भारत-अमेरिका संबंध

US President Donald Trump and Indian Prime Minister Narendra Modi during a bilateral meeting at the G7 Summit in France.
'मोदी पर फिल्म बनी तो हॉलीवुड को हीरो नहीं मिलेगा', ट्रंप का दिलचस्प बयान; पीएम को बताया महान और सख्त नेता

  वॉशिंगटन/पेरिस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली और मजबूत नेताओं में से एक बताया है। ट्रंप ने कहा कि यदि कभी प्रधानमंत्री मोदी पर फिल्म बनाई जाती है, तो हॉलीवुड को उनके किरदार के लिए उपयुक्त अभिनेता ढूंढने में मुश्किल होगी, क्योंकि उनका व्यक्तित्व बिल्कुल अलग और अनूठा है। न्यूज वेबसाइट एक्सियोस (Axios) को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपने पसंदीदा वैश्विक नेताओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता प्रभावशाली, मजबूत और परिणाम देने की क्षमता रखने वाले हैं। 'मोदी एक महान नेता हैं' ताकत, प्रभाव और नेतृत्व क्षमता के आधार पर अपने पसंदीदा नेताओं के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि मोदी बहुत अच्छे हैं। भारत के कुछ बेहद अच्छे आंकड़े सामने आए हैं। वह युद्ध से दूर रहते हैं, जो एक समझदारी भरा कदम है। वह 1.5 अरब लोगों का नेतृत्व करते हैं। भारत वास्तव में दुनिया का सबसे बड़ा देश है और मोदी एक महान नेता हैं।" ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का वैश्विक स्तर पर काफी सम्मान है और उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर भी उन्हें बेहद सख्त और मजबूत नेता के रूप में पाया है। 'मोदी पर फिल्म बनी तो हीरो कहां से लाएगा हॉलीवुड?' इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी या राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर कोई फिल्म बनाई जाए, तो हॉलीवुड के लिए उनकी भूमिका निभाने के लिए सही अभिनेता ढूंढना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा, "मोदी का व्यक्तित्व बिल्कुल अलग है। दुनिया भर में उनका सम्मान किया जाता है। मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता हूं और वह बेहद मजबूत और सख्त नेता हैं।" भारत-अमेरिका व्यापार पर भी बोले ट्रंप ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार होता है, लेकिन पहले भारत को इसका ज्यादा फायदा मिलता था। उन्होंने इसके लिए भारत को दोषी नहीं ठहराया। ट्रंप ने कहा कि उस समय अमेरिका में ऐसे नेता थे, जिन्होंने व्यापारिक असंतुलन को बढ़ने दिया। उनके मुताबिक, अब परिस्थितियां बदल गई हैं और व्यापार अधिक निष्पक्ष तरीके से हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस बदलाव से पूरी तरह खुश नहीं है, क्योंकि पहले उसे व्यापारिक लाभ अधिक मिलता था। 'मोदी ने भारत की राजनीति की तस्वीर बदल दी' ट्रंप ने कहा कि वह कई वर्षों से भारत की राजनीति को देखते आ रहे हैं। उनके अनुसार, पहले भारत में नेतृत्व जल्दी-जल्दी बदलता था और कई नेता लंबे समय तक सत्ता में नहीं टिक पाते थे। उन्होंने कहा, "कोई छह महीने तो कोई एक साल तक ही पद पर रहता था, लेकिन मोदी के आने के बाद तस्वीर बदल गई। वह 12 साल से अधिक समय से सत्ता में हैं और उनकी पकड़ काफी मजबूत है।" ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को "शांत, संतुलित लेकिन बेहद सख्त नेता" बताते हुए कहा कि उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है। जी-7 शिखर सम्मेलन में हुई मुलाकात फ्रांस में आयोजित G7 Summit 2026 के दौरान ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump hold bilateral talks during the G7 Summit in France on maritime security and strategic cooperation.
होर्मुज से लेकर ट्रेड तक, पीएम मोदी और ट्रंप की बैठक में कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। करीब 16 महीनों बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने की यह पहली मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेता फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में मिले थे। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की स्थिति, वैश्विक स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना दुनिया के लिए जरूरी : पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसे हर हाल में खुला और सुरक्षित बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लाखों नाविक समुद्री मार्गों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भी शामिल हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण : ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की बातों का समर्थन करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है और मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता बनाए रखने में उसकी भूमिका बेहद अहम है। आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पर भी हुई चर्चा बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका में भारतीय निवेश और भारतीय कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। व्यक्तिगत संबंधों का भी किया जिक्र राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी लंबे समय से उनके मित्र रहे हैं और उनसे मुलाकात हमेशा सुखद अनुभव रहती है। जी7 सम्मेलन के दौरान हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत और अमेरिका की बढ़ती साझेदारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump hold talks during the G7 Summit in France, discussing strategic ties and global security.
मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका पूरी ताकत से साथ खड़ा होगा, ट्रंप का बड़ा वादा

  फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। बैठक के दौरान ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों को बेहद मजबूत बताते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर कोई हमला होता है, तो अमेरिका पूरी ताकत के साथ भारत के समर्थन में खड़ा रहेगा। भारत की सुरक्षा को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "भारत और अमेरिका के बीच शानदार रिश्ते हैं। अगर भारत पर कोई हमला होता है, तो हम उसकी मदद के लिए खड़े रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर यदि कोई भी हमला करता है, तो अमेरिका पूरी ताकत से भारत के साथ दिखाई देगा।" पीएम मोदी को बताया सख्त नेगोशिएटर डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें बेहद सख्त और कुशल नेगोशिएटर बताया। उन्होंने कहा, "वह दिखने में बेहद शांत और सौम्य हैं, लेकिन बातचीत और डील्स के मामले में उतने ही सख्त और माहिर खिलाड़ी हैं। वह अक्सर सामने वाले को चौंका देते हैं।" ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी जितने कड़े वार्ताकार हैं, उतने ही बड़े देशभक्त भी हैं। वह भारत की जनता से बेहद प्यार करते हैं और अमेरिका के लिए भी उनके मन में सम्मान है। जल्द भारत दौरे का किया वादा अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वह भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं और भविष्य में जल्द ही भारत का दौरा करेंगे। 'व्हाइट हाउस में हूं, तब तक भारत का एक दोस्त अमेरिका में है' प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने कहा, "जब तक मैं व्हाइट हाउस में हूं, भारत का अमेरिका में एक दोस्त है।" उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया समेत कई अहम वैश्विक मुद्दों पर भारत बड़ी भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों के बीच रोजगार, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। ऊर्जा सहयोग पर भी बोले ट्रंप भारत की ओर से अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ाने के सवाल पर ट्रंप ने कहा, "भारत हमारे साथ जो चाहे कर सकता है। हमारे संबंध बेहद अच्छे हैं। मैं और प्रधानमंत्री मोदी तथा हमारे दोनों देश पहले से कहीं अधिक करीब हैं।" ईरान समझौते पर क्या बोले ट्रंप? ईरान के साथ संभावित समझौते पर ट्रंप ने कहा कि यह सिर्फ दो पैराग्राफ का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक विस्तृत मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) है, जो आगे चलकर एक नियमित समझौते का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ईरान इस समझौते को आगे बढ़ाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हमें प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी होगी। फिलहाल वे समझौते के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहे हैं।"  

Deepshikha जून 18, 2026 0
US military headquarters graphic highlighting the renaming of Indo-Pacific Command back to Pacific Command amid strategic debate.
US Indo-Pacific Command का नाम बदला, 'इंडो' शब्द हटाकर फिर बना Pacific Command; भारत और क्वाड पर क्या पड़ेगा असर?

