नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की न्यायिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Supreme Court of India में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की जाएगी। सरकार इस बदलाव को लागू करने के लिए संसद के आगामी सत्र में एक संशोधन विधेयक पेश करेगी।
केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में एक मुख्य न्यायाधीश और 33 अन्य जज कार्यरत हैं। प्रस्तावित संशोधन के लागू होने के बाद चार नए न्यायाधीशों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो जाएगा, जिससे अदालत की कुल क्षमता बढ़ेगी और मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी।
दरअसल, देश की शीर्ष अदालत पर लगातार बढ़ते मामलों का दबाव लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। हजारों की संख्या में लंबित मामलों के कारण कई महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई में देरी होती रही है। जजों की संख्या बढ़ने से न केवल अधिक बेंच गठित की जा सकेंगी, बल्कि संवैधानिक और जटिल मामलों की सुनवाई भी तेज़ गति से संभव हो सकेगी। इससे न्याय वितरण प्रणाली में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्यों जरूरी है यह फैसला?
भारत में न्यायिक प्रक्रिया की सबसे बड़ी चुनौती मामलों का लंबित रहना है। सुप्रीम कोर्ट में कई ऐसे केस हैं, जो वर्षों से विचाराधीन हैं। जजों की संख्या बढ़ने से केसों के निपटारे की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे आम नागरिकों को समय पर न्याय मिल सकेगा। इसके अलावा, बड़ी संवैधानिक पीठों के गठन में भी आसानी होगी, जिससे महत्वपूर्ण फैसलों में देरी नहीं होगी।
इतिहास में कई बार बढ़ी संख्या
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या समय-समय पर बढ़ाई जाती रही है। 1956 के अधिनियम के तहत शुरुआत में जजों की संख्या सीमित थी। इसके बाद 1960 में इसे बढ़ाकर 13 किया गया, फिर 1986 में 25 तक पहुंचाया गया। 2009 में यह संख्या 30 और 2019 में बढ़ाकर 34 कर दी गई थी। अब एक बार फिर न्यायिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसमें बढ़ोतरी की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता में सुधार होगा। अधिक जज होने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी, लंबित मामलों का बोझ कम होगा और न्याय प्रणाली अधिक सुलभ व प्रभावी बनेगी। साथ ही, यह कदम देश में कानून के शासन को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने माना कि परीक्षा व्यवस्था में चूक हुई है और सरकार इसकी जिम्मेदारी लेती है। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। 21 जून को होगा NEET री-एग्जाम शिक्षा मंत्री ने बताया कि NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बार परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ कराया जाएगा ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। उन्होंने कहा, “हम सभी छात्रों की चिंता और परेशानी को समझते हैं, लेकिन देशहित और ईमानदार अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना पड़ा।” ‘गेस पेपर’ की आड़ में लीक हुआ असली पेपर धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि 3 मई को परीक्षा होने के बाद 7 मई को National Testing Agency यानी NTA को शिकायत मिली थी कि कुछ ‘गेस पेपर’ में वही सवाल मौजूद थे, जो असली परीक्षा में पूछे गए। इसके बाद हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने तुरंत जांच शुरू की और मामला सरकारी एजेंसियों को सौंपा गया। 12 मई तक जांच में यह पुष्टि हो गई कि ‘गेस पेपर’ के नाम पर असली प्रश्नपत्र लीक हुआ था। इसी के बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। ‘काबिल छात्रों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे’ शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि कोई मेहनती और योग्य छात्र एग्जाम माफिया या फर्जी अभ्यर्थियों की वजह से नुकसान उठाए। उन्होंने कहा कि पिछली गड़बड़ियों के बाद बनाई गई राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशों को लागू किया गया था, इसके बावजूद यह घटना हुई। उन्होंने कहा, “जो भी गलतियां हुई हैं, उसकी जिम्मेदारी सरकार लेती है। हमारी नीति गलत कामों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की है।” CBI कर रही जांच मामले की जांच अब Central Bureau of Investigation यानी CBI को सौंप दी गई है। