India US Relations

U.S. Senator Steve Daines speaks at the U.S.-India Strategic Partnership Forum, praising India as a trusted partner while contrasting his security concerns during visits to China.
'मेरा फोन बीजिंग नहीं, दिल्ली जाता है': अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेंस ने भारत को बताया भरोसेमंद साझेदार

वॉशिंगटन: Steve Daines ने भारत की विश्वसनीयता की सराहना करते हुए चीन पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब वह चीन की यात्रा करते हैं तो अपना मोबाइल फोन वॉशिंगटन में छोड़ देते हैं, लेकिन भारत आते समय वही फोन अपने साथ लेकर आते हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। भारत पर भरोसा, चीन को लेकर सतर्कता Steve Daines ने U.S.-India Strategic Partnership Forum के लीडरशिप समिट में कहा कि उनका यह व्यवहार दोनों देशों के प्रति भरोसे के स्तर को दर्शाता है। उन्होंने कहा, "जब मैं चीन जाता हूं, तो मेरा यह फोन मेरे साथ नहीं जाता। यह वॉशिंगटन में ही रहता है। लेकिन जब मैं दिल्ली या भारत के किसी भी शहर में आता हूं, तो यही फोन मेरे साथ होता है।" उनके अनुसार, यही एक विश्वसनीय मित्र और रणनीतिक साझेदार की पहचान है। भारत-अमेरिका मिलकर दे सकते हैं चीन को चुनौती सीनेटर डेंस ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर तकनीक, नवाचार और उन्नत उद्योगों के क्षेत्र में चीन को प्रभावी चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्रतिभा और अमेरिका की तकनीकी क्षमता का संयोजन वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प तैयार कर सकता है। चीन से रिश्ते पूरी तरह खत्म नहीं हो सकते डेंस ने माना कि अमेरिका चीन के साथ अपने संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं कर सकता, लेकिन उसे आर्थिक और रणनीतिक जोखिम कम करने की दिशा में काम करना होगा। उनके मुताबिक, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत जैसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाना आवश्यक है। भारत-अमेरिका साझेदारी को बताया अहम सीनेटर ने कहा कि वॉशिंगटन में चीन से जुड़ी चुनौतियों पर लगातार चर्चा होती रहती है, लेकिन अब अमेरिका को यह तय करना होगा कि भविष्य में किन देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत संबंध केवल दोनों लोकतांत्रिक देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता, आर्थिक विकास और तकनीकी सहयोग के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
Logos representing the US Treasury and Indian companies after the United States removed four Indian firms from its Russia-related sanctions list.
अमेरिका ने भारत की 4 कंपनियों को दी बड़ी राहत, रूस से जुड़े प्रतिबंधों की सूची से हटाया नाम

  नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका ने भारत की चार कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए रूस से जुड़े प्रतिबंधों की सूची से उनके नाम हटा दिए हैं। अमेरिकी वित्त विभाग (यूएस ट्रेजरी) के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने अपनी ताजा समीक्षा के बाद यह फैसला लिया। इन कंपनियों के नाम स्पेशली डिज़िग्नेटेड नेशनल्स एंड ब्लॉक्ड पर्सन्स (SDN) सूची से हटाए गए हैं। इस कदम के बाद इन कंपनियों पर लागू कई वित्तीय और व्यापारिक प्रतिबंध समाप्त हो सकते हैं, जिससे उनके अंतरराष्ट्रीय कारोबार को गति मिलने की उम्मीद है। किन भारतीय कंपनियों को मिली राहत? प्रतिबंध सूची से हटाई गई कंपनियां हैं— RRG Engineering Technologies Pvt. Ltd. (हैदराबाद) Lokesh Machines Ltd. (हैदराबाद) Galaxy Bearings Ltd. (अहमदाबाद) Shaurya Aeronautics Pvt. Ltd. (नई दिल्ली) ये कंपनियां पहले रूस से जुड़े व्यापारिक मामलों के कारण अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आ गई थीं। क्या होगा इसका असर? प्रतिबंध हटने के बाद इन कंपनियों के लिए— अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। वैश्विक वित्तीय लेन-देन पर लगी बाधाएं कम होंगी। विदेशी निवेश प्राप्त करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापार करना पहले की तुलना में अधिक सरल होगा। भारत-अमेरिका संबंधों के लिए सकारात्मक संकेत व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों के लिहाज से सकारात्मक संकेत है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस से जुड़े लेन-देन पर अमेरिका की व्यापक प्रतिबंध नीति अभी भी प्रभावी है और अन्य संस्थाओं या कंपनियों पर लागू नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। OFAC क्या है? ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की वह एजेंसी है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के तहत विभिन्न देशों, संगठनों और व्यक्तियों पर आर्थिक प्रतिबंध लागू करती है। समय-समय पर यह एजेंसी प्रतिबंध सूची की समीक्षा कर उसमें संशोधन भी करती है। भारत की चार कंपनियों को SDN सूची से हटाने का फैसला इसी नियमित समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
GST Collection
सरकार की टैक्स कमाई में बड़ा उछाल, जून में GST संग्रह 13.9% बढ़कर ₹1.94 लाख करोड़

नई दिल्ली, एजेंसियां। जून 2026 में भारत का वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह मजबूत बढ़त के साथ ₹1.94 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया। वित्त मंत्रालय के अनुसार, जून में सकल जीएसटी संग्रह ₹1,94,812 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष जून 2025 के ₹1,71,105 करोड़ की तुलना में 13.9 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि की सबसे बड़ी वजह आयातित वस्तुओं पर मिलने वाले कर संग्रह में रिकॉर्ड बढ़ोतरी रही।   आयात कर ने बढ़ाई रफ्तार जून के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी सामानों के आयात पर मिलने वाला टैक्स 34.6 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि के साथ ₹60,038 करोड़ तक पहुंच गया। इसके मुकाबले घरेलू कारोबार से मिलने वाला जीएसटी संग्रह 6.5 प्रतिशत बढ़कर ₹1,34,774 करोड़ रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि आयात में तेजी से सरकारी राजस्व को मजबूती मिली है, हालांकि घरेलू मांग में अपेक्षाकृत धीमी बढ़त चिंता का विषय बनी हुई है।   रिफंड के बाद भी बढ़ा शुद्ध राजस्व सरकार ने जून के दौरान करदाताओं को ₹32,436 करोड़ का जीएसटी रिफंड जारी किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 29.1 प्रतिशत अधिक है। इसके बावजूद सरकार का शुद्ध जीएसटी राजस्व ₹1,62,377 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।   पहली तिमाही में 6.31 लाख करोड़ से अधिक संग्रह चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कुल ₹6,31,699 करोड़ का जीएसटी संग्रह दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 8.4 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान आयात कर संग्रह में 26.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि घरेलू कर संग्रह में 2.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।   राज्यों का प्रदर्शन रहा मिला-जुला राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो महाराष्ट्र सबसे अधिक ₹30,714 करोड़ के संग्रह के साथ शीर्ष पर रहा। उत्तर प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वहीं सिक्किम, पुडुचेरी, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और तमिलनाडु में जीएसटी संग्रह में गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत आयात गतिविधियां अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत हैं, लेकिन दीर्घकालिक संतुलित विकास के लिए घरेलू उपभोग और बाजार मांग को भी गति देना आवश्यक होगा।

abhishek singh जुलाई 1, 2026 0
US Ambassador Sergio Gor speaking at the USISPF Leadership Summit 2026 while discussing the India-US trade deal and strategic partnership.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सुनाया पीएम मोदी और ट्रंप से जुड़ा दिलचस्प किस्सा

  नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता (ट्रेड डील) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और समझौते को जल्द अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि भारत वैश्विक मंच पर तेजी से मजबूत भूमिका निभा रहा है और आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और गहरी होगी। भारत की बढ़ती भूमिका की सराहना गोर ने कहा कि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली शक्ति बन चुका है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अत्याधुनिक तकनीक, विमानन, नवाचार और भरोसेमंद सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ेगा। ट्रंप और पीएम मोदी से जुड़ा दिलचस्प किस्सा अपने संबोधन के दौरान सर्जियो गोर ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और प्रधानमंत्री Narendra Modi से जुड़ा एक रोचक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने सुबह करीब छह बजे प्रधानमंत्री मोदी को फोन करने की इच्छा जताई। जब उन्हें बताया गया कि भारत और अमेरिका के समय में बड़ा अंतर है, तो ट्रंप ने मुस्कुराते हुए कहा, "मोदी जाग रहे होंगे, वो मेरी तरह कम सोते हैं।" गोर के अनुसार, ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी मित्र मानते हैं और दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर मजबूत संबंध हैं। '50 साल बाद भी दोस्त रहेंगे दोनों देश' गोर ने बताया कि नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री ने उनसे कहा था कि आने वाले 50 वर्षों में भी भारत और अमेरिका मजबूत साझेदार बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्रों के साझा मूल्य इस रिश्ते को और मजबूत बनाते हैं। AI, टेक्नोलॉजी और एविएशन पर रहेगा जोर अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र होंगे: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उन्नत प्रौद्योगिकी एविएशन नवाचार भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन उन्होंने कहा कि अगले दो वर्ष भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होंगे। व्यापार वार्ता में हुई अहम प्रगति गोर ने बताया कि 22 से 24 जून के बीच नई दिल्ली में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer के बीच महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। इन बैठकों में व्यापार समझौते की प्रगति की समीक्षा की गई और निवेश, आर्थिक सहयोग तथा व्यापार विस्तार पर चर्चा हुई। जल्द हो सकता है समझौता सर्जियो गोर ने विश्वास जताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब अंतिम चरण में है और जल्द ही इस पर सहमति बन सकती है। उनके अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देगा तथा भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसर खोलेगा।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
US Ambassador to India Sergio Gor speaks at the US-India Strategic Partnership Forum, discussing progress on the India-US trade agreement.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील अंतिम चरण में, दिसंबर में G20 के लिए अमेरिका जा सकते हैं पीएम मोदी: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर

  वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील लगभग पूरी हो चुकी है और अब केवल करीब एक प्रतिशत बातचीत बाकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता जल्द अंतिम रूप ले लेगा। 'सिर्फ एक प्रतिशत बातचीत बाकी' वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि करीब 18 महीने से दोनों देशों के बीच इस समझौते पर बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा, "हम ट्रेड डील के अंतिम चरण में हैं। अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब केवल लगभग एक प्रतिशत बातचीत बाकी है और हम इसे जल्द पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।" गोर ने कहा कि यह समझौता भारत और अमेरिका दोनों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित होगा। 20 वर्षों के रिश्तों का अगला पड़ाव उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंध दो दशकों से लगातार मजबूत होते रहे हैं। ऐसे में इस समझौते को व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। गोर के मुताबिक, यूरोप के साथ अमेरिका के व्यापारिक समझौतों के बाद भारत के साथ यह डील दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगी। पीएम मोदी दिसंबर में अमेरिका आ सकते हैं सर्जियो गोर ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में आयोजित होने वाले G20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अमेरिका का दौरा कर सकते हैं। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, गोर ने कहा, "विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान उन्हें अमेरिका आने का निमंत्रण दिया था। हमें उम्मीद है कि वे दिसंबर में G20 के लिए यहां आएंगे।" भारत सरकार की ओर से इस यात्रा को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ट्रंप और मोदी के रिश्तों की भी सराहना अमेरिकी राजदूत ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत संबंध दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप आज भी अपनी पिछली भारत यात्रा को बेहद यादगार बताते हैं और अक्सर उसका उल्लेख करते हैं। फिलीपींस में होगी QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक सर्जियो गोर ने यह भी जानकारी दी कि QUAD (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) के विदेश मंत्रियों की अगली बैठक लगभग दो सप्ताह बाद फिलीपींस में आयोजित होगी। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक सहयोग और अन्य रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।  

Deepshikha जून 30, 2026 0
US President Donald Trump and Indian Prime Minister Narendra Modi during a bilateral meeting as the US announces Trump's proposed India visit to strengthen trade and strategic ties.
जल्द भारत दौरे पर आएंगे डोनाल्ड ट्रंप, पीएम मोदी से मुलाकात की तैयारी; अमेरिकी विदेश मंत्री ने किया ऐलान

  नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के रणनीतिक तथा व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलने जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने घोषणा की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना तथा लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना होगा। रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बेहद अच्छे संबंध हैं और दोनों देशों की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। अगले साल की शुरुआत में प्रस्तावित है यात्रा समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने के लिए यह दौरा महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने कहा, "हम उम्मीद कर रहे हैं कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत आएंगे। यही हमारी कोशिश है और इस दिशा में तैयारियां जारी हैं।" अंतिम चरण में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता मार्को रुबियो ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और दोनों पक्ष जल्द ही समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। 'भारत अमेरिका का करीबी साझेदार' अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "भारत अमेरिका का बहुत करीबी साथी और सहयोगी है। दोनों देशों के रिश्ते पहले से अधिक मजबूत हुए हैं और भविष्य में इन्हें और विस्तार देने की दिशा में काम किया जा रहा है।" मोदी-ट्रंप मुलाकात पर रहेगी नजर ट्रंप के प्रस्तावित भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। माना जा रहा है कि बैठक में व्यापार समझौते के अलावा रक्षा सहयोग, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, तकनीकी साझेदारी, निवेश और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
US President Donald Trump and Indian Prime Minister Narendra Modi during a bilateral meeting at the G7 Summit in France.
'मोदी पर फिल्म बनी तो हॉलीवुड को हीरो नहीं मिलेगा', ट्रंप का दिलचस्प बयान; पीएम को बताया महान और सख्त नेता

