political clash

Government and opposition clash in Parliament over Amit Shah's response to police action during Delhi student protests.
संसद में फिर आमने-सामने सरकार और विपक्ष, अमित शाह के जवाब को लेकर सियासी घमासान; NDA की 'मंगल मिलन' रणनीति से राहुल गांधी पर निशाना

Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मॉनसून सत्र में दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार जारी है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर संसद में जवाब मांग रहे हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि गृह मंत्री इस मुद्दे पर सदन में चर्चा का जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष को जवाब के दौरान सदन में मौजूद रहकर शांतिपूर्ण तरीके से चर्चा सुननी चाहिए। इसी राजनीतिक टकराव के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA ने विपक्ष को घेरने की रणनीति तैयार की है। मंगलवार को होने वाली गठबंधन की 'मंगल मिलन' बैठक के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी की गई है। NDA की बैठक में बनेगी विपक्ष को घेरने की रणनीति मॉनसून सत्र के दौरान NDA संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत गठबंधन के सांसदों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक के बाद NDA सांसद ऐसे पोस्टर लेकर सामने आ सकते हैं, जिनमें सरकार का संदेश होगा कि गृह मंत्री चर्चा और जवाब के लिए तैयार हैं, जबकि विपक्ष चर्चा से पीछे हट रहा है। यह रणनीति सीधे तौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी के उस रुख का जवाब है, जिसमें वे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से संसद में जवाब की मांग कर रहे हैं। सरकार का दावा- गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से कहा है कि सरकार छात्रों के आंदोलनों और उनसे जुड़ी घटनाओं पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह इस चर्चा का जवाब देने के लिए भी तैयार हैं। हालांकि सरकार की शर्त है कि गृह मंत्री के जवाब के दौरान विपक्ष सदन में व्यवधान पैदा न करे। सरकार का कहना है कि चर्चा के बाद जवाब देने के दौरान विपक्षी सांसदों का सदन से बाहर चले जाना उचित नहीं होगा। सरकार चाहती है कि गृह मंत्री को बिना व्यवधान अपनी बात रखने का अवसर मिले। राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना दूसरी ओर, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री संसद में आकर विपक्ष के सवालों का सामना करने से बच रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि पिछले कई दिनों से छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति किसने दी। राहुल गांधी की मुख्य मांग क्या है? राहुल गांधी का कहना है कि विपक्ष की मांग किसी सामान्य संसदीय भाषण की नहीं है। उनका जोर इस बात पर है कि गृह मंत्री छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर स्पष्ट जवाब दें। उनके मुताबिक, सरकार को यह बताना चाहिए कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था और गृह मंत्रालय को इस कार्रवाई की जानकारी थी या नहीं। राहुल गांधी ने दावा किया कि यदि गृह मंत्री को इसकी जानकारी थी तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और यदि उन्हें जानकारी नहीं थी तो भी यह गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़ा करता है। छात्रों के प्रदर्शन को लेकर क्यों है विवाद? दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है। विपक्ष इस घटना की जिम्मेदारी तय करने और संसद में सरकार से जवाब की मांग कर रहा है। सरकार दूसरी तरफ चर्चा के लिए तैयार होने की बात कह रही है। यही अंतर अब संसद में राजनीतिक गतिरोध का प्रमुख कारण बना हुआ है। दोनों पक्षों के दावे आमने-सामने पूरे विवाद में सरकार और विपक्ष के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। सरकार का पक्ष: सरकार का कहना है कि छात्र आंदोलनों और संबंधित घटनाओं पर संसद में विस्तृत चर्चा की जा सकती है और गृह मंत्री अमित शाह चर्चा का जवाब देने के लिए तैयार हैं। सरकार विपक्ष से जवाब के दौरान सदन में मौजूद रहने की अपील कर रही है। विपक्ष का पक्ष: राहुल गांधी और कांग्रेस इस मुद्दे पर गृह मंत्री से सीधे जवाब और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। उनका मुख्य सवाल छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल के आदेश को लेकर है। 'मंगल मिलन' के जरिए राजनीतिक संदेश देने की तैयारी NDA की 'मंगल मिलन' बैठक को केवल संसदीय समन्वय तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इस बैठक के जरिए गठबंधन विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी आगे बढ़ा सकता है। यदि NDA सांसद 'गृह मंत्री चर्चा के लिए तैयार, विपक्ष भाग रहा' जैसे संदेश वाले पोस्टर लेकर सामने आते हैं, तो यह सरकार और विपक्ष के बीच चल रहे विवाद को संसद से बाहर भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश होगी। वहीं विपक्ष इस पूरे मामले को छात्रों के अधिकार, पुलिस कार्रवाई और सरकार की जवाबदेही से जोड़कर देख रहा है। संसद में गतिरोध कब खत्म होगा? फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। सरकार चर्चा और जवाब के लिए तैयार होने का दावा कर रही है, जबकि विपक्ष गृह मंत्री से छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जवाब चाहता है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही के दौरान यह मुद्दा राजनीतिक टकराव का केंद्र बना रह सकता है। गतिरोध तभी खत्म होने की संभावना है जब दोनों पक्ष चर्चा के तरीके और गृह मंत्री के जवाब को लेकर किसी साझा रास्ते पर पहुंचें।  

