भारतीय नाविक

Prime Minister Narendra Modi addresses the G7 Summit in France and raises concerns over Indian sailors' deaths and maritime security.
G7 में पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा, बोले- समुद्री मार्गों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना दुनिया की जिम्मेदारी

  एवियन (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखना और नाविकों की रक्षा करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के उच्चस्तरीय सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। यह सत्र ‘नई साझेदारियां विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करने’ विषय पर आयोजित किया गया था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता मौजूद थे। पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों का स्वागत, संघर्ष पर जताई चिंता प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हम पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं, लेकिन इस संघर्ष के कारण क्षेत्र के हमारे मित्र देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री व्यापार में आई बाधाओं का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।" उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं में कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है और ऐसे में समुद्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है। भारतीय नाविकों की मौत का किया उल्लेख प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "कई भारतीय नागरिकों की मृत्यु हुई है। वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी भय के अपना काम कर सकें।" जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीब 16 महीनों बाद मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। ओमान की खाड़ी की घटना के बाद बढ़ी चिंता प्रधानमंत्री का यह बयान ओमान की खाड़ी में हुई उस घटना के बाद आया है, जिसमें तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी। यह हादसा उस समय हुआ जब अमेरिकी बलों ने पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर 'सेटेबेलो' के खिलाफ कार्रवाई की थी। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने आरोप लगाया था कि यह टैंकर ईरान से तेल लेकर जा रहा था और अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। जहाज पर कुल 28 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 24 भारतीय, दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी नागरिक शामिल थे। कार्रवाई के दौरान आदित्य शर्मा, पटनाला सुरेश और शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई थी। वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा वाणिज्यिक माल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजरानी गतिविधियों पर खतरा बढ़ गया है। हाल के दिनों में भारतीय चालक दल वाले कई वाणिज्यिक जहाज अलग-अलग घटनाओं की चपेट में आ चुके हैं, जिससे नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं। 'दाता-प्राप्तकर्ता' मॉडल से आगे बढ़ने की जरूरत: मोदी जी7 के आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक सहयोग अब पारंपरिक 'दाता और प्राप्तकर्ता' मॉडल से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशों के बीच संबंध समानता, साझी जिम्मेदारी और आपसी विश्वास पर आधारित होने चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' यानी 'मानवता सर्वोपरि' के सिद्धांत पर चला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन, ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस, मिशन लाइफ और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर टिकाऊ और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। 'वसुधैव कुटुंबकम' भारत की विदेश नीति का आधार प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की वैश्विक साझेदारी की सोच 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन से प्रेरित है, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और सामूहिक विकास के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत की जी7 में 13वीं भागीदारी जी7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं- अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा- का समूह है। यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में भाग लेता है। भारत इसका सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल होता रहा है। इस बार भारत की जी7 में साझेदार देश के रूप में 13वीं भागीदारी रही, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सातवीं बार इस मंच पर पहुंचे हैं।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Rahul Gandhi criticizes PM Narendra Modi and the Centre over Indian sailors' deaths near the Strait of Hormuz and questions India's foreign policy response.
राहुल गांधी का पीएम मोदी पर तीखा हमला, बोले- ‘अमेरिका के आज्ञाकारी नौकर की तरह कर रहे हैं काम’

  नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। होर्मुज स्ट्रेट के पास एक वाणिज्यिक जहाज पर भारतीय नाविकों की मौत और ओमान के डुक्म बंदरगाह पर एक अन्य भारतीय नागरिक की मृत्यु का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने सरकार पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका की कार्रवाई में भारतीय नागरिकों की मौत के बावजूद न तो माफी मांगी गई और न ही भारत सरकार ने कोई सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि एक स्वतंत्र देश को आदेशात्मक भाषा स्वीकार नहीं करनी चाहिए। ‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’ कहकर साधा निशाना कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी को ‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’ बताते हुए कहा कि सरकार अमेरिकी दबाव के सामने चुप है और एक ‘आज्ञाकारी नौकर’ की तरह व्यवहार कर रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार अपेक्षित दृढ़ता नहीं दिखा रही है। उन्होंने लिखा कि विदेशी ताकतें भारतीय नागरिकों को नुकसान पहुंचा रही हैं, जबकि सरकार मौन बनी हुई है। राहुल गांधी ने इसे देश के सम्मान और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। भारतीय नागरिक की मौत का भी उठाया मुद्दा राहुल गांधी ने ओमान के डुक्म बंदरगाह पर खड़े एक जहाज पर सवार भारतीय नागरिक निशांत उर्थनाथन की मौत का मुद्दा भी उठाया। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, निशांत उर्थनाथन की मृत्यु बीमारी के कारण हुई और उनका पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। इस घटना का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि विदेशों में मुश्किल परिस्थितियों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए सरकार को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ा है तनाव हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस क्षेत्र से होकर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक और व्यापारिक जहाज गुजरते हैं, जिसके कारण भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने पहले भी क्षेत्रीय तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया और विदेश नीति को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। सियासी बहस तेज राहुल गांधी के इस बयान के बाद भारतीय राजनीति में एक नई बहस छिड़ने की संभावना है। कांग्रेस जहां सरकार की विदेश नीति और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र को घेर रही है, वहीं सरकार की ओर से अभी तक राहुल गांधी की ताजा टिप्पणियों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। होर्मुज क्षेत्र में जारी तनाव और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा आने वाले दिनों में देश की राजनीति और कूटनीतिक चर्चाओं का प्रमुख विषय बना रह सकता है।  