  अमेरिका ने अपने सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कमांडों में से एक के नाम में बड़ा बदलाव करते हुए यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) को फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) नाम दे दिया है। अमेरिकी युद्ध विभाग (Department of War) ने कहा कि यह कदम कमांड की ऐतिहासिक विरासत और उसकी मूल पहचान को बहाल करने के लिए उठाया गया है। यह वही नाम है जिसके तहत यह सैन्य कमांड 70 वर्षों से अधिक समय तक कार्य करता रहा था। 2018 में 'इंडो' शब्द जोड़ा गया था साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री Jim Mattis ने अमेरिकी पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया था। उस समय वॉशिंगटन का मानना था कि हिंद महासागर क्षेत्र का रणनीतिक महत्व तेजी से बढ़ रहा है और इसकी सुरक्षा चुनौतियां प्रशांत क्षेत्र से गहराई से जुड़ी हुई हैं। 'इंडो-पैसिफिक' शब्द को भारत और हिंद महासागर की बढ़ती भू-राजनीतिक अहमियत के प्रतीक के रूप में देखा गया था। नाम बदला, लेकिन जिम्मेदारियां नहीं अमेरिकी युद्ध विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल नाम बदला गया है। कमांड की रणनीति, सैन्य मिशन और भौगोलिक दायरे में कोई बदलाव नहीं किया गया है। USPACOM का संचालन क्षेत्र पहले की तरह: अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर का बड़ा हिस्सा, पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ क्षेत्रों तक फैला रहेगा। कमांड आगे भी संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत, रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व करती रहेगी। क्यों अहम है यह सैन्य कमांड? अमेरिकी पैसिफिक कमांड की स्थापना 1 जनवरी 1947 को Harry S. Truman के कार्यकाल में हुई थी। यह अमेरिका की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी संयुक्त लड़ाकू कमांडों में से एक है। इसने: Korean War Vietnam War जैसे बड़े सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी इसकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। भारत और क्वाड के लिए क्या मायने? अमेरिका ने कहा है कि यह केवल नाम का बदलाव है, लेकिन कई रणनीतिक विशेषज्ञ इसे प्रतीकात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। 'इंडो-पैसिफिक' अवधारणा पिछले कुछ वर्षों में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच बने Quadrilateral Security Dialogue (क्वाड) सहयोग की आधारशिला मानी जाती रही है। 'इंडो' शब्द हटने से यह सवाल उठ रहे हैं कि: क्या ट्रंप प्रशासन इंडो-पैसिफिक रणनीति की प्राथमिकताओं में बदलाव चाहता है? क्या भारत की रणनीतिक भूमिका को लेकर अमेरिका का दृष्टिकोण बदल रहा है? क्या यह केवल ऐतिहासिक नाम की वापसी है या इसके पीछे कोई बड़ा भू-राजनीतिक संदेश छिपा है? फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय साझेदारों, भारत सहित सभी सहयोगी देशों के साथ 'स्वतंत्र और खुला क्षेत्र' बनाए रखने की प्रतिबद्धता पहले की तरह कायम रहेगी। हवाई से संचालित होता है विशाल सुरक्षा नेटवर्क हवाई स्थित मुख्यालय से संचालित यह कमांड दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री और सामरिक क्षेत्रों की निगरानी करती है। इसके दायरे में वैश्विक व्यापार मार्ग, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। ऐसे में नाम परिवर्तन को भले ही प्रशासनिक कदम बताया जा रहा हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में इसे भारत-अमेरिका संबंधों और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे के संदर्भ में बारीकी से देखा जा रहा है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump shake hands during the G7 Summit in Evian, France.
G7 Summit: 16 महीने बाद आमने-सामने आए पीएम मोदी और ट्रंप, सौहार्दपूर्ण अंदाज में मिलाया हाथ

  एवियन (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। करीब 16 महीने बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने की यह पहली मुलाकात रही। इस दौरान दोनों नेताओं ने सौहार्दपूर्ण अंदाज में हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत भी की। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बुधवार (17 जून) को सम्मेलन से इतर एक द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। लगातार आठवीं बार जी7 में भारत की भागीदारी भारत को लगातार आठवीं बार जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है। इस मंच पर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक चुनौतियों जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। फ्रांस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "जी7 शिखर सम्मेलन के लिए एवियन पहुंचा हूं। विश्व नेताओं के साथ महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा और विचारों के आदान-प्रदान को लेकर उत्साहित हूं। भारत एक टिकाऊ, समृद्ध और बेहतर भविष्य के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।" कई नेताओं से करेंगे द्विपक्षीय बैठक जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, रक्षा सहयोग और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा होने की संभावना है। जिनेवा और स्लोवाकिया दौरे के बाद फ्रांस पहुंचे पीएम मोदी फ्रांस पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी जिनेवा में थे, जहां उन्होंने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति Guy Parmelin से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। इससे पहले उन्होंने Slovakia का दौरा किया था, जिसे उन्होंने ऐतिहासिक और सार्थक बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिलेगी। जी7 शिखर सम्मेलन में मोदी-ट्रंप मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Ranchi Banglore Hyderabad Train
रांची से बेंगलुरु व हैदराबाद के लिए हफ्ते में 4 दिन चलेगी ट्रेन, नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य पूरा होते ही मिलेगा स्लॉट