  वॉशिंगटन/पेरिस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली और मजबूत नेताओं में से एक बताया है। ट्रंप ने कहा कि यदि कभी प्रधानमंत्री मोदी पर फिल्म बनाई जाती है, तो हॉलीवुड को उनके किरदार के लिए उपयुक्त अभिनेता ढूंढने में मुश्किल होगी, क्योंकि उनका व्यक्तित्व बिल्कुल अलग और अनूठा है। न्यूज वेबसाइट एक्सियोस (Axios) को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपने पसंदीदा वैश्विक नेताओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता प्रभावशाली, मजबूत और परिणाम देने की क्षमता रखने वाले हैं। 'मोदी एक महान नेता हैं' ताकत, प्रभाव और नेतृत्व क्षमता के आधार पर अपने पसंदीदा नेताओं के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि मोदी बहुत अच्छे हैं। भारत के कुछ बेहद अच्छे आंकड़े सामने आए हैं। वह युद्ध से दूर रहते हैं, जो एक समझदारी भरा कदम है। वह 1.5 अरब लोगों का नेतृत्व करते हैं। भारत वास्तव में दुनिया का सबसे बड़ा देश है और मोदी एक महान नेता हैं।" ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का वैश्विक स्तर पर काफी सम्मान है और उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर भी उन्हें बेहद सख्त और मजबूत नेता के रूप में पाया है। 'मोदी पर फिल्म बनी तो हीरो कहां से लाएगा हॉलीवुड?' इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी या राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर कोई फिल्म बनाई जाए, तो हॉलीवुड के लिए उनकी भूमिका निभाने के लिए सही अभिनेता ढूंढना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा, "मोदी का व्यक्तित्व बिल्कुल अलग है। दुनिया भर में उनका सम्मान किया जाता है। मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता हूं और वह बेहद मजबूत और सख्त नेता हैं।" भारत-अमेरिका व्यापार पर भी बोले ट्रंप ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार होता है, लेकिन पहले भारत को इसका ज्यादा फायदा मिलता था। उन्होंने इसके लिए भारत को दोषी नहीं ठहराया। ट्रंप ने कहा कि उस समय अमेरिका में ऐसे नेता थे, जिन्होंने व्यापारिक असंतुलन को बढ़ने दिया। उनके मुताबिक, अब परिस्थितियां बदल गई हैं और व्यापार अधिक निष्पक्ष तरीके से हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस बदलाव से पूरी तरह खुश नहीं है, क्योंकि पहले उसे व्यापारिक लाभ अधिक मिलता था। 'मोदी ने भारत की राजनीति की तस्वीर बदल दी' ट्रंप ने कहा कि वह कई वर्षों से भारत की राजनीति को देखते आ रहे हैं। उनके अनुसार, पहले भारत में नेतृत्व जल्दी-जल्दी बदलता था और कई नेता लंबे समय तक सत्ता में नहीं टिक पाते थे। उन्होंने कहा, "कोई छह महीने तो कोई एक साल तक ही पद पर रहता था, लेकिन मोदी के आने के बाद तस्वीर बदल गई। वह 12 साल से अधिक समय से सत्ता में हैं और उनकी पकड़ काफी मजबूत है।" ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को "शांत, संतुलित लेकिन बेहद सख्त नेता" बताते हुए कहा कि उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है। जी-7 शिखर सम्मेलन में हुई मुलाकात फ्रांस में आयोजित G7 Summit 2026 के दौरान ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump hold bilateral talks during the G7 Summit in France on maritime security and strategic cooperation.
होर्मुज से लेकर ट्रेड तक, पीएम मोदी और ट्रंप की बैठक में कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। करीब 16 महीनों बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने की यह पहली मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेता फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में मिले थे। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की स्थिति, वैश्विक स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना दुनिया के लिए जरूरी : पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसे हर हाल में खुला और सुरक्षित बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लाखों नाविक समुद्री मार्गों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भी शामिल हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण : ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की बातों का समर्थन करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है और मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता बनाए रखने में उसकी भूमिका बेहद अहम है। आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पर भी हुई चर्चा बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका में भारतीय निवेश और भारतीय कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। व्यक्तिगत संबंधों का भी किया जिक्र राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी लंबे समय से उनके मित्र रहे हैं और उनसे मुलाकात हमेशा सुखद अनुभव रहती है। जी7 सम्मेलन के दौरान हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत और अमेरिका की बढ़ती साझेदारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump hold talks during the G7 Summit in France, discussing strategic ties and global security.
मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर हमला हुआ तो अमेरिका पूरी ताकत से साथ खड़ा होगा, ट्रंप का बड़ा वादा

  फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। बैठक के दौरान ट्रंप ने भारत-अमेरिका संबंधों को बेहद मजबूत बताते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर कोई हमला होता है, तो अमेरिका पूरी ताकत के साथ भारत के समर्थन में खड़ा रहेगा। भारत की सुरक्षा को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "भारत और अमेरिका के बीच शानदार रिश्ते हैं। अगर भारत पर कोई हमला होता है, तो हम उसकी मदद के लिए खड़े रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाले भारत पर यदि कोई भी हमला करता है, तो अमेरिका पूरी ताकत से भारत के साथ दिखाई देगा।" पीएम मोदी को बताया सख्त नेगोशिएटर डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें बेहद सख्त और कुशल नेगोशिएटर बताया। उन्होंने कहा, "वह दिखने में बेहद शांत और सौम्य हैं, लेकिन बातचीत और डील्स के मामले में उतने ही सख्त और माहिर खिलाड़ी हैं। वह अक्सर सामने वाले को चौंका देते हैं।" ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी जितने कड़े वार्ताकार हैं, उतने ही बड़े देशभक्त भी हैं। वह भारत की जनता से बेहद प्यार करते हैं और अमेरिका के लिए भी उनके मन में सम्मान है। जल्द भारत दौरे का किया वादा अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि वह भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं और भविष्य में जल्द ही भारत का दौरा करेंगे। 'व्हाइट हाउस में हूं, तब तक भारत का एक दोस्त अमेरिका में है' प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने कहा, "जब तक मैं व्हाइट हाउस में हूं, भारत का अमेरिका में एक दोस्त है।" उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया समेत कई अहम वैश्विक मुद्दों पर भारत बड़ी भूमिका निभा रहा है और दोनों देशों के बीच रोजगार, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। ऊर्जा सहयोग पर भी बोले ट्रंप भारत की ओर से अमेरिका से ऊर्जा खरीद बढ़ाने के सवाल पर ट्रंप ने कहा, "भारत हमारे साथ जो चाहे कर सकता है। हमारे संबंध बेहद अच्छे हैं। मैं और प्रधानमंत्री मोदी तथा हमारे दोनों देश पहले से कहीं अधिक करीब हैं।" ईरान समझौते पर क्या बोले ट्रंप? ईरान के साथ संभावित समझौते पर ट्रंप ने कहा कि यह सिर्फ दो पैराग्राफ का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक विस्तृत मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) है, जो आगे चलकर एक नियमित समझौते का रूप ले सकता है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि ईरान इस समझौते को आगे बढ़ाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो हमें प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी होगी। फिलहाल वे समझौते के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहे हैं।"  

