वॉशिंगटन/पेरिस: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें दुनिया के सबसे प्रभावशाली और मजबूत नेताओं में से एक बताया है। ट्रंप ने कहा कि यदि कभी प्रधानमंत्री मोदी पर फिल्म बनाई जाती है, तो हॉलीवुड को उनके किरदार के लिए उपयुक्त अभिनेता ढूंढने में मुश्किल होगी, क्योंकि उनका व्यक्तित्व बिल्कुल अलग और अनूठा है। न्यूज वेबसाइट एक्सियोस (Axios) को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपने पसंदीदा वैश्विक नेताओं में शामिल किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता प्रभावशाली, मजबूत और परिणाम देने की क्षमता रखने वाले हैं। 'मोदी एक महान नेता हैं' ताकत, प्रभाव और नेतृत्व क्षमता के आधार पर अपने पसंदीदा नेताओं के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि मोदी बहुत अच्छे हैं। भारत के कुछ बेहद अच्छे आंकड़े सामने आए हैं। वह युद्ध से दूर रहते हैं, जो एक समझदारी भरा कदम है। वह 1.5 अरब लोगों का नेतृत्व करते हैं। भारत वास्तव में दुनिया का सबसे बड़ा देश है और मोदी एक महान नेता हैं।" ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का वैश्विक स्तर पर काफी सम्मान है और उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर भी उन्हें बेहद सख्त और मजबूत नेता के रूप में पाया है। 'मोदी पर फिल्म बनी तो हीरो कहां से लाएगा हॉलीवुड?' इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी या राष्ट्रपति शी जिनपिंग पर कोई फिल्म बनाई जाए, तो हॉलीवुड के लिए उनकी भूमिका निभाने के लिए सही अभिनेता ढूंढना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा, "मोदी का व्यक्तित्व बिल्कुल अलग है। दुनिया भर में उनका सम्मान किया जाता है। मैं उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता हूं और वह बेहद मजबूत और सख्त नेता हैं।" भारत-अमेरिका व्यापार पर भी बोले ट्रंप ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर व्यापार होता है, लेकिन पहले भारत को इसका ज्यादा फायदा मिलता था। उन्होंने इसके लिए भारत को दोषी नहीं ठहराया। ट्रंप ने कहा कि उस समय अमेरिका में ऐसे नेता थे, जिन्होंने व्यापारिक असंतुलन को बढ़ने दिया। उनके मुताबिक, अब परिस्थितियां बदल गई हैं और व्यापार अधिक निष्पक्ष तरीके से हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस बदलाव से पूरी तरह खुश नहीं है, क्योंकि पहले उसे व्यापारिक लाभ अधिक मिलता था। 'मोदी ने भारत की राजनीति की तस्वीर बदल दी' ट्रंप ने कहा कि वह कई वर्षों से भारत की राजनीति को देखते आ रहे हैं। उनके अनुसार, पहले भारत में नेतृत्व जल्दी-जल्दी बदलता था और कई नेता लंबे समय तक सत्ता में नहीं टिक पाते थे। उन्होंने कहा, "कोई छह महीने तो कोई एक साल तक ही पद पर रहता था, लेकिन मोदी के आने के बाद तस्वीर बदल गई। वह 12 साल से अधिक समय से सत्ता में हैं और उनकी पकड़ काफी मजबूत है।" ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को "शांत, संतुलित लेकिन बेहद सख्त नेता" बताते हुए कहा कि उनकी नेतृत्व क्षमता ने भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है। जी-7 शिखर सम्मेलन में हुई मुलाकात फ्रांस में आयोजित G7 Summit 2026 के दौरान ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni के बीच हुई छोटी-सी मुलाकात इंटरनेट पर छा गई है। वैश्विक मुद्दों पर गंभीर बैठकों के बीच दोनों नेताओं की यह अनौपचारिक बातचीत सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। जब सभी नेता पारंपरिक ग्रुप फोटो के लिए एकत्रित हो रहे थे, तभी पीएम मोदी और जॉर्जिया मेलोनी ने एक-दूसरे का मुस्कुराते हुए अभिवादन किया। 'हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस कपल हैं' वीडियो में जॉर्जिया मेलोनी प्रधानमंत्री मोदी को देखकर मुस्कुराते हुए कहती हैं, "आपसे दोबारा मिलकर बहुत अच्छा लगा।" इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, "हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस कपल हैं।" बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भी दोनों की सोशल मीडिया लोकप्रियता का जिक्र किया, जिस पर मेलोनी ने हंसते हुए सहमति जताई और अपनी बात दोहराई। दोनों नेताओं की यह हल्की-फुल्की बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। क्या है 'Melodi' ट्रेंड? सोशल मीडिया पर 'Melodi' (मेलोडी) नाम पिछले कुछ वर्षों से काफी लोकप्रिय है। यह शब्द 'Meloni' और 'Modi' के नामों को मिलाकर बनाया गया है। इस ट्रेंड की शुरुआत 2023 में दुबई में आयोजित COP28 के दौरान हुई थी। उस समय जॉर्जिया मेलोनी ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक सेल्फी साझा करते हुए कैप्शन लिखा था, "Good friends at COP28 #Melodi" इसके बाद 'Melodi' हैशटैग इंटरनेट पर वायरल हो गया और दोनों नेताओं की तस्वीरों और मुलाकातों पर मीम्स, फैन एडिट्स और मजेदार पोस्ट की बाढ़ आ गई। जब पीएम मोदी ने मेलोनी को गिफ्ट की थी 'Melody' टॉफी पिछले महीने प्रधानमंत्री मोदी के इटली दौरे के दौरान 