रांची। रांची से बेंगलुरु और हैदराबाद के लिए दो नई ट्रेनें चलेंगी। इसका प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बेंगलुरु सेक्शन में चल रहे नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के पूरा होते ही नई ट्रेन के लिए स्लॉट उपलब्ध हो सकता है। यह विकास कार्य लगभग एक माह में पूरा होने की संभावना है। रांची से बेंगलुरु के लिए चलने वाली ट्रेन बरकाकाना-गया-जबलपुर-नागपुर-काजीपेट-धर्मावरम मार्ग से होते हुए बेंगलुरु पहुंचेगी। इस ट्रेन का संचालन सप्ताह में चार दिन (सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार) करने की योजना है। रांची से हैदराबाद के लिए प्रस्तावित ट्रेन का संचालन सप्ताह में चार दिन (सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शनिवार) किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभी दोनों ट्रेनों को स्पेशल ट्रेन के रूप में प्रस्तावित किया गया है और इनके संचालन के अनुभव के आधार पर आगे इन्हें नियमित ट्रेनों में बदला जा सकता है। दक्षिण की ओर जानेवाली ट्रेनों की स्थिति   13351 धनबाद-एलेप्पी- इस माह सभी श्रेणियों में लंबी वेटिंग 12835 हटिया-बेंगलुरु- 21 जुलाई तक सभी श्रेणियों में लंबी वेटिंग 18637 हटिया-बेंगलुरु वीकली सभी श्रेणियों में 25 जुलाई तक वेटिंग 16620 धनबाद-पोदानूर वीकली 22 व 29 जून को रिग्रेट, 27 जुलाई तक वेटिंग 22837 धरती आबा हटिया से एर्नाकुलम वीकली- 27 जुलाई तक वेटिंग   बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना लक्ष्य इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य झारखंड को दक्षिण भारत के प्रमुख औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्रों से बेहतर रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। रेलवे लगातार प्रयास कर रहा है कि जल्द ही ये ट्रेन सेवा शुरू हो सके, ताकि यात्रियों को लंबी वेटिंग और वैकल्पिक मार्गों की परेशानी से राहत मिल सके।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump share a warm moment during the G7 Summit family photo session in France.
G7 समिट में ट्रंप ने थामी पीएम मोदी की कलाई, फोटोशूट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

  एवियन-ले-बैंस (फ्रांस): फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात एक बार फिर सुर्खियों में है। दोनों नेताओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ट्रंप सीढ़ियां चढ़ते समय प्रधानमंत्री मोदी की कलाई पकड़कर उनके साथ आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। यह मुलाकात करीब 16 महीने बाद दोनों नेताओं की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात थी। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में आमने-सामने मिले थे, जब ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की थी। फोटोशूट के दौरान दिखी दोनों नेताओं की गर्मजोशी वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप अन्य विश्व नेताओं के साथ पारंपरिक फैमिली फोटो के लिए जाते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक छोटी सी सीढ़ी चढ़ते समय ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की कलाई पकड़ते हैं और दोनों साथ आगे बढ़ते हैं। वीडियो में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी भी ट्रंप के पास खड़ी होने की कोशिश करती दिखाई देती हैं। इसी दौरान राष्ट्रपति मैक्रों कहते हैं, "Ready Everybody?" इस पर प्रधानमंत्री मोदी मुस्कुराते हुए जवाब देते हैं, "We are always ready." यह संवाद भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। हाथ मिलाने के बाद कुछ देर हुई बातचीत फोटोशूट से पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत भी की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब भारत और अमेरिका के संबंध व्यापार, रणनीतिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर नए दौर से गुजर रहे हैं। हाल के महीनों में कई मुद्दों पर बढ़ी थीं चुनौतियां भारत-अमेरिका संबंधों को हाल के महीनों में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर काउंटर टैरिफ लगाए थे। इसके अलावा ओमान तट के पास एक व्यापारी जहाज पर अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भी दोनों देशों के संबंधों को लेकर सवाल उठे थे। इन चुनौतियों के बावजूद नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच संवाद और सहयोग लगातार जारी है। मार्को रुबियो ने दिया था ट्रंप का संदेश पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को निकट भविष्य में व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया था। रुबियो ने भारत को अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का "आधार स्तंभ" बताते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया था। जी7 मंच से पीएम मोदी ने उठाया समुद्री सुरक्षा का मुद्दा जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री व्यापार मार्गों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार पर पड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा, "वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी भय के अपना कर्तव्य निभा सकें।" ओमान की खाड़ी में तीन भारतीय नाविकों की हुई थी मौत प्रधानमंत्री का यह बयान उस घटना के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी बलों ने 8 जून को 'मारिवेक्स', 9 जून को 'सेटेबेलो' और 11 जून को 'जलवीर' नामक जहाजों के खिलाफ अभियान चलाया था। अमेरिका का आरोप था कि ये जहाज ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे थे। मोदी और ट्रंप की मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब दोनों देश व्यापार, समुद्री सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
US Defense Secretary Pete Hegseth speaking about India at Shangri-La Dialogue in Singapore
अमेरिका ने भारत को बताया हिंद-प्रशांत का अहम साझेदार, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने की खुलकर सराहना