surbhi अगस्त 11, 2026 0
Vijay Political Party
'5 साल नहीं चलेगी विजय सरकार', स्टालिन का बड़ा दावा- 3 से 6 महीने में हो सकता है सत्ता परिवर्तन

चेन्नई, एजेंसियां। तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के प्रमुख एम.के. स्टालिन ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि मौजूदा सरकार अपना पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में अगले तीन से छह महीने के भीतर राजनीतिक परिस्थितियां बदल सकती हैं और मध्यावधि चुनाव की नौबत भी आ सकती है।   चेन्नई में आयोजित डीएमके के एक कार्यक्रम में, जहां विभिन्न दलों के पांच हजार से अधिक नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की, स्टालिन ने कहा कि टीवीके अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी। उनके अनुसार, सरकार उन राजनीतिक दलों के समर्थन से चल रही है जो पहले डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस का हिस्सा थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की स्थिति कमजोर है और उसका भविष्य सहयोगी दलों के समर्थन पर निर्भर है।   स्टालिन ने कार्यकर्ताओं से कहा स्टालिन ने कार्यकर्ताओं से कहा कि राजनीतिक हालात कभी भी बदल सकते हैं, इसलिए चुनाव की तैयारी अभी से शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी को हर परिस्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा और जीत सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि पांच साल इंतजार करने के बजाय संभावित चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठन को अभी से मजबूत करना चाहिए।   स्टालिन का यह बयान  स्टालिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन की तस्वीर तेजी से बदल रही है। विधानसभा चुनाव में बहुमत से पीछे रहने के बाद टीवीके ने कांग्रेस, वामपंथी दलों, वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन से सरकार बनाई थी। हाल ही में वाइको के नेतृत्व वाली एमडीएमके ने भी डीएमके गठबंधन से अलग होकर टीवीके सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे राज्य की राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Mamata Banerjee and Abhishek Banerjee face legal controversy amid rising political tensions in West Bengal
बंगाल की राजनीति में बढ़ा सियासी तनाव, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी कानूनी विवादों में घिरे

