फैशन और ब्यूटी

Aishwarya Rai’s Most Iconic Cannes Fashion Moments

दो दशक से Cannes की क्वीन बनी हुई हैं Aishwarya Rai Bachchan, देखें उनके सबसे आइकॉनिक लुक्स

surbhi मई 14, 2026 0
Aishwarya Rai Bachchan showcasing iconic Cannes Film Festival looks over two decades on the red carpet
Aishwarya Rai Iconic Cannes Fashion Looks

Aishwarya Rai Bachchan और Cannes Film Festival का रिश्ता अब फैशन इतिहास का हिस्सा बन चुका है। पिछले दो दशकों में ऐश्वर्या ने हर साल Cannes रेड कार्पेट पर अपने अनोखे और शानदार फैशन स्टेटमेंट से दुनियाभर का ध्यान खींचा है। कभी पारंपरिक भारतीय साड़ी में, तो कभी ग्लैमरस बॉलगाउन और avant-garde couture में, ऐश्वर्या ने हर बार खुद को नए अंदाज़ में पेश किया।

2002: Cannes में यादगार डेब्यू

ऐश्वर्या ने 2002 में Cannes में अपना डेब्यू पीले रंग की Neeta Lulla साड़ी पहनकर किया था। यह लुक आज भी उनके सबसे चर्चित Cannes moments में गिना जाता है। अगले साल उन्होंने डिजाइनर के लहंगे और फिर नियॉन ग्रीन साड़ी में रेड कार्पेट पर अपनी अलग पहचान बनाई।

वेस्टर्न ग्लैमर की ओर बढ़ता फैशन सफर

2004 में कट-आउट गाउन और 2005 में plunging neckline वाले Gucci गाउन के साथ ऐश्वर्या का स्टाइल पूरी तरह ग्लोबल ग्लैमर की ओर बढ़ता दिखा।

2006 में उन्होंने strapless Elie Saab gown और snake-inspired neckpiece पहनकर Cannes में शोस्टॉपर एंट्री दी। शादी के बाद 2007 में उन्होंने पति Abhishek Bachchan के साथ रेड कार्पेट पर sleek Giorgio Armani gown में शानदार उपस्थिति दर्ज कराई।

Sabyasachi से लेकर Roberto Cavalli तक

2009 में ivory shade वाले dramatic Roberto Cavalli gown ने खूब सुर्खियां बटोरीं। वहीं 2010 में ऐश्वर्या ने भारतीय फैशन की ओर लौटते हुए Sabyasachi की embellished साड़ी पहनकर सबका दिल जीत लिया।

इसके बाद Elie Saab, Gucci और Cavalli जैसे अंतरराष्ट्रीय डिजाइनर्स के साथ उनका Cannes सफर लगातार ग्लैमरस होता गया।

2016: Lilac Lipstick ने तोड़ दिया इंटरनेट

2016 Cannes appearance ऐश्वर्या के सबसे वायरल moments में शामिल है। उन्होंने floral Rami Kadi gown के साथ lilac lipstick लगाकर इंटरनेट पर तहलका मचा दिया था। इस bold beauty experiment पर खूब बहस हुई, लेकिन ऐश्वर्या ने एक बार फिर साबित किया कि वह fashion risks लेने से कभी नहीं डरतीं।

Cinderella Gown से Butterfly Couture तक

2017 में Dubai-based designer Michael Cinco के voluminous Cinderella-inspired gown में ऐश्वर्या का look Cannes के सबसे चर्चित फैशन moments में शामिल रहा।

2018 में उन्होंने butterfly-pattern gown और embellished train के साथ grand fashion statement दिया। 2019 में molten gold gown और बेटी Aaradhya Bachchan के साथ उनकी appearance ने फैशन के साथ emotional touch भी जोड़ दिया।

Gaurav Gupta और Dramatic Couture का दौर

2022 में Cannes debut के 20 साल पूरे होने पर ऐश्वर्या ने Gaurav Gupta का sculptural pink outfit पहना, जिसे तैयार करने में 3500 घंटे लगे थे। इसके बाद उन्होंने black Dolce & Gabbana gown में classic glamour दिखाया।