Deepshikha जून 18, 2026 0
US military headquarters graphic highlighting the renaming of Indo-Pacific Command back to Pacific Command amid strategic debate.
US Indo-Pacific Command का नाम बदला, 'इंडो' शब्द हटाकर फिर बना Pacific Command; भारत और क्वाड पर क्या पड़ेगा असर?

  अमेरिका ने अपने सबसे महत्वपूर्ण सैन्य कमांडों में से एक के नाम में बड़ा बदलाव करते हुए यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) को फिर से यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) नाम दे दिया है। अमेरिकी युद्ध विभाग (Department of War) ने कहा कि यह कदम कमांड की ऐतिहासिक विरासत और उसकी मूल पहचान को बहाल करने के लिए उठाया गया है। यह वही नाम है जिसके तहत यह सैन्य कमांड 70 वर्षों से अधिक समय तक कार्य करता रहा था। 2018 में 'इंडो' शब्द जोड़ा गया था साल 2018 में तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री Jim Mattis ने अमेरिकी पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड कर दिया था। उस समय वॉशिंगटन का मानना था कि हिंद महासागर क्षेत्र का रणनीतिक महत्व तेजी से बढ़ रहा है और इसकी सुरक्षा चुनौतियां प्रशांत क्षेत्र से गहराई से जुड़ी हुई हैं। 'इंडो-पैसिफिक' शब्द को भारत और हिंद महासागर की बढ़ती भू-राजनीतिक अहमियत के प्रतीक के रूप में देखा गया था। नाम बदला, लेकिन जिम्मेदारियां नहीं अमेरिकी युद्ध विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल नाम बदला गया है। कमांड की रणनीति, सैन्य मिशन और भौगोलिक दायरे में कोई बदलाव नहीं किया गया है। USPACOM का संचालन क्षेत्र पहले की तरह: अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक, प्रशांत महासागर, हिंद महासागर का बड़ा हिस्सा, पूर्वी और दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ क्षेत्रों तक फैला रहेगा। कमांड आगे भी संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, आपदा राहत, रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा अभियानों का नेतृत्व करती रहेगी। क्यों अहम है यह सैन्य कमांड? अमेरिकी पैसिफिक कमांड की स्थापना 1 जनवरी 1947 को Harry S. Truman के कार्यकाल में हुई थी। यह अमेरिका की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी संयुक्त लड़ाकू कमांडों में से एक है। इसने: Korean War Vietnam War जैसे बड़े सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी इसकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। भारत और क्वाड के लिए क्या मायने? अमेरिका ने कहा है कि यह केवल नाम का बदलाव है, लेकिन कई रणनीतिक विशेषज्ञ इसे प्रतीकात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मान रहे हैं। 'इंडो-पैसिफिक' अवधारणा पिछले कुछ वर्षों में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच बने Quadrilateral Security Dialogue (क्वाड) सहयोग की आधारशिला मानी जाती रही है। 'इंडो' शब्द हटने से यह सवाल उठ रहे हैं कि: क्या ट्रंप प्रशासन इंडो-पैसिफिक रणनीति की प्राथमिकताओं में बदलाव चाहता है? क्या भारत की रणनीतिक भूमिका को लेकर अमेरिका का दृष्टिकोण बदल रहा है? क्या यह केवल ऐतिहासिक नाम की वापसी है या इसके पीछे कोई बड़ा भू-राजनीतिक संदेश छिपा है? फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय साझेदारों, भारत सहित सभी सहयोगी देशों के साथ 'स्वतंत्र और खुला क्षेत्र' बनाए रखने की प्रतिबद्धता पहले की तरह कायम रहेगी। हवाई से संचालित होता है विशाल सुरक्षा नेटवर्क हवाई स्थित मुख्यालय से संचालित यह कमांड दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री और सामरिक क्षेत्रों की निगरानी करती है। इसके दायरे में वैश्विक व्यापार मार्ग, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री सुरक्षा और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं। ऐसे में नाम परिवर्तन को भले ही प्रशासनिक कदम बताया जा रहा हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में इसे भारत-अमेरिका संबंधों और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा ढांचे के संदर्भ में बारीकी से देखा जा रहा है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump shake hands during the G7 Summit in Evian, France.
G7 Summit: 16 महीने बाद आमने-सामने आए पीएम मोदी और ट्रंप, सौहार्दपूर्ण अंदाज में मिलाया हाथ

  एवियन (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। करीब 16 महीने बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने की यह पहली मुलाकात रही। इस दौरान दोनों नेताओं ने सौहार्दपूर्ण अंदाज में हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत भी की। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बुधवार (17 जून) को सम्मेलन से इतर एक द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। लगातार आठवीं बार जी7 में भारत की भागीदारी भारत को लगातार आठवीं बार जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है। इस मंच पर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक चुनौतियों जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। फ्रांस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "जी7 शिखर सम्मेलन के लिए एवियन पहुंचा हूं। विश्व नेताओं के साथ महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा और विचारों के आदान-प्रदान को लेकर उत्साहित हूं। भारत एक टिकाऊ, समृद्ध और बेहतर भविष्य के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।" कई नेताओं से करेंगे द्विपक्षीय बैठक जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, रक्षा सहयोग और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा होने की संभावना है। जिनेवा और स्लोवाकिया दौरे के बाद फ्रांस पहुंचे पीएम मोदी फ्रांस पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी जिनेवा में थे, जहां उन्होंने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति Guy Parmelin से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। इससे पहले उन्होंने Slovakia का दौरा किया था, जिसे उन्होंने ऐतिहासिक और सार्थक बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिलेगी। जी7 शिखर सम्मेलन में मोदी-ट्रंप मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Ranchi Banglore Hyderabad Train
रांची से बेंगलुरु व हैदराबाद के लिए हफ्ते में 4 दिन चलेगी ट्रेन, नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य पूरा होते ही मिलेगा स्लॉट

