Kolkata TMC Rally 2026: पश्चिम बंगाल में 21 जुलाई को होने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की शहीद दिवस रैली से पहले पार्टी के भीतर सियासी घमासान तेज हो गया है। वरिष्ठ टीएमसी नेता मदन मित्रा ने फेसबुक लाइव के जरिए रैली के दौरान संभावित हिंसा और खूनी संघर्ष की आशंका जताई है। उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के दो गुट आमने-सामने आ सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। दो गुटों में टकराव की आशंका मदन मित्रा ने दावा किया कि 21 जुलाई की रैली में "कालीघाट की मूल टीएमसी" और "अभिषेक बनर्जी की नई युवा टीएमसी" के समर्थकों के अलग-अलग जुलूस निकल सकते हैं। उनके मुताबिक, यदि दोनों गुटों का आमना-सामना हुआ तो कोलकाता की सड़कों पर हिंसक झड़प और खूनी संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने इसके लिए सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया। 'मुझ पर जानलेवा हमला हो सकता है' फेसबुक लाइव के दौरान मदन मित्रा ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रैली के दौरान उन पर हमला या गोलीबारी हो सकती है। उन्होंने कहा, "अगर 21 जुलाई को धर्मतल्ला में मुझ पर गोली चलती है, तो भी मैं पीछे नहीं हटूंगा। मैं किसी से डरने वाला नहीं हूं।" उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वे अपने राजनीतिक रुख से पीछे नहीं हटेंगे। अभिषेक बनर्जी पर साधा निशाना मदन मित्रा ने अभिषेक बनर्जी पर पार्टी में तानाशाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति उनके मन में सम्मान है, लेकिन अभिषेक बनर्जी चापलूसों से घिरे हुए हैं। उन्होंने अभिषेक को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि "डायमंड हार्बर मॉडल" दिखाकर उन्हें डराया नहीं जा सकता। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी किसी की दलाली नहीं की और हमेशा पार्टी के लिए संघर्ष किया। ममता बनर्जी को भी किया आगाह मित्रा ने मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी से अपील करते हुए कहा कि इस बार की शहीद दिवस रैली सामान्य नहीं है। उनके अनुसार, यदि सुबह से ही दोनों गुटों के बीच तनाव बढ़ा तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि धर्मतल्ला और आसपास के इलाके में गोलीबारी जैसी घटनाएं भी हो सकती हैं, इसलिए पार्टी नेतृत्व और प्रशासन को पहले से सतर्क रहना चाहिए। इस्तीफे के बाद और गहराया विवाद मदन मित्रा का यह बयान ऐसे समय आया है जब उन्होंने हाल ही में पार्टी के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी में केवल अभिषेक बनर्जी को महत्व दिया जा रहा है और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी की जा रही है। इस्तीफे के बाद वह रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ नजर आए, जिससे टीएमसी के अंदरूनी मतभेद और खुलकर सामने आ गए। टीएमसी की ओर से नहीं आई प्रतिक्रिया मदन मित्रा के आरोपों और बयानों पर अभी तक अभिषेक बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, 21 जुलाई की शहीद दिवस रैली से पहले पार्टी के भीतर बढ़ती बयानबाजी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति का माहौल गरमा दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि रैली शांतिपूर्ण रहती है या राजनीतिक तनाव और बढ़ता है।
पुरी गोवर्धन मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज के कोलकाता आगमन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। पश्चिम बंगाल में पहली बार उनके सान्निध्य में एक भव्य धर्मसभा आयोजित की जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सहित राज्य सरकार के कई मंत्रियों और विधायकों को भी आमंत्रित किया गया है। इस आयोजन की जानकारी कोलकाता प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी गई। 18 जुलाई को शालीमार पहुंचेंगे शंकराचार्य आयोजक संस्था आनंद वाहिनी की राष्ट्रीय महामंत्री निभा प्रकाश ने बताया कि जगद्गुरु स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज 18 जुलाई की सुबह श्री जगन्नाथ एक्सप्रेस से शालीमार रेलवे स्टेशन पहुंचेंगे। इसके अगले दिन यानी 19 जुलाई को शाम 5 बजे कोलकाता के धन धान्य ऑडिटोरियम में भव्य धर्मसभा का आयोजन किया जाएगा, जहां श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए वे सनातन धर्म से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखेंगे। सनातन धर्म से जुड़े सवालों का देंगे जवाब आयोजकों के अनुसार, धर्मसभा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा पूछे गए सनातन धर्म से जुड़े प्रश्नों का समाधान स्वयं शंकराचार्य करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों के बीच धार्मिक जागरूकता बढ़ाना और सनातन परंपराओं के प्रति सही जानकारी उपलब्ध कराना है। निभा प्रकाश ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए यह अपने प्रकार का पहला बड़ा आयोजन होगा। बड़े जनसमागम की उम्मीद आयोजकों का दावा है कि यह पश्चिम बंगाल में अब तक आयोजित सनातन धर्मावलंबियों के सबसे बड़े आयोजनों में से एक साबित हो सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। प्रेस वार्ता में निभा प्रकाश के अलावा सुभाष अग्रवाल, शंभुनाथ झा और श्रेया नाथ भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री समेत कई जनप्रतिनिधियों को निमंत्रण आयोजकों ने बताया कि इस धर्मसभा के लिए मुख्यमंत्री सहित राज्य सरकार के कई मंत्रियों और विधायकों को आमंत्रित किया गया है। हालांकि, कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है। आयोजन को लेकर प्रशासनिक और सुरक्षा स्तर पर भी तैयारियां की जा रही हैं।
Haldi Benefits in Monsoon: हल्दी भारतीय रसोई का एक ऐसा मसाला है, जिसका इस्तेमाल सदियों से भोजन और पारंपरिक घरेलू उपायों में किया जाता रहा है। लाइफस्टाइल कोच ल्यूक कुटिन्हो और डाइट एक्सपर्ट्स के अनुसार, हल्दी में मौजूद कर्क्यूमिन (Curcumin) शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन यह तभी बेहतर तरीके से अवशोषित होता है जब इसे सही तरीके से सेवन किया जाए। मानसून के मौसम में हल्दी को संतुलित मात्रा में डाइट में शामिल करना इम्यूनिटी, त्वचा और पाचन के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि यह किसी बीमारी का इलाज नहीं है। मानसून में हल्दी क्यों फायदेमंद मानी जाती है? बारिश के मौसम में संक्रमण, पाचन संबंधी समस्याएं और त्वचा से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में हल्दी में मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हल्दी अकेले पानी में मिलाकर पीने की बजाय इसे सही कॉम्बिनेशन के साथ लेना अधिक उपयोगी हो सकता है। हल्दी का असर बढ़ाने का सही तरीका विशेषज्ञों के अनुसार, हल्दी का कर्क्यूमिन शरीर में कम मात्रा में अवशोषित होता है। इसकी बायोएवेलेबिलिटी बढ़ाने के लिए: हल्दी को ½ चम्मच देसी घी, नारियल तेल या ऑलिव ऑयल जैसे हेल्दी फैट के साथ लें। इसमें एक चुटकी काली मिर्च मिलाएं। काली मिर्च में मौजूद पाइपरीन (Piperine) कर्क्यूमिन के अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। हल्दी को दाल, सब्जी, सूप या अन्य पके हुए भोजन में हल्की आंच पर इस्तेमाल करें। मानसून में त्वचा और सेहत के लिए संभावित फायदे शरीर में सामान्य सूजन (Inflammation) को नियंत्रित करने में सहायक हो सकती है। इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करने