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Bengal Bulldozer Row Escalates

बंगाल में ‘बुलडोजर पॉलिटिक्स’ पर बवाल: TMC का आरोप–BJP समर्थकों ने पार्टी दफ्तर पर की तोड़फोड़

surbhi मई 6, 2026 0
Bulldozer demolishing shop in Kolkata New Market amid political clash between TMC and BJP supporters
Bulldozer Politics Clash Kolkata

West Bengal Post Election Tension: पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद भी राजनीतिक तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के समर्थक राज्य में ‘बुलडोजर एक्शन’ कर रहे हैं और विपक्षी दलों के दफ्तरों को निशाना बना रहे हैं।

न्यू मार्केट इलाके का वीडियो वायरल

टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें दावा किया गया कि कोलकाता के न्यू मार्केट इलाके में बीजेपी समर्थकों ने बुलडोजर चलाकर तोड़फोड़ की।

वीडियो में एक बुलडोजर के आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा दिखाई दे रहे हैं। बुलडोजर से एक दुकान को गिराया जा रहा है, जबकि मौके पर मौजूद लोग नारेबाजी और शोर-शराबा करते नजर आ रहे हैं।

टीएमसी का आरोप है कि इस दौरान पार्टी के स्थानीय कार्यालय को भी निशाना बनाया गया।

TMC का हमला–‘भरोसा खत्म, बुलडोजर शुरू’

तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी के चुनावी नारे ‘भय खत्म, भरोसा शुरू’ पर तंज कसते हुए कहा कि अब हालात इसके उलट हो गए हैं।

पार्टी ने अपने पोस्ट में लिखा कि “भरोसा खत्म हो गया है और बुलडोजर शुरू हो गया है।”
टीएमसी ने इस घटना को “खुली गुंडागर्दी” करार देते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी समर्थकों ने दुकानों को नुकसान पहुंचाया और इलाके में डर का माहौल बनाया।

केंद्र और सुरक्षा बलों पर भी सवाल

टीएमसी ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर भी निशाना साधा। पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने कार्यकर्ताओं को खुली छूट दे दी है, जिससे वे सड़कों पर मनमानी कर रहे हैं।

इसके साथ ही केंद्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। टीएमसी का आरोप है कि सुरक्षा बल घटनास्थल पर मौजूद होने के बावजूद मूकदर्शक बने रहे।

चुनाव के बाद हिंसा पर बढ़ी सियासत

पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार ‘बुलडोजर’ का मुद्दा सियासत का नया केंद्र बन गया है।

हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक भारतीय जनता पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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High waves crash along Goa’s coastline as authorities warn tourists to avoid entering the sea during monsoon.
मानसून में समुद्र बना खतरा, गोवा प्रशासन ने पर्यटकों को जारी की चेतावनी

  गोवा में मानसून के दौरान समुद्र का रौद्र रूप लगातार देखने को मिल रहा है। हाल के दिनों में कई हादसों के बाद प्रशासन और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि खराब मौसम और उफनती लहरों के कारण समुद्र तटों पर जोखिम काफी बढ़ गया है। दृष्टि मरीन सहित सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों को चेतावनी दे रही हैं कि वे समुद्र में प्रवेश करने या खतरनाक चट्टानी इलाकों में जाने से बचें। इसके बावजूद कई पर्यटक निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। समुद्र तटों पर जारी की गई विशेष चेतावनी गोवा सरकार की समुद्र तट सुरक्षा एजेंसी दृष्टि मरीन ने मानसून सीजन को देखते हुए एडवाइजरी जारी की है। एजेंसी ने लोगों से अपील की है कि वे समुद्र में उतरने से बचें और बीचों पर लगाए गए सुरक्षा संकेतों का पालन करें। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा मौसम परिस्थितियों में समुद्र की धाराएं सामान्य दिनों की तुलना में अधिक खतरनाक हो गई हैं। फिसलन भरी चट्टानें बढ़ा रही हैं जोखिम बारिश के कारण समुद्र किनारे मौजूद चट्टानें बेहद फिसलन भरी हो गई हैं। ऐसे में फोटो खिंचवाने या वीडियो बनाने के लिए इन चट्टानों पर जाना गंभीर खतरे को न्योता देने जैसा हो सकता है। अधिकारियों ने बताया कि कई स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, जिनमें लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। तेज लहरें अचानक खींच सकती हैं समुद्र की ओर सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मानसून के दौरान समुद्र की ऊंची और तेज लहरें कुछ ही सेकंड में किसी व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकती हैं। यही वजह है कि पर्यटकों को समुद्र के किनारे मौजूद संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। वाटर स्पोर्ट्स और तैराकी पर प्रतिबंध प्रशासन ने खराब मौसम को देखते हुए समुद्र में तैराकी, तटीय जल क्रीड़ा गतिविधियों और मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगा दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे रोमांच या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालें। अधिकारियों का कहना है कि चेतावनियों की अनदेखी गंभीर हादसों का कारण बन सकती है। इसलिए मानसून के दौरान समुद्र तटों पर सतर्कता बरतना और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Rescue teams work at the collapsed construction site in Kolkata’s Taratala area after a deadly roof collapse.