पश्चिम बंगाल की राजनीति में सियासी टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की शीर्ष नेतृत्व टीम अब कानूनी विवादों में घिरती नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के खिलाफ सिलीगुड़ी में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गयी है, जबकि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोलकाता के भवानीपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज करायी गयी है। दोनों नेताओं पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और विवादित टिप्पणियों के जरिए सामाजिक तनाव बढ़ाने के आरोप लगाये गये हैं। इन घटनाओं के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। ममता बनर्जी पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप सिलीगुड़ी के साइबर क्राइम थाने में अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह की ओर से ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज करायी गयी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ममता बनर्जी ने 2025 की ईद और 2026 विधानसभा चुनाव से पहले हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान ऐसे बयान दिये, जिनसे हिंदू और सनातन धर्म से जुड़े लोगों की भावनाएं आहत हुईं। शिकायतकर्ता का कहना है कि एक संवैधानिक पद पर रह चुकी नेता को ऐसी टिप्पणी करने से बचना चाहिए, जिससे किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाये जाने का संदेश जाये। पुलिस ने गंभीर धाराओं में दर्ज किया मामला पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सामाजिक शांति भंग करने की कोशिश जैसे आरोप शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, मामले की शुरुआती जांच शुरू कर दी गयी है और आने वाले दिनों में ममता बनर्जी को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है। अभिषेक बनर्जी के सोशल मीडिया पोस्ट पर भी उठा विवाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी भी विवादों में घिर गये हैं। भवानीपुर निवासी अर्नबकांति दास ने उनके खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करायी है। यह विवाद अभिषेक बनर्जी के एक सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर ‘एंटी-बंगाल गुजराती गैंग’ शब्द का इस्तेमाल किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस तरह की टिप्पणी विभिन्न समुदायों के बीच तनाव और नफरत फैलाने का कारण बन सकती है। शिकायतकर्ता ने लगाया राजनीतिक शक्ति के दुरुपयोग का आरोप अर्नबकांति दास ने अपनी शिकायत में कहा है कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि को ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जो सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करें। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की बयानबाजी राजनीतिक लाभ के लिए की जा रही है और इससे राज्य में सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार की ओर से अभी तक FIR दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गयी है, लेकिन मामले में प्रारंभिक जांच शुरू होने की जानकारी सामने आयी है। बीजेपी ने कहा- कानून अपना काम कर रहा है इन घटनाओं के बाद बीजेपी ने टीएमसी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि किसी भी नेता को धर्म या समुदाय विशेष के खिलाफ भड़काऊ बयान देने की छूट नहीं दी जा सकती। पार्टी नेताओं ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और अगर किसी ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बयान दिया है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना स्वाभाविक है। टीएमसी का पलटवार, कहा- विपक्ष दबाना चाहता है आवाज तृणमूल कांग्रेस ने इन कानूनी कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनावी हार के बाद बीजेपी अब अदालतों और पुलिस के जरिए ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। टीएमसी नेताओं का दावा है कि विपक्ष जानबूझकर ऐसे विवाद खड़े कर रहा है ताकि राज्य की राजनीति में तनाव पैदा किया जा सके और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। बढ़ सकती हैं टीएमसी नेतृत्व की कानूनी मुश्किलें राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से जुड़े ये विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकते हैं। अभिषेक बनर्जी पहले से ही कुछ साइबर क्राइम मामलों और नगर निगम के नोटिसों का सामना कर रहे हैं। अब ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद टीएमसी की शीर्ष नेतृत्व टीम की कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। बंगाल की राजनीति में पहले से जारी टकराव के बीच इन घटनाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।  

surbhi मई 29, 2026 0
BJP leaders protesting after the murder of Suvendu Adhikari’s aide Chandranath Rath in West Bengal
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड पर BJP का बड़ा हमला, ममता बनर्जी और अभिषेक की गिरफ्तारी की मांग