'Melodi' ट्रेंड को एक नया और दिलचस्प मोड़ मिला था। रोम में मुलाकात के दौरान पीएम मोदी ने जॉर्जिया मेलोनी को 'Melody' नाम की टॉफी का पैकेट उपहार में दिया था। इस अनोखे तोहफे को देखकर मेलोनी हंस पड़ी थीं और उन्होंने कहा था, "प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए एक बहुत अच्छी टॉफी लाए हैं... मेलोडी।" यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था और कुछ ही घंटों में करोड़ों लोगों ने इसे देखा था। इंटरनेट पर फिर ट्रेंड कर रही है 'Melodi' जी7 शिखर सम्मेलन में हुई ताजा मुलाकात के बाद 'Melodi' एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंड कर रही है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों नेताओं के दोस्ताना और सहज व्यवहार को लेकर इंटरनेट यूजर्स लगातार मजेदार प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। यह बातचीत पूरी तरह हल्के-फुल्के अंदाज में हुई, लेकिन इससे एक बार फिर यह साबित हो गया कि वैश्विक राजनीति की गंभीर बैठकों के बीच भी कुछ पल ऐसे होते हैं, जो लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला देते हैं।
एवियन (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। करीब 16 महीने बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने की यह पहली मुलाकात रही। इस दौरान दोनों नेताओं ने सौहार्दपूर्ण अंदाज में हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत भी की। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच बुधवार (17 जून) को सम्मेलन से इतर एक द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें व्यापार, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। लगातार आठवीं बार जी7 में भारत की भागीदारी भारत को लगातार आठवीं बार जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया गया है। इस मंच पर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक चुनौतियों जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। फ्रांस पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "जी7 शिखर सम्मेलन के लिए एवियन पहुंचा हूं। विश्व नेताओं के साथ महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा और विचारों के आदान-प्रदान को लेकर उत्साहित हूं। भारत एक टिकाऊ, समृद्ध और बेहतर भविष्य के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।" कई नेताओं से करेंगे द्विपक्षीय बैठक जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, रक्षा सहयोग और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा होने की संभावना है। जिनेवा और स्लोवाकिया दौरे के बाद फ्रांस पहुंचे पीएम मोदी फ्रांस पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी जिनेवा में थे, जहां उन्होंने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति Guy Parmelin से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। इससे पहले उन्होंने Slovakia का दौरा किया था, जिसे उन्होंने ऐतिहासिक और सार्थक बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के संबंधों को नई गति मिलेगी। जी7 शिखर सम्मेलन में मोदी-ट्रंप मुलाकात को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास जारी हैं।
रांची। रांची से बेंगलुरु और हैदराबाद के लिए दो नई ट्रेनें चलेंगी। इसका प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बेंगलुरु सेक्शन में चल रहे नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य के पूरा होते ही नई ट्रेन के लिए स्लॉट उपलब्ध हो सकता है। यह विकास कार्य लगभग एक माह में पूरा होने की संभावना है। रांची से बेंगलुरु के लिए चलने वाली ट्रेन बरकाकाना-गया-जबलपुर-नागपुर-काजीपेट-धर्मावरम मार्ग से होते हुए बेंगलुरु पहुंचेगी। इस ट्रेन का संचालन सप्ताह में चार दिन (सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार) करने की योजना है। रांची से हैदराबाद के लिए प्रस्तावित ट्रेन का संचालन सप्ताह में चार दिन (सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शनिवार) किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभी दोनों ट्रेनों को स्पेशल ट्रेन के रूप में प्रस्तावित किया गया है और इनके संचालन के अनुभव के आधार पर आगे इन्हें नियमित ट्रेनों में बदला जा सकता है। दक्षिण की ओर जानेवाली ट्रेनों की स्थिति 13351 धनबाद-एलेप्पी- इस माह सभी श्रेणियों में लंबी वेटिंग 12835 हटिया-बेंगलुरु- 21 जुलाई तक सभी श्रेणियों में लंबी वेटिंग 18637 हटिया-बेंगलुरु वीकली सभी श्रेणियों में 25 जुलाई तक वेटिंग 16620 धनबाद-पोदानूर वीकली 22 व 29 जून को रिग्रेट, 27 जुलाई तक वेटिंग 22837 धरती आबा हटिया से एर्नाकुलम वीकली- 27 जुलाई तक वेटिंग बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना लक्ष्य इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य झारखंड को दक्षिण भारत के प्रमुख औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्रों से बेहतर रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। रेलवे लगातार प्रयास कर रहा है कि जल्द ही ये ट्रेन सेवा शुरू हो सके, ताकि यात्रियों को लंबी वेटिंग और वैकल्पिक मार्गों की परेशानी से राहत मिल सके।
