India-UK Relations: ब्रिटेन में संभावित राजनीतिक बदलाव के बावजूद भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के संबंध मजबूत बने रहेंगे। दक्षिण एशिया के लिए ब्रिटेन के ट्रेड कमिश्नर और भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के मुख्य वार्ताकार हरजिंदर कंग ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी किसी एक सरकार या प्रधानमंत्री पर निर्भर नहीं है, बल्कि साझा इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक हितों पर आधारित है। नेतृत्व बदलने से नहीं बदलेगा भारत-यूके संबंध न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में हरजिंदर कंग ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। इसके अलावा लोकतांत्रिक व्यवस्था, कानूनी ढांचा, अंग्रेजी भाषा और ब्रिटेन में रह रहे बड़े भारतीय समुदाय ने इन संबंधों को और मजबूत बनाया है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन होने पर भी भारत के साथ रणनीतिक और व्यापारिक साझेदारी प्रभावित होने की संभावना नहीं है। एंडी बर्नहैम को बताया भारत का समर्थक हरजिंदर कंग ने कहा कि ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम, जिन्हें भविष्य में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री पद का संभावित दावेदार माना जा रहा है, भारत के साथ मजबूत संबंधों के पक्षधर हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में एंडी बर्नहैम के साथ उनकी बातचीत हुई थी। बर्नहैम भारत का दौरा कर व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के इच्छुक थे। उनका लक्ष्य ग्रेटर मैनचेस्टर और भारत के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देना है। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था पर ब्रिटेन की नजर ट्रेड कमिश्नर ने कहा कि ब्रिटेन के प्रमुख राजनीतिक दल भारत को भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक शक्तियों में से एक मानते हैं। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। ऐसे में ब्रिटेन भारत के साथ अपने व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि चाहे कीर स्टार्मर हों या ऋषि सुनक, सभी नेताओं की सोच भारत के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को लेकर सकारात्मक रही है। वर्षों की बातचीत के बाद हुआ FTA हरजिंदर कंग ने स्पष्ट किया कि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किसी वैश्विक व्यापारिक तनाव या अमेरिकी टैरिफ के कारण नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह समझौता कई वर्षों तक चली विस्तृत बातचीत और आपसी सहमति का परिणाम है। उनके मुताबिक, जब दोनों देशों को लगा कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, तब इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। आइसक्रीम खाते हुए बनी अंतिम सहमति कंग ने बातचीत का एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और उस समय के ब्रिटिश ट्रेड सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स ने लंदन के एक पार्क में टहलते हुए और आइसक्रीम खाते-खाते अंतिम मुद्दों पर सहमति बनाई। इसके बाद दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर समझौते को अंतिम रूप दिया। CETA लागू होने से दोनों देशों को होंगे बड़े फायदे भारत और ब्रिटेन के बीच कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) 15 जुलाई से लागू हो चुका है। इस समझौते पर जुलाई 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किए गए थे।
High Protein Soya Paratha Recipe: अगर आप वजन घटाने के दौरान ऐसा नाश्ता या मील ढूंढ रहे हैं जो लंबे समय तक पेट भरा रखे और प्रोटीन की जरूरत पूरी करने में मदद करे, तो हाई-प्रोटीन सोया पराठा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। सही मात्रा और संतुलित डाइट के साथ इसे वेट लॉस प्लान में शामिल किया जा सकता है। वेट लॉस डाइट में क्यों शामिल करें हाई-प्रोटीन सोया पराठा? वजन घटाने के दौरान अक्सर लोग स्वाद और पोषण के बीच संतुलन नहीं बना पाते। ऐसे में सोया पराठा एक हेल्दी विकल्प बन सकता है। सोया प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत है, जबकि गेहूं का आटा जटिल कार्बोहाइड्रेट (Complex Carbohydrates) प्रदान करता है। यह कॉम्बिनेशन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है, जिससे बार-बार भूख लगने और अनहेल्दी स्नैकिंग की संभावना कम हो सकती है। आवश्यक सामग्री 1 कप सोया चंक्स (उबले और दरदरे पिसे हुए) 1 कप गेहूं या मल्टीग्रेन आटा 1 छोटा प्याज (बारीक कटा) 1–2 हरी मिर्च 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट ½ छोटा चम्मच हल्दी ½ छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर ½ छोटा चम्मच गरम मसाला ½ छोटा चम्मच अजवाइन हरा धनिया नमक स्वादानुसार 1–2 छोटा चम्मच तेल या घी (सेकने के लिए) बनाने की विधि सबसे पहले सोया चंक्स को 10 मिनट तक गर्म पानी में भिगोकर उसका अतिरिक्त पानी निचोड़ लें और दरदरा पीस लें। पैन में थोड़ा तेल गर्म करके अजवाइन, अदरक-लहसुन, हरी मिर्च और प्याज भूनें। अब इसमें सोया और सभी मसाले डालकर 3–4 मिनट तक पकाएं और आखिर में हरा धनिया मिलाएं। गेहूं के आटे का नरम आटा गूंथें। लोई बनाकर उसमें तैयार स्टफिंग भरें और हल्के हाथ से पराठा बेल लें। नॉन-स्टिक तवे पर कम तेल या घी में दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेक लें। प्रति पराठा अनुमानित पोषण कैलोरी: 220–260 kcal प्रोटीन: 18–22 ग्राम कार्बोहाइड्रेट: 24–28 ग्राम फैट: 5–7 ग्राम फाइबर: 6–8 ग्राम वजन घटाने में कैसे मदद कर सकता है? हाई प्रोटीन होने के कारण लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद मिल सकती है। फाइबर अनहेल्दी स्नैकिंग और ओवरईटिंग को कम करने में सहायक हो सकता है। प्रोटीन मांसपेशियों को बनाए रखने में मदद करता है, खासकर जब आप कैलोरी नियंत्रित डाइट ले रहे हों। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ यह वजन प्रबंधन में उपयोगी विकल्प बन सकता है। डाइट में कब और कितनी बार खाएं? सबसे अच्छा समय: नाश्ता या दोपहर का भोजन हफ्ते में: 2–4 दिन तक शामिल किया जा सकता है। बेहतर संतुलन के लिए इसे दही, सलाद या हरी चटनी के साथ खाएं। ध्यान दें: केवल एक रेसिपी खाने से वजन कम नहीं होता। बेहतर परिणाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और स्वस्थ जीवनशैली जरूरी है। यदि आपको थायरॉयड, किडनी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो अधिक प्रोटीन वाली डाइट शुरू करने से पहले डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लें।
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर सामने आई उन खबरों को दोनों देशों ने सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि भारत ने इस समझौते को अस्वीकार कर दिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में सकारात्मक बातचीत कर रहे हैं। अमेरिकी राजदूत ने रिपोर्ट को बताया फेक न्यूज भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत द्वारा ट्रेड डील खारिज किए जाने की खबर पूरी तरह गलत है। उन्होंने लिखा कि "फेक न्यूज अलर्ट। किसी ने भी किसी समझौते को खारिज नहीं किया है।" उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर लगातार सकारात्मक बातचीत चल रही है और दोनों पक्ष इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने संबंधित मीडिया रिपोर्ट पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की खबरें वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शातीं। पीयूष गोयल बोले- रिपोर्ट पूरी तरह भ्रामक केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत द्वारा ट्रेड डील खारिज किए जाने की खबर पूरी तरह निराधार, असत्य और भ्रामक है। उन्होंने बताया कि जून में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के भारत दौरे के दौरान दोनों पक्षों के बीच बेहद सकारात्मक और रचनात्मक बैठकें हुई थीं। गोयल ने कहा कि दोनों देशों की टीमें एक संतुलित और व्यावसायिक रूप से लाभकारी समझौते पर काम कर रही हैं। समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत जारी सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने के लिए सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने दोहराया कि किसी भी पक्ष ने बातचीत से पीछे हटने या समझौते को अस्वीकार करने जैसी कोई बात नहीं कही है। पहले भी कहा था- अंतिम चरण में है डील पिछले महीने यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम के नेतृत्व सम्मेलन को संबोधित करते हुए सर्जियो गोर ने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने उस समय कहा था कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और अब केवल कुछ अंतिम बिंदुओं पर चर्चा बाकी है। उनके अनुसार, समझौते का लगभग पूरा काम हो चुका है और दोनों देश इसे जल्द पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। व्यापार संबंधों को और मजबूत करने पर जोर भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने वाला कदम माना जा रहा है। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और आपूर्ति श्रृंखला जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग और बढ़ने की संभावना है।
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता (ट्रेड डील) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और समझौते को जल्द अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है। यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 को संबोधित करते हुए गोर ने कहा कि भारत वैश्विक मंच पर तेजी से मजबूत भूमिका निभा रहा है और आने वाले वर्षों में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी और गहरी होगी। भारत की बढ़ती भूमिका की सराहना गोर ने कहा कि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली शक्ति बन चुका है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), अत्याधुनिक तकनीक, विमानन, नवाचार और भरोसेमंद सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से बढ़ेगा। ट्रंप और पीएम मोदी से जुड़ा दिलचस्प किस्सा अपने संबोधन के दौरान सर्जियो गोर ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और प्रधानमंत्री Narendra Modi से जुड़ा एक रोचक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने सुबह करीब