राष्ट्रीय

चिनाब में बाढ़ के बाद बौखलाया पाकिस्तान, भारत पर लगाए आरोप; हालात पर बढ़ी निगरानी

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
चिनाब नदी में जलस्तर बढ़ने और बाढ़ के खतरे के बाद भारत पर आरोप लगाता पाकिस्तान
Chenab River Flood Pakistan Blames India Indus Waters Treaty

इस्लामाबाद, एजेंसियां। चिनाब नदी में बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति के बाद पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान ने नदी के बहाव को लेकर भारत पर आरोप लगाए हैं और कहा है कि अचानक पानी छोड़े जाने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा है। हालांकि, भारत की ओर से नदी के जलप्रवाह को लेकर अपनी निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत जानकारी साझा किए जाने की बात कही जाती रही है।

 

चिनाब के किनारे कई इलाकों में बढ़ा खतरा

 

चिनाब नदी के बढ़ते जलस्तर से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और राहत एवं बचाव तैयारियां तेज कर दी गई हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि नदी में पानी बढ़ने से कृषि भूमि और आबादी वाले क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है।

 

पाकिस्तान ने भारत पर उठाए सवाल

 

पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि भारत की ओर से बांधों और जलाशयों से पानी छोड़े जाने की वजह से चिनाब नदी का जलस्तर बढ़ा। इस मुद्दे को लेकर पाकिस्तान ने अपनी चिंता जताई है। वहीं, भारत का पक्ष रहा है कि सिंधु जल संधि के तहत दोनों देशों के बीच नदी जल से जुड़ी सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है और जल प्रवाह प्राकृतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।

 

सिंधु जल संधि को लेकर फिर चर्चा तेज

 

चिनाब नदी का मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। चिनाब, सिंधु नदी प्रणाली की प्रमुख नदियों में से एक है और दोनों देशों के लिए इसका रणनीतिक महत्व है।

 

सीमा पार जल प्रबंधन पर नजर

 

बाढ़ की स्थिति के बीच दोनों देशों की निगाह नदी के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में आपसी सूचना साझा करना और जल प्रबंधन बेहद जरूरी होता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक की मांग करते जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू
Sridhar Vembu का सुझाव- छोटे बच्चों के लिए भारत में सोशल मीडिया पर लगे रोक, बोले- किताबें पढ़ें और बाहर खेलें

नई दिल्ली, एजेंसियां। Zoho Corporation के सह-संस्थापक Sridhar Vembu ने छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत को भी कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।   फ्रांस के फैसले का दिया उदाहरण   श्रीधर वेम्बू ने यह बयान फ्रांस द्वारा 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लगाने की पहल के संदर्भ में दिया। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को ज्यादा समय स्क्रीन पर बिताने के बजाय किताबें पढ़ने, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों में समय देना चाहिए।   बच्चों की मानसिक और शारीरिक सेहत को लेकर चिंता   वेम्बू का कहना है कि कम उम्र में सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के विकास पर असर डाल सकता है। लगातार स्क्रीन टाइम से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, सामाजिक व्यवहार और शारीरिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ने की चिंता जताई जाती रही है। उन्होंने बच्चों के लिए ऐसा माहौल बनाने की जरूरत बताई, जहां वे तकनीक का संतुलित इस्तेमाल करें और वास्तविक जीवन की गतिविधियों से जुड़े रहें।   भारत में सोशल मीडिया बैन पर पