US Iran relations

US President Donald Trump speaks on Iran tensions as Tehran warns of a strong response amid Strait of Hormuz negotiations.
Iran-US Tension: ट्रंप का दावा- ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगा ईरान, होर्मुज समझौते के भी दिए संकेत; तेहरान ने दी कड़े जवाब की चेतावनी

वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि मौजूदा संघर्ष अधिक समय तक नहीं चलेगा और ईरान लंबे समय तक मौजूदा दबाव का सामना नहीं कर पाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर चल रही बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है और जल्द किसी समझौते की उम्मीद की जा सकती है। वहीं दूसरी ओर ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उसके खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो उसका जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा। ट्रंप बोले- ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। उनके अनुसार, यदि ईरान परमाणु शक्ति बनता है तो इसका खतरा केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। ट्रंप ने कहा कि मौजूदा हालात में अमेरिका के पास कड़ा रुख अपनाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने उम्मीद जताई कि संघर्ष जल्द समाप्त होगा और क्षेत्र में स्थिरता लौटेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य पर समझौते की उम्मीद ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चल रही वार्ताओं पर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अभी किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं की जा सकती, लेकिन बातचीत आगे बढ़ रही है और उन्हें उम्मीद है कि निकट भविष्य में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार और व्यापार पर असर डाल सकता है। समुद्री सुरक्षा पर जताई चिंता अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना सक्रिय रूप से निगरानी कर रही है, लेकिन मिसाइल हमलों और समुद्री बारूदी सुरंगों (Sea Mines) का खतरा अभी भी बना हुआ है। उनका कहना था कि यदि जहाजों को समुद्र में बारूदी सुरंगों का संदेह भी होगा तो वे इस मार्ग का उपयोग करने से बचेंगे, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो सकता है। ईरान ने दी कड़ी प्रतिक्रिया ट्रंप के बयान के बाद ईरान ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी। ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल सैयद मजीद इब्न रजा ने कहा कि देश अपनी रक्षा क्षमता पर पूरी तरह भरोसा रखता है और अमेरिका या इजरायल सहित किसी भी संभावित खतरे का निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा और यदि उसके खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। अमेरिकी कूटनीति पर ईरान का हमला ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने भी अमेरिका की रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वाशिंगटन पहले सैन्य कार्रवाई की धमकी देता है और फिर बातचीत की पेशकश करता है। उनके मुताबिक यह वास्तविक कूटनीति नहीं बल्कि दबाव बनाने की रणनीति है। विफल समझौते के बाद बढ़ी अनिश्चितता जून में संघर्ष रोकने के उद्देश्य से हुए 14-सूत्रीय समझौते के विफल होने के बाद अमेरिका और ईरान के रिश्तों में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही जैसे मुद्दे अब भी विवाद के केंद्र में हैं। फिलहाल एक ओर अमेरिका बातचीत और संभावित समझौते की बात कर रहा है, जबकि दूसरी ओर ईरान किसी भी सैन्य दबाव का सख्त जवाब देने की चेतावनी दे रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि दोनों देश कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं या क्षेत्रीय तनाव और गहराता है।  

surbhi अगस्त 7, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran, emphasizing diplomacy while calling nuclear weapons America's red line.
ईरान पर युद्ध नहीं, समझौता चाहते हैं ट्रंप; परमाणु हथियार को बताया अमेरिका की 'रेड लाइन'

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उनकी प्राथमिकता युद्ध नहीं, बल्कि समझौता है। हालांकि उन्होंने साफ कर दिया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। ट्रंप ने इसे अमेरिका की "रेड लाइन" बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 'युद्ध नहीं, लोगों की जान बचाना चाहता हूं' लास वेगास में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान का विकल्प मौजूद था, लेकिन उन्होंने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य लोगों की जान बचाना है और यदि बातचीत से समाधान निकल सकता है तो वही बेहतर रास्ता है। 'द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े हमले की तैयारी थी' ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ एक बेहद बड़े सैन्य ऑपरेशन की योजना तैयार थी। उनके अनुसार, यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े सैन्य अभियानों में से एक हो सकता था। उन्होंने कहा कि बातचीत की पहल होने के बाद इस अभियान को रोक दिया गया और अब दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी है। परमाणु हथियार पर नहीं होगा समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोहराया कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यही अमेरिका की सबसे स्पष्ट नीति है और इस मुद्दे पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। ट्रंप का कहना है कि उनका प्रशासन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी है कूटनीतिक प्रयास ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और इसके सामान्य रूप से खुलने का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई के अनुसार, दोनों देशों के बीच समझौते का मसौदा लगभग तैयार है। यदि प्रक्रिया में कोई बाहरी बाधा नहीं आती, तो जल्द ही संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जानकारी दी जाएगी। वैश्विक नजरें मध्य पूर्व पर मध्य पूर्व में जारी तनाव, ईरान-अमेरिका संबंध और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चल रही बातचीत पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में होने वाले किसी भी समझौते का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।  

surbhi अगस्त 6, 2026 0
Diplomatic efforts between the United States and Iran intensify as Qatar signals a draft agreement is under discussion.
US-ईरान तनाव कम होने के संकेत, समझौते का ड्राफ्ट तैयार; कतर बोला- अगले कुछ दिनों में हो सकती है डील

मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदें तेज हो गई हैं। कतर ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच संभावित समझौते की दिशा में कूटनीतिक प्रयास निर्णायक चरण में पहुंच चुके हैं। कतर के अनुसार, समझौते का ड्राफ्ट विभिन्न पक्षों के बीच साझा किया जा रहा है और यदि बातचीत इसी गति से आगे बढ़ी, तो आने वाले कुछ दिनों में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। कतर ने क्या कहा? एएनआई के मुताबिक, कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि मध्यस्थ देशों के प्रयास लगातार जारी हैं और वार्ता अब अगले चरण में पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि संभावित समझौते के मसौदे (ड्राफ्ट) पर विभिन्न पक्षों के बीच विचार-विमर्श हो रहा है। अल-अंसारी ने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ घंटों या दिनों में कोई ठोस प्रगति देखने को मिल सकती है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और सैन्य टकराव के बजाय बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ने की अपील भी की। अमेरिका ने भी दिए सकारात्मक संकेत अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी वार्ता को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि "आज या कल" तक ऐसा समझौता हो सकता है, जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को सामान्य रूप से खोलने का रास्ता साफ हो जाए। बेसेंट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद कूटनीतिक बातचीत में तेजी आई है और दोनों पक्ष समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ओमान निभा रहा है अहम मध्यस्थ की भूमिका कतर ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच भले ही प्रत्यक्ष बातचीत नहीं हो रही है, लेकिन ओमान समेत मध्यस्थ देश दोनों पक्षों के बीच लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। ओमान की मध्यस्थता को इस वार्ता में अहम माना जा रहा है और कतर ने उसके प्रयासों का समर्थन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल होता है तो इससे न केवल क्षेत्रीय तनाव कम होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। ट्रंप और ईरान दोनों ने दिखाई बातचीत की इच्छा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने ईरान को समझौते का "आखिरी मौका" दिया है। ट्रंप के अनुसार, कई खाड़ी देशों की अपील के बाद संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोककर कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी गई है। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी कहा है कि उनका देश क्षेत्र में युद्ध या टकराव नहीं चाहता। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। दुनिया की नजर संभावित समझौते पर अमेरिका और ईरान के बीच यदि समझौता होता है तो इससे पश्चिम एशिया में जारी तनाव कम हो सकता है। साथ ही, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के सामान्य संचालन से वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता और उसके संभावित नतीजों पर टिकी हुई है।  

kalpana अगस्त 5, 2026 0
US President Donald Trump issues a final warning to Iran over the nuclear deal and military options
ईरान को ट्रंप की दो टूक चेतावनी, बोले- परमाणु समझौते का आखिरी मौका, नहीं माने तो सैन्य विकल्प तैयार

Trump on Iran Nuclear Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि परमाणु समझौते के लिए यह उसके पास "आखिरी मौका" हो सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और यदि समझौता नहीं हुआ तो सैन्य विकल्प भी तैयार हैं। ट्रंप बोले- समझौता हमारी पहली प्राथमिकता सोमवार (3 अगस्त) को मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत उसकी पहल पर हो रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान और परमाणु समझौता है, लेकिन यदि वार्ता विफल रहती है तो अमेरिका के पास अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि समझौते की संभावना अभी भी है और मैं ईरान को आखिरी मौका देना चाहता हूं। लेकिन अगर बात नहीं बनी, तो हमारे सैन्य विकल्प तैयार हैं। उम्मीद है कि ईरान समय रहते समझदारी दिखाएगा।" खाड़ी देशों का भी बताया समर्थन अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर भी इस समझौते के पक्ष में हैं और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बातचीत का समर्थन कर रहे हैं। हालांकि, दूसरी ओर ईरान लगातार यह कहता रहा है कि अमेरिका के साथ उसकी कोई सीधी बातचीत नहीं चल रही है, जिससे दोनों देशों के दावों में विरोधाभास बना हुआ है। पहले होर्मुज स्ट्रेट, फिर परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा ट्रंप के अनुसार, बातचीत के पहले चरण में होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को पूरी तरह खोलने पर चर्चा होगी। इसके बाद अगले चरण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उससे जुड़े मुद्दों पर वार्ता आगे बढ़ेगी। उन्होंने दावा किया कि ईरान सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। बातचीत को लेकर बरकरार है संशय ट्रंप ने यह नहीं बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कहां हो रही है और इसमें कौन-कौन अधिकारी शामिल हैं। इससे दोनों देशों के बीच संभावित वार्ता को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। इससे पहले भी ट्रंप आरोप लगा चुके हैं कि ईरान सार्वजनिक रूप से बातचीत से इनकार करता है, लेकिन पर्दे के पीछे अमेरिका से संपर्क बनाए रखने की कोशिश करता है। वहीं, तेहरान लगातार ऐसे दावों को खारिज करता रहा है।  

kalpana अगस्त 4, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran, claiming Tehran is now seeking negotiations after US military action
ट्रंप का दावा- ईरान की सैन्य ताकत तबाह, बोले- अब बातचीत के लिए खुद आगे आ रहा तेहरान

Donald Trump on Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता लगभग पूरी तरह कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि अब तेहरान खुद बातचीत की पहल कर रहा है और दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना बन रही है। एएनआई के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई का असर इतना बड़ा रहा कि ईरान अब मध्यस्थों के जरिए वार्ता का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि यदि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ी तो दोनों देशों के बीच समझौता हो सकता है। 'अगर हम कमजोर होते तो ईरान बातचीत नहीं मांगता' ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका कमजोर स्थिति में होता तो ईरान कभी बातचीत की पहल नहीं करता। उनके मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान पर दबाव बढ़ा है और इसी वजह से वह कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत का अंतिम परिणाम क्या होगा, यह अभी देखना बाकी है। रूस की कथित मदद पर पुतिन से करेंगे बात यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के उस दावे पर भी ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि रूस ईरान को अमेरिकी ठिकानों की निगरानी के लिए सैटेलाइट संबंधी जानकारी दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि वह इस मामले में सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि रूस ने किसी तरह की सहायता दी भी है, तो उसका कोई बड़ा प्रभाव नजर नहीं आया है। ईरान की सैन्य क्षमता पर बड़ा दावा ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की सेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान अब पहले जैसी सैन्य ताकत नहीं रखता और यही वजह है कि वह बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहता है। हालांकि, ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से भी इन बयानों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों और संभावित वार्ता पर दुनिया की नजर बनी हुई है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
US President Donald Trump and White House briefing on Iran and Strait of Hormuz tensions
व्हाइट हाउस का ईरान पर बड़ा आरोप, ट्रंप बोले- समझौता तोड़ने की कीमत चुकानी होगी