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कई सोशल मीडिया हैंडल्स गलत जानकारी फैलाकर सिस्टम को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए निष्पक्ष जांच जरूरी थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि CBI जल्द दोषियों को सामने लाएगी और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगले साल से CBT मोड में होगी परीक्षा शिक्षा मंत्री ने यह भी ऐलान किया कि अगले साल से NEET परीक्षा CBT यानी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट मोड में आयोजित की जाएगी। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। री-एग्जाम के लिए नहीं लगेगी फीस NTA ने साफ किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए छात्रों से कोई अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी। छात्रों को परीक्षा केंद्र चुनने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। इसके अलावा अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा की अवधि भी 15 मिनट बढ़ा दी गई है। अब परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चलेगी।
1610 – पेरिस की संसद ने लुई तेरहवें को फ्रांस का राजा नियुक्त किया। 1701 - स्पेनिश युद्ध उत्तराधिकार के लिए शुरू हुआ। 1718 - जेम्स पक्ले जो की एक लंदन के वकील थे, दुनिया की पहली मशीन गन बनाया। 1730 - रॉबर्ट वाल्पोल प्रभावी रूप से ब्रिटेन के प्रथम प्रधान मंत्री बनाये गए। 1788 - ऑस्ट्रेलियाई सीमावर्ती युद्ध शुरू हुए। 1796 – फ्रांसीसी सैनिकों ने मिलान पर कब्जा किया। 1811 – पराग्वे ने स्पेन से स्वतंत्रता की घोषणा की। 1829 - डेमियन साइरिल द्वारा एस्त्रियन नामक एक उपकरण के लिए पेटेंट लागू किया गया। 1851 - पहली ऑस्ट्रेलियाई गोल्ड रश की घोषणा की गई, हालांकि खोज तीन महीने पहले की गई थी। 1858 - रॉयल इटालियन ओपेरा कोवेन्ट गार्डन लंदन में खोला गया। 1873 – इंग्लैंड में ईस्ट इंडिया कंपनी को 1 जून, 1874 से भंग करने का प्रस्ताव पारित किया गया। 1878 - टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना की गयी। 1891 - फिलिप्स एंड कंपनी को हॉलैंड में स्थापित किया गया। 1905 – अमेरिका के नवाडा में लास वेगास की स्थापना हुई। 1918 – अमेरिका में पहली हवाई डाक सेवा की शुरुआत हुई। 1925 – पहला अरेबिक कम्यूनिस्ट न्यूजपेपर शुरू किया गया। 1930 - विश्व की पहली महिला एयरहोस्टेस ऐलन चर्च ने आॅकलैंड–शिकागो फ्लाइट में उड़ान भरी। 1935 – मास्को मेट्रो को लोगों के लिए खोला गया। 1939 - श्री चिप्स द्वारा बनायीं गयी रोमांटिक नाटक फिल्म अलविदा का ब्रिटेन में प्रीमियर किया गया। 1940 – मैक और डिक मैकडोनाल्ड नाम के दो भाइयों ने कैलिफोर्निया के सैन बर्नार्डीनो में मैकडोनाल्ड रेस्त्रां की शुरुआत की। 1948 – ऑस्ट्रेलिया ने एसेक्स के खिलाफ क्रिकेट मैच में एक दिन में 721 रन बनाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया। 1955 – अमेरिका के नेवाडा में परीक्षण स्थल पर परमाणु परीक्षण किया गया। 1957 – ब्रिटेन के सप्लाई मंत्रालय ने घोषणा की थी प्रशांत महासागर में किए गए श्रृखंलाबद्ध परीक्षणों के अंतर्गत पहले हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया गया था। 1958 – भारत में उपहार कर की शुरुआत हुयी। 1958 – सोवियत संघ ने स्पूतनिक तृतीय राकेट प्रक्षेपित किया। 1974 – इजरायल के एक स्कूल में बंधक बनाईं गई 16 किशोरियों की मौत हुई। साथ में तीन फ़लस्तीनी भी मारे गए। 1985 - सोवियत संघ को वर्गीकृत नौसैनिक संचार पास करने के लिए एफबीआई द्वारा जॉन एंथनी वाकर जूनियर को गिरफ्तार किया गया। 1988 – सोवियत संघ ने अफगानिस्तान से अपने एक लाख 15 हजार सैनिकों को वापस बुलाना शुरू किया। 1991 - श्रीमती एडिथ क्रेसन फ़्रांस की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। 1993 – संयुक्त राष्ट्र ने 15 मई को अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। 1995 – चीन ने लोप नोर, पीआरसी में परमाणु परीक्षण किया। 