Aishwarya Rai Bachchan और Cannes Film Festival का रिश्ता अब फैशन इतिहास का हिस्सा बन चुका है। पिछले दो दशकों में ऐश्वर्या ने हर साल Cannes रेड कार्पेट पर अपने अनोखे और शानदार फैशन स्टेटमेंट से दुनियाभर का ध्यान खींचा है। कभी पारंपरिक भारतीय साड़ी में, तो कभी ग्लैमरस बॉलगाउन और avant-garde couture में, ऐश्वर्या ने हर बार खुद को नए अंदाज़ में पेश किया। 2002: Cannes में यादगार डेब्यू ऐश्वर्या ने 2002 में Cannes में अपना डेब्यू पीले रंग की Neeta Lulla साड़ी पहनकर किया था। यह लुक आज भी उनके सबसे चर्चित Cannes moments में गिना जाता है। अगले साल उन्होंने डिजाइनर के लहंगे और फिर नियॉन ग्रीन साड़ी में रेड कार्पेट पर अपनी अलग पहचान बनाई। वेस्टर्न ग्लैमर की ओर बढ़ता फैशन सफर 2004 में कट-आउट गाउन और 2005 में plunging neckline वाले Gucci गाउन के साथ ऐश्वर्या का स्टाइल पूरी तरह ग्लोबल ग्लैमर की ओर बढ़ता दिखा। 2006 में उन्होंने strapless Elie Saab gown और snake-inspired neckpiece पहनकर Cannes में शोस्टॉपर एंट्री दी। शादी के बाद 2007 में उन्होंने पति Abhishek Bachchan के साथ रेड कार्पेट पर sleek Giorgio Armani gown में शानदार उपस्थिति दर्ज कराई। Sabyasachi से लेकर Roberto Cavalli तक 2009 में ivory shade वाले dramatic Roberto Cavalli gown ने खूब सुर्खियां बटोरीं। वहीं 2010 में ऐश्वर्या ने भारतीय फैशन की ओर लौटते हुए Sabyasachi की embellished साड़ी पहनकर सबका दिल जीत लिया। इसके बाद Elie Saab, Gucci और Cavalli जैसे अंतरराष्ट्रीय डिजाइनर्स के साथ उनका Cannes सफर लगातार ग्लैमरस होता गया। 2016: Lilac Lipstick ने तोड़ दिया इंटरनेट 2016 Cannes appearance ऐश्वर्या के सबसे वायरल moments में शामिल है। उन्होंने floral Rami Kadi gown के साथ lilac lipstick लगाकर इंटरनेट पर तहलका मचा दिया था। इस bold beauty experiment पर खूब बहस हुई, लेकिन ऐश्वर्या ने एक बार फिर साबित किया कि वह fashion risks लेने से कभी नहीं डरतीं। Cinderella Gown से Butterfly Couture तक 2017 में Dubai-based designer Michael Cinco के voluminous Cinderella-inspired gown में ऐश्वर्या का look Cannes के सबसे चर्चित फैशन moments में शामिल रहा। 2018 में उन्होंने butterfly-pattern gown और embellished train के साथ grand fashion statement दिया। 2019 में molten gold gown और बेटी Aaradhya Bachchan के साथ उनकी appearance ने फैशन के साथ emotional touch भी जोड़ दिया। Gaurav Gupta और Dramatic Couture का दौर 2022 में Cannes debut के 20 साल पूरे होने पर ऐश्वर्या ने Gaurav Gupta का sculptural pink outfit पहना, जिसे तैयार करने में 3500 घंटे लगे थे। इसके बाद उन्होंने black Dolce & Gabbana gown में classic glamour दिखाया। 2023 में silver hooded futuristic gown और 2024 में Falguni Shane Peacock के dramatic feather-inspired outfits ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी। 