Strait of Hormuz

Oil tankers passing through the Strait of Hormuz amid rising US-Iran tensions after Iran claimed to stop three vessels
US-Iran Conflict: होर्मुज में ईरान का बड़ा एक्शन, तीन तेल टैंकर रोकने का दावा; ट्रंप की चेतावनी के बाद बढ़ा तनाव

US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चेतावनी की अनदेखी करने वाले तीन तेल टैंकरों को रोक दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद दोनों देशों के बीच टकराव और गहरा गया है। होर्मुज में तीन तेल टैंकर रोकने का दावा ईरान के सरकारी टीवी के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि जिन तीन तेल टैंकरों ने ईरान की चेतावनी को नजरअंदाज किया, उन्हें कुछ घंटे पहले रोक दिया गया। हालांकि, टैंकरों की पहचान और घटना की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी जब्त की गई संपत्तियों का इस्तेमाल करने वाले किसी भी देश या कंपनी के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कार्रवाई से पहले दी थी सख्त चेतावनी टैंकरों को रोकने के दावे से कुछ घंटे पहले ही ईरान ने दुनिया भर के देशों और शिपिंग कंपनियों को चेतावनी जारी की थी। ईरान का कहना था कि यदि किसी देश या कंपनी ने अमेरिका द्वारा जब्त की गई ईरानी संपत्तियों का उपयोग किया, तो उसके जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ट्रंप के फैसले से बढ़ा विवाद यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुए जहाजों को ईरान की जब्त संपत्तियों से मुआवजा दिया जाएगा। ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। ईरानी विदेश मंत्री ने जताई आपत्ति ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि किसी देश की जब्त संपत्तियों का इस्तेमाल ऐसे दावों के भुगतान के लिए करना, जिनका उन संपत्तियों से कोई सीधा संबंध नहीं है, अंतरराष्ट्रीय नियमों को कमजोर करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकारें इस तरह दूसरे देशों की संपत्तियों को जब्त कर उनका उपयोग करना शुरू कर देंगी, तो भविष्य में किसी भी देश या संस्था की संपत्ति सुरक्षित नहीं रहेगी और इससे वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अस्थिरता बढ़ेगी। अमेरिकी प्रस्ताव पर ईरान का कड़ा रुख ईरानी सैन्य कमान 'खातम अल-अंबिया' के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फिकारी ने भी अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी देश या कंपनी ने ईरान की जब्त संपत्तियों का इस्तेमाल किया, तो ईरान के सशस्त्र बल ऐसे जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका के इस कदम के गंभीर परिणाम हो सकते हैं और ईरान अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हुई है।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
India addresses the UN Security Council, condemning attacks on commercial ships carrying Indian sailors and urging maritime security
UNSC में भारत का सख्त संदेश: भारतीय जहाजों पर हमले बर्दाश्त नहीं, समुद्री सुरक्षा बहाल करने की मांग

India at UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में भारतीय नाविकों वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। साथ ही, भारत ने क्षेत्र में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही बहाल करने की मांग की। भारतीय नागरिकों पर हमलों पर जताई चिंता डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो की पहल पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि हालिया हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत, एक अन्य लापता है, जबकि कई भारतीय घायल हुए हैं। उन्होंने इन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। इन जहाजों पर हुए हमलों की निंदा भारत ने विशेष रूप से GFS Galaxy, MT Al Bahia और MT Mombasa जैसे जहाजों पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस तरह की हिंसा वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। पी. हरीश ने कहा कि भारत समुद्री यात्रियों को निशाना बनाने और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर सुरक्षित आवाजाही में बाधा पहुंचाने वाली हर प्रकार की हिंसा की कड़ी निंदा करता है। भारत ने UNSC से क्या मांग की? भारत ने सुरक्षा परिषद से अपील की कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना तुरंत बंद किया जाए। भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होर्मुज जलडमरूमध्य समेत सभी वैश्विक समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र, सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही जल्द से जल्द बहाल की जानी चाहिए। भारत ने दोहराया कि क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है। भारत के लिए क्यों अहम है मिडिल ईस्ट? भारत ने सुरक्षा परिषद में स्पष्ट किया कि मिडिल ईस्ट और खाड़ी क्षेत्र उसके लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। भारत का ऊर्जा आयात, व्यापार और निवेश भी बड़े पैमाने पर इसी क्षेत्र से जुड़ा है। भारतीय प्रतिनिधि ने बताया कि खाड़ी देशों के साथ भारत का करीब 180 अरब डॉलर का वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार, 31 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और 52 अरब डॉलर की वार्षिक प्रेषण (Remittances) इस क्षेत्र के महत्व को दर्शाते हैं। क्षेत्रीय तनाव पर भारत की नजर भारत ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए सभी पक्षों को संयम बरतते हुए कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, ताकि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और आम नागरिकों की जान खतरे में न पड़े।  

kalpana जुलाई 29, 2026 0
Crude oil prices rise above $86 as US inventories fall and Iran-US tensions impact global markets
Crude Oil Price: 33 लाख बैरल स्टॉक घटते ही कच्चे तेल में उछाल, Brent $86 के पार; Iran-US तनाव पर नजर