व्हाइट हाउस ने ईरान पर समझौता ज्ञापन (MoU) का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कड़ा रुख अपनाया है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने दावा किया कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हमले कर समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ऐसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा। "ईरान बातचीत चाहता है" एएनआई के अनुसार, कैरोलिन लेविट ने दावा किया कि हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान लगातार अमेरिका से संपर्क कर तनाव कम करने और बातचीत की इच्छा जता रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उनकी राष्ट्रपति ट्रंप से भी चर्चा हुई है। हालांकि, ईरान की ओर से इस दावे पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। MoU तोड़ने का लगाया आरोप व्हाइट हाउस का कहना है कि 7 जुलाई को हुए कथित हमले दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन हैं। लेविट के अनुसार, समझौते में यह स्पष्ट था कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों को निशाना नहीं बनाएगा, लेकिन उसने इस प्रतिबद्धता का पालन नहीं किया। ट्रंप की चेतावनी प्रेस सचिव ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप समुद्री सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे और व्यापारिक जहाजों पर हमलों को गंभीरता से लेते हैं। उनके अनुसार, अमेरिका इन घटनाओं को आतंकवाद की श्रेणी में देखता है और ईरान को इसके परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाई इसी नीति का हिस्सा है। वैश्विक व्यापार पर असर की आशंका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के सख्त रुख के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। वहीं, अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर ईरान की प्रतिक्रिया और संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी है।  

kalpana जुलाई 17, 2026 0
US administration announces withdrawal of sanctions relief on Iranian oil exports following attacks on oil tankers near the Strait of Hormuz.
होर्मुज हमले के बाद अमेरिका का बड़ा फैसला, ईरानी तेल पर मिली राहत वापस; तनाव और बढ़ा

Iran-US Tension: होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी प्रशासन ने ईरानी तेल की बिक्री के लिए दी गई लाइसेंस संबंधी राहत वापस लेने का फैसला किया है। अमेरिका ने साफ कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। तेल टैंकरों पर हमले के बाद सख्त कार्रवाई द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में तीन तेल टैंकरों पर मिसाइलों से हमला किया गया था। इस घटना के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात को मिली छूट वापस लेने का निर्णय लिया है। रिपोर्ट में यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के हवाले से बताया गया है कि हमले की जांच जारी है। हालांकि, अब तक किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है और ईरान की ओर से भी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अमेरिका ने ईरान को दी चेतावनी अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग पर किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि ईरान का रवैया नहीं बदला तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि दोनों देशों के बीच समझौते और प्रतिबंधों में राहत तभी संभव है, जब ईरान अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करे और तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए। शांति वार्ता जारी रहने का दावा अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि कूटनीतिक प्रयासों के जरिए क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। समझौते के भविष्य पर बढ़ी चिंता रिपोर्ट के अनुसार, हालिया घटनाओं के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही संभावित वार्ताओं के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि बढ़ता तनाव किसी भी व्यापक समझौते की संभावना को प्रभावित कर सकता है। पहले मिली थी प्रतिबंधों में राहत मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के बीच हुए अस्थायी समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कुछ शर्तों के साथ तेल निर्यात संबंधी प्रतिबंधों में राहत दी गई थी। अमेरिकी वित्त विभाग ने 21 जून के बाद कुछ प्रतिबंधों में ढील दी थी, जो 21 अगस्त तक प्रभावी रहने वाली थी। अब होर्मुज जलडमरूमध्य में हुए हमलों के बाद अमेरिका ने इस राहत को वापस लेने का फैसला किया है।  

Deepshikha जुलाई 8, 2026 0
US President Donald Trump speaks at a US Independence Day event as Iran begins funeral ceremonies for former Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei in Tehran.
खामेनेई के अंतिम संस्कार पर ट्रंप का तंज, बोले- 'हम अच्छे हैं, इसलिए ईरान को एक हफ्ते का समय दिया'

वॉशिंगटन/तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की शुरुआत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला बोला। अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने "इंसानियत" दिखाते हुए ईरान को अंतिम संस्कार के लिए एक सप्ताह का समय दिया। ट्रंप के इस बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव चर्चा में आ गया है। क्या बोले ट्रंप? अमेरिका की आजादी के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर माउंट रशमोर में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, "हमने ईरान को पूरी तरह झुका दिया। वे समझौता करना चाहते हैं। हमने इंसानियत दिखाते हुए उन्हें खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी, क्योंकि हम अच्छे हैं।" हालांकि ट्रंप ने अपने इस दावे के समर्थन में कोई अतिरिक्त जानकारी या आधिकारिक विवरण साझा नहीं किया। तेहरान में शुरू हुए अंतिम संस्कार कार्यक्रम इस बीच, अयातुल्ला अली खामेनेई के कई दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम शनिवार (4 जुलाई) से शुरू हो गए हैं। उनका पार्थिव शरीर तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। सड़कों पर उमड़े हजारों लोग राजधानी तेहरान में सुबह से ही बड़ी संख्या में शोकाकुल लोग ग्रैंड मोसल्ला की ओर बढ़ते दिखाई दिए। कई लोगों ने काले कपड़े पहन रखे थे और उनके हाथों में झंडे तथा बैनर थे। शहर के प्रमुख मार्गों पर खामेनेई की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं। शिया परंपरा के अनुसार कई श्रद्धालु छाती पीटकर शोक व्यक्त करते नजर आए। 9 जुलाई को होगा सुपुर्द-ए-खाक ईरानी अधिकारियों के अनुसार, अंतिम संस्कार की विभिन्न रस्में कई दिनों तक चलेंगी। इसके बाद 9 जुलाई को अयातुल्ला अली खामेनेई को पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। ट्रंप के ताजा बयान पर ईरान की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
US President Donald Trump and Iranian Foreign Ministry officials amid conflicting statements over possible nuclear talks in Doha.
दोहा वार्ता पर ट्रंप के दावे को ईरान ने किया खारिज, कहा- अमेरिका से किसी बैठक का कार्यक्रम नहीं

  तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर एक बार फिर विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच कतर की राजधानी दोहा में जल्द बातचीत होगी, लेकिन ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। तेहरान ने स्पष्ट कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर कोई बैठक तय नहीं की गई है। ट्रंप बोले- दोहा में होगी बातचीत वॉशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता का मुख्य विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करे और ईरान भी इस बात से सहमत है। ट्रंप के मुताबिक, इसी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत होगी। Truth Social पर भी किया दावा ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर भी पोस्ट कर लिखा कि ईरान ने बैठक का अनुरोध किया है और मंगलवार को दोहा में बातचीत होगी। उन्होंने यह नहीं बताया कि बैठक में किन-किन प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। ईरान ने तुरंत किया खंडन ट्रंप के दावे के कुछ ही समय बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर कोई वार्ता या बैठक निर्धारित नहीं है। उनके बयान के बाद दोहा में संभावित बातचीत को लेकर स्थिति और अधिक अस्पष्ट हो गई है। संघर्षविराम के बीच बढ़ी अनिश्चितता दोनों देशों के बीच लंबे समय तक चले तनाव और सैन्य टकराव के बाद हाल ही में संघर्षविराम की स्थिति बनी है। ऐसे समय में वार्ता को लेकर अमेरिका और ईरान के अलग-अलग दावों ने कूटनीतिक प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की तैयारी की खबर समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर संभावित प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकते हैं। वहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान इस सप्ताह कतर में एक तकनीकी टीम भेजने की तैयारी कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस तकनीकी दल की यात्रा का अमेरिकी अधिकारियों की किसी संभावित मौजूदगी या वार्ता से कोई संबंध नहीं है। फिलहाल तस्वीर साफ नहीं अमेरिका और ईरान की ओर से सामने आए अलग-अलग बयानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत को लेकर अभी कोई स्पष्ट सहमति दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में दोहा में संभावित वार्ता होगी या नहीं, इस पर फिलहाल संशय बना हुआ है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
US President Donald Trump and Iranian officials amid conflicting claims over possible US-Iran talks in Doha.
ट्रंप का दावा- दोहा में बैठक के लिए ईरान ने किया अनुरोध, तेहरान ने किया खंडन

  वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच संभावित वार्ता को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत का अनुरोध किया है और दोनों देशों के बीच कतर की राजधानी दोहा में बैठक होगी। ईरान ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि इस सप्ताह किसी भी तरह की बैठक या वार्ता तय नहीं है। ट्रंप बोले- ईरान ने मांगी बातचीत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका से बैठक का अनुरोध किया है और यह बैठक अगले दिन दोहा में आयोजित होगी। ट्रंप का यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट पर हो सकती है चर्चा यदि अमेरिका और ईरान के बीच दोहा में वार्ता होती है तो उसका मुख्य एजेंडा होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव को कम करना हो सकता है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हाल के दिनों में क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ी है। अमेरिकी अधिकारी का दावा- सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों ने फिलहाल सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति जताई है। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने कहा कि तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रहने तक होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रह सकती है। ईरान ने बैठक की खबरों को किया खारिज दूसरी ओर, ईरान ने ट्रंप के दावे को सिरे से नकार दिया है। सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) के मुताबिक, ईरान के उप विदेश मंत्री (कानूनी एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों) काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट कहा कि इस सप्ताह किसी भी कार्य समूह की बैठक निर्धारित नहीं है। उन्होंने कहा कि कतर के साथ नियमित संपर्क और परामर्श जारी है, लेकिन दोहा में किसी तकनीकी बैठक की पुष्टि नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, औपचारिक वार्ता तभी शुरू होगी जब दोनों पक्ष समय, स्थान और अन्य आवश्यक शर्तों पर सहमत होंगे। कतर निभा रहा है मध्यस्थ की भूमिका अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों में कतर लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने के लिए कूटनीतिक स्तर पर संपर्क जारी है और विभिन्न माध्यमों से बातचीत की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। विरोधाभासी दावों से बनी असमंजस की स्थिति ट्रंप के दावे और ईरान के आधिकारिक खंडन के बाद संभावित वार्ता को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। एक ओर अमेरिका बैठक होने की बात कह रहा है, जबकि ईरान किसी भी निर्धारित वार्ता से इनकार कर रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के रुख और कूटनीतिक प्रयासों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
US and Iranian officials agree to pause military operations ahead of high-level talks in Doha aimed at easing regional tensions.
मिडिल ईस्ट संकट पर राहत के संकेत! अमेरिका और ईरान हमले रोकने पर सहमत, दोहा में होगी अहम वार्ता

  वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में कई दिनों से जारी सैन्य तनाव के बीच राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान ने फिलहाल एक-दूसरे के खिलाफ सभी सैन्य हमले रोकने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच यह सहमति ऐसे समय बनी है, जब हाल के दिनों में सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंकाएं बढ़ा दी थीं। अमेरिकी मीडिया कंपनी Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्ष अब संघर्ष को और बढ़ाने के बजाय कूटनीतिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हुए हैं। इसी सिलसिले में मंगलवार (30 जून) को कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अहम बैठक होगी। फिलहाल रुकी सैन्य कार्रवाई रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने अस्थायी रूप से सभी सैन्य (काइनेटिक) गतिविधियों पर रोक लगाने का फैसला किया है। यह कदम उस अंतरिम समझौते को बचाने की कोशिश माना जा रहा है, जिसकी घोषणा दोनों देशों ने करीब 11 दिन पहले लंबे तनाव को कम करने के उद्देश्य से की थी। समझौते के बाद भी दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए सीमित सैन्य कार्रवाई की थी, जिससे युद्धविराम पर सवाल उठने लगे थे। अब दोनों देशों ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए बातचीत का रास्ता चुना है। दोहा में होगी अहम बैठक अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच उच्चस्तरीय वार्ता होगी। पहले यह बैठक स्विट्जरलैंड में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक चर्चा के लिए प्रस्तावित थी, लेकिन हालिया सैन्य घटनाक्रम के बाद इसका स्थान बदलकर दोहा कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े विवादों और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा होगी। समुद्री व्यापार रहेगा सामान्य अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बातचीत शुरू होने तक दोनों देश सैन्य कार्रवाई से परहेज करेंगे। एक अधिकारी ने कहा कि सभी सैन्य गतिविधियों को फिलहाल रोकने पर सहमति बन गई है। दूसरे अधिकारी के अनुसार, दोनों पक्ष तनाव कम करने के लिए पीछे हटेंगे और अंतरराष्ट्रीय समुद्री जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी रहेगी, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर तत्काल असर पड़ने की आशंका कम हो गई है। होर्मुज विवाद रहेगा वार्ता का केंद्र दोहा में होने वाली बैठक का मुख्य फोकस होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े विवादों का समाधान होगा। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोहा वार्ता सकारात्मक रहती है, तो मध्य पूर्व में हालिया सैन्य तनाव कम करने और व्यापक कूटनीतिक समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
US President Donald Trump addresses questions about the Minab school missile strike during a media briefing.
150 बच्चों की मौत पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- 'सबूत नहीं कि मिनाब स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल से हुआ हमला'

