सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने दिल्ली में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर अपनी स्पष्ट राय व्यक्त की है। आमतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेक्नोलॉजी और भविष्य की तकनीकों पर अपने विचार साझा करने वाले वेम्बु ने इस बार देश के मौजूदा घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ प्रदर्शन भारत की प्रगति को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि देश को विकास की राह से भटकाने वाले ऐसे प्रयासों को सफल नहीं होने देना चाहिए। सोशल मीडिया पोस्ट में क्या कहा? श्रीधर वेम्बु ने सोशल मीडिया पर लिखे अपने पोस्ट में कहा कि उनके अनुसार दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे लोग भारत को अराजकता की ओर धकेलना चाहते हैं और देश की प्रगति को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि ऐसे इरादों को विफल करना आवश्यक है और भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाली ताकतों को सफल नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, जहां जनता अपनी सामूहिक राय चुनावों के माध्यम से व्यक्त करती है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव ही जनमत व्यक्त करने का सबसे उचित माध्यम हैं। किस पोस्ट के जवाब में आई प्रतिक्रिया? श्रीधर वेम्बु की यह टिप्पणी उद्योग जगत से जुड़े विचारक एस. गुरुमूर्ति की एक सोशल मीडिया पोस्ट के जवाब में आई। इसके बाद उनका बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। तकनीकी विकास पर जताई चिंता वेम्बु का मानना है कि भारत इस समय टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर निर्माण और एयरोस्पेस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में लंबे समय तक चलने वाले विवाद और प्रदर्शन देश की विकास गति को प्रभावित कर सकते हैं। उनके अनुसार भारत के सामने आज वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का बड़ा अवसर है और इस दिशा में स्थिर माहौल बेहद जरूरी है। पहले भी प्रगति को लेकर जताई थी उम्मीद हाल ही में किए गए एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में श्रीधर वेम्बु ने भारत की तकनीकी प्रगति की सराहना की थी। उन्होंने लिखा था कि पिछले एक दशक में भारत ने सेमीकंडक्टर फैब, एयरोस्पेस और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा था कि भारत अभी भी लंबा सफर तय कर रहा है, लेकिन देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार कुछ ताकतें भारत की प्रगति को रोकना चाहती हैं, फिर भी उन्हें विश्वास है कि अंततः जीत भारत की ही होगी। AI को लेकर क्या सोचते हैं श्रीधर वेम्बु? श्रीधर वेम्बु अक्सर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य की तकनीकों पर अपने विचार साझा करते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि दुनिया भर में AI में हो रहा भारी निवेश इस सोच पर आधारित है कि आने वाले वर्षों में यही सबसे प्रभावशाली तकनीक बनेगी। उनका मानना है कि AI केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह— कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज खोजने में मदद करेगा। जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान विकसित करेगा। शहरों में सस्ते आवास जैसी समस्याओं के समाधान खोजने में योगदान देगा। विभिन्न उद्योगों और तकनीकों को नए सिरे से विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। बयान बना चर्चा का विषय दिल्ली में जारी प्रदर्शनों के बीच श्रीधर वेम्बु का यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। जहां कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग इससे अलग राय भी व्यक्त कर रहे हैं। फिलहाल यह बयान देश में विकास, लोकतंत्र और विरोध-प्रदर्शन की भूमिका को लेकर नई बहस का हिस्सा बन गया है।
केंद्र सरकार ने इंटरनेट पर अश्लील और गैर-कानूनी कंटेंट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पिछले दो वर्षों में 50 OTT प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक कर दिया है। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म्स पर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम और अन्य लागू भारतीय कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप था। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य इंटरनेट को सभी नागरिकों, विशेषकर बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित जवाब के माध्यम से बताया कि सरकार डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार सख्त कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसा डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां बच्चों सहित सभी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और जिम्मेदार ऑनलाइन वातावरण मिल सके। अश्लील कंटेंट पर सरकार की सख्ती इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, जिन 50 OTT प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक किया गया, वे अश्लील सामग्री उपलब्ध कराने और आईटी कानूनों के उल्लंघन में शामिल पाए गए थे। इन प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक पहुंच पूरी तरह रोक दी गई है ताकि आम लोग अब इन्हें एक्सेस न कर सकें। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा महिलाओं के अश्लील चित्रण (निषेध) अधिनियम, 1986 के तहत की गई है। किन कानूनों के तहत हुई कार्रवाई? MeitY के मुताबिक, इन OTT प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ मुख्य रूप से: IT Act की धारा 67 और 67A भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 अन्य लागू कानूनी प्रावधान के तहत कार्रवाई की गई। सरकार का कहना है कि इंटरनेट पर अवैध और अश्लील सामग्री के प्रसार को रोकना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। नए IT Rules 2021 में क्या है प्रावधान? सरकार ने यह भी बताया कि आईटी नियम, 2021 के तहत यदि किसी अदालत या सरकार द्वारा किसी गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने का आदेश जारी किया जाता है, तो संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या डिजिटल सेवा प्रदाता को 3 घंटे के भीतर उस सामग्री को हटाना अनिवार्य होगा। इस नियम का उद्देश्य ऑनलाइन अवैध कंटेंट पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर विशेष जोर सरकार ने कहा कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 लागू किया गया है। इस कानून के तहत: बच्चों का डेटा प्रोसेस करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी है। बच्चों की ऑनलाइन ट्रैकिंग पर रोक लगाई गई है। उनके व्यवहार की निगरानी और टारगेटेड विज्ञापन दिखाने जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों की ऑनलाइन गोपनीयता और सुरक्षा मजबूत होगी। डिजिटल लत और आर्थिक नुकसान पर भी सरकार की नजर सरकार ने यह भी कहा कि ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नए नियामक ढांचे का उद्देश्य युवाओं में बढ़ती डिजिटल लत और ऑनलाइन गेमिंग से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करना भी है। सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को अधिक जिम्मेदार और जवाबदेह बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। सरकार का क्या है उद्देश्य? सरकार के अनुसार, इन सभी कदमों का मुख्य उद्देश्य ऐसा डिजिटल वातावरण तैयार करना है जहां: इंटरनेट सुरक्षित हो। अवैध और अश्लील सामग्री पर प्रभावी रोक लगे। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित हो। नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की रक्षा की जा सके। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स कानूनों के प्रति जवाबदेह बने रहें।
नई दिल्ली: देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को घोषणा की कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का पहला सेक्शन सूरत से बिलिमोरा के बीच अगले साल से शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और बाकी हिस्सों को चरणबद्ध तरीके से चालू किया जाएगा। अगले साल शुरू होगा पहला बुलेट ट्रेन सेक्शन रेल मंत्री ने बताया कि बुलेट ट्रेन परियोजना का पहला परिचालन सूरत-बिलिमोरा खंड पर शुरू होगा। इसके बाद पूरे कॉरिडोर को अलग-अलग चरणों में यात्रियों के लिए खोला जाएगा। चरणबद्ध तरीके से खुलेगा पूरा रूट परियोजना का संचालन इस क्रम में किया जाएगा— पहला चरण: सूरत से बिलिमोरा दूसरा चरण: वापी से सूरत तीसरा चरण: वापी से अहमदाबाद चौथा चरण: अहमदाबाद से ठाणे पांचवां चरण: अहमदाबाद से मुंबई रेल मंत्री ने कहा कि सभी चरणों का निर्माण तय समय के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है। हैदराबाद बनेगा नया हाई-स्पीड रेल हब अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद से जुड़े तीन नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी है। उनके अनुसार इन परियोजनाओं से हैदराबाद दक्षिण भारत का प्रमुख हाई-स्पीड रेल हब बन जाएगा। प्रस्तावित नए कॉरिडोर हैं— पुणे – हैदराबाद हैदराबाद – चेन्नई हैदराबाद – बेंगलुरु रेल मंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम होगा। बिना ट्रेन रोके हो रहा रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास देशभर में रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर भी रेल मंत्री ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब तक 261 रेलवे स्टेशनों पर पुनर्विकास का कार्य पूरा किया जा चुका है। उन्होंने सिकंदराबाद स्टेशन का उदाहरण देते हुए कहा कि स्टेशन का पुनर्निर्माण बिना रेल यातायात प्रभावित किए किया जा रहा है। ट्रेनों का संचालन जारी रखते हुए प्लेटफॉर्म के ऊपर आधुनिक एयर कॉनकोर्स बनाए जा रहे हैं। तेलंगाना को रेलवे के लिए 5,400 करोड़ रुपये रेल मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने तेलंगाना में रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 5,400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली केंद्र सरकार की योजनाओं का भी राज्य को लाभ मिला है और 100 से अधिक कंपनियों को इससे प्रोत्साहन मिला है। देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना पर नजर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना है। इसके पूरा होने के बाद यात्रियों को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ तेज, सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा का अनुभव मिलेगा। सरकार का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से पूरे कॉरिडोर को परिचालन में लाना है, जिसकी शुरुआत अगले साल सूरत-बिलिमोरा सेक्शन से होगी।
हैदराबाद, एजेंसियां। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि तेलंगाना को देश का नया बुलेट ट्रेन हब बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य के लिए तीन प्रस्तावित हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर तैयार किए गए हैं, जिनसे हैदराबाद को पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई से जोड़ा जाएगा। यह परियोजना दक्षिण भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। तीन बड़े शहरों से जुड़ेगा हैदराबाद रेल मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कॉरिडोरों के जरिए हैदराबाद से पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई तक तेज रफ्तार रेल सेवा उपलब्ध कराने की योजना है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा और व्यापार, उद्योग तथा पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। रेल बजट से मिलेगी नई रफ्तार अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तेलंगाना के लिए इस बार रेलवे क्षेत्र में ₹5,400 करोड़ का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस निवेश से नई रेल लाइनें, स्टेशन आधुनिकीकरण और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं को गति मिलेगी। हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का होगा विस्तार रेल मंत्री के अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के अनुभव के आधार पर अब देश के अन्य हिस्सों में भी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना को इस नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना है, जिससे दक्षिण भारत में आधुनिक रेल संपर्क को नई दिशा मिलेगी।
मुंबई, एजेंसियां। भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन ने एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। परियोजना के तहत देश की सबसे बड़ी रेल टनल बोरिंग मशीन ने मुंबई के विक्रोली से सुरंग की खुदाई शुरू कर दी है। यह मशीन भूमिगत और समुद्र के नीचे बनने वाली सुरंग के निर्माण में इस्तेमाल की जाएगी, जिसे परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। 5 किलोमीटर लंबी सुरंग की होगी खुदाई यह विशाल बोरिंग मशीन लगभग 5 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई करेगी, जो मुंबई के भूमिगत हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का हिस्सा है। मशीन का वजन लगभग 500 हाथियों के बराबर बताया जा रहा है। खुदाई के दौरान सुरंग को मजबूत बनाने के लिए करीब 77,000 कंक्रीट रिंग लगाई जाएंगी। भारत की पहली अंडरसी हाई-स्पीड रेल सुरंग मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में करीब 21 किलोमीटर लंबा भूमिगत सेक्शन बनाया जा रहा है, जिसमें लगभग 7 किलोमीटर हिस्सा समुद्र (थाणे क्रीक) के नीचे होगा। यह भारत की पहली अंडरसी हाई-स्पीड रेल सुरंग होगी और आधुनिक इंजीनियरिंग का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। 