पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य स्थापना दिवस को लेकर बड़ा फैसला लिया है। बुधवार को राज्य सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया कि अब हर वर्ष 20 जून को आधिकारिक रूप से ‘पश्चिम बंगाल दिवस’ मनाया जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह निर्णय राज्य के ऐतिहासिक और राजनीतिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री दिलीप घोष ने बताया कि 20 जून की तारीख बंगाल के इतिहास में विशेष महत्व रखती है। उनके अनुसार, वर्ष 1947 में इसी दिन तत्कालीन संयुक्त बंगाल विधानसभा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मतदान हुआ था, जिसने बाद में पश्चिम बंगाल के गठन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि सरकार इस ऐतिहासिक घटना को औपचारिक मान्यता देना चाहती है।
इस निर्णय के साथ राज्य सरकार ने उस परंपरा से अलग रास्ता अपनाया है, जिसमें बंगाली नववर्ष ‘पोइला बोइशाख’ के अवसर पर पश्चिम बंगाल दिवस मनाया जाता था।
नई सरकार का मानना है कि राज्य के गठन से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों को आधार बनाकर स्थापना दिवस मनाना अधिक उपयुक्त होगा।
सरकार ने 20 जून के आयोजन को व्यापक रूप देने की योजना बनाई है। इसके लिए संस्कृति और गृह विभाग को आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य सचिवालय से लेकर जिला, ब्लॉक और स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें सांस्कृतिक आयोजन, व्याख्यान, प्रदर्शनी और इतिहास से जुड़े विशेष कार्यक्रम शामिल होंगे।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को पश्चिम बंगाल के गठन और उससे जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों की जानकारी देना है।
इसके तहत राज्य के विभिन्न हिस्सों में इतिहास, संस्कृति और सामाजिक विकास से संबंधित कार्यक्रम आयोजित कर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
राज्य स्थापना दिवस की नई तिथि तय किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दल इस फैसले को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।
सरकार का कहना है कि यह निर्णय ऐतिहासिक तथ्यों और राज्य की विरासत को सम्मान देने की भावना से लिया गया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026 से 20 जून को पूरे पश्चिम बंगाल में आधिकारिक कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य स्थापना दिवस मनाया जाएगा।
प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और सभी विभागों को कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंत्रिपरिषद के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया है। राज्य सरकार ने बुधवार को विभाग आवंटन का आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी किया। इस बहुप्रतीक्षित सूची में कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कुछ नए चेहरों को भी अहम विभागों की जिम्मेदारी मिली है। मुख्यमंत्री ने अपने पास रखे अहम विभाग मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गृह, बिजली, सूचना एवं संस्कृति, भूमि एवं भूमि सुधार, शरणार्थी राहत एवं पुनर्वास तथा पहाड़ी क्षेत्र विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं। इसके अलावा वे उन सभी विभागों की भी निगरानी करेंगे, जो किसी अन्य मंत्री को आवंटित नहीं किए गए हैं। कैबिनेट मंत्रियों के विभाग 1.शुभेंदु अधिकारी - मुख्यमंत्री, गृह, बिजली, इन्फॉर्मेशन एंड कल्चरल, रिफ्यूजी रिलीफ समेत तमाम विभाग, जो मंत्रियों को आवंटित नहीं हैं 2.