में मदद मिल सकती है। त्वचा को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में भूमिका निभा सकती है। घाव भरने और स्किन रिकवरी में सहायक मानी जाती है। पाचन तंत्र के सामान्य कार्य को सपोर्ट कर सकती है। जोड़ों की सामान्य सेहत बनाए रखने में मदद मिल सकती है। क्या हल्दी मेटाबॉलिज्म बढ़ाती है? हल्दी मेटाबॉलिज्म को सीधे तेज करने वाला चमत्कारी फूड नहीं है। हालांकि कुछ शोध बताते हैं कि इसमें मौजूद कर्क्यूमिन सूजन कम करने और मेटाबॉलिक हेल्थ को सपोर्ट करने में भूमिका निभा सकता है। इसका असर संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली के साथ ही बेहतर देखा जा सकता है। क्या वजन घटाने में मदद करती है? हल्दी अकेले वजन कम नहीं करती। लेकिन यदि इसे कैलोरी नियंत्रित डाइट, पर्याप्त प्रोटीन, नियमित एक्सरसाइज और अच्छी नींद के साथ शामिल किया जाए, तो यह स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बन सकती है। इसे वजन घटाने का शॉर्टकट नहीं माना जाना चाहिए। कितनी बार करें सेवन? सप्ताह में 4–5 दिन सेवन किया जा सकता है। प्रतिदिन ½ से 1 छोटा चम्मच हल्दी सामान्य खाना पकाने में पर्याप्त मानी जाती है। अधिक मात्रा में सेवन करने से बचें। सेवन का सबसे अच्छा समय दोपहर या रात के भोजन के साथ शाम के समय हल्दी वाला सूप रात में सोने से 1–2 घंटे पहले हल्दी वाला दूध (यदि शरीर को सूट करता हो) खाली पेट लेने की आवश्यकता नहीं है। डाइट चार्ट में कैसे करें शामिल? नाश्ता: वेज चीला या ओट्स उपमा में हल्दी लंच: दाल, सब्जी या खिचड़ी में हल्दी शाम: हल्दी-गाजर सूप डिनर: हल्दी वाली मूंग दाल या सब्जी रेसिपी 1: गोल्डन हल्दी मूंग दाल सूप सामग्री ½ कप धुली मूंग दाल ½ छोटा चम्मच हल्दी एक चुटकी काली मिर्च ½ छोटा चम्मच देसी घी अदरक जीरा नमक स्वादानुसार बनाने की विधि दाल को अच्छी तरह पकाएं। घी में जीरा और अदरक का तड़का लगाएं। हल्दी डालें और पकी हुई दाल मिलाएं। अंत में काली मिर्च डालकर गर्मागर्म परोसें। बनने का समय: 20–25 मिनट प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 180 kcal प्रोटीन: 10 ग्राम फाइबर: 6 ग्राम रेसिपी 2: हल्दी-काली मिर्च वाला गोल्डन मिल्क सामग्री 1 कप लो-फैट दूध या प्लांट-बेस्ड दूध ½ छोटा चम्मच हल्दी एक चुटकी काली मिर्च ½ छोटा चम्मच देसी घी या नारियल तेल दालचीनी (वैकल्पिक) बनाने की विधि दूध को हल्की आंच पर गर्म करें। इसमें हल्दी, काली मिर्च और घी मिलाकर 3–4 मिनट पकाएं। गुनगुना होने पर सेवन करें। बनने का समय: 8–10 मिनट प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 130–160 kcal प्रोटीन: 7–8 ग्राम ध्यान दें :- हल्दी किसी बीमारी का इलाज नहीं है। यदि आपको पित्ताशय (Gallbladder) की समस्या, किडनी स्टोन, ब्लड थिनर दवाओं का सेवन या कोई अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, तो नियमित रूप से अधिक मात्रा में हल्दी या कर्क्यूमिन सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली ही बेहतर स्वास्थ्य का आधार हैं।
कोलकाता: करीब 19 वर्ष पुराने बैरकपुर के चर्चित सुकांत घोष हत्याकांड में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने मामले के मुख्य आरोपी और लंबे समय से फरार चल रहे शिबू कुमार सिंह को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले कई वर्षों से अपनी पहचान बदलकर अखिलेश कुमार शाही के नाम से रह रहा था। गोरखपुर से हुई गिरफ्तारी सीबीआई के अनुसार, खुफिया सूचना और तकनीकी इनपुट के आधार पर मंगलवार को गोरखपुर के रायगंज रोड स्थित साउथ गांधी आश्रम क्षेत्र में छापेमारी कर शिबू कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। ट्रांजिट रिमांड हासिल करने के बाद आरोपी को कोलकाता लाकर अदालत में पेश किया जाएगा। 2007 में हुई थी सर्राफा कारोबारी की हत्या मामला 6 जुलाई 2007 का है। बैरकपुर के चिड़ियामोड़ निवासी और सर्राफा कारोबारी सुकांत घोष एक फोन कॉल आने के बाद घर से व्यवसायिक काम का हवाला देकर निकले थे। अगले दिन उनका रक्तरंजित शव लाटबागान स्थित जवाहर कुंज के पास मिला था। पोस्टमार्टम में उनके शरीर पर धारदार हथियार से किए गए 18 वार के निशान मिले थे। मामले की शुरुआती जांच में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन मुख्य आरोपी शिबू कुमार सिंह फरार हो गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर CBI ने संभाली जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए 27 अगस्त 2009 को कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इसके बाद एजेंसी ने विशेष जांच दल (SIT) गठित कर जांच शुरू की। सीबीआई ने 31 दिसंबर 2010 को पहली चार्जशीट और 14 नवंबर 2011 को पूरक चार्जशीट दाखिल की, जिसमें शिबू कुमार सिंह सहित चार लोगों को आरोपी बनाया गया। 2016 में घोषित हुआ था भगोड़ा लगातार फरार रहने के कारण अदालत ने 15 दिसंबर 2016 को शिबू कुमार सिंह को घोषित भगोड़ा (Proclaimed Offender) घोषित कर दिया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपनी पहचान बदल ली और उत्तर प्रदेश में दूसरे नाम से रहने लगा। फिरौती के आरोप भी आए थे सामने जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आए थे कि कारोबारी सुकांत घोष से कथित तौर पर बड़ी रकम की फिरौती मांगी गई थी। रकम नहीं मिलने पर उनकी हत्या कर दी गई। हालांकि, इस पहलू पर न्यायिक प्रक्रिया अभी भी जारी है और अंतिम फैसला अदालत को करना है। मामले के निष्कर्ष तक पहुंचने की उम्मीद सीबीआई अधिकारियों का मानना है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी से करीब दो दशक पुराने इस बहुचर्चित हत्याकांड की जांच को निर्णायक दिशा मिलेगी। एजेंसी अब आरोपी से पूछताछ कर मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और संभावित सहयोगियों के बारे में भी जानकारी जुटाएगी।
मुंबई: पिछले कारोबारी सत्र की बड़ी गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को जोरदार वापसी की। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी 24,200 के करीब पहुंच गया। एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के चलते घरेलू बाजार में निवेशकों का भरोसा लौटता दिखा। सुबह करीब 9:25 बजे सेंसेक्स 500.85 अंक (0.65%) की बढ़त के साथ 77,555.79 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 141.75 अंक (0.59%) चढ़कर 24,193.80 के स्तर पर पहुंच गया। पिछले सत्र में आई थी बड़ी गिरावट मंगलवार को बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। उस दौरान: सेंसेक्स 561.46 अंक गिरकर 77,054.94 पर बंद हुआ था। निफ्टी 158.95 अंक टूटकर 24,052.05 पर बंद हुआ था। आज की तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत जरूर दी है। इन शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के 30 शेयरों में से अधिकांश हरे निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। सबसे ज्यादा बढ़त वाले प्रमुख शेयर: बजाज फाइनेंस (+2.33%) एक्सिस बैंक (+1.92%) इंडिगो (+1.75%) इटरनल (+1.64%) अल्ट्राटेक सीमेंट (+1.47%) भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ICICI बैंक एशियन पेंट्स रिलायंस इंडस्ट्रीज HDFC बैंक बजाज फिनसर्व अडानी पोर्ट्स बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, सीमेंट और एविएशन सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इन शेयरों पर रहा दबाव बाजार में तेजी के बावजूद आईटी सेक्टर के कुछ बड़े शेयरों में कमजोरी बनी रही। गिरावट वाले प्रमुख शेयर: TCS इंफोसिस टेक महिंद्रा पावर ग्रिड NTPC हिंदुस्तान यूनिलीवर टाटा स्टील आईटी इंडेक्स अन्य सेक्टरों की तुलना में कमजोर बना रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी मजबूती केवल लार्जकैप ही नहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स लगभग 0.39% चढ़ा। