दुनिया

Trump Says Iran Deal Not Final

G7 में ट्रंप की खुली चेतावनी: ईरान से समझौता नहीं हुआ तो फिर होगी बमबारी

Deepshikha जून 18, 2026 0
US President Donald Trump speaks during the G7 Summit in France while discussing the proposed Iran agreement and future military options.
Trump Says Iran Deal Is Not Final at G7 Summit

 

एवियन/वॉशिंगटन: फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि तेहरान के साथ प्रस्तावित समझौता अभी अंतिम रूप में नहीं पहुंचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) है और यदि उन्हें इसकी शर्तें पसंद नहीं आईं या ईरान ने अपेक्षित व्यवहार नहीं किया, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा।

ट्रंप ने कहा, "यह कोई अंतिम समझौता नहीं है। अगर मुझे यह पसंद नहीं आया या ईरान ने सही तरीके से व्यवहार नहीं किया, तो हम फिर से उन पर कार्रवाई करेंगे।"

उन्होंने ईरान पर पिछले 47 वर्षों से क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब उसे अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा।

व्हाइट हाउस ने समझौते को बताया रणनीतिक सफलता

व्हाइट हाउस की ओर से रिपब्लिकन सांसदों और ट्रंप समर्थकों को भेजे गए एक दस्तावेज में दावा किया गया है कि प्रस्तावित समझौते से अमेरिका अपने प्रमुख रणनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने में सफल रहा है।

दस्तावेज के अनुसार, समझौते के प्रमुख बिंदु हैं—

• ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
• होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री आवाजाही सामान्य बनी रहेगी।
• पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

समझौते की गोपनीयता पर उठ रहे सवाल

अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते का पूरा विवरण अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसके चलते अमेरिकी राजनीतिक हलकों में कई सवाल उठ रहे हैं। कई रिपब्लिकन नेताओं ने भी माना है कि शर्तों को गोपनीय रखने से भ्रम और अटकलें बढ़ी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक समझौते का पूरा दस्तावेज सामने नहीं आता, तब तक यह स्पष्ट नहीं हो सकेगा कि दोनों देशों ने किन शर्तों पर सहमति बनाई है और उनकी वास्तविक प्रतिबद्धताएं क्या हैं।

दुनिया की नजरें अमेरिका-ईरान वार्ता पर

अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर पश्चिम एशिया की स्थिरता, वैश्विक तेल बाजार और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर पड़ सकता है। ट्रंप के ताजा बयान से यह भी संकेत मिला है कि कूटनीतिक बातचीत के साथ-साथ सैन्य विकल्प अभी भी अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बने हुए हैं।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

दुनिया

View more
US President Donald Trump and Indian Prime Minister Narendra Modi during a bilateral meeting at the G7 Summit in France.
'मोदी पर फिल्म बनी तो हॉलीवुड को हीरो नहीं मिलेगा', ट्रंप का दिलचस्प बयान; पीएम को बताया महान और सख्त नेता