निशीथ प्रमाणिक - उत्तर बंगाल विकास मंत्रालय, जल संरक्षण 3.अशोक कीर्तनिया - फूड एंड सप्लाई, सहकारिता 4.दिलीप घोष - पंचायती राज, ग्रामीण विकास, कृषि विपणण 5.क्षुधिराम टूडू - आदिवासी विकास, अल्पसंख्यक कल्याण और मदरसा शिक्षा 6.अग्निमित्रा पॉल - शहरी विकास, नगर निगम 7.दीपक बर्मन - स्कूली शिक्षा, हाउसिंग, माइक्रो और मीडियम इंटरप्राइजेज, टेक्सटाइल्स 8.तापस रॉय - उद्योग, कामर्स, रिन्यूबल एनर्जी 9.शंकर घोष - संसदीय कार्य मंत्री और पर्यटन 10.मनोज कुमार ओरांव - वन एवं पर्यावरण 11.अर्जुन सिंह - श्रम, ट्रांसपोर्ट 12.गौरी शंकर घोष - पिछड़ी जाति कल्याण 13.जगन्नाथ चौधरी - उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्किल डेवलेपमेंट 14.स्वप्न दास गुप्ता - वित्त 15.कल्याण चक्रवर्ती - आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, हार्टिकल्चर 16.शरद्वत मुखर्जी - हेल्थ और परिवार कल्याण 17.अरुप कुमार दास - सिंचाई 18. अजय कुमार पोद्दार - पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग और पब्लिक वर्क्स 19.दूध कुमार मंडल - कृषि स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के विभाग 1.मालती रेवा रॉय - महिला और बाल कल्याण, सोशल वेलफेयर 2.राजेश मिश्रा - पशु संसाधन और मत्स्य 3.इंद्रनील खान - युवा और खेल मामलों के मंत्री राज्य मंत्री के विभाग 1. जोएल मूर्मू - आदिवासी विकास, सिंचाई 2.डॉ. हरेकृष्ण बेरा - उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्किल डेवलेपमेंट 3.आनंदमय बर्मन - ट्रांसपोर्ट और वित्त मंत्रालय 4.अशोक डिंडा - एग्रीकल्चरल मार्केटिंग, टेक्सटाइल, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज 5.नादियार चंद बाउरी - पब्लिक वर्क्स, पिछड़ा कल्याण 6. बिशाल लामा - गृह, मदरसा शिक्षा 7.शांतनु प्रमाणिक - फूड एंड सप्लाई, पंचायती राज, ग्रामीण विकास 8.मौमिता बिस्वास मैत्रा - इंडस्ट्री, कॉर्मर्स एंड इंटरप्राइजेज, बायोटेक्नॉलोजी 9.उमेश राय - संसदीय विभाग, शहरी विकास, निगम 10.पूर्णिमा चक्रवर्ती - सूचना, कल्चरल अफेयर, पर्यटन 11.कौशिक चक्रवर्ती - स्कूली शिक्षा, फायर एंड इमरजेंसी 12.भास्कर भट्टाचार्य - पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग, श्रम 13.दिबाकर ग्रहमी - सहकारिता, वन एवं पर्यावरण 14.अमिया किसकू - फूड प्रोसेसिंग, कृषि 15.कलिता मांझी - हाउसिंग 16.गार्गी दास घोष - बिजली, रिन्यूबल एनर्जी 17.बिरज बिस्वास - लैंड रिफॉर्म, रिफ्यूजी रिलीफ, सुंदरबन 18.सुमाना सरकार - स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान स्थित आतंकवादी शहजाद भट्टी से जुड़े आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए पंजाब और हरियाणा में 18 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। एजेंसी की यह कार्रवाई दोनों राज्यों के नौ जिलों में की गई, जहां संदिग्धों के ठिकानों पर तलाशी लेकर कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए। डिजिटल उपकरण और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज जब्त एनआईए के अनुसार छापेमारी के दौरान कई डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की गई है। प्रारंभिक जांच में संचार नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ी जानकारियां सामने आई हैं। एजेंसी ने बताया कि जब्त की गई सामग्री को फोरेंसिक और तकनीकी जांच के लिए भेजा गया है, ताकि नेटवर्क की कार्यप्रणाली और उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाया जा सके। सहयोगियों और स्थानीय मॉड्यूल की पहचान पर फोकस एनआईए का कहना है कि इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य