वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच न तो कोई बातचीत चल रही है और न ही कोई वार्ता निर्धारित है। ट्रंप ने साथ ही दावा किया कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है, जबकि ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य अभी भी जहाजों के लिए बंद है। होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के दावे अलग ट्रंप के बयान के मुताबिक अमेरिका की नजर में होर्मुज जलडमरूमध्य नौवहन के लिए खुला है। वहीं ईरान ने इसके विपरीत रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक अमेरिका अंतरिम समझौते की शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह नहीं खोला जाएगा। ईरान की ओर से जिन शर्तों का उल्लेख किया गया है, उनमें बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाना, तेल प्रतिबंधों में राहत और सैन्य धमकियों को रोकना शामिल है। ट्रंप ने होर्मुज को लेकर फिर अपनाया सख्त रुख ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक नक्शा भी साझा किया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका के नए क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया। इस कदम को ईरान के खिलाफ उनके सख्त रुख के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच ईरान ने भी अमेरिका के रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर होती दिखाई दे रही हैं। तेल बाजार पर भी बढ़ा दबाव होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी अनिश्चितता का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 91.28 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI करीब 85.31 डॉलर प्रति बैरल रहा। यह लगातार चौथा दिन है जब तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। होर्मुज दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में से एक है। इसलिए यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने की स्थिति में वैश्विक तेल आपूर्ति और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है। बातचीत की उम्मीदों पर लगा झटका ट्रंप के ताजा बयान से अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल बातचीत की उम्मीदों को झटका लगा है। दूसरी ओर, क्षेत्रीय देश होर्मुज के जरिए तेल और अन्य जहाजों की आवाजाही को सामान्य बनाने के प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों और होर्मुज संकट पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।
अबू धाबी, एजेंसियां। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान के साथ सभी व्यापारिक गतिविधियों, वाणिज्यिक आदान-प्रदान और वित्तीय लेन-देन को अगले आदेश तक रोक दिया है। UAE के विदेश मंत्रालय ने यह फैसला क्षेत्र में बढ़ते तनाव को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए लिया है। मिसाइल घटना के बाद लिया गया फैसला UAE का यह कदम उस घटना के बाद सामने आया है, जिसमें उसके रक्षा मंत्रालय ने ईरान से दो बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने का दावा किया था। UAE के मुताबिक, एक मिसाइल उसके क्षेत्रीय जलक्षेत्र के बाहर समुद्र में गिरी, जबकि दूसरी उसके क्षेत्रीय जलक्षेत्र में गिरी। UAE ने कहा कि मिसाइलों का लक्ष्य समुद्री नौवहन था। हालांकि, ईरान ने मिसाइल हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है और UAE के आरोपों को निराधार बताया है। UAE-ईरान संबंधों में बढ़ा तनाव UAE और ईरान के बीच लंबे समय से व्यापारिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। ऐसे में सभी व्यापार और वित्तीय गतिविधियों को रोकने का फैसला दोनों देशों के संबंधों में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव के बीच यह फैसला क्षेत्रीय व्यापार और समुद्री आवाजाही पर भी असर डाल सकता है। होर्मुज संकट के बीच बढ़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में शामिल है और यहां जारी तनाव के कारण पहले से ही समुद्री यातायात प्रभावित है। UAE और ईरान के बीच व्यापारिक संबंधों के निलंबन से तेल आपूर्ति, शिपिंग और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा हो सकती हैं। फिलहाल UAE ने व्यापार और वित्तीय लेन-देन रोकने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई है। मंत्रालय के अनुसार यह रोक अगले आदेश तक जारी रहेगी।
तेहरान, एजेंसियां। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें अबू धाबी ने ईरान पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का आरोप लगाया था। ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि इस तरह के आरोप क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकते हैं। UAE ने लगाया था मिसाइल दागने का आरोप UAE के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया था कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने ईरान से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाया। UAE के अनुसार, एक मिसाइल उसके क्षेत्रीय जलक्षेत्र के बाहर गिरी, जबकि दूसरी उसके क्षेत्रीय जलक्षेत्र में पहुंची। UAE ने इस घटना के बाद ईरान के साथ सभी व्यापारिक, वाणिज्यिक और वित्तीय लेन-देन अगले आदेश तक रोक दिए। ईरान ने आरोपों को बताया निराधार ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने UAE के आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि ईरान ने UAE की ओर कोई मिसाइल नहीं दागी। तेहरान ने आरोपों को पड़ोसी देशों के बीच विश्वास बढ़ाने की कोशिशों के विपरीत बताया है। ईरान की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि ऐसे आरोप क्षेत्र में जारी तनाव को और भड़का सकते हैं। इस घटनाक्रम ने ईरान और खाड़ी देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। UAE के फैसले से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव मिसाइल विवाद के बाद UAE द्वारा ईरान के साथ व्यापार और वित्तीय गतिविधियां रोकने का फैसला दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। ईरान और UAE के बीच लंबे समय से महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंध रहे हैं, ऐसे में इस रोक का असर क्षेत्रीय कारोबार और समुद्री परिवहन पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पहले से जारी तनाव के बीच यह नया विवाद ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक शिपिंग के लिए भी चिंता बढ़ा रहा है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर है कि UAE और ईरान के बीच यह विवाद आगे कितना बढ़ता है और क्या दोनों पक्ष कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश करते हैं।
