नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय मंत्रिमंडल की 19 अगस्त 2026 को हुई बैठक में केंद्रीय मंत्रियों के सोशल मीडिया प्रदर्शन की समीक्षा की गई और उन्हें डिजिटल प्रदर्शन का रिपोर्ट कार्ड दिया गया। रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर मंत्रियों की सक्रियता, पोस्ट की संख्या, लोगों की प्रतिक्रिया, लाइक्स और फॉलोअर्स समेत कई मानकों का आकलन किया गया। इस आकलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे आगे रहे। 1 मई से 15 अगस्त तक के प्रदर्शन का आकलन रिपोर्ट के लिए 1 मई से 15 अगस्त 2026 तक की सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। इसमें मंत्रियों के Facebook, X और Instagram जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शन को देखा गया। पोस्ट की औसत संख्या, कुल एंगेजमेंट, प्रति पोस्ट औसत एंगेजमेंट, लाइक्स और फॉलोअर्स जैसे आंकड़ों को मूल्यांकन में शामिल किया गया। युवाओं से जुड़ने पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों से सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी और जनता से सीधे संवाद को और मजबूत करने को कहा। खास तौर पर Gen Z और Gen Alpha जैसे युवा वर्ग तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा मंत्रियों को विश्वविद्यालयों और सरकारी स्कूलों में जाकर युवाओं से संवाद करने का निर्देश भी दिया गया। केवल फॉलोअर्स नहीं, एंगेजमेंट भी महत्वपूर्ण रिपोर्ट कार्ड में सिर्फ फॉलोअर्स की संख्या को आधार नहीं बनाया गया। मंत्रियों के पोस्ट पर लोगों की वास्तविक भागीदारी और प्रतिक्रिया को भी महत्वपूर्ण मानदंड बनाया गया। सरकार की डिजिटल रणनीति का उद्देश्य सोशल मीडिया को जनता और खासकर युवा मतदाताओं से संवाद का प्रभावी माध्यम बनाना है। PM मोदी सोशल मीडिया पहुंच में शीर्ष पर रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्रियों के बीच सोशल मीडिया पहुंच के मामले में पहला स्थान हासिल किया। यह समीक्षा ऐसे समय हुई है जब सरकार युवाओं के साथ डिजिटल माध्यमों से संवाद बढ़ाने और सोशल मीडिया पर अपनी पहुंच मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1947 के भारत विभाजन के दौरान पीड़ित हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उन परिवारों के साहस, संघर्ष और दृढ़ता को याद किया, जिन्होंने विभाजन की त्रासदी में अपने घर, संपत्ति और अपनों को खोने के बावजूद नए सिरे से जीवन शुरू किया। पीएम मोदी ने पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों लोगों को असहनीय पीड़ा और विस्थापन का सामना करना पड़ा। उन्होंने उन सभी लोगों को नमन किया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद हिम्मत नहीं हारी और अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया। साहस और संघर्ष को किया याद पीएम मोदी ने विभाजन से प्रभावित लोगों के धैर्य और संघर्ष को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उस कठिन दौर में चुनौतियों को अवसर में बदला और आगे बढ़कर देश के निर्माण में योगदान दिया, उनका योगदान हमेशा याद रखा जाना चाहिए। विभाजन की पीड़ा से सीख लेने पर जोर हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने, हिंसा झेलने और विस्थापित होने वाले लोगों की पीड़ा को याद करना है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर को इतिहास से सीख लेकर देश में एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने से जोड़ने का संदेश दिया। लाखों परिवार हुए थे विस्थापित 1947 के विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर आबादी का विस्थापन हुआ था। लाखों परिवारों को अपने पुश्तैनी घर छोड़कर नए स्थानों पर जाना पड़ा। स्मृति दिवस पर केंद्र सरकार के कई मंत्रियों ने भी विभाजन पीड़ितों के साहस और बलिदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस के रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष का सरकार के खिलाफ अभियान जारी रहेगा और जब तक नरेंद्र मोदी इस्तीफा नहीं देते और अमित शाह पद से नहीं हटते, तब तक विपक्ष अपना दबाव बनाए रखेगा। राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना राहुल गांधी ने दावा किया कि विपक्ष और देश की जनता अब अपनी आवाज मजबूती से उठा रही है। उन्होंने हाल के छात्र प्रदर्शनों और संसद में विपक्ष के विरोध का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार पर दबाव बनाने का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह को लेकर कहा कि विपक्ष का अभियान तब तक नहीं रुकेगा, जब तक दोनों नेता अपने पदों से हट नहीं जाते। यह बयान कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन में उनके संबोधन के दौरान सामने आया। मोदी की विदेश नीति पर भी हमला राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की विदेश नीति में रणनीतिक दृष्टिकोण के बजाय दूसरे देशों के नेताओं के साथ व्यक्तिगत संबंधों को अधिक महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने आरएसएस और बड़े कारोबारी समूहों को लेकर भी गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। बीजेपी ने किया पलटवार राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी की भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश चलाने के लिए परिपक्व नेतृत्व की जरूरत है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार पर इस तरह की टिप्पणी लोकतांत्रिक रूप से चुने गए जनादेश का अपमान है। संसद सत्र के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद का मानसून सत्र हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच लगातार टकराव के बाद समाप्त हुआ है। संसद के कामकाज, छात्र प्रदर्शनों और सरकार की नीतियों को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दल लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। सोरेन ने कहा है कि खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर राज्यों की शुल्क लगाने की शक्ति सीमित होने से झारखंड की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है। खनन राजस्व झारखंड के लिए बेहद अहम मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में राज्य आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का हवाला देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में खनन से मिलने वाला राजस्व झारखंड के अपने गैर-कर राजस्व का करीब 84.9 प्रतिशत था। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित मिनरल बेयरिंग लैंड सेस से राज्य को सालाना लगभग 7,110 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है। सोरेन का कहना है कि इस राजस्व में बड़ी कमी आने से राज्य की विकास योजनाओं, कल्याणकारी कार्यक्रमों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधन प्रभावित हो सकते हैं। खनन से होने वाले नुकसान का भी उठाया मुद्दा हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड लंबे समय से देश के औद्योगिकीकरण और ऊर्जा जरूरतों के लिए अपनी खनिज संपदा उपलब्ध कराता रहा है। इसके साथ ही राज्य और स्थानीय लोगों को विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान, प्रदूषण तथा स्थानीय बुनियादी ढांचे पर दबाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि खनिज संपदा से होने वाले आर्थिक लाभ का आकलन करते समय इन सामाजिक और पर्यावरणीय लागतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। संसद से पारित हो चुका है विधेयक Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 को संसद ने पारित कर दिया है। विधेयक का उद्देश्य राज्यों की ओर से खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर लगाए जाने वाले नए करों एवं शुल्कों को सीमित करना है। केंद्र सरकार का कहना है कि इससे खनन क्षेत्र में एक समान और पूर्वानुमेय व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी। वहीं, झारखंड सरकार इसे राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार से जोड़कर देख रही है। सोरेन ने केंद्र से विधेयक पर दोबारा विचार करने की मांग की है।
चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को स्थायी रूप से बनाए रखने की मांग की है। उन्होंने इसके लिए संविधान में जरूरी संशोधन करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि जनगणना के बाद प्रस्तावित परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों में कमी आ सकती है, इसलिए मौजूदा राज्यवार सीट वितरण को बरकरार रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही विजय ने आगामी लोकसभा चुनाव और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग भी उठाई है। तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव का दिया हवाला मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा बुधवार को पारित प्रस्ताव का उल्लेख किया। इस प्रस्ताव में लोकसभा की कुल सदस्य संख्या को 543 पर स्थायी रूप से तय करने और प्रत्येक राज्य को वर्तमान में मिली सीटों की संख्या को बनाए रखने की मांग की गई है। विजय ने प्रधानमंत्री से विधानसभा के प्रस्ताव पर विचार करने और इसके अनुरूप संविधान में आवश्यक संशोधन लाने का अनुरोध किया। परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंता तमिलनाडु विधानसभा ने प्रस्ताव में आशंका जताई है कि आगामी जनगणना के बाद जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों पर असर पड़ सकता है। प्रस्ताव में कहा गया कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन किया है। ऐसे में केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण इन राज्यों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। विधानसभा ने इसे दक्षिणी राज्यों के साथ दीर्घकालिक अन्याय की आशंका से जोड़ा है। 1967 का उदाहरण देकर जताई चिंता तमिलनाडु विधानसभा ने अपने प्रस्ताव में 1967 का उदाहरण भी दिया। प्रस्ताव के अनुसार, उस समय तमिलनाडु की लोकसभा सीटों की संख्या 41 से घटकर 39 रह गई थी। विधानसभा का तर्क है कि यदि 1971 के बाद की जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया जाता है और मौजूदा सीट वितरण में बदलाव होता है, तो इसका दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर स्थायी प्रभाव पड़ सकता है। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की भी मांग मुख्यमंत्री विजय ने केवल लोकसभा सीटों के मुद्दे को ही नहीं उठाया, बल्कि महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री से आगामी लोकसभा चुनावों और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण सुनिश्चित करने की अपील की। इस मांग को तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव में भी शामिल किया गया था। विजय ने रखीं तीन प्रमुख मांगें प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में मुख्यमंत्री विजय ने मुख्य रूप से तीन मांगें रखी हैं: लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय की जाए। राज्यों के बीच मौजूदा लोकसभा सीटों का वितरण बरकरार रखा जाए। आगामी लोकसभा और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू किया जाए। यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब जनगणना के बाद संभावित परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों में राजनीतिक चर्चा तेज है। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि विकास और जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को परिसीमन के कारण नुकसान नहीं होना चाहिए।
नई दिल्ली: देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर 1947 के विभाजन की त्रासदी को याद कर रहा है। 14 अगस्त को मनाए जा रहे विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले और विस्थापन का दर्द झेलने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि विभाजन का दौर बेहद पीड़ादायक था, जिसने न जाने कितने परिवारों को बिखेर दिया और लोगों को अपनी जड़ों से दूर होने के लिए मजबूर कर दिया। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर साझा किया भावुक संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश के जरिए 1947 के विभाजन के पीड़ितों को याद किया। उन्होंने उस दौर की भयावह परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि बंटवारे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। प्रधानमंत्री के मुताबिक, विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। कई परिवार अपनों से बिछड़ गए, जबकि अनेक लोगों को जान गंवानी पड़ी। विस्थापन और हिंसा के कारण लोगों को ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसकी पीड़ा को शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना मुश्किल है। मुश्किल हालात के बावजूद लोगों ने नहीं हारी हिम्मत पीएम मोदी ने अपने संदेश में विभाजन पीड़ितों के संघर्ष और उनके जज्बे को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी झेलने के बाद भी लोगों ने हार नहीं मानी। जिन लोगों को अपनी जिंदगी नए सिरे से शुरू करनी पड़ी, उन्होंने मेहनत और साहस के साथ अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी लोगों ने अपनी मेहनत को ताकत बनाया और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विभाजन से प्रभावित लोगों की संघर्ष यात्रा आने वाली पीढ़ियों को साहस और मानवीय दृढ़ता की सीख देती है। भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने की अपील प्रधानमंत्री ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को केवल अतीत को याद करने का दिन नहीं, बल्कि भविष्य के लिए संकल्प लेने का अवसर भी बताया। उन्होंने देशवासियों से आपसी भाईचारा, सामाजिक सौहार्द और मेल-मिलाप को मजबूत बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। साथ मिलकर एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान भी किया गया। 14 अगस्त को क्यों मनाया जाता है विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस? भारत सरकार ने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य 1947 के विभाजन के दौरान पीड़ा झेलने वाले लोगों को याद करना और उनके संघर्षों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। देश के विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों का विस्थापन हुआ। लाखों परिवारों को अपना घर और जमीन छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा। इस दौरान हिंसा, बिछड़ने और जान-माल के नुकसान ने इतिहास के इस अध्याय को बेहद त्रासद बना दिया। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के जरिए उन लोगों की पीड़ा को याद करने के साथ-साथ देश में एकता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश देने पर भी जोर दिया जाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को राष्ट्रमंडल खेल 2026 में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय पदक विजेताओं से मुलाकात की। उन्होंने खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी और उनके अनुभवों के बारे में जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन देश के लिए गर्व की बात है और उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी के युवाओं को प्रेरित करेगी। 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत ने कुल 39 पदक जीते। इनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। इस बार राष्ट्रमंडल खेलों का कार्यक्रम सीमित था और कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी तथा निशानेबाजी जैसे भारत के मजबूत खेलों को शामिल नहीं किया गया था। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने मुक्केबाजी, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स में शानदार प्रदर्शन किया। मुक्केबाजी में 10 पदक मुक्केबाजी भारत के लिए सबसे सफल खेलों में रही। भारतीय मुक्केबाजों ने कुल 10 पदक जीते, जिनमें 7 स्वर्ण और 3 रजत शामिल रहे। प्रीति पवार, जैस्मिन लंबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घंघास, अरुंधति चौधरी, सचिन सिवाच और अंकुश पंघाल ने स्वर्ण पदक जीते। वहीं जादुमणि सिंह, लवलीना बोरगोहेन और नरेंद्र बरवाल ने रजत पदक अपने नाम किया। भारतीय महिला मुक्केबाजों ने भी ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए एक ही राष्ट्रमंडल खेल में 7 स्वर्ण पदक जीतकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। जूडो में भी भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन जूडो में भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। भारत ने 12 स्पर्धाओं में हिस्सा लेकर 2 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य समेत कुल 4 पदक जीते। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीते। अस्मिता राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, जबकि हर्ष सिंह इस स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष बने। गुलवीर सिंह ने रचा इतिहास एथलेटिक्स में भारत ने कुल 10 पदक जीते। गुलवीर सिंह ने एक ही राष्ट्रमंडल खेल में दो व्यक्तिगत पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एंड फील्ड एथलीट बनकर इतिहास रचा। उन्होंने पुरुषों की 10,000 मीटर दौड़ में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीता। पीएम मोदी ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सराहा प्रधानमंत्री मोदी ने खिलाड़ियों से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर भी अपनी खुशी साझा की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक खिलाड़ी ने अपने असाधारण प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया है। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों की सफलता को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।
नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है और अब उसके अंतिम चार दिनों में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक यानी एफसीआरए विधेयक और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनाने की कोशिशें तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी क्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाली हैं। उनके साथ पार्टी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी रहेगा। बैठक को महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ संसद में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों के संदर्भ में भी अहम माना जा रहा है। एफसीआरए विधेयक पर एनसीपी (एसपी) का स्पष्ट विरोध सुप्रिया सुले ने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर अपनी पार्टी की आपत्ति स्पष्ट कर दी है। उनका कहना है कि एनसीपी (एसपी) इस विधेयक का वर्तमान रूप में समर्थन नहीं करती। पार्टी की मांग है कि विधेयक को या तो वापस लिया जाए या फिर इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजकर विस्तृत जांच और चर्चा कराई जाए। इस रुख से संकेत मिलता है कि सरकार को विधेयक को लेकर विपक्षी दलों के बीच सहमति बनाने के लिए राजनीतिक स्तर पर बातचीत करनी पड़ सकती है। परिसीमन विधेयक पर सुले ने साधी सावधानी परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन को लेकर सुप्रिया सुले ने फिलहाल कोई अंतिम रुख जाहिर नहीं किया है। उनका कहना है कि संबंधित विधेयक अभी सामने नहीं आया है और इसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन प्रस्ताव को राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। सुले ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने से पहले वह इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों से बातचीत करेंगी। इस प्रस्ताव को संसद में पारित कराने के लिए सरकार को व्यापक राजनीतिक समर्थन की आवश्यकता होगी, क्योंकि संविधान संशोधन के लिए विशेष बहुमत की जरूरत पड़ती है। सरकार के लिए डीएमके और एनसीपी (एसपी) क्यों अहम? संसद के मौजूदा सत्र के अंतिम सप्ताह में एफसीआरए संशोधन विधेयक को सोमवार के लोकसभा एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है। इससे राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हुई है कि सरकार फिलहाल इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर सकती है। डीएमके और एनसीपी (एसपी) जैसी पार्टियां एफसीआरए विधेयक के मौजूदा प्रावधानों पर सवाल उठा रही हैं। वहीं, परिसीमन जैसे संवैधानिक मुद्दे पर सरकार को अधिक व्यापक समर्थन की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में दोनों दलों के साथ संवाद को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक पर नजर सोमवार को लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक भी होने वाली है। इसी बैठक में आने वाले दिनों के विधायी एजेंडे और विभिन्न विधेयकों पर चर्चा के लिए समय तय किया जाता है। अगर सरकार एफसीआरए विधेयक को मौजूदा मानसून सत्र में पारित कराने के लिए आगे बढ़ती है, तो उसके लिए चर्चा और मतदान का समय निर्धारित करना जरूरी होगा। फिलहाल सोमवार के लोकसभा एजेंडे में चार विधेयकों का उल्लेख है, लेकिन एफसीआरए संशोधन विधेयक इसमें शामिल नहीं है। इस वजह से यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में सरकार इस विधेयक को सदन में लाती है या नहीं। एफसीआरए विधेयक को लेकर विपक्ष की आपत्ति क्या है? एफसीआरए यानी विदेशी अंशदान विनियमन कानून का उद्देश्य भारत में विदेशों से मिलने वाले धन और चंदे को नियंत्रित करना तथा उसके इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। मौजूदा कानून के तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए पंजीकरण और नियामकीय प्रावधान लागू होते हैं। प्रस्तावित संशोधनों में एफसीआरए पंजीकरण समाप्त होने या संस्था द्वारा पंजीकरण वापस करने की स्थिति में विदेशी अंशदान और उससे जुड़े मामलों के प्रबंधन के लिए एक विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव है। विपक्ष को आशंका है कि नए प्रावधानों से गैर सरकारी संगठनों और सामुदायिक संगठनों की कार्यप्रणाली पर अतिरिक्त नियंत्रण बढ़ सकता है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी विधेयक को लेकर आपत्ति जताई है। विपक्ष की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि प्रस्तावित बदलावों का असर कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों पर पड़ सकता है। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों और आशंकाओं पर सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। चार दिन में तय होगी विधेयक की दिशा संसद का मानसून सत्र अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। ऐसे में एफसीआरए विधेयक को लेकर सरकार की रणनीति और विपक्षी दलों के रुख पर लगातार नजर रहेगी। सुप्रिया सुले की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रस्तावित मुलाकात को इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले चार दिनों में बातचीत, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के फैसले और सदन के एजेंडे से स्पष्ट होगा कि एफसीआरए विधेयक पर सरकार आगे बढ़ती है या इसे आगे की चर्चा के लिए टाल दिया जाता है। साथ ही परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिशें भी संसद के अंतिम दिनों की बड़ी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहेंगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार, 8 अगस्त 2026 को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए युवाओं को जीवन और करियर की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ आउट ऑफ सिलेबस होता है” और छात्रों से बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने, लगातार सीखने और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करने का आह्वान किया। ‘जिंदगी की परीक्षा में सब कुछ आउट ऑफ सिलेबस’ प्रधानमंत्री ने कहा कि शैक्षणिक परीक्षाओं में सवाल सिलेबस के अनुसार आते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में परिस्थितियां पहले से तय नहीं होतीं। इसलिए युवाओं को ऐसी चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए, जिनका कोई निर्धारित उत्तर या समाधान पहले से मौजूद नहीं होता। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल डिग्री और नौकरी तक सीमित सोच रखने के बजाय ज्ञान, कौशल, नवाचार और समस्या समाधान पर ध्यान देने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि असफलता भी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है और युवाओं को उससे घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। AI और तकनीक के दौर में युवाओं की जिम्मेदारी PM मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), तकनीकी बदलाव और नवाचार को भारत के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि देश की युवा प्रतिभा इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने IIT से निकलने वाले युवाओं से अपनी तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि देश और समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए करने का आह्वान किया। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार के जरिए भारत की तकनीकी क्षमता को और मजबूत करने पर जोर दिया। ‘परम प्रज्ञा’ सुपरकंप्यूटिंग सुविधा का उद्घाटन दीक्षांत समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने IIT दिल्ली के सोनीपत परिसर में ‘परम प्रज्ञा’ AI-सक्षम हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटिंग सुविधा का उद्घाटन भी किया। यह सुविधा AI, डेटा साइंस और उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की उन्नत तकनीकी और अनुसंधान क्षमता को मजबूत करने से जोड़ते हुए युवाओं को इस तरह की नई तकनीकों का उपयोग देश की प्रगति के लिए करने का संदेश दिया। 3,036 विद्यार्थियों ने हासिल की डिग्री IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में 3,036 विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई, जिनमें 587 पीएचडी शोधार्थी शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने सभी विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई दी और उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश यही रहा कि IIT से निकलने वाले युवा केवल अपने करियर के लिए नहीं, बल्कि भारत के तकनीकी, वैज्ञानिक और सामाजिक विकास में योगदान देने के लिए भी तैयार हों।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को NDA के 45 सांसदों के साथ नाश्ते पर हुई बैठक में उन्हें संसद के बाहर भी संयम और अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी। प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि वे ‘लुटियंस दिल्ली के जाल’ में न फंसें और अपनी राजनीतिक पहचान को जनता तथा अपने क्षेत्र से जुड़े कामों के साथ मजबूत करें। NDA सांसदों को एकजुट रहने की सलाह बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने NDA को केवल राजनीतिक गठबंधन नहीं, बल्कि एक साझा परिवार के रूप में पेश किया। उन्होंने सहयोगी दलों के सांसदों के बीच बेहतर तालमेल और एकजुटता पर जोर दिया। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब संसद के मानसून सत्र में विपक्ष के विरोध और हंगामे के कारण कई मौकों पर कार्यवाही प्रभावित हुई है। प्रधानमंत्री ने सांसदों को संसद के भीतर अनुशासन और प्रभावी तरीके से अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया। ‘लुटियंस दिल्ली’ से दूर रहने का संदेश PM मोदी ने सांसदों को सलाह दी कि वे दिल्ली के राजनीतिक और नौकरशाही हलकों के प्रभाव में आने के बजाय अपने निर्वाचन क्षेत्रों और जनता से जुड़े रहें। उन्होंने सांसदों को अपनी राजनीतिक गतिविधियों और व्यवहार में सावधानी बरतने का संदेश दिया। संसद में व्यवधान पर भी जताई चिंता प्रधानमंत्री ने संसद में लगातार हो रहे व्यवधान के बीच राजनीतिक स्थिरता और प्रभावी शासन के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि NDA के विस्तार और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को साथ लेकर चलने की रणनीति से अलग-अलग राज्यों की आकांक्षाओं को सरकार तक पहुंचाने में मदद मिली है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। इस बैठक के बाद पंजाब की राजनीति में BJP और SAD के बीच दोबारा गठबंधन को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, मुलाकात के बाद दोनों दलों की ओर से गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। करीब 20 मिनट चली मुलाकात रिपोर्ट के मुताबिक, सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री मोदी से संसद परिसर में मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान पंजाब से जुड़े राजनीतिक और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की बात सामने आई है। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पंजाब में आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर विभिन्न दलों की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। ऐसे में मोदी और बादल की मुलाकात को राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गठबंधन की अटकलों को क्यों मिली हवा? BJP और SAD लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन सहयोगी रहे हैं। दोनों दलों ने 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर गठबंधन तोड़ दिया था। इसके बाद से दोनों पार्टियां अलग-अलग राजनीतिक रास्ते पर चल रही हैं। अब दोनों नेताओं की ताजा मुलाकात के बाद पुराने गठबंधन की संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं फिर शुरू हो गई हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी पार्टी ने गठबंधन बहाली को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पंजाब की राजनीति पर नजर सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को पंजाब की आगामी राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। यदि BJP और SAD के बीच दोबारा समझौता होता है तो इसका असर राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या यह मुलाकात केवल राजनीतिक संवाद तक सीमित रहेगी या आने वाले दिनों में BJP-SAD गठबंधन की औपचारिक वापसी का रास्ता भी खुलेगा। पार्टी नेतृत्व की अगली बैठकों और बयानों से इस पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब केंद्र में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। हालांकि, मुलाकात के बाद सरकार या शिवसेना की ओर से यह पुष्टि नहीं की गई कि बैठक का एजेंडा मंत्रिमंडल फेरबदल से जुड़ा था। पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल एकनाथ शिंदे की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। मुलाकात ऐसे समय हुई है जब केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। इसी वजह से शिंदे की पीएम मोदी से मुलाकात को भी इसी राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा संभव शिंदे महाराष्ट्र की सत्ता में भाजपा के प्रमुख सहयोगी हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के साथ उनकी बैठक में राज्य से जुड़े विकास कार्यों, राजनीतिक परिस्थितियों और केंद्र-राज्य समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, बैठक में किन-किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी। क्या केंद्र में शिवसेना को मिल सकती है बड़ी भूमिका? केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि शिवसेना को केंद्र सरकार में कोई नई जिम्मेदारी मिल सकती है या नहीं। हालांकि, फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की राजनीति और शिक्षा जगत से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम होने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में IIT के दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी प्रयागराज में छात्रों के साथ संवाद करेंगे। इसके अलावा चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले डॉक्टरों को भी सम्मानित किया जाएगा। IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में PM मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह 11 बजे IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस दौरान वह डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों और पीएचडी शोधार्थियों को संबोधित करेंगे। समारोह में प्रधानमंत्री मेधावी छात्रों को विभिन्न पदकों से सम्मानित करेंगे। इनमें राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक, शंकर दयाल शर्मा स्वर्ण पदक और परफेक्ट टेन स्वर्ण पदक शामिल हैं। प्रयागराज में छात्रों से संवाद करेंगे राहुल गांधी कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को प्रयागराज में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम छात्रों और युवाओं के साथ संवाद पर केंद्रित होगा। राहुल गांधी दोपहर में दिल्ली से प्रयागराज पहुंचेंगे। इसके बाद शाम को केपी ग्राउंड में छात्रों के बीच संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के बाद वह रात में दिल्ली लौट जाएंगे। 32 डॉक्टरों को किया जाएगा सम्मानित चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले गोरखपुर-बस्ती मंडल के 32 डॉक्टरों को भी आज सम्मानित किया जाएगा। 'आभार समर्पण का' नाम से आयोजित यह समारोह बस्ती में होगा। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और डॉक्टरों को सम्मानित करेंगे। आज के प्रमुख कार्यक्रम IIT दिल्ली: PM मोदी 57वें दीक्षांत समारोह में शामिल होंगे। प्रयागराज: राहुल गांधी छात्रों के साथ 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम करेंगे। बस्ती: 32 डॉक्टरों को चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।
तेल अवीव/नई दिल्ली: भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर एक बार फिर उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत के बाद उनका सार्वजनिक रूप से धन्यवाद किया और दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने का भरोसा जताया। नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री मोदी की पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि वह भारत और इजरायल के रिश्तों को मिलकर और मजबूत करते रहेंगे। यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई देशों की चिंता बढ़ी हुई है। पीएम मोदी से फोन पर हुई बातचीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को बताया था कि उन्हें इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का फोन आया था। दोनों नेताओं ने भारत-इजरायल के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। पीएम मोदी के अनुसार, दोनों देशों के बीच संबंध लगातार मजबूत और विकसित हो रहे हैं। बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी दोनों नेताओं ने विचारों का आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से बातचीत के बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई, लेकिन यह बताया गया कि दोनों नेता भविष्य में भी संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए हैं। नेतन्याहू ने जताया पीएम मोदी का आभार पीएम मोदी की पोस्ट के जवाब में नेतन्याहू ने उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना मित्र बताते हुए भारत और इजरायल के रिश्तों को आगे भी मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। नेतन्याहू का यह संदेश ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर भी लगातार बातचीत हो रही है। भारत-इजरायल संबंध किन क्षेत्रों में मजबूत हुए? पिछले वर्षों में भारत और इजरायल के संबंध कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गहरे हुए हैं। रक्षा सहयोग दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का प्रमुख आधार रहा है। इसके अलावा टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, साइबर सुरक्षा, कृषि और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ा है। भारत के लिए इजरायल पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, जबकि इजरायल भी भारत के साथ अपने संबंधों को व्यापक आर्थिक और सुरक्षा हितों के नजरिए से अहम मानता है। पश्चिम एशिया के तनाव के बीच हुई बातचीत दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच बातचीत का समय भी महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत लगातार घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ा तनाव भी वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। भारत की प्राथमिकता इस पूरे घटनाक्रम में अपने राष्ट्रीय हितों, ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संतुलित कूटनीतिक रुख बनाए रखना है। आगे भी संपर्क बनाए रखेंगे दोनों नेता पीएम मोदी और नेतन्याहू की बातचीत से यह संकेत साफ है कि दोनों देश अपनी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं। पश्चिम एशिया की तेजी से बदलती परिस्थितियों के बीच दोनों नेताओं का नियमित संपर्क भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल भारत-इजरायल संबंधों में रक्षा, तकनीक और सुरक्षा सहयोग के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर कूटनीतिक संवाद जारी रहने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय घटनाक्रम और दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सांसद सायोनी घोष की पहली मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। मुलाकात के बाद सायोनी घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा किए। उन्होंने इस मुलाकात को ‘याद रखने वाला पल’ बताया। सायोनी घोष ने अपनी पोस्ट में लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ मेरी पहली मुलाकात। एक यादगार पल!” इसके साथ साझा किए गए वीडियो में वह प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत करती हुई नजर आ रही हैं। यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सायोनी घोष का राजनीतिक रुख हाल के दिनों में बदला है। रिपोर्ट के मुताबिक, वह तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर 20 सांसदों वाले एक नए राजनीतिक गुट का हिस्सा बनी हैं, जिसने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI के साथ जाने का ऐलान किया है। पहली मुलाकात, लेकिन राजनीतिक मायने बड़े प्रधानमंत्री मोदी और सायोनी घोष की यह पहली मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। सायोनी घोष पहले तृणमूल कांग्रेस के साथ सक्रिय राजनीति में रही हैं। अब उनके नए राजनीतिक गुट के NDA के साथ काम करने की बात सामने आने के बाद प्रधानमंत्री से उनकी मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, सिर्फ मुलाकात और सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर किसी नए राजनीतिक फैसले का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सायोनी ने अपनी पोस्ट में मुख्य रूप से मुलाकात को यादगार बताया है। 20 सांसदों वाले बागी गुट की चर्चा रिपोर्टों के मुताबिक, सायोनी घोष उन 20 सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर NCPI के साथ जाने की जानकारी लोकसभा अध्यक्ष को दी थी। इस समूह में सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, यूसुफ पठान, दीपक अधिकारी और जून मालिया जैसे नामों की भी चर्चा है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें तेज कर दी हैं। NDA के साथ काम करने की बात इस नए गुट की ओर से NDA के साथ काम करने की बात भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, गुट के कुछ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाले NDA के साथ सहयोग की बात कही है। NCPI के सांसदों के NDA की संसदीय बैठक में शामिल होने की खबरों ने भी इस राजनीतिक समीकरण को और चर्चा में ला दिया है। ऐसे में सायोनी घोष की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात को विपक्षी राजनीति से अलग होकर नए राजनीतिक गठजोड़ की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। सायोनी घोष क्यों हैं अहम चेहरा? सायोनी घोष को पश्चिम बंगाल की राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा माना जाता है। तृणमूल कांग्रेस के साथ उनके राजनीतिक सफर के बाद अब नए गुट में उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चा है। जून में सामने आई रिपोर्टों में उन्हें इस बागी गुट के प्रमुख चेहरों में गिना गया था। ऐसे में प्रधानमंत्री के साथ उनकी पहली मुलाकात और उसके बाद सार्वजनिक की गई तस्वीरें राजनीतिक तौर पर स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन गई हैं। सोशल मीडिया पोस्ट ने बढ़ाई हलचल मुलाकात के बाद सायोनी घोष का छोटा-सा सोशल मीडिया संदेश भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया। उन्होंने इसे सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात के रूप में पेश करने के बजाय ‘यादगार पल’ बताया। अब सवाल यह है कि क्या यह मुलाकात केवल एक शिष्टाचार भेंट थी या बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इसके आगे भी कोई बड़ा राजनीतिक संदेश निकलता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों के गुट और NDA के बीच बढ़ती नजदीकी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में इस गुट की भूमिका और सायोनी घोष की राजनीतिक दिशा पर नजर रहेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए लोगों से भारतीय हैंडलूम उत्पादों को अपनाने और बुनकरों का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हैंडलूम खरीदने से न केवल देश के पारंपरिक बुनकरों और छोटे कारोबारियों को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी बल मिलेगा। हैंडलूम उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील राष्ट्रीय हथकरघा दिवस से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने लोगों से अपने पसंदीदा हैंडलूम उत्पादों के साथ छोटे-छोटे वीडियो, जिनमें 'Get Ready With Me (GRWM)' जैसे वीडियो भी शामिल हैं, बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करने का आग्रह किया ताकि भारतीय हैंडलूम की विविधता दुनिया तक पहुंच सके। स्वदेशी आंदोलन की याद दिलाई प्रधानमंत्री ने कहा कि 7 अगस्त 1905 को अंग्रेजों के खिलाफ स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जिसने देश में स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की नई चेतना जगाई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस उसी ऐतिहासिक आंदोलन की याद में मनाया जाता है और यह भारतीय हस्तकरघा उद्योग की समृद्ध विरासत का प्रतीक है। बुनकरों और छोटे कारोबारियों को मिलेगा लाभ पीएम मोदी ने कहा कि लोगों द्वारा हैंडलूम उत्पाद खरीदने और उनका प्रचार करने से बुनकरों तथा छोटे व्यापारियों की आय बढ़ेगी। उन्होंने सभी से भारतीय हस्तकरघा उत्पादों को प्राथमिकता देने और देश की पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान दिलाने में सहयोग करने की अपील की। 2015 से मनाया जा रहा है राष्ट्रीय हथकरघा दिवस राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी। यह दिवस हर साल 7 अगस्त को मनाया जाता है और इसका उद्देश्य देश के हथकरघा बुनकरों के योगदान को सम्मान देना, पारंपरिक बुनाई कला को बढ़ावा देना तथा इस क्षेत्र के सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।