अमेरिका ने एक बार फिर भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक नीति का प्रमुख साझेदार बताया है। सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने भारत की सैन्य क्षमता, रक्षा आधुनिकीकरण और रक्षा उत्पादन क्षेत्र में हो रही प्रगति की सराहना करते हुए उसे क्षेत्रीय स्थिरता का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका पर अमेरिका का भरोसा शांगरी-ला डायलॉग में अपने संबोधन के दौरान हेगसेथ ने कहा कि दक्षिण एशिया में भारत शक्ति संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत न केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को भी मजबूती देता है। उनके मुताबिक, भारत का लगातार बढ़ता सामरिक प्रभाव अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साझा रणनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप है। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की सराहना अमेरिकी रक्षा मंत्री ने भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को तेजी से विकसित कर रहा है और हिंद महासागर क्षेत्र सहित व्यापक सुरक्षा जिम्मेदारियों को निभाने के लिए खुद को तैयार कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की बढ़ती सैन्य ताकत क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाने में अहम योगदान दे रही है। रक्षा उत्पादन और लॉजिस्टिक क्षमता पर विशेष जोर हेगसेथ ने भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ऐसी औद्योगिक और लॉजिस्टिक संरचना विकसित कर रहा है जो बड़े पैमाने पर सैन्य अभियानों को लंबे समय तक समर्थन देने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अमेरिकी सैन्य प्लेटफॉर्म्स के रखरखाव और मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता विकसित कर रहा है। इसके साथ ही भारतीय सुविधाएं क्षेत्र में तैनात अमेरिकी नौसेना के जहाजों को भी तकनीकी सहयोग प्रदान कर सकती हैं। संयुक्त रक्षा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा अमेरिकी रक्षा मंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन (को-प्रोडक्शन) को दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश उन्नत रक्षा प्रणालियों, विशेष रूप से एंटी-टैंक मिसाइल तकनीक जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका मानना है कि इससे दोनों देशों की सैन्य तैयारियां और परिचालन क्षमता मजबूत होगी। ट्रंप प्रशासन बढ़ाएगा रक्षा निवेश हेगसेथ ने बताया कि अमेरिकी प्रशासन रक्षा क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर पर निवेश की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति Donald Trump रक्षा उत्पादन और सैन्य क्षमता बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनके अनुसार, अमेरिका अपने रक्षा औद्योगिक ढांचे को और मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश करेगा ताकि आधुनिक हथियार प्रणालियों का उत्पादन तेज किया जा सके। सहयोगी देशों से भी बढ़े रक्षा खर्च की अपेक्षा हेगसेथ ने अमेरिका के सहयोगी देशों और रणनीतिक साझेदारों से रक्षा क्षेत्र में अधिक निवेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए देशों को अपनी रक्षा तैयारियों पर अधिक संसाधन खर्च करने होंगे। उन्होंने संकेत दिया कि जो देश अपनी सुरक्षा जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएंगे, उनके साथ अमेरिका रक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगा। भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को मिली नई मजबूती विशेषज्ञों का मानना है कि हेगसेथ का बयान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के लगातार मजबूत होते संबंधों का संकेत है। रक्षा उत्पादन, सैन्य तकनीक, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Pakistani journalist Najam Sethi comments on Marco Rubio’s India visit and US-India diplomatic relations.
‘ट्रंप की स्थिति कमजोर, इसलिए भारत को मनाने भेजे गए रूबियो’, पाकिस्तानी पत्रकार नजम सेठी का दावा