2023 में silver hooded futuristic gown और 2024 में Falguni Shane Peacock के dramatic feather-inspired outfits ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी।

2025 में फिर दिखा इंडियन ट्रेडिशन का जलवा

इस साल ऐश्वर्या ने Cannes में white-gold Banarasi sari by Manish Malhotra पहनकर भारतीय परंपरा को ग्लोबल मंच पर शानदार अंदाज़ में पेश किया। लाल सिंदूर, ruby necklace और classic red lips ने उनके look को और खास बना दिया।

इसके अलावा उन्होंने custom Gaurav Gupta ensemble भी पहना, जिसमें Sanskrit shlokas से सजा ivory brocade और black velvet gown शामिल था। एक बार फिर ऐश्वर्या ने साबित किया कि Cannes में उनका फैशन सफर सिर्फ glamour नहीं बल्कि cultural storytelling भी है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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फ्लैट लोफर्स और पैंट्स का स्टाइलिश कॉम्बिनेशन, इस सीजन ऐसे बनाएं अपना लुक खास

फैशन की दुनिया में फ्लैट लोफर्स एक बार फिर ट्रेंड में हैं। अगर आप बिना हील्स के स्मार्ट और एलिगेंट दिखना चाहती हैं, तो इन्हें अलग-अलग तरह की पैंट्स के साथ स्टाइल करना बेहतरीन विकल्प हो सकता है। फ्लैट लोफर्स क्यों हैं ट्रेंड में? स्प्रिंग-समर 2026 फैशन ट्रेंड्स में फ्लैट लोफर्स ने खास जगह बनाई है। इन जूतों की खासियत यह है कि ये आराम और स्टाइल दोनों को साथ लेकर चलते हैं। पहले लोफर्स को ज्यादातर फॉर्मल या विंटर आउटफिट का हिस्सा माना जाता था, लेकिन अब इन्हें जींस, कैपरी, स्ट्राइप्ड पैंट्स और कुलॉट्स के साथ भी आसानी से पहना जा रहा है। फैशन रनवे से लेकर स्ट्रीट स्टाइल तक, लोफर्स के कई नए डिजाइन देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में अगर आप अपने रोजमर्रा के लुक को थोड़ा ज्यादा पॉलिश्ड बनाना चाहती हैं, तो यह ट्रेंड आपके लिए काम आ सकता है। 1. स्ट्राइप्ड पैंट्स के साथ नॉटिकल लोफर्स अगर आप अपने लुक में थोड़ा पैटर्न और कॉन्ट्रास्ट जोड़ना चाहती हैं, तो फ्लैट नॉटिकल लोफर्स को स्ट्राइप्ड पैंट्स के साथ पहन सकती हैं। इसके साथ सिंपल टैंक टॉप या बेसिक टी-शर्ट चुनें। एक्सेसरीज को ज्यादा भारी रखने के बजाय मिनिमल रखें। इससे पूरा आउटफिट बैलेंस्ड और स्मार्ट नजर आएगा। यह कॉम्बिनेशन ऑफिस के कैजुअल लुक से लेकर दोस्तों के साथ आउटिंग तक के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। 2. कैपरी पैंट्स के साथ ओपन-बैक लोफर्स अगर आपको थोड़ा ट्रेंडी और 2000s से इंस्पायर्ड फैशन पसंद है, तो ब्लैक ओपन-बैक फ्लैट लोफर्स के साथ उसी रंग की कैपरी पैंट्स ट्राई करें। मोनोक्रोम लुक आपके आउटफिट को ज्यादा स्टाइलिश और स्लीक बना सकता है। ऊपर से आप सिंपल टी-शर्ट पहन सकती हैं या फिर फेमिनिन टच के लिए हल्की डिटेलिंग वाला ब्लाउज चुन सकती हैं। इस लुक में जूतों और पैंट्स को मुख्य आकर्षण बनाए रखने के लिए बाकी एक्सेसरीज को कम रखना बेहतर रहेगा। 3. साबर लोफर्स के साथ कुलॉट्स अगर आप क्लासिक और एलिगेंट स्टाइल पसंद करती हैं, तो हनी या ब्राउन टोन के साबर फ्लैट लोफर्स को कुलॉट्स के साथ पहनें। इस लुक को और बेहतर बनाने के लिए लोफर्स से मैच करता हुआ बेल्ट इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, अगर आप इसे थोड़ा कैजुअल रखना चाहती हैं तो स्ट्रेट-लेग जींस भी अच्छा विकल्प है। साबर लोफर्स की खासियत यह है कि वे साधारण आउटफिट को भी ज्यादा रिफाइंड लुक दे सकते हैं। हील्स के बिना भी दिखेंगी स्टाइलिश फ्लैट लोफर्स उन लोगों के लिए खास तौर पर उपयोगी हैं जो लंबे समय तक आरामदायक फुटवियर पहनना चाहती हैं, लेकिन अपने लुक से स्टाइल से समझौता नहीं करना चाहतीं। सही पैंट और टॉप के साथ इन्हें ऑफिस, कैजुअल आउटिंग या शाम के कार्यक्रम में भी पहना जा सकता है। इस सीजन अपने वॉर्डरोब में एक क्लासिक फ्लैट लोफर शामिल करना आपके फैशन लुक को आसानी से अपडेट कर सकता है।  

