श्रीनगर, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में शुक्रवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे इलाके में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 दर्ज की गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।
भूकंप सुबह करीब 9 बजकर 57 मिनट पर आया। जैसे ही धरती हिली, लोग डर के कारण अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। कई इलाकों में लोग खुले स्थानों पर जमा हो गए। प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से घबराने की बजाय सतर्क रहने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक, भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 10 किलोमीटर नीचे स्थित था। इसका केंद्र 33.289 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 76.739 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि किश्तवाड़ और आसपास के पहाड़ी क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं, इसलिए यहां लगातार निगरानी जरूरी है।
बीते कुछ महीनों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में कई बार हल्के भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं। इससे पहले फरवरी में लेह में 3.2 तीव्रता का भूकंप आया था। वहीं मार्च में पुंछ और अप्रैल में श्रीनगर तथा आसपास के इलाकों में भी धरती हिली थी।
भूकंप विज्ञान केंद्र ने कहा है कि हिमालयी क्षेत्र भूगर्भीय गतिविधियों के कारण संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में लोगों को आपदा से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है। प्रशासन ने फिलहाल स्थिति सामान्य बताई है, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी जारी रखी जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर कोलकाता में सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई है. प्रधानमंत्री Narendra Modi के 9 मई के दौरे और Brigade Parade Ground में होने वाले भव्य समारोह को देखते हुए Kolkata Police ने विस्तृत ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है. 16 घंटे तक भारी वाहनों पर रोक कोलकाता पुलिस के मुताबिक शनिवार सुबह 4 बजे से रात 8 बजे तक शहर में भारी और मालवाहक वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी. हालांकि एलपीजी, ऑक्सीजन, दूध, दवा, फल-सब्जी और मछली जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को छूट दी गई है. कई प्रमुख रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट ब्रिगेड परेड ग्राउंड और Victoria Memorial के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. इस वजह से कई अहम मार्गों पर ट्रैफिक बंद या डायवर्ट रहेगा. इन इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा: एस्प्लेनेड खिदिरपुर रोड हॉस्पिटल रोड क्वींसवे एजेसी बोस रोड कैथेड्रल रोड पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे इन रास्तों से बचें और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें. नो-पार्किंग जोन घोषित विक्टोरिया मेमोरियल और ब्रिगेड ग्राउंड के आसपास कई इलाकों को नो-पार्किंग जोन घोषित किया गया है. नियम तोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी. बस और ट्राम सेवाएं भी प्रभावित मध्य कोलकाता और ब्रिगेड इलाके की ओर जाने वाली कई बस और ट्राम सेवाओं के रूट बदले जा सकते हैं. यात्रियों को देरी और ट्रैफिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है. पुलिस ने लोगों को मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने की सलाह दी है. 10 लाख लोगों के जुटने की संभावना प्रशासन को उम्मीद है कि शपथ ग्रहण समारोह में करीब 10 लाख लोग शामिल हो सकते हैं. इसे देखते हुए शहर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है. करीब 4 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं. ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे और स्नाइपर्स के जरिए पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है. ब्रिगेड ग्राउंड बना ‘नो-फ्लाई जोन’ सुरक्षा कारणों से ब्रिगेड परेड ग्राउंड को नो-फ्लाई जोन घोषित किया गया है. निजी ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. नागरिकों के लिए पुलिस की अपील कोलकाता ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से कहा है कि वे घर से निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर देखें. रियल-टाइम जानकारी के लिए पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर नजर रखने की सलाह दी गई है.