रांची। रांची से बेंगलुरु और हैदराबाद के लिए दो नई ट्रेनें चलेंगी। इसका प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बेंगलुरु सेक्शन में चल रहे नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के पूरा होते ही नई ट्रेन के लिए स्लॉट उपलब्ध हो सकता है। यह विकास कार्य लगभग एक माह में पूरा होने की संभावना है। रांची से बेंगलुरु के लिए चलने वाली ट्रेन बरकाकाना-गया-जबलपुर-नागपुर-काजीपेट-धर्मावरम मार्ग से होते हुए बेंगलुरु पहुंचेगी। इस ट्रेन का संचालन सप्ताह में चार दिन (सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार) करने की योजना है। रांची से हैदराबाद के लिए प्रस्तावित ट्रेन का संचालन सप्ताह में चार दिन (सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शनिवार) किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभी दोनों ट्रेनों को स्पेशल ट्रेन के रूप में प्रस्तावित किया गया है और इनके संचालन के अनुभव के आधार पर आगे इन्हें नियमित ट्रेनों में बदला जा सकता है। दक्षिण की ओर जानेवाली ट्रेनों की स्थिति   13351 धनबाद-एलेप्पी- इस माह सभी श्रेणियों में लंबी वेटिंग 12835 हटिया-बेंगलुरु- 21 जुलाई तक सभी श्रेणियों में लंबी वेटिंग 18637 हटिया-बेंगलुरु वीकली सभी श्रेणियों में 25 जुलाई तक वेटिंग 16620 धनबाद-पोदानूर वीकली 22 व 29 जून को रिग्रेट, 27 जुलाई तक वेटिंग 22837 धरती आबा हटिया से एर्नाकुलम वीकली- 27 जुलाई तक वेटिंग   बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना लक्ष्य इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य झारखंड को दक्षिण भारत के प्रमुख औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्रों से बेहतर रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। रेलवे लगातार प्रयास कर रहा है कि जल्द ही ये ट्रेन सेवा शुरू हो सके, ताकि यात्रियों को लंबी वेटिंग और वैकल्पिक मार्गों की परेशानी से राहत मिल सके।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Rahul Gandhi criticizes PM Narendra Modi and the Centre over Indian sailors' deaths near the Strait of Hormuz and questions India's foreign policy response.
राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तीखा हमला, बोले- ‘अमेरिका के आज्ञाकारी नौकर की तरह कर रहे हैं काम’

  नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। होर्मुज स्ट्रेट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर भारतीय नाविकों की मौत और ओमान के डुक्म बंदरगाह पर एक अन्य भारतीय नागरिक की मृत्यु का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने सरकार पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका की कार्रवाई में भारतीय नागरिकों की मौत के बावजूद न तो माफी मांगी गई और न ही भारत सरकार ने कोई सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र देश को आदेशात्मक भाषा स्वीकार नहीं करनी चाहिए। ‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’ कहकर साधा निशाना कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी को ‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’ बताते हुए कहा कि सरकार अमेरिकी दबाव के सामने चुप है और एक ‘आज्ञाकारी नौकर’ की तरह व्यवहार कर रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार अपेक्षित दृढ़ता नहीं दिखा रही है। उन्होंने लिखा कि विदेशी ताकतें भारतीय नागरिकों को नुकसान पहुंचा रही हैं, जबकि सरकार मौन बनी हुई है। राहुल गांधी ने इसे देश के सम्मान और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। भारतीय नागरिक की मौत का भी उठाया मुद्दा राहुल गांधी ने ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े एक जहाज पर सवार भारतीय नागरिक निशांत उर्थनाथन की मौत का मुद्दा भी उठाया। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, निशांत उर्थनाथन की मृत्यु बीमारी के कारण हुई और उनका पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। इस घटना का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि विदेशों में मुश्किल परिस्थितियों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए सरकार को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ा है तनाव हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस क्षेत्र से होकर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक और व्यापारिक जहाज गुजरते हैं, जिसके कारण भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पहले भी क्षेत्रीय तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया और विदेश नीति को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। सियासी बहस तेज राहुल गांधी के इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में एक नई बहस छिड़ने की संभावना है। कांग्रेस जहां सरकार की विदेश नीति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र को घेर रही है, वहीं सरकार की ओर से अभी तक राहुल गांधी की ताजा टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। होर्मुज क्षेत्र में जारी तनाव और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा आने वाले दिनों में देश की राजनीति और कूटनीतिक चर्चाओं का प्रमुख विषय बना रह सकता है।  

Deepshikha जून 15, 2026 0
Indian External Affairs Minister S Jaishankar raises concerns over US Navy action affecting Indian sailors in Gulf waters.
US Navy हमले पर भारत का कड़ा विरोध, एस. जयशंकर ने मार्को रुबियो से कहा- ‘व्यावसायिक जहाजों पर घातक कार्रवाई उचित नहीं’

खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की मौत पर भारत का सख्त रुख खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई में भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से बातचीत कर स्पष्ट कहा कि व्यावसायिक जहाजों पर इस तरह की घातक सैन्य कार्रवाई उचित नहीं है। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय नाविकों की मौत पर भारत की गहरी चिंता और विरोध अमेरिकी पक्ष के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि नागरिक जहाजों को निशाना बनाने जैसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। दो दिनों में दूसरी बार अमेरिकी राजनयिक को तलब किया गया भारत सरकार ने 48 घंटे के भीतर दूसरी बार भारत में अमेरिकी मिशन के प्रभारी अधिकारी (Charge d’Affaires) Jason Meeks को विदेश मंत्रालय बुलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी नौसेना द्वारा ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण तीन भारतीयों की जान जा चुकी है। भारत ने इसे “टाला जा सकने वाला और दुखद नुकसान” बताया है। MT Settebello हमले में 3 भारतीयों की मौत सरकार के अनुसार, एमटी सेत्तेबेलो (MT Settebello) नामक जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। जहाज पर कुल 24 भारतीय मौजूद थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके अलावा अमेरिकी बलों ने ओमान तट के पास गिनी-बिसाउ ध्वज वाले टैंकर MT Jalveer के इंजन कक्ष पर हेलफायर मिसाइलें दागीं। इस जहाज पर मौजूद सभी 20 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाला गया। विदेश मंत्रालय ने जताई गहरी चिंता विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि नागरिक जहाजों के खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल पूरी तरह अस्वीकार्य है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा, स्थिरता और विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं। भारत ने अमेरिकी प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में तैनात उसकी सैन्य इकाइयां भविष्य में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। पश्चिम एशिया संघर्ष का भारतीय नाविकों पर असर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव का असर भारतीय नाविकों पर भी पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक 13 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि एक नाविक अब भी लापता बताया जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र Strait of Hormuz दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और गैस परिवहन होता है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और नौसैनिक गतिविधियों ने न केवल समुद्री सुरक्षा को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो तेल और गैस की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Indian sailors affected amid rising maritime tensions in Hormuz Strait and Gulf of Oman.
होर्मुज क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के बाद भारत की चिंता बढ़ी, तीन भारतीयों की मौत पर अमेरिका से उठाया नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