Crude Oil Price: वैश्विक तेल बाजार में बुधवार को एक बार फिर तेज हलचल देखने को मिली। अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में बड़ी गिरावट और OPEC+ की उत्पादन नीति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी आई। Brent crude 3.2% चढ़कर $86.80 प्रति बैरल और WTI crude 3.4% बढ़कर $81.95 प्रति बैरल पहुंच गया। मंगलवार को करीब 5% की गिरावट के बाद तेल की कीमतों में यह वापसी बाजार में बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाती है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी Energy Information Administration यानी EIA के आधिकारिक इन्वेंट्री आंकड़ों पर है। अमेरिका में 33 लाख बैरल घटा कच्चे तेल का स्टॉक तेल की कीमतों में बुधवार की तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका में क्रूड इन्वेंट्री में गिरावट रही। American Petroleum Institute (API) के आंकड़ों के मुताबिक, 24 जुलाई को समाप्त सप्ताह में अमेरिकी कच्चे तेल का भंडार करीब 33 लाख बैरल घटा। हालांकि, पेट्रोलियम उत्पादों के स्टॉक में बढ़ोतरी देखने को मिली। इस दौरान: गैसोलीन स्टॉक करीब 9.18 लाख बैरल बढ़ा डिस्टिलेट स्टॉक करीब 3.55 लाख बैरल बढ़ा अब बाजार की नजर EIA के आधिकारिक आंकड़ों पर है। अगर सरकारी आंकड़े भी क्रूड स्टॉक में बड़ी गिरावट की पुष्टि करते हैं, तो तेल की कीमतों को आगे भी सपोर्ट मिल सकता है। OPEC+ की उत्पादन नीति भी अहम कच्चे तेल की कीमतों के लिए OPEC+ की अगली रणनीति भी महत्वपूर्ण बन गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, संगठन अक्टूबर से लगातार तीन महीनों तक तेल उत्पादन बढ़ाने की अपनी योजना को रोकने पर विचार कर सकता है। अगर उत्पादन बढ़ाने की रफ्तार धीमी होती है, तो बाजार में अतिरिक्त सप्लाई का दबाव कम हो सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों को मजबूती मिल सकती है। फिलहाल OPEC+ उन देशों द्वारा पहले स्वेच्छा से घटाए गए उत्पादन को धीरे-धीरे बाजार में वापस ला रहा है। ऐसे में उत्पादन नीति में कोई भी बदलाव वैश्विक तेल कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है। Iran-US तनाव से फिर बढ़ी बाजार की चिंता तेल बाजार में भू-राजनीतिक तनाव भी बड़ा फैक्टर बना हुआ है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव ने खास तौर पर Strait of Hormuz को लेकर चिंता बढ़ाई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मंगलवार को संघर्ष में कुछ समय के लिए तनाव कम होने की उम्मीद से तेल की कीमतों में लगभग 5% की गिरावट आई थी। लेकिन अब फिर अनिश्चितता बढ़ने से कीमतों में तेजी लौट आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए, लेकिन बातचीत विफल होने की स्थिति में आगे कार्रवाई की चेतावनी भी दी। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू होने से इनकार किया है। Strait of Hormuz पर ओमान का प्रस्ताव इस बीच Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही को लेकर एक नई पहल सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, ओमान ने ईरान के सामने इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए स्वैच्छिक शुल्क व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का उद्देश्य Hormuz के रास्ते होने वाले व्यापार में रुकावट को कम करना और जहाजों की आवाजाही को सुचारु बनाना है। खाड़ी देशों के समर्थन वाला यह प्रस्ताव अगर आगे बढ़ता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंता कुछ कम हो सकती है। आगे क्या होगा? फिलहाल कच्चे तेल की दिशा तीन प्रमुख संकेतकों पर निर्भर करेगी—अमेरिकी इन्वेंट्री डेटा, OPEC+ की उत्पादन नीति और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव। अगर अमेरिकी क्रूड स्टॉक में गिरावट जारी रहती है और OPEC+ उत्पादन बढ़ाने की गति सीमित करता है, तो तेल की कीमतों को और मजबूती मिल सकती है। वहीं Iran-US तनाव में कमी और Hormuz में सामान्य स्थिति बनने से कीमतों पर दबाव आ सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आयात बिल, रुपये की स्थिति और महंगाई पर असर पड़ सकता है।  

surbhi जुलाई 29, 2026 0
Oil tanker explosion in the Strait of Hormuz after reportedly hitting a sea mine
होर्मुज स्ट्रेट में बड़ा हादसा: समुद्री माइन से टकराकर ऑयल टैंकर में विस्फोट, ईरान ने बताया तय मार्ग से भटका जहाज

Staright Of Hormuz: दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट में बड़ा हादसा हुआ है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, निर्धारित समुद्री मार्ग से भटकने के बाद एक ऑयल टैंकर समुद्री माइन (Sea Mine) से टकरा गया, जिससे उसमें जोरदार विस्फोट हो गया। घटना के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कैसे हुआ हादसा? ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, ऑयल टैंकर ईरान द्वारा निर्धारित सुरक्षित समुद्री मार्ग छोड़कर दूसरे रास्ते पर चला गया था। इसी दौरान वह समुद्री माइन से टकरा गया, जिससे जहाज में भीषण विस्फोट हुआ। रिपोर्ट में टैंकर को "अवैध तेल टैंकर" बताया गया है। ईरान पहले भी कई बार चेतावनी दे चुका है कि निर्धारित मार्गों से हटकर गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बातचीत जारी हादसे के बावजूद ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट तथा आसपास के समुद्री मार्गों को फिर से सामान्य रूप से खोलने को लेकर बातचीत जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है, हालांकि अंतिम समझौते तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है। अमेरिका ने रोकी बमबारी रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर जारी अमेरिकी बमबारी को फिलहाल रोक दिया है। बताया जा रहा है कि यह फैसला कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने के लिए लिया गया। वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि ईरान के खिलाफ लंबा सैन्य अभियान चलाने से पैट्रियट एंटी-मिसाइल इंटरसेप्टर का भंडार तेजी से कम हो सकता है। इससे क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है। ईरान का आरोप- अमेरिका ने समझौता तोड़ा 25 जुलाई को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर आरोप लगाया था कि उसने होर्मुज स्ट्रेट में पहले हुए समझौते का उल्लंघन किया है। अराघची ने कहा कि अमेरिका ईरान द्वारा तय किए गए सुरक्षित समुद्री मार्गों के बजाय वैकल्पिक जहाजरानी मार्ग विकसित करने की कोशिश कर रहा है, जो दोनों देशों के बीच हुए समझौते के खिलाफ है। चार कमर्शियल जहाजों को भी रोका गया ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने पिछले 24 घंटे में चार कमर्शियल जहाजों को रोककर उनका मार्ग बदलवाया। ईरान का दावा है कि ये जहाज असुरक्षित और अनधिकृत समुद्री रास्तों से गुजर रहे थे। हालांकि, इन जहाजों की पहचान और उनके देशों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।  