Marco Rubio के भारत दौरे को लेकर पाकिस्तान में भी चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार Najam Sethi ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की राजनीतिक स्थिति कमजोर होने की वजह से अमेरिका भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से रूबियो को भारत भेजा गया, ताकि प्रधानमंत्री Narendra Modi और भारत सरकार को संतुष्ट किया जा सके। भारत दौरे पर क्या बोले नजम सेठी सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो क्लिप में नजम सेठी एक टीवी चर्चा के दौरान कहते दिखाई दे रहे हैं कि अमेरिका को अब भारत के साथ अपने संबंध फिर से मजबूत करने की जरूरत महसूस हो रही है। उन्होंने कहा, “भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था, टेक सेक्टर और चुनावी फंडिंग में भारतीय समुदाय की बड़ी भूमिका है। इसलिए ट्रंप प्रशासन भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है।” “भारत ने अमेरिका को संदेश दिया” नजम सेठी ने दावा किया कि भारत ने रूबियो के स्वागत को लेकर प्रोटोकॉल के जरिए अमेरिका को नाराजगी का संकेत दिया। उनके मुताबिक, जब रूबियो भारत पहुंचे तो S. Jaishankar उन्हें रिसीव करने नहीं गए और उनकी जगह विदेश मंत्रालय के एक निचले स्तर के अधिकारी को भेजा गया। सेठी ने कहा कि यह भारत की तरफ से अमेरिका को संदेश देने का तरीका था कि “हम आपसे खुश नहीं हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। भारत-अमेरिका रिश्तों पर जोर पाकिस्तानी पत्रकार ने यह भी कहा कि भारत पहले से ही अमेरिका का बड़ा रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रोफेशनल्स और इंडियन-अमेरिकन समुदाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सेठी के मुताबिक, ईरान संघर्ष के दौरान भारत अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका और Israel के करीब दिखाई दिया, लेकिन अमेरिका ने खुलकर भारत की सराहना नहीं की। इसी वजह से अब रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप ने मोदी की खुलकर की तारीफ भारत दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने मंच से ट्रंप से फोन पर बात कराई। इस दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताया। उन्होंने कहा, “मुझे प्रधानमंत्री मोदी बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं और मैं उनका बड़ा प्रशंसक हूं।” ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और भारत पहले से कहीं ज्यादा करीब हैं और भारत अमेरिका पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है। विदेश मंत्री का पद क्यों अहम माना जाता है? अमेरिका में विदेश मंत्री का पद बेहद प्रभावशाली माना जाता है। Marco Rubio वर्तमान ट्रंप प्रशासन में प्रमुख कूटनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। राष्ट्रपति के बाद सत्ता के उत्तराधिकार क्रम में विदेश मंत्री चौथे स्थान पर होता है। ऐसे में किसी देश की यात्रा और वहां शीर्ष नेताओं से मुलाकात को अमेरिकी विदेश नीति के बड़े संकेत के तौर पर देखा जाता है। भारत दौरे के दौरान रूबियो ने प्रधानमंत्री मोदी और एस जयशंकर से मुलाकात कर दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।  

surbhi मई 25, 2026 0
Donald Trump praises Prime Minister Narendra Modi and highlights strong India-US relations during a special event.Trump Praises PM Modi and India-US Ties
पीएम मोदी पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- “मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं”