छह बजे प्रधानमंत्री मोदी को फोन करने की इच्छा जताई। जब उन्हें बताया गया कि भारत और अमेरिका के समय में बड़ा अंतर है, तो ट्रंप ने मुस्कुराते हुए कहा, "मोदी जाग रहे होंगे, वो मेरी तरह कम सोते हैं।" गोर के अनुसार, ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी मित्र मानते हैं और दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत स्तर पर मजबूत संबंध हैं। '50 साल बाद भी दोस्त रहेंगे दोनों देश' गोर ने बताया कि नई दिल्ली में एक भारतीय मंत्री ने उनसे कहा था कि आने वाले 50 वर्षों में भी भारत और अमेरिका मजबूत साझेदार बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्रों के साझा मूल्य इस रिश्ते को और मजबूत बनाते हैं। AI, टेक्नोलॉजी और एविएशन पर रहेगा जोर अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र होंगे: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उन्नत प्रौद्योगिकी एविएशन नवाचार भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन उन्होंने कहा कि अगले दो वर्ष भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण होंगे। व्यापार वार्ता में हुई अहम प्रगति गोर ने बताया कि 22 से 24 जून के बीच नई दिल्ली में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer के बीच महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। इन बैठकों में व्यापार समझौते की प्रगति की समीक्षा की गई और निवेश, आर्थिक सहयोग तथा व्यापार विस्तार पर चर्चा हुई। जल्द हो सकता है समझौता सर्जियो गोर ने विश्वास जताया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील अब अंतिम चरण में है और जल्द ही इस पर सहमति बन सकती है। उनके अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देगा तथा भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसर खोलेगा।
मुंबई , एजेंसियां। भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापार समझौते को लागू करने की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 25 से 27 जून तक ब्रिटेन दौरे पर रहेंगे, जहां दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। व्यापार समझौते के क्रियान्वयन पर होगी चर्चा दौरे के दौरान भारतीय और ब्रिटिश अधिकारियों के बीच टैरिफ, व्यापार सुविधा, निवेश और पेशेवरों की आवाजाही जैसे विषयों पर बातचीत होने की संभावना है। दोनों देश समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दे रहे हैं। कारोबार को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिलेगी। इससे कई क्षेत्रों में रोजगार और निर्यात के अवसर बढ़ सकते हैं।
भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की जमकर तारीफ की है। दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत कई देशों के उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव भी पेश कर दिया है, जिससे वार्ता के बीच नई चुनौती खड़ी हो गई है। ट्रंप बोले- मोदी मेरे अच्छे मित्र हैं व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उनके अच्छे मित्र हैं और दोनों देशों के संबंध मजबूत बने हुए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे आपके प्रधानमंत्री बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे दोस्त हैं और हमारे रिश्ते बेहद अच्छे हैं।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि पहले भारत को अमेरिका के साथ व्यापार में अधिक लाभ मिलता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं और अमेरिका को भी बेहतर आर्थिक फायदा मिलने लगा है। नई दिल्ली में चार दिन चली अहम व्यापार वार्ता 1 जून से 4 जून तक नई दिल्ली में भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच विस्तृत व्यापार वार्ता हुई। इस दौरान दोनों पक्षों ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। वार्ता में मुख्य रूप से निम्न मुद्दे शामिल रहे: वस्तुओं का व्यापार सीमा शुल्क प्रक्रियाएं व्यापार सुगमता गैर-टैरिफ बाधाएं आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग दोनों देशों ने बातचीत को सकारात्मक बताया और कहा कि अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम जारी है। समझौता अंतिम चरण में पहुंचा भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने हाल ही में संकेत दिया कि अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और वार्ता अब अंतिम चरण में है। वहीं केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal भी कह चुके हैं कि अधिकांश मतभेद दूर हो चुके हैं और केवल कुछ तकनीकी बिंदुओं पर चर्चा जारी है। नई टैरिफ नीति ने बढ़ाई अनिश्चितता ट्रेड डील में प्रगति के बावजूद ट्रंप प्रशासन ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि कुछ देशों से आने वाले आयातित उत्पादों पर 10 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इन देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पाद कथित तौर पर जबरन श्रम (Forced Labour) से तैयार किए गए हो सकते हैं। भारत समेत 54 अर्थव्यवस्थाओं पर उठाए सवाल अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने 54 देशों और अर्थव्यवस्थाओं की सूची जारी की है, जिन पर पर्याप्त आयात