  वॉशिंगटन/पेरिस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली और मजबूत नेताओं में से एक बताया है। ट्रंप ने कहा कि यदि कभी प्रधानमंत्री मोदी पर फिल्म बनाई जाती है, तो हॉलीवुड को उनके किरदार के लिए उपयुक्त अभिनेता ढूंढने में मुश्किल होगी, क्योंकि उनका व्यक्तित्व बिल्कुल अलग और अनूठा है। न्यूज वेबसाइट एक्सियोस (Axios) को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपने पसंदीदा वैश्विक नेताओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता प्रभावशाली, मजबूत और परिणाम देने की क्षमता रखने वाले हैं। 'मोदी एक महान नेता हैं' ताकत, प्रभाव और नेतृत्व क्षमता के आधार पर अपने पसंदीदा नेताओं के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि मोदी बहुत अच्छे हैं। भारत के कुछ बेहद अच्छे आंकड़े सामने आए हैं। वह युद्ध से दूर रहते हैं, जो एक समझदारी भरा कदम है। वह 1.5 अरब लोगों का नेतृत्व करते हैं। भारत वास्तव में दुनिया का सबसे बड़ा देश है और मोदी एक महान नेता हैं।" ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का वैश्विक स्तर पर काफी सम्मान है और उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर भी उन्हें बेहद सख्त और मजबूत नेता के रूप में पाया है। 'मोदी पर फिल्म बनी तो हीरो कहां से लाएगा हॉलीवुड?' इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी या राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर कोई फिल्म बनाई जाए, तो हॉलीवुड के लिए उनकी भूमिका निभाने के लिए सही अभिनेता ढूंढना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा, "मोदी का व्यक्तित्व बिल्कुल अलग है। दुनिया भर में उनका सम्मान किया जाता है। मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता हूं और वह बेहद मजबूत और सख्त नेता हैं।" भारत-अमेरिका व्यापार पर भी बोले ट्रंप ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार होता है, लेकिन पहले भारत को इसका ज्यादा फायदा मिलता था। उन्होंने इसके लिए भारत को दोषी नहीं ठहराया। ट्रंप ने कहा कि उस समय अमेरिका में ऐसे नेता थे, जिन्होंने व्यापारिक असंतुलन को बढ़ने दिया। उनके मुताबिक, अब परिस्थितियां बदल गई हैं और व्यापार अधिक निष्पक्ष तरीके से हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस बदलाव से पूरी तरह खुश नहीं है, क्योंकि पहले उसे व्यापारिक लाभ अधिक मिलता था। 'मोदी ने भारत की राजनीति की तस्वीर बदल दी' ट्रंप ने कहा कि वह कई वर्षों से भारत की राजनीति को देखते आ रहे हैं। उनके अनुसार, पहले भारत में नेतृत्व जल्दी-जल्दी बदलता था और कई नेता लंबे समय तक सत्ता में नहीं टिक पाते थे। उन्होंने कहा, "कोई छह महीने तो कोई एक साल तक ही पद पर रहता था, लेकिन मोदी के आने के बाद तस्वीर बदल गई। वह 12 साल से अधिक समय से सत्ता में हैं और उनकी पकड़ काफी मजबूत है।" ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को "शांत, संतुलित लेकिन बेहद सख्त नेता" बताते हुए कहा कि उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है। जी-7 शिखर सम्मेलन में हुई मुलाकात फ्रांस में आयोजित G7 Summit 2026 के दौरान ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Firefighters battle a massive blaze at a beachfront resort in the Dominican Republic as tourists are evacuated.

डोमिनिकन रिपब्लिक के बीचफ्रंट रिजॉर्ट में भीषण आग, इटली की महिला पर्यटक की मौत; 1,700 लोग सुरक्षित निकाले गए

Oil storage tanks and crude oil facilities symbolize global supply disruptions caused by the Middle East conflict and energy crisis.

ईरान युद्ध से वैश्विक तेल बाजार पर गहरा असर, 115 करोड़ बैरल सप्लाई प्रभावित; रणनीतिक भंडार दशकों के निचले स्तर पर

Italian Prime Minister Giorgia Meloni responds to claims by US President Donald Trump after the G7 Summit controversy.

ट्रंप के कथित दावे पर जॉर्जिया मेलोनी का पलटवार, बोलीं- इटली मिन्नतें नहीं करता

Smoke rises over southern Lebanon after Israeli airstrikes as Hezbollah and Israeli forces exchange attacks amid escalating regional tensions.
Israel-Hezbollah Conflict: लेबनान में इजरायली हमले तेज, 18 लोगों की मौत; ईरान-अमेरिका वार्ता टली