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को अपना “महान दोस्त” बताते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। रविवार (24 मई) रात आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि भारत उन पर और अमेरिका पर “100 प्रतिशत भरोसा” कर सकता है। यह कार्यक्रम अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर Bharat Mandapam में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor मौजूद रहे। फोन पर ट्रंप ने भेजा पीएम मोदी को संदेश कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कराई। ट्रंप ने कहा, “सबको मेरा नमस्कार कहना। मुझे प्रधानमंत्री मोदी बहुत पसंद हैं। मोदी महान हैं, वह मेरे अच्छे दोस्त हैं।” उन्होंने आगे कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के बड़े प्रशंसक हैं और सभी को शानदार शाम की शुभकामनाएं दीं। ट्रंप की बातें कार्यक्रम में मौजूद लोगों को सुनाने के लिए फोन को माइक्रोफोन के पास रखा गया। “भारत के पहले कभी इतने करीब नहीं रहे” डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका रिश्तों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देश पहले कभी इतने करीब नहीं रहे। उन्होंने कहा, “भारत मुझ पर और हमारे देश पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है। अगर उन्हें कभी मदद की जरूरत पड़े, तो वे जानते हैं कि कहां फोन करना है।” ट्रंप ने इस दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि अमेरिका रिकॉर्ड आर्थिक प्रदर्शन और रिकॉर्ड शेयर बाजार की ओर बढ़ रहा है। कार्यक्रम में एआर रहमान की प्रस्तुति रही आकर्षण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संगीतकार A. R. Rahman की प्रस्तुति रही। उन्होंने “दिल से”, “मां तुझे सलाम” और “तेरे बिना” जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। इसके अलावा कार्यक्रम में मार्को रूबियो का जन्मदिन भी मनाया गया। समापन अमेरिकी बैंड Village People की प्रस्तुति के साथ हुआ। जयशंकर बोले- रिश्ते मजबूत करने का सही समय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका की आजादी की घोषणा ने दुनिया को व्यक्तिगत स्वतंत्रता, कानून का राज और जवाबदेह सरकार जैसे महत्वपूर्ण मूल्य दिए। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों को और मजबूत करने का यह सबसे बेहतर समय है।  

surbhi मई 25, 2026 0
US Secretary of State Marco Rubio arrives in Kolkata during his first official India visit
पहले भारत दौरे पर कोलकाता पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, PM मोदी से करेंगे मुलाकात

अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio शनिवार को अपने चार दिवसीय भारत दौरे पर Kolkata पहुंचे। यह उनका पहला भारत दौरा है और करीब 14 साल बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री कोलकाता आया है। इससे पहले साल 2012 में Hillary Clinton ने शहर का दौरा किया था। भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि मार्को रूबियो की यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उन्होंने बताया कि रूबियो जल्द ही Narendra Modi से मुलाकात करेंगे। व्यापार, रक्षा और QUAD पर होगी चर्चा सर्जियो गोर के मुताबिक इस दौरे के दौरान व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा और Quadrilateral Security Dialogue जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। मार्को रूबियो का भारत दौरा 23 मई से 26 मई तक चलेगा। इस दौरान वह कोलकाता के अलावा Agra, Jaipur और New Delhi भी जाएंगे। 26 मई को QUAD देशों की अहम बैठक आयोजित होगी। इस बैठक में अमेरिका के अलावा Penny Wong और Motegi Toshimitsu भी हिस्सा लेंगे। मदर  टेरेसा हाउस और विक्टोरिया मेमोरियल जा सकते हैं रूबियो हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने अभी तक कोलकाता दौरे का पूरा कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक रूबियो Mother House जा सकते हैं। यह Missionaries of Charity का मुख्यालय है, जिसकी स्थापना Mother Teresa ने की थी। इसके अलावा रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वह Victoria Memorial का भी दौरा कर सकते हैं। इसे देखते हुए शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर अमेरिका का जोर भारत पहुंचने से पहले मार्को रूबियो Sweden गए थे। वहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा निर्यात करना चाहता है। उन्होंने कहा कि इस समय अमेरिका रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और निर्यात कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े सवाल पर रूबियो ने भारत को अमेरिका का “बेहतरीन साझेदार” बताया। रूबियो ने यह भी कहा कि वह QUAD देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक को लेकर उत्साहित हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाना अमेरिका की प्राथमिकताओं में शामिल है।  

surbhi मई 23, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump during a diplomatic discussion on the Iran crisis.
Narendra Modi–Donald Trump फोन कॉल: ईरान संकट के बीच 40 मिनट की अहम बातचीत

