टेक्नोलॉजी

India’s Clay Pot Cooling Innovation

मिट्टी की मटकियों से बिना बिजली घर को ठंडा करेगी भारत की Beehive तकनीक, जानें कैसे काम करता है यह देसी कूलिंग सिस्टम

surbhi अगस्त 5, 2026 0
Beehive Cooling Technology uses traditional clay pots and water evaporation to naturally cool hot air
Beehive Cooling Technology Using Clay Pots

नई दिल्ली: बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ती कूलिंग की जरूरत के बीच ऐसी तकनीकों की मांग बढ़ रही है, जो पर्यावरण पर कम असर डालें और बिजली की खपत भी घटाएं। इसी दिशा में भारत में विकसित Beehive Cooling Technology एक दिलचस्प उदाहरण बनकर सामने आई है।

दिल्ली स्थित Ant Studio की ओर से विकसित यह पैसिव कूलिंग सिस्टम मिट्टी के पारंपरिक बर्तनों और आधुनिक डिजाइन को जोड़ता है। इसकी बनावट मधुमक्खी के छत्ते जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे Beehive नाम दिया गया है।

इस तकनीक की खासियत यह है कि यह पारंपरिक एयर कूलिंग के सिद्धांत का इस्तेमाल करते हुए हवा को ठंडा करने की कोशिश करती है और इसके लिए एयर कंडीशनर की तरह रेफ्रिजरेंट गैस की जरूरत नहीं पड़ती।

क्या है Beehive Cooling Technology?

Beehive Cooling System में मिट्टी से बने कई बेलनाकार बर्तनों को एक खास पैटर्न में एक साथ लगाया जाता है। दूर से देखने पर पूरा ढांचा मधुमक्खी के छत्ते जैसा दिखाई देता है।

इन मिट्टी के बर्तनों की सतह पर पानी बहाया जाता है। जब गर्म और अपेक्षाकृत सूखी हवा इन गीली मिट्टी की सतहों के बीच से गुजरती है, तो पानी का वाष्पीकरण होता है। इसी प्रक्रिया के कारण हवा का तापमान कम करने में मदद मिलती है।

यानी सदियों पुराने मिट्टी के घड़े से मिलने वाली प्राकृतिक ठंडक के सिद्धांत को आधुनिक वास्तु डिजाइन और इंजीनियरिंग के साथ जोड़ा गया है।

कैसे काम करती है यह देसी कूलिंग तकनीक?

इस सिस्टम का आधार इवैपोरेटिव कूलिंग यानी वाष्पीकरण आधारित शीतलन है।

जब मिट्टी की सतह पर पानी मौजूद होता है और उसके संपर्क में गर्म हवा आती है, तो पानी धीरे-धीरे वाष्प में बदलता है। वाष्पीकरण के दौरान गर्मी का कुछ हिस्सा हवा से निकलता है और इससे हवा अपेक्षाकृत ठंडी हो जाती है।

Beehive सिस्टम में बड़ी संख्या में मिट्टी के बर्तनों को इस तरह व्यवस्थित किया जाता है कि हवा उनके बीच से गुजर सके। पानी की मदद से मिट्टी की सतह गीली रखी जाती है और हवा के प्राकृतिक बहाव के साथ ठंडक पैदा करने की प्रक्रिया चलती रहती है।

इस वजह से सिस्टम को ठंडक पैदा करने के लिए पारंपरिक एयर कंडीशनर की तरह रेफ्रिजरेंट गैस पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

42 डिग्री से 36 डिग्री तक पहुंचा तापमान?