Deepshikha जून 15, 2026 0
Indian External Affairs Minister S Jaishankar raises concerns over US Navy action affecting Indian sailors in Gulf waters.
US Navy हमले पर भारत का कड़ा विरोध, एस. जयशंकर ने मार्को रुबियो से कहा- ‘व्यावसायिक जहाजों पर घातक कार्रवाई उचित नहीं’

खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की मौत पर भारत का सख्त रुख खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई में भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से बातचीत कर स्पष्ट कहा कि व्यावसायिक जहाजों पर इस तरह की घातक सैन्य कार्रवाई उचित नहीं है। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय नाविकों की मौत पर भारत की गहरी चिंता और विरोध अमेरिकी पक्ष के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि नागरिक जहाजों को निशाना बनाने जैसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। दो दिनों में दूसरी बार अमेरिकी राजनयिक को तलब किया गया भारत सरकार ने 48 घंटे के भीतर दूसरी बार भारत में अमेरिकी मिशन के प्रभारी अधिकारी (Charge d’Affaires) Jason Meeks को विदेश मंत्रालय बुलाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी नौसेना द्वारा ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों के कारण तीन भारतीयों की जान जा चुकी है। भारत ने इसे “टाला जा सकने वाला और दुखद नुकसान” बताया है। MT Settebello हमले में 3 भारतीयों की मौत सरकार के अनुसार, एमटी सेत्तेबेलो (MT Settebello) नामक जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। जहाज पर कुल 24 भारतीय मौजूद थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके अलावा अमेरिकी बलों ने ओमान तट के पास गिनी-बिसाउ ध्वज वाले टैंकर MT Jalveer के इंजन कक्ष पर हेलफायर मिसाइलें दागीं। इस जहाज पर मौजूद सभी 20 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाला गया। विदेश मंत्रालय ने जताई गहरी चिंता विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि नागरिक जहाजों के खिलाफ घातक बल का इस्तेमाल पूरी तरह अस्वीकार्य है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा, स्थिरता और विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं। भारत ने अमेरिकी प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में तैनात उसकी सैन्य इकाइयां भविष्य में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। पश्चिम एशिया संघर्ष का भारतीय नाविकों पर असर पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव का असर भारतीय नाविकों पर भी पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक 13 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जबकि एक नाविक अब भी लापता बताया जा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र Strait of Hormuz दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और गैस परिवहन होता है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और नौसैनिक गतिविधियों ने न केवल समुद्री सुरक्षा को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो तेल और गैस की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Commercial vessel near Oman coast after attack that killed three Indian crew members.
भारतीय नाविकों की मौत पर ईरान की तीखी प्रतिक्रिया, अमेरिका की कार्रवाई पर उठाए सवाल; भारत ने जताई चिंता

