हॉर्मुज जलडमरूमध्य

Strait of Hormuz
होर्मुज में नए ड्रोन हमले के बाद वैश्विक तनाव बढ़ा, तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर मंडराया खतरा

दुबई, एजेंसियां। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक व्यापारिक जहाज और तेल टैंकर पर ड्रोन एवं प्रोजेक्टाइल हमलों की घटनाओं के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक फिर गहरा गया है। इन घटनाओं ने दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।   व्यापारिक जहाज पर हमले के बाद बढ़ी सैन्य गतिविधियां   रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक टैंकर अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया, जबकि इससे पहले एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ था। इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की, वहीं ईरान ने अमेरिकी हितों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया।   वैश्विक तेल बाजार पर असर की आशंका   होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस निर्यात होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक शिपिंग लागत पर असर पड़ सकता है।   बहरीन और खाड़ी देशों ने बढ़ाई सतर्कता   ड्रोन हमलों के बाद बहरीन और अन्य खाड़ी देशों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। बहरीन ने अपने क्षेत्र में ड्रोन हमले की निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। वहीं समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय जहाजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।   युद्धविराम पर भी मंडराया संकट   अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अस्थायी युद्धविराम पर भी इस ताजा घटनाक्रम का असर पड़ सकता है। दोनों देश एक-दूसरे पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहे हैं, जिससे कूटनीतिक प्रयासों को झटका लगने की आशंका बढ़ गई है।

abhishek singh जून 28, 2026 0
Oil and cargo ships safely transit the Strait of Hormuz carrying supplies bound for India.
अमेरिका-ईरान समझौते से भारत को राहत, तेल और LPG लेकर 11 जहाजों ने सुरक्षित पार किया होर्मुज जलडमरूमध्य

  अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत की ओर आने वाले तेल, एलपीजी और अन्य जरूरी सामान लेकर चल रहे 11 जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार कर चुके हैं। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। 11 जहाजों ने सुरक्षित पार किया रणनीतिक समुद्री मार्ग रणधीर जायसवाल ने बताया कि 17 जून को समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने के बाद से भारत आने वाले 11 जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारतीय ध्वज वाले 10 जहाज अब भी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं, जबकि हाल ही में दो अन्य जहाज भी इस क्षेत्र में पहुंचे हैं। तीन भारतीय तेल टैंकरों में लाखों टन कच्चा तेल विदेश मंत्रालय के अनुसार, सुरक्षित रूप से गुजरने वाले जहाजों में भारतीय ध्वज वाले तीन बड़े कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक जहाज में 2.85 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है। इसके अलावा एक विदेशी ध्वज वाला एलपीजी वाहक और एक विदेशी ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर भी इस काफिले का हिस्सा रहे। खाद लेकर आ रहे छह भारी मालवाहक पोत जायसवाल ने बताया कि छह विदेशी ध्वज वाले भारी मालवाहक जहाज भी सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इन जहाजों में खाद (फर्टिलाइजर) लदा हुआ है, जो भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बाकी भारतीय जहाजों के भी जल्द पार होने की उम्मीद विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय ध्वज वाले शेष जहाज भी जल्द ही सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर लेंगे। सरकार लगातार क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भारतीय जहाजों तथा नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों के संपर्क में है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। भारत अपने कच्चे तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से प्राप्त करता है। ऐसे में इस मार्ग पर जहाजों की निर्बाध आवाजाही भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
US President Donald Trump speaks after Switzerland talks, warning Iran over compliance with the interim peace agreement.
60 दिन की राहत, लेकिन सख्त चेतावनी भी; डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को किया आगाह

  वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई तनावपूर्ण वार्ता के एक दिन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ कहा कि यदि ईरान अंतरिम शांति समझौते के तहत किए गए वादों का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका सख्त जवाबी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, "अगर ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं करता या उसका रवैया ठीक नहीं रहता, तो हम वही करेंगे जो जरूरी होगा।" उनके इस बयान को तेहरान के लिए स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। पहले दौर की वार्ता में दिखा था तनाव स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत के दौरान भी तनाव देखने को मिला। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर ट्रंप की टिप्पणी पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जताई और कुछ समय के लिए वार्ता कक्ष छोड़कर बाहर चला गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे। जेडी वेंस बोले- मजबूत समझौते की नींव पड़ी शुरुआती तनाव के बावजूद वार्ता बाद में पटरी पर लौटती दिखाई दी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरानी अधिकारियों के साथ हुई बातचीत ने अंतिम समझौते के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। ईरान ने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि वार्ता का दायरा उसके परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) तक बढ़ा दिया गया है। ईरान को आर्थिक राहत, प्रतिबंधों में मिली छूट अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका ने ईरान को सीमित आर्थिक राहत देने का फैसला किया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय (US Treasury Department) ने 21 अगस्त तक कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी छूट प्रदान की है। इस फैसले के बाद ईरान को तेल और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात की अनुमति मिल गई है। साथ ही उसे इन निर्यातों के बदले भुगतान प्राप्त करने की भी मंजूरी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रतिबंधों से जूझ रही ईरानी अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिल सकती है। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच यह वार्ता पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आयोजित की गई। दोनों देशों ने पिछले सप्ताह हुए अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए 60 दिनों का रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई है। इस रोडमैप का उद्देश्य स्थायी समझौते की दिशा में आगे बढ़ना, क्षेत्रीय तनाव कम करना और लंबित विवादित मुद्दों का समाधान निकालना है। दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने और कूटनीतिक माध्यमों से समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है। 60 दिन की राहत, लेकिन दबाव बरकरार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका द्वारा दी गई 60 दिनों की राहत ईरान को आर्थिक और कूटनीतिक अवसर प्रदान करती है, लेकिन ट्रंप की चेतावनी यह भी स्पष्ट करती है कि वाशिंगटन समझौते के उल्लंघन पर कठोर रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में आने वाले दो महीने अमेरिका-ईरान संबंधों और मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
Cargo ships carrying urea, DAP and sulfur safely crossing Strait of Hormuz for India's fertilizer supply.
किसानों के लिए राहत की खबर: चार फर्टिलाइजर जहाजों ने सुरक्षित पार किया होर्मुज स्ट्रेट, देश में खाद आपूर्ति होगी मजबूत