kalpana जुलाई 27, 2026 0
Iran responds to Donald Trump’s warning, saying any attack on its civilian infrastructure will trigger a strong retaliation
US-Iran War: ट्रंप की धमकी पर ईरान का पलटवार, बोला- एक भी पुल या पावर प्लांट पर हमला हुआ तो मिलेगा करारा जवाब

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसके किसी पुल, पावर प्लांट या अन्य नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला किया गया तो उसका जवाब तुरंत और कड़े तरीके से दिया जाएगा. दोनों देशों के बीच खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है. अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का आरोप ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि नागरिकों के उपयोग वाले पुलों, बिजलीघरों और अन्य जरूरी ढांचों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन है और इसे युद्ध अपराध माना जाता है. बकाई ने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के किसी नागरिक ढांचे पर हमला किया तो उसे उसी भाषा में जवाब मिलेगा. उन्होंने अमेरिकी सैनिकों से भी अपील की कि वे किसी भी गैरकानूनी सैन्य आदेश का पालन न करें. ट्रंप की धमकी के बाद बढ़ा तनाव तनाव उस समय और बढ़ गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करता है, तो अमेरिका ईरान के पुलों और बिजलीघरों को निशाना बना सकता है. ट्रंप के इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई. ईरान की चेतावनी- अमेरिकी हितों पर होगा जवाबी हमला ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने तस्नीम न्यूज एजेंसी से कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान के किसी पुल या पावर प्लांट पर हमला किया तो जवाब में ईरान पूरे क्षेत्र में मौजूद उन ठिकानों को निशाना बनाएगा, जहां अमेरिका के रणनीतिक या आर्थिक हित जुड़े हैं. अधिकारी ने दावा किया कि ईरान ने हाल के दिनों में अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है और जरूरत पड़ने पर जवाब देने में सक्षम है. 'सामूहिक सजा' बताया अमेरिकी रुख ईरान ने अमेरिकी रुख को "सामूहिक सजा" करार देते हुए कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है. तेहरान का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है और इससे क्षेत्रीय अस्थिरता और बढ़ेगी. होर्मुज जलडमरूमध्य पर कायम रहेगा ईरान का रुख ईरान ने साफ किया कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी संप्रभुता और नियंत्रण बनाए रखेगा. विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि यदि ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया तो उसका जवाब "जैसे को तैसा" होगा और प्रतिक्रिया बेहद सख्त होगी. बढ़ सकती है क्षेत्रीय चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ती बयानबाजी से पश्चिम एशिया में तनाव और गहरा सकता है. खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर व्यापक असर डाल सकता है.  

kalpana जुलाई 24, 2026 0
US military conducts a 12th consecutive night of airstrikes on Iran amid escalating tensions
ईरान पर लगातार 12वीं रात अमेरिकी एयरस्ट्राइक, ट्रंप बोले- पीछे नहीं हटेंगे

अमेरिका ने बुधवार (भारतीय समयानुसार गुरुवार तड़के) लगातार 12वीं रात ईरान पर हवाई हमले किए। युद्धविराम टूटने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यह सैन्य अभियान जारी है। वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि हमले नहीं रुके तो वह क्षेत्र के तेल ठिकानों, ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य रणनीतिक आर्थिक ढांचों को निशाना बना सकता है। CENTCOM ने क्या कहा? अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि ताजा हवाई हमले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर किए गए। अमेरिकी सेना का कहना है कि अभियान का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल क्षेत्र से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने में किया जा रहा है। CENTCOM ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह अभियान फिलहाल जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर आगे भी सैन्य कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप की सख्त चेतावनी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले किसी भी जहाज पर हमला हुआ, तो अमेरिका ईरान के पुलों, बिजलीघरों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बनाएगा। उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार में बाधा डालने की हर कोशिश का जवाब सैन्य कार्रवाई से दिया जाएगा। ईरान का पलटवार का ऐलान अमेरिकी चेतावनी के बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी सेना और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यदि अमेरिका ने देश के रणनीतिक ठिकानों पर हमला किया, तो ईरान भी पूरी ताकत से जवाब देगा। ईरान ने यह भी चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर वह तेल आपूर्ति बाधित कर सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है। वैश्विक चिंता बढ़ी लगातार हो रहे हमलों के बीच दुनिया के दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग—होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य (Bab-el-Mandeb Strait)—की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
US President Donald Trump warns Iran of military action over attacks on ships in the Strait of Hormuz
होर्मुज में जहाज पर हमला हुआ तो ईरान के पावर प्लांट उड़ाएंगे: ट्रंप