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में भी करीब 0.39% की तेजी दर्ज की गई। सेक्टरवार प्रदर्शन में आईटी को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख सेक्टर सकारात्मक दायरे में कारोबार करते नजर आए। वैश्विक संकेतों का मिला सहारा बाजार को वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक संकेत मिले। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर 20% ट्रांजिट शुल्क नहीं लगाया जाएगा, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रही और ब्रेंट क्रूड लगभग 1.16% बढ़कर 85.71 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। रुपये की चाल भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग स्थिर रहा। रुपया 96.1725 प्रति डॉलर पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.20 पर बंद हुआ था। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल बाजार वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कॉर्पोरेट नतीजों पर नजर बनाए हुए है। यदि बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में खरीदारी जारी रहती है, तो बाजार में आगे भी सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।
कोलकाता: कोलकाता में इस्कॉन (ISKCON) की 55वीं ऐतिहासिक रथयात्रा बुधवार, 16 जुलाई को भव्य रूप से निकाली जाएगी। इस वर्ष पहली बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ करेंगे। वहीं, इस्कॉन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी इस समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। मुख्यमंत्री करेंगे रथयात्रा का शुभारंभ इस्कॉन के अनुसार मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सुबह करीब 11:45 बजे कार्यक्रम स्थल पहुंचेंगे। वह भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के दर्शन करने के बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रथ की रस्सी खींचकर यात्रा का शुभारंभ करेंगे। नई सरकार बनने के बाद यह पहला अवसर होगा, जब मुख्यमंत्री इस्कॉन की कोलकाता रथयात्रा में शामिल होंगे। 55वें वर्ष में प्रवेश कर रही रथयात्रा इस्कॉन कोलकाता द्वारा आयोजित यह रथयात्रा पिछले 54 वर्षों से लगातार आयोजित की जा रही है। इस वर्ष का मुख्य विषय "भारत-मंदिर संस्कृति की विरासत" रखा गया है। आयोजकों के अनुसार चीन, रूस, यूक्रेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में भाग लेने के लिए कोलकाता पहुंचे हैं। इस मार्ग से गुजरेगी रथयात्रा रथयात्रा की शुरुआत इस्कॉन मंदिर, 3सी अल्बर्ट रोड से होगी। इसके बाद यात्रा सरत बोस रोड, एक्साइड चौराहा, हंगरफोर्ड स्ट्रीट, एजेसी बोस रोड, हाजरा रोड, श्यामा प्रसाद मुखर्जी रोड, जवाहरलाल नेहरू रोड और आउटराम रोड से होते हुए ब्रिगेड परेड ग्राउंड स्थित मौसी बाड़ी पहुंचेगी, जहां परंपरा के अनुसार भगवान का रथ ठहरेगा। 24 जुलाई को निकलेगी बहुदा यात्रा भगवान जगन्नाथ की वापसी यात्रा यानी बहुदा (उल्टा) रथयात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। यह यात्रा ब्रिगेड परेड ग्राउंड से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए पुनः इस्कॉन मंदिर पहुंचेगी। 17 से 23 जुलाई तक लगेगा श्री जगन्नाथ महामेला रथयात्रा के अगले दिन से 17 जुलाई से 23 जुलाई तक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में श्री जगन्नाथ महामेला आयोजित किया जाएगा। यहां तिरुपति बालाजी मंदिर की स्थापत्य शैली पर आधारित गुंडिचा मंदिर की प्रतिकृति बनाई जाएगी, जहां सात दिनों तक भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी। शांति और सद्भाव का संदेश देगी रथयात्रा आयोजकों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक तनाव और संघर्ष के दौर में इस वर्ष की रथयात्रा शांति, प्रेम, भाईचारे और मानवता का संदेश देने का प्रयास करेगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए हैं।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की प्रस्तावित योजना पर केंद्र सरकार ने फिलहाल रोक लगा दी है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब उद्योग जगत पहले से नए श्रम कानूनों (Labour Codes) के कारण बढ़े हुए अनुपालन खर्च का सामना कर रहा है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि यह प्रस्ताव रद्द नहीं किया गया है। संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा के बाद भविष्य में इस पर आगे निर्णय लिया जाएगा। क्या है मौजूदा EPFO वेतन सीमा? वर्तमान नियमों के अनुसार, 15,000 रुपये तक मासिक मूल वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में योगदान अनिवार्य है। यह सीमा वर्ष 2014 से लागू है और पिछले 12 वर्षों से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। मौजूदा व्यवस्था के तहत कर्मचारी अपने मूल वेतन का 12 प्रतिशत EPF में जमा करते हैं, जबकि नियोक्ता भी समान राशि का योगदान देता है। नियोक्ता के हिस्से का एक भाग EPS में और शेष EPF खाते में जमा होता है। इस व्यवस्था में अधिकतम अनिवार्य मासिक योगदान कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों के लिए 1,800 रुपये तक सीमित है। यदि सीमा बढ़ती तो क्या बदलता? यदि वेतन सीमा 25,000 रुपये कर दी जाती, तो कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अधिकतम अनिवार्य EPF योगदान बढ़कर 3,000 रुपये प्रति माह हो जाता। इसके अलावा, श्रम मंत्रालय के आंतरिक आकलन के अनुसार, इस बदलाव से एक करोड़ से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य रूप से EPF और EPS के दायरे में आ सकते थे। इससे अधिक संख्या में कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलने की संभावना थी। सरकार ने फिलहाल क्यों टाला फैसला? रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का मानना है कि फिलहाल कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना उचित नहीं होगा। नए श्रम कानून लागू होने के बाद कई कंपनियों का अनुपालन खर्च पहले ही बढ़ चुका है। उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि नई व्यवस्थाओं के कारण कंपनियों की वैधानिक लागत में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। आईटी सेक्टर में ही अनुपालन पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च होने की बात कही जा रही है। इसी वजह से सरकार ने फिलहाल वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को स्थगित कर दिया है। श्रम संगठनों की क्या है मांग? श्रम संगठनों का लंबे समय से कहना है कि 15,000 रुपये की सीमा अब मौजूदा वेतन संरचना के अनुरूप नहीं रही। महानगरों और शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में निम्न और मध्यम आय वर्ग के कर्मचारी इससे अधिक वेतन प्राप्त करते हैं, जिसके कारण उनके लिए EPF सदस्यता अनिवार्य नहीं रह जाती। यूनियनों का मानना है कि सीमा बढ़ाने से अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलेगा। अब आगे क्या होगा? सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रस्ताव को पूरी तरह वापस नहीं लिया गया है। उद्योग, श्रमिक संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ चर्चा पूरी होने के बाद इस पर आगे फैसला लिया जाएगा। हालांकि, फिलहाल इसकी कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई है। वर्तमान में EPFO के पास करीब 27 से 28 लाख करोड़ रुपये का कोष है और संगठन के लगभग 8 करोड़ सक्रिय सदस्य हैं, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े सामाजिक सुरक्षा संस्थानों में शामिल है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने सरकारी डॉक्टरों के लिए सप्ताह में 96 घंटे ड्यूटी वाले अपने बयान पर 24 घंटे के भीतर ही सफाई देते हुए यू-टर्न ले लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कोई नया आदेश जारी नहीं किया गया था, बल्कि डॉक्टरों से केवल जनहित में सहयोग का अनुरोध किया गया था। 