  नई दिल्ली: भारत की उर्वरक सुरक्षा और किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। यूरिया, डाय-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और सल्फर की महत्वपूर्ण खेप लेकर आ रहे चार मालवाहक जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार कर चुके हैं। क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बीच इन जहाजों के सुरक्षित गुजरने से देश में खाद की उपलब्धता को लेकर बनी आशंकाएं काफी हद तक कम हो गई हैं। ये जहाज अब भारत के विभिन्न बंदरगाहों- कृष्णापट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा की ओर बढ़ रहे हैं। जहाजों के पहुंचने के बाद उर्वरकों की खेप उतारी जाएगी, जिससे देश में उपलब्ध खाद भंडार और मजबूत होगा तथा आगामी कृषि सीजन के दौरान किसानों को पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। देश में उर्वरकों का रिकॉर्ड भंडार सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 22 जून 2026 तक भारत का कुल उर्वरक भंडार 196.08 लाख टन पर पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के 168.67 लाख टन की तुलना में काफी अधिक है। उर्वरक 22 जून 2026 का स्टॉक (लाख टन) पिछले वर्ष का स्टॉक (लाख टन) बदलाव यूरिया (Urea) 81.44 69.21 +12.23 डीएपी (DAP) 20.92 16.00 +4.92 एनपीके (NPKs) 55.91 46.13 +9.78 एमओपी (MOP) 12.68 10.68 +2.00 एसएसपी (SSP) 25.13 26.65 -1.52 यह आंकड़े भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी किए गए हैं। उर्वरकों की बिक्री में भी तेज वृद्धि कृषि गतिविधियों में तेजी का असर उर्वरकों की बिक्री पर भी दिखाई दे रहा है। 1 मार्च 2026 से 21 जून 2026 के बीच देश में कुल 153.4 लाख टन उर्वरकों की बिक्री हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 140.2 लाख टन था। यानी एक वर्ष में बिक्री में 13.2 लाख टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कुल बिक्री में शामिल हैं: 79.1 लाख टन यूरिया 34.8 लाख टन एनपीके 19.8 लाख टन डीएपी (टीएसपी सहित) विशेषज्ञों के अनुसार, यह वृद्धि कृषि क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों और किसानों की मजबूत मांग को दर्शाती है। किसानों के हित में सरकार की रणनीति वैश्विक बाजार में आपूर्ति और कीमतों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने किसानों को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने के लिए दोहरी रणनीति अपनाई है। एक ओर देश में उर्वरकों का उत्पादन बढ़ाया गया, वहीं दूसरी ओर आवश्यकता के अनुसार विदेशों से भी खाद का आयात किया गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक: 133.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का घरेलू उत्पादन किया गया। 43.69 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का आयात किया गया। सरकार का कहना है कि पर्याप्त भंडार और सुरक्षित आपूर्ति व्यवस्था के कारण आगामी खरीफ और रबी सीजन में किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। किसानों को मिलेगी बड़ी राहत होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी अनिश्चितता के बीच उर्वरक जहाजों का सुरक्षित भारत पहुंचना कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे न केवल खाद की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि किसानों को समय पर उर्वरक मिलने से फसल उत्पादन पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।  

Deepshikha जून 23, 2026 0
Rising tensions over the Indus Waters Treaty spark concerns for Pakistan's economy and regional stability.
सिंधु जल समझौते पर बढ़ा तनाव, पाकिस्तान ने दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी; अर्थव्यवस्था पर गहराया संकट

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि यदि उनके देश की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ, तो पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर जल संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने के फैसले का असर पाकिस्तान के कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है। क्या है विवाद की वजह? अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह फैसला लागू रहेगा। हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के उस बयान के बाद पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई, जिसमें संकेत दिया गया था कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के उपयोग को लेकर भारत अपनी रणनीति मजबूत कर सकता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर क्यों है असर? सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। देश की लगभग 80 प्रतिशत खेती इसी जल स्रोत पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र— पाकिस्तान की GDP में लगभग 23 प्रतिशत योगदान देता है। कुल कार्यबल के 40 प्रतिशत से अधिक लोगों को रोजगार देता है। ग्रामीण आबादी के बड़े हिस्से की आजीविका का आधार है। कपास और टेक्सटाइल उद्योग पर बढ़ी चिंता पाकिस्तान का टेक्सटाइल उद्योग उसकी अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र है। देश के कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा इसी सेक्टर से आता है और इससे अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। कपास की खेती के लिए सिंधु नदी का पानी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो इसका असर कपास उत्पादन और उससे जुड़े पूरे टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ सकता है। बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि जल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दक्षिण एशिया में संवेदनशील विषय हैं और दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार का तनाव क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे मामलों में कूटनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की भूमिका अहम मानी जाती है।  

surbhi जून 22, 2026 0
US President Donald Trump speaks as tensions rise over Iran and the strategic Strait of Hormuz during talks in Switzerland.
'होर्मुज बंद हुआ तो अपने देश नहीं लौट पाओगे', ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा अमेरिका-ईरान तनाव

  वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी सैन्य चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को बंद करने की कोशिश की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ट्रंप के इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान को ट्रंप की सीधी चेतावनी फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर तुम होर्मुज बंद करने की कोशिश करोगे, तो अपने देश तक भी वापस नहीं पहुंच पाओगे।" उनके इस बयान को ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त चेतावनियों में से एक माना जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बाधित नहीं होने देगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का सख्त रुख ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता विफल हो जाती है, तो वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य पर सीधे नियंत्रण स्थापित करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ी तो हम होर्मुज का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकते हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ऐसी स्थिति में अमेरिका वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स या टोल लगाने का कदम उठा सकता है। जहाजों पर 20 प्रतिशत तक टोल लगाने की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि ईरान समझौते के रास्ते पर नहीं आता है, तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर उनके तेल कार्गो के मूल्य का लगभग 20 प्रतिशत तक टोल लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा कदम वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। लेबनान और हिज्बुल्लाह का भी किया जिक्र ट्रंप ने ईरान से लेबनान में सक्रिय संगठन हिज्बुल्लाह पर नियंत्रण रखने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों को बढ़ाने वाली गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए और ईरान को अपने सहयोगी समूहों की गतिविधियों को नियंत्रित करना होगा। स्विट्जरलैंड में जारी है अहम वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण बातचीत चल रही है। हालांकि, ट्रंप के ताजा बयान के बाद इन वार्ताओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप की चेतावनी केवल ईरान पर दबाव बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर अमेरिकी रणनीतिक पकड़ को मजबूत करने का भी संकेत है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
US Vice President JD Vance arrives in Switzerland for talks with Iranian officials on nuclear issues and regional security.
स्विट्जरलैंड पहुंचे जेडी वेंस, ईरान को मिल सकता है 6 अरब डॉलर का फंड; परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज पर होगी अहम वार्ता