इस तकनीक से जुड़े उपलब्ध विवरणों के अनुसार, इसका परीक्षण भारत की डेकी इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री में किया गया था। गर्मियों के दौरान इस क्षेत्र में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है।

रिपोर्ट किए गए परीक्षण में Beehive Cooling System लगाए जाने के बाद तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से घटकर करीब 36 डिग्री सेल्सियस तक आने की बात कही गई है।

अगर किसी खास वातावरण में यह प्रदर्शन दोहराया जा सके, तो करीब 6 डिग्री सेल्सियस की कमी गर्म और शुष्क परिस्थितियों में काफी उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव तापमान, हवा की नमी, पानी की उपलब्धता, हवा के प्रवाह और सिस्टम के डिजाइन जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

पारंपरिक मटकी से आधुनिक कूलिंग तक का सफर

भारत में मिट्टी के घड़े या मटकी से पानी ठंडा करने की परंपरा बहुत पुरानी है। मिट्टी की सतह में मौजूद सूक्ष्म छिद्रों के जरिए पानी का वाष्पीकरण होता है और इससे घड़े के अंदर का पानी अपेक्षाकृत ठंडा रहता है।

Beehive Cooling Technology इसी प्राकृतिक सिद्धांत को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की कोशिश करती है। फर्क यह है कि यहां एक मटकी के बजाय बड़ी संख्या में मिट्टी के मॉड्यूल को एक साथ लगाया जाता है, जिससे गर्म हवा को अधिक गीली सतहों के संपर्क में लाया जा सके।

यही वजह है कि यह तकनीक पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक डिजाइन का दिलचस्प मेल दिखाई देती है।

बिजली और गैस की जरूरत कम करने की क्षमता

Beehive सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका पैसिव कूलिंग कॉन्सेप्ट है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक हवा और पानी के वाष्पीकरण की मदद से आसपास के वातावरण को ठंडा करना है।

इससे उन जगहों पर कूलिंग की जरूरत पूरी करने में मदद मिल सकती है जहां पारंपरिक एयर कंडीशनिंग लगाना महंगा या ऊर्जा की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि पैसिव इवैपोरेटिव कूलिंग हर मौसम और हर जगह एयर कंडीशनर का सीधा विकल्प नहीं है। ज्यादा नमी वाले वातावरण में वाष्पीकरण की क्षमता कम हो सकती है। इसलिए इसका सबसे अच्छा प्रदर्शन आमतौर पर गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क परिस्थितियों में अपेक्षित होता है।

पर्यावरण के लिहाज से क्यों महत्वपूर्ण है?

आज दुनिया भर में कूलिंग की मांग बढ़ रही है। एयर कंडीशनर और अन्य कूलिंग उपकरण बिजली की बड़ी खपत कर सकते हैं। ऐसे में कम ऊर्जा वाली कूलिंग तकनीकें भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

Beehive सिस्टम मिट्टी के बर्तनों, पानी और प्राकृतिक हवा के बहाव पर आधारित है। इसमें पारंपरिक कूलिंग सिस्टम की तरह रेफ्रिजरेंट गैस पर निर्भरता नहीं होती।

इसके अलावा मिट्टी से बने मॉड्यूल इसे देखने में भी आकर्षक बनाते हैं। इसलिए यह केवल कूलिंग सिस्टम नहीं, बल्कि किसी इमारत के बाहरी हिस्से में लगाए जाने वाले आर्ट इंस्टॉलेशन की तरह भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

क्या यह एयर कंडीशनर की जगह ले सकता है?

Beehive Cooling Technology को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह एयर कंडीशनर का विकल्प बन सकती है?

इसका जवाब पूरी तरह परिस्थितियों पर निर्भर करता है। यह तकनीक गर्म और शुष्क वातावरण में प्रभावी पैसिव कूलिंग दे सकती है, लेकिन जहां हवा में नमी पहले से अधिक हो, वहां पानी के वाष्पीकरण की क्षमता सीमित हो सकती है।

इसलिए इसे हर स्थिति में एयर कंडीशनर का विकल्प मानना सही नहीं होगा। बल्कि इसे कम ऊर्जा वाली कूलिंग, औद्योगिक क्षेत्रों, खुले या अर्ध-खुले स्थानों और उपयुक्त जलवायु वाले भवनों के लिए एक वैकल्पिक समाधान के रूप में देखा जा सकता है।