  ओमान के तट के निकट भारतीय चालक दल वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। इस घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जिसके बाद ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। वहीं भारत ने भी घटना की निंदा करते हुए क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की है। ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना की ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में भारतीय नागरिकों की मौत पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बगाई ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। भारतीय नागरिकों के प्रति जताई संवेदना ईरानी प्रवक्ता ने मृत भारतीय नाविकों के परिवारों, मित्रों, भारतीय जनता और भारत सरकार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की मौत किसी भी परिस्थिति में दुखद है और ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। भारत ने भी की हमले की निंदा भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने ओमान के तट के पास वाणिज्यिक जहाज ‘सेटेबेलो’ पर हुए हमले की निंदा की। मंत्रालय ने बताया कि जहाज पर सवार 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों में से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया था, जबकि तीन भारतीयों के लापता होने की सूचना मिली थी। बाद में खोज एवं बचाव अभियान के दौरान तीनों नाविकों के शव बरामद किए गए। मृत भारतीय नाविकों की पहचान केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने मृतकों की पहचान की पुष्टि करते हुए शोक व्यक्त किया। मृत नाविकों में: हिमाचल प्रदेश के डेक कैडेट आदित्य शर्मा उत्तर प्रदेश के इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया आंध्र प्रदेश के चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश शामिल थे। ये सभी पलाऊ के झंडे वाले जहाज एमटी सेटेबेलो के चालक दल का हिस्सा थे। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर भारत की चिंता विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। मंत्रालय के अनुसार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। भारत ने कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष और अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर पड़ रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। कूटनीतिक समाधान पर जोर भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील दोहराई है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। बयान में कहा गया कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए जारी कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Indian sailors being rescued by helicopter from burning MT Marivex tanker in Gulf of Oman
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ऑयल टैंकर में लगी आग, 24 भारतीय नाविकों को हेलीकॉप्टर से बचाया गया

  ओमान की खाड़ी में एक नाटकीय समुद्री घटना के दौरान 24 भारतीय नाविकों की जान बाल-बाल बच गई। एमटी मारिवेक्स नामक ऑयल टैंकर में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद आग लग गई, जिसके चलते चालक दल को आपातकालीन सहायता के लिए एसओएस संदेश भेजना पड़ा। बाद में ओमानी अधिकारियों और बचाव दल ने हेलीकॉप्टर की मदद से सभी भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना ओमान के मसिराह द्वीप के निकट समुद्री क्षेत्र में हुई, जहां टैंकर अचानक आग की चपेट में आ गया। आग लगने के बाद जहाज पर मौजूद चालक दल ने तत्काल मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद बड़े स्तर पर बचाव अभियान चलाया गया। अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की पुष्टि की अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, एमटी मारिवेक्स कथित तौर पर ईरान से जुड़े प्रतिबंधों और समुद्री नाकेबंदी का उल्लंघन करते हुए आगे बढ़ रहा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि जहाज को कई बार चेतावनी दी गई, लेकिन उसने निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद अमेरिकी विमानवाहक पोत पर तैनात एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमान ने जहाज के इंजन और स्टीयरिंग सेक्शन को निशाना बनाकर कार्रवाई की। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह हमला जहाज को रोकने के उद्देश्य से किया गया था ताकि वह आगे ईरानी जलक्षेत्र की ओर न बढ़ सके। आग लगते ही चालक दल ने भेजा SOS हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई। दोपहर करीब 1:30 बजे चालक दल ने आपातकालीन संदेश भेजकर सहायता मांगी। केंद्रीय शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, उस समय जहाज पर 24 भारतीय नाविक मौजूद थे। स्थिति तेजी से बिगड़ती देख चालक दल ने जहाज के सुरक्षित हिस्से में शरण ली और बचाव दल के पहुंचने का इंतजार किया। मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उन्हें सफलतापूर्वक बचा लिया गया है। ऑडियो संदेश में चालक दल ने बताई भयावह स्थिति घटना के दौरान जहाज से भेजे गए कुछ ऑडियो संदेशों में चालक दल के सदस्य घबराहट और संकट की स्थिति में मदद मांगते सुनाई दिए। एक संदेश में कथित तौर पर कहा गया, "जहाज पर आग लगी हुई है, पोत डूबने की स्थिति में है। इंजन रूम पर हमला हुआ है और जहाज के निचले हिस्से में बड़ा छेद हो गया है।" इन संदेशों के सामने आने के बाद समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल बचाव अभियान तेज कर दिया। लाइफबोट्स भी हुईं क्षतिग्रस्त चालक दल के अनुसार, हमले और आग के कारण जहाज की कुछ लाइफबोट्स भी क्षतिग्रस्त हो गई थीं। आग इतनी तेजी से फैली कि जहाज के पिछले हिस्से तक पहुंचना मुश्किल हो गया। स्थिति गंभीर होने पर सभी नाविक जहाज के अगले हिस्से में एकत्र हुए, जहां से उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए निकाला गया। बाद में सभी को सुरक्षित रूप से ओमान के मसिराह द्वीप पहुंचाया गया। भारतीय स्वामित्व वाला नहीं था जहाज शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि एमटी मारिवेक्स किसी भारतीय कंपनी के स्वामित्व वाला जहाज नहीं था। जहाज पर तैनात सभी 24 चालक दल के सदस्य भारतीय नागरिक थे। अधिकारियों के अनुसार, जहाज पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में शामिल था और उस पर ईरान से जुड़े कारोबारी संबंधों के आरोप लगाए गए थे। अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में था मारिवेक्स समुद्री डेटाबेस के अनुसार, एमटी मारिवेक्स को पिछले वर्ष अमेरिकी अधिकारियों ने प्रतिबंधित जहाजों की सूची में शामिल किया था। अमेरिका का आरोप है कि जहाज का संबंध ईरान के तेल व्यापार नेटवर्क से था। रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के दिनों में जहाज ने अपनी ट्रैकिंग प्रणाली बंद करने और समुद्री निगरानी से बचने जैसी गतिविधियां भी की थीं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। भारत सरकार ने शुरू किया समन्वय घटना के बाद भारत सरकार ने विदेश मंत्रालय, भारतीय नौसेना, रक्षा मंत्रालय और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के साथ समन्वय शुरू कर दिया है। शिपिंग मंत्रालय ने कहा कि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिकता सभी नाविकों की सुरक्षा और उनके सुरक्षित ठिकाने तक पहुंच सुनिश्चित करना है। क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी चिंता यह घटना ऐसे समय हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी का इलाका पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है। ईरान, अमेरिका और क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता लगातार बढ़ रही है। एमटी मारिवेक्स पर हुई कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि मध्य पूर्व के संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में व्यापारिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय नाविकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Ten Indian sailors released from Iran after months of detention over tanker case
ईरान की जेल से 10 भारतीय नाविक रिहा, कई महीनों बाद घर लौटेंगे सभी