अंकारा, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी गतिरोध के बीच तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने मध्यस्थता की पेशकश की है। एर्दोगन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत के दौरान ईरान के साथ वार्ता जारी रखने और तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की। तुर्की ने शांति प्रयासों में सहयोग देने की पेशकश भी की है। ट्रंप से फोन पर हुई बातचीत तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, एर्दोगन ने ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को जारी रखना क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए जरूरी है। उन्होंने तुर्की की ओर से शांति प्रयासों में सहयोग देने की बात कही। यह पहल ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम की अवधि खत्म होने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर भी चर्चा एर्दोगन और ट्रंप की बातचीत में स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने का मुद्दा भी अहम रहा। हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। तुर्की पहले ही कह चुका है कि जलडमरूमध्य को खोलना क्षेत्रीय और वैश्विक अर्थव्यवस्था के हित में प्राथमिकता होनी चाहिए। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने भी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की है। दोनों के बीच युद्धविराम बढ़ाने और हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही बहाल करने के प्रयासों पर चर्चा हुई। ईरान के साथ मध्यस्थता में तुर्की की भूमिका तुर्की पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने वाले देशों में शामिल है। मौजूदा संकट में पाकिस्तान और कतर भी मध्यस्थता के प्रयासों में सक्रिय रहे हैं। एर्दोगन की ताजा पहल से संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय देश सैन्य टकराव को और बढ़ने से रोकने के लिए कूटनीतिक रास्ता तलाश रहे हैं। हालांकि, फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच किसी नए स्थायी समझौते की घोषणा नहीं हुई है। ईरान ने वार्ता विफल होने की स्थिति में हॉर्मुज में अपना रुख और आक्रामक करने की चेतावनी दी है, जबकि ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाए रखने की बात कही है। वैश्विक बाजार पर भी असर अमेरिका-ईरान तनाव और हॉर्मुज में घटती जहाज आवाजाही का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। बाजार में आशंका है कि यदि हॉर्मुज लंबे समय तक बाधित रहा तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
मॉस्को, एजेंसियां। रूस ने भारत और हिंद महासागर तक पहुंच बनाने के लिए एक नए रेल मार्ग की संभावनाएं तलाशने का प्रस्ताव रखा है। रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने कहा है कि महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर निर्भरता और उनसे जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए वैकल्पिक रेल मार्गों पर विचार किया जाना चाहिए। प्रस्तावित मार्ग मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के रास्ते भारत तक पहुंच बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। तुर्कमेनिस्तान और ईरान के रास्ते भारत तक पहुंच रूसी प्रस्ताव में तुर्कमेनिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान के रास्ते रेल संपर्क की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। रूस का कहना है कि भारत तक पहुंच उपलब्ध कराने वाले किसी भी व्यवहारिक विकल्प का अध्ययन किया जाना चाहिए। एक संभावित रेल गलियारा रूस को मध्य एशिया से जोड़ते हुए ईरान तक पहुंच सकता है। इसके बाद दक्षिण एशिया के रास्ते भारत और हिंद महासागर तक संपर्क विकसित करने की संभावना तलाशी जा सकती है। हालांकि, अभी यह शुरुआती प्रस्ताव है और किसी निश्चित मार्ग या निर्माण समयसीमा की घोषणा नहीं हुई है। होर्मुज और बोस्फोरस के विकल्प की तलाश रूस की इस पहल के पीछे प्रमुख वजह महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करना है। होर्मुज जलडमरूमध्य और बोस्फोरस में किसी भी तरह का व्यवधान रूस के व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। रूसी उप प्रधानमंत्री ने कहा है कि इन रणनीतिक समुद्री मार्गों से जुड़े जोखिमों को देखते हुए हिंद महासागर तक पहुंचने के लिए रेल संपर्क जैसे वैकल्पिक रास्तों की तलाश जरूरी है। भारत के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है प्रस्ताव अगर यह परियोजना भविष्य में व्यवहारिक रूप लेती है तो भारत और रूस के बीच माल परिवहन के लिए एक नया जमीनी मार्ग विकसित हो सकता है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और लॉजिस्टिक संपर्क को बढ़ावा मिलने की संभावना है। यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) की मौजूदा अवधारणा से भी जुड़ सकता है। INSTC में भारत के मुंबई से रूस के सेंट पीटर्सबर्ग तक ईरान के रास्ते संपर्क विकसित करने की योजना है, हालांकि क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण इसका पूरी क्षमता से इस्तेमाल अभी नहीं हो पाया है। अभी प्रस्ताव के शुरुआती चरण में है योजना फिलहाल रूस-भारत रेल संपर्क को लेकर कोई सीधी यात्री ट्रेन शुरू करने की तारीख, टिकट या निश्चित रेल मार्ग घोषित नहीं किया गया है। मौजूदा प्रस्ताव मुख्य रूप से व्यापारिक और माल परिवहन के लिए वैकल्पिक जमीनी संपर्क तलाशने पर केंद्रित है। यदि रूस और