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में किसी भी जहाज पर मिसाइल, ड्रोन या गोलीबारी से हमला किया गया, तो अमेरिका ईरान के भीतर पुलों, पावर प्लांट और अन्य रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाएगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक तनाव चरम पर है। ट्रंप की दो टूक चेतावनी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अमेरिकी या अन्य देशों के जहाजों पर ईरान की ओर से मिसाइल, ड्रोन या गोलीबारी की जाती है, तो अमेरिका इसका सीधा जवाब ईरान के महत्वपूर्ण रणनीतिक ठिकानों पर हमला करके देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। ईरान ने लगाए अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन के आरोप ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने और ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाने की धमकी देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी सभी जानकारियां पहले ही अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। बगाई ने अमेरिकी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कुछ स्थानों को लेकर लगाए जा रहे आरोप केवल सैन्य कार्रवाई का बहाना हैं। ईरान की पलटवार की चेतावनी ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर किसी भी हमले का पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा। इस्माइल बगाई ने कहा कि ईरानी जनता किसी भी बाहरी आक्रामकता का सामना करने के लिए तैयार है और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। लारक द्वीप पर कथित हमले से बढ़ा तनाव तनाव के बीच ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थित लारक द्वीप पर अमेरिकी मिसाइल हमला हुआ। ईरानी समाचार एजेंसी तसनीम के अनुसार, स्थानीय लोगों ने विस्फोट की आवाजें सुनीं और अधिकारी नुकसान का आकलन कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिका ने इस कथित हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, इसलिए इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Larak Island near the Strait of Hormuz amid rising US-Iran tensions and concerns over global oil supply
होर्मुज के पास लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले का दावा, वैश्विक तेल आपूर्ति पर बढ़ी चिंता

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास स्थित लारक द्वीप (Larak Island) पर मिसाइल हमला किया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, हमले के बाद इलाके में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं और स्थानीय प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है। हालांकि, अमेरिका ने इस कथित हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लारक द्वीप पर हमले का दावा ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, बुधवार दोपहर लारक द्वीप पर मिसाइल हमला हुआ। स्थानीय लोगों ने तेज धमाकों की आवाजें सुनने की बात कही है, जबकि संबंधित एजेंसियां नुकसान का आकलन कर रही हैं। फिलहाल इस घटना की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी सैन्य अभियान जारी इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया था कि उसने लगातार कई रातों से ईरान से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिका का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनसे होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। तेल आपूर्ति पर मंडराया संकट होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर निर्यात होने वाले करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आवाजाही इसी मार्ग से होती है। ऐसे में क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाजार पर पड़ सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यदि ईरान इस मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने या जहाजों से शुल्क वसूलने की कोशिश करता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा। ट्रंप की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान समर्थित हूती विद्रोही सऊदी अरब के समुद्री मार्गों को बाधित करने की कोशिश करते हैं, तो अमेरिका कड़ा सैन्य जवाब देगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को अमेरिकी कार्रवाई से हुए नुकसान की भरपाई करने में कई वर्ष लग सकते हैं। वहीं, ईरान की ओर से दावा किया गया है कि उसने होर्मुज क्षेत्र में दो तेल टैंकरों को रोका है। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और तेल बाजार के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
US President Donald Trump warns Iran of possible strikes on nuclear sites amid escalating military tensions
US Iran War: ट्रंप का अल्टीमेटम! पावर प्लांट के बाद न्यूक्लियर साइट्स पर हमले की चेतावनी, बढ़ा वैश्विक तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। वहीं, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकर पर हमले के बाद दोनों देशों के बीच टकराव और गहरा गया है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं। परमाणु ठिकानों पर ट्रंप की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान अपनी गतिविधियां नहीं रोकता, तो उसके रणनीतिक और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने विशेष रूप से पिकऐक्स माउंटेन क्षेत्र का जिक्र किया, जो नतांज परमाणु केंद्र के पास स्थित है। विशेषज्ञ इसे ईरान के सबसे सुरक्षित परमाणु परिसरों में गिनते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य बना टकराव का केंद्र तनाव का सबसे बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना हुआ है। ईरान द्वारा एक तेल टैंकर पर हमले के बाद अमेरिका ने लगातार हवाई अभियान तेज कर दिया है। इसके बावजूद ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपनी मौजूदगी बनाए रखी है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से गुजरती है, इसलिए यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है। पुराना परमाणु विवाद फिर सुर्खियों में ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु विवाद नया नहीं है। वर्ष 2002 में ईरान के गुप्त परमाणु कार्यक्रम के सामने आने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा। 2015 में परमाणु समझौते (JCPOA) से स्थिति कुछ समय के लिए सामान्य हुई, लेकिन 2018 में अमेरिका के समझौते से बाहर होने के बाद विवाद फिर गहरा गया। हालिया सैन्य कार्रवाई ने इस पुराने विवाद को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना दिया है। तेल बाजार पर पड़ सकता है बड़ा असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज उछाल आने की आशंका है। ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Petrol pump display showing fuel prices as global crude oil rises due to Strait of Hormuz tensions on July 23, 2026.
Petrol Diesel Price Today: होर्मुज संकट से 3% उछला क्रूड ऑयल, जानिए 23 जुलाई 2026 को पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