  नई दिल्ली: होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी में बढ़ते समुद्री एवं सैन्य तनाव के बीच जहाजों पर हुई हालिया घटनाओं में तीन भारतीय नागरिकों की मौत की खबर सामने आई है। इसके बाद भारत सरकार ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में कुछ विदेशी ध्वज वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हुई सैन्य कार्रवाइयों के दौरान भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं। भारत ने इस मुद्दे को अमेरिका के सामने उठाते हुए क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि संबंधित घटना के बाद अमेरिकी अधिकारियों को भारत की चिंताओं से अवगत कराया गया और क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया। भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध और सुरक्षित आवागमन वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रभावित जहाजों में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक अधिकारियों के अनुसार, हालिया घटनाओं में शामिल जहाज विदेशी ध्वज वाले थे, लेकिन उनमें भारतीय चालक दल के सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद थे। कुछ जहाजों से चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाला गया, जबकि कुछ मामलों में भारतीय नागरिकों की मौत की सूचना मिली है। सरकार ने कहा है कि वह प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है। मृतकों के परिवारों को सहायता बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि मृत भारतीय नाविकों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। हालिया घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री परिवहन की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत ने दोहराया है कि वह पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्गों के पक्ष में है तथा अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाता रहेगा।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
US President Donald Trump and Indian Prime Minister Narendra Modi amid ongoing India-US trade deal negotiations.
मोदी को बताया दोस्त, फिर टैरिफ का दबाव; भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बीच ट्रंप का दोहरा संदेश

  भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की जमकर तारीफ की है। दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत कई देशों के उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव भी पेश कर दिया है, जिससे वार्ता के बीच नई चुनौती खड़ी हो गई है। ट्रंप बोले- मोदी मेरे अच्छे मित्र हैं व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके अच्छे मित्र हैं और दोनों देशों के संबंध मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे आपके प्रधानमंत्री बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं और हमारे रिश्ते बेहद अच्छे हैं।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि पहले भारत को अमेरिका के साथ व्यापार में अधिक लाभ मिलता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं और अमेरिका को भी बेहतर आर्थिक फायदा मिलने लगा है। नई दिल्ली में चार दिन चली अहम व्यापार वार्ता 1 जून से 4 जून तक नई दिल्ली में भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच विस्तृत व्यापार वार्ता हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। वार्ता में मुख्य रूप से निम्न मुद्दे शामिल रहे: वस्तुओं का व्यापार सीमा शुल्क प्रक्रियाएं व्यापार सुगमता गैर-टैरिफ बाधाएं आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग दोनों देशों ने बातचीत को सकारात्मक बताया और कहा कि अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम जारी है। समझौता अंतिम चरण में पहुंचा भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने हाल ही में संकेत दिया कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और वार्ता अब अंतिम चरण में है। वहीं केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal भी कह चुके हैं कि अधिकांश मतभेद दूर हो चुके हैं और केवल कुछ तकनीकी बिंदुओं पर चर्चा जारी है। नई टैरिफ नीति ने बढ़ाई अनिश्चितता ट्रेड डील में प्रगति के बावजूद ट्रंप प्रशासन ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि कुछ देशों से आने वाले आयातित उत्पादों पर 10 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इन देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पाद कथित तौर पर जबरन श्रम (Forced Labour) से तैयार किए गए हो सकते हैं। भारत समेत 54 अर्थव्यवस्थाओं पर उठाए सवाल अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने 54 देशों और अर्थव्यवस्थाओं की सूची जारी की है, जिन पर पर्याप्त आयात निगरानी न होने का आरोप लगाया गया है। इस सूची में भारत के अलावा कई प्रमुख देश शामिल हैं: China Japan Australia United Kingdom Saudi Arabia United Arab Emirates Singapore South Korea Türkiye यूएसटीआर के अनुसार जिन देशों के पास जबरन श्रम से बने उत्पादों पर प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था नहीं है, उन्हें अधिक शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। कपड़ा और परिधान क्षेत्र पर विशेष फोकस प्रस्तावित नीति में वस्त्र और परिधान उद्योग के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल हैं। कुछ देशों को सीमित मात्रा में कम शुल्क पर अमेरिकी बाजार तक पहुंच दी जा सकती है, जबकि अन्य उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लागू रहेगा। भारत-अमेरिका रिश्तों में अवसर और चुनौती दोनों विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा दौर में भारत और अमेरिका दोनों व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। लेकिन टैरिफ और श्रम मानकों से जुड़े नए अमेरिकी प्रस्ताव वार्ता को जटिल बना सकते हैं। एक तरफ ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं और समझौते को लेकर आशावाद जता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अतिरिक्त शुल्क की चेतावनी देकर दबाव की रणनीति भी अपना रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि दोनों देश व्यापारिक साझेदारी को नई ऊंचाई तक ले जाते हैं या कुछ मुद्दे अब भी अड़चन बने रहते हैं।  

Deepshikha जून 5, 2026 0
Indian and US trade negotiators meet to finalize interim trade agreement and boost economic cooperation
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर आज से अहम बैठक, 4 दिन तक होगी बातचीत; व्यापार समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने पर फोकस, बाजार पहुंच और निवेश जैसे मुद्दों पर चर्चा