भारत के बीच इस तरह का रेल गलियारा विकसित होता है तो यह मध्य एशिया, ईरान और दक्षिण एशिया के बीच व्यापारिक संपर्क को भी मजबूत कर सकता है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर चल रही बातचीत में नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान से युद्ध, हमलों और लंबे समय से चले आ रहे संघर्षों में हुई मौतों और नुकसान के लिए मुआवजे की मांग करेगा। ट्रंप की इस मांग से दोनों देशों के बीच समझौते की राह और मुश्किल होती दिखाई दे रही है। ईरान ने भी रखी मुआवजे की मांग ईरान की ओर से अमेरिका और इजरायल के हमलों से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की गई है। इसके अलावा तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। इनमें प्रतिबंधों में राहत और ईरान की कुछ जब्त संपत्तियों को जारी करने जैसी मांगें शामिल हैं। ट्रंप ने ईरान की इस मांग को स्वीकार करने के बजाय जवाबी तौर पर कहा है कि ईरान को भी अमेरिकी सैनिकों की मौत और ईरान समर्थित समूहों से जुड़े पुराने हमलों के लिए मुआवजा देना चाहिए। ट्रंप ने यह मांग कई दशकों में हुई घटनाओं को आधार बनाकर रखी है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर समझौता अटका होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना अमेरिका-ईरान वार्ता का सबसे अहम मुद्दा बना हुआ है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने पर सहमति नहीं बन सकती। इसके जवाब में अमेरिका भी ईरान से कई मांगें कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां लंबे समय से जारी तनाव के कारण तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ी है। तेल की कीमतों पर भी पड़ा असर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। 11 अगस्त को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई और बाजार में यह चिंता बढ़ी कि यदि होर्मुज को लेकर जल्द समझौता नहीं हुआ तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। रॉयटर्स के मुताबिक ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि अमेरिकी क्रूड 82 डॉलर से ऊपर रहा। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन दोनों पक्षों की मुआवजे संबंधी मांगों ने समझौते को जटिल बना दिया है। आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर होने वाली बातचीत पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
तेहरान, एजेंसियां। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका के साथ जारी तनाव और बातचीत के बीच कहा है कि उनका देश कूटनीति के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं कर रहा है, लेकिन दबाव या धमकी के जरिए ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने बातचीत को ईरान के अधिकारों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए एक रास्ता बताया है। बातचीत का रास्ता खुला, लेकिन शर्तों के साथ पेजेशकियान का रुख ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के प्रयास जारी हैं। ईरानी राष्ट्रपति ने बातचीत को आत्मसमर्पण के बराबर मानने से इनकार किया है। उनका कहना है कि कूटनीति का मतलब अपने अधिकारों से पीछे हटना नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी जारी है गतिरोध ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। हालांकि ईरान ने संकेत दिया है कि केवल एक समझौता पर्याप्त नहीं होगा। तेहरान चाहता है कि अमेरिका प्रतिबंधों, सैन्य गतिविधियों और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई जैसे मुद्दों पर भी कदम उठाए। दबाव के बावजूद आत्मसमर्पण से इनकार पेजेशकियान का संदेश साफ है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन दबाव, धमकी या सैन्य कार्रवाई के जरिए किसी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा। इससे ईरान-अमेरिका वार्ता के बीच एक तरफ कूटनीतिक रास्ता खुला रहने और दूसरी तरफ तेहरान के कड़े रुख—दोनों का संकेत मिलता है। ऐसे में आने वाले दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत और अमेरिका की ओर से प्रतिबंध एवं सैन्य दबाव में संभावित बदलाव पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।
ईरान और ओमान में होर्मुज जलडमरूमध्य 60 दिनों के लिए खोलने पर बनी सहमति, शिपिंग के लिए राहत की उम्मीद तेहरान/मस्कट, एजेंसियां। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी तनाव के बीच ईरान और ओमान के बीच बड़ी सहमति बनने की खबर है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों ने जलडमरूमध्य को 60 दिनों के लिए फिर से खोलने की व्यवस्था के खाके पर सहमति बनाई है। इस समझ के तहत समुद्री यातायात को सुरक्षित तरीके से बहाल करने की दिशा में काम किया जाएगा। जहाजों की आवाजाही बहाल करने पर जोर रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्तावित व्यवस्था में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को व्यवस्थित करने की योजना है। ईरान और ओमान के बीच इस बात पर चर्चा हुई है कि जलडमरूमध्य के अलग-अलग नौवहन मार्गों का प्रबंधन किस तरह किया जाए। ताजा बातचीत में ईरान की ओर से आने वाले जहाजों और ओमान की ओर से निकलने वाले जहाजों के लिए अलग-अलग चैनल इस्तेमाल करने की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई है। 60 दिनों की अस्थायी व्यवस्था क्यों महत्वपूर्ण? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का समुद्री परिवहन होता है। इसलिए इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और ऊर्जा बाजार को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, 60 दिन की अवधि को स्थायी समाधान नहीं माना जा रहा है। इसके बाद जलडमरूमध्य के संचालन, समुद्री सेवाओं और संभावित शुल्क से जुड़े मुद्दों पर आगे बातचीत की जरूरत होगी। समझौते में अभी भी कई पेच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह खबर “होर्मुज पूरी तरह और स्थायी रूप से खुल गया” के रूप में नहीं देखी जानी चाहिए। रिपोर्टों में अभी भी कुछ मुद्दों के लंबित होने की बात सामने आई है। अमेरिका भी ऐसी किसी व्यवस्था को लेकर सतर्क है जिसमें होर्मुज के प्रमुख नौवहन मार्गों पर ईरान को अत्यधिक नियंत्रण मिल सकता है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे ऐसी व्यवस्था स्वीकार नहीं करेंगे जिसमें जलडमरूमध्य पर ईरान का एकतरफा नियंत्रण हो। वैश्विक तेल बाजार की नजर होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल होने की उम्मीद का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है। हाल के दिनों में संभावित समझौते की उम्मीद के चलते तेल बाजार में भी इसकी चर्चा रही है। हालांकि, बाजार में यह चिंता बनी हुई है कि यदि बातचीत विफल होती है तो ऊर्जा आपूर्ति पर फिर दबाव बढ़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से 60 भारतीय कार्गो जहाज सुरक्षित निकले, 3,972 नाविकों की हुई वापसी नई दिल्ली, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय जहाजों और नाविकों को सुरक्षित निकालने के अभियान में बड़ी सफलता मिली है। केंद्र सरकार के प्रयासों के तहत अब तक 60 कार्गो जहाज सुरक्षित रूप से भारत पहुंच चुके हैं, जबकि करीब 3,972 भारतीय नाविकों को भी वापस लाया गया है। समुद्री मार्ग से निकासी पर सरकार की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण भारत आने-जाने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी थी। ऐसे में सरकार ने भारतीय जहाजों और उनमें सवार नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उनकी सुरक्षित आवाजाही और निकासी के लिए कदम उठाए। ताजा जानकारी के मुताबिक, बड़ी संख्या में भारतीय कार्गो जहाज अब सुरक्षित रूप से भारत पहुंच चुके हैं। इससे देश की समुद्री आपूर्ति श्रृंखला को लेकर बनी चिंता भी कुछ कम हुई है। 3,972 नाविकों की सुरक्षित वापसी इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी है। रिपोर्ट के अनुसार 3,972 नाविकों को होर्मुज क्षेत्र से सुरक्षित वापस भारत लाया गया है। सरकार का प्रयास रहा है कि तनावपूर्ण समुद्री क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित न हो। 13 और जहाजों की निकासी की तैयारी हालांकि, सभी भारतीय हितों से जुड़े जहाज अभी सुरक्षित क्षेत्र में नहीं पहुंचे हैं। 6 अगस्त की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, भारत या भारत के लिए जाने वाले करीब 25 जहाज होर्मुज क्षेत्र में मौजूद हैं और सरकार उनमें से 13 जहाजों को जल्द सुरक्षित निकालने की तैयारी कर रही है। इनमें आठ जहाजों में खरीफ फसल के लिए महत्वपूर्ण उर्वरक और तीन में आवश्यक ऊर्जा उत्पाद हैं। सरकार की प्राथमिकता अब शेष जहाजों और नाविकों को सुरक्षित निकालने के साथ देश की ऊर्जा और कृषि आपूर्ति को बनाए रखना है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। विदेश में लापता भारतीय नाविक से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार से मामले की स्थिति और भारतीय नागरिक की तलाश के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। अदालत ने भारतीय नागरिक की सुरक्षा और उसके परिवार की चिंता को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। नाविक के लापता होने का मामला यह मामला विदेश में एक वाणिज्यिक जहाज से जुड़े भारतीय नाविक के लापता होने से संबंधित है। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया और अन्य समुद्री क्षेत्रों में जहाजों पर हमलों के कारण कई भारतीय नाविकों की सुरक्षा चिंता का विषय बनी है। जुलाई में ओमान के पास GFS Galaxy पर हमले के बाद पुणे के 30 वर्षीय भारतीय मरीन इंजीनियर हेरंब करमाकर के लापता होने की खबर सामने आई थी। बाद में उनकी मौत की पुष्टि हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र से यह स्पष्ट करने को कहा है कि लापता भारतीय नागरिक को खोजने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत की चिंता इस बात को लेकर है कि विदेश में किसी भारतीय के लापता होने की स्थिति में संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय के साथ तेजी से कार्रवाई हो। अदालत के निर्देश के बाद संबंधित सरकारी एजेंसियों से मामले की मौजूदा स्थिति और खोज अभियान से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर सरकार पहले ही निगरानी बढ़ा चुकी है। भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों की निगरानी के लिए व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया है। इसके तहत प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नाविकों की स्थिति पर नजर रखने की व्यवस्था की गई है। समुद्री मार्गों पर लगातार हमलों के कारण भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनके सुरक्षित आवागमन का मुद्दा अब सरकार और न्यायपालिका दोनों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है।
तेहरान, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से टालने के दावे के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने कहा कि क्षेत्रीय देशों के अनुरोध और संभावित समझौते के चलते हमले टाले गए हैं, लेकिन ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान और अन्य पश्चिम एशियाई देशों ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया है और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति बनने की दिशा में प्रगति हुई है। हालांकि, ईरान के सरकारी और अर्द्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावे को झूठा बताते हुए उनका मजाक उड़ाया। फार्स न्यूज एजेंसी ने टिप्पणी की कि "ट्रंप की ताकत खत्म हो गई है," जबकि मेहर न्यूज एजेंसी ने कहा कि अमेरिका अपनी धमकियों से पीछे हट रहा है और इसे उपलब्धि की तरह पेश कर रहा है। ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी वायु रक्षा मिसाइलों के सीमित भंडार के कारण वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई से बच रहा है। दूसरी ओर, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के बीच पिछले कई महीनों से जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। US-ईरान तनाव: ट्रंप के दावे पर ईरानी मीडिया का तंज, जुबानी जंग हुई तेज तेहरान, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को अस्थायी रूप से टालने के दावे के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रंप ने कहा कि क्षेत्रीय देशों के अनुरोध और संभावित समझौते के चलते हमले टाले गए हैं, लेकिन ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान और अन्य पश्चिम एशियाई देशों ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया है और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर सहमति बनने की दिशा में प्रगति हुई है। हालांकि, ईरान के सरकारी और अर्द्ध-सरकारी मीडिया ने ट्रंप के दावे को झूठा बताते हुए उनका मजाक उड़ाया। फार्स न्यूज एजेंसी ने टिप्पणी की कि "ट्रंप की ताकत खत्म हो गई है," जबकि मेहर न्यूज एजेंसी ने कहा कि अमेरिका अपनी धमकियों से पीछे हट रहा है और इसे उपलब्धि की तरह पेश कर रहा है। ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी वायु रक्षा मिसाइलों के सीमित भंडार के कारण वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई से बच रहा है। दूसरी ओर, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान के बीच पिछले कई महीनों से जारी तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है।
रियाद, एजेंसियां। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल आधिकारिक दौरे पर सऊदी अरब पहुंचे, जहां उन्होंने सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान समेत शीर्ष नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं। यह वर्ष 2026 में डोभाल का सऊदी अरब का तीसरा दौरा है, जिसे पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते हालात के बीच काफी अहम माना जा रहा है। ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों पर रही चर्चा बैठक में भारत की ऊर्जा सुरक्षा, खाड़ी क्षेत्र के समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर विस्तार से चर्चा हुई। होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में बढ़ते तनाव के बीच भारत अपने ऊर्जा आयात और समुद्री आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने पर विशेष जोर दे रहा है। भारत-सऊदी रणनीतिक साझेदारी पर फोकस दोनों पक्षों ने भारत-सऊदी रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की और रक्षा सहयोग, सुरक्षा समन्वय तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। अधिकारियों ने पश्चिम एशिया के मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य और आपसी हितों से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया। क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी यात्रा की अहमियत विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, हूती विद्रोहियों की गतिविधियों और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अजीत डोभाल की यह यात्रा भारत के रणनीतिक हितों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भारत की प्राथमिकता ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना, समुद्री मार्गों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करना है।
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने लगातार छठी रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस अभियान में लड़ाकू विमानों, ड्रोन और युद्धपोतों का इस्तेमाल करते हुए तटीय निगरानी केंद्रों, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। चाबहार पोर्ट भी बना निशाना ईरानी मीडिया के अनुसार, हमलों के दौरान भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट के मैरिटाइम कंट्रोल टावर को भी निशाना बनाया गया। बताया गया कि पिछले एक सप्ताह में इस टावर पर यह तीसरा हमला है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने कंट्रोल टावर को हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, जबकि अमेरिकी रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पर टावर की तस्वीर साझा की है। ईरान की चेतावनी, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा ईरान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जमीनी हमला किया गया तो अमेरिकी सैनिकों को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। साथ ही, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों को बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य बंद करने के लिए तैयार रहने का संकेत दिए जाने की भी खबरें हैं। उधर, कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमलों की भी जानकारी सामने आई है। तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर असर तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है। एहतियात के तौर पर भारत ने इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती फिलहाल रोक दी है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान में अमेरिका महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर रहा है। वहीं, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हालिया हमलों में 40 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा किया है। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव से पश्चिम एशिया में अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक चिंताएं और गहरा गई हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के लिए राहत भरी खबर है। रूस से कच्चा तेल लाने वाले टैंकरों का किराया हाल के हफ्तों में काफी कम हो गया है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों की आयात लागत घटने लगी है। शिपिंग दरों में इस गिरावट का सीधा फायदा भारत को सस्ते रूसी कच्चे तेल के रूप में मिल रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव इस राहत को लंबे समय तक बनाए रखने में चुनौती बन सकता है। क्यों घटा टैंकरों का किराया? जानकारों के अनुसार, वैश्विक शिपिंग बाजार में टैंकरों की उपलब्धता बढ़ने और माल ढुलाई की मांग में नरमी आने से समुद्री परिवहन लागत कम हुई है। इसका असर रूस से भारत आने वाले तेल टैंकरों पर भी पड़ा है। कम फ्रेट चार्ज के कारण भारतीय कंपनियों को पहले की तुलना में कम लागत पर रूसी कच्चा तेल मिल रहा है, जिससे रिफाइनरियों के मार्जिन में सुधार की उम्मीद है। भारत को मिलेगा आर्थिक फायदा भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है और रूस उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। टैंकर किराया कम होने से तेल आयात का कुल खर्च घटेगा, जिससे रिफाइनरियों की लागत कम होगी। यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो इसका सकारात्मक असर ईंधन कंपनियों की लागत और ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। होर्मुज तनाव बना सबसे बड़ा जोखिम विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा। यदि इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित होती है, तो शिपिंग लागत दोबारा बढ़ सकती है और भारत को मिल रही मौजूदा राहत सीमित हो सकती है। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों पर भी भारत का फोकस बना रहेगा।
तेहरान, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद अमेरिका ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान के 140 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी कार्रवाई में मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, रडार सिस्टम, कमांड सेंटर और नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी वैश्विक चिंता ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हस्तक्षेप और विदेशी जहाजों की गतिविधियों के कारण उसने सुरक्षा कारणों से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में LNG की आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका का जवाबी हमला, 140 ठिकाने बने निशाना अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ तीन दिनों तक चले अभियान में करीब 140 सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया। हमलों में वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन लॉन्चर, तटीय रडार, कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क और कई सैन्य ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया गया है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान के हमलों का जवाब देने के लिए की गई। ईरान का पलटवार, खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे। कई जगह धमाकों की खबरें सामने आईं और क्षेत्र में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। इस घटनाक्रम के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा और गहरा गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील कर रहा है।
दुबई, एजेंसियां। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक व्यापारिक जहाज और तेल टैंकर पर ड्रोन एवं प्रोजेक्टाइल हमलों की घटनाओं के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक फिर गहरा गया है। इन घटनाओं ने दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। व्यापारिक जहाज पर हमले के बाद बढ़ी सैन्य गतिविधियां रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक टैंकर अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया, जबकि इससे पहले एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ था। इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की, वहीं ईरान ने अमेरिकी हितों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। वैश्विक तेल बाजार पर असर की आशंका होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस निर्यात होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक शिपिंग लागत पर असर पड़ सकता है। बहरीन और खाड़ी देशों ने बढ़ाई सतर्कता ड्रोन हमलों के बाद बहरीन और अन्य खाड़ी देशों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। बहरीन ने अपने क्षेत्र में ड्रोन हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। वहीं समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय जहाजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। युद्धविराम पर भी मंडराया संकट अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अस्थायी युद्धविराम पर भी इस ताजा घटनाक्रम का असर पड़ सकता है। दोनों देश एक-दूसरे पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे कूटनीतिक प्रयासों को झटका लगने की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत की ओर आने वाले तेल, एलपीजी और अन्य जरूरी सामान लेकर चल रहे 11 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार कर चुके हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। 11 जहाजों ने सुरक्षित पार किया रणनीतिक समुद्री मार्ग रणधीर जायसवाल ने बताया कि 17 जून को समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने के बाद से भारत आने वाले 11 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारतीय ध्वज वाले 10 जहाज अब भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं, जबकि हाल ही में दो अन्य जहाज भी इस क्षेत्र में पहुंचे हैं। तीन भारतीय तेल टैंकरों में लाखों टन कच्चा तेल विदेश मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षित रूप से गुजरने वाले जहाजों में भारतीय ध्वज वाले तीन बड़े कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक जहाज में 2.85 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है। इसके अलावा एक विदेशी ध्वज वाला एलपीजी वाहक और एक विदेशी ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर भी इस काफिले का हिस्सा रहे। खाद लेकर आ रहे छह भारी मालवाहक पोत जायसवाल ने बताया कि छह विदेशी ध्वज वाले भारी मालवाहक जहाज भी सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इन जहाजों में खाद (फर्टिलाइजर) लदा हुआ है, जो भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बाकी भारतीय जहाजों के भी जल्द पार होने की उम्मीद विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय ध्वज वाले शेष जहाज भी जल्द ही सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लेंगे। सरकार लगातार क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भारतीय जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों के संपर्क में है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपने कच्चे तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से प्राप्त करता है। ऐसे में इस मार्ग पर जहाजों की निर्बाध आवाजाही भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई तनावपूर्ण वार्ता के एक दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ कहा कि यदि ईरान अंतरिम शांति समझौते के तहत किए गए वादों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका सख्त जवाबी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, "अगर ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता या उसका रवैया ठीक नहीं रहता, तो हम वही करेंगे जो जरूरी होगा।" उनके इस बयान को तेहरान के लिए स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। पहले दौर की वार्ता में दिखा था तनाव स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत के दौरान भी तनाव देखने को मिला। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ट्रंप की टिप्पणी पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जताई और कुछ समय के लिए वार्ता कक्ष छोड़कर बाहर चला गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे। जेडी वेंस बोले- मजबूत समझौते की नींव पड़ी शुरुआती तनाव के बावजूद वार्ता बाद में पटरी पर लौटती दिखाई दी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरानी अधिकारियों के साथ हुई बातचीत ने अंतिम समझौते के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। ईरान ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि वार्ता का दायरा उसके परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) तक बढ़ा दिया गया है। ईरान को आर्थिक राहत, प्रतिबंधों में मिली छूट अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान को सीमित आर्थिक राहत देने का फैसला किया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Treasury Department) ने 21 अगस्त तक कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी छूट प्रदान की है। इस फैसले के बाद ईरान को तेल और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात की अनुमति मिल गई है। साथ ही उसे इन निर्यातों के बदले भुगतान प्राप्त करने की भी मंजूरी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रतिबंधों से जूझ रही ईरानी अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिल सकती है। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच यह वार्ता पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आयोजित की गई। दोनों देशों ने पिछले सप्ताह हुए अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए 60 दिनों का रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई है। इस रोडमैप का उद्देश्य स्थायी समझौते की दिशा में आगे बढ़ना, क्षेत्रीय तनाव कम करना और लंबित विवादित मुद्दों का समाधान निकालना है। दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने और कूटनीतिक माध्यमों से समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है। 60 दिन की राहत, लेकिन दबाव बरकरार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा दी गई 60 दिनों की राहत ईरान को आर्थिक और कूटनीतिक अवसर प्रदान करती है, लेकिन ट्रंप की चेतावनी यह भी स्पष्ट करती है कि वाशिंगटन समझौते के उल्लंघन पर कठोर रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में आने वाले दो महीने अमेरिका-ईरान संबंधों और मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
नई दिल्ली: भारत की उर्वरक सुरक्षा और किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। यूरिया, डाय-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और सल्फर की महत्वपूर्ण खेप लेकर आ रहे चार मालवाहक जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार कर चुके हैं। क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बीच इन जहाजों के सुरक्षित गुजरने से देश में खाद की उपलब्धता को लेकर बनी आशंकाएं काफी हद तक कम हो गई हैं। ये जहाज अब भारत के विभिन्न बंदरगाहों- कृष्णापट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा की ओर बढ़ रहे हैं। जहाजों के पहुंचने के बाद उर्वरकों की खेप उतारी जाएगी, जिससे देश में उपलब्ध खाद भंडार और मजबूत होगा तथा आगामी कृषि सीजन के दौरान किसानों को पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। देश में उर्वरकों का रिकॉर्ड भंडार सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 22 जून 2026 तक भारत का कुल उर्वरक भंडार 196.08 लाख टन पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 168.67 लाख टन की तुलना में काफी अधिक है। उर्वरक 22 जून 2026 का स्टॉक (लाख टन) पिछले वर्ष का स्टॉक (लाख टन) बदलाव यूरिया (Urea) 81.44 69.21 +12.23 डीएपी (DAP) 20.92 16.00 +4.92 एनपीके (NPKs) 55.91 46.13 +9.78 एमओपी (MOP) 12.68 10.68 +2.00 एसएसपी (SSP) 25.13 26.65 -1.52 यह आंकड़े भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी किए गए हैं। उर्वरकों की बिक्री में भी तेज वृद्धि कृषि गतिविधियों में तेजी का असर उर्वरकों की बिक्री पर भी दिखाई दे रहा है। 