2025 में फिर दिखा इंडियन ट्रेडिशन का जलवा इस साल ऐश्वर्या ने Cannes में white-gold Banarasi sari by Manish Malhotra पहनकर भारतीय परंपरा को ग्लोबल मंच पर शानदार अंदाज़ में पेश किया। लाल सिंदूर, ruby necklace और classic red lips ने उनके look को और खास बना दिया। इसके अलावा उन्होंने custom Gaurav Gupta ensemble भी पहना, जिसमें Sanskrit shlokas से सजा ivory brocade और black velvet gown शामिल था। एक बार फिर ऐश्वर्या ने साबित किया कि Cannes में उनका फैशन सफर सिर्फ glamour नहीं बल्कि cultural storytelling भी है।
दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फैशन इवेंट Met Gala में Alia Bhatt ने अब तक भले ही सिर्फ दो बार शिरकत की हो, लेकिन दोनों ही बार उन्होंने अपने लुक्स से फैशन जगत में मजबूत छाप छोड़ी है। हर साल उनके स्टाइल में नया प्रयोग और परिपक्वता देखने को मिली है। 2026 के मेट गाला से पहले उनके पुराने लुक्स पर नजर डालना दिलचस्प है। 2023: प्रबल गुरुंग में डेब्यू, ‘सिंड्रेला’ जैसा अंदाज आलिया भट्ट ने 2023 में मेट गाला में डेब्यू किया, जहां थीम था ‘Karl Lagerfeld: A Line of Beauty’। उन्होंने Prabal Gurung का कस्टम गाउन पहना, जो Karl Lagerfeld की Chanel 1992 ब्राइडल कलेक्शन से प्रेरित था। यह आइवरी गाउन सिल्क ट्यूल और साटन ऑर्गेंजा से बना था, जिसमें 1 लाख से ज्यादा हाथ से जड़े पर्ल्स थे। लंबे ट्रेल, फिंगरलेस ग्लव्स और सॉफ्ट मेकअप के साथ उनका पूरा लुक किसी परीकथा की तरह नजर आया। 2024: सब्यसाची की साड़ी में भारतीय अंदाज 2024 में आलिया ने Sabyasachi Mukherjee की डिजाइन की हुई कस्टम मिंट-ग्रीन साड़ी पहनकर भारतीय फैशन को ग्लोबल मंच पर शानदार तरीके से पेश किया। यह लुक ‘Sleeping Beauties: Reawakening Fashion’ थीम के अनुरूप था। 23 फीट लंबी ट्रेल वाली इस साड़ी में फ्लोरल एम्ब्रॉयडरी, सिल्क फ्लॉस, ग्लास बीड्स और सेमी-प्रेशियस स्टोन्स का इस्तेमाल किया गया था। स्टाइलिंग Anaita Shroff Adajania ने की थी, जिसने इस लुक को और भी शाही बना दिया। टूरमालीन और डायमंड जूलरी, हेयर एक्सेसरी और कॉकटेल रिंग्स ने इस आउटफिट को पूरी तरह कंप्लीट किया। 2026 को लेकर बढ़ी उत्सुकता अब जब 2026 का मेट गाला नजदीक है, फैशन प्रेमियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आलिया भट्ट इस बार किस अंदाज में रेड कार्पेट पर नजर आएंगी। उनके पिछले दोनों लुक्स को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी वह कुछ नया और यादगार पेश करेंगी।
