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Trump Wants Iran Deal, Not War

ईरान पर युद्ध नहीं, समझौता चाहते हैं ट्रंप; परमाणु हथियार को बताया अमेरिका की 'रेड लाइन'

surbhi अगस्त 6, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran, emphasizing diplomacy while calling nuclear weapons America's red line.
Trump on Iran Nuclear Deal and Diplomacy

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उनकी प्राथमिकता युद्ध नहीं, बल्कि समझौता है। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। ट्रंप ने इसे अमेरिका की "रेड लाइन" बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

'युद्ध नहीं, लोगों की जान बचाना चाहता हूं'

लास वेगास में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान का विकल्प मौजूद था, लेकिन उन्होंने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य लोगों की जान बचाना है और यदि बातचीत से समाधान निकल सकता है तो वही बेहतर रास्ता है।

'द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े हमले की तैयारी थी'

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ एक बेहद बड़े सैन्य ऑपरेशन की योजना तैयार थी। उनके अनुसार, यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक हो सकता था। उन्होंने कहा कि बातचीत की पहल होने के बाद इस अभियान को रोक दिया गया और अब दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी है।

परमाणु हथियार पर नहीं होगा समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोहराया कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यही अमेरिका की सबसे स्पष्ट नीति है और इस मुद्दे पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। ट्रंप का कहना है कि उनका प्रशासन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी है कूटनीतिक प्रयास

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और इसके सामान्य रूप से खुलने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई के अनुसार, दोनों देशों के बीच समझौते का मसौदा लगभग तैयार है। यदि प्रक्रिया में कोई बाहरी बाधा नहीं आती, तो जल्द ही संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जानकारी दी जाएगी।

वैश्विक नजरें मध्य पूर्व पर

मध्य पूर्व में जारी तनाव, ईरान-अमेरिका संबंध और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चल रही बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में होने वाले किसी भी समझौते का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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कीव में रूसी मिसाइल और ड्रोन हमले के बाद राहत अभियान
यूक्रेन पर रूस का भीषण हमला, कीव में 17 लोगों की मौत; 44 घायल

कीव, एजेंसियां। रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमले में कम से कम 17 लोगों की मौत हुई है, जबकि 44 लोग घायल हुए हैं। हमले के बाद राजधानी के कई इलाकों में आग लग गई और राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया।   मिसाइल और ड्रोन से बड़े पैमाने पर हमला     रूस ने रात के दौरान कीव और उसके आसपास के क्षेत्रों को निशाना बनाया। हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, कई नागरिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े स्थान भी हमले की चपेट में आए।   हमले के बाद राजधानी के कई हिस्सों में आग लग गई। आपातकालीन सेवाओं ने प्रभावित इलाकों में पहुंचकर राहत और बचाव अभियान शुरू किया। कुछ स्थानों पर मलबे में लोगों के फंसे होने की भी सूचना सामने आई है।   यूक्रेन की वायु रक्षा के सामने चुनौती     हमले के दौरान यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली के सामने बड़ी चुनौती देखने को मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, यूक्रेन ने कई ड्रोन को मार गिराया, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यूक्रेन के पास पैट्रियट जैसी वायु रक्षा प्रणालियों के लिए इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी बताई जा रही है।     जेलेंस्की ने सहयोगी देशों से मांगी मदद     यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हमले के बाद सहयोगी देशों से अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणालियां और मिसाइलें उपलब्ध कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों से नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल अतिरिक्त क्षमता की जरूरत है।   इस हमले के बाद रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में तनाव और बढ़ गया है। यूक्रेन ने भी रूस के खिलाफ ड्रोन हमलों को तेज किया है, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव लगातार गंभीर बना हुआ है।

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बलूचिस्तान का बड़ा ऐलान, 11 अगस्त को मनाएगा 'स्वतंत्रता दिवस'; पाकिस्तान से अलग राष्ट्र की फिर उठी मांग

पाकिस्तान के सबसे बड़े और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध प्रांत बलूचिस्तान को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अब बलूचिस्तान से जुड़े एक संगठन ने 11 अगस्त को अपना 'स्वतंत्रता दिवस' मनाने का ऐलान किया है। संगठन ने दुनिया भर में रहने वाले बलूच समुदाय से इस दिन बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित करने और कथित स्वतंत्र बलूचिस्तान का झंडा फहराने की अपील की है। साथ ही, संगठन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की मांग भी दोहराई है। 11 अगस्त को क्यों चुना गया? रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान से जुड़े नेताओं का दावा है कि 11 अगस्त 1947 को, ब्रिटिश शासन समाप्त होने से ठीक पहले, तत्कालीन कलात रियासत ने स्वयं को स्वतंत्र घोषित किया था। संगठन का कहना है कि बाद में बलूचिस्तान को पाकिस्तान में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। हालांकि, पाकिस्तान इस दावे को स्वीकार नहीं करता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बलूचिस्तान को पाकिस्तान का ही हिस्सा माना जाता है। इसलिए संगठन का यह दावा उसकी अपनी राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है, न कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त तथ्य को। मीर यार बलोच की अपील बलूच आंदोलन से जुड़े नेता मीर यार बलोच ने विभिन्न देशों में रहने वाले बलूच समुदाय से 11 अगस्त को अपने घरों, बाजारों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर कथित स्वतंत्र बलूचिस्तान का झंडा फहराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अब हर वर्ष 11 अगस्त को बलूचिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मनाया जाएगा। उनका दावा है कि यह दिन बलूच पहचान और आत्मनिर्णय के अधिकार का प्रतीक है। पहले भी कर चुके हैं स्वतंत्रता का दावा यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब कुछ सप्ताह पहले भी रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान से जुड़े नेताओं ने खुद को पाकिस्तान से स्वतंत्र घोषित करने का दावा किया था। हालांकि: पाकिस्तान सरकार ने इस दावे को पूरी तरह खारिज किया है। किसी भी देश या संयुक्त राष्ट्र ने बलूचिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं दी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय बलूचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा ही मानता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की अपील संगठन का कहना है कि जब तक बलूचिस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं मिलती, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास संभव नहीं होगा। उसने संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों से बलूचिस्तान के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करने की अपील की है। संगठन का यह भी दावा है कि दुनिया भर में रहने वाले करोड़ों बलूच स्वयं को एक अलग राष्ट्र का नागरिक मानते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। अंतरिम संविधान का भी किया था ऐलान रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने 8 फरवरी 2026 को एक अंतरिम संविधान जारी करने का भी दावा किया था। संगठन के अनुसार, इस दस्तावेज का उद्देश्य एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और समान अधिकारों वाले गणराज्य की रूपरेखा प्रस्तुत करना है। मीर यार बलोच ने उस समय कहा था कि यह संविधान वर्षों से संघर्ष कर रहे बलूच लोगों की आकांक्षाओं का प्रतीक है और दुनिया के सामने यह संदेश देता है कि बलूचिस्तान लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ना चाहता है। क्या है मौजूदा स्थिति? बलूचिस्तान में लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियां और सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष जारी है। वहीं पाकिस्तान सरकार का कहना है कि वह प्रांत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। दूसरी ओर, अलगाववादी संगठन लगातार राजनीतिक अधिकारों और स्वतंत्रता की मांग उठाते रहे हैं। ऐसे में 11 अगस्त को प्रस्तावित 'स्वतंत्रता दिवस' कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर बलूचिस्तान का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आ सकता है।  

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