Suvendu Adhikari PA Murder: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद राज्य में जारी राजनीतिक हिंसा के बीच भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. भाजपा नेताओं ने इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है. भाजपा नेता नवीन मिश्रा ने लगाया बड़ी साजिश का आरोप भाजपा नेता नवीन मिश्रा ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि चंद्रनाथ रथ की हत्या कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव परिणामों के बाद राज्य में हिंसा फैलाने की पहले से तैयारी की गयी थी. मिश्रा ने दावा किया कि पिछले कई दिनों से भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और यह हमला उसी कड़ी का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग नवीन मिश्रा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति चरम पर पहुंच गयी है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्य में हिंसा और बढ़ सकती है. भाजपा नेताओं का कहना है कि बंगाल में लोकतांत्रिक माहौल खत्म होता जा रहा है और विपक्षी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है. राजीव कुमार की भूमिका पर भी उठाये सवाल भाजपा नेता ने पूर्व पुलिस अधिकारी और वर्तमान राज्यसभा सांसद राजीव कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाये. उन्होंने डीजीपी और एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) से मांग की कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाये. मिश्रा ने दावा किया कि जिस इलाके में यह हत्या हुई, वह बांग्लादेश सीमा के करीब है और इस घटना में कई बड़े लोगों की संलिप्तता हो सकती है. उन्होंने पूरे इलाके के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और सबूतों से छेड़छाड़ रोकने की मांग की. चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद इलाके में तनाव चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद मध्यमग्राम और उत्तर 24 परगना जिले में तनाव का माहौल है. इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. भाजपा कार्यकर्ताओं ने घटना के विरोध में प्रदर्शन भी किया. भाजपा ने मांग की है कि मामले की जांच के लिए एक अधिकार प्राप्त समिति गठित की जाये, ताकि निष्पक्ष तरीके से जांच पूरी हो सके और दोषियों की पहचान हो सके. TMC की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है. हालांकि, पार्टी पहले भी चुनाव बाद हिंसा के आरोपों को खारिज करती रही है और कई घटनाओं को स्थानीय विवाद या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बताया है. फिलहाल चंद्रनाथ रथ हत्याकांड ने बंगाल की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.  

surbhi मई 7, 2026 0
Bulldozer demolishing shop in Kolkata New Market amid political clash between TMC and BJP supporters
बंगाल में ‘बुलडोजर पॉलिटिक्स’ पर बवाल: TMC का आरोप–BJP समर्थकों ने पार्टी दफ्तर पर की तोड़फोड़

West Bengal Post Election Tension: पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद भी राजनीतिक तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के समर्थक राज्य में ‘बुलडोजर एक्शन’ कर रहे हैं और विपक्षी दलों के दफ्तरों को निशाना बना रहे हैं। न्यू मार्केट इलाके का वीडियो वायरल टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें दावा किया गया कि कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में बीजेपी समर्थकों ने बुलडोजर चलाकर तोड़फोड़ की। वीडियो में एक बुलडोजर के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा दिखाई दे रहे हैं। बुलडोजर से एक दुकान को गिराया जा रहा है, जबकि मौके पर मौजूद लोग नारेबाजी और शोर-शराबा करते नजर आ रहे हैं। टीएमसी का आरोप है कि इस दौरान पार्टी के स्थानीय कार्यालय को भी निशाना बनाया गया। TMC का हमला–‘भरोसा खत्म, बुलडोजर शुरू’ तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी के चुनावी नारे ‘भय खत्म, भरोसा शुरू’ पर तंज कसते हुए कहा कि अब हालात इसके उलट हो गए हैं। पार्टी ने अपने पोस्ट में लिखा कि “भरोसा खत्म हो गया है और बुलडोजर शुरू हो गया है।” टीएमसी ने इस घटना को “खुली गुंडागर्दी” करार देते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थकों ने दुकानों को नुकसान पहुंचाया और इलाके में डर का माहौल बनाया। केंद्र और सुरक्षा बलों पर भी सवाल टीएमसी ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधा। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने कार्यकर्ताओं को खुली छूट दे दी है, जिससे वे सड़कों पर मनमानी कर रहे हैं। इसके साथ ही केंद्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। टीएमसी का आरोप है कि सुरक्षा बल घटनास्थल पर मौजूद होने के बावजूद मूकदर्शक बने रहे। चुनाव के बाद हिंसा पर बढ़ी सियासत पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार ‘बुलडोजर’ का मुद्दा सियासत का नया केंद्र बन गया है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक भारतीय जनता पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

surbhi मई 6, 2026 0
Clashes and vandalism reported after Bengal election results, damaged party office and police at scene
बंगाल रिजल्ट के बाद हिंसा: भारतीय जनता पार्टी पर TMC कार्यालयों पर कब्जे के आरोप, कई जिलों में तनाव

West Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य के कई जिलों में हिंसा और उपद्रव की खबरें सामने आई हैं। भारतीय जनता पार्टी की बड़ी जीत के बाद राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया है, वहीं तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। टॉलीगंज में TMC कार्यालय पर कब्जे का आरोप कोलकाता के टॉलीगंज विधानसभा क्षेत्र से अरूप बिश्वास की हार के बाद विवाद और बढ़ गया। आरोप है कि भाजपा समर्थकों ने उनके पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया और वहां तृणमूल का झंडा हटाकर भगवा झंडा फहरा दिया। इसी तरह डबग्राम-फुलबारी और बहरामपुर से भी हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी की खबरें सामने आई हैं। तृणमूल का आरोप है कि भाजपा समर्थित लोगों ने पार्टी कार्यालयों और नेताओं के घरों को निशाना बनाया। भवानीपुर में पार्षद कार्यालय पर हमला भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में भी हालात तनावपूर्ण रहे। वार्ड नंबर 70 के नॉर्दर्न पार्क इलाके में तृणमूल कांग्रेस के पार्षद असीम कुमार बोस के कार्यालय पर हमला किया गया। बताया जा रहा है कि उपद्रवियों ने कार्यालय का ताला तोड़ा, अंदर घुसकर तोड़फोड़ की और सामान बाहर निकालकर आग लगाने की कोशिश की। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया।   जिलों में फैली अशांति चुनाव नतीजे सामने आने के बाद उत्तर से दक्षिण बंगाल तक कई इलाकों में झड़पों की खबरें आई हैं। बहरामपुर में तृणमूल पंचायत उप-प्रमुख के घर में तोड़फोड़ और कई कार्यालयों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। चुनाव आयोग और केंद्र की अपील स्थिति को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं केंद्र की ओर से भी शांति बनाए रखने और “बदले की राजनीति” से दूर रहने की अपील की गई है। राजनीतिक तनाव के बीच कानून-व्यवस्था चुनौती राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद पैदा हुआ यह तनाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब नजर इस बात पर है कि हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं और नई सरकार कानून-व्यवस्था को कैसे संभालती है।  

surbhi मई 5, 2026 0
Bengal elections 2026
बंगाल के आसनसोल-बांकुड़ा में काउंटिंग के बीच हिंसा

कोलकाता, एजेंसियां।  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच हिंसा की खबरें आ रही हैं। आसनसोल और बांकुरा में बीजेपी और टीएमसी समर्थकों के बीच झड़प हो गई। देखते ही देखते हालात बिगड़ने लगे और स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। बताया जा रहा है कि मतगणना के शुरुआती रुझानों के बीच अलग-अलग दलों के समर्थक बड़ी संख्या में केंद्रों के बाहर जमा थे। इसी दौरान नारेबाजी को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पहले कहासुनी हुई, फिर मामला धक्का-मुक्की और झड़प तक पहुंच गया।   हालात बिगड़ते ही पुलिस का एक्शन स्थिति हाथ से निकलती देख मौके पर मौजूद पुलिस और सुरक्षाबलों ने तुरंत मोर्चा संभाला। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया और लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के बाद प्रशासन ने दोनों जगहों पर सुरक्षा और सख्त कर दी है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी तरह की और गड़बड़ी न हो। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।   मतगणना जारी, प्रशासन सतर्क इन घटनाओं के बावजूद राज्यभर में मतगणना का काम जारी है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है और हर संवेदनशील इलाके पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