  बर्गेनस्टॉक/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance स्विट्जरलैंड पहुंच गए हैं। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों के बीच होने वाली इस वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, जमे हुए वित्तीय संसाधनों, लेबनान युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। ईरान की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व Mohammad Bagher Ghalibaf कर रहे हैं। इसके अलावा ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi और केंद्रीय बैंक के गवर्नर भी वार्ता में शामिल हैं। ईरान को मिल सकता है 6 अरब डॉलर का फंड रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ईरान के कुछ फ्रीज किए गए फंड जारी करने पर विचार कर रहा है। शुरुआती चरण में कतर में जमा करीब 6 अरब डॉलर की राशि को मानवीय जरूरतों से जुड़ी खरीदारी के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके बदले अमेरिका चाहता है कि ईरान संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को अपने परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति दे। यही इस वार्ता के प्रमुख एजेंडों में शामिल है। ट्रंप-पेजेशकियन समझौते के बाद पहली बड़ी वार्ता यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद आयोजित की जा रही है। समझौते में 60 दिनों की वार्ता अवधि तय की गई है, जिसका उद्देश्य लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करना और स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ना है। जेडी वेंस बोले- वास्तविक ढांचा तैयार करना लक्ष्य स्विट्जरलैंड रवाना होने से पहले जेडी वेंस ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल बातचीत करना नहीं, बल्कि भविष्य की वार्ताओं के लिए एक "वास्तविक और व्यावहारिक ढांचा" तैयार करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि परमाणु मुद्दे और लेबनान युद्धविराम जैसे संवेदनशील विषयों पर प्रगति संभव है। पाकिस्तान भी निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका सूत्रों के मुताबिक, वार्ता में मध्यस्थ के रूप में Shehbaz Sharif और Asim Munir भी मौजूद हैं। वार्ता स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आयोजित होने की संभावना है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बनी रहेगी नजर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक Strait of Hormuz को लेकर भी तनाव बना हुआ है। ईरान पहले कह चुका है कि उसकी मंजूरी के बिना कोई जहाज इस मार्ग से नहीं गुजर सकता। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि जलडमरूमध्य खुला है और जहाजों की आवाजाही जारी है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा है कि 60 दिनों के युद्धविराम के दौरान और उसके बाद भी इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर कोई टोल नहीं लगाया जाएगा। इजरायल से वार्ता प्रभावित होने की आशंका अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि Benjamin Netanyahu की नीतियां और लेबनान में जारी सैन्य गतिविधियां अमेरिका-ईरान वार्ता को प्रभावित कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्विट्जरलैंड में होने वाली यह वार्ता पश्चिम एशिया की राजनीति, परमाणु कूटनीति और वैश्विक ऊर्जा बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Iran-US talks
Iran-US Talks: पहले दौर की वार्ता में क्या हुआ तय? होर्मुज से परमाणु कार्यक्रम तक 10 बड़े अपडेट

वॉशिंगटन, एजेंसियां। स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच दो दिनों तक चली उच्चस्तरीय वार्ता का पहला दौर सकारात्मक माहौल में संपन्न हुआ। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई इस बैठक में दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच हुई इस बैठक को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   इन अहम मुद्दों पर बनी सहमति वार्ता में दोनों पक्षों ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला लिया, जो पूरे समझौता प्रक्रिया की निगरानी करेगी। साथ ही परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों, निगरानी तंत्र और विवाद समाधान जैसे विषयों पर अलग-अलग कार्य समूह बनाए जाएंगे। तकनीकी स्तर की वार्ता तुरंत शुरू करने पर भी सहमति बनी है, जो पूरे सप्ताह स्विट्जरलैंड में जारी रहेगी।   होर्मुज और तेल आपूर्ति पर विशेष चर्चा बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की गलतफहमी या सैन्य टकराव से बचने के लिए सीधी संचार व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति जताई। इसके अलावा वैश्विक तेल आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहे प्रभाव पर भी विस्तार से चर्चा हुई।   लेबनान में संघर्षविराम बनाए रखने पर जोर लेबनान में युद्धविराम को प्रभावी बनाए रखने के लिए ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने का निर्णय लिया गया। इस तंत्र में लेबनान के साथ कतर और पाकिस्तान भी समन्वयक की भूमिका निभाएंगे। हालांकि इस्राइल और हिजबुल्ला इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं।   कूटनीतिक समाधान की दिशा में बढ़े कदम वार्ता में शामिल सभी पक्षों ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक संवाद जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 60 दिनों में तय रोडमैप के अनुसार प्रगति होती है, तो परमाणु समझौते, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।

abhishek singh जून 22, 2026 0
Cargo ships transit through the Strait of Hormuz as Iran imposes new shipping regulations and mandatory registration requirements.
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के नए नियम: अब बिना इंश्योरेंस, परमिट और 48 घंटे पहले सूचना के नहीं गुजर सकेंगे जहाज

  तेहरान: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर ईरान ने नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते के बाद भले ही इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को दोबारा व्यापारिक गतिविधियों के लिए खोल दिया गया हो, लेकिन अब यहां से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए अनिवार्य शर्तें लागू कर दी गई हैं। नए नियमों के तहत किसी भी जहाज को होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश से कम से कम 48 घंटे पहले अपनी यात्रा की जानकारी देनी होगी। इसके अलावा जहाजों को अग्रिम पंजीकरण, सरकारी अनुमति और पर्याप्त बीमा (इंश्योरेंस) का प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इन शर्तों का पालन किए बिना किसी भी जहाज को इस समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दुनिया की 20 फीसदी ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है इस मार्ग से होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। ऐसे में ईरान के नए नियमों का असर अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों, ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग पर लागू नई व्यवस्था से शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम में वृद्धि हो सकती है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। नई अथॉरिटी करेगी निगरानी इन नियमों को लागू करने और समुद्री गतिविधियों की निगरानी के लिए ईरान ने एक नई संस्था 'पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' (PGSA) का गठन किया है। यह संस्था अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के तहत बनाई गई है, जिसका उद्देश्य तीन महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर सुरक्षित और नियंत्रित व्यापारिक गतिविधियों को फिर से बहाल करना है। PGSA ने कहा है कि 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' पर हस्ताक्षर और संबंधित विभागों से निर्देश मिलने के बाद इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य अथॉरिटी ने जहाज संचालकों के लिए एक आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल भी जारी किया है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के इच्छुक सभी जहाजों को इस पोर्टल पर अपनी यात्रा, कार्गो और बीमा संबंधी जानकारी पहले से दर्ज करनी होगी। अधिकारियों के मुताबिक, नई व्यवस्था का उद्देश्य जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, समुद्री यातायात को व्यवस्थित करना और क्षेत्र में किसी भी संभावित सुरक्षा जोखिम को कम करना है। वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर लागू नए नियमों से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ सकती है। चूंकि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए नियमों के सख्त अनुपालन और अतिरिक्त प्रक्रियाओं का असर वैश्विक तेल बाजारों पर भी देखने को मिल सकता है। ईरान का कहना है कि ये कदम सुरक्षा कारणों से उठाए गए हैं और इनका उद्देश्य व्यापारिक जहाजों की निर्बाध एवं सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Oil storage tanks and crude oil facilities symbolize global supply disruptions caused by the Middle East conflict and energy crisis.
ईरान युद्ध से वैश्विक तेल बाजार पर गहरा असर, 115 करोड़ बैरल सप्लाई प्रभावित; रणनीतिक भंडार दशकों के निचले स्तर पर