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वॉटरप्रूफ मस्कारा हटाते समय न करें ये गलती, टूट सकती हैं पलकें; जानिए सही तरीका

वॉटरप्रूफ मस्कारा मेकअप को लंबे समय तक टिकाए रखने के लिए बनाया जाता है। पसीना, गर्मी, नमी, बारिश, तैराकी या आंसुओं के बावजूद यह आसानी से नहीं फैलता। लेकिन इसकी यही खूबी रात में मेकअप हटाते समय परेशानी बन सकती है। अगर इसे हटाने के लिए आंखों और पलकों को जोर से रगड़ा जाए या खींचा जाए, तो पलकों को नुकसान पहुंच सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक वॉटरप्रूफ मस्कारा हटाने का सबसे जरूरी नियम है कि आंखों को रगड़ने से बचें। आंखों के आसपास की त्वचा बेहद नाजुक होती है और ज्यादा घर्षण से जलन, लालिमा और समय के साथ पलकों के टूटने की समस्या हो सकती है। वॉटरप्रूफ मस्कारा आसानी से क्यों नहीं हटता? वॉटरप्रूफ मस्कारा में आमतौर पर मोम और सिलिकॉन जैसे तत्व होते हैं, जो रंग को पानी और नमी से बचाने में मदद करते हैं। लंबे समय तक टिकने वाले मेकअप में तेल आधारित तत्व भी इस्तेमाल किए जाते हैं, जो पानी से बचाव करने वाली परत बनाने में मदद करते हैं। इन्हीं कारणों से सामान्य फेसवॉश और पानी से वॉटरप्रूफ मस्कारा पूरी तरह साफ करना मुश्किल हो सकता है। इसे हटाने के लिए ऐसे मेकअप रिमूवर की जरूरत होती है, जो मस्कारा को धीरे-धीरे घोल सके। सबसे जरूरी नियम: आंखों को न रगड़ें मस्कारा हटाते समय कॉटन पैड से आंखों को बार-बार रगड़ना सबसे आम गलतियों में से एक है। इससे पलकों पर अनावश्यक खिंचाव पड़ सकता है और आंखों के आसपास की नाजुक त्वचा में जलन हो सकती है। मेकअप रिमूवर को कुछ समय तक पलकों पर रहने देना बेहतर तरीका है। इससे मस्कारा नरम होकर आसानी से हटने लगता है और ज्यादा दबाव लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। वॉटरप्रूफ मस्कारा हटाने का सही तरीका 1. सही मेकअप रिमूवर चुनें तेल आधारित क्लींजर, क्लींजिंग बाम या आंखों के मेकअप के लिए बनाए गए रिमूवर का इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आंखें संवेदनशील हैं, तो हल्का माइसेलर वॉटर भी एक विकल्प हो सकता है। 2. कॉटन पैड को अच्छी तरह भिगोएं कॉटन पैड पर पर्याप्त मात्रा में मेकअप रिमूवर लगाएं। पैड अच्छी तरह नम होना चाहिए, ताकि मस्कारा हटाने के लिए ज्यादा दबाव न लगाना पड़े। 