Unknown मई 4, 2026 0
BJP leaders marching to Election Commission office alleging voter intimidation in West Bengal elections 2026
बंगाल चुनाव में आरोप-प्रत्यारोप तेज: बीजेपी का चुनाव आयोग तक मार्च, TMC पर धमकी के आरोप

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक प्रतिनिधिमंडल ने Election Commission of India से मुलाकात कर राज्य में चुनावी माहौल को लेकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि मतदाताओं को डराकर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। क्या है पूरा मामला? बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग को सौंपी याचिका में दावा किया कि राज्य के कई इलाकों में मतदाताओं को घर-घर जाकर धमकाया जा रहा है। इस मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री Kiren Rijiju ने कहा कि: लोगों को बीजेपी को वोट न देने के लिए दबाव डाला जा रहा है चुनाव प्रक्रिया को “हाईजैक” करने की कोशिश हो रही है मतदाताओं को डराकर और दबाकर प्रभावित किया जा रहा है ममता सरकार पर सीधे आरोप रिजिजू ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और उनकी पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) पर निशाना साधते हुए कहा कि: पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को धमका रहे हैं पिछले चुनावों में भी इसी तरह के तरीके अपनाए गए राज्य का पुलिस और प्रशासन TMC के प्रभाव में काम कर रहा है चुनाव आयोग का जवाब चुनाव आयोग ने बीजेपी प्रतिनिधिमंडल की शिकायतों को गंभीरता से सुनने के बाद आश्वासन दिया कि: राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जाएंगे सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे कब होंगे चुनाव? पश्चिम बंगाल की 294 सीटों पर: मतदान: 23 अप्रैल और 29 अप्रैल मतगणना: 4 मई इस बीच, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होते जा रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल और अधिक संवेदनशील बनता दिख रहा है।  

surbhi मार्च 30, 2026 0
BJP leader Suvendu Adhikari confronting police during late-night election tension in Alipore
बंगाल चुनाव में आधी रात हंगामा: अलीपुर में शुभेंदु अधिकारी और पुलिस आमने-सामने, घंटों चला तनाव

पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच अलीपुर से एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। देर रात हुए इस घटनाक्रम में भाजपा नेता और भवानीपुर सीट से उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी और पुलिस आमने-सामने आ गए, जिससे इलाके में कई घंटों तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में चुनावी शिविर लगाने के लिए बांस से लदा एक ट्रक ले जाया जा रहा था। यह ट्रक अलीपुर थाना क्षेत्र के अनाथालय रोड के पास पहुंचा, जहां पुलिस ने उसे रोक लिया। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने बिना स्पष्ट कारण के ट्रक को रोका, जिसके बाद मौके पर मौजूद समर्थकों ने विरोध शुरू कर दिया। आधी रात पहुंचे शुभेंदु अधिकारी घटना की जानकारी मिलते ही प्रचार से लौट रहे शुभेंदु अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने मौके से ही कोलकाता पुलिस आयुक्त को फोन कर हस्तक्षेप की मांग की और इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। इस दौरान पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस हुई, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। घंटों चला तनाव, भारी पुलिस बल तैनात घटना के बाद इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। अलीपुर के ओरफनगंज रोड से सटे क्षेत्र में देर रात तक माहौल गरम रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, जिससे स्थिति नियंत्रण में लाने में समय लगा। अधिकारियों के दखल के बाद सुलझा मामला आखिरकार, वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति शांत हुई और पुलिस ने बांस से लदे ट्रक को जाने की अनुमति दे दी। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी भी घटनास्थल से रवाना हो गए। चुनावी माहौल में बढ़ी सियासी गर्मी इस घटना ने चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है। विपक्षी दल जहां इसे प्रशासनिक दखल बता रहे हैं, वहीं प्रशासन की ओर से इस पर अभी विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 7, 2026 0