96 घंटे की ड्यूटी पर दी सफाई सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का उद्देश्य डॉक्टरों के लिए सप्ताह में 96 घंटे की सक्रिय ड्यूटी अनिवार्य करना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों से केवल इतना अनुरोध किया गया था कि वे जरूरत पड़ने पर अपने कार्यस्थल के आसपास उपलब्ध रहें, ताकि मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके। ड्यूटी के दौरान निजी प्रैक्टिस से बचने की अपील स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि डॉक्टरों से ड्यूटी के दौरान निजी प्रैक्टिस से बचने की भी अपील की गई थी। उनका कहना था कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को प्राथमिकता देना जरूरी है और इसी उद्देश्य से यह अनुरोध किया गया था। रविवार को दिया था सख्त बयान एक दिन पहले रविवार को स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि सरकारी अस्पतालों के प्रोफेसरों और डॉक्टरों को सप्ताह में 96 घंटे ड्यूटी करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार जनता की सेवा के लिए वेतन देती है और यदि किसी को यह व्यवस्था स्वीकार नहीं है तो वह नौकरी छोड़ सकता है। इस बयान के बाद राज्यभर में डॉक्टरों और विभिन्न चिकित्सा संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई थी। विरोध के बाद बदला रुख डॉक्टरों के विरोध और बढ़ते विवाद के बीच स्वास्थ्य मंत्री ने सोमवार को अपने बयान को स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार ने कोई बाध्यकारी निर्देश जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि कोलकाता से लेकर जिलों तक सभी सरकारी डॉक्टरों से केवल जनहित में सहयोग की अपेक्षा की गई है। डॉक्टरों में बना हुआ है असंतोष हालांकि मंत्री की सफाई के बाद भी डॉक्टरों के संगठनों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा जारी है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पहले से ही डॉक्टरों पर कार्यभार अधिक है और किसी भी नई व्यवस्था से पहले पर्याप्त संसाधन एवं मानवबल उपलब्ध कराना जरूरी है। सरकार की ओर से फिलहाल इस संबंध में कोई नया औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
Homemade Potato Chips Recipe: अगर आपके बच्चे बार-बार बाजार के पैकेट वाले चिप्स खाने की जिद करते हैं, तो इस बार उन्हें घर पर बने कुरकुरे Potato Chips से सरप्राइज दें। सही तकनीक अपनाकर आप बिना प्रिजर्वेटिव और अपनी पसंद के मसालों के साथ बिल्कुल Crispy Chips तैयार कर सकते हैं। आवश्यक सामग्री 2 बड़े आलू 2 चम्मच नमक 2 बड़े चम्मच सफेद सिरका तलने के लिए तेल स्वादानुसार नमक काली मिर्च पाउडर चाट मसाला पुदीना पाउडर पेरी-पेरी मसाला (वैकल्पिक) ऐसे बनाएं Crispy Potato Chips सबसे पहले आलू धोकर छील लें और स्लाइसर की मदद से बेहद पतले स्लाइस काटें। एक बाउल में ठंडा पानी और नमक मिलाकर स्लाइस को 15–20 मिनट तक भिगो दें ताकि अतिरिक्त स्टार्च निकल जाए। अब एक बर्तन में पानी उबालें और उसमें सफेद सिरका डालें। आलू के स्लाइस को 3–4 मिनट तक हल्का उबालें। इसके बाद स्लाइस को किचन टॉवल पर अच्छी तरह सुखा लें। कढ़ाही में तेल गर्म करें और आलू के स्लाइस को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में मध्यम आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें। अतिरिक्त तेल निकालने के बाद गर्म चिप्स पर नमक, काली मिर्च, चाट मसाला, पुदीना पाउडर या पेरी-पेरी मसाला छिड़ककर अच्छी तरह मिलाएं। स्टोर करने का सही तरीका चिप्स पूरी तरह ठंडे होने के बाद उन्हें एयरटाइट कंटेनर में रखें। इससे वे कई दिनों तक कुरकुरे बने रहते हैं। प्रति सर्विंग अनुमानित पोषण कैलोरी: 180–220 kcal कार्बोहाइड्रेट: 24–28 ग्राम प्रोटीन: 2–3 ग्राम फैट: 9–12 ग्राम फाइबर: 2–3 ग्राम ध्यान दें: डीप फ्राइड चिप्स का सेवन सीमित मात्रा में करें। अधिक हेल्दी विकल्प के लिए इन्हें एयर फ्रायर या बेक करके भी तैयार किया जा सकता है।
कोलकाता: कोलकाता नगर निगम (KMC) ने वार्डों के परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। नगर निगम का लक्ष्य मौजूदा 144 वार्डों की संख्या बढ़ाकर 200 करना है, ताकि प्रत्येक वार्ड में मतदाताओं और मतदान केंद्रों का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जा सके। इस संबंध में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर दी है और परिसीमन के लिए केंद्रीय एवं बोरो स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। दो स्तरों पर गठित की गईं परिसीमन समितियां परिसीमन प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए नगर निगम ने दो स्तरों पर समितियां बनाई हैं। इनमें एक केंद्रीय परिसीमन समिति (Central Delimitation Committee) और दूसरी प्रत्येक बोरो के लिए अलग-अलग समितियां शामिल हैं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, 10 सदस्यीय केंद्रीय परिसीमन समिति के अध्यक्ष विशेष आयुक्त सौम्य भट्टाचार्य होंगे। वहीं, प्रत्येक बोरो समिति का नेतृत्व संबंधित कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) करेंगे, जिनके साथ राजस्व अधिकारी भी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे। 200 वार्ड बनाने की तैयारी नगर निगम की योजना के अनुसार परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 200 कर दी जाएगी। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक वार्ड में औसतन— 20,000 से 25,000 मतदाता 25 से 30 मतदान केंद्र (बूथ) रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे सभी वार्डों में समान प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक संतुलन स्थापित करने में मदद मिलेगी। क्यों जरूरी हुआ परिसीमन? वर्तमान में कोलकाता नगर निगम के कई वार्डों में मतदाताओं की संख्या में काफी असमानता है। कुछ वार्डों में एक पार्षद को 60 हजार से अधिक मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करना पड़ता है, जबकि कुछ वार्ड ऐसे हैं, जहां 10 हजार से भी कम मतदाता हैं। इसी तरह मतदान केंद्रों की संख्या में भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। नगर निगम का मानना है कि इस असंतुलन को दूर करने के लिए वार्डों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण आवश्यक है, जिससे प्रशासनिक कार्य अधिक प्रभावी और जनप्रतिनिधित्व अधिक संतुलित हो सके। आंकड़ों के आधार पर होगा वार्डों का पुनर्गठन बोरो स्तर की समितियां संबंधित क्षेत्रों की— जनसंख्या, मतदाताओं की संख्या, मतदान केंद्रों की उपलब्धता, राजस्व संग्रह, और स्थानीय प्रशासनिक जरूरतों का विस्तृत अध्ययन करेंगी। इसके आधार पर वार्डों की नई सीमाओं और पुनर्गठन को लेकर अपनी सिफारिश केंद्रीय परिसीमन समिति को भेजेंगी। प्रशासनिक व्यवस्था होगी मजबूत नगर निगम का कहना है कि परिसीमन का उद्देश्य केवल वार्डों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि प्रत्येक पार्षद पर समान जिम्मेदारी सुनिश्चित करना और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना भी है। परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नगर निगम की प्रशासनिक व्यवस्था अधिक संतुलित होगी और सभी क्षेत्रों को समान प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद है।