  नई दिल्ली/वर्साय: ईरान से जुड़े क्षेत्रीय संघर्ष और मध्य-पूर्व में कई महीनों तक बनी अस्थिरता ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को गहरे संकट में डाल दिया है। एनालिटिक्स फर्म केपलर (Kpler) की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के लगभग चार महीनों के दौरान वैश्विक बाजार से करीब 115 करोड़ बैरल (1.15 बिलियन बैरल) तेल की सप्लाई प्रभावित हुई, जिसका असर आने वाले महीनों तक बना रह सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष के दौरान मध्य-पूर्व से तेल आपूर्ति में भारी बाधा आई, जिसके कारण दुनिया भर के रणनीतिक (Strategic) और वाणिज्यिक (Commercial) तेल भंडार तेजी से घटे हैं। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक भंडार से करीब 19 करोड़ बैरल तेल निकाला जा चुका है। रणनीतिक तेल भंडार कई दशकों के निचले स्तर पर रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) से जुड़े देशों के रणनीतिक तेल भंडार 1990 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। वहीं, अमेरिका का आपातकालीन तेल भंडार भी कई दशकों के निचले स्तर पर बताया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्साय में आयोजित जी7 बैठक के दौरान कहा कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता, तो अमेरिकी तेल भंडार पर गंभीर दबाव पड़ सकता था। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में भंडार कुछ ही हफ्तों में समाप्त होने की स्थिति तक पहुंच सकते थे। युद्धविराम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में राहत अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के दोबारा खुलने की खबरों के बाद वैश्विक तेल बाजार को राहत मिली है। युद्ध के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो अब घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में गिरावट के बावजूद सप्लाई पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा। सप्लाई चेन बहाली में लग सकते हैं कई महीने ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने के बाद भी तेल आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं हो सकती। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, टैंकरों की उपलब्धता, उत्पादन बढ़ाने और लॉजिस्टिक नेटवर्क को फिर से पटरी पर लाने में कई महीने लग सकते हैं। RBC कैपिटल मार्केट्स की ऊर्जा विशेषज्ञ हेलिमा क्रॉफ्ट का कहना है कि बाजार जरूरत से ज्यादा आशावादी नजर आ रहा है। उनके अनुसार, संकट पूरी तरह समाप्त मान लेना जल्दबाजी होगी क्योंकि तेल आपूर्ति तंत्र के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं। OPEC उत्पादन बढ़ा सकता है इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल एडवाइजर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जे हैटफील्ड का मानना है कि आर्थिक दबाव का सामना कर रहे कई OPEC सदस्य देश उत्पादन बढ़ाने के पक्ष में हो सकते हैं। इससे बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आएगी और कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस रणनीतिकार विकास द्विवेदी का कहना है कि युद्ध से पहले दुनिया के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद था, जिससे बाजार पूरी तरह अस्थिर नहीं हुआ। उनका मानना है कि युद्ध के दौरान गायब हुई 115 करोड़ बैरल तेल आपूर्ति की भरपाई आसान नहीं होगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि दुनिया मांग से प्रतिदिन 50 लाख बैरल अधिक तेल का उत्पादन भी करे, तब भी इस कमी को पूरा करने में लगभग एक वर्ष लग सकता है। दुनिया में रोजाना 10.3 करोड़ बैरल तेल उत्पादन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) और अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 10.3 करोड़ बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा अकेले देता है। इसके बाद सऊदी अरब, रूस, कनाडा और इराक का स्थान है। ये पांच देश मिलकर दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रमुख उत्पादक देशों में किसी भी प्रकार का युद्ध, प्रतिबंध या उत्पादन संकट सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित करता है।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Iranian Parliament Speaker Mohammad Bagher Ghalibaf speaks about possible toll charges in the Strait of Hormuz after the US-Iran agreement.
ना-ना करते ट्रंप वही कर बैठे! 60 दिन बाद होर्मुज में टोल वसूलेगा ईरान? डील के बाद दुनिया की बढ़ी चिंता

  अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते (MoU) के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक व्यापारिक जहाजों को बिना किसी शुल्क के इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है, लेकिन ईरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इसके बाद जहाजों से टोल (शुल्क) वसूला जा सकता है। ईरान ने क्या कहा? ईरानी संसद के स्पीकर और अमेरिका के साथ बातचीत में प्रमुख भूमिका निभाने वाले मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब युद्ध से पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा। उन्होंने कहा, "होर्मुज पर ईरान का संप्रभु अधिकार है और वहां दी जाने वाली सेवाओं के बदले शुल्क लेना स्वाभाविक है।" इस बयान को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि ईरान भविष्य में इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से राजस्व कमाने की औपचारिक व्यवस्था लागू कर सकता है। समझौते में क्या प्रावधान है? अमेरिका-ईरान समझौते के पांचवें अनुच्छेद के अनुसार: • अगले 60 दिनों तक व्यापारिक जहाजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। • ईरान समुद्री बारूदी सुरंगों और अन्य बाधाओं को हटाकर जहाजों की आवाजाही सामान्य करेगा। • 30 दिनों के भीतर युद्ध के दौरान प्रभावित समुद्री मार्गों को पूरी तरह बहाल करने का लक्ष्य रखा गया है। समझौते में 60 दिनों के बाद शुल्क व्यवस्था पर कोई स्थायी प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। तेल टैंकरों से अरबों डॉलर की कमाई की उम्मीद विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान प्रति बैरल तेल पर लगभग 1 डॉलर के बराबर शुल्क भी लगाता है, तो उसे सालाना अरबों डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति गुजरती है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादकों का अधिकांश निर्यात इसी मार्ग पर निर्भर करता है। ट्रंप के रुख में आया बदलाव ईरान लंबे समय से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की बात करता रहा है। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस विचार का विरोध करते रहे थे और उन्होंने ईरान तथा ओमान दोनों को चेतावनी भी दी थी। लेकिन अब हुए समझौते में 60 दिनों बाद शुल्क लगाने पर कोई रोक नहीं होने से माना जा रहा है कि अमेरिका ने अप्रत्यक्ष रूप से ईरान के लिए यह विकल्प खुला छोड़ दिया है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
US President Donald Trump and Iranian President Masoud Pezeshkian after signing a 14-point peace agreement on Hormuz Strait and sanctions relief.
ईरान-अमेरिका के बीच 14 सूत्रीय समझौते पर लगी मुहर, ट्रंप और पेजेशकियन ने किए हस्ताक्षर

  अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। समझौते के लागू होने के साथ ही दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव कम करने, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और आर्थिक एवं परमाणु मुद्दों पर व्यापक बातचीत शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। अमेरिकी प्रशासन ने इस दस्तावेज को ‘संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामी गणराज्य ईरान के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ के रूप में जारी किया है। समझौते का उद्देश्य 60 दिनों के विस्तारित युद्धविराम को लागू करना और लंबित मुद्दों पर अंतिम समझौते की रूपरेखा तैयार करना है। होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत खोलने पर सहमति समझौते का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी समुद्री मार्ग से होता है। समझौते के तहत ईरान ने 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित और निर्बाध मार्ग देने पर सहमति जताई है। प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत का रोडमैप अमेरिका ने ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके तहत ईरानी तेल निर्यात, बैंकिंग, बीमा और परिवहन सेवाओं को तत्काल राहत देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही अमेरिका ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों और धनराशि को भी जारी करने पर सहमत हुआ है। परमाणु कार्यक्रम पर आगे होगी विस्तृत बातचीत समझौते में ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। दोनों देशों ने संवर्धित यूरेनियम भंडार, यूरेनियम संवर्धन और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अन्य मुद्दों पर अंतिम समझौते के तहत विस्तृत चर्चा करने पर सहमति जताई है। 14 सूत्रीय समझौते की प्रमुख बातें सभी सैन्य अभियानों और युद्ध गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से रोकना। एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना। 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में काम करना। अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू करना। होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित और मुफ्त आवाजाही सुनिश्चित करना। ईरान के लिए 300 अरब डॉलर की आर्थिक पुनर्निर्माण योजना तैयार करना। संयुक्त राष्ट्र और अमेरिकी प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का रोडमैप बनाना। ईरान द्वारा परमाणु हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता दोहराना। अंतिम समझौते तक दोनों देशों द्वारा यथास्थिति बनाए रखना। ईरानी तेल निर्यात, बैंकिंग और बीमा सेवाओं को तत्काल राहत देना। ईरान की जमी हुई संपत्तियों और धनराशि को जारी करना। समझौते के अनुपालन के लिए विशेष निगरानी तंत्र स्थापित करना। अंतिम समझौते के लिए औपचारिक वार्ता शुरू करना। अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के माध्यम से वैधता प्रदान करना। पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा मोड़ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता तय शर्तों के अनुसार लागू होता है, तो इससे न केवल अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा टकराव समाप्त होगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की भू-राजनीति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद भी बढ़ गई है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Bihar constable recruitment scam
बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा, दूसरे के नाम पर परीक्षा देने पहुंचे दो युवक गिरफ्तार

सिवान, एजेंसियां। बिहार में सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। सिवान जिले में केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) द्वारा आयोजित परीक्षा के दौरान दो फर्जी अभ्यर्थियों को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपी दूसरे अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचे थे। पुलिस ने उनके पास से फर्जी दस्तावेज, एक ही परीक्षा के दो अलग-अलग प्रवेश पत्र और अन्य संदिग्ध कागजात बरामद किए हैं।   दो परीक्षा केंद्रों से हुई गिरफ्तारी यह कार्रवाई 17 जून को प्रथम और द्वितीय पाली की परीक्षा के दौरान सरस्वती शिशु मंदिर परीक्षा केंद्र और दाउद मेमोरियल उर्दू गर्ल्स हाई स्कूल परीक्षा केंद्र पर की गई। परीक्षा केंद्रों पर तैनात दंडाधिकारी और पुलिस टीम ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर दोनों अभ्यर्थियों को पकड़ लिया। पूछताछ में उन्होंने अपनी वास्तविक पहचान बताई और परीक्षा में फर्जी तरीके से शामिल होने की बात स्वीकार की।   पहले भी दे चुके थे परीक्षा गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पटना जिले के पीरपुरा थाना क्षेत्र निवासी सियाराम कुमार और जहानाबाद जिले के मखदूमपुर थाना क्षेत्र निवासी गौतम कुमार के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी 14 जून को मोतिहारी और गोपालगंज में आयोजित इसी भर्ती परीक्षा में भी शामिल हो चुके थे। इससे पुलिस को संगठित परीक्षा गिरोह की आशंका है।   नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस तलाशी के दौरान दोनों के पास से एक ही परीक्षा के दो अलग-अलग प्रवेश पत्र मिले, जिनमें जन्मतिथि अलग-अलग दर्ज थी। सभी संदिग्ध दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं। सिवान पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब इस फर्जीवाड़े से जुड़े पूरे नेटवर्क की तलाश में जुटी है।   सिवान के एसपी पुरन कुमार झा ने कहा कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखना पुलिस की प्राथमिकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि परीक्षा में किसी भी तरह की अनियमितता या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबर 9031683607 या निकटतम थाने को दें।

anjali kumari जून 18, 2026 0
Donald Trump and Masoud Pezeshkian reach a digital peace agreement to reopen the Strait of Hormuz and ease Middle East tensions.
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर लगी मुहर, ट्रंप बोले- ‘It's Signed!’

  अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से जारी तनाव के बाद आखिरकार शांति समझौते पर मुहर लग गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने युद्ध समाप्त करने, क्षेत्रीय तनाव कम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए एक डिजिटल मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी उत्साहित नजर आए। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या डील साइन हो गई है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "It's Signed!" डिजिटल हस्ताक्षर से लागू हुआ समझौता अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, बुधवार (17 जून) को राष्ट्रपति ट्रंप और मसूद पेजेशकियन ने डिजिटल माध्यम से समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससे पहले रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर कालिबाफ भी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर चुके थे। हस्ताक्षर के तुरंत बाद यह समझौता प्रभावी हो गया, जिसके कारण इस सप्ताह स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित औपचारिक हस्ताक्षर समारोह को रद्द कर दिया गया। होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोलने पर बनी सहमति समझौते के तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने पर सहमत हुआ है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है और दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने और तेल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ईरान को मिलेगी प्रतिबंधों में राहत समझौते के तहत ईरान पर लगाए गए कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देने और उसके तेल निर्यात को फिर से शुरू करने का रास्ता भी खुल सकता है। माना जा रहा है कि इससे ईरानी अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिलेगी। वर्साय पैलेस में हार्ड कॉपी पर भी किए हस्ताक्षर अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार रात फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित एक डिनर कार्यक्रम के दौरान समझौते की हार्ड कॉपी पर भी आधिकारिक हस्ताक्षर किए। उस समय फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद थे। व्हाइट हाउस ने इस साइनिंग का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें ट्रंप डिनर टेबल पर दस्तावेज पर हस्ताक्षर करते नजर आ रहे हैं। कई महीनों की तनातनी और सैन्य तनाव के बाद हुआ यह समझौता अमेरिका और ईरान के रिश्तों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही पश्चिम एशिया में शांति और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता की नई उम्मीद भी जगी है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and US President Donald Trump hold bilateral talks during the G7 Summit in France on maritime security and strategic cooperation.
होर्मुज से लेकर ट्रेड तक, पीएम मोदी और ट्रंप की बैठक में कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। करीब 16 महीनों बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने की यह पहली मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेता फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में मिले थे। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की स्थिति, वैश्विक स्थिरता, समुद्री सुरक्षा, व्यापार और भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत बनाने जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। होर्मुज स्ट्रेट खुला रहना दुनिया के लिए जरूरी : पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसे हर हाल में खुला और सुरक्षित बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में लाखों नाविक समुद्री मार्गों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भी शामिल हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण : ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की बातों का समर्थन करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि भारत एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है और मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता बनाए रखने में उसकी भूमिका बेहद अहम है। आर्थिक और व्यापारिक सहयोग पर भी हुई चर्चा बैठक में दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका में भारतीय निवेश और भारतीय कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। व्यक्तिगत संबंधों का भी किया जिक्र राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मोदी लंबे समय से उनके मित्र रहे हैं और उनसे मुलाकात हमेशा सुखद अनुभव रहती है। जी7 सम्मेलन के दौरान हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर भारत और अमेरिका की बढ़ती साझेदारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
A commercial oil tanker passes through the Strait of Hormuz amid rising tensions between the United States and Iran.
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट का दावा- होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ बड़ी चुनौती, परमाणु हथियार से भी ज्यादा चिंता का विषय

  वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते से पहले अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की एक नई रिपोर्ट ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अब किसी भी समय दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), में समुद्री यातायात को बाधित करने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की यह क्षमता केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति के लिए भी बड़ा जोखिम बन सकती है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में कुछ खुफिया सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि होर्मुज पर ईरान का प्रभाव अमेरिका के लिए परमाणु हथियारों से भी बड़ी रणनीतिक चुनौती बनकर उभरा है। दुनिया के 20 फीसदी तेल व्यापार का प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन इसी समुद्री रास्ते से होता है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के पास अब भी बड़ी संख्या में मिसाइलें, ड्रोन, मिसाइल लॉन्चर और तेज गति वाली नौकाएं मौजूद हैं, जिनकी मदद से वह इस समुद्री क्षेत्र में दबाव बनाने की क्षमता रखता है। अमेरिका-ईरान समझौते पर टिकी नजरें अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया है कि समझौते के प्रमुख बिंदुओं में ईरान का परमाणु हथियार नहीं रखने का वादा और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना शामिल है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह आने वाले दिनों में समझौते का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक कर सकते हैं। अभी तक इस समझौते के आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। विशेषज्ञों की चिंता बरकरार भले ही अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ रही हो, लेकिन ऊर्जा विशेषज्ञों और सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की रणनीतिक पकड़ भविष्य में भी वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए अनिश्चितता का बड़ा कारण बनी रह सकती है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Oil tankers pass through the Strait of Hormuz as the US considers a naval security plan for commercial shipping.
होर्मुज से गुजरने के लिए 'VIP सुरक्षा पास' की तैयारी! जहाजों को अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा देने पर विचार कर रहा ट्रंप प्रशासन