  Washington: ईरान के मिनाब स्कूल पर हुए घातक मिसाइल हमले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अब तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो सके कि स्कूल पर हमला अमेरिकी मिसाइल से किया गया था। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान कई पक्षों की ओर से लगातार मिसाइलें दागी जा रही थीं, इसलिए हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की पहचान करना आसान नहीं है। 'हमारी मिसाइल थी, इसका कोई प्रमाण नहीं' हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि कुछ लोगों ने दावा किया कि मिनाब स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल से हमला हुआ, लेकिन उनके पास इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं है। उन्होंने कहा, "युद्ध के दौरान हर दिशा से मिसाइलें दागी जा रही थीं। ऐसे में यह तय करना बेहद मुश्किल है कि किस मिसाइल ने हमला किया। मुझे ऐसा कोई सबूत नहीं दिखा जिससे यह कहा जा सके कि वह हमारी मिसाइल थी।" 28 फरवरी को हुआ था भीषण हमला ईरान-अमेरिका संघर्ष के पहले दिन यानी 28 फरवरी को मिनाब स्थित एक स्कूल पर मिसाइल हमला हुआ था। इस हमले में 150 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिनमें बड़ी संख्या में स्कूली छात्राएं शामिल थीं। घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और हमले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी। अमेरिका पर लगे थे गंभीर आरोप हमले के तुरंत बाद कई मीडिया रिपोर्टों और विश्लेषकों ने आशंका जताई थी कि इसके पीछे अमेरिकी सैन्य कार्रवाई हो सकती है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और मामले की जांच जारी होने की बात कही है। ट्रंप ने जांच पर भी जताया संदेह डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इतने बड़े सैन्य संघर्ष के दौरान यह तय करना बेहद कठिन है कि किसी विशेष हमले के लिए कौन जिम्मेदार था। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि इस मामले की पूरी सच्चाई कभी सामने ही न आ सके। उनके मुताबिक, युद्ध क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों और अलग-अलग पक्षों की सैन्य गतिविधियों के कारण जांच एजेंसियों के सामने भी बड़ी चुनौती है। दुनिया की नजर जांच रिपोर्ट पर मिनाब स्कूल पर हुआ हमला ईरान-अमेरिका संघर्ष की सबसे दर्दनाक घटनाओं में गिना जा रहा है। बड़ी संख्या में बच्चों और नागरिकों की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां इस हमले के लिए जिम्मेदार पक्ष की पहचान कर पाती हैं या नहीं।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
US President Donald Trump speaks to reporters, warning Iran to comply with the interim agreement signed with Washington.
अगर ईरान समझौते से मुकरा, तो जो करना पड़ेगा वो करूंगा; ट्रंप की खुली चेतावनी

  वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि तेहरान अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते का पालन नहीं करता है, तो वाशिंगटन सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ईरान का रवैया ठीक नहीं रहा, तो वह वही करेंगे जो आवश्यक होगा। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, "अगर ईरान अपने समझौते पर खरा नहीं उतरता या उसका व्यवहार सही नहीं रहता है, तो मुझे जो करना पड़ेगा, मैं वह करूंगा।" उनके इस बयान को ईरान के लिए सीधी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौते के बाद ट्रंप का सख्त संदेश गौरतलब है कि पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब कुछ महीने पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई तथा उसके जवाब में ईरान के हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया को युद्ध की स्थिति में पहुंचा दिया था। समझौते के बावजूद ट्रंप का यह बयान संकेत देता है कि वाशिंगटन ईरान के हर कदम पर कड़ी निगरानी रखेगा और किसी भी उल्लंघन पर कठोर प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार है। अमेरिकी किसानों को मिलेगा फायदा ट्रंप ने कहा कि ईरान की जो धनराशि पहले से रोकी गई थी, उसका इस्तेमाल केवल अमेरिका से खाद्य उत्पाद खरीदने के लिए किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इस व्यवस्था से अमेरिकी किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। ट्रंप ने कहा, "वह सारा पैसा भोजन की खरीद के रूप में वापस अमेरिका आ रहा है। ईरान की आबादी 9.1 करोड़ है और वे अपने लोगों का पेट भरने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए जो पैसा जारी किया जा रहा है, वह सीधे हमारे किसानों के पास जाएगा।" युद्ध के बाद गहरा मानवीय और आर्थिक संकट ईरान, इजरायल और लेबनान में जारी संघर्ष ने पश्चिम एशिया में भारी मानवीय संकट पैदा कर दिया है। युद्ध और सैन्य कार्रवाइयों के कारण हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं ने दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। समझौते के भविष्य पर टिकी दुनिया की नजर विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौते की सफलता काफी हद तक दोनों देशों की प्रतिबद्धता पर निर्भर करेगी। यदि समझौते की शर्तों का पालन नहीं हुआ, तो पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ने की आशंका है।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
US Vice President JD Vance speaks on diplomacy and Middle East security amid criticism of the America-Iran agreement from Israeli leaders.
‘हर समस्या का हल युद्ध नहीं’, जेडी वेंस ने इजराइल को दिया दो टूक संदेश; अमेरिका-ईरान समझौते का किया बचाव