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: ईरान संकट और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत और अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व के बीच एक अहम बातचीत सामने आई है। मंगलवार (14 अप्रैल) को प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच करीब 40 मिनट तक फोन पर चर्चा हुई। यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब पाकिस्तान में हुई अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल हो चुकी है और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। खास बात यह है कि ईरान-इजराइल-अमेरिका टकराव के दौरान यह दोनों नेताओं के बीच दूसरी बातचीत है। होर्मुज स्ट्रेट पर फोकस अमेरिका के भारत में राजदूत Sergio Gor ने जानकारी दी कि बातचीत के दौरान Strait of Hormuz की स्थिति पर विशेष चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने इस अहम समुद्री मार्ग को खुला और सुरक्षित बनाए रखने पर जोर दिया, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत-अमेरिका रिश्तों पर सकारात्मक संकेत राजदूत के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच संबंध इस समय मजबूत स्थिति में हैं। आने वाले दिनों में ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई बड़े समझौते होने की संभावना जताई गई है। बताया गया कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने पीएम मोदी से कहा कि “हम सभी आपको पसंद करते हैं”, जो दोनों देशों के रिश्तों की गर्मजोशी को दर्शाता है। पीएम मोदी का बयान बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। उन्होंने यह भी बताया कि मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हुई और Strait of Hormuz को सुरक्षित बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Donald Trump announcing $300 billion Texas oil refinery project with Reliance partnership strengthening India-US energy cooperation
भारत-अमेरिका ऊर्जा साझेदारी मजबूत: टेक्सास में 300 अरब डॉलर की रिफाइनरी डील, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को कहा ‘धन्यवाद’

  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सास में लगभग 300 अरब डॉलर की विशाल तेल रिफाइनरी परियोजना की घोषणा करते हुए भारत और भारतीय कंपनी रिलायंस का आभार जताया है। ट्रंप ने कहा कि यह निवेश अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम है और करीब 50 वर्षों में देश में स्थापित होने वाली पहली नई तेल रिफाइनरी होगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि यह रिफाइनरी टेक्सास के ब्राउनस्विल (Brownsville) में स्थापित की जाएगी। उनके अनुसार यह परियोजना न केवल अमेरिका के ऊर्जा उत्पादन को मजबूत करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ आर्थिक संबंधों को भी नई दिशा देगी।   भारत और रिलायंस को दिया धन्यवाद परियोजना की घोषणा करते हुए ट्रंप ने भारत और उसकी सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी रिलायंस की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक निवेश में भारत के सहयोग से अमेरिका के ऊर्जा क्षेत्र को नई गति मिलेगी। ट्रंप ने लिखा, “भारत में हमारे साझेदारों और उनकी सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी रिलायंस को इस जबरदस्त निवेश के लिए धन्यवाद। यह अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र और दक्षिण टेक्सास के लोगों के लिए बड़ी जीत है।” हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह रिफाइनरी भारत के साथ किसी व्यापक आर्थिक समझौते का हिस्सा है या नहीं, लेकिन इस घोषणा को दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते सहयोग के रूप में देखा जा रहा है।   50 वर्षों में पहली नई अमेरिकी रिफाइनरी ट्रंप ने इस परियोजना को अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनके अनुसार, यह रिफाइनरी पिछले पांच दशकों में अमेरिका में बनने वाली पहली नई बड़ी तेल रिफाइनरी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक बार फिर ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। ट्रंप के शब्दों में, “अमेरिका ‘रियल एनर्जी सेक्टर’ में अपना प्रभुत्व फिर से स्थापित कर रहा है। टेक्सास के ब्राउनस्विल में बनने वाली यह रिफाइनरी अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी ऊर्जा परियोजनाओं में से एक होगी।”   ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का असर ट्रंप ने इस निवेश को अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति, परमिट प्रक्रिया को सरल बनाने और करों में कटौती से जुड़ा परिणाम बताया। उनके मुताबिक इन नीतियों के कारण ही अरबों डॉलर का निवेश अमेरिका की ओर आकर्षित हो रहा है। उन्होंने कहा कि ब्राउनस्विल पोर्ट पर बनने वाली यह नई रिफाइनरी न केवल अमेरिकी बाजार को ऊर्जा उपलब्ध कराएगी, बल्कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करेगी।   रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा ट्रंप के अनुसार यह परियोजना दक्षिण टेक्सास के लिए आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह दुनिया की सबसे आधुनिक और स्वच्छ रिफाइनरियों में से एक होगी, जो वैश्विक स्तर पर ऊर्जा निर्यात को भी बढ़ावा देगी।   वैश्विक परिस्थितियों के बीच अहम घोषणा यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में अमेरिका में नई रिफाइनरी की स्थापना को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना तय समय के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे न केवल अमेरिका के ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी भी और मजबूत हो सकती है।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जून 30, 2026 0