2027 में शुरू होगा पहला सेक्शन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना का पहला सेक्शन सूरत से बिलीमोरा के बीच 2027 में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पूरी परियोजना चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दिल्ली-एनसीआर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ी आधारभूत संरचना परियोजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने द्वारका एक्सप्रेसवे को दक्षिण दिल्ली के वसंत कुंज स्थित नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ने वाली 6-लेन सुरंग परियोजना को स्वीकृति दे दी है। इस परियोजना पर 6,969.67 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग NH-148AE के तहत बनने वाली यह 8.1 किलोमीटर लंबी परियोजना दिल्ली के लंबे समय से लंबित बुनियादी ढांचा विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पश्चिम और दक्षिण दिल्ली के बीच सफर होगा आसान इस परियोजना के पूरा होने के बाद द्वारका, गुरुग्राम, पश्चिम दिल्ली, दक्षिण दिल्ली और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के बीच यात्रा अधिक तेज और जाम-मुक्त हो जाएगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और राजधानी के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा। सदर्न रिज के नीचे बनेगी आधुनिक ट्विन-ट्यूब टनल परियोजना की मुख्य सड़क लगभग 6.3 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें 1.98 किलोमीटर हिस्सा Southern Ridge Forest के नीचे से गुजरेगा। यहां अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन (TBM) की मदद से ट्विन-ट्यूब सुरंग बनाई जाएगी, जिससे सतह पर पर्यावरण और यातायात पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा। यह सुरंग शिवमूर्ति इंटरचेंज से शुरू होकर नेल्सन मंडेला मार्ग और महिपालपुर-छतरपुर रोड के जंक्शन के पास समाप्त होगी। एलिवेटेड कॉरिडोर से नोएडा और गाजियाबाद की कनेक्टिविटी बेहतर परियोजना के तहत AIIMS New Delhi से महिपालपुर तक एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित करने की भी योजना है। यह कॉरिडोर बारापुला एलिवेटेड रोड से जुड़ेगा, जिससे पश्चिम और दक्षिण दिल्ली से पूर्वी दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद तक बिना रेड लाइट के यात्रा संभव हो सकेगी। इसके अलावा: महिपालपुर-छतरपुर जंक्शन पर 1.8 किमी लंबी एलिवेटेड सड़क बनेगी। छतरपुर-महिपालपुर मार्ग पर अतिरिक्त फ्लाईओवर तैयार होगा। छतरपुर की ओर जाने वाले वाहनों के लिए एलिवेटेड यू-टर्न बनाया जाएगा। इन सभी हिस्सों को मिलाकर परियोजना की कुल लंबाई 8.1 किलोमीटर होगी। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे सरकार के अनुसार, इस परियोजना के निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा। अनुमान है कि निर्माण कार्य से लगभग: 7.54 लाख प्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार, 9.80 लाख अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार उत्पन्न होंगे। यानी कुल मिलाकर 17 लाख से अधिक मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की संभावना है। यह परियोजना राजधानी में यातायात को सुगम बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, बेहतर कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे अपनी आय बढ़ाने के लिए नए विकल्पों पर तेजी से काम कर रहा है। इसी कड़ी में अब रेलवे की नजर थर्मल पावर प्लांट्स से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राख) पर है। जिस राख को कभी बिजलीघरों के लिए परेशानी माना जाता था, वही अब रेलवे के लिए करोड़ों रुपये की कमाई का नया जरिया बन सकती है। रेल मंत्रालय फ्लाई ऐश की ढुलाई में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक व्यापक योजना तैयार कर रहा है। इस दिशा में रेलवे बोर्ड स्तर पर उच्च स्तरीय बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्वयं हिस्सा लिया। फ्लाई ऐश ढुलाई के लिए बन सकता है अलग लॉजिस्टिक नेटवर्क रेलवे बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, बैठक में थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख की ढुलाई बढ़ाने के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा की गई। रेलवे इस काम के लिए एक डेडिकेटेड लॉजिस्टिक नेटवर्क विकसित करने पर भी विचार कर रहा है। रेलवे का मानना है कि जिस तरह कोयले की ढुलाई उसकी आय का बड़ा स्रोत है, उसी तरह फ्लाई ऐश परिवहन भी भविष्य में महत्वपूर्ण