निगरानी न होने का आरोप लगाया गया है। इस सूची में भारत के अलावा कई प्रमुख देश शामिल हैं: China Japan Australia United Kingdom Saudi Arabia United Arab Emirates Singapore South Korea Türkiye यूएसटीआर के अनुसार जिन देशों के पास जबरन श्रम से बने उत्पादों पर प्रभावी नियंत्रण व्यवस्था नहीं है, उन्हें अधिक शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। कपड़ा और परिधान क्षेत्र पर विशेष फोकस प्रस्तावित नीति में वस्त्र और परिधान उद्योग के लिए विशेष प्रावधान भी शामिल हैं। कुछ देशों को सीमित मात्रा में कम शुल्क पर अमेरिकी बाजार तक पहुंच दी जा सकती है, जबकि अन्य उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लागू रहेगा। भारत-अमेरिका रिश्तों में अवसर और चुनौती दोनों विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा दौर में भारत और अमेरिका दोनों व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। लेकिन टैरिफ और श्रम मानकों से जुड़े नए अमेरिकी प्रस्ताव वार्ता को जटिल बना सकते हैं। एक तरफ ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी की खुलकर प्रशंसा कर रहे हैं और समझौते को लेकर आशावाद जता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अतिरिक्त शुल्क की चेतावनी देकर दबाव की रणनीति भी अपना रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि दोनों देश व्यापारिक साझेदारी को नई ऊंचाई तक ले जाते हैं या कुछ मुद्दे अब भी अड़चन बने रहते हैं।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका दौरे के दौरान न्यूयॉर्क में 50 से अधिक वैश्विक व्यापार और उद्योग जगत के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस गोलमेज सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश, नवाचार और सप्लाई चेन साझेदारी को और मजबूत बनाना था। पीयूष गोयल ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह बैठक न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास और यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के सहयोग से आयोजित की गई थी। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक क्षमता पर दिया जोर बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में तेजी से हो रहे आर्थिक सुधारों और मजबूत कारोबारी माहौल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक निवेशकों के लिए तेजी से एक आकर्षक बाजार बनता जा रहा है और सरकार निवेश को आसान बनाने के लिए लगातार सुधार आधारित नीतियां लागू कर रही है। गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी है। व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन साझेदारी पर रही विशेष चर्चा बैठक में साझा समृद्धि के लक्ष्य के साथ भारत-अमेरिका व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा नवाचार, टेक्नोलॉजी सहयोग और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर भी विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत विश्व स्तर पर भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आर्थिक कूटनीति को मजबूत करने में जुटा भारत यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब भारत प्रमुख वैश्विक साझेदार देशों के साथ आर्थिक कूटनीति को तेज करने की रणनीति पर काम कर रहा है। हाल के महीनों में केंद्र सरकार की ओर से कई उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय बैठकों और व्यापारिक वार्ताओं का आयोजन किया गया है, जिनका उद्देश्य निवेश आकर्षित करना और वैश्विक कंपनियों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करना है। भारत-कनाडा व्यापार बढ़ाने पर भी सरकार का फोकस सप्ताह की शुरुआत में पीयूष गोयल ने भारत-कनाडा व्यापार संबंधों को लेकर भी महत्वपूर्ण बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार लगभग 8.5 अरब डॉलर का है। भारत और कनाडा ने वर्ष 2030 तक इस व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। गोयल ने कहा कि कनाडा दौरे के दौरान उन्होंने शिक्षा, नवाचार, व्यापार परिषदों, संस्थागत निवेशकों और प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। ओटावा और टोरंटो दौरे में आर्थिक साझेदारी पर जोर अपने तीन दिवसीय कनाडा दौरे में पीयूष गोयल ने 25 मई को ओटावा और 26 से 28 मई तक टोरंटो में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस दौरान भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर चल रही बातचीत को तेज करने पर विशेष जोर दिया गया। सरकार का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाना और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देना है। बोइंग प्रतिनिधिमंडल के साथ भी हुई थी अहम बैठक इससे पहले मई महीने में पीयूष गोयल ने विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बोइंग के प्रतिनिधिमंडल के साथ भी बैठक की थी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बोइंग में सरकारी संचालन, वैश्विक सार्वजनिक नीति और कॉर्पोरेट रणनीति के कार्यकारी उपाध्यक्ष जेफ शॉकी कर रहे थे। बैठक के दौरान भारत में निवेश, विमानन क्षेत्र में सहयोग और वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।