  बेरूत/तेल अवीव: इजराइल और हिजबुल्ला के बीच तनाव एक बार फिर हिंसक टकराव में बदल गया है। इजरायली सेना ने शुक्रवार (19 जून) को दक्षिणी लेबनान और पूर्वी बेका घाटी में हिजबुल्ला के ठिकानों पर रातभर हवाई हमले किए, जबकि जवाबी कार्रवाई में हिजबुल्ला ने इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। संघर्ष में अब तक कम से कम 18 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी नेशनल न्यूज एजेंसी (NNA) के अनुसार, इजरायली हवाई हमलों में मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। वहीं, इजराइल ने कहा है कि उसकी सैन्य कार्रवाई अभी समाप्त नहीं हुई है और हिजबुल्ला के सैन्य ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है। इजराइल के चार सैनिक भी मारे गए इजराइली सेना के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान में जारी संघर्ष के दौरान एक लेफ्टिनेंट कर्नल समेत चार सैनिक मारे गए हैं। इसके अलावा एक विस्फोटक ड्रोन हमले में पांच सैनिक घायल हुए हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है। बेका घाटी में भी सैन्य कार्रवाई दक्षिणी लेबनान के अलावा इजरायली सेना ने पूर्वी बेका घाटी में भी कई ठिकानों पर हमले किए। सेना का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य हिजबुल्ला की सैन्य क्षमताओं और बुनियादी ढांचे को कमजोर करना है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि जब तक हिजबुल्ला से उत्पन्न खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक इजरायली सेना लेबनान में अपनी कार्रवाई जारी रखेगी। ईरान-अमेरिका वार्ता स्थगित इजराइल-हिजबुल्ला संघर्ष के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित ईरान-अमेरिका वार्ता को स्थगित कर दिया गया है। इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शामिल होने की संभावना थी। क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, मध्यस्थ नई तारीख तय करने और वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। मौजूदा हालात ने हाल ही में हुए ईरान-अमेरिका प्रारंभिक युद्धविराम समझौते के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। युद्धविराम समझौते पर संकट हालिया समझौते में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने और क्षेत्रीय अखंडता एवं संप्रभुता का सम्मान करने की प्रतिबद्धता जताई गई थी। लेकिन जमीनी हालात इस समझौते की भावना के विपरीत दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लेबनान में हिंसा नहीं थमी, तो पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लग सकता है। हॉर्मुज जलमार्ग खुलने से राहत इस बीच, ईरान और अमेरिका के बीच हुए प्रारंभिक समझौते के बाद हॉर्मुज जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए फिर से खुल गया है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति को राहत मिली है। युद्ध के दौरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता पैदा हो गई थी। इजराइल-हिजबुल्ला के बीच फिर बढ़ते संघर्ष ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की संभावनाओं को एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में पहुंचा दिया है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Pakistan Prime Minister Shehbaz Sharif and US President Donald Trump amid discussions surrounding the US-Iran peace agreement and Islamabad's diplomatic role.

ईरान-अमेरिका समझौते का श्रेय लेने की पाकिस्तान की कोशिश पर फिरा पानी, ट्रंप के कदम से शहबाज सरकार को झटका

PM MODI Mahabharat Painting

PM मोदी ने फ्रांस दौरे में मैक्रों को भेंट की कलमकारी महाभारत पेंटिंग, ब्रिजिट को दिया पोचमपल्ली स्टोल

Greater Manchester Mayor Andy Burnham celebrates victory in the Makerfield by-election, intensifying pressure on UK Prime Minister Keir Starmer.

ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर की कुर्सी पर संकट! मेकरफील्ड उपचुनाव में एंडी बर्नहैम की जीत से बढ़ी सियासी हलचल

The iconic Boeing VC-25A aircraft known as Air Force One retires after serving multiple US presidents for 35 years.
आसमान के सिकंदर ‘एयरफोर्स वन’ का सफर खत्म, 35 साल की ऐतिहासिक सेवा के बाद रिटायर हुआ विमान SAM 29000