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) को अंतिम रूप देने की दिशा में सोमवार से चार दिवसीय उच्चस्तरीय वार्ता शुरू हो रही है। दोनों देशों के मुख्य व्यापार वार्ताकार समझौते के कानूनी मसौदे और विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे, जबकि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व अमेरिका के मुख्य व्यापार वार्ताकार ब्रेंडन लिंच के हाथों में होगा। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement-BTA) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। फरवरी में बनी थी प्रारंभिक सहमति भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी को जारी संयुक्त बयान में पारस्परिक रूप से लाभकारी अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई थी। इसके तहत दोनों देशों ने व्यापार बाधाओं को कम करने, निवेश बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी। अब दोनों पक्षों के सामने इस समझौते के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने की चुनौती है, ताकि इसे औपचारिक रूप से लागू किया जा सके। कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, बैठक के दौरान बाजार पहुंच (Market Access), गैर-शुल्कीय बाधाएं (Non-Tariff Measures), सीमा शुल्क प्रक्रियाएं, व्यापार सुविधा, निवेश प्रोत्साहन और आर्थिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके अलावा व्यापक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अगले चरणों पर भी चर्चा होने की संभावना है। शुल्क कटौती पर रहेगा फोकस प्रस्तावित रूपरेखा के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए कुछ शुल्कों में राहत देने की सहमति जताई थी। समझौते के अनुसार, भारत पर लागू कुछ आयात शुल्कों को कम करने और व्यापारिक प्रतिबंधों में ढील देने पर बातचीत आगे बढ़नी थी। बाद में अमेरिका में न्यायिक और नीतिगत बदलावों के कारण वार्ता की समय-सीमा प्रभावित हुई। फरवरी में प्रस्तावित बैठक स्थगित कर दी गई थी, जिसके बाद अब दोनों पक्ष एक बार फिर बातचीत की मेज पर आमने-सामने होंगे। व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में अहम कदम विशेषज्ञों का मानना है कि यह चार दिवसीय वार्ता केवल अंतरिम समझौते तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के व्यापक भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की नींव भी मजबूत कर सकती है। दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ता व्यापारिक सहयोग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकता है। भारत-ओमान एफटीए का भी होगा औपचारिक एलान उधर, भारत और ओमान के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) सोमवार से प्रभावी होने जा रहा है। दोनों देश इस संबंध में औपचारिक घोषणा करेंगे। माना जा रहा है कि इससे खाड़ी क्षेत्र में भारत के व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।  

surbhi जून 1, 2026 0
US Defense Secretary Pete Hegseth speaking about India at Shangri-La Dialogue in Singapore
अमेरिका ने भारत को बताया हिंद-प्रशांत का अहम साझेदार, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने की खुलकर सराहना

अमेरिका ने एक बार फिर भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक नीति का प्रमुख साझेदार बताया है। सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने भारत की सैन्य क्षमता, रक्षा आधुनिकीकरण और रक्षा उत्पादन क्षेत्र में हो रही प्रगति की सराहना करते हुए उसे क्षेत्रीय स्थिरता का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका पर अमेरिका का भरोसा शांगरी-ला डायलॉग में अपने संबोधन के दौरान हेगसेथ ने कहा कि दक्षिण एशिया में भारत शक्ति संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत न केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को भी मजबूती देता है। उनके मुताबिक, भारत का लगातार बढ़ता सामरिक प्रभाव अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साझा रणनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप है। भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की सराहना अमेरिकी रक्षा मंत्री ने भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को तेजी से विकसित कर रहा है और हिंद महासागर क्षेत्र सहित व्यापक सुरक्षा जिम्मेदारियों को निभाने के लिए खुद को तैयार कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की बढ़ती सैन्य ताकत क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाने में अहम योगदान दे रही है। रक्षा उत्पादन और लॉजिस्टिक क्षमता पर विशेष जोर हेगसेथ ने भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ऐसी औद्योगिक और लॉजिस्टिक संरचना विकसित कर रहा है जो बड़े पैमाने पर सैन्य अभियानों को लंबे समय तक समर्थन देने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अमेरिकी सैन्य प्लेटफॉर्म्स के रखरखाव और मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता विकसित कर रहा है। इसके साथ ही भारतीय सुविधाएं क्षेत्र में तैनात अमेरिकी नौसेना के जहाजों को भी तकनीकी सहयोग प्रदान कर सकती हैं। संयुक्त रक्षा उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा अमेरिकी रक्षा मंत्री ने भारत और अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन (को-प्रोडक्शन) को दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश उन्नत रक्षा प्रणालियों, विशेष रूप से एंटी-टैंक मिसाइल तकनीक जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका मानना है कि इससे दोनों देशों की सैन्य तैयारियां और परिचालन क्षमता मजबूत होगी। ट्रंप प्रशासन बढ़ाएगा रक्षा निवेश हेगसेथ ने बताया कि अमेरिकी प्रशासन रक्षा क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर पर निवेश की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति Donald Trump रक्षा उत्पादन और सैन्य क्षमता बढ़ाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। उनके अनुसार, अमेरिका अपने रक्षा औद्योगिक ढांचे को और मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश करेगा ताकि आधुनिक हथियार प्रणालियों का उत्पादन तेज किया जा सके। सहयोगी देशों से भी बढ़े रक्षा खर्च की अपेक्षा हेगसेथ ने अमेरिका के सहयोगी देशों और रणनीतिक साझेदारों से रक्षा क्षेत्र में अधिक निवेश करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए देशों को अपनी रक्षा तैयारियों पर अधिक संसाधन खर्च करने होंगे। उन्होंने संकेत दिया कि जो देश अपनी सुरक्षा जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएंगे, उनके साथ अमेरिका रक्षा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगा। भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों को मिली नई मजबूती विशेषज्ञों का मानना है कि हेगसेथ का बयान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के लगातार मजबूत होते संबंधों का संकेत है। रक्षा उत्पादन, सैन्य तकनीक, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार विस्तार पा रहा है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Pakistani journalist Najam Sethi comments on Marco Rubio’s India visit and US-India diplomatic relations.
‘ट्रंप की स्थिति कमजोर, इसलिए भारत को मनाने भेजे गए रूबियो’, पाकिस्तानी पत्रकार नजम सेठी का दावा