  ईरान और अमेरिका के बीच जारी शांति वार्ता के बीच ट्रंप प्रशासन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने के लिए नए विकल्पों पर विचार कर रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस एक ऐसी योजना पर चर्चा कर रहा है, जिसके तहत जहाज मालिक अतिरिक्त शुल्क देकर अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और प्राथमिकता के साथ गुजर सकेंगे। अधिकारियों के बीच इस प्रस्ताव को अनौपचारिक रूप से 'VIP पास योजना' कहा जा रहा है। अतिरिक्त शुल्क के बदले अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ Susie Wiles ने अधिकारियों को ऐसे उपाय खोजने का निर्देश दिया है, जिससे जहाज मालिक और बीमा कंपनियां दोबारा होर्मुज मार्ग का उपयोग करने के लिए तैयार हो सकें। एक अधिकारी के मुताबिक, वर्तमान परिस्थितियों में होर्मुज से गुजरने वाली कई समुद्री यात्राएं बीमा जोखिम के दायरे में हैं। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जहाजों को दोबारा बीमा कवरेज कैसे उपलब्ध कराया जाए। दुनिया के 20% तेल व्यापार की जीवनरेखा है होर्मुज Strait of Hormuz वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का परिवहन इसी मार्ग से होता था। ईरान द्वारा अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में जहाजों पर हमले किए जाने के बाद इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही लगभग ठप हो गई थी। इसका असर वैश्विक तेल बाजार और ईंधन कीमतों पर भी देखने को मिला। हाल के हफ्तों में शांति वार्ता शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें घटकर करीब 75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची हैं, लेकिन वे अब भी संघर्ष से पहले के स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। 'VIP पास' से प्राथमिकता के साथ सुरक्षित आवाजाही सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित योजना के तहत जहाज मालिक अतिरिक्त शुल्क देकर अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में होर्मुज से गुजर सकेंगे। एक अधिकारी ने कहा, "यह कुछ वैसा होगा जैसे जहाज के लिए एक 'VIP पास' जारी कर दिया जाए, जिससे उसे सुरक्षित और प्राथमिकता के साथ मार्ग उपलब्ध कराया जा सके।" विश्लेषकों का मानना है कि इस योजना का उद्देश्य यूरोपीय देशों को भी खाड़ी क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा में अधिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि पूरा बोझ केवल अमेरिका पर न रहे। ट्रंप पहले भी टोल वसूली की कर चुके हैं वकालत अप्रैल में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क अमेरिका को लेना चाहिए, ईरान को नहीं। उन्होंने कहा था, "हम विजेता हैं, फिर शुल्क हम क्यों न लें?" रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अमेरिकी रक्षा उत्पादन अधिनियम (Defense Production Act) के तहत अमेरिकी बीमा कंपनियों को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को बीमा कवरेज देने के लिए बाध्य करने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है। 20 अरब डॉलर के बीमा सुरक्षा प्रस्ताव में नहीं दिखी रुचि मार्च में ट्रंप प्रशासन ने जहाज मालिकों को करीब 20 अरब डॉलर तक की राजनीतिक जोखिम बीमा सुरक्षा देने की पेशकश की थी। ईरानी मिसाइलों, ड्रोन और तेज गति वाली नौकाओं से हमले की आशंका को देखते हुए अधिकांश शिपिंग कंपनियों ने इस प्रस्ताव में दिलचस्पी नहीं दिखाई। शांति वार्ता जारी, लेकिन जहाज मालिकों की चिंता बरकरार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए वार्ता जारी है, लेकिन शिपिंग कंपनियां और बीमा उद्योग अभी भी सतर्क हैं। उन्हें आशंका है कि यदि शांति समझौता विफल रहा, तो होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा संकट और समुद्री सुरक्षा तनाव का केंद्र बन सकता है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन की प्रस्तावित 'VIP सुरक्षा पास' योजना केवल समुद्री सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को स्थिर रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi addresses the G7 Summit in France and raises concerns over Indian sailors' deaths and maritime security.
G7 में पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने उठाया भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा, बोले- समुद्री मार्गों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना दुनिया की जिम्मेदारी

  एवियन (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाते हुए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखना और नाविकों की रक्षा करना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के उच्चस्तरीय सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की। यह सत्र ‘नई साझेदारियां विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करने’ विषय पर आयोजित किया गया था, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता मौजूद थे। पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों का स्वागत, संघर्ष पर जताई चिंता प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "हम पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं, लेकिन इस संघर्ष के कारण क्षेत्र के हमारे मित्र देशों में जान-माल का नुकसान हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री व्यापार में आई बाधाओं का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।" उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं में कई भारतीय नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है और ऐसे में समुद्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत है। भारतीय नाविकों की मौत का किया उल्लेख प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "कई भारतीय नागरिकों की मृत्यु हुई है। वैश्विक समुद्री व्यापार के जरिए देशों को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और नाविक बिना किसी भय के अपना काम कर सकें।" जी7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीब 16 महीनों बाद मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया। ओमान की खाड़ी की घटना के बाद बढ़ी चिंता प्रधानमंत्री का यह बयान ओमान की खाड़ी में हुई उस घटना के बाद आया है, जिसमें तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी। यह हादसा उस समय हुआ जब अमेरिकी बलों ने पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर 'सेटेबेलो' के खिलाफ कार्रवाई की थी। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने आरोप लगाया था कि यह टैंकर ईरान से तेल लेकर जा रहा था और अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। जहाज पर कुल 28 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 24 भारतीय, दो पाकिस्तानी, एक यूक्रेनी और एक रूसी नागरिक शामिल थे। कार्रवाई के दौरान आदित्य शर्मा, पटनाला सुरेश और शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई थी। वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से जोड़ता है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा वाणिज्यिक माल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजरानी गतिविधियों पर खतरा बढ़ गया है। हाल के दिनों में भारतीय चालक दल वाले कई वाणिज्यिक जहाज अलग-अलग घटनाओं की चपेट में आ चुके हैं, जिससे नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं। 'दाता-प्राप्तकर्ता' मॉडल से आगे बढ़ने की जरूरत: मोदी जी7 के आउटरीच सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक सहयोग अब पारंपरिक 'दाता और प्राप्तकर्ता' मॉडल से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशों के बीच संबंध समानता, साझी जिम्मेदारी और आपसी विश्वास पर आधारित होने चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत हमेशा 'ह्यूमैनिटी फर्स्ट' यानी 'मानवता सर्वोपरि' के सिद्धांत पर चला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन, ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस, मिशन लाइफ और 'एक पेड़ मां के नाम' जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर टिकाऊ और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। 'वसुधैव कुटुंबकम' भारत की विदेश नीति का आधार प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की वैश्विक साझेदारी की सोच 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन से प्रेरित है, जिसका अर्थ है कि पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और सामूहिक विकास के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत की जी7 में 13वीं भागीदारी जी7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं- अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा- का समूह है। यूरोपीय संघ भी इसकी बैठकों में भाग लेता है। भारत इसका सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल होता रहा है। इस बार भारत की जी7 में साझेदार देश के रूप में 13वीं भागीदारी रही, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सातवीं बार इस मंच पर पहुंचे हैं।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi welcomes the US-Iran peace agreement and reopening of the Strait of Hormuz to restore stability in West Asia.
ईरान-अमेरिका शांति समझौते पर क्या बोले पीएम मोदी? पश्चिम एशिया में स्थिरता की जताई उम्मीद

  नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों से जारी संघर्ष को समाप्त करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर बनी सहमति का भारत ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उम्मीद जताई कि इस पहल से पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और कई देशों में लोगों की जान भी गई है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता है और उम्मीद करता है कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति, स्थिरता, व्यापार और आवाजाही की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। उन्होंने यह भी कहा कि शेष विवादित मुद्दों पर बातचीत के माध्यम से एक टिकाऊ और व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ना आवश्यक है। 19 जून को हो सकते हैं औपचारिक हस्ताक्षर मध्यस्थ देशों और अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। बताया जा रहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर आगे अलग दौर की बातचीत होगी। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की घोषणा की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते पर सहमति की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जलडमरूमध्य को तत्काल प्रभाव से खोला जाएगा। अमेरिका पहले भी संकेत दे चुका था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पुनः खुलने के साथ ईरान पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है, ताकि वह तेल निर्यात बढ़ाकर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सके। ईरान ने कहा- औपचारिक हस्ताक्षर के बाद ही होगा अमल ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने समझौते पर सहमति की पुष्टि करते हुए कहा कि तेहरान औपचारिक हस्ताक्षर से पहले समझौते को लागू नहीं करेगा। उनके अनुसार, कतर की मध्यस्थता में 14 घंटे से अधिक चली बातचीत के बाद दोनों पक्ष इस सहमति तक पहुंचे। ईरानी सरकारी मीडिया ने इस घटनाक्रम को अमेरिका के साथ युद्ध समाप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