3. बंद आंखों पर कुछ सेकंड रखें कॉटन पैड को बंद आंखों पर हल्के हाथ से रखें और लगभग 10 सेकंड तक छोड़ दें। तेल आधारित क्लींजर इस्तेमाल करने पर इसे करीब 20 से 30 सेकंड तक काम करने देना मस्कारा को घोलने में मदद कर सकता है। 4. धीरे से साफ करें जब मस्कारा नरम होने लगे, तो कॉटन पैड को धीरे-धीरे हटाएं। आंखों को आगे-पीछे रगड़ने या पलकों को खींचने से बचें। अगर मस्कारा पूरी तरह साफ न हो, तो दोबारा रिमूवर लगाएं और कुछ सेकंड इंतजार करें। ज्यादा जोर लगाने की जरूरत नहीं है। 5. बचा हुआ मस्कारा सावधानी से हटाएं अगर पलकों पर छोटे-छोटे मस्कारा के टुकड़े रह गए हों, तो माइसेलर वॉटर में हल्का भिगोए कॉटन स्वैब की मदद से उन्हें धीरे से साफ किया जा सकता है। क्या डबल क्लींजिंग मददगार है? अगर आपने वॉटरप्रूफ मस्कारा के साथ पूरा मेकअप किया है, तो डबल क्लींजिंग उपयोगी हो सकती है। सबसे पहले तेल आधारित क्लींजर या क्लींजिंग बाम से मेकअप को घोलें। इसके बाद अपनी त्वचा के अनुसार हल्के क्लींजर से चेहरा साफ करें। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मेकअप को रगड़कर हटाना नहीं, बल्कि पहले उसे घोलना और फिर धीरे से साफ करना है। संवेदनशील आंखों वालों को क्या करना चाहिए? जिन लोगों की आंखें संवेदनशील हैं, वे हल्के माइसेलर वॉटर या संवेदनशील आंखों के लिए बनाए गए मेकअप रिमूवर का विकल्प चुन सकते हैं। अगर किसी उत्पाद के इस्तेमाल के बाद लगातार जलन, लालिमा, सूजन या आंखों में परेशानी महसूस हो, तो उसका इस्तेमाल बंद कर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। कौन-कौन से उत्पाद इस्तेमाल किए जा सकते हैं? वॉटरप्रूफ मस्कारा हटाने के लिए कई तरह के उत्पाद उपलब्ध हैं, जैसे: तेल आधारित मेकअप रिमूवर क्लींजिंग ऑयल क्लींजिंग बाम माइसेलर वॉटर हल्का आई मेकअप रिमूवर माइसेलर मेकअप रिमूविंग वाइप्स उत्पाद चुनते समय अपनी आंखों की संवेदनशीलता और उसमें मौजूद सामग्री का ध्यान रखें। पलकों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? दिन खत्म होने के बाद आंखों का मेकअप ठीक से हटाना जरूरी है। वॉटरप्रूफ मस्कारा को रातभर पलकों पर छोड़ना नियमित आदत नहीं बनानी चाहिए। मेकअप हटाते समय जल्दबाजी न करें। अगर मस्कारा पहली बार में नहीं निकलता है, तो दोबारा मेकअप रिमूवर लगाकर कुछ सेकंड इंतजार करें और फिर धीरे से साफ करें। पलकों को खींचने, रगड़ने या जोर से साफ करने से बचना चाहिए। धीरे और धैर्य के साथ मेकअप हटाना पलकों और आंखों के आसपास की नाजुक त्वचा के लिए बेहतर है।  

