वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में घिर गए हैं। ट्रंप ने AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार एक तस्वीर साझा की, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को विवादित तरीके से दिखाया गया है। तस्वीर में अरबी शब्द "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा गया है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं, ट्रंप ने NATO शिखर सम्मेलन से पहले इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया, जिससे नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। ओबामा की AI तस्वीर पर विवाद ट्रंप द्वारा साझा की गई AI-जनरेटेड तस्वीर में बराक ओबामा और मिशेल ओबामा को राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान की सीढ़ियों पर मुस्कुराते और हाथ हिलाते हुए दिखाया गया है। तस्वीर में विमान पर "Yes We Can", "Obama", "BLM" (Black Lives Matter) जैसे शब्दों के साथ अरबी भाषा में "अल्हम्दुलिल्लाह" भी लिखा हुआ दिखाई देता है। इस पोस्ट को लेकर कई लोगों ने ट्रंप पर नस्लीय और सांप्रदायिक संकेतों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की AI तस्वीरें राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं और सार्वजनिक संवाद की गरिमा को प्रभावित करती हैं। पहले भी विवादों में रह चुके हैं ट्रंप यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने ओबामा को लेकर विवादित पोस्ट साझा किया हो। इससे पहले भी वह सोशल मीडिया पर AI और एडिटेड तस्वीरों के जरिए पूर्व राष्ट्रपति और उनके परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणियां कर चुके हैं। ट्रंप पर पहले भी ओबामा के जन्मस्थान को लेकर झूठे दावे फैलाने और नस्लीय टिप्पणी करने के आरोप लगते रहे हैं। उनकी कई पोस्टों की दोनों प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक दलों के नेताओं ने आलोचना की थी। मेलोनी पर भी शेयर किया मीम ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को लेकर भी एक मीम साझा किया। इस पोस्ट में हाल ही में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन की तस्वीर के साथ लिखा था— "Restraining Order Needed" (रोक लगाने वाले आदेश की जरूरत है)। हालांकि पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया गया, लेकिन इसे मेलोनी पर तंज के रूप में देखा गया। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे इटली की प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने वाला पोस्ट बताया। G7 बैठक के बाद बढ़ा विवाद ट्रंप ने इससे पहले दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए विशेष आग्रह किया था। मेलोनी ने इस दावे को सार्वजनिक रूप से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह झूठ बताया था। अब नए मीम के बाद दोनों नेताओं के बीच कथित तनातनी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। AI पोस्ट को लेकर बढ़ रही चिंता हाल के महीनों में ट्रंप लगातार AI से तैयार तस्वीरों और मीम्स का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए कर रहे हैं। उनके समर्थक इन्हें व्यंग्य बताते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह की पोस्ट भ्रामक जानकारी, राजनीतिक ध्रुवीकरण और सामाजिक तनाव को बढ़ा सकती हैं। ट्रंप के ताजा पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है, हालांकि इस पर व्हाइट हाउस या बराक ओबामा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इटली और अमेरिका के संबंध बराबरी और साझेदारी पर आधारित हैं, न कि किसी के सामने झुकने पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार न तो अमेरिका विरोधी है और न ही किसी विदेशी नेता के दबाव में काम करती है। क्या है पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत तब हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ कई बार तस्वीर खिंचवाने का अनुरोध किया था। ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि मेलोनी ऐसा अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए कर रही थीं। मेलोनी ने दिया जवाब एक इटैलियन समाचार संस्थान को दिए इंटरव्यू में मेलोनी ने ट्रंप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "मैं न पहले किसी के सामने झुकी थी और न आगे झुकूंगी। अमेरिका के साथ हमारा रिश्ता मजबूत साझेदारी और पारस्परिक सम्मान पर आधारित है।" उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की ताकत उनकी एकजुटता में है और उन्होंने हमेशा इसी सोच के साथ काम किया है। 'लोकप्रियता विदेश नीति से तय नहीं होती' मेलोनी ने ट्रंप के इस दावे को भी खारिज किया कि उनकी लोकप्रियता अमेरिका के खिलाफ रुख अपनाने की वजह से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि उनकी लोकप्रियता किसी विदेशी नेता के साथ रिश्तों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर आधारित है कि उनकी सरकार इटली के राष्ट्रीय हितों की कितनी मजबूती से रक्षा करती है। उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा इटली के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और आगे भी देती रहूंगी।" सैन्य समझौतों पर भी दिया बयान इटली की प्रधानमंत्री ने अमेरिका और इटली के बीच मौजूद सैन्य समझौतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इटली में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों से जुड़े समझौतों का सम्मान किया जाएगा और उन्हें एकतरफा तरीके से बदला नहीं जा सकता। उन्होंने दोहराया कि इटली एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा उसकी विदेश नीति राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती है। ट्रंप को अप्रत्यक्ष संदेश मेलोनी ने बिना नाम लिए ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी लोकप्रियता को लेकर किसी और को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और बेहतर होगा कि हर नेता अपने काम पर ध्यान दे। अमेरिका दौरा भी टला इस विवाद के बीच इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपना प्रस्तावित अमेरिका दौरा भी रद्द कर दिया। सरकार की ओर से दौरा रद्द करने का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