  वॉशिंगटन/तेल अवीव: अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर इजराइली नेताओं की लगातार आलोचना के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इजराइल को स्पष्ट संदेश दिया है कि हर क्षेत्रीय और राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती का समाधान केवल सैन्य ताकत या युद्ध के जरिए नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक समस्याओं के समाधान के लिए बातचीत, कूटनीति और राजनीतिक प्रयासों पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में वेंस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति और हालिया अमेरिका-ईरान समझौते का बचाव करते हुए इजराइली नेतृत्व से अमेरिका के कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करने की अपील की। ‘हर समस्या का समाधान लोगों को मारकर नहीं निकाला जा सकता’ जेडी वेंस ने कहा कि इजराइल को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के लिए केवल सैन्य अभियानों और हमलों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप सिर्फ 90 लाख की आबादी वाला देश हैं। आप अपनी हर राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती का समाधान केवल लोगों को मारकर या सैन्य कार्रवाई के जरिए नहीं निकाल सकते।” वेंस ने संकेत दिया कि सुरक्षा संबंधी जटिल समस्याओं के समाधान के लिए कूटनीतिक संवाद और राजनीतिक समझौते जैसे विकल्पों को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इजराइली नेताओं की आलोचना के बीच आया बयान जेडी वेंस की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और इजराइल के राजनीतिक नेता अमेरिका-ईरान समझौते पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। इजराइली नेतृत्व का आरोप है कि इस समझौते में: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर पर्याप्त नियंत्रण की व्यवस्था नहीं है। बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से सीमित नहीं किया गया है। लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। अमेरिका की नीति का किया बचाव वेंस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति का उद्देश्य पश्चिम एशिया में तनाव कम करना और संघर्ष के स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका कूटनीतिक माध्यमों से क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने का प्रयास कर रहा है और सहयोगी देशों से भी इसी दिशा में रचनात्मक समर्थन की अपेक्षा रखता है। उन्होंने इशारों में यह भी कहा कि अमेरिका की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना करने के बजाय इजराइल को अपने सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी के साथ समन्वय बढ़ाने की जरूरत है। पश्चिम एशिया की राजनीति में बढ़ सकती है नई बहस विशेषज्ञों का मानना है कि जेडी वेंस का बयान अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान नीति को लेकर उभरते मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने लाता है। अमेरिका जहां कूटनीतिक समाधान और क्षेत्रीय तनाव कम करने पर जोर दे रहा है, वहीं इजराइल ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को लेकर अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्रमुखता दे रहा है। अमेरिका-ईरान समझौते पर जारी बहस आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की रणनीतिक राजनीति और अमेरिका-इजराइल संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Bihar constable recruitment scam
बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा, दूसरे के नाम पर परीक्षा देने पहुंचे दो युवक गिरफ्तार

सिवान, एजेंसियां। बिहार में सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। सिवान जिले में केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) द्वारा आयोजित परीक्षा के दौरान दो फर्जी अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपी दूसरे अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचे थे। पुलिस ने उनके पास से फर्जी दस्तावेज, एक ही परीक्षा के दो अलग-अलग प्रवेश पत्र और अन्य संदिग्ध कागजात बरामद किए हैं।   दो परीक्षा केंद्रों से हुई गिरफ्तारी यह कार्रवाई 17 जून को प्रथम और द्वितीय पाली की परीक्षा के दौरान सरस्वती शिशु मंदिर परीक्षा केंद्र और दाउद मेमोरियल उर्दू गर्ल्स हाई स्कूल परीक्षा केंद्र पर की गई। परीक्षा केंद्रों पर तैनात दंडाधिकारी और पुलिस टीम ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर दोनों अभ्यर्थियों को पकड़ लिया। पूछताछ में उन्होंने अपनी वास्तविक पहचान बताई और परीक्षा में फर्जी तरीके से शामिल होने की बात स्वीकार की।   पहले भी दे चुके थे परीक्षा गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पटना जिले के पीरपुरा थाना क्षेत्र निवासी सियाराम कुमार और जहानाबाद जिले के मखदूमपुर थाना क्षेत्र निवासी गौतम कुमार के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी 14 जून को मोतिहारी और गोपालगंज में आयोजित इसी भर्ती परीक्षा में भी शामिल हो चुके थे। इससे पुलिस को संगठित परीक्षा गिरोह की आशंका है।   नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस तलाशी के दौरान दोनों के पास से एक ही परीक्षा के दो अलग-अलग प्रवेश पत्र मिले, जिनमें जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज थी। सभी संदिग्ध दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। सिवान पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब इस फर्जीवाड़े से जुड़े पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी है।   सिवान के एसपी पुरन कुमार झा ने कहा कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखना पुलिस की प्राथमिकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि परीक्षा में किसी भी तरह की अनियमितता या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबर 9031683607 या निकटतम थाने को दें।

anjali kumari जून 18, 2026 0
Donald Trump and Masoud Pezeshkian reach a digital peace agreement to reopen the Strait of Hormuz and ease Middle East tensions.
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर लगी मुहर, ट्रंप बोले- ‘It's Signed!’

  अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से जारी तनाव के बाद आखिरकार शांति समझौते पर मुहर लग गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने युद्ध समाप्त करने, क्षेत्रीय तनाव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए एक डिजिटल मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी उत्साहित नजर आए। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या डील साइन हो गई है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "It's Signed!" डिजिटल हस्ताक्षर से लागू हुआ समझौता अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, बुधवार (17 जून) को राष्ट्रपति ट्रंप और मसूद पेजेशकियन ने डिजिटल माध्यम से समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससे पहले रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर कालिबाफ भी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर चुके थे। हस्ताक्षर के तुरंत बाद यह समझौता प्रभावी हो गया, जिसके कारण इस सप्ताह स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित औपचारिक हस्ताक्षर समारोह को रद्द कर दिया गया। होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोलने पर बनी सहमति समझौते के तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने पर सहमत हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है और दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने और तेल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ईरान को मिलेगी प्रतिबंधों में राहत समझौते के तहत ईरान पर लगाए गए कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने और उसके तेल निर्यात को फिर से शुरू करने का रास्ता भी खुल सकता है। माना जा रहा है कि इससे ईरानी अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिलेगी। वर्साय पैलेस में हार्ड कॉपी पर भी किए हस्ताक्षर अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार रात फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित एक डिनर कार्यक्रम के दौरान समझौते की हार्ड कॉपी पर भी आधिकारिक हस्ताक्षर किए। उस समय फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद थे। व्हाइट हाउस ने इस साइनिंग का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें ट्रंप डिनर टेबल पर दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते नजर आ रहे हैं। कई महीनों की तनातनी और सैन्य तनाव के बाद हुआ यह समझौता अमेरिका और ईरान के रिश्तों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में शांति और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता की नई उम्मीद भी जगी है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
US President Donald Trump speaks after claiming Iran agreed not to build nuclear weapons and denying reports of a $300 million payment.
Trump on Iran Nuclear Deal: ट्रंप का दावा- ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, 300 मिलियन डॉलर देने की खबर को बताया फेक न्यूज

  वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने पर सहमति दे दी है। इसके साथ ही उन्होंने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका शांति समझौते के तहत ईरान को 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर देने जा रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा, "ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है।" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान को 300 मिलियन डॉलर दिए जाने की खबर पूरी तरह फर्जी है और इसे डेमोक्रेट्स द्वारा फैलाया जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से फिर शुरू हुई जहाजों की आवाजाही अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है और कई तेल टैंकर सुरक्षित रूप से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजर रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चले संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से हुए डिजिटल शांति समझौते के बाद सामने आया है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है और इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है। शुक्रवार को हो सकती है अंतिम डील ट्रंप ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर औपचारिक रूप से आमने-सामने हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। 'होर्मुज हमेशा के लिए शुल्क मुक्त रहेगा' 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ हुए समझौते से यह सुनिश्चित होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य हमेशा के लिए शुल्क मुक्त रहेगा और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की निर्बाध आवाजाही जारी रहेगी। रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलीबाफ के साथ एक कार्यढांचा समझौते (Framework Agreement) पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर भी किए हैं। वैश्विक बाजार की नजर अंतिम समझौते पर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर हो जाते हैं, तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है, वैश्विक तेल आपूर्ति स्थिर हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऊर्जा कीमतों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर अभी भी आगे की वार्ताओं की जरूरत बनी हुई है।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Donald Trump speaks on Iran allegations as tensions rise over Indian ships in Strait of Hormuz
ईरान ने भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला किया? ट्रंप का बड़ा दावा, तेहरान ने आरोपों को बताया झूठ

ट्रंप ने ईरान पर लगाया भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से निकल रहे भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला करने की कोशिश की, जिसे विफल कर दिया गया। उन्होंने इस घटना को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया और ईरान की कड़ी आलोचना की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि भारतीय जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए चिंताजनक है। ओमान तट के पास हमलों के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब इस सप्ताह ओमान तट के पास भारतीय क्रू वाले कई जहाजों पर हमले हुए हैं। इनमें सबसे चर्चित मामला एमटी सेटेबेलो जहाज का रहा, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं को लेकर भारत पहले ही चिंता जता चुका है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नागरिक जहाजों पर हो रहे हमलों को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। ईरान ने ट्रंप के आरोपों को किया खारिज ट्रंप के आरोपों के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत में ईरानी दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। ईरान का कहना है कि यह आरोप लोगों का ध्यान उन घटनाओं से हटाने की कोशिश है, जिनमें हाल के दिनों में अमेरिकी कार्रवाई के दौरान भारतीय जहाज प्रभावित हुए और भारतीय नागरिकों की जान गई। तेहरान ने कहा कि भारत और ईरान के बीच मजबूत संबंध हैं और भारतीय जहाजों को निशाना बनाने का आरोप तथ्यहीन है। प्रस्तावित शांति समझौते पर भी बढ़ा विवाद इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की ओर से सामने आया समझौते का कथित मसौदा वास्तविक सहमति से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि ईरान द्वारा प्रस्तुत जानकारी सच्चाई से दूर है और वार्ता में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व से जल्द स्पष्ट रुख अपनाने की अपील भी की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने दी सफाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी समझौते को लेकर फैल रही अफवाहों का खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान को कोई नकद भुगतान नहीं किया जा रहा है और न ही सिर्फ समझौते पर हस्ताक्षर करने के बदले आर्थिक सहायता दी जाएगी। उनके अनुसार, किसी भी आर्थिक राहत को ईरान द्वारा तय शर्तों के पालन से जोड़ा गया है। ईरान बोला- समझौता पहले से ज्यादा करीब वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पहले की तुलना में कहीं ज्यादा करीब पहुंच चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष युद्ध समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। भारत के लिए क्यों अहम है यह पूरा घटनाक्रम? होर्मुज जलडमरूमध्य Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आने वाले तेल और गैस आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव, जहाजों पर हमले और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक खींचतान भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर सीधा असर डाल सकती है। इसलिए नई दिल्ली इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।  

surbhi जून 13, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran talks and possible nuclear deal during a political event.
ट्रंप का बड़ा दावा: ‘दो हफ्तों में ईरान पर पूर्ण विजय’, परमाणु समझौते के भी दिए संकेत

  वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी कूटनीतिक और रणनीतिक टकराव को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि अगले दो सप्ताह अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे और इसी अवधि में ईरान के खिलाफ “पूर्ण विजय” हासिल होने की संभावना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच एक नए परमाणु समझौते की राह खुल सकती है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ा सैन्य तनाव फिलहाल कम होता दिखाई दे रहा है और क्षेत्र में युद्ध की आशंकाओं के बीच कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। चुनावी कार्यक्रम में किया बड़ा दावा अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने यह टिप्पणी एक वर्चुअल राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान की, जहां उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित किया। कार्यक्रम रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के समर्थन में आयोजित किया गया था। अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पर्दे के पीछे चल रही बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रहा है और समझौते की संभावना पहले की तुलना में अधिक मजबूत दिखाई दे रही है। ट्रंप ने कहा, “हम बातचीत कर रहे हैं और वे एक अच्छा समझौता करना चाहते हैं। वे हमें लगभग हर वह चीज देने को तैयार हैं जिसकी हमें जरूरत है। वे परमाणु हथियार नहीं रखने पर भी तैयार हैं।” ‘दो सप्ताह में दिखेगी असली जीत’ राष्ट्रपति ट्रंप ने अगले पखवाड़े को निर्णायक बताते हुए कहा कि अमेरिका जल्द ही अपनी रणनीतिक सफलता की घोषणा कर सकता है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम यह संघर्ष जीत रहे हैं, लेकिन असली जीत अगले दो सप्ताह में दिखाई देगी। हम पूर्ण विजय की घोषणा करेंगे। यह पूरी जीत होगी और बहुत जल्द होगी।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि यदि समझौता सफल रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। ईरान-इजरायल तनाव के बीच आया बयान ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सप्ताहांत में ईरान और इजरायल के बीच तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। दोनों देशों के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों ने पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंकाएं बढ़ा दी थीं। तनाव बढ़ने के बाद इजरायल ने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि ईरान ने भी जवाबी हमले किए। बाद में दोनों पक्षों की ओर से सैन्य गतिविधियों में कमी देखने को मिली। नेतन्याहू ने हमले रोकने की पुष्टि की इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पुष्टि की है कि इजरायली सेना ने फिलहाल ईरानी ठिकानों पर अपने सैन्य अभियान रोक दिए हैं। उन्होंने किसी औपचारिक युद्धविराम की घोषणा नहीं की, लेकिन सैन्य कार्रवाई में आई नरमी को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने भी संकेत दिया है कि वह फिलहाल अपने सैन्य अभियान को आगे नहीं बढ़ाएगा।  तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके हितों को नुकसान पहुंचाने वाली कोई नई कार्रवाई होती है तो जवाबी कदम उठाए जा सकते हैं। परमाणु समझौते पर फिर बढ़ीं उम्मीदें ट्रंप के बयान के बाद अमेरिका और ईरान के बीच संभावित परमाणु समझौते को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं और परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई दौर की वार्ताएं भी विफल रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष किसी नए समझौते पर सहमत होते हैं तो इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका व्यापक असर पड़ सकता है। पहले भी दे चुके हैं ऐसी समयसीमा यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने किसी कूटनीतिक सफलता के लिए दो सप्ताह की समयसीमा तय की हो। इससे पहले भी उन्होंने क्षेत्रीय संघर्षों और युद्धविराम प्रयासों को लेकर इसी तरह की समय-सीमा का उल्लेख किया था। अब एक बार फिर ट्रंप ने अगले दो सप्ताह को निर्णायक बताते हुए संकेत दिया है कि अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इन दावों पर अंतिम तस्वीर आने वाले दिनों में ही साफ हो पाएगी। पश्चिम एशिया पर टिकी दुनिया की नजर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते घटनाक्रमों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयासों और संभावित परमाणु समझौते की दिशा में होने वाली प्रगति आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
US Iran relations
ईरान के साथ समझौते के करीब अमेरिका, ट्रंप बोले- बमबारी से ज्यादा असरदार होगी डील