Petrol Diesel Price Today, 23 July 2026: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। जियोपॉलिटिकल जोखिम बढ़ने से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 3% से अधिक उछल गई, लेकिन राहत की बात यह है कि भारत में 23 जुलाई 2026 को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। सरकारी तेल कंपनियों ने लगातार 58वें दिन ईंधन के दाम स्थिर रखे हैं। होर्मुज संकट से क्यों बढ़ी कच्चे तेल की कीमत? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहां बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल पर फिर से Geopolitical Risk Premium जुड़ गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। गुरुवार सुबह: Brent Crude: 3.36% की बढ़त के साथ 94.07 डॉलर प्रति बैरल WTI Crude: 1.15% की तेजी के साथ 87.83 डॉलर प्रति बैरल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं जारी रहती हैं, तो वर्ष की चौथी तिमाही तक ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकता है। 58 दिनों से नहीं बदले पेट्रोल-डीजल के दाम सरकारी तेल कंपनियों ने 25 मई 2026 के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले मई में सिर्फ 11 दिनों के भीतर चार बार कीमतें बढ़ाई गई थीं: 15 मई: पेट्रोल ₹3.00 और डीजल ₹3.29 प्रति लीटर महंगा 19 मई: पेट्रोल ₹0.87 और डीजल ₹0.91 महंगा 23 मई: पेट्रोल ₹0.87 और डीजल ₹0.91 महंगा 25 मई: पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 महंगा 23 जुलाई 2026: प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट शहर पेट्रोल (₹/लीटर) डीजल (₹/लीटर) दिल्ली 102.12 95.20 मुंबई 111.21 97.83 कोलकाता 113.51 99.82 चेन्नई 107.77 99.55 नोएडा 102.12 97.56 चंडीगढ़ 101.51 89.47 लखनऊ 101.89 95.36 पटना 113.37 99.36 रांची 105.26 100.49 भोपाल 114.57 99.64 ऐसे चेक करें अपने शहर का पेट्रोल-डीजल रेट अगर आप अपने शहर का ताजा ईंधन मूल्य जानना चाहते हैं, तो SMS के जरिए भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। Indian Oil: RSP <City Code> लिखकर 9224992249 पर भेजें। BPCL: RSP <City Code> लिखकर 9223112222 पर भेजें। HPCL: HPPRICE <City Code> लिखकर 9222201122 पर भेजें। क्या आगे बढ़ सकते हैं दाम? अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ते कच्चे तेल के दाम और पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए आने वाले दिनों में घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बनाए हुए हैं।  

surbhi जुलाई 23, 2026 0
Iran claims attacks on US military bases in Bahrain and Kuwait amid rising Middle East tensions
ईरान का दावा- बहरीन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला, होर्मुज में 2 तेल टैंकर रोके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। साथ ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो तेल टैंकरों को रोकने का भी दावा किया है। हालांकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए हैं और इस कार्रवाई में ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। अमेरिका का दावा- होर्मुज की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी हमलों का निशाना ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, एयर डिफेंस सिस्टम और नौसैनिक ठिकाने रहे। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अमेरिका ने यह भी दावा किया कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद फिलहाल इस अहम समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। पुरानी दुश्मनी ने फिर बढ़ाया संकट अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई वर्षों से जारी है। वर्ष 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी हमले में मौत के बाद दोनों देशों के रिश्ते लगातार बिगड़ते गए। इसके बाद खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमले, ड्रोन हमले और सैन्य टकराव की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बढ़ी सैन्य गतिविधियों ने पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और बढ़ा दी है। दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी मात्रा इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। ऐसे में यदि यहां तनाव और बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर भारत सहित तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था, ईंधन की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। बढ़ सकती है क्षेत्रीय अस्थिरता ईरान और अमेरिका के बीच लगातार हो रही जवाबी सैन्य कार्रवाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में नए संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। फिलहाल दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि इस तनाव का असर केवल मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
Commercial ship catches fire after missile attack in Strait of Hormuz
होर्मुज जलडमरूमध्य में मिसाइल हमला, जहाज में लगी भीषण आग; चालक दल सुरक्षित रेस्क्यू

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सोमवार को एक वाणिज्यिक जहाज पर मिसाइल हमला हुआ, जिसके बाद उसमें भीषण आग लग गई। हादसे के बाद जहाज पर सवार सभी चालक दल (क्रू) के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना ने पहले से जारी अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं। UKMTO ने की हमले की पुष्टि ब्रिटेन की यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मिसाइल हमले के तुरंत बाद चालक दल ने जहाज खाली कर दिया था। बाद में एक टग बोट की मदद से सभी क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ओमान के कुमजार के पास हुआ हमला UKMTO के अनुसार, हमला ओमान के कुमजार से करीब 15 किलोमीटर (8 समुद्री मील) उत्तर-पश्चिम में हुआ। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और अब वह बिना चालक दल के समुद्र में बह रहा है। आग पर अभी तक पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है। एजेंसी ने क्षेत्र से गुजरने वाले सभी जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की सलाह दी है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बढ़ा खतरा यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका ने अपने एक और सैनिक की मौत की पुष्टि के बाद सोमवार को ईरान के उत्तर-पश्चिमी शहर तबरेज पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों बहरीन और कुवैत को निशाना बनाया। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा (5th Fleet) तैनात है, जिससे इस जवाबी कार्रवाई को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समुद्री व्यापार पर बढ़ा संकट होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते हमलों और सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग उद्योग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Panama warns that Strait of Hormuz tensions could trigger a global economic crisis
होर्मुज पर बढ़ते तनाव से दुनिया को चेतावनी! पनामा बोला- समुद्री कानून तोड़ा तो वैश्विक संकट गहराएगा