कोलकाता: कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (NSCBI Airport) परिसर स्थित ऐतिहासिक गौरीपुर जामा मस्जिद में बाहरी लोगों के प्रवेश और सामूहिक नमाज पर अस्थायी रोक को लेकर जारी विवाद के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने एयरपोर्ट प्रशासन के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और हवाई अड्डे की सुरक्षा किसी भी अन्य विषय से अधिक महत्वपूर्ण है। शुभेंदु अधिकारी बोले- संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा सर्वोपरि पूर्व मेदिनीपुर जिले के तमलुक में भाजपा की संगठनात्मक बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि जिन स्थानों का सामरिक और सुरक्षा की दृष्टि से विशेष महत्व होता है, वहां बाहरी लोगों के प्रवेश को नियंत्रित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोलकाता हवाई अड्डा संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा सकती। धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक नहीं: अधिकारी शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह फैसला किसी की धार्मिक स्वतंत्रता छीनने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में सभी समुदायों को कानून के दायरे में रहकर अपने धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की पूरी स्वतंत्रता है। बकरीद और मुहर्रम जैसे आयोजनों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नियमों का पालन होने पर किसी तरह की समस्या नहीं होती। क्या है पूरा मामला? एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, हवाई अड्डा परिसर के भीतर रनवे के निकट स्थित करीब 136 वर्ष पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद में मरम्मत और जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। इसी कारण शनिवार से तीन दिनों के लिए मस्जिद में सामूहिक नमाज पर अस्थायी रोक लगाई गई है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। भाजपा विधायक ने उठाए सुरक्षा के सवाल दमदम उत्तर से भाजपा विधायक सौरभ सिकदर ने भी इस मुद्दे पर सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि एयरपोर्ट परिसर उच्च सुरक्षा क्षेत्र है, जहां प्रवेश के लिए बायोमेट्रिक पहचान जरूरी होती है। उन्होंने दावा किया कि नमाज के लिए आने वाले बाहरी लोगों की सुरक्षा जांच पर्याप्त नहीं होती। सिकदर ने यह भी कहा कि मस्जिद की मौजूदा स्थिति के कारण एयरपोर्ट के दोनों रनवे के विस्तार और पूर्ण उपयोग में भी बाधा आती है। मस्जिद समिति ने जताई आपत्ति मस्जिद समिति के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने प्रवेश पास रोके जाने के फैसले पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट प्रशासन के साथ बातचीत जारी थी, ऐसे में नमाज पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने मस्जिद को 135 वर्ष से अधिक पुरानी ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए कहा कि समिति सभी पक्षों के साथ बातचीत के जरिए समाधान चाहती है। सुरक्षा बनाम धार्मिक व्यवस्था पर बहस कोलकाता एयरपोर्ट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर अब सुरक्षा और धार्मिक गतिविधियों के बीच संतुलन का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। जहां एयरपोर्ट प्रशासन और भाजपा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं, वहीं मस्जिद समिति बातचीत के जरिए समाधान निकालने की मांग कर रही है। फिलहाल मरम्मत कार्य पूरा होने तक प्रतिबंध जारी रहेगा।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कोलकाता पुलिस ने दो प्रमुख पुलिस थानों की कमान महिला अधिकारियों को सौंपी है। लंबे अंतराल के बाद मुख्य पुलिस थानों में महिला थाना प्रभारियों (ओसी) की नियुक्ति की गई है। इसे कोलकाता पुलिस के प्रशासनिक ढांचे में एक अहम बदलाव माना जा रहा है। दो प्रमुख थानों में महिला ओसी की नियुक्ति हालिया प्रशासनिक फेरबदल के तहत सरशुना पुलिस स्टेशन की नई प्रभारी रूपा सिंह को बनाया गया है। इससे पहले वह टॉलीगंज महिला पुलिस स्टेशन की प्रभारी थीं। वहीं सिंथी पुलिस स्टेशन की कमान चमेली मुखर्जी को सौंपी गई है। इससे पहले वह उल्टाडांगा महिला पुलिस स्टेशन में ओसी के रूप में कार्यरत थीं। 26 साल बाद मुख्य थानों में महिला नेतृत्व कोलकाता पुलिस के मुख्य पुलिस थानों में महिला अधिकारियों की नियुक्ति लंबे समय बाद हुई है। पिछले कई वर्षों से महिला अधिकारियों को मुख्य रूप से महिला पुलिस थानों तक ही सीमित रखा गया था। पुलिस विभाग के इस फैसले को महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर हुआ तबादला कोलकाता पुलिस आयुक्त के निर्देश पर गुरुवार को शहर के 33 पुलिस थानों के निरीक्षक स्तर के अधिकारियों का तबादला किया गया। इसी प्रशासनिक फेरबदल के दौरान दो मुख्य थानों की जिम्मेदारी महिला अधिकारियों को सौंपी गई। महिला सुरक्षा पर सरकार का जोर राज्य सरकार ने हाल के वर्षों में महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। कोलकाता पुलिस के विभिन्न थानों में महिला सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां महिलाओं से जुड़े मामलों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा महिला अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि वे संवेदनशील मामलों का प्रभावी ढंग से निपटारा कर सकें। महिला सशक्तिकरण का संदेश पुलिस विभाग का मानना है कि मुख्य पुलिस थानों में महिला अधिकारियों की नियुक्ति से प्रशासनिक व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और पुलिस बल में नेतृत्व के नए अवसर खुलेंगे। साथ ही, इससे महिला सुरक्षा और जनविश्वास को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के फंड से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही ED पार्टी के कुल 19 बैंक खातों के लेन-देन की भी गहन जांच कर रही है। मामले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। आरोप है कि पार्टी फंड के जरिए हुए कुछ वित्तीय लेन-देन संदिग्ध पाए गए हैं, जिसके बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। विधायक की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच जानकारी के अनुसार, मामले की शुरुआत एक तृणमूल विधायक की शिकायत के आधार पर हुई थी। सबसे पहले बिधाननगर साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। बाद में वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी के संकेत मिलने पर प्रवर्तन निदेशालय ने मामला अपने हाथ में ले लिया। जांच एजेंसी को कथित तौर पर रिश्वत और अन्य संदिग्ध लेन-देन से जुड़े सुराग मिले हैं। इसी आधार पर तीन बैंक खातों को फ्रीज किया गया है, जबकि अन्य खातों की भी निगरानी की जा रही है। 