एवियन-ले-बैंस (फ्रांस): फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान जहां दुनिया के प्रमुख नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, यूक्रेन युद्ध, सुरक्षा और भू-राजनीतिक संकटों जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की, वहीं नेताओं की कुछ अनौपचारिक बातचीत भी सुर्खियों में रही। सबसे ज्यादा चर्चा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की रही, जिन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने पिछले एक महीने से सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया है। '1 मई के बाद से सिगरेट नहीं पी', मेलोनी ने किया खुलासा बैठक शुरू होने से पहले जॉर्जिया मेलोनी ने बताया कि उन्होंने उस दिन तीन कप कॉफी पी है। इस पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने उनसे पूछा कि इतनी कॉफी क्यों? जवाब में मेलोनी ने मुस्कुराते हुए कहा, "खुद को जगाए रखने के लिए।" इसके बाद जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने सुबह सिगरेट पी है? इस पर मेलोनी ने जवाब दिया, "मैंने 1 मई के बाद से सिगरेट नहीं पी है।" उनके इस जवाब पर बैठक में मौजूद नेताओं ने तालियां बजाकर और बधाई देकर उनका उत्साह बढ़ाया। मार्क कार्नी ने पूछा- निकोटीन पैच लगाया क्या? कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची और यूरोपीय संघ के अन्य प्रतिनिधियों ने मेलोनी को धूम्रपान छोड़ने के लिए बधाई दी। खुशी जाहिर करते हुए मेलोनी ने दोनों हाथ ऊपर उठा दिए। इसी दौरान मार्क कार्नी ने मजाकिया अंदाज में पूछा, "क्या आपने निकोटीन पैच लगाया है?" उनके इस सवाल पर वहां मौजूद सभी नेता हंस पड़े और माहौल हल्का-फुल्का हो गया। नेताओं ने साझा किए धूम्रपान छोड़ने के अनुभव सिगरेट छोड़ने को लेकर बातचीत आगे बढ़ी तो कई नेताओं ने अपने निजी अनुभव भी साझा किए। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने बताया कि उन्होंने 2005 में धूम्रपान छोड़ दिया था। इस पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने पूछा कि क्या उसके बाद कभी सिगरेट पी? कोस्टा ने जवाब दिया, "कभी नहीं, 21 साल हो गए।" इस बातचीत ने जी7 जैसे गंभीर मंच पर नेताओं का एक मानवीय और सहज पक्ष भी सामने ला दिया। जी7 में फिर चर्चा में आया 'मेलोडी' मोमेंट जी7 सम्मेलन के दौरान एक और दिलचस्प पल तब देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी पारंपरिक 'फैमिली फोटो' से पहले आमने-सामने आए। दोनों नेताओं की दोस्ताना केमिस्ट्री पहले भी सोशल मीडिया पर 'मेलोडी' (Meloni + Modi) नाम से वायरल हो चुकी है। मुलाकात के दौरान मेलोनी ने मुस्कुराते हुए कहा, "आपसे फिर मिलकर अच्छा लगा।" बताया जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान इंस्टाग्राम का जिक्र किया। इस पर मेलोनी ने तुरंत जवाब दिया, "हां, हम इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा मशहूर हैं।" उनकी इस टिप्पणी पर आसपास मौजूद लोग हंस पड़े। जी7 में कौन-कौन से देश हुए शामिल? जी7 समूह में दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जिनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। इसके अलावा यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में भाग लेता है। इस वर्ष मेजबान फ्रांस ने भारत, ब्राजील, केन्या, दक्षिण कोरिया, यूक्रेन और अन्य साझेदार देशों को भी विशेष आमंत्रित राष्ट्र के रूप में बुलाया था। सम्मेलन के एजेंडे में वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियां प्रमुख रहीं, लेकिन नेताओं के ये अनौपचारिक और हल्के-फुल्के पल भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए।
एवियन-ले-बैंस (फ्रांस): फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात एक बार फिर सुर्खियों में है। दोनों नेताओं का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें ट्रंप सीढ़ियां चढ़ते समय प्रधानमंत्री मोदी की कलाई पकड़कर उनके साथ आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं। यह मुलाकात करीब 16 महीने बाद दोनों नेताओं की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात थी। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में आमने-सामने मिले थे, जब ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत की थी। फोटोशूट के दौरान दिखी दोनों नेताओं की गर्मजोशी वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप अन्य विश्व नेताओं के साथ पारंपरिक फैमिली फोटो के लिए जाते दिखाई दे रहे हैं। इसी दौरान एक छोटी सी सीढ़ी चढ़ते समय ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की कलाई पकड़ते हैं और दोनों साथ आगे बढ़ते हैं। वीडियो में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की पत्नी भी ट्रंप के पास खड़ी होने की कोशिश करती दिखाई देती हैं। इसी दौरान राष्ट्रपति मैक्रों कहते हैं, "Ready Everybody?" इस पर प्रधानमंत्री मोदी मुस्कुराते हुए जवाब देते हैं, "We are always ready." यह संवाद भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। हाथ मिलाने के बाद कुछ देर हुई बातचीत फोटोशूट से पहले प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने गर्मजोशी से हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत भी की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब भारत और अमेरिका के संबंध व्यापार, रणनीतिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर नए दौर से गुजर रहे हैं। हाल के महीनों में कई मुद्दों पर बढ़ी थीं चुनौतियां भारत-अमेरिका संबंधों को हाल के महीनों में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर काउंटर टैरिफ लगाए थे। इसके अलावा ओमान तट के पास एक व्यापारी जहाज पर अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भी दोनों देशों के संबंधों को लेकर सवाल उठे थे। इन चुनौतियों के बावजूद नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच संवाद और सहयोग लगातार जारी है। मार्को रुबियो ने दिया था ट्रंप का संदेश पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को निकट भविष्य में व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया था। रुबियो ने भारत को अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का "आधार स्तंभ" बताते हुए दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया था। जी7 मंच से पीएम मोदी ने उठाया समुद्री सुरक्षा का मुद्दा जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री व्यापार मार्गों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार पर पड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा, "वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी भय के अपना कर्तव्य निभा सकें।" ओमान की खाड़ी में तीन भारतीय नाविकों की हुई थी मौत प्रधानमंत्री का यह बयान उस घटना के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी बलों ने 8 जून को 'मारिवेक्स', 9 जून को 'सेटेबेलो' और 11 जून को 'जलवीर' नामक जहाजों के खिलाफ अभियान चलाया था। अमेरिका का आरोप था कि ये जहाज ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों और नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे थे। मोदी और ट्रंप की मुलाकात को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब दोनों देश व्यापार, समुद्री सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।
एवियन (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखना और नाविकों की रक्षा करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के उच्चस्तरीय सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। यह सत्र ‘नई साझेदारियां विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करने’ विषय पर आयोजित किया गया था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता मौजूद थे। पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों का स्वागत, संघर्ष पर जताई चिंता प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हम पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं, लेकिन इस संघर्ष के कारण क्षेत्र के हमारे मित्र देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री व्यापार में आई बाधाओं का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।" उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं में कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है और ऐसे में समुद्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है। भारतीय नाविकों की मौत का किया उल्लेख प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "कई भारतीय नागरिकों की मृत्यु हुई है। वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी भय के अपना काम कर सकें।" जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीब 16 महीनों बाद मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। ओमान की खाड़ी की घटना के बाद बढ़ी चिंता प्रधानमंत्री का यह बयान ओमान की खाड़ी में हुई उस घटना के बाद आया है, जिसमें तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी। यह हादसा उस समय हुआ जब अमेरिकी बलों ने पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर 'सेटेबेलो' के खिलाफ कार्रवाई की थी। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने आरोप लगाया था कि यह टैंकर ईरान से तेल लेकर जा रहा था और अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। जहाज पर कुल 28 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 24 भारतीय, दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी नागरिक शामिल थे। कार्रवाई के दौरान आदित्य शर्मा, पटनाला सुरेश और शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई थी। वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा वाणिज्यिक माल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजरानी गतिविधियों पर खतरा बढ़ गया है। हाल के दिनों में भारतीय चालक दल वाले कई वाणिज्यिक जहाज अलग-अलग घटनाओं की चपेट में आ चुके हैं, जिससे नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं। 