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नई दिल्ली, एजेंसियां। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कॉलेजों में देशभक्ति का उत्साह देखने को मिलता है। 15 अगस्त पर स्टूडेंट्स तिरंगे के रंगों से जुड़े आउटफिट पहनकर अपने लुक को खास बनाना पसंद करते हैं। अगर आप भी इस बार कुछ स्टाइलिश और यूनिक पहनना चाहते हैं, तो केसरिया, सफेद और हरे रंग को अपने रोजमर्रा के कॉलेज स्टाइल में शामिल कर सकते हैं।   ट्राईकलर कुर्ती और जींस   कॉलेज गर्ल्स के लिए ट्राईकलर कुर्ती एक आसान और स्टाइलिश विकल्प हो सकती है। सफेद बेस वाली कुर्ती पर केसरिया और हरे रंग का प्रिंट खूबसूरत लगेगा। इसे ब्लू या व्हाइट जींस के साथ पहनकर कैजुअल लुक पाया जा सकता है। छोटे झुमके और मिनिमल एक्सेसरीज लुक को और आकर्षक बना सकती हैं।   व्हाइट टॉप के साथ ग्रीन बॉटम   अगर आपको मॉडर्न और सिंपल लुक पसंद है तो व्हाइट टॉप के साथ ग्रीन ट्राउजर, पैंट या जींस पहन सकते हैं। इसके साथ ऑरेंज स्कार्फ या स्टोल कैरी करके आउटफिट में तिरंगे का टच दिया जा सकता है। यह कॉलेज फंक्शन और दोस्तों के साथ सेलिब्रेशन दोनों के लिए अच्छा विकल्प है।   लड़कों के लिए ट्राईकलर कैजुअल लुक   कॉलेज बॉयज व्हाइट शर्ट या बेसिक व्हाइट टी-शर्ट के साथ ग्रीन जींस या कार्गो पैंट पहन सकते हैं। ऑरेंज वॉच, ब्रेसलेट, कैप या स्नीकर्स जैसी छोटी एक्सेसरीज के जरिए लुक में केसरिया रंग शामिल किया जा सकता है। इससे आउटफिट ज्यादा ओवर नहीं लगेगा और स्मार्ट भी नजर आएगा।   ट्राईकलर दुपट्टे से बनाएं लुक खास   अगर आप पूरा तिरंगा आउटफिट नहीं पहनना चाहते हैं तो सिर्फ दुपट्टे या स्टोल के जरिए भी Independence Day Look तैयार कर सकते हैं। व्हाइट कुर्ती और जींस के साथ ऑरेंज-व्हाइट-ग्रीन दुपट्टा बेहद खूबसूरत कॉम्बिनेशन बना सकता है।   एक्सेसरीज से भी पाएं देशभक्ति वाला लुक   पूरे कपड़ों में तिरंगे के रंग पहनने के बजाय एक्सेसरीज के जरिए भी थीम को शामिल किया जा सकता है। ट्राईकलर ब्रेसलेट, बैज, रिबन, हेयरबैंड, स्कार्फ या बैग को अपने कॉलेज आउटफिट के साथ स्टाइल किया जा सकता है। यह तरीका सिंपल लुक को भी 15 अगस्त के लिए खास बना देगा।   सिंपल रखें अपना Independence Day Look   तिरंगा थीम वाले आउटफिट में सबसे जरूरी है कि तीनों रंगों का संतुलित इस्तेमाल किया जाए। आप तीनों रंगों को एक साथ पहनने के बजाय किसी एक रंग को बेस बनाकर बाकी रंगों को एक्सेसरीज या छोटे डिटेल्स के रूप में शामिल कर सकते हैं। इससे लुक स्टाइलिश, आरामदायक और कॉलेज-फ्रेंडली बना रहेगा।

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