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पनामा ने पूरी दुनिया को चेतावनी दी है। पनामा के विदेश मंत्री जेवियर एडुआर्डो मार्टिनेज-अचा वास्केज ने कहा कि यदि इस अहम समुद्री मार्ग पर किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर एएनआई के अनुसार, विदेश मंत्री वास्केज ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यदि यहां तनाव बढ़ता है या नौवहन बाधित होता है, तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। उन्होंने बताया कि पनामा भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल पर निर्भर है, इसलिए यह संकट उनके देश के लिए भी चिंता का विषय है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर चिंता वास्केज ने बताया कि भारत के अधिकारियों के साथ हुई बातचीत में होर्मुज क्षेत्र में तैनात भारतीय नाविकों (सीफेयरर्स) की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में भारतीय इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर कार्यरत हैं और मौजूदा हालात उनकी सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं। पनामा ने इसे मानवीय और वैश्विक समुद्री सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। समुद्री कानून का पालन करने की अपील पनामा के विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश दुनिया के सबसे बड़े शिपिंग रजिस्ट्रियों में शामिल है, इसलिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का सम्मान करने और किसी भी परिस्थिति में समुद्री रास्तों को बाधित नहीं करने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अखंडता, देशों की संप्रभुता और पनामा नहर की तटस्थता जैसे सिद्धांतों की रक्षा करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। भारत से सहयोग की उम्मीद वास्केज ने बताया कि उनकी भारत यात्रा का एक अहम उद्देश्य पनामा नहर की तटस्थता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते में भारत की भागीदारी पर चर्चा करना भी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है और पनामा चाहता है कि भारत इस महत्वपूर्ण व्यवस्था का हिस्सा बने। IMO के साथ बढ़ाई जा रही समुद्री सुरक्षा उन्होंने कहा कि पनामा अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के साथ मिलकर दुनिया भर के नाविकों की सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। उनका मानना है कि समुद्री विवादों का समाधान सैन्य टकराव से नहीं, बल्कि बातचीत, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन से होना चाहिए। भारत के रुख का किया समर्थन मिडिल ईस्ट में जारी तनाव पर पनामा ने भारत के संयमित रुख का समर्थन करते हुए कहा कि शांति, संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान ही मौजूदा संकट का स्थायी समाधान है। विदेश मंत्री वास्केज ने दोहराया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों और जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए, क्योंकि यही वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और विश्व अर्थव्यवस्था की स्थिरता की सबसे बड़ी गारंटी है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
US and Iran military escalation raises fears of wider Middle East conflict
US-Iran War: अमेरिका ने दिखाई ताकत, ईरान का पलटवार; मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना की नई सैन्य तैयारियों, ताजा हवाई हमलों और ईरान के जवाबी एक्शन के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े सैन्य संघर्ष की आशंका गहरा गई है। इस टकराव का असर अब वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। CENTCOM ने दिखाई सैन्य ताकत अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोमवार को मिडिल ईस्ट में तैनात अपनी सेना की ऑपरेशनल तैयारियों का प्रदर्शन करते हुए कहा कि उसके सभी हथियार और सैन्य सिस्टम हर समय मिशन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। एएनआई के मुताबिक, अमेरिकी मरीन सैनिक हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम (HIMARS) सहित कई सैन्य उपकरणों के रखरखाव और तकनीकी तैयारियों में जुटे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। ईरान ने अमेरिका पर साधा निशाना CENTCOM के बयान के कुछ ही देर बाद ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका एक ओर शांति की बात करता है, जबकि दूसरी ओर मिडिल ईस्ट में लगातार सैन्य उपकरण और हथियार भेज रहा है। गालिबाफ ने कहा कि ईरान अब अमेरिकी रणनीति को अच्छी तरह समझ चुका है और उसी के अनुरूप अपनी तैयारी कर चुका है। अमेरिका के नए हवाई हमले अमेरिकी सेना ने सोमवार तड़के ईरान के कई ठिकानों पर नए हवाई हमले किए। इससे पहले अमेरिका ने पुष्टि की थी कि इराक में एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई। सेना के अनुसार, यह सैनिक एक ईरानी ड्रोन को निष्क्रिय करने की कार्रवाई के दौरान घायल हुआ था और बाद में उसकी मौत हो गई। ईरान का जवाबी हमला अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों बहरीन और कुवैत को निशाना बनाया। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा (5th Fleet) तैनात है, इसलिए इस हमले को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा संकट अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी पड़ने लगा है। समुद्री आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। ट्रंप का सख्त संदेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा, "हमने उन्हें आज रात फिर बहुत जोरदार जवाब दिया।" उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उन अमेरिकी सैनिकों के सम्मान में की गई है जिन्होंने हाल की घटनाओं में अपनी जान गंवाई। ट्रंप के बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका फिलहाल अपना सैन्य अभियान जारी रख सकता है। बढ़ सकती है क्षेत्रीय अस्थिरता विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया की नजरें अब दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हैं।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Explosion reported in Iran after US airstrikes near Bandar Abbas
ईरान पर फिर बरसे अमेरिकी बम, बंदर अब्बास समेत कई शहरों में धमाके; मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए हैं, जिससे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव और गहरा गया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यह सैन्य कार्रवाई शुरू की गई। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने में किया जा रहा था। बंदर अब्बास में जोरदार धमाका अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में जोरदार विस्फोट की खबर सामने आई। ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार, धमाके के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। वहीं, मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है, जिससे किसी भी संभावित हमले का जवाब दिया जा सके। चाबहार और कोनारक में भी धमाकों की गूंज ईरानी मीडिया के मुताबिक, दक्षिण-पूर्वी शहर चाबहार और कोनारक में भी कई धमाके हुए हैं। दोनों शहर ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित हैं और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कोनारक में ईरानी नौसेना का प्रमुख बेस मौजूद है, जबकि चाबहार ईरान का अहम व्यावसायिक बंदरगाह है। इसके अलावा, फार्स न्यूज एजेंसी के हवाले से अल जजीरा ने बताया कि केश्म द्वीप पर भी लगातार कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। घटनाओं के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है। IRIB ने साझा की जलते जहाज की तस्वीर तनाव के बीच ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक जलते हुए जहाज की तस्वीर साझा की। आईआरआईबी ने दावा किया कि यह तस्वीर होर्मुज जलडमरूमध्य की है और इसके साथ लिखा, "अमेरिका पर भरोसा करने का नतीजा... कुछ घंटे पहले होर्मुज का नजारा।" बढ़ सकती है क्षेत्रीय अस्थिरता लगातार हो रहे अमेरिकी हमलों और ईरान की सैन्य तैयारियों ने पूरे मिडिल ईस्ट में हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
US President Donald Trump and White House briefing on Iran and Strait of Hormuz tensions
व्हाइट हाउस का ईरान पर बड़ा आरोप, ट्रंप बोले- समझौता तोड़ने की कीमत चुकानी होगी