'दाता-प्राप्तकर्ता' मॉडल से आगे बढ़ने की जरूरत: मोदी जी7 के आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक सहयोग अब पारंपरिक 'दाता और प्राप्तकर्ता' मॉडल से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशों के बीच संबंध समानता, साझी जिम्मेदारी और आपसी विश्वास पर आधारित होने चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' यानी 'मानवता सर्वोपरि' के सिद्धांत पर चला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन, ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस, मिशन लाइफ और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर टिकाऊ और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। 'वसुधैव कुटुंबकम' भारत की विदेश नीति का आधार प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की वैश्विक साझेदारी की सोच 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन से प्रेरित है, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और सामूहिक विकास के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत की जी7 में 13वीं भागीदारी जी7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं- अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा- का समूह है। यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में भाग लेता है। भारत इसका सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल होता रहा है। इस बार भारत की जी7 में साझेदार देश के रूप में 13वीं भागीदारी रही, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सातवीं बार इस मंच पर पहुंचे हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फ्रांस के जी-7 मंच पर बुधवार शाम 6:15 बजे भारत और अमेरिका के दिग्गज नेता आमने-सामने होंगे। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच होने वाली इस वार्ता में रक्षा, व्यापार और हालिया कूटनीतिक असहमतियों पर बेबाक चर्चा होने की उम्मीद है। फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit 2026) इस वक्त पूरी दुनिया की कूटनीतिक हलचलों का केंद्र बना हुआ है। इसी वैश्विक मंच के इतर, बुधवार (17 जून 2026) की शाम 6:15 बजे (भारतीय समयानुसार) एक ऐसी द्विपक्षीय बैठक होने जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 16 महीने के लंबे अंतराल के बाद आधिकारिक तौर पर आमने-सामने बैठकर वार्ता करेंगे। यह मुलाकात महज एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं है, बल्कि यह उन तमाम असहजताओं और तनावों को दूर करने का एक बड़ा 'टेस्ट' है, जो हाल के महीनों में नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच पनपे हैं। तनाव के साये में कूटनीतिक संवाद भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी भले ही मजबूत हो, लेकिन हालिया घटनाओं ने इस रिश्ते पर गहरा दबाव डाला है। पिछले सप्ताह ओमान के करीब एक व्यापारी जहाज पर अमेरिकी नौसेना की सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई थी। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस संवेदनशील मुद्दे को ट्रंप के समक्ष प्रमुखता से उठाएंगे। इसके अतिरिक्त, एच-1बी (H-1B) वीजा नियमों में सख्ती, बाजार पहुंच में अड़चनें, रक्षा सौदों में देरी और 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के अतिशयोक्तिपूर्ण दावों ने भी दोनों देशों के बीच कूटनीतिक असहजता पैदा की है। व्यापारिक समझौते और तकनीक की बिसात तनाव के बावजूद, दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीदें भी जिंदा हैं। फरवरी 2026 में दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते की घोषणा की थी, जिसने एक सकारात्मक माहौल तैयार किया है। इस समझौते के तहत अमेरिका ने न सिर्फ कुछ भारतीय उत्पादों पर टैरिफ कम किया, बल्कि रूसी तेल की खरीद पर लगाए गए दंडात्मक शुल्कों को भी हटा लिया था। आज की बैठक में दोनों नेता इसी नींव पर एक व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी खड़ी करने की कोशिश करेंगे। एजेंडे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा सुरक्षा और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन जैसे आधुनिक विषय भी मजबूती से शामिल रहेंगे। जी-7 का कड़ा रुख: यूक्रेन से लेकर इंडो-पैसिफिक तक मोदी-ट्रंप की यह बैठक उस जी-7 सम्मेलन के बीच हो रही है, जिसने कई वैश्विक मोर्चों पर अपना रुख बेहद स्पष्ट कर दिया है। सम्मेलन में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। सदस्य देशों ने कीव पर हुए उस हालिया विनाशकारी रूसी हमले की कड़ी निंदा की, जिसमें 11 लोगों की जान चली गई और एक ऐतिहासिक