PM मोदी से मिले Netflix के Co-CEO टेड सारंडोस, भारत की कहानी को दुनिया तक पहुंचाने पर जोर नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Netflix के Co-CEO टेड सारंडोस से मुलाकात की। इस दौरान भारत के तेजी से बढ़ते मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र, भारतीय कहानियों की वैश्विक पहुंच और देश की रचनात्मक प्रतिभाओं की क्षमता पर चर्चा हुई। मुलाकात के दौरान भारत को वैश्विक कंटेंट निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। भारतीय कहानियों को वैश्विक मंच देने पर चर्चा बैठक में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और रचनात्मक विरासत को दुनिया के सामने पेश करने के अवसरों पर जोर दिया गया। भारतीय फिल्म, वेब सीरीज, एनीमेशन और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई। Netflix पहले से ही भारत में स्थानीय भाषाओं और भारतीय कहानियों पर आधारित कंटेंट का विस्तार कर रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और सारंडोस की बैठक को भारत के मनोरंजन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Netflix ने की नई पहल की घोषणा मुलाकात के बाद Netflix ने Netflix India Storytelling Initiative की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य भारत की अगली पीढ़ी के कहानीकारों और रचनात्मक प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण, साझेदारी और अवसर उपलब्ध कराना है। इस पहल के तहत भारत के प्रमुख संस्थानों के साथ रणनीतिक साझेदारी विकसित करने की योजना है। इसका दायरा कहानी कहने के साथ-साथ एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स जैसे रचनात्मक क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है। भारत को वैश्विक कंटेंट हब बनाने की दिशा में कदम बैठक में भारत की विशाल प्रतिभा, बढ़ते मनोरंजन बाजार और तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। सरकार लंबे समय से भारत को फिल्म, एनीमेशन, गेमिंग और अन्य रचनात्मक उद्योगों के लिए वैश्विक केंद्र बनाने पर जोर दे रही है। Netflix की नई पहल से भारतीय रचनाकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने और भारतीय कहानियों को दुनिया के बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
पीएम मोदी के वीडियो पर Meta CEO ने मांगी माफी, भारत सरकार की सख्ती के बाद लिया संज्ञान नई दिल्ली, एजेंसियां। सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किए जाने के मामले में मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की ओर से भारत सरकार के सामने माफी मांगे जाने की खबर सामने आई है। कंपनी ने इस कार्रवाई को तकनीकी/ऑपरेशनल गलती से जुड़ा मामला बताया है। पीएम मोदी के वीडियो को लेकर हुआ विवाद मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो से जुड़ा है, जिसे फेसबुक पर कुछ समय के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसके बाद भारत सरकार और मेटा के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई। सरकार ने सोशल मीडिया मंचों की सामग्री मॉडरेशन व्यवस्था और भारत में उनके दायित्वों को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद मेटा की ओर से इस घटना पर स्पष्टीकरण दिया गया। सरकार ने मेटा से मांगा था जवाब इस मामले में भारत सरकार ने मेटा से स्पष्टीकरण मांगते हुए प्लेटफॉर्म पर सामग्री हटाने और प्रतिबंधित करने की प्रक्रिया को लेकर जवाब तलब किया था। सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को भारत के कानूनों और नियमों का पालन करने की जरूरत पर भी जोर दिया। मामला केवल प्रधानमंत्री के वीडियो तक सीमित नहीं रहा। मेटा के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), डीपफेक और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार की ओर से चिंता जताई गई। सुरक्षित-पनाह प्रावधान पर भी दबाव मेटा के सामने भारत में उसके सेफ हार्बर दर्जे को लेकर भी सवाल उठे हैं। यह प्रावधान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को उपयोगकर्ताओं की ओर से पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। सरकार की सख्ती के बीच मेटा की ओर से मामले को गंभीरता से लेने और हुई गलती के लिए माफी मांगने की बात सामने आई है। अब सरकार की ओर से कंपनी के अगले कदम और कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था में किए जाने वाले सुधारों पर नजर रहेगी। भारत में मेटा की नीतियों पर बढ़ी निगरानी इस घटनाक्रम के बाद भारत में मेटा के फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्मों पर सामग्री मॉडरेशन को लेकर निगरानी और बढ़ सकती है। सरकार खासतौर पर आपत्तिजनक सामग्री, डीपफेक और बच्चों से संबंधित अवैध सामग्री के खिलाफ प्लेटफॉर्म की कार्रवाई को लेकर जवाबदेही तय करना चाहती है। मेटा की ओर से माफी के बाद विवाद को सुलझाने की दिशा में कदम जरूर बढ़ा है, लेकिन प्लेटफॉर्म की नीतियों और भारत के कानूनों के अनुपालन को लेकर आगे भी सरकार की निगरानी जारी रहने की संभावना है।
नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर इन दिनों अपने एक सोशल मीडिया वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। जंतर-मंतर पर NEET-UG 2026 से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा पर भूमि ने आपत्ति जताई। उन्होंने युवाओं से अपील की कि असहमति और विरोध दर्ज कराते समय भाषा की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। हालांकि, उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर ही उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। पीएम मोदी के खिलाफ भाषा पर भूमि ने जताई आपत्ति भूमि पेडनेकर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए विरोध-प्रदर्शनों से सामने आए कुछ वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा पर चिंता जताई। उनका कहना था कि देश के युवाओं को अपनी नाराजगी और असहमति व्यक्त करते समय अपमानजनक या गाली-गलौज वाली भाषा से बचना चाहिए। भूमि ने देश की संस्कृति और सार्वजनिक संवाद में सम्मानजनक भाषा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जिस तरह हम अपने परिवार के बड़ों से बात करते हैं, क्या सार्वजनिक जीवन में भी संवाद की एक मर्यादा नहीं होनी चाहिए। अभिनेत्री ने युवाओं से शिक्षा और लैंगिक हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने तथा एकता के साथ आगे बढ़ने की अपील की। बयान के बाद सोशल मीडिया पर घिरीं अभिनेत्री भूमि के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ यूजर्स ने उनके इस विचार का समर्थन किया कि राजनीतिक असहमति के बावजूद अपशब्दों से बचना चाहिए, लेकिन कई अन्य लोगों ने सवाल उठाया कि क्या विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और छात्रों के साथ हुई घटनाओं पर भी समान रूप से आवाज उठाई गई थी। आलोचकों ने आरोप लगाया कि भूमि ने प्रदर्शनकारियों की भाषा पर तो टिप्पणी की, लेकिन प्रदर्शन से जुड़े दूसरे विवादित पहलुओं पर उनकी प्रतिक्रिया दिखाई नहीं दी। कुछ यूजर्स ने उनके बयान को 'चुनिंदा' बताया और कहा कि किसी भी मुद्दे को केवल एक पक्ष से देखने के बजाय पूरे घटनाक्रम पर बात होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर कुछ टिप्पणियां बेहद तीखी भी रहीं। कुछ लोगों ने अभिनेत्री पर 'जमीनी हकीकत से दूर' होने का आरोप लगाया, जबकि कुछ यूजर्स ने यह सवाल किया कि क्या सम्मान की अपील करने से पहले सत्ता और प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। विवाद के बीच असली सवाल क्या है? इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग मुद्दे सामने आते हैं। पहला, किसी भी लोकतांत्रिक विरोध में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ भाषा की मर्यादा का सवाल। दूसरा, प्रदर्शनकारियों के साथ प्रशासन और पुलिस के व्यवहार को लेकर उठाए जा रहे सवाल। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की आलोचना और विरोध प्रदर्शन नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है। वहीं, किसी व्यक्ति या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ हिंसक या अपमानजनक भाषा को लेकर सवाल उठाना भी अलग मुद्दा है। दोनों विषयों पर एक साथ चर्चा की जा सकती है। यही वजह है कि भूमि पेडनेकर के बयान ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक और सामाजिक बहस को और तेज कर दिया है। जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा विवाद यह विवाद उस समय सामने आया है जब NEET-UG 2026 से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बहस जारी है। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं। प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल ने भी अलग बहस को जन्म दिया। भूमि पेडनेकर ने इसी पहलू पर प्रतिक्रिया देते हुए युवाओं से संयमित और सम्मानजनक भाषा अपनाने की अपील की। हालांकि, सोशल मीडिया पर उनकी प्रतिक्रिया के बाद सवाल यह भी उठ रहा है कि सार्वजनिक हस्तियों को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करते समय पूरे घटनाक्रम के सभी पक्षों पर बात करनी चाहिए या नहीं। सोशल मीडिया की बहस ने बढ़ाई चर्चा भूमि पेडनेकर के बयान के बाद सामने आई प्रतिक्रियाएं बताती हैं कि NEET-UG 2026 से जुड़ा विवाद केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। अब इसमें विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक भाषा, पुलिस कार्रवाई, सार्वजनिक संवाद और सेलिब्रिटी की भूमिका जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। फिलहाल इस विवाद का सबसे बड़ा संदेश यही है कि लोकतांत्रिक असहमति में सवाल पूछना जरूरी है, लेकिन भाषा और संवाद की मर्यादा को लेकर बहस भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। साथ ही, किसी भी विवाद को समझने के लिए आरोपों, प्रतिक्रियाओं और उपलब्ध तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
Jantar Mantar Controversy: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली पुलिस ने उसकी उम्र, माफीनामा और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए एफआईआर में आगे कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है। दिल्ली पुलिस ने आगे कार्रवाई से किया इनकार जानकारी के अनुसार, नोएडा पुलिस द्वारा दर्ज जीरो एफआईआर दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित की गई थी। मामले की जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने निर्णय लिया कि नाबालिग की उम्र, उसके व्यवहार और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को देखते हुए उसके खिलाफ आगे कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। वीडियो जारी कर मांगी थी माफी विवाद के बाद लड़की ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपने बयान पर खेद जताया था। उसने खुद को 15 साल का बताते हुए कहा कि वह दोस्तों के साथ जंतर-मंतर पहुंची थी और वहां मौजूद कुछ लोगों के प्रभाव में आकर उसने आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। वीडियो में उसने कहा कि उससे गंभीर गलती हुई है, उसे अपने व्यवहार पर शर्मिंदगी है और वह पूरे देश से क्षमा मांगती है। लड़की ने इसे अपनी पहली और आखिरी गलती बताते हुए लोगों से उसे माफ करने की अपील की। पीएम मोदी ने भी की थी माफ करने की अपील इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वीडियो संदेश जारी कर कहा था कि बच्चों से गलतियां हो जाती हैं और उन्हें सुधार का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों को अदालतों के चक्कर लगवाने या सजा देने से स्थिति नहीं बदलेगी। प्रधानमंत्री ने समाज से भी अपील की थी कि वे इन बच्चों को माफ करें और उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास करें। क्या था मामला? पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग लड़की का वीडियो सामने आया था, जिसमें वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती दिखाई दी थी। वीडियो वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया और शिकायत के आधार पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसे बाद में जांच के लिए दिल्ली पुलिस को सौंपा गया था। अब दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले के भोगपुरम में करीब ₹18,000 करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण करेंगे। इसके बाद वह कर्नाटक के मैसूरु पहुंचकर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। भोगपुरम एयरपोर्ट का करेंगे उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी आंध्र प्रदेश के भोगपुरम (विजयनगरम) में अल्लूरी सीताराम राजू इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। करीब ₹5,600 करोड़ से अधिक की लागत से तैयार यह ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट राज्य में पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने में मदद करेगा। सेमीकंडक्टर और ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा दौरे के दौरान प्रधानमंत्री आंध्र प्रदेश में सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे। करीब ₹460 करोड़ से अधिक निवेश वाली इस परियोजना को भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा कुरनूल क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं और ट्रांसमिशन सिस्टम का भी शुभारंभ किया जाएगा। सड़क और कनेक्टिविटी परियोजनाओं की सौगात प्रधानमंत्री इस दौरे में आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। करीब ₹1,880 करोड़ से अधिक की सड़क परियोजनाओं से क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होने और यात्रा समय कम होने की उम्मीद है। मैसूरु में विवेक स्मारक का करेंगे उद्घाटन आंध्र प्रदेश के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री मोदी कर्नाटक के मैसूरु जाएंगे। यहां वह स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक युवा केंद्र – विवेक स्मारक का उद्घाटन करेंगे। यह केंद्र युवाओं के लिए शिक्षा, नेतृत्व विकास, योग, ध्यान और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। दक्षिण भारत के विकास पर केंद्र का फोकस प्रधानमंत्री का यह दौरा आंध्र प्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी, सेमीकंडक्टर उद्योग, नवीकरणीय ऊर्जा और सड़क ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं कर्नाटक में युवा विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर सरकार का फोकस रहेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।