Diplomacy

Pakistan Foreign Ministry reacts to RSS leaders’ remarks on India-Pakistan dialogue and relations
RSS नेता के ‘पाकिस्तान से संवाद’ वाले बयान पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया, विदेश मंत्रालय ने बताया ‘सकारात्मक’

भारत और पाकिस्तान के संबंधों को लेकर हाल में आई कुछ अहम टिप्पणियों ने दोनों देशों के बीच संवाद की संभावनाओं पर नई बहस छेड़ दी है। Rashtriya Swayamsevak Sangh के महासचिव Dattatreya Hosabale और पूर्व सेना प्रमुख Manoj Naravane के बयानों पर पाकिस्तान ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। ‘संवाद के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं होने चाहिए’ RSS महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख जारी रहना चाहिए। उनके बयान के बाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे ने भी लोगों के बीच संपर्क बनाए रखने की वकालत की। उन्होंने कहा, “सीमा के दोनों ओर आम लोग रहते हैं और उनकी रोजमर्रा की समस्याएं काफी हद तक समान हैं। लोगों के बीच संपर्क बेहतर संबंध बनाने में मदद कर सकते हैं।” पाकिस्तान ने क्या कहा? इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए Ministry of Foreign Affairs के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इन्हें “सकारात्मक संकेत” बताया। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारत में समझदारी की आवाजें और मजबूत होंगी। पिछले कई वर्षों से जो आक्रामक बयानबाजी और तनाव देखने को मिला है, वह खत्म होना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान संवाद को एक विकल्प के रूप में स्वीकार किए जाने का स्वागत करता है। बैकचैनल बातचीत पर टिप्पणी से इनकार ताहिर अंद्राबी ने बैकचैनल या अनौपचारिक संपर्कों को लेकर चल रही अटकलों पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा, “अगर मैं बैकचैनल पर टिप्पणी करूंगा, तो वह बैकचैनल नहीं रहेगा। इस विषय पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता।” पाकिस्तान में RSS को कैसे देखा जाता है? पाकिस्तान में RSS को आमतौर पर एक हिंदू राष्ट्रवादी संगठन के रूप में देखा जाता है, जिसका भारत की मौजूदा सत्तारूढ़ व्यवस्था से करीबी संबंध माना जाता है। ऐसे में RSS नेतृत्व की ओर से संवाद पर दिया गया बयान पाकिस्तान में विशेष रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। क्या बदल सकते हैं भारत-पाक संबंध? विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच फिलहाल कई संवेदनशील मुद्दे मौजूद हैं, जिनमें आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और राजनीतिक तनाव शामिल हैं। हालांकि, संवाद और लोगों के बीच संपर्क को लेकर आई हालिया टिप्पणियां भविष्य में कूटनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। भारत सरकार की ओर से इन बयानों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

surbhi मई 16, 2026 0
Iranian military presence with IRGC influence rising amid political tension and Strait of Hormuz crisis
ईरान में ‘पावर शिफ्ट’ की अटकलें: IRGC का बढ़ता दबदबा, डिप्लोमेसी कमजोर–अब क्या करेगा अमेरिका?