कैथेड्रल को भारी नुकसान पहुंचा। जी-7 ने यूक्रेन की दृढ़ता की सराहना करते हुए अपना अटूट समर्थन दोहराया है। इसके साथ ही, पूर्वी और दक्षिण चीन सागर तथा ताइवान जलडमरूमध्य में चीन की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए नेताओं ने एक 'मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक' की वकालत की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 'चाइना शॉक' का जिक्र करते हुए जोर दिया कि महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) के लिए यूरोप और दुनिया को चीन पर अपनी अत्यधिक निर्भरता घटानी होगी, जो आर्थिक संप्रभुता के लिए बेहद जरूरी है। पश्चिम एशिया और ईरान पर ऐतिहासिक सहमति वार्ता के दौरान पश्चिम एशिया की स्थिरता और होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा भी एक अहम विषय होगा। जी-7 के मंच से एक बड़ी राहत की खबर यह भी आई कि सदस्य देशों ने राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व और मध्यस्थों के सहयोग से हुए 'अमेरिका-ईरान समझौते' का जोरदार स्वागत किया है। इस समझौते को ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। अब देखना यह है कि जब प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप वार्ता की मेज पर बैठेंगे, तो क्या वे इन जटिल वैश्विक समीकरणों और द्विपक्षीय मतभेदों को सुलझाकर भारत-अमेरिका संबंधों को एक नई रफ्तार दे पाएंगे।
एवियन/पेरिस: फ्रांस के एवियन शहर में मंगलवार से 52वें G7 शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो रही है, जो 17 जून तक चलेगा। सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन फ्रांस पहुंच चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज स्लोवाकिया से फ्रांस पहुंचेंगे और सम्मेलन में विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के नेता के रूप में हिस्सा लेंगे। ट्रम्प-मैक्रों की मुलाकात, ईरान-अमेरिका समझौते का स्वागत फ्रांस पहुंचने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान मैक्रों ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे विश्व शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। मैक्रों ने कहा कि इस समझौते से पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। G7 नेताओं के साथ अहम बैठकें करेंगे पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन के दौरान G7 सदस्य देशों के नेताओं और अन्य सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों के साथ वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ द्विपक्षीय मुलाकात की भी संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, मोदी यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे विषयों पर भारत का पक्ष रख सकते हैं। ईरान, यूक्रेन और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर रहेगा फोकस इस बार G7 समिट के एजेंडे में यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजरायल तनाव, गाजा और लेबनान की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, वैश्विक आर्थिक सहयोग, सप्लाई चेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रमुख मुद्दे हैं। G7 देशों के नेता इन विषयों पर सामूहिक रणनीति और संभावित घोषणाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। पीएम मोदी का 100वां विदेशी दौरा फ्रांस और स्लोवाकिया की यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल का 100वां विदेशी दौरा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, मोदी अब तक प्रधानमंत्री के रूप में 78 देशों की यात्रा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री के तौर पर उनका पहला विदेश दौरा जून 2014 में भूटान का था। पहले कार्यकाल में उन्होंने 49, दूसरे कार्यकाल में 27 और तीसरे कार्यकाल में अब तक 24 विदेश यात्राएं की हैं। क्या है G7? G7 यानी 'ग्रुप ऑफ सेवन' दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के शामिल होने के बाद यह G7 बना। 1998 में रूस को शामिल कर इसे G8 बनाया गया, लेकिन 2014 में क्रीमिया विवाद के बाद रूस को बाहर कर दिया गया और समूह फिर G7 बन गया। भारत क्यों है खास? भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था और वैश्विक मंच पर बढ़ती भूमिका के कारण उसे नियमित रूप से विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2019 से लगातार G7 शिखर सम्मेलनों में हिस्सा ले रहे हैं। इस बार वह सातवीं बार G7 मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। G20 और G7 में क्या अंतर? G7 मुख्य रूप से विकसित देशों का समूह है, जहां आर्थिक मुद्दों के साथ राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी विषयों पर भी चर्चा होती है। वहीं G20 में विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाएं दोनों शामिल हैं और उसका मुख्य फोकस वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और वित्तीय स्थिरता पर रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में