शहजाद भट्टी के सहयोगियों और विभिन्न मामलों में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करना है। जांच के दौरान कुछ व्यक्तियों को नोटिस जारी कर आगे की पूछताछ के लिए बुलाया गया है। एजेंसी को संदेह है कि यह नेटवर्क आतंकवादी गतिविधियों और संगठित अपराध के गठजोड़ के रूप में काम कर रहा था, जिसे सीमा पार से संचालित किया जा रहा था। रोजर संधू के घर ग्रेनेड हमले में सामने आया था नाम जांच एजेंसी के मुताबिक मार्च 2025 में जालंधर स्थित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के आवास पर हुए ग्रेनेड हमले की साजिश में भी शहजाद भट्टी का नाम सामने आया था। इस मामले में एनआईए ने अप्रैल 2026 में शहजाद भट्टी और एक अन्य आरोपी के खिलाफ फरार आरोपी के रूप में आरोपपत्र दाखिल किया था। हरियाणा के विस्फोट मामलों से भी जुड़े तार एनआईए की जांच में यह भी सामने आया है कि नवंबर 2025 में हरियाणा के सिरसा स्थित महिला पुलिस थाने में हुए विस्फोट और जनवरी 2026 में अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन में हुए विस्फोट की साजिश रचने में भी भट्टी की कथित भूमिका रही है। सिरसा विस्फोट मामले में एजेंसी ने मई 2026 में शहजाद भट्टी, पाकिस्तान स्थित हैंडलर सोहेल अहमद समेत नौ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। अंबाला कार बम मामले में भी मिला कनेक्शन अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन से जुड़े कार बम विस्फोट मामले की जांच के दौरान गिरफ्तार किए गए एक आरोपी के शहजाद भट्टी से सीधे संपर्क होने के प्रमाण मिले थे। इसके बाद इस मामले को भी एनआईए ने अपनी व्यापक जांच में शामिल कर लिया। सीमा पार से आतंकी गतिविधियों की साजिश का खुलासा करने में जुटी NIA एनआईए का कहना है कि तीनों मामलों की जांच अभी जारी है। एजेंसी का लक्ष्य इन हमलों की पूरी साजिश का पर्दाफाश करना और पाकिस्तान से संचालित आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क के सभी सहयोगियों की पहचान करना है। जांच एजेंसी के अनुसार शुरुआती संकेत बताते हैं कि भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए स्थानीय आपराधिक गिरोहों और मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी नेटवर्क की परतें खोलने के लिए आगे भी जांच जारी रहेगी।
शाहरुख दूसरे, प्रियंका तीसरे और अमिताभ 7वें नंबर पर मुंबई, एजेंसियां। दिग्गज क्रिकेटर विराट कोहली भारत की सबसे वैल्युएबल पर्सनैलिटी की लिस्ट में पहले स्थान पर हैं। उनकी ब्रांड वैल्यू 3,542 करोड़ रुपए है। शाहरुख खान दूसरे और प्रियंका चोपड़ा जोनस तीसरे पायदान पर हैं। फॉर्च्यून इंडिया और इंटरब्रांड ने देश की 25 सबसे वैल्युएबल सेलिब्रिटी पर रिसर्च की। इसमें टॉप 10 में 3 क्रिकेटर और 7 फिल्मी सेलिब्रटी हैं। टॉप-25 सेलिब्रिटीज में दीपिका, रश्मिका महिला सेलिब्रिटीज में प्रियंका चोपड़ा सबसे ऊपर रहीं। इसके अलावा दीपिका पादुकोण (11वां स्थान), रश्मिका मंदाना (17वां स्थान), कृति सेनन, भारतीय महिला क्रिकेटर स्मृति मंधाना और साउथ की एक्ट्रेस नयनतारा को जगह मिली है। वैल्युएबल पर्सन की सूची में दिलजीत दोसांझ, करन जौहर, सौरव गांगुली और विकी कौशल के भी नाम हैं। कैसे तय की गई ब्रांड वैल्यू इस अध्ययन में ब्रांड वैल्यू तय करने के लिए सेलिब्रिटीज की कमाई, फॉलोअर्स या बॉक्स ऑफिस पर सफलता से इतर कई अन्य बातों पर भी ध्यान दिया गया है। इनमें ब्रांड की ताकत को तय करने वाले पहलुओं जैसे- विशिष्टता, सामंजस्य, जुड़ाव, विश्वास, आत्मीयता और जिम्मेदारी पर भी गौर किया गया है, जो मिलकर उनकी फाइनल ब्रांड वैल्यू तय करते हैं।