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच Iran की आंतरिक राजनीति को लेकर नई अटकलें तेज हो गई हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का प्रभाव तेजी से बढ़ा है और उसने सुरक्षा व विदेश नीति से जुड़े फैसलों पर पकड़ मजबूत कर ली है। क्या वाकई “तख्तापलट” जैसा माहौल है? सीधे तौर पर आधिकारिक “कूप” (coup) की पुष्टि नहीं है, लेकिन संकेत यह जरूर मिल रहे हैं कि: सैन्य नेतृत्व का प्रभाव बढ़ा है कूटनीतिक (डिप्लोमैटिक) चैनल कमजोर पड़े हैं बातचीत की जगह सख्त रुख हावी हो रहा है रिपोर्ट्स के मुताबिक IRGC से जुड़े वरिष्ठ नेता Ahmad Vahidi और सुप्रीम लीडर के करीबी Mojtaba Khamenei की भूमिका अहम हो गई है। नरमपंथी नेता साइडलाइन? ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi जैसे नेताओं के प्रभाव में कमी की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि: उन्होंने पहले बातचीत के जरिए तनाव कम करने के संकेत दिए थे लेकिन IRGC ने सख्त रुख अपनाते हुए उस लाइन को पलट दिया इससे साफ है कि फिलहाल “डिप्लोमेसी बनाम मिलिट्री” की लड़ाई में सैन्य पक्ष भारी पड़ रहा है। बढ़ा तनाव Strait of Hormuz पर नियंत्रण को लेकर हालात और गंभीर हो गए हैं। ईरान ने जहाजों की आवाजाही सीमित की कई जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबरें सैकड़ों जहाज फंसे होने की आशंका यह मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है, इसलिए इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। डिप्लोमेसी में सेना की एंट्री रिपोर्ट्स बताती हैं कि IRGC से जुड़े अधिकारियों को अब बातचीत करने वाले प्रतिनिधिमंडल में भी शामिल किया जा रहा है, ताकि कोई भी फैसला “सिस्टम लाइन” से बाहर न जाए। इससे संकेत मिलता है कि: विदेश नीति पर भी सैन्य नियंत्रण बढ़ रहा है पश्चिमी देशों के साथ समझौते की संभावना और कम हो सकती है अमेरिका के सामने क्या विकल्प? अब United States के सामने तीन संभावित रास्ते माने जा रहे हैं: डिप्लोमैटिक दबाव बढ़ाना – प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय समर्थन के जरिए मिलिट्री विकल्प – होर्मुज और क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करना मध्यस्थता के जरिए समझौता – तीसरे देशों के माध्यम से बातचीत जारी रखना लेकिन मौजूदा हालात में किसी भी विकल्प के आसान होने की संभावना कम दिख रही है। क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ी कमजोर संघर्षविराम (सीजफायर) के बावजूद हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। बातचीत ठप पड़ती दिख रही है सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं खाड़ी क्षेत्र में बड़े संघर्ष का खतरा बना हुआ है ईरान में सत्ता संतुलन में बदलाव की ये खबरें भले पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई हों, लेकिन संकेत साफ हैं–सैन्य ताकत का असर बढ़ रहा है और कूटनीति कमजोर पड़ रही है। ऐसे में आने वाले दिन न सिर्फ ईरान-अमेरिका रिश्तों, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Donald Trump addressing media on Iran tension with Strait of Hormuz conflict and global security concerns
अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप की आखिरी चेतावनी, डील नहीं तो “तबाही” का ऐलान

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए तेहरान को अंतिम चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ कहा है कि यदि Iran अमेरिका द्वारा प्रस्तावित समझौते को स्वीकार नहीं करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए Islamabad जाएगा। ट्रंप का दोहरा संदेश: बातचीत भी, कार्रवाई की धमकी भी ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए ईरान पर संघर्षविराम उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz में हुई गोलीबारी युद्धविराम समझौते के खिलाफ है, जिसमें फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम के जहाजों को निशाना बनाया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट और अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने बातचीत का दरवाजा भी खुला रखा और कहा कि “हमने एक निष्पक्ष और उचित समझौता प्रस्तावित किया है।” पाकिस्तान में होगा अगला दौर ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सोमवार को पाकिस्तान पहुंचेगा और मंगलवार से वार्ता शुरू हो सकती है। इस प्रतिनिधिमंडल में Jared Kushner और Steve Witkoff शामिल हैं। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। “ईरान घुटने टेक देगा” – ट्रंप ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि ईरान अमेरिका के सामने ज्यादा देर टिक नहीं पाएगा और उसे अंततः समझौता करना ही होगा। उन्होंने कहा कि अगर ईरान नहीं मानता, तो अमेरिका वह कदम उठाएगा जो पिछले दशकों में नहीं उठाए गए। सीजफायर की डेडलाइन नजदीक गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को 14 दिनों का संघर्षविराम लागू हुआ था, जो 22 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन दोनों देशों के रिश्तों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। वैश्विक असर की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई और मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ सकता है, खासकर Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Pakistan Army Chief Asim Munir meeting Iranian officials in Tehran for US-Iran peace talks.
US-Iran तनाव के बीच पाकिस्तान एक्टिव: तेहरान पहुंचे आर्मी चीफ आसिम मुनीर, ‘शांति वार्ता 2.0’ की उम्मीद