रोम/वॉशिंगटन: जी7 शिखर सम्मेलन से जुड़ा एक कथित बयान अमेरिका और इटली के बीच नए विवाद की वजह बनता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक कथित दावे पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने कथित तौर पर दावा किया था कि जी7 सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए आग्रह किया था। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे "मनगढ़ंत" और "तथ्यहीन" बताया। उन्होंने कहा कि न तो उन्होंने कभी ऐसी कोई गुजारिश की और न ही इटली को किसी से इस प्रकार की मिन्नतें करने की आवश्यकता है। वीडियो संदेश जारी कर दिया जवाब मेलोनी ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा, "डोनाल्ड ट्रंप के दावे पूरी तरह काल्पनिक हैं। इटली और मैं किसी से मिन्नतें नहीं करते।" उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर तत्काल प्रतिक्रिया देना आवश्यक होता है और इसलिए उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने का फैसला किया। इटली सरकार ने जताई नाराजगी इटली सरकार ने भी ट्रंप के कथित बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। इटली के विदेश मंत्री एंतोनियो ताजानी ने इसे इटली और उसके प्रधानमंत्री के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बयान बताया। उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों के नेताओं के प्रति इस तरह की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक, विरोध दर्ज कराने के लिए ताजानी ने अपनी प्रस्तावित अमेरिका यात्रा भी रद्द कर दी है। क्या था ट्रंप का कथित दावा? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने एक इंटरव्यू में यूक्रेन मुद्दे पर बातचीत के दौरान जॉर्जिया मेलोनी का जिक्र करते हुए दावा किया कि जी7 शिखर सम्मेलन में उन्होंने उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए अनुरोध किया था। ट्रंप ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने "तरस खाकर" इसके लिए सहमति दी। इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही व्हाइट हाउस की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया गया है। सहयोगी देशों के साथ व्यवहार पर सवाल मेलोनी ने अपने बयान में कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आता कि अमेरिका के राष्ट्रपति अपने सहयोगी देशों के नेताओं के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों करते हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध आपसी सम्मान और साझेदारी पर आधारित होने चाहिए। इस घटनाक्रम ने अमेरिका और इटली के बीच कूटनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। दोनों देशों की सरकारों की ओर से अभी तक द्विपक्षीय संबंधों पर किसी औपचारिक असर की घोषणा नहीं की गई है।
फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। करीब 16 महीनों बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने की यह पहली मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेता फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में मिले थे। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की स्थिति, वैश्विक स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना दुनिया के लिए जरूरी : पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसे हर हाल में खुला और सुरक्षित बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लाखों नाविक समुद्री मार्गों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भी शामिल हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण : ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की बातों का समर्थन करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है और मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता बनाए रखने में उसकी भूमिका बेहद अहम है। आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पर भी हुई चर्चा बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका में भारतीय निवेश और भारतीय कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। व्यक्तिगत संबंधों का भी किया जिक्र राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी लंबे समय से उनके मित्र रहे हैं और उनसे मुलाकात हमेशा सुखद अनुभव रहती है। जी7 सम्मेलन के दौरान हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत और अमेरिका की बढ़ती साझेदारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। बैठक के दौरान ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों को बेहद मजबूत बताते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर कोई हमला होता है, तो अमेरिका पूरी ताकत के साथ भारत के समर्थन में खड़ा रहेगा। भारत की सुरक्षा को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "भारत और अमेरिका के बीच शानदार रिश्ते हैं। अगर भारत पर कोई हमला होता है, तो हम उसकी मदद के लिए खड़े रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर यदि कोई भी हमला करता है, तो अमेरिका पूरी ताकत से भारत के साथ दिखाई देगा।" पीएम मोदी को बताया सख्त नेगोशिएटर डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें बेहद सख्त और कुशल नेगोशिएटर बताया। उन्होंने कहा, "वह दिखने में बेहद शांत और सौम्य हैं, लेकिन बातचीत और डील्स के मामले में उतने ही सख्त और माहिर खिलाड़ी हैं। वह अक्सर सामने वाले को चौंका देते हैं।" ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी जितने कड़े वार्ताकार हैं, उतने ही बड़े देशभक्त भी हैं। वह भारत की जनता से बेहद प्यार करते हैं और अमेरिका के लिए भी उनके मन में सम्मान है। जल्द भारत दौरे का किया वादा अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वह भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं और भविष्य में जल्द ही भारत का दौरा करेंगे। 'व्हाइट हाउस में हूं, तब तक भारत का एक दोस्त अमेरिका में है' प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने कहा, "जब तक मैं व्हाइट हाउस में हूं, भारत का अमेरिका में एक दोस्त है।" उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया समेत कई अहम वैश्विक मुद्दों पर भारत बड़ी भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों के बीच रोजगार, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। ऊर्जा सहयोग पर भी बोले ट्रंप भारत की ओर से अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ाने के सवाल पर ट्रंप ने कहा, "भारत हमारे साथ जो चाहे कर सकता है। हमारे संबंध बेहद अच्छे हैं। मैं और प्रधानमंत्री मोदी तथा हमारे दोनों देश पहले से कहीं अधिक करीब हैं।" ईरान समझौते पर क्या बोले ट्रंप? ईरान के साथ संभावित समझौते पर ट्रंप ने कहा कि यह सिर्फ दो पैराग्राफ का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक विस्तृत मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) है, जो आगे चलकर एक नियमित समझौते का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ईरान इस समझौते को आगे बढ़ाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हमें प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी होगी। फिलहाल वे समझौते के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहे हैं।"
एवियन/नई दिल्ली: फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। दोनों पक्षों ने इस वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम करने पर जोर दिया है। भारत और यूरोपीय संघ ने जनवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते पर वार्ता पूरी होने की घोषणा की थी। अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग एक-चौथाई हिस्से को कवर करेगा, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े व्यापार समझौतों में से एक बन सकता है। निर्यात शुल्क में होगी बड़ी कमी प्रस्तावित समझौते के तहत यूरोपीय संघ को होने वाले भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क में कमी आएगी। वहीं, भारत में आने वाले 97 प्रतिशत से अधिक यूरोपीय निर्यात पर भी टैरिफ घटाए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय वस्तुओं को यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर पहुंचने का अवसर मिलेगा और भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिल सकता है। भारत-जर्मनी संबंधों को मिलेगी नई गति जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और हरित अर्थव्यवस्था सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। दोनों देशों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र लागू करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी। कई वैश्विक नेताओं से हुई द्विपक्षीय बैठकें जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, केन्या, मिस्र, जापान और दक्षिण कोरिया के नेताओं से भी मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा लाभ विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता लागू होने से भारतीय निर्यात को नई गति मिलेगी, विदेशी निवेश बढ़ेगा और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, वैश्विक व्यापार और निवेश परिदृश्य में भारत की आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।
एवियन/वॉशिंगटन: फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि तेहरान के साथ प्रस्तावित समझौता अभी अंतिम रूप में नहीं पहुंचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) है और यदि उन्हें इसकी शर्तें पसंद नहीं आईं या ईरान ने अपेक्षित व्यवहार नहीं किया, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा। ट्रंप ने कहा, "यह कोई अंतिम समझौता नहीं है। अगर मुझे यह पसंद नहीं आया या ईरान ने सही तरीके से व्यवहार नहीं किया, तो हम फिर से उन पर कार्रवाई करेंगे।" उन्होंने ईरान पर पिछले 47 वर्षों से क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब उसे अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा। व्हाइट हाउस ने समझौते को बताया रणनीतिक सफलता व्हाइट हाउस की ओर से रिपब्लिकन सांसदों और ट्रंप समर्थकों को भेजे गए एक दस्तावेज में दावा किया गया है कि प्रस्तावित समझौते से अमेरिका अपने प्रमुख रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने में सफल रहा है। दस्तावेज के अनुसार, समझौते के प्रमुख बिंदु हैं— • ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। • होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही सामान्य बनी रहेगी। • पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। समझौते की गोपनीयता पर उठ रहे सवाल अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते का पूरा विवरण अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसके चलते अमेरिकी राजनीतिक हलकों में कई सवाल उठ रहे हैं। कई रिपब्लिकन नेताओं ने भी माना है कि शर्तों को गोपनीय रखने से भ्रम और अटकलें बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक समझौते का पूरा दस्तावेज सामने नहीं आता, तब तक यह स्पष्ट नहीं हो सकेगा कि दोनों देशों ने किन शर्तों पर सहमति बनाई है और उनकी वास्तविक प्रतिबद्धताएं क्या हैं। दुनिया की नजरें अमेरिका-ईरान वार्ता पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर पश्चिम एशिया की स्थिरता, वैश्विक तेल बाजार और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर पड़ सकता है। ट्रंप के ताजा बयान से यह भी संकेत मिला है कि कूटनीतिक बातचीत के साथ-साथ सैन्य विकल्प अभी भी अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बने हुए हैं।