G20 का प्रभाव बढ़ा है, लेकिन भू-राजनीतिक और रणनीतिक मुद्दों पर G7 अब भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को एक सप्ताह के फ्रांस और स्लोवाकिया दौरे पर रवाना हो गए। इस यात्रा के दौरान वह फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दौरा भारत की यूरोप के साथ रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देगा और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को और सशक्त करेगा। मैक्रों से मुलाकात, इनोवेशन और रणनीतिक सहयोग पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की रणनीतिक सोच में फ्रांस का विशेष स्थान है। उन्होंने याद दिलाया कि इस वर्ष की शुरुआत में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आए थे, जिसके बाद दोनों देशों के संबंध 'विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक पहुंचे। फ्रांस के नीस और पेरिस में होने वाली बैठकों के दौरान दोनों नेता रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, निवेश और वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री विवाटेक 2026 और 'भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष' से जुड़े कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे, जहां भारतीय स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को वैश्विक मंच मिलेगा। स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा प्रधानमंत्री 14 और 15 जून को स्लोवाकिया के सरकारी दौरे पर रहेंगे। 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी। इस दौरान वह राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से मुलाकात करेंगे तथा व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद करेंगे। सरकार का मानना है कि यह यात्रा दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और भारत-यूरोपीय संघ साझेदारी को नई गति देगी। जी7 में भारत रखेगा ग्लोबल साउथ का पक्ष 16 और 17 जून को फ्रांस के एवियन में होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन में भारत लगातार आठवीं बार आमंत्रित देश के रूप में शामिल होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत इस मंच पर केवल अपने राष्ट्रीय हितों की ही नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं और विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को भी मजबूती से दुनिया के सामने रखेगा।
रांची। झारखंड के सिमडेगा जिले ने कृषि और बागवानी क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री Hemant Soren के विजन और बिरसा हरित ग्राम योजना के सफल क्रियान्वयन का परिणाम है कि जिले के उच्च गुणवत्ता वाले आम्रपाली आम पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच गए हैं। सिमडेगा से 1322 किलोग्राम (1.32 टन) आम्रपाली आम की पहली व्यावसायिक खेप यूनाइटेड किंगडम के लंदन के लिए रवाना की गई है। कोरोना काल में शुरू हुई योजना बनी सफलता की मिसाल कोरोना महामारी के दौरान ग्रामीणों को रोजगार और आजीविका उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बिरसा हरित ग्राम योजना की शुरुआत की गई थी। वर्ष 2019-20 से 2024-25 के बीच सिमडेगा जिले के 12 हजार से अधिक किसानों ने लगभग 10,500 एकड़ भूमि पर आम्रपाली, मल्लिका और लंगड़ा आम की बागवानी की। आज उन्हीं किसानों की मेहनत का फल अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा है। पिछले वर्ष आम का उत्पादन अच्छा होने के बावजूद किसानों को उचित बाजार नहीं मिल पाया था। इस बार जिला प्रशासन ने खरीदार-विक्रेता बैठकें आयोजित कर बाजार से सीधा संपर्क स्थापित किया। साथ ही APEDA के सहयोग से आमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया। महिला किसान बनीं निर्यात अभियान की ताकत सिमडेगा में 7,500 सखी मंडलों से जुड़ी 93 हजार से अधिक महिलाओं ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जिले के छह किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के लगभग 300 किसान इस निर्यात प्रक्रिया से जुड़े हैं। महिला जागृति फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने पहली खेप के निर्यात में प्रमुख भूमिका निभाई। 81 टन आम बेचने का लक्ष्य जिला प्रशासन ने इस सीजन में 81 टन आम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचने का लक्ष्य रखा है। जल्द ही यूके और यूरोप के लिए नई खेप भेजी जाएगी। साथ ही घरेलू बाजार में रिलायंस मार्ट के साथ भी बाजार संपर्क स्थापित किया गया है। 