1995 - एलीसन गारग्रीब्स बिना आक्सीजन सिलैडंर के एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचने वाली पहली महिला बनीं। 1999 - कुवैती सरकार द्वारा महिलाओं को संसदीय चुनावों में मताधिकार का हक प्रदत्त। 2001 - इटली में दक्षिणपंथी गठबंधन को बहुमत। 2002 - संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इराक पर प्रतिबंधों का अनुमोदन किया। 2003 - इराक युद्ध में अमेरिकी सेनाओं के कमांडर टामी फ़्रैक्स के ख़िलाफ़ ब्रुसेल्स की अदालत में युद्ध सम्बन्धी मुकदमा दायर। 2004 - ‘आर्सेनल फुटबॉल क्लब’ इंग्लिश प्रीमियर लीग में एक भी मैच हारे बिना चैंपियन बनने वाली पहली टीम बनी। 2005 - 20 साल के बाद कनाडा में भारत का विमान उतरा। 2008 - भारतीय मूल की मंजूला सूद ब्रिटेन में मेयर बनने वाली पहली एशियाई महिला बनीं (2005 का भी वर्णन मिलता है इसलिए कन्फर्म कर लें)। 2008 - श्रीलंका सरकार ने आतंकवादी संगठन लिट्टे पर प्रतिबन्ध दो साल के लिए बढ़ाया। 2008 – कैलिफोर्निया मैसाच्युसेट्स के बाद समलैंगिक विवाह को वैध घोषित करने वाला अमेरिका का दूसरा प्रांत बना। 2013 – इराक में तीन दिनों तक हिंसा में 389 लोगों की मौत हुई। 2019 - कैलास भू क्षेत्र बनेगा World Heritage, विश्व धरोहर की अंतरिम सूची में हुआ शामिल। 2019 - फ्रांस के मशहूर चित्रकार क्लॉड मोनेट की पेंटिंग mules एक नीलामी में रिकॉर्ड 11 करोड़ डॉलर (करीब 770 करोड़ रुपये) में बिकी। मोनेट ने इसे 1890-91 में बनाया था। 2019 - दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट पर रिकॉर्ड 23वीं बार पहुंचकर नेपाल के कामी रिता शेरपा (49) ने इतिहास रच दिया । 2020 - विश्व बैंक ने भारत के कोविड-19 सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम में तेजी लाने के लिए एक अरब डॉलर की सहायता राशि मंजूर की। 2020 - म्यांमा की सेना ने आज भारत को पूर्वोतर भारत से 22 उग्रवादी सौंपे। 2021 - इज़राइल ने गाजा पट्टी को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए जिसमें दस लोग मारे गए। 2021 - चीन मंगल पर अपना रोवर जू रॉन्ग उतारने में सफल हुआ व अमेरिका के बाद ऐसा करने वाला दूसरा देश बना। 2022 - चुनाव आयोग के सबसे वरिष्ठ सदस्य राजीव कुमार ने देश के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यभार संभाला। 2022 - भारत की पुरुष बैडमिंटन टीम ने थॉमस कप 2022 जीतकर इतिहास रचा। 14 बार के चैंपियन इंडोनेशिया को 3-0 के अंतर हराया। 2022 - त्रिपुरा में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष माणिक साहा ने नये मुख्यमंत्री की शपथ ली। 2022 - यूक्रेन की वायु सेना ने 11 रूसी हवाई ठिकानों को नष्ट किया। 2023 - एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने वायु सेना के उप प्रमुख का पदभार संभाला। 2023 - भारत और ईएफटीए ने एक नए व्यापार और साझेदारी समझौते (टीईपीए) की दिशा में कदम बढ़ाए। 2023 - जी20 संस्कृति समूह ग्रुप (सीडब्ल्यूजी) की दूसरी बैठक भुवनेश्वर में शुरू हुई। 2023 - भारत की जी-20 अध्यक्षता के अंतर्गत तीसरी ऊर्जा परिवर्तन कार्य समूह (ईटीडब्ल्यूजी) की बैठक मुंबई में शुरू हुई। 2024 - सिंगापुर के नए प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने पद की शपथ लेते समय "आज से बेहतर कल" बनाने की शपथ ली। 2024 - 77वें कान फिल्म महोत्सव में भारत मंडप का उद्घाटन किया गया। 15 मई को जन्मे व्यक्ति 1817 - देवेन्द्रनाथ ठाकुर, प्रख्यात विद्वान् और धार्मिक नेता। 1892 - हरि विनायक पाटस्कर - भारतीय राजनीतिज्ञ तथा मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल। 1907 – शहीदे आजम भगत सिंह और राजगुरु के साथ हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर लटकने वाले सुखदेव थापर का जन्म हुआ। 1922 - नजीर हुसैन - भारतीय फ़िल्म अभिनेता थे। इन्हें नासिर हुसैन के रूप में भी जाना जाता है। 1923 - जॉनी वॉकर, भारतीय हास्य अभिनेता। 1926 - महेन्द्रनाथ मुल्ला - भारतीय नौसेना के जांबाज अफसरों में एक। 1933 - टी. एन. शेषन - भारत के भूतपूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त। 1937 - मैडेलिन अल्ब्राइट - पूर्व संयुक्त राज्य अमेरिका की राजनीतिज्ञा / अमेरिकी इतिहास में पहली महिला संयुक्त राज्य सचिव । 