नीस (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच फ्रांस के नीस शहर में हुई उच्चस्तरीय वार्ता कई महत्वपूर्ण समझौतों और घोषणाओं के साथ संपन्न हुई। दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा, अंतरिक्ष, व्यापार, शिक्षा, डिजिटल भुगतान, रेलवे और परमाणु ऊर्जा सहित 13 प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति जताई। बैठक के दौरान भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से कई नई पहलों की घोषणा की गई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने विशेष ब्रीफिंग में बताया कि दोनों देशों ने उभरती तकनीकों, आर्थिक सुरक्षा और नवाचार के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। भारत-फ्रांस के बीच हुईं 13 बड़ी डील्स 1. इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030 को मंजूरी दोनों देशों ने अनुसंधान, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों में दीर्घकालिक सहयोग के लिए ‘इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030’ अपनाया। 2. AI पर संयुक्त वर्किंग ग्रुप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उसके वैश्विक नियमन पर सहयोग बढ़ाने के लिए भारत-फ्रांस संयुक्त AI वर्किंग ग्रुप बनाया जाएगा। 3. पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए एक उच्चस्तरीय तंत्र स्थापित करने का फैसला किया। 4. आर्थिक सुरक्षा संवाद की शुरुआत महत्वपूर्ण खनिजों, सप्लाई चेन सुरक्षा और रणनीतिक संसाधनों पर सहयोग बढ़ाने के लिए ‘इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग’ शुरू किया जाएगा। 5. फ्रांस में UPI का विस्तार भारत के डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म UPI के उपयोग को फ्रांस में और व्यापक बनाने पर सहमति बनी। 6. 19 संस्थागत समझौतों पर हस्ताक्षर दोनों देशों के स्टार्टअप, अनुसंधान और नवाचार से जुड़े संस्थानों के बीच 19 अलग-अलग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। 7. कानपुर में एयरोनॉटिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI), कानपुर में एयरोनॉटिक्स और संबद्ध क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा। 8. पेरिस के स्टेशन-एफ में 10 नए भारतीय स्टार्टअप दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप परिसरों में शामिल पेरिस के स्टेशन-एफ में 10 अतिरिक्त भारतीय स्टार्टअप्स को जगह दी जाएगी। 9. डिजिटल साइंस सेंटर की स्थापना भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और फ्रांस की INRIA संस्था मिलकर डिजिटल साइंस सेंटर स्थापित करेंगे। 10. पेरिस-सैकले विश्वविद्यालय में इंडिया चेयर ‘AI, Innovation and Culture’ विषय पर आईसीसीआर इंडिया चेयर की स्थापना की जाएगी। 11. स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ेगा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और फ्रांस के हेल्थ डेटा हब के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर हुए। 12. रेलवे और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं में साझेदारी भारत में रेलवे आधुनिकीकरण और हाई-स्पीड रेल विकास के लिए सहयोग बढ़ाने संबंधी घोषणा-पत्र जारी किया गया। 13. अंतरिक्ष और सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती इसरो और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES ने माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान और मानव अंतरिक्ष मिशनों में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। साथ ही गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान और सुरक्षा से जुड़ा जनरल सिक्योरिटी एग्रीमेंट भी हुआ। रक्षा और परमाणु ऊर्जा पर विशेष जोर बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने रक्षा उपकरणों के सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन पर विशेष जोर दिया। इसके अलावा नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी व्यापक चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने माना कि भारत में लागू ‘शांति अधिनियम’ (SHANTI Act) के बाद छोटे और उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के क्षेत्र में सहयोग की नई संभावनाएं खुली हैं। छात्रों और पेशेवरों के लिए खुलेंगे नए अवसर प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों को नई शिक्षा नीति के तहत भारत में अपने परिसर खोलने का निमंत्रण दिया। वहीं राष्ट्रपति मैक्रों ने फ्रांस में अध्ययन कर रहे भारतीय छात्रों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। दोनों नेताओं ने छात्रों और पेशेवरों की आवाजाही आसान बनाने तथा शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता बढ़ाने पर भी चर्चा की। भारत-फ्रांस संबंधों को मिलेगी नई गति नीस स्थित विला केरीलोस में हुई यह बैठक उस समय हुई है जब भारत और फ्रांस ने इस वर्ष की शुरुआत में अपने संबंधों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ के स्तर तक पहुंचाया है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत-फ्रांस साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक शांति, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। फ्रांस दौरे के पहले चरण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्लोवाकिया की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर रवाना हो गए हैं। इसके बाद वह दोबारा फ्रांस लौटकर जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।