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) ने आखिरकार माध्यमिक परीक्षा 2026 यानी कक्षा 10वीं का रिजल्ट जारी कर दिया है। लंबे समय से परिणाम का इंतजार कर रहे लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए शुक्रवार का दिन बेहद अहम रहा। बोर्ड ने सुबह 9:30 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए रिजल्ट की घोषणा की, जबकि छात्रों के लिए ऑनलाइन रिजल्ट लिंक सुबह 10:30 बजे एक्टिव किया गया। जारी आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष माध्यमिक परीक्षा में करीब 9.69 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक कुल 8,14,440 छात्र सफल घोषित किए गए हैं। इस बार कुल पास प्रतिशत 86.83% रहा, जो पिछले साल 2025 के 86.56% से थोड़ा बेहतर है। बोर्ड अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा का आयोजन पूरी पारदर्शिता और सख्ती के साथ किया गया था। टॉपर्स ने किया शानदार प्रदर्शन इस बार उत्तर दिनाजपुर के छात्र अभिरूप भद्र ने पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया। उन्होंने 698 अंक यानी 99.71 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। वहीं प्रियतोष मुखर्जी 696 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। तीसरे स्थान पर अंकन कुमार जाना और मैनाक मंडल ने जगह बनाई। ऐसे चेक करें रिजल्ट छात्र अपना रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट wbresults.nic.in और wbbse.wb.gov.in पर जाकर देख सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपना रोल नंबर और जन्म तिथि दर्ज करनी होगी। रिजल्ट डाउनलोड करने के बाद छात्र उसका प्रिंटआउट भी निकाल सकते हैं। डिजिलॉकर और SMS से भी मिलेगी मार्कशीट इंटरनेट की समस्या होने पर छात्र SMS के जरिए भी रिजल्ट देख सकते हैं। इसके लिए मोबाइल में “WB10 रोल नंबर” टाइप कर 5676750 पर भेजना होगा। इसके अलावा डिजिलॉकर ऐप या वेबसाइट के माध्यम से भी डिजिटल मार्कशीट डाउनलोड की जा सकती है। बोर्ड ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अपनी मार्कशीट में नाम, रोल नंबर, जन्मतिथि और विषयवार अंक जैसी जानकारियां ध्यान से जांच लें। किसी भी गलती की स्थिति में तुरंत स्कूल प्रशासन से संपर्क करें।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की करारी हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। अब पश्चिम मेदिनीपुर जिले की रामजीवनपुर नगरपालिका के अध्यक्ष कल्याण तिवारी ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में बढ़ते दबाव, धमकी और केंद्रीय नियंत्रण की राजनीति ने संगठन को कमजोर कर दिया। कल्याण तिवारी ने दावा किया कि चुनाव के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने जमीनी कार्यकर्ताओं की कोई सुध नहीं ली। उन्होंने कहा कि “भतीजा” शब्द ने पार्टी को बर्बाद कर दिया। उनका इशारा अभिषेक बनर्जी की ओर था, जिन्हें पार्टी में ममता बनर्जी के बाद सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता है। ‘हर रात आता था फोन, हटाने की दी जाती थी धमकी’ तिवारी ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान उन्हें लगातार आई-पैक (I-PAC) की ओर से फोन आते थे। उनसे कहा जाता था कि वे सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं और उन्हें पद से हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़ने का रास्ता भी बंद था क्योंकि पुलिस लगातार निगरानी कर रही थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि नेताओं को अभिषेक बनर्जी से मिलने से पहले अपनी “कलम और कमरबंद” तक बाहर छोड़नी पड़ती थी। तिवारी ने कहा कि पार्टी के अंदर भय और दबाव का माहौल बना दिया गया था, जिससे कई नेता खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते थे। शुभेंदु अधिकारी की तारीफ भी की कल्याण तिवारी ने कई मुद्दों पर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी की प्रशंसा भी की। उन्होंने कहा कि शुभेंदु अधिकारी के पार्टी छोड़ने के बाद टीएमसी का संगठन कमजोर पड़ने लगा। तिवारी के अनुसार, उसी समय से पार्टी में “दबदबे की राजनीति” शुरू हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगरपालिका अध्यक्षों को रैलियों और सभाओं के लिए पैसे भेजने के निर्देश दिए जाते थे, लेकिन यह नहीं बताया जाता था कि धन कहां से आएगा। तिवारी के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।