फैशन की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित इवेंट Met Gala 2025 में शाहरुख खान की पहली उपस्थिति ने ग्लोबल स्टाइल स्टेटमेंट को एक नया आयाम दिया। भारतीय डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी द्वारा डिजाइन किया गया उनका आउटफिट आज भी चर्चा में है और फैशन एक्सपर्ट्स इसे टाइमलेस बता रहे हैं। ‘Tailored For You’ थीम का शानदार जवाब इस साल की थीम ‘Tailored For You’ थी, जिसे शाहरुख ने बेहद सटल लेकिन प्रभावशाली अंदाज में पेश किया। उनका लुक ब्लैक और इंडियन डैंडी स्टाइल के ऐतिहासिक कनेक्शन को दर्शाता था–जहां क्लासिक टेलरिंग को सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़ा गया। आउटफिट की खासियत शाहरुख ने तस्मानियन सुपरफाइन वूल से बना फ्लोर-लेंथ कोट पहना, जिसमें जापानी हॉर्न बटन और पीक कॉलर के साथ वाइड लैपल्स थे। इसके नीचे ब्लैक सिल्क शर्ट को ओपन स्टाइल में पहना गया, जो एक बोल्ड लेकिन एलिगेंट लुक देता था। साथ में सुपरफाइन वूल ट्राउज़र और साटन कमरबंद ने पूरे आउटफिट को स्ट्रक्चर और बैलेंस दिया। ज्वेलरी और एक्सेसरीज ने बढ़ाया रॉयल टच इस लुक की सबसे खास बात थी इसकी ज्वेलरी। मल्टी-लेयर्ड चेन, ‘K’ अक्षर वाला पेंडेंट और डायमंड स्टार ब्रोच ने इसे एक पर्सनल और सिग्नेचर स्टाइल बनाया। इसके अलावा 18 कैरेट गोल्ड से बना बंगाल टाइगर हेड केन, जिसमें टूरमलीन, सैफायर और डायमंड जड़े थे, पूरे लुक में एक पावरफुल और रॉयल एलिमेंट जोड़ता है। मुगल और मॉडर्न स्टाइल का मेल इस आउटफिट में मुगलकालीन स्टाइल और मॉडर्न टेलरिंग का शानदार मिश्रण देखने को मिला। ओपन शर्ट पर ज्वेलरी की लेयरिंग पुराने महाराजाओं के पोर्ट्रेट की याद दिलाती है, जहां गहनों के जरिए स्टेटस और पावर दिखाया जाता था। सटलिटी में छिपा था असली प्रभाव जहां मेट गाला में अक्सर बड़े और भड़कीले आउटफिट्स देखने को मिलते हैं, वहीं शाहरुख का यह लुक सादगी में छिपी भव्यता का उदाहरण था। बिना भारी कढ़ाई या ड्रामेटिक ट्रेल के, उन्होंने सिल्हूट, फिट और एक्सेसरीज के जरिए एक मजबूत स्टेटमेंट दिया।
मुंबई: बॉलीवुड की स्टाइल क्वीन Kareena Kapoor Khan ने एक बार फिर अपने लेटेस्ट लुक से इंटरनेट पर धूम मचा दी है। इस बार वह Sabyasachi की लेपर्ड प्रिंट साड़ी में नजर आईं, जिसे देखकर फैंस उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे। स्टाइल और एटीट्यूड का परफेक्ट कॉम्बिनेशन इस शानदार लुक को Rhea Kapoor ने स्टाइल किया, और हमेशा की तरह उनका स्टाइलिंग गेम ऑन पॉइंट रहा। करीना ने साड़ी को मॉडर्न ड्रेप में कैरी किया, जिसमें डीप-कट ब्लाउज ने ग्लैमरस टच जोड़ दिया। बोल्ड लेपर्ड प्रिंट ने लुक में ड्रामा और फियरस वाइब्स दीं, वहीं साड़ी का फ्लोई सिल्हूट इसे एलिगेंट बनाता है। ज्वेलरी और मेकअप ने बढ़ाई खूबसूरती करीना ने इस लुक को पॉल्की और टर्कॉइज़ ज्वेलरी के साथ पेयर किया, जिससे ट्रेडिशनल और मॉडर्न का खूबसूरत बैलेंस देखने को मिला। मेकअप आर्टिस्ट Tanvi Chemburkar ने मिनिमल ग्लैम के साथ बोल्ड काजल-रिम्ड आंखें दीं, जबकि खुले बालों ने पूरे लुक को और भी ग्रेसफुल बना दिया। क्यों खास है ये लुक? यह लुक दिखाता है कि कैसे Kareena Kapoor Khan ट्रेडिशनल साड़ी को मॉडर्न ट्विस्ट देकर उसे स्टेटमेंट बना देती हैं। उनका कॉन्फिडेंस, एटीट्यूड और स्टाइल—तीनों इस आउटफिट को और खास बनाते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।