19 बैंक खातों की जांच जारी सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के नाम पर कुल 19 बैंक खाते संचालित हैं। इनमें से तीन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये जमा होने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल ED इन खातों के लेन-देन की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धनराशि का स्रोत और उपयोग क्या था। विमान और हेलीकॉप्टर खरीद की भी जांच ED ने इस मामले में कोलकाता समेत कई स्थानों पर तलाशी अभियान भी चलाया। जांच के दौरान 'केयरवेल एविएशन' नामक कंपनी के कार्यालय और उसके निदेशक के आवास पर भी छापेमारी की गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस फंड से करीब 160 करोड़ रुपये इस कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए गए। आरोप है कि इसी धनराशि से एक छोटा विमान और एक हेलीकॉप्टर खरीदा गया। जांचकर्ताओं का दावा है कि बाद में इन दोनों का उपयोग किराये पर लेकर किया गया। अदालत पहुंची तृणमूल कांग्रेस खातों के फ्रीज होने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने अन्य बैंक खातों के संचालन की अनुमति देने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। पार्टी का कहना है कि शुरुआत में केवल तीन खाते फ्रीज किए गए थे, लेकिन अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इस संबंध में तृणमूल कांग्रेस ने अदालत में अतिरिक्त हलफनामा भी दाखिल किया है। गुरुवार को होगी अगली सुनवाई मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की पीठ में जारी है। वहीं, न्यायमूर्ति सुब्रता तालुकदार ने विशेष अधिकारी की नियुक्ति सहित अन्य पहलुओं पर सभी पक्षों से जवाब मांगा है। बैंक की ओर से भी अदालत में हलफनामा दाखिल किया गया है। अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव होंगे। इन चुनावों के साथ राज्य की बदली राजनीतिक तस्वीर का असर संसद के उच्च सदन में भी दिखाई दे सकता है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इन तीनों सीटों पर मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, जबकि आंतरिक संकट से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने अपनी मौजूदगी बनाए रखने की चुनौती है। 24 जुलाई को होगा मतदान निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार तीनों सीटों के लिए 24 जुलाई 2026 को मतदान कराया जाएगा। ये सीटें पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई हैं। इन नेताओं ने विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी नेतृत्व से मतभेद जताते हुए राज्यसभा और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया था। विधानसभा में भाजपा के पास मजबूत संख्या बल 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा के पास फिलहाल 208 विधायक हैं। राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक सीट पर जीत के लिए लगभग 70 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी। वर्तमान संख्या बल के आधार पर भाजपा अपने दम पर तीनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने और उन्हें जीत दिलाने की स्थिति में दिखाई दे रही है। तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौती कागजों पर तृणमूल कांग्रेस के पास लगभग 80 विधायक हैं, जिससे वह एक सीट पर मुकाबला करने की स्थिति में हो सकती है। हालांकि पार्टी में जारी आंतरिक खींचतान उसके लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है। राजनीतिक घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। बागी गुट और ममता बनर्जी समर्थक खेमे के बीच जारी विवाद का असर राज्यसभा उपचुनाव पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। बागी गुट का दावा बागी नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का दावा है कि उसे 65 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। गुट का कहना है कि हालिया इस्तीफे पार्टी नेतृत्व पर जनप्रतिनिधियों के घटते विश्वास का संकेत हैं। वहीं, ममता बनर्जी समर्थक खेमे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इस्तीफा देने वाले नेताओं पर संकट के समय पार्टी छोड़ने का आरोप लगाया है। संसद में बदल सकता है प्रतिनिधित्व यदि उपचुनाव के नतीजे मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के अनुरूप रहते हैं, तो पश्चिम बंगाल से राज्यसभा में भाजपा का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है, जबकि तृणमूल कांग्रेस की संख्या घटने की संभावना है। अब सभी की नजरें 24 जुलाई को होने वाले मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हैं, जो पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राज्यसभा की ताकत के समीकरण को भी प्रभावित कर सकते हैं।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। घटना के विरोध में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी सोमवार को कोलकाता की सड़कों पर कैंडल मार्च निकालते हुए नजर आईं। इस दौरान उन्होंने पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की और राज्य की भाजपा सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया। कैंडल मार्च निकालकर जताया विरोध ममता बनर्जी ने कालीघाट से सांसदों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। उन्होंने कहा कि यह मार्च बरुईपुर की पीड़िता को श्रद्धांजलि देने और आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग के लिए आयोजित किया गया। मार्च के दौरान उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध चिंता का विषय हैं और दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा मिलनी चाहिए। "पीड़ित परिवार से मिलने नहीं जाने दिया" फेसबुक पर साझा किए गए अपने संदेश में ममता बनर्जी ने कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद वह पीड़िता के परिवार से मिलने बरुईपुर जाना चाहती थीं, लेकिन उन्हें घर से बाहर निकलने से रोक दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद उन्होंने फोन पर पीड़िता के परिजनों से बात कर उन्हें हरसंभव मदद और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप ममता बनर्जी ने दावा किया कि कैंडल मार्च के दौरान भी पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इसकी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में महिलाओं के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और अपराध की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है तथा सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा नहीं मिलती। त्वरित न्याय की मांग टीएमसी प्रमुख ने मांग की कि मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालत में कराई जाए और दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके। पुराने बयानों को लेकर भी चर्चा बरुईपुर घटना के बीच ममता बनर्जी के पुराने बयान भी एक बार फिर चर्चा में हैं। वर्ष 2012 के कटवा सामूहिक दुष्कर्म मामले और 2022 के हंसखाली प्रकरण में दिए गए उनके बयानों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि उन मामलों में उन्होंने शुरुआती चरण में घटनाओं को लेकर अलग रुख अपनाया था, जबकि टीएमसी का कहना है कि वर्तमान मामले में पार्टी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मामले की जांच जारी बरुईपुर में हुई इस वारदात की जांच पुलिस कर रही है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