देसी सोच और आधुनिक तकनीक का अनोखा मेल

Beehive Cooling Technology की सबसे खास बात सिर्फ यह नहीं कि यह मिट्टी की मटकियों से हवा ठंडी करती है। इसकी असली खूबी यह है कि सदियों पुराने भारतीय अनुभव को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़कर बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की कोशिश की गई है।

बढ़ते तापमान, बिजली की बढ़ती मांग और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच ऐसी तकनीकें भविष्य की टिकाऊ कूलिंग व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

अगर प्राकृतिक वाष्पीकरण, स्थानीय सामग्री और आधुनिक डिजाइन का यह संयोजन बड़े पैमाने पर प्रभावी और किफायती साबित होता है, तो आने वाले समय में भारत की यह देसी कूलिंग सोच दुनिया के गर्म होते शहरों के लिए भी एक उपयोगी मॉडल बन सकती है।

 

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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Amazon और Flipkart सेल में इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामान पर ऑफर
Amazon-Flipkart पर बड़ी सेल, इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर रोजमर्रा के सामान पर मिल रहे बंपर ऑफर

नई दिल्ली, एजेंसियां। ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों के लिए Amazon और Flipkart पर एक बार फिर कई कैटेगरी के प्रोडक्ट्स पर आकर्षक ऑफर देखने को मिल रहे हैं। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, होम अप्लायंसेज और रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों पर डिस्काउंट के साथ बैंक ऑफर और एक्सचेंज बेनिफिट भी उपलब्ध हैं। हालांकि, हर प्रोडक्ट पर 50 प्रतिशत से ज्यादा की छूट नहीं है और ऑफर मॉडल, बैंक कार्ड तथा स्टॉक के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं।   स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स पर खास नजर     सेल के दौरान स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप, ईयरबड्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स पर कंपनियां और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलग-अलग तरह के डिस्काउंट दे रहे हैं। कुछ पुराने मॉडल और चुनिंदा प्रोडक्ट्स पर कीमत में बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है।   इसके अलावा बैंक कार्ड से भुगतान करने पर अतिरिक्त छूट और कुछ उत्पादों पर एक्सचेंज ऑफर भी मिल सकता है। इसलिए किसी प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसकी वास्तविक कीमत और सभी ऑफर्स को जांचना जरूरी है।   आधे से भी कम कीमत वाले ऑफर में सावधानी जरूरी     कई बार सेल में किसी सामान की कीमत सामान्य बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम दिखाई देती है। लेकिन ग्राहकों को केवल डिस्काउंट प्रतिशत देखकर खरीदारी नहीं करनी चाहिए। MRP, पिछले बिक्री मूल्य, बैंक डिस्काउंट, डिलीवरी चार्ज और एक्सचेंज शर्तों को भी देखना जरूरी है।   खास तौर पर “50% से ज्यादा छूट” वाले ऑफर में यह जांचना बेहतर है कि डिस्काउंट वास्तव में किस कीमत पर लागू हो रहा है और क्या इसके लिए कोई अतिरिक्त शर्त है।   खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान     Amazon और Flipkart पर सेल के दौरान ऑफर तेजी से बदल सकते हैं। कुछ प्रोडक्ट्स पर सीमित स्टॉक होने के कारण कीमत कुछ समय बाद बढ़ भी सकती है। वहीं बैंक ऑफर के लिए निर्धारित कार्ड, न्यूनतम खरीद राशि या अन्य शर्तें लागू हो सकती हैं।   इसलिए खरीदारी से पहले रेटिंग और रिव्यू, विक्रेता की जानकारी, वारंटी, रिटर्न पॉलिसी और अंतिम भुगतान राशि जरूर जांचें। इससे आकर्षक दिखने वाले ऑफर में अनावश्यक खर्च से बचा जा सकता है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
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