व्हाइट हाउस ने ईरान पर समझौता ज्ञापन (MoU) का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कड़ा रुख अपनाया है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने दावा किया कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हमले कर समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा। "ईरान बातचीत चाहता है" एएनआई के अनुसार, कैरोलिन लेविट ने दावा किया कि हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान लगातार अमेरिका से संपर्क कर तनाव कम करने और बातचीत की इच्छा जता रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी राष्ट्रपति ट्रंप से भी चर्चा हुई है। हालांकि, ईरान की ओर से इस दावे पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। MoU तोड़ने का लगाया आरोप व्हाइट हाउस का कहना है कि 7 जुलाई को हुए कथित हमले दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन हैं। लेविट के अनुसार, समझौते में यह स्पष्ट था कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों को निशाना नहीं बनाएगा, लेकिन उसने इस प्रतिबद्धता का पालन नहीं किया। ट्रंप की चेतावनी प्रेस सचिव ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप समुद्री सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे और व्यापारिक जहाजों पर हमलों को गंभीरता से लेते हैं। उनके अनुसार, अमेरिका इन घटनाओं को आतंकवाद की श्रेणी में देखता है और ईरान को इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई इसी नीति का हिस्सा है। वैश्विक व्यापार पर असर की आशंका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के सख्त रुख के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। वहीं, अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर ईरान की प्रतिक्रिया और संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी है।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
IRAN US WAR
अमेरिका की एयरस्ट्राइक से दहला ईरान, भारत के चाबहार पोर्ट पर मिसाइल अटैक

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी, एजेंसियां।  अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने लगातार छठी रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस अभियान में लड़ाकू विमानों, ड्रोन और युद्धपोतों का इस्तेमाल करते हुए तटीय निगरानी केंद्रों, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।   चाबहार पोर्ट भी बना निशाना ईरानी मीडिया के अनुसार, हमलों के दौरान भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट के मैरिटाइम कंट्रोल टावर को भी निशाना बनाया गया। बताया गया कि पिछले एक सप्ताह में इस टावर पर यह तीसरा हमला है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने कंट्रोल टावर को हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, जबकि अमेरिकी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर टावर की तस्वीर साझा की है।   ईरान की चेतावनी, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जमीनी हमला किया गया तो अमेरिकी सैनिकों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। साथ ही, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद करने के लिए तैयार रहने का संकेत दिए जाने की भी खबरें हैं। उधर, कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों की भी जानकारी सामने आई है।   तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर असर तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। एहतियात के तौर पर भारत ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती फिलहाल रोक दी है।   इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान में अमेरिका महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर रहा है। वहीं, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हालिया हमलों में 40 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया है। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव से पश्चिम एशिया में अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक चिंताएं और गहरा गई हैं।

abhishek singh जुलाई 17, 2026 0
U.S. military aircraft and naval forces deployed amid rising tensions between the United States and Iran, with new airstrikes and a renewed naval blockade reported in the region.
ईरान पर अमेरिका का फिर हमला, समुद्री नाकेबंदी बहाल; ट्रंप बोले- अब पावर प्लांट भी होंगे निशाने पर

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर नए हवाई हमले किए हैं, जबकि समुद्री नाकेबंदी (नेवल ब्लॉकेड) भी दोबारा लागू कर दी गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं आया, तो अमेरिका अपने सैन्य अभियान को और तेज करेगा तथा पावर प्लांट और पुल जैसे अहम ठिकानों को भी निशाना बनाया जा सकता है। ट्रंप ने दी सख्त चेतावनी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ पिछले महीने हुए समझौते के तहत हटाई गई समुद्री नाकेबंदी अब फिर से लागू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। ट्रंप ने कहा कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर आगे क्या कार्रवाई होगी, इस पर अंतिम फैसला बाद में लिया जाएगा, लेकिन अगर हालात नहीं बदले तो अगले चरण में पावर प्लांट और उसके बाद महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बनाया जा सकता है। ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमला अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों पर नया हवाई हमला किया गया है। अमेरिकी सेना के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य उन सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना था, जिनका इस्तेमाल ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के लिए कर सकता है। समुद्री नाकेबंदी फिर लागू अमेरिकी सेना ने बताया कि 14 जुलाई की शाम से ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों की ओर आने-जाने वाले जहाजों पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी गई है। इससे पहले दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत यह प्रतिबंध हटा लिया गया था। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियां मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी भी मजबूत कर दी है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, क्षेत्र में 20 से अधिक युद्धपोत और सैकड़ों सैन्य विमान तैनात हैं, जो किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार हैं। समझौते पर मंडराया संकट पिछले महीने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के उद्देश्य से कुछ कदम उठाए गए थे, लेकिन हालिया सैन्य कार्रवाई और नाकेबंदी की बहाली के बाद दोनों देशों के बीच बना सीमित विश्वास भी कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Kriti Sanon and Kabir Bahia spotted together at Edgbaston Stadium during the India vs England cricket match in Birmingham.
Kriti Sanon और Kabir Bahia फिर आए साथ नजर, बर्मिंघम में India vs England मैच देखते हुए सेल्फी वायरल; ब्रेकअप की अफवाहों पर लगा विराम?