भारत के नौवहन महानिदेशालय ने जानकारी दी है कि ईरान में हिरासत में लिए गए 10 भारतीय नाविकों को रिहा कर दिया गया है। ये नाविक जुलाई 2025 से ईरान में बंद थे। सभी नाविक ऑयल टैंकर MV Harbor Phoenix पर सवार थे, जिसे ईरान ने जास्क पोर्ट के पास रोका था। भारत सरकार के प्रयासों के बाद मिली रिहाई महानिदेशालय के मुताबिक, लगातार कूटनीतिक बातचीत और भारत सरकार के प्रयासों के बाद सभी नाविक सुरक्षित रूप से रिहा कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि अब नाविकों को जल्द से जल्द भारत वापस लाने की तैयारी की जा रही है। जहाज को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं दी गई भारत सरकार ने फिलहाल नाविकों की गिरफ्तारी के कारणों या जहाज से जुड़े मामले में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है। जहाज ट्रैकिंग वेबसाइटों के अनुसार, MV Harbor Phoenix पलाऊ के झंडे वाला तेल उत्पाद टैंकर है। भारत ने अपनाई शांत कूटनीति रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने इस पूरे मामले में शांत और संतुलित कूटनीति अपनाई। बातचीत के दौरान भारत ने सार्वजनिक बयानबाजी से बचते हुए सीधे राजनयिक संपर्क बनाए रखा। भारत के ईरान, अमेरिका और इजरायल तीनों देशों के साथ महत्वपूर्ण संबंध हैं। ऐसे में भारत ने इस संवेदनशील मामले में संतुलित रुख बनाए रखा। खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर बढ़ी निगरानी ईरानी बल पिछले कुछ समय से खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की निगरानी और कार्रवाई बढ़ा रहे हैं। ईरान अक्सर उन जहाजों को रोकने की बात कहता रहा है, जिन पर अवैध रूप से ईंधन ले जाने का आरोप होता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में लगातार बढ़ रहा तनाव होर्मुज जलडमरूमध्य में हाल के महीनों में तनाव काफी बढ़ा है। ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर निगरानी और प्रतिबंध भी बढ़ाए हैं। यह कदम अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बाद और तेज हुआ है। दुनिया के लिए बेहद अहम है यह समुद्री रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग के जरिए मंगाता है। नाविकों की सुरक्षित वापसी पर परिवारों में राहत भारतीय नाविकों की रिहाई की खबर सामने आने के बाद उनके परिवारों में राहत का माहौल है। कई महीनों से परिवार सरकार से लगातार हस्तक्षेप की मांग कर रहे थे। अब सभी नाविकों के जल्द भारत लौटने की उम्मीद जताई जा रही है।  

surbhi मई 27, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0