1 मार्च 2026 से 21 जून 2026 के बीच देश में कुल 153.4 लाख टन उर्वरकों की बिक्री हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 140.2 लाख टन था। यानी एक वर्ष में बिक्री में 13.2 लाख टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कुल बिक्री में शामिल हैं: 79.1 लाख टन यूरिया 34.8 लाख टन एनपीके 19.8 लाख टन डीएपी (टीएसपी सहित) विशेषज्ञों के अनुसार, यह वृद्धि कृषि क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों और किसानों की मजबूत मांग को दर्शाती है। किसानों के हित में सरकार की रणनीति वैश्विक बाजार में आपूर्ति और कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने किसानों को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने के लिए दोहरी रणनीति अपनाई है। एक ओर देश में उर्वरकों का उत्पादन बढ़ाया गया, वहीं दूसरी ओर आवश्यकता के अनुसार विदेशों से भी खाद का आयात किया गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक: 133.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का घरेलू उत्पादन किया गया। 43.69 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का आयात किया गया। सरकार का कहना है कि पर्याप्त भंडार और सुरक्षित आपूर्ति व्यवस्था के कारण आगामी खरीफ और रबी सीजन में किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। किसानों को मिलेगी बड़ी राहत होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी अनिश्चितता के बीच उर्वरक जहाजों का सुरक्षित भारत पहुंचना कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे न केवल खाद की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि किसानों को समय पर उर्वरक मिलने से फसल उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।
नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि यदि उनके देश की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ, तो पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर जल संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने के फैसले का असर पाकिस्तान के कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है। क्या है विवाद की वजह? अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह फैसला लागू रहेगा। हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के उस बयान के बाद पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई, जिसमें संकेत दिया गया था कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के उपयोग को लेकर भारत अपनी रणनीति मजबूत कर सकता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर क्यों है असर? सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। देश की लगभग 80 प्रतिशत खेती इसी जल स्रोत पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र— पाकिस्तान की GDP में लगभग 23 प्रतिशत योगदान देता है। कुल कार्यबल के 40 प्रतिशत से अधिक लोगों को रोजगार देता है। ग्रामीण आबादी के बड़े हिस्से की आजीविका का आधार है। कपास और टेक्सटाइल उद्योग पर बढ़ी चिंता पाकिस्तान का टेक्सटाइल उद्योग उसकी अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र है। देश के कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा इसी सेक्टर से आता है और इससे अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। कपास की खेती के लिए सिंधु नदी का पानी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो इसका असर कपास उत्पादन और उससे जुड़े पूरे टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ सकता है। बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि जल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दक्षिण एशिया में संवेदनशील विषय हैं और दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार का तनाव क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे मामलों में कूटनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की भूमिका अहम मानी जाती है।
वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी सैन्य चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को बंद करने की कोशिश की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ट्रंप के इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान को ट्रंप की सीधी चेतावनी फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर तुम होर्मुज बंद करने की कोशिश करोगे, तो अपने देश तक भी वापस नहीं पहुंच पाओगे।" उनके इस बयान को ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त चेतावनियों में से एक माना जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बाधित नहीं होने देगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का सख्त रुख ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता विफल हो जाती है, तो वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य पर सीधे नियंत्रण स्थापित करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ी तो हम होर्मुज का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकते हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ऐसी स्थिति में अमेरिका वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स या टोल लगाने का कदम उठा सकता है। जहाजों पर 20 प्रतिशत तक टोल लगाने की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि ईरान समझौते के रास्ते पर नहीं आता है, तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर उनके तेल कार्गो के मूल्य का लगभग 20 प्रतिशत तक टोल लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा कदम वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। लेबनान और हिज्बुल्लाह का भी किया जिक्र ट्रंप ने ईरान से लेबनान में सक्रिय संगठन हिज्बुल्लाह पर नियंत्रण रखने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों को बढ़ाने वाली गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए और ईरान को अपने सहयोगी समूहों की गतिविधियों को नियंत्रित करना होगा। स्विट्जरलैंड में जारी है अहम वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण बातचीत चल रही है। हालांकि, ट्रंप के ताजा बयान के बाद इन वार्ताओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप की चेतावनी केवल ईरान पर दबाव बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर अमेरिकी रणनीतिक पकड़ को मजबूत करने का भी संकेत है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।