  तेहरान/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर बुधवार को एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे। शांति मिशन पर मुनीर की ईरान यात्रा पाकिस्तान की सेना की मीडिया विंग ISPR के अनुसार, यह दौरा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिशों का हिस्सा है। मुनीर के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी मौजूद हैं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संभावित दूसरे दौर की वार्ता को आगे बढ़ाना और कूटनीतिक गतिरोध खत्म करना है। शहबाज शरीफ के ताबड़तोड़ विदेश दौरे दूसरी ओर, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी सक्रिय भूमिका में नजर आ रहे हैं। वह एक साथ कई अहम देशों के दौरे पर हैं: सऊदी अरब कतर तुर्की इन बैठकों में क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और अमेरिका-ईरान तनाव पर चर्चा की जा रही है। ‘शांति वार्ता 2.0’ की तैयारी सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत हो सकती है। पाकिस्तान इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद है: दोनों देशों के बीच तनाव कम करना स्थायी समाधान की दिशा में बढ़ना मिडिल ईस्ट में युद्ध जैसी स्थिति टालना पहला दौर रहा बेनतीजा इससे पहले इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई थी। इसके बाद हालात और तनावपूर्ण हो गए। डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़े तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया। आगे क्या? अब पूरी दुनिया की नजर संभावित “शांति वार्ता 2.0” पर टिकी है। अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है। वार्ता विफल होने की स्थिति में अमेरिका-ईरान तनाव और गहरा सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर भी असर देखने को मिल सकता है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump during a diplomatic discussion on the Iran crisis.
Narendra Modi–Donald Trump फोन कॉल: ईरान संकट के बीच 40 मिनट की अहम बातचीत

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: ईरान संकट और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व के बीच एक अहम बातचीत सामने आई है। मंगलवार (14 अप्रैल) को प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच करीब 40 मिनट तक फोन पर चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब पाकिस्तान में हुई अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल हो चुकी है और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। खास बात यह है कि ईरान-इजराइल-अमेरिका टकराव के दौरान यह दोनों नेताओं के बीच दूसरी बातचीत है। होर्मुज स्ट्रेट पर फोकस अमेरिका के भारत में राजदूत Sergio Gor ने जानकारी दी कि बातचीत के दौरान Strait of Hormuz की स्थिति पर विशेष चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस अहम समुद्री मार्ग को खुला और सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत-अमेरिका रिश्तों पर सकारात्मक संकेत राजदूत के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच संबंध इस समय मजबूत स्थिति में हैं। आने वाले दिनों में ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई बड़े समझौते होने की संभावना जताई गई है। बताया गया कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने पीएम मोदी से कहा कि “हम सभी आपको पसंद करते हैं”, जो दोनों देशों के रिश्तों की गर्मजोशी को दर्शाता है। पीएम मोदी का बयान बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। उन्होंने यह भी बताया कि मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई और Strait of Hormuz को सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
ईरानी राष्ट्रपति का अमेरिकी जनता के नाम खुला पत्र, युद्धविराम पर चुप्पी

तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिकी नागरिकों को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र लिखा है, जिसे उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर साझा किया। इस पत्र में उन्होंने युद्धविराम का कोई उल्लेख नहीं किया, जबकि इससे कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान की ओर से सीजफायर की मांग की गई है। “ईरान ने कभी युद्ध शुरू नहीं किया” अपने पत्र में पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान ने “कभी कोई युद्ध शुरू नहीं किया” और देश लंबे समय से “हमलों और कब्ज़े” का सामना करता रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी जनता का अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोगों के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है। ट्रंप के दावे से अलग संदेश ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि ईरान के “नए शासन” ने युद्धविराम की अपील की है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि यह अपील किसने की। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका युद्धविराम पर तभी विचार करेगा जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह सुरक्षित और खुला होगा। उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़ी चेतावनी देते हुए सख्त कार्रवाई की बात भी कही। संवाद बनाम टकराव की अपील पेज़ेश्कियान ने अपने पत्र के अंत में कहा कि दुनिया के सामने आज सबसे बड़ा विकल्प “टकराव और संवाद” के बीच है। उन्होंने चेतावनी दी कि आज लिया गया फैसला आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को तय करेगा। बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक संदेश विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पत्र सीधे अमेरिकी सरकार की बजाय वहां के नागरिकों को संबोधित कर एक कूटनीतिक संदेश देने की कोशिश है। इसमें शांति और संवाद की बात तो की गई है, लेकिन औपचारिक रूप से युद्धविराम का प्रस्ताव नहीं रखा गया।  

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0