राजस्व का माध्यम बन सकता है। फिलहाल बहुत कम है रेलवे की हिस्सेदारी देश के ताप बिजलीघरों से हर साल करीब 34 करोड़ टन फ्लाई ऐश उत्पन्न होती है। हालांकि, वर्तमान में इसकी अधिकांश ढुलाई सड़क मार्ग यानी ट्रकों के जरिए की जाती है। आंकड़ों के मुताबिक: देश में हर साल लगभग 34 करोड़ टन फ्लाई ऐश पैदा होती है। रेलवे फिलहाल केवल करीब 130 लाख टन फ्लाई ऐश की ढुलाई कर रहा है। अधिकांश परिवहन अभी भी ट्रकों के माध्यम से होता है। रेलवे का लक्ष्य इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर एक बड़े माल परिवहन बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करना है। आखिर क्या होती है फ्लाई ऐश? थर्मल पावर प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए कोयले का इस्तेमाल किया जाता है। कोयला जलने के बाद जो महीन राख बचती है, उसे तकनीकी भाषा में फ्लाई ऐश कहा जाता है। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इसे आमतौर पर छाई भी कहा जाता है। पहले इसके निपटान की समस्या होती थी, लेकिन अब यह निर्माण उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बन चुकी है। किन क्षेत्रों में होता है फ्लाई ऐश का इस्तेमाल? फ्लाई ऐश का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं: सड़क और फ्लाईओवर निर्माण सीमेंट उद्योग ईंट और टाइल निर्माण खदानों की बैकफिलिंग रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) कृषि क्षेत्र एनटीपीसी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में उत्पन्न फ्लाई ऐश का: 32% हिस्सा सड़क और फ्लाईओवर निर्माण में, 27% सीमेंट उद्योग में, 14% ईंट और टाइल निर्माण में इस्तेमाल हुआ। सुरक्षित ढुलाई पर रहेगा फोकस फ्लाई ऐश का परिवहन यदि सही तरीके से न किया जाए तो यह पर्यावरण के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसलिए रेलवे विशेष डिजाइन वाले कंटेनरों और ढंके हुए वैगनों का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है, ताकि राख हवा में न फैले और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की न्यायिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Supreme Court of India में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की जाएगी। सरकार इस बदलाव को लागू करने के लिए संसद के आगामी सत्र में एक संशोधन विधेयक पेश करेगी। केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में एक मुख्य न्यायाधीश और 33 अन्य जज कार्यरत हैं। प्रस्तावित संशोधन के लागू होने के बाद चार नए न्यायाधीशों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो जाएगा, जिससे अदालत की कुल क्षमता बढ़ेगी और मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी। दरअसल, देश की शीर्ष अदालत पर लगातार बढ़ते मामलों का दबाव लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है। हजारों की संख्या में लंबित मामलों के कारण कई महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई में देरी होती रही है। जजों की संख्या बढ़ने से न केवल अधिक बेंच गठित की जा सकेंगी, बल्कि संवैधानिक और जटिल मामलों की सुनवाई भी तेज़ गति से संभव हो सकेगी। इससे न्याय वितरण प्रणाली में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है। क्यों जरूरी है यह फैसला? भारत में न्यायिक प्रक्रिया की सबसे बड़ी चुनौती मामलों का लंबित रहना है। सुप्रीम कोर्ट में कई ऐसे केस हैं, जो वर्षों से विचाराधीन हैं। जजों की संख्या बढ़ने से केसों के निपटारे की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे आम नागरिकों को समय पर न्याय मिल सकेगा। इसके अलावा, बड़ी संवैधानिक पीठों के गठन में भी आसानी होगी, जिससे महत्वपूर्ण फैसलों में देरी नहीं होगी। इतिहास में कई बार बढ़ी संख्या सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या समय-समय पर बढ़ाई जाती रही है। 1956 के अधिनियम के तहत शुरुआत में जजों की संख्या सीमित थी। इसके बाद 1960 में इसे बढ़ाकर 13 किया गया, फिर 1986 में 25 तक पहुंचाया गया। 2009 में यह संख्या 30 और 2019 में बढ़ाकर 34 कर दी गई थी। अब एक बार फिर न्यायिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसमें बढ़ोतरी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता में सुधार होगा। अधिक जज होने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी, लंबित मामलों का बोझ कम होगा और न्याय प्रणाली अधिक सुलभ व प्रभावी बनेगी। साथ ही, यह कदम देश में कानून के शासन को मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।