Deepshikha जून 16, 2026 0
Indian-flagged LNG vessel Disha carrying 62,370 tonnes of LNG safely crosses the Strait of Hormuz towards Dahej port.
62370 टन LNG लेकर भारत आ रहा जहाज ‘दिशा’, तीन महीने बाद होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षित पार

  नई दिल्ली: भारतीय ध्वज वाला LNG जहाज ‘दिशा’ 62,370 टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लेकर सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। यह जहाज तीन महीने से अधिक समय बाद युद्ध प्रभावित इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र से सुरक्षित निकलने वाला पहला बड़ा जहाज माना जा रहा है। जहाज के सुरक्षित पार होने को भारत की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। दहेज बंदरगाह पर 18 जून को पहुंचने की संभावना पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि जहाज ‘दिशा’ 62,370 टन LNG लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है और इसके 18 जून के आसपास दहेज बंदरगाह पहुंचने की संभावना है। उन्होंने कहा कि यह जहाज भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड (SCI) के नेतृत्व वाले समूह द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है। तीन महीने बाद पहली सुरक्षित निकासी जानकारी के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में लंबे समय से जारी तनाव के बीच यह पहला बड़ा जहाज है जो इस मार्ग से सुरक्षित बाहर निकल पाया है। इससे पहले इस क्षेत्र में सुरक्षा जोखिमों के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हो रहा था। नाविकों की सुरक्षा पर लगातार निगरानी नौवहन महानिदेशालय ने बताया कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों और पोत परिवहन कंपनियों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, समुद्री मार्गों पर स्थिति की निगरानी के लिए एक नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय है। हजारों कॉल और ईमेल का निपटारा अधिकारियों ने बताया कि नियंत्रण कक्ष में पिछले 96 घंटों के दौरान 12,737 कॉल और 28,299 से अधिक ईमेल का निपटारा किया गया है। इस दौरान नाविकों और उनके परिवारों से 406 कॉल और 784 ईमेल प्राप्त हुए। 3,500 से अधिक नाविकों की सुरक्षित वापसी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 3,587 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा चुकी है। इसमें पिछले 96 घंटों में 50 नाविकों की वापसी भी शामिल है। बंदरगाहों पर परिचालन सामान्य मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि देशभर में बंदरगाहों का संचालन सामान्य रूप से जारी है और कहीं भी जाम या व्यवधान की स्थिति की सूचना नहीं है। ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम कदम विशेषज्ञों का मानना है कि LNG जहाज ‘दिशा’ की सुरक्षित वापसी भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि कठिन भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद समुद्री व्यापारिक गतिविधियां धीरे-धीरे स्थिर हो रही हैं।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
World leaders react to the proposed US-Iran peace agreement and reopening of the Strait of Hormuz amid hopes of easing Middle East tensions.
अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर दुनिया ने जताई खुशी, कतर से फ्रांस तक नेताओं ने किया स्वागत

  वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते की घोषणा के बाद दुनिया भर के नेताओं ने इसका स्वागत किया है। कतर, तुर्किये, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस समेत कई देशों ने इसे पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करने, होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को दोबारा खोलने और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति समझौते के दावे और पाकिस्तान की ओर से 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ईरान ने भी संकेत दिया है कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। कतर ने कहा- स्थायी शांति की दिशा में अहम पहल Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे की वार्ताएं सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में आगे बढ़ेंगी। एर्दोआन बोले- दुनिया लंबे समय से इस खबर का इंतजार कर रही थी Recep Tayyip Erdoğan ने कहा कि पूरी दुनिया लंबे समय से इस तरह की खबर का इंतजार कर रही थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा का मार्ग प्रशस्त करेगा। एर्दोआन ने सभी पक्षों से संयम बरतने और उकसावे वाली गतिविधियों से बचने की अपील की। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान, कतर और सऊदी अरब के कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की। ब्रिटेन ने बताया युद्ध समाप्ति की दिशा में बड़ी उपलब्धि Keir Starmer ने इस समझौते को युद्ध समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। स्टार्मर ने यह भी कहा कि समझौते को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए और ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाने की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता बनी रहनी चाहिए। जर्मनी ने कहा- वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत Friedrich Merz ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला कदम साबित हो सकता है। उन्होंने इसे दूरगामी प्रभाव वाला कूटनीतिक समाधान बताते हुए कहा कि इससे ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लौट सकती है और व्यापारिक अनिश्चितताएं कम हो सकती हैं। फ्रांस ने होर्मुज जलडमरूमध्य तत्काल खोलने की मांग की Emmanuel Macron ने कहा कि समझौते का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम होर्मुज जलडमरूमध्य का तत्काल और बिना किसी शर्त के दोबारा खुलना होना चाहिए। मैक्रों ने कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को सामान्य बनाने के प्रयासों में सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के बाद ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों सहित क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यापक मुद्दों पर भी बातचीत आगे बढ़नी चाहिए। ट्रंप ने किया समझौता पूरा होने का दावा Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता पूरा हो चुका है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अनुमति दी जा रही है। ट्रंप ने कहा, "दुनिया के जहाज अब अपने इंजन शुरू करें, तेल का प्रवाह जारी रहने दें।" पाकिस्तान की मध्यस्थता की चर्चा Shehbaz Sharif ने दावा किया कि लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्ष समझौते पर सहमत हुए हैं और 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि समझौते को अंतिम रूप देने में कतर, सऊदी अरब और तुर्किये की भूमिका अहम रही है। वैश्विक बाजार की नजरें 19 जून पर यदि प्रस्तावित समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होते हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुलता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, ऊर्जा कीमतों और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब 19 जून को होने वाली संभावित औपचारिक प्रक्रिया और उसके बाद की घटनाओं पर नजर बनाए हुए है।  

Deepshikha जून 15, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0