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को मिला रोजगार बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत पूरे झारखंड में 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में बागवानी विकसित की गई है, जिससे 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार मिला है। राज्य सरकार का अनुमान है कि इस वर्ष लगभग 50 हजार मीट्रिक टन फल उत्पादन होगा, जिससे झारखंड भविष्य में फलों के निर्यात का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह फ्रांस में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। स्लोवाकिया की यह यात्रा विशेष रूप से ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि 1993 में देश के गठन के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा होगी। फ्रांस से होगी यात्रा की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी 13 जून को फ्रांस के नीस शहर पहुंचेंगे। 14 जून को उनकी मुलाकात फ्रांसीसी राष्ट्रपति Emmanuel Macron से होगी। दोनों नेता भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी, निवेश और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। बैठक के दौरान दोनों नेता संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन भी करेंगे। इस कार्यक्रम में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के प्रमुख स्टार्टअप, निवेशक और वेंचर कैपिटल फंड भाग लेंगे। यह आयोजन भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के तहत आयोजित किया जा रहा है। पहली बार स्लोवाकिया जाएंगे पीएम मोदी यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री मोदी 14 से 16 जून तक Slovakia की राजकीय यात्रा करेंगे। यह दौरा स्लोवाक प्रधानमंत्री Robert Fico के निमंत्रण पर हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान प्रधानमंत्री फिको के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे और व्यापार, निवेश, ऑटोमोबाइल विनिर्माण, रेलवे, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया के राष्ट्रपति Peter Pellegrini से भी मुलाकात करेंगे। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच बढ़ते संपर्कों को देखते हुए इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। G-7 शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी यात्रा के तीसरे चरण में प्रधानमंत्री मोदी 16 और 17 जून को फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 Summit 2026 में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के साथ संभावित मुलाकात पर भी रहेगी। पेरिस में करेंगे VivaTech सम्मेलन में शिरकत यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी 18 जून को पेरिस जाएंगे। यहां वह VivaTech 2026 में भाग लेंगे, जिसे यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप आयोजनों में गिना जाता है। प्रधानमंत्री के पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित करने की भी संभावना है। इसके अलावा वह विभिन्न प्रौद्योगिकी कंपनियों और निवेशकों के साथ संवाद कर सकते हैं। क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा? प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा फ्रांस, स्लोवाकिया और यूरोपीय देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती दे सकती है। G-7 मंच पर भारत की भागीदारी वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करेगी, जबकि नवाचार और प्रौद्योगिकी से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेना भारत को वैश्विक स्टार्टअप और डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर देगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि वह इस महीने फ्रांस में आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन-ले-बैंस शहर में आयोजित किया जाएगा। ऐसे समय में यह बैठक हो रही है जब ईरान को लेकर अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगी देशों के बीच मतभेद बढ़ते नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि वह 14 जून को व्हाइट हाउस परिसर में आयोजित यूएफसी विश्व चैंपियनशिप मुकाबलों में शामिल होने के बाद सीधे फ्रांस रवाना होंगे। उन्होंने इस आयोजन को अमेरिकी इतिहास की सबसे मनोरंजक रातों में से एक बताया। पश्चिम एशिया को लेकर बढ़े हैं मतभेद हाल के दिनों में ट्रंप ने Germany, France और United Kingdom जैसे प्रमुख सहयोगी देशों की आलोचना की थी। उनका आरोप था कि ये देश पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य रणनीति का पर्याप्त समर्थन नहीं कर रहे हैं। इसी कारण शुरुआत में उनके सम्मेलन में शामिल होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका और Israel द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किए जाने के बाद यह पहला अवसर होगा जब ट्रंप कई वैश्विक नेताओं से आमने-सामने मुलाकात करेंगे। वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर होगी चर्चा जी-7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें United States, Canada, France, Germany, Italy, Japan और United Kingdom शामिल हैं। इसके अलावा European Union भी इस समूह का हिस्सा है। सम्मेलन में वैश्विक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, आर्थिक चुनौतियों, ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि इसके फैसले आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।