Kriti Sanon Kabir Bahia News: बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में वह इंग्लैंड के एजबेस्टन क्रिकेट स्टेडियम, बर्मिंघम में भारत बनाम इंग्लैंड मैच का आनंद लेते हुए नजर आईं। खास बात यह रही कि उनके साथ कथित बॉयफ्रेंड कबीर बाहिया भी मौजूद थे। दोनों की साथ में ली गई एक सेल्फी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। हालांकि दोनों ने अब तक अपने रिश्ते को आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया है, लेकिन उनकी हालिया तस्वीरों ने एक बार फिर डेटिंग की चर्चाओं को हवा दे दी है। बर्मिंघम में साथ दिखे कृति और कबीर कबीर बाहिया ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एजबेस्टन क्रिकेट स्टेडियम से एक ग्रुप सेल्फी साझा की, जिसमें कृति सेनन और उनके कुछ दोस्त भी नजर आए। तस्वीर में दोनों मुस्कुराते हुए कैमरे के लिए पोज देते दिखाई दिए। इस मौके पर कृति ने ग्रीन टॉप और व्हाइट पैंट पहनी थी, जबकि कबीर व्हाइट टी-शर्ट और ब्राउन लेदर जैकेट में नजर आए। दोनों का कैजुअल लुक सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है। ब्रेकअप की अफवाहों के बीच आई नई तस्वीर पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि कृति सेनन और कबीर बाहिया का रिश्ता खत्म हो गया है। इन चर्चाओं को तब और बल मिला जब कबीर की एक अन्य महिला के साथ तस्वीर वायरल हुई थी। हालांकि, हालिया तस्वीरों और सार्वजनिक मौजूदगी ने इन अफवाहों को फिर से चर्चा का विषय बना दिया है। इससे पहले भी कृति ने अपने जून फोटो डंप में कबीर के साथ एक तस्वीर साझा की थी, जिसे कई लोगों ने रिश्ते का संकेत माना था। लंबे समय से जुड़ रहा है दोनों का नाम कृति सेनन और कबीर बाहिया के रिश्ते की चर्चा तब तेज हुई थी जब दोनों को कृति की बहन नूपुर सेनन और गायक स्टेबिन बेन की शादी के समारोहों में साथ देखा गया। इसके बाद दोनों की कई तस्वीरें और छुट्टियों की झलकियां भी सोशल मीडिया पर सामने आईं। हालांकि, दोनों ने अपने रिश्ते पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है और निजी जिंदगी को लेकर हमेशा चुप्पी बनाए रखी है। वर्क फ्रंट पर चमक रहीं कृति सेनन पेशेवर मोर्चे पर कृति सेनन अपनी हालिया फिल्म 'Cocktail 2' की सफलता का आनंद ले रही हैं। फिल्म को दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और बॉक्स ऑफिस पर भी इसका प्रदर्शन सकारात्मक बताया जा रहा है।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
U.S. President Donald Trump speaks about the Strait of Hormuz after withdrawing his proposed security toll plan and announcing a focus on investment partnerships with Gulf nations.
होर्मुज पर ट्रंप का यू-टर्न, टोल योजना वापस; खाड़ी देशों के साथ निवेश समझौतों पर जोर

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने हालिया फैसले में बड़ा बदलाव किया है। एक दिन पहले जहाजों पर सुरक्षा शुल्क (टोल) लगाने की घोषणा करने वाले ट्रंप ने अब इस प्रस्ताव को वापस लेते हुए कहा है कि इसकी जगह खाड़ी देशों के साथ बड़े व्यापार और निवेश समझौते किए जाएंगे। निवेश से रोजगार बढ़ाने का दावा ट्रंप ने कहा कि खाड़ी देशों के साथ होने वाले नए निवेश समझौतों से अमेरिका में बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित होंगे और लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी। उनके अनुसार, यह मॉडल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अधिक प्रभावी साबित होगा। ईरान पर प्रतिबंध जारी अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अन्य देशों के जहाजों के लिए खुला रहेगा, लेकिन ईरान से जुड़े जहाजों और ईरानी सामान के परिवहन पर पहले की तरह प्रतिबंध जारी रहेगा। उन्होंने ईरान के नेतृत्व पर क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका अपनी सुरक्षा नीति में कोई ढील नहीं देगा। अमेरिकी सेना की सराहना ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सेना और सैन्य अधिकारियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक की सुरक्षा अमेरिका की प्राथमिकता है और इसके लिए सैन्य बल लगातार सक्रिय है। पहले क्या था प्रस्ताव? सोमवार को ट्रंप ने घोषणा की थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क लगाया जाएगा। उनका तर्क था कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा पर होने वाले खर्च में अन्य देशों को भी योगदान देना चाहिए। हालांकि, अगले ही दिन उन्होंने इस योजना को वापस लेते हुए निवेश आधारित मॉडल अपनाने का फैसला किया। वैश्विक बाजारों की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में अमेरिका की बदली हुई रणनीति पर ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार जगत की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि टोल योजना वापस लेने से तत्काल व्यापारिक अनिश्चितता कम हो सकती है, लेकिन ईरान को लेकर अमेरिका की सख्त नीति क्षेत्रीय तनाव को बनाए रख सकती है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
A map of the Strait of Hormuz highlighting growing U.S.-Iran tensions as reports emerge of military activity and discussions over security measures in the strategic waterway.
अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ने का दावा, होर्मुज को लेकर बयानबाजी तेज; कई हमलों की रिपोर्ट

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मंगलवार को कई गंभीर दावे सामने आए हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और तेज हो गया है। हालांकि, इन घटनाओं के कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क को लेकर चर्चा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा शुल्क वसूले जाने पर विचार किया जा सकता है। इसे लेकर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक नीति सार्वजनिक नहीं की गई है। ईरान की जवाबी कार्रवाई के दावे मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े कुछ ठिकानों एवं जहाजों को निशाना बनाया। इन दावों के संबंध में संबंधित देशों की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय होने की रिपोर्ट कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि जॉर्डन की सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी ओर आने वाली कई मिसाइलों को बीच रास्ते में नष्ट कर दिया। हालांकि, इस संबंध में उपलब्ध जानकारी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर असर डाल सकता है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों तथा कथित हमलों को लेकर कई दावे सामने आए हैं, लेकिन सभी घटनाओं की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में स्थिति पर दोनों देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के आधिकारिक बयानों का इंतजार किया जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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