  दुनिया के सबसे सुरक्षित और शक्तिशाली विमानों में शुमार अमेरिकी राष्ट्रपति का प्रतिष्ठित विमान SAM 29000 (बोइंग VC-25A) अब इतिहास का हिस्सा बन गया है। करीब 35 वर्षों तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों की सेवा करने के बाद इस दिग्गज विमान को आधिकारिक तौर पर रिटायर कर दिया गया है। जब भी अमेरिकी राष्ट्रपति इस विमान में सवार होते थे, तब इसका कॉल साइन ‘एयर फोर्स वन’ (Air Force One) हो जाता था। तीन दशकों से अधिक समय तक यह विमान अमेरिकी शक्ति, कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व का प्रतीक बना रहा। अमेरिकी राष्ट्रपतियों के हवाई सफर में नए युग की शुरुआत SAM 29000 की विदाई के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाई सफर में एक नए और अत्याधुनिक दौर की शुरुआत होने जा रही है। इस विमान की जगह अब विशेष रूप से मॉडिफाई किया गया Boeing 747-8 लेने जा रहा है, जिसे सुरक्षा और तकनीकी क्षमताओं के लिहाज से कहीं अधिक आधुनिक माना जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, नया विमान इसी वर्ष राष्ट्रपति के बेड़े में शामिल होकर अपनी सेवाएं शुरू कर सकता है। 35 वर्षों तक अमेरिकी ताकत का प्रतीक रहा ‘एयर फोर्स वन’ SAM 29000 सिर्फ एक विमान नहीं था, बल्कि अमेरिकी शक्ति और वैश्विक प्रभाव का चलता-फिरता प्रतीक था। इस विमान ने दुनिया की कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकों, अंतरराष्ट्रीय संकटों और ऐतिहासिक समझौतों का मूक गवाह बनकर अपनी भूमिका निभाई। यह विमान राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान एक उड़ता हुआ कमांड सेंटर बन जाता था, जिसमें अत्याधुनिक संचार प्रणाली, सुरक्षा उपकरण और आपातकालीन संचालन की सुविधाएं मौजूद थीं। कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों का बना हमसफर इस प्रतिष्ठित विमान ने अमेरिका के कई राष्ट्रपतियों को दुनिया के विभिन्न देशों की यात्राओं पर सुरक्षित पहुंचाया। इनमें शामिल हैं: George H. W. Bush Bill Clinton George W. Bush Barack Obama Donald Trump Joe Biden इन राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में यह विमान कई वैश्विक संकटों, शांति वार्ताओं और ऐतिहासिक समझौतों का हिस्सा रहा। अब कौन संभालेगा कमान? SAM 29000 के रिटायर होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए तैयार किया गया नया बोइंग 747-8 विमान उसकी जगह लेगा। अधिकारियों का दावा है कि नया विमान सुरक्षा, संचार, रक्षा प्रणाली और परिचालन क्षमताओं के मामले में अपने पूर्ववर्ती विमान से कई गुना अधिक उन्नत होगा। नए विमान में अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा, मिसाइल-रोधी तकनीक, सुरक्षित संचार नेटवर्क और लंबी दूरी की परिचालन क्षमता जैसी सुविधाएं होंगी। एक युग का अंत करीब साढ़े तीन दशक तक अमेरिकी राष्ट्रपतियों को सुरक्षित आसमान की सैर कराने वाला SAM 29000 अब हमेशा के लिए सेवा से बाहर हो गया है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाई इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय समाप्त हो गया है और तकनीक तथा सुरक्षा के नए दौर की शुरुआत होने जा रही है। ‘एयर फोर्स वन’ के रूप में पहचाना जाने वाला यह विमान आने वाले वर्षों में अमेरिकी इतिहास और राष्ट्रपतिीय कूटनीति के सबसे प्रतिष्ठित प्रतीकों में गिना जाएगा।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Smoke rises over southern Lebanon after Israeli airstrikes as US-Iran peace talks in Switzerland are postponed.

US-ईरान शांति वार्ता को बड़ा झटका, जेडी वेंस का स्विट्जरलैंड दौरा रद्द; इजरायली हमलों में लेबनान में 16 लोगों की मौत

Police personnel outside a Gurudwara in Pakistan after elderly Sikh couple were shot dead by unidentified gunmen.

पाकिस्तान में गुरुद्वारे के भीतर बुजुर्ग सिख दंपती की हत्या, हमलावरों ने घुसकर मारी गोली; अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

Donald Trump and Iranian officials at Versailles Palace after signing the 14-point US-Iran agreement.

100 साल पहले जहां से अमेरिका बना महाशक्ति, उसी वर्साय में ट्रंप-ईरान डील पर उठे सवाल; क्या पश्चिम एशिया में नए समीकरण बन रहे हैं?

0 Comments

Top week

Abhishek Banerjee addressing media as he writes to Lok Sabha Speaker seeking recognition of TMC as a unified party.
राजनीति

टीएमसी के बागियों को रोकने की आखिरी कोशिश! अभिषेक बनर्जी ने ओम बिरला को लिखा पत्र, कहा- सदन में TMC को एकल पार्टी माना जाए

Deepshikha जून 15, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?