1957 - सुशील चंद्रा भारत के चुनाव आयुक्त व इसके पूर्व वे सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज के अध्यक्ष रह चुके। 1965 - माधुरी दीक्षित नेने - बालीवुड अभिनेत्री (कुछ जगह 1967 का भी वर्णन मिलता है इसलिए कन्फर्म कर लें)। 15 मई को हुए निधन 1958 - यदुनाथ सरकार - प्रसिद्ध इतिहासकार। 1991 - कालिंदी चरण पाणिग्रही - साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित। 1993 - के.एम. करिअप्पा (कोंडडेरा मडप्पा करिअप्पा)- भारत के 'प्रथम आर्मी कमाण्डर इन चीफ़'। 1998 - राधिका रंजन गुप्ता भारतीय राजनीतिज्ञ , त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री। 2010 - भैरोंसिंह शेखावत - राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री व भारत के उपराष्ट्रपति। 2011 - महेन्द्र सिंह टिकैत - उत्तर प्रदेश के किसान नेता तथा भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष थे। 2017 - सुब्रमण्यम रामास्वामी - भारतीय राज्य पुदुचेरी के भूतपूर्व चौथे मुख्यमंत्री थे। 2021 - मुदुंबई शेषाचल नरसिम्हन FRS - एक भारतीय गणितज्ञ थे । 2021 - श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी जोगिंदर सिंह वेदांती का निधन हुआ। 2021 - कोरोना से संक्रमित वरिष्ठ पत्रकार एवं फाइनेंशियल एक्सप्रेस के प्रबंधक संपादक सुनील जैन का दिल्ली एम्स में निधन हुआ। 2023 - कनाडाई कर्लिंग इतिहास में सबसे सफल स्किप्स में से एक रॉन नॉर्थकॉट (87) का निधन हुआ। 2024 - अमेरिकी बास्केटबॉल कोच टेट्स लॉक (87) का निधन हुआ। 2024 - केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे सिंधिया का दिल्ली एम्स में निधन हुआ। 2024 - पूर्व राज्यपाल व राजस्थान की पूर्व डिप्टी सीएम रहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. कमला बेनीवाल (97) का निधन हुआ। 15 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव मॉं आनन्दमयी जयन्ती (ज्येष्ठ कृष्ण तृतीया)। महान क्रान्तिकारी श्री सुखदेव जयन्ती। श्री भैरोंसिंह शेखावत स्मृति दिवस। श्री सुब्रमण्यम रामास्वामी स्मृति दिवस। श्री राधिका रंजन गुप्ता स्मृति दिवस। विश्व परिवार दिवस। अन्तर्राष्ट्रीय कंगारू देखरेख जागरूकता दिवस। कृपया ध्यान दें यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। राज्य की नई भाजपा सरकार ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना को लागू करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस फैसले के बाद राज्य के लाखों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे “डबल इंजन सरकार” का लाभ बताया। माना जा रहा है कि यह योजना बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। क्या है आयुष्मान भारत योजना आयुष्मान भारत दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में शामिल है। इसके तहत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। योजना का लाभ सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में मिलेगा। गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान मरीजों को अपनी जेब से खर्च नहीं करना पड़ेगा। किन लोगों को मिलेगा फायदा योजना का लाभ सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (SECC) में शामिल गरीब परिवारों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को मिलेगा। पात्र परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। कैसे बनेगा आयुष्मान कार्ड सरकार ने कार्ड बनाने की प्रक्रिया को आसान रखने की बात कही है। पात्र सूची में नाम होने पर आधार आधारित सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद सरकारी सहायता केंद्र या योजना से जुड़े अस्पतालों के माध्यम से आयुष्मान कार्ड जारी किया जाएगा। इसी कार्ड के जरिए मरीज कैशलेस इलाज का लाभ उठा सकेंगे। राज्य के बाहर भी मिलेगा इलाज इस योजना के लागू होने के बाद बंगाल के लोग देशभर के सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे। यानी दूसरे राज्यों में भी आयुष्मान भारत का लाभ मिलेगा। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य हर जरूरतमंद तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना है।