक दी जानी चाहिए थी। लेकिन यातायात नियंत्रकों ने ऐसा नहीं किया, जिसके कारण दोनों विमानों के बीच separation संबंधी घटना हुई। FAA ने बनाई सुरक्षा समीक्षा टीम घटना के बाद FAA ने मामले की समीक्षा के लिए Safety Review Team गठित की है। NTSB भी यह जांच कर रहा है कि Marine One और यात्री विमान के बीच निर्धारित सुरक्षा दूरी क्यों बरकरार नहीं रह सकी। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जनवरी 2025 में रीगन नेशनल एयरपोर्ट के पास एक यात्री विमान और अमेरिकी सेना के हेलीकॉप्टर की टक्कर में 67 लोगों की मौत हुई थी। उस हादसे के बाद वॉशिंगटन के आसपास हेलीकॉप्टर और वाणिज्यिक विमानों के संचालन को लेकर सुरक्षा नियम और कड़े किए गए थे। दोनों विमान सुरक्षित, राष्ट्रपति ट्रंप को खतरा नहीं अधिकारियों के अनुसार, Marine One और यात्री विमान दोनों ने अपनी उड़ान सुरक्षित रूप से पूरी की। इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप तत्काल किसी खतरे में नहीं थे। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के बावजूद यात्री विमान को उड़ान भरने की अनुमति कैसे मिली और एयर ट्रैफिक कंट्रोल स्तर पर चूक किस वजह से हुई।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका ने ब्राजील की राजदूत मारिया लुइजा रिबेरो वियोटी का वीजा रद्द कर दिया है। अमेरिका के इस कदम से दोनों देशों के बीच पहले से जारी राजनयिक विवाद और गहरा गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की सरकार के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बढ़ रहे हैं। अमेरिकी राजदूत की नियुक्ति को लेकर विवाद अमेरिका और ब्राजील के बीच ताजा विवाद की एक बड़ी वजह राजदूतों की नियुक्ति को लेकर पैदा हुआ गतिरोध है। ब्राजील ने ट्रंप प्रशासन की ओर से ब्रासीलिया में अमेरिकी राजदूत के लिए नामित डैनियल पेरेज को मंजूरी नहीं दी। इसके अलावा ब्राजील ने दो अमेरिकी राजनयिकों को वीजा देने से भी इनकार कर दिया था। अमेरिकी प्रशासन ने ब्राजील के इन कदमों को राजनयिक प्रक्रिया में अनुचित हस्तक्षेप बताया है। इसके जवाब में अब वॉशिंगटन ने ब्राजील की राजदूत का वीजा रद्द कर दिया है। ब्राजील ने अमेरिका के कदम की आलोचना की ब्राजील ने अमेरिकी कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने अमेरिका के इस कदम को गैर-जिम्मेदाराना बताया और संकेत दिया कि वॉशिंगटन की कार्रवाई ब्राजील के आंतरिक मामलों और आगामी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशों से जुड़ी हो सकती है। ब्राजील में अक्टूबर 2026 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया और देश की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर अमेरिका और ब्राजील के बीच पहले से ही मतभेद चल रहे हैं। व्यापारिक विवाद ने भी बढ़ाई दूरी दोनों देशों के बीच तनाव केवल राजनयिक मुद्दों तक सीमित नहीं है। अमेरिका ने जुलाई में ब्राजील के कुछ उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की कार्रवाई की थी। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने ब्राजील की कुछ व्यापारिक नीतियों और प्रथाओं को अमेरिकी वाणिज्य के लिए अनुचित बताया था। इसके अलावा अमेरिका और ब्राजील के नेताओं के बीच ब्राजील की चुनावी प्रक्रिया और घरेलू राजनीति को लेकर भी मतभेद सामने आते रहे हैं। इन घटनाक्रमों के कारण दोनों देशों के संबंधों में तनाव लगातार बढ़ रहा है। सामान्य संबंध बहाल करने का रास्ता खुला अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वीजा रद्द करने का फैसला स्थायी रूप से संबंध तोड़ने या ब्राजील की राजदूत को देश से निष्कासित करने के बराबर नहीं है। अमेरिका ने कहा है कि यदि राजनयिक स्तर पर पारस्परिकता कायम होती है तो वीजा बहाल करने का रास्ता खुला है। फिलहाल दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद के साथ व्यापार और चुनावी मुद्दे भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में ब्राजील और अमेरिका के बीच बातचीत और दोनों सरकारों के अगले कदम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।