टेक्नोलॉजी

Dangerous Backdoor Found in 100K Chinese Routers

Chinese Router Spy Risk: 1 लाख से ज्यादा राउटर में मिला खतरनाक बैकडोर, क्या आपका Wi-Fi नेटवर्क भी खतरे में है?

surbhi अगस्त 6, 2026 0
Chinese routers affected by a hidden backdoor vulnerability putting Wi-Fi networks and connected devices at cyber risk.
Chinese Router Backdoor Security Risk Alert

नई दिल्ली: साइबर सुरक्षा को लेकर एक नई रिपोर्ट ने दुनियाभर के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। साइबर सिक्योरिटी फर्म VulnCheck ने दावा किया है कि चीन की नेटवर्किंग कंपनी Zbtlink द्वारा बनाए गए 20 से अधिक राउटर मॉडलों में एक छिपा हुआ बैकडोर (Backdoor) मौजूद है। रिसर्चर्स ने इस सुरक्षा खामी को "Endlessdoors" नाम दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह बैकडोर राउटर के जरिए हर 35 सेकंड में चीन में रजिस्टर्ड एक डोमेन और विशेष IP एड्रेस से संपर्क करता है। यदि इन डोमेन का नियंत्रण किसी हमलावर या अनधिकृत व्यक्ति के पास हो, तो वह बिना पासवर्ड के भी राउटर और उससे जुड़े पूरे नेटवर्क पर नियंत्रण हासिल कर सकता है।

क्या है सबसे बड़ा खतरा?

VulnCheck के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर जैकब बेन्स के मुताबिक, इस बैकडोर की वजह से केवल Wi-Fi नेटवर्क ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े लैपटॉप, कंप्यूटर, स्मार्टफोन, CCTV कैमरे, NAS स्टोरेज और अन्य स्मार्ट डिवाइस भी जोखिम में आ सकते हैं।

रिसर्च में सामने आया कि Zbtlink और Wiflyer ब्रांड के कई राउटर मॉडल इस सुरक्षा खामी से प्रभावित हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अधिकांश उपयोगकर्ताओं को इस बैकडोर की मौजूदगी की जानकारी तक नहीं होती।

हर 35 सेकंड में चीन से संपर्क

जैकब बेन्स ने अपने ब्लॉग में बताया कि प्रभावित राउटर नियमित अंतराल पर चीन में रजिस्टर्ड डोमेन से स्वतः संपर्क करते हैं। यदि कोई इन डोमेन को नियंत्रित करता है, तो वह राउटर के साथ-साथ पूरे नेटवर्क में मौजूद अन्य डिवाइस तक भी पहुंच बना सकता है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि छोटे बिजनेस, होम ऑफिस और घरेलू उपयोगकर्ता सबसे अधिक जोखिम में हैं क्योंकि वे अक्सर ऐसे उपकरणों की सुरक्षा जांच नहीं करते।

दुनिया भर में 1 लाख से ज्यादा राउटर प्रभावित

रिसर्चर्स का अनुमान है कि दुनिया भर में कम से कम 1 लाख ऐसे राउटर सक्रिय हैं जिनमें यह बैकडोर मौजूद हो सकता है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ये डिवाइस किन-किन देशों में कितनी संख्या में उपयोग किए जा रहे हैं।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

चीन से जुड़े नेटवर्किंग उपकरणों की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई विवाद सामने आ चुके हैं।

  • अमेरिका में राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के चलते विदेशी राउटर के आयात पर सख्त कदम उठाए गए।
  • टेक्सास राज्य ने TP-Link के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया था। आरोप था कि कंपनी के उपकरणों के जरिए अमेरिकी ग्राहकों के नेटवर्क तक पहुंच संभव थी। हालांकि कंपनी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।

क्या करें उपयोगकर्ता?

यदि आप Zbtlink या Wiflyer ब्रांड का राउटर इस्तेमाल कर रहे हैं, तो:

  • अपने राउटर का मॉडल जरूर जांचें।
  • उपलब्ध नवीनतम Firmware तुरंत अपडेट करें।
  • डिफॉल्ट एडमिन पासवर्ड बदलें।
  • Remote Management फीचर बंद रखें।
  • संदिग्ध नेटवर्क गतिविधि पर नजर रखें।
  • जरूरत पड़ने पर विश्वसनीय और नियमित सुरक्षा अपडेट देने वाले ब्रांड का राउटर इस्तेमाल करें।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट से जुड़े किसी भी डिवाइस की सुरक्षा केवल मजबूत पासवर्ड से नहीं, बल्कि समय-समय पर Firmware अपडेट और सुरक्षा सेटिंग्स की समीक्षा से भी सुनिश्चित होती है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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चंद्रमा की ओर बढ़ता SpaceX Falcon 9 का ऊपरी चरण
SpaceX का भटका Falcon 9 रॉकेट चांद से टकराएगा, 8,690 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से होगा प्रभाव

चांद से टकराएगा SpaceX का भटका रॉकेट, 8,690 किमी/घंटे की रफ्तार से होगा टकराव वॉशिंगटन, एजेंसियां। SpaceX के Falcon 9 रॉकेट का करीब चार टन वजनी इस्तेमाल किया हुआ ऊपरी चरण बुधवार, 5 अगस्त 2026 को चंद्रमा की सतह से टकराने वाला है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह टक्कर अनियोजित होगी और इससे चांद की सतह पर नया गड्ढा बन सकता है। इस घटना से पृथ्वी को किसी तरह का खतरा नहीं है।   करीब 8,690 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से टकराएगा     वैज्ञानिक गणनाओं के अनुसार रॉकेट का यह हिस्सा लगभग 8,690 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चंद्रमा से टकराएगा। टक्कर चंद्रमा के पश्चिमी हिस्से में स्थित Einstein Crater के पास होने का अनुमान है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इससे चंद्र सतह पर धूल और मलबे का बड़ा गुबार उठ सकता है।     2025 के चंद्र मिशन से जुड़ा है रॉकेट     यह Falcon 9 का ऊपरी चरण जनवरी 2025 में लॉन्च किए गए एक मिशन का हिस्सा था। मिशन के दौरान इस रॉकेट ने चंद्रमा की ओर जाने वाले Firefly Aerospace के Blue Ghost सहित चंद्र मिशनों को आगे बढ़ाने में मदद की थी। मिशन पूरा होने के बाद यह हिस्सा अंतरिक्ष में रह गया और बाद में चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव में आकर टक्कर के रास्ते पर पहुंच गया।     NASA की वैज्ञानिकों पर नजर     NASA और अन्य वैज्ञानिक इस घटना को करीब से ट्रैक कर रहे हैं। NASA के मुताबिक ग्राउंड-आधारित दूरबीनों और अंतरिक्ष आधारित उपकरणों की मदद से टक्कर को देखने की कोशिश की जाएगी। वैज्ञानिकों को इससे चंद्रमा की सतह पर प्रभाव, धूल के गुबार और अंतरिक्ष में छोड़े गए रॉकेट के हिस्सों की निगरानी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।   यह घटना अंतरिक्ष में बढ़ते स्पेस जंक की समस्या को भी उजागर करती है। भविष्य में चंद्रमा पर मानव मिशन और स्थायी ढांचे विकसित होने के साथ ऐसे अनियंत्रित प्रभावों को रोकना और अंतरिक्ष मलबे की बेहतर निगरानी करना और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
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