कोलकाता: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में एक विशेष समिति का गठन किया गया है। इसके साथ ही नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत पात्र लोगों को नागरिकता देने की प्रक्रिया को तेज करने का भी आश्वासन दिया। अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान जो वादे किए थे, उन्हें चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में "सोनार बांग्ला" के निर्माण की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। UCC लागू करने के लिए बनेगी विशेष समिति गृह मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता लागू करने के उद्देश्य से एक विशेष समिति का गठन किया गया है। उनके अनुसार यह समिति राज्य में UCC लागू करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेगी और आगे की प्रक्रिया तय करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी दिशा में यह कदम उठाया गया है। CAA के तहत नागरिकता प्रक्रिया होगी तेज अमित शाह ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के तहत पात्र शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन लोगों को कानून के तहत नागरिकता मिलने का अधिकार है, उन्हें जल्द इसका लाभ मिलेगा। अवैध घुसपैठ पर सख्त रुख अपने संबोधन में गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकार हर अवैध घुसपैठिए की पहचान करेगी और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ अवैध घुसपैठ रोकने के लिए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा की रखी आधारशिला कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फीट ऊंची प्रस्तावित प्रतिमा की आधारशिला भी रखी। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत को लेकर दिया गया योगदान देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राजनीतिक संदेश भी दिया अपने संबोधन में अमित शाह ने राष्ट्रीय एकता, नागरिकता, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अपने सभी चुनावी संकल्पों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और पश्चिम बंगाल में भी विकास तथा सुशासन को प्राथमिकता दी जाएगी।
आर्लिंग्टन (टेक्सास), एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में स्पेन ने पुर्तगाल को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। इस हार के साथ स्टार फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई। 41 वर्षीय रोनाल्डो के लिए यह उनके करियर का आखिरी फीफा वर्ल्ड कप भी साबित हुआ। मैच खत्म होने के बाद रोनाल्डो भावुक नजर आए और मैदान छोड़ते समय स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाकर उनका सम्मान किया। स्पेन की मजबूत रक्षा बनी जीत की सबसे बड़ी वजह पूरे मुकाबले में स्पेन का डिफेंस बेहद मजबूत नजर आया। पुर्तगाल ने कई बार गोल करने की कोशिश की, लेकिन स्पेनिश गोलकीपर उनाई सिमोन और डिफेंस ने हर प्रयास को नाकाम कर दिया। रोनाल्डो ने पहले हाफ में दो बेहतरीन मौके बनाए, लेकिन सिमोन ने शानदार बचाव करते हुए उन्हें गोल में बदलने नहीं दिया। उनकी एक डाइविंग सेव मैच के सबसे यादगार पलों में शामिल रही। सिमोन ने बनाया नया विश्व रिकॉर्ड 29 वर्षीय गोलकीपर उनाई सिमोन ने लगातार छठे वर्ल्ड कप मैच में क्लीन शीट रखते हुए नया इतिहास रच दिया। स्पेन अब वर्ल्ड कप इतिहास में लगातार सबसे अधिक मैचों तक गोल नहीं खाने वाली पहली टीम बन गई है। इससे पहले यह रिकॉर्ड इटली (1990) और स्विट्जरलैंड (2006-10) के नाम था, जिन्होंने लगातार पांच-पांच मैचों में विपक्षी टीम को गोल नहीं करने दिया था। सिमोन ने व्यक्तिगत उपलब्धि भी हासिल की। उन्होंने लगातार 609 मिनट तक गोल नहीं खाकर इटली के महान गोलकीपर वाल्टर जेंगा का 35 साल पुराना 517 मिनट का रिकॉर्ड तोड़ दिया। मौजूदा टूर्नामेंट में स्पेन की मजबूत रक्षा ने उसे खिताब के सबसे बड़े दावेदारों में शामिल कर दिया है। रोनाल्डो के शानदार करियर का वर्ल्ड कप अध्याय समाप्त क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने 2006 में अपना पहला फीफा वर्ल्ड कप खेला था। उसी टूर्नामेंट में उन्होंने पुर्तगाल को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी, जो उनके वर्ल्ड कप करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। 2018 वर्ल्ड कप में स्पेन के खिलाफ उनकी हैट्रिक आज भी यादगार मुकाबलों में गिनी जाती है। हालांकि इस बार रोनाल्डो अपने वर्ल्ड कप सफर का अंत जीत के साथ नहीं कर सके। मैच समाप्त होने के बाद उनकी आंखों में निराशा साफ दिखाई दी। मैदान से बाहर निकलते समय उन्होंने दर्शकों का अभिवादन किया, जबकि पूरे स्टेडियम ने तालियां बजाकर इस महान खिलाड़ी को सम्मानजनक विदाई दी। स्पेन की नजर अब खिताब पर क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुकी स्पेनिश टीम अब अपने मजबूत डिफेंस और शानदार फॉर्म के दम पर विश्व कप जीतने की प्रबल दावेदार मानी जा रही है। लगातार क्लीन शीट और संतुलित प्रदर्शन ने स्पेन को इस टूर्नामेंट की सबसे मजबूत टीमों में शामिल कर दिया है।
कोलकाता: दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में 12 वर्षीय किशोरी की कथित दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवार से मिलने जाने की उनकी कोशिश को रोक दिया गया और उनके आवास के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात कर उन्हें "हाउस अरेस्ट" जैसी स्थिति में रखा गया। 'पीड़ित परिवार से मिलने नहीं जाने दिया गया' वीडियो संदेश जारी करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वह अकेले बारुईपुर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करना चाहती थीं, लेकिन उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और विभिन्न खुफिया एजेंसियों के कर्मियों की तैनाती कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कारण वह अपने घर से बाहर नहीं निकल सकीं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर जताई चिंता मुख्यमंत्री ने कहा कि बारुईपुर की घटना ने उन्हें बेहद दुखी और चिंतित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों—भगवानपुर, पटाशपुर, कूचबिहार, दुर्गापुर, दिनहाटा और पानीहाटी—में भी महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध सामने आए हैं। ममता ने कहा कि बारुईपुर की घटना ने लोगों के धैर्य की सीमा तोड़ दी है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इलाके में धारा 144 लागू नहीं है, तो उनके आवास के आसपास भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती और रूट मार्च क्यों कराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को स्वतंत्र रूप से कार्यक्रम करने की अनुमति दी जा रही है, जबकि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोका जा रहा है। पीड़ित परिवार से फोन पर की बात ममता बनर्जी ने बताया कि वह स्वयं घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन उन्होंने पीड़ित परिवार से फोन पर बात की और उन्हें हरसंभव मदद तथा न्याय दिलाने का भरोसा दिया। क्या है पूरा मामला? दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर के धपधपी-2 ग्राम पंचायत क्षेत्र में शनिवार से लापता 12 वर्षीय किशोरी का शव रविवार सुबह एक तालाब से बोरे में बंद मिला था। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की और एक संदिग्ध युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस की कार्रवाई जारी पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार करने की पुष्टि की है। वहीं, भीड़ द्वारा एक व्यक्ति की हत्या के मामले में भी अलग से जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल, किशोरी की मौत, दुष्कर्म के आरोप और हिंसा की सभी घटनाओं की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