न्यूयॉर्क, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक मजबूत और प्रभावशाली समझौता होने की संभावना काफी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही ऐसा समझौता हो सकता है जो सैन्य कार्रवाई से भी अधिक प्रभावी साबित होगा।   न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास सैन्य विकल्प मौजूद हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका चाहे तो ईरान के खिलाफ व्यापक बमबारी अभियान चला सकता है, लेकिन इससे क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री व्यापार मार्गों पर गंभीर असर पड़ेगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि युद्ध की तुलना में हस्ताक्षरित समझौता अधिक स्थायी और मजबूत परिणाम देगा।   ‘बमबारी नहीं, समझौता बेहतर विकल्प’ ट्रंप ने कहा कि किसी भी सैन्य अभियान में बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती है, जिसे वे टालना चाहते हैं। उनका मानना है कि एक औपचारिक समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर अधिक प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकता है।   नाकेबंदी को बताया सबसे प्रभावी हथियार अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि आर्थिक प्रतिबंधों और समुद्री नाकेबंदी ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। उनके अनुसार, यही दबाव तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने में सफल रहा है। ट्रंप ने कहा कि नाकेबंदी कई मामलों में बमबारी से भी अधिक प्रभावशाली साबित हुई है और ईरान अब समझौते के लिए मजबूर होता दिख रहा है।   मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव हाल के दिनों में ईरान और इजराइल के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों से क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री से भी बातचीत कर संयम बरतने की सलाह दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक असर पड़ सकता है।

Unknown जून 9, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran talks, nuclear concerns, and a possible diplomatic agreement.
ट्रंप बोले- समझौते से हो या सैन्य कार्रवाई से, अंत में अमेरिका ही जीतेगा

  अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव और वार्ता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव का अंत चाहे कूटनीतिक समझौते से हो या सैन्य ताकत के जरिए, नतीजा अमेरिका के पक्ष में ही रहेगा। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत का उद्देश्य कई महीनों से चल रहे संकट को समाप्त करना है। खामेनेई से मुलाकात के संकेत ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei से संभावित मुलाकात को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा, "अगर समझौता होता है और मुलाकात का अवसर मिलता है तो मुझे उनसे मिलकर खुशी होगी। मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है।" ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी मुलाकात किसी संभावित समझौते की स्थिति में ही संभव हो सकती है। एनरिच्ड यूरेनियम पर अमेरिका की नजर अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अमेरिका उस पर लगातार नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका चाहे तो उस सामग्री पर नियंत्रण हासिल कर सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसी किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। ट्रंप के अनुसार यूरेनियम सुरक्षित स्थान पर है और उसकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। समझौते के लिए अमेरिका की दो प्रमुख शर्तें ट्रंप ने संभावित समझौते की दो मुख्य शर्तें भी सामने रखीं। ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। Strait of Hormuz को पूरी तरह से खोला जाए। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख समुद्री मार्ग माना जाता है और दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। तेहरान का जवाब- मसौदे में कई बातें अब भी अस्पष्ट ईरान की ओर से बातचीत को लेकर सतर्क रुख अपनाया गया है। खामेनेई के सलाहकार Mohsen Rezaee ने कहा कि प्रस्तावित समझौते में कई महत्वपूर्ण बिंदु अब भी स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका अपनी शर्तों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान की चिंताओं और मांगों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा। ईरान की प्रमुख मांगें क्या हैं? तेहरान ने स्थायी शांति समझौते के लिए कई शर्तें रखी हैं, जिनमें शामिल हैं: अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना। तेल और गैस निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाना। विदेशों में जमी ईरानी संपत्तियों को जारी करना। भविष्य में सैन्य हमलों के खिलाफ सुरक्षा गारंटी देना। युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा तंत्र बनाना। क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य उपस्थिति कम करना। ईरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन पर चर्चा तभी होगी जब युद्ध और नाकाबंदी से जुड़े मुद्दों का समाधान हो जाएगा। संघर्षविराम के बावजूद पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हालात दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल से संघर्षविराम लागू है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मध्य पूर्व के कई हिस्सों में अस्थिरता बनी हुई है और समय-समय पर सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वार्ता प्रक्रिया में प्रगति हुई है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर मतभेद अभी भी गहरे हैं। कूटनीति और दबाव की दोहरी रणनीति ट्रंप के हालिया बयान से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका एक ओर वार्ता और समझौते की संभावना खुली रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति भी जारी रखे हुए है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच होने वाली बातचीत इस बात का फैसला कर सकती है कि संकट का समाधान कूटनीतिक रास्ते से निकलता है या तनाव एक बार फिर बढ़ता है।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh अगस्त 14, 2026 0