Marco Rubio के भारत दौरे को लेकर पाकिस्तान में भी चर्चा तेज हो गई है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार Najam Sethi ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की राजनीतिक स्थिति कमजोर होने की वजह से अमेरिका भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से रूबियो को भारत भेजा गया, ताकि प्रधानमंत्री Narendra Modi और भारत सरकार को संतुष्ट किया जा सके। भारत दौरे पर क्या बोले नजम सेठी सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो क्लिप में नजम सेठी एक टीवी चर्चा के दौरान कहते दिखाई दे रहे हैं कि अमेरिका को अब भारत के साथ अपने संबंध फिर से मजबूत करने की जरूरत महसूस हो रही है। उन्होंने कहा, “भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था, टेक सेक्टर और चुनावी फंडिंग में भारतीय समुदाय की बड़ी भूमिका है। इसलिए ट्रंप प्रशासन भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है।” “भारत ने अमेरिका को संदेश दिया” नजम सेठी ने दावा किया कि भारत ने रूबियो के स्वागत को लेकर प्रोटोकॉल के जरिए अमेरिका को नाराजगी का संकेत दिया। उनके मुताबिक, जब रूबियो भारत पहुंचे तो S. Jaishankar उन्हें रिसीव करने नहीं गए और उनकी जगह विदेश मंत्रालय के एक निचले स्तर के अधिकारी को भेजा गया। सेठी ने कहा कि यह भारत की तरफ से अमेरिका को संदेश देने का तरीका था कि “हम आपसे खुश नहीं हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। भारत-अमेरिका रिश्तों पर जोर पाकिस्तानी पत्रकार ने यह भी कहा कि भारत पहले से ही अमेरिका का बड़ा रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रोफेशनल्स और इंडियन-अमेरिकन समुदाय अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सेठी के मुताबिक, ईरान संघर्ष के दौरान भारत अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका और Israel के करीब दिखाई दिया, लेकिन अमेरिका ने खुलकर भारत की सराहना नहीं की। इसी वजह से अब रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप ने मोदी की खुलकर की तारीफ भारत दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor ने मंच से ट्रंप से फोन पर बात कराई। इस दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताया। उन्होंने कहा, “मुझे प्रधानमंत्री मोदी बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं और मैं उनका बड़ा प्रशंसक हूं।” ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और भारत पहले से कहीं ज्यादा करीब हैं और भारत अमेरिका पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है। विदेश मंत्री का पद क्यों अहम माना जाता है? अमेरिका में विदेश मंत्री का पद बेहद प्रभावशाली माना जाता है। Marco Rubio वर्तमान ट्रंप प्रशासन में प्रमुख कूटनीतिक चेहरों में गिने जाते हैं। राष्ट्रपति के बाद सत्ता के उत्तराधिकार क्रम में विदेश मंत्री चौथे स्थान पर होता है। ऐसे में किसी देश की यात्रा और वहां शीर्ष नेताओं से मुलाकात को अमेरिकी विदेश नीति के बड़े संकेत के तौर पर देखा जाता है। भारत दौरे के दौरान रूबियो ने प्रधानमंत्री मोदी और एस जयशंकर से मुलाकात कर दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।  

surbhi मई 25, 2026 0
Donald Trump praises Prime Minister Narendra Modi and highlights strong India-US relations during a special event.Trump Praises PM Modi and India-US Ties
पीएम मोदी पर ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- “मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं”

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को अपना “महान दोस्त” बताते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। रविवार (24 मई) रात आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि भारत उन पर और अमेरिका पर “100 प्रतिशत भरोसा” कर सकता है। यह कार्यक्रम अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर Bharat Mandapam में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar, अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio और भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor मौजूद रहे। फोन पर ट्रंप ने भेजा पीएम मोदी को संदेश कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात कराई। ट्रंप ने कहा, “सबको मेरा नमस्कार कहना। मुझे प्रधानमंत्री मोदी बहुत पसंद हैं। मोदी महान हैं, वह मेरे अच्छे दोस्त हैं।” उन्होंने आगे कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के बड़े प्रशंसक हैं और सभी को शानदार शाम की शुभकामनाएं दीं। ट्रंप की बातें कार्यक्रम में मौजूद लोगों को सुनाने के लिए फोन को माइक्रोफोन के पास रखा गया। “भारत के पहले कभी इतने करीब नहीं रहे” डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका रिश्तों पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देश पहले कभी इतने करीब नहीं रहे। उन्होंने कहा, “भारत मुझ पर और हमारे देश पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है। अगर उन्हें कभी मदद की जरूरत पड़े, तो वे जानते हैं कि कहां फोन करना है।” ट्रंप ने इस दौरान अमेरिकी अर्थव्यवस्था की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि अमेरिका रिकॉर्ड आर्थिक प्रदर्शन और रिकॉर्ड शेयर बाजार की ओर बढ़ रहा है। कार्यक्रम में एआर रहमान की प्रस्तुति रही आकर्षण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संगीतकार A. R. Rahman की प्रस्तुति रही। उन्होंने “दिल से”, “मां तुझे सलाम” और “तेरे बिना” जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। इसके अलावा कार्यक्रम में मार्को रूबियो का जन्मदिन भी मनाया गया। समापन अमेरिकी बैंड Village People की प्रस्तुति के साथ हुआ। जयशंकर बोले- रिश्ते मजबूत करने का सही समय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका की आजादी की घोषणा ने दुनिया को व्यक्तिगत स्वतंत्रता, कानून का राज और जवाबदेह सरकार जैसे महत्वपूर्ण मूल्य दिए। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों को और मजबूत करने का यह सबसे बेहतर समय है।  

surbhi मई 25, 2026 0
US Secretary of State Marco Rubio arrives in Kolkata during his first official India visit
पहले भारत दौरे पर कोलकाता पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, PM मोदी से करेंगे मुलाकात

अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio शनिवार को अपने चार दिवसीय भारत दौरे पर Kolkata पहुंचे। यह उनका पहला भारत दौरा है और करीब 14 साल बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री कोलकाता आया है। इससे पहले साल 2012 में Hillary Clinton ने शहर का दौरा किया था। भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि मार्को रूबियो की यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उन्होंने बताया कि रूबियो जल्द ही Narendra Modi से मुलाकात करेंगे। व्यापार, रक्षा और QUAD पर होगी चर्चा सर्जियो गोर के मुताबिक इस दौरे के दौरान व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा और Quadrilateral Security Dialogue जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। मार्को रूबियो का भारत दौरा 23 मई से 26 मई तक चलेगा। इस दौरान वह कोलकाता के अलावा Agra, Jaipur और New Delhi भी जाएंगे। 26 मई को QUAD देशों की अहम बैठक आयोजित होगी। इस बैठक में अमेरिका के अलावा Penny Wong और Motegi Toshimitsu भी हिस्सा लेंगे। मदर  टेरेसा हाउस और विक्टोरिया मेमोरियल जा सकते हैं रूबियो हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने अभी तक कोलकाता दौरे का पूरा कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक रूबियो Mother House जा सकते हैं। यह Missionaries of Charity का मुख्यालय है, जिसकी स्थापना Mother Teresa ने की थी। इसके अलावा रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वह Victoria Memorial का भी दौरा कर सकते हैं। इसे देखते हुए शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर अमेरिका का जोर भारत पहुंचने से पहले मार्को रूबियो Sweden गए थे। वहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा निर्यात करना चाहता है। उन्होंने कहा कि इस समय अमेरिका रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और निर्यात कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े सवाल पर रूबियो ने भारत को अमेरिका का “बेहतरीन साझेदार” बताया। रूबियो ने यह भी कहा कि वह QUAD देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक को लेकर उत्साहित हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाना अमेरिका की प्राथमिकताओं में शामिल है।  

surbhi मई 23, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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दिल्ली में 50 लाख की रंगदारी की साजिश का खुलासा, कारोबारी की पत्नी निकली मास्टरमाइंड

abhishek singh जून 30, 2026 0