देवघर, एजेंसियां। विश्वप्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 के लिए देवघर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मंदिर प्रशासन ने वीआईपी कूपनधारकों और सामान्य श्रद्धालुओं की कतारों को अलग-अलग संचालित करने के लिए नया ओवरब्रिज तैयार कर लिया है। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद यह नई व्यवस्था 15 जुलाई 2026 से लागू कर दी जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम और तेज दर्शन की सुविधा मिलेगी। देवघर एसडीएम रवि कुमार ने बताया बाबा मंदिर प्रभारी सह देवघर एसडीएम रवि कुमार ने बताया कि अब तक मंदिर के टी-जंक्शन पर वीआईपी कूपन और सामान्य कतार एक ही मार्ग से गर्भगृह की ओर बढ़ती थीं। संकरे रास्ते के कारण दोनों कतारों के मिलते ही भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन जाती थी। इसके चलते श्रद्धालुओं को घंटों तक इंतजार करना पड़ता था। विशेष रूप से शीघ्र दर्शन कूपन लेने वाले श्रद्धालुओं की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि उन्हें भी अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही थी। नई व्यवस्था के तहत इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने युद्धस्तर पर नए ओवरब्रिज का निर्माण कराया है। नई व्यवस्था के तहत वीआईपी कूपनधारकों और सामान्य श्रद्धालुओं की कतारें अलग-अलग मार्गों से आगे बढ़ेंगी और मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित रूप से पहुंचेंगी। इससे भीड़ का दबाव कम होगा और दर्शन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित बनेगी। मंदिर प्रशासन का दावा हैं मंदिर प्रशासन का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालु केवल 2 से 5 मिनट के भीतर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन, जलार्पण और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। इससे न केवल श्रद्धालुओं का समय बचेगा, बल्कि श्रावणी मेले के दौरान प्रतिदिन उमड़ने वाली भारी भीड़ का बेहतर प्रबंधन भी संभव हो सकेगा। प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था इस वर्ष के श्रावणी मेले को अधिक सुरक्षित, सुगम और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। महंगे किराए और बार-बार कैब बुकिंग रद्द होने की समस्या से जूझ रहे कोलकातावासियों को जल्द बड़ी राहत मिलने वाली है। केंद्र सरकार की सहकारी पहल ‘भारत टैक्सी’ सेवा अब कोलकाता में भी शुरू होने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि अगले दो वर्षों के भीतर देश के 500 से अधिक शहरों में इस सेवा का विस्तार किया जाएगा, जिसमें कोलकाता, मुंबई, पुणे, लखनऊ, चंडीगढ़ और जयपुर प्रमुख शहर शामिल हैं। माना जा रहा है कि गुजरात के बाद इसी वर्ष कोलकाता में भी इस सेवा की शुरुआत हो सकती है। भारत टैक्सी का आधिकारिक शुभारंभ कब हुआ? भारत टैक्सी का आधिकारिक शुभारंभ 27 जून को गुजरात के 14 शहरों में किया गया। यह देश की पहली सहकारी समिति आधारित ऐप कैब सेवा है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ड्राइवर केवल वाहन चालक नहीं बल्कि सेवा के सह-मालिक भी होंगे। यह मॉडल निजी एग्रीगेटर कंपनियों से अलग है, क्योंकि इसमें ड्राइवरों से किसी प्रकार का कमीशन नहीं लिया जाएगा। यात्रियों से मिलने वाला पूरा किराया सीधे ड्राइवर के पास जाएगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और सेवा की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है। भारत टैक्सी क्या है भारत टैक्सी देश की पहली सहकारी समिति द्वारा संचालित एप कैब सेवा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ड्राइवर ही मालिक होते हैं। यह एप कैब केंद्र सरकार और सहकारी समितियों के सहयोग से चलती है। भारत टैक्सी शून्य कमीशन मॉडल पर काम करती है। इसलिए, कार किराए से होने वाली पूरी आय ड्राइवर को ही मिलती है। उसे किसी भी एग्रीगेटर को किराए का कोई हिस्सा नहीं देना पड़ता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, देशभर में सात लाख से अधिक ड्राइवर 100 रुपये का शेयर खरीदकर भारत टैक्सी के शेयरधारक बन चुके हैं। इससे वे केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि इस सहकारी व्यवस्था के भागीदार भी बन गए हैं। सरकार का मानना है कि भारत टैक्सी सेवा से यात्रियों को किफायती और भरोसेमंद परिवहन मिलेगा, जबकि ड्राइवरों को बेहतर आय और स्वामित्व का लाभ मिलेगा। इससे बार-बार बुकिंग रद्द होने जैसी समस्याओं में भी कमी आने की उम्मीद है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद रेलवे ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शनिवार देर रात कोलकाता के पार्क सर्कस रेलवे स्टेशन पर व्यापक बुलडोजर कार्रवाई की गई। रेलवे प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्टेशन परिसर में बनी अवैध दुकानों और अतिक्रमणों को हटाया। रातभर चला अतिक्रमण हटाने का अभियान रेलवे अधिकारियों के अनुसार, अभियान शनिवार रात करीब 10:30 बजे शुरू हुआ और रविवार सुबह तक जारी रहा। कार्रवाई के दौरान स्टेशन परिसर को पूरी तरह पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने घेर लिया, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। चेतावनी के बाद चला बुलडोजर रेलवे प्रशासन ने बताया कि कार्रवाई से पहले माइक के माध्यम से अतिक्रमणकारियों और दुकानदारों को रेलवे भूमि खाली करने की अंतिम चेतावनी दी गई। लेकिन जब किसी ने स्वयं दुकानें नहीं हटाईं, तब बुलडोजर की मदद से एक-एक कर सभी अवैध ढांचों को ध्वस्त कर दिया गया। पहले ही जारी किए गए थे नोटिस रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, जून की शुरुआत में ही पार्क सर्कस स्टेशन पर अवैध रूप से दुकानें चलाने वाले फेरीवालों और व्यापारियों को नोटिस जारी कर दिया गया था। इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। पार्क सर्कस स्टेशन पर लंबे समय से था अतिक्रमण पार्क सर्कस स्टेशन को सियालदह मंडल के सबसे अधिक अतिक्रमण वाले स्टेशनों में गिना जाता है। रेलवे का कहना है कि वर्षों से स्टेशन परिसर में बड़ी संख्या में अवैध दुकानें संचालित हो रही थीं, जिससे यात्रियों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। अन्य स्टेशनों पर भी जारी रहेगा अभियान रेलवे प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अतिक्रमण हटाने का अभियान केवल पार्क सर्कस तक सीमित नहीं रहेगा। हावड़ा, सियालदह, दमदम समेत कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर भी अवैध कब्जों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। रेलवे का कहना है कि यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और स्टेशन परिसरों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए यह अभियान आगे भी चलता रहेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।