तारातला हादसे के बाद सरकार का बड़ा फैसला, SIT गठित; कोलकाता में सभी निर्माण कार्यों पर रोक

Indian passport displayed alongside official documents amid discussion on proof of Indian citizenship.

MEA के बयान से छिड़ी बहस: आखिर भारतीय नागरिकता साबित कैसे होती है? क्या पासपोर्ट ही पर्याप्त है?

Officials discuss ADB-backed industrial corridor and infrastructure development plans for West Bengal at Nabanna.

एडीबी से पश्चिम बंगाल के विकास को नई गति, औद्योगिक कॉरिडोर और पर्यटन पर होगा बड़ा निवेश प्रस्ताव

कोलकाता में गोदाम की इमारत ढही, 5 मजदूरों की मौत; राज्यभर में निर्माण परियोजनाओं की जांच के आदेश

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में एक निर्माणाधीन गोदाम की इमारत ढहने से कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई मजदूर घायल हो गए। हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। प्रशासन, दमकल विभाग और बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं।   कई मजदूरों को सुरक्षित निकाला गया   अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय निर्माण स्थल पर बड़ी संख्या में मजदूर काम कर रहे थे। अब तक करीब 20 लोगों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।   मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश   घटना के बाद मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही कोलकाता नगर निगम क्षेत्र में निर्माणाधीन व्यावसायिक परियोजनाओं की सुरक्षा जांच पूरी होने तक कई परियोजनाओं पर अस्थायी रोक लगाने की घोषणा की गई है।   सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल   इस हादसे के बाद निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन यह जांच कर रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सभी आवश्यक नियमों का पालन किया गया था या नहीं।   राज्यभर में बढ़ी सतर्कता   घटना के बाद पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में चल रही बड़ी निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी गई है। अधिकारियों को सुरक्षा मानकों की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

anjali kumari जून 25, 2026 0
Today Horoscope

Today Horoscope: आज का राशिफल  25 जून 2026, बृहस्पतिवार

Aaj Ka Itihas

25 जून की महत्त्वपूर्ण  घटनाएं

Vedic Almanac

Vedic Almanac: l वैदिक पंचांग l 25 जून 2026, गुरूवार

Officials inspect Tarakeswar Temple route ahead of Shravani Mela as encroachment removal drive begins.
सावन से पहले तारकेश्वर मंदिर मार्ग से हटेगा अतिक्रमण, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चलेगा बुलडोजर

  पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध तारकेश्वर मंदिर में आगामी श्रावणी मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर के मुख्य प्रवेश मार्ग से अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया गया है। राज्य की नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने स्पष्ट किया है कि सावन शुरू होने से पहले मंदिर तक जाने वाले रास्ते को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। अवैध दुकानों पर होगी कार्रवाई तारकेश्वर मंदिर परिसर का निरीक्षण करने पहुंचीं मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कहा कि मंदिर के प्रवेश मार्ग की चौड़ाई वर्तमान में पर्याप्त नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए एक विशेष योजना तैयार की जा रही है, जिसके तहत मार्ग के दोनों ओर अवैध रूप से बनाई गई दुकानों और अन्य अतिक्रमणों को हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन आवश्यक कार्रवाई करेगा। अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद मंत्री ने अतिथि निवास में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में श्रावणी मेले के सफल आयोजन, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन मेले के दौरान सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा। सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष जोर जिलाधिकारी खुर्शीद अली क़ादरी ने बताया कि श्रावण माह के दौरान लाखों श्रद्धालु तारकेश्वर मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और सुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने बताया कि दूध पोखर में स्नान के बाद मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर विशेष मैट बिछाए जाएंगे। इसके अलावा रास्ते के दोनों ओर भगवान शिव और शिव पुराण से संबंधित चित्रों की प्रदर्शनी तथा आकर्षक प्रकाश व्यवस्था की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव मिल सके। स्वच्छता अभियान पर रहेगा विशेष ध्यान प्रशासन ने मेले के दौरान साफ-सफाई को लेकर भी विशेष योजना बनाई है। अधिकारियों के अनुसार पूरे मेले के दौरान कचरा प्रबंधन, नियमित सफाई और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती की जाएगी। कांवर यात्रियों के मार्ग की भी होगी मरम्मत चांपदानी के विधायक दिलीप सिंह ने बताया कि बैद्यवाटी के निमाई तीर्थ घाट से जल लेकर तारकेश्वर पहुंचने वाले कांवर यात्रियों के मार्ग की भी समीक्षा की गई है। लगभग 40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर जहां-जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, वहां तत्काल मरम्मत का कार्य कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बरसात के बाद इन सड़कों के स्थायी पुनर्निर्माण की भी योजना बनाई गई है, ताकि भविष्य में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की तैयारी प्रशासन को उम्मीद है कि इस वर्ष भी श्रावणी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु तारकेश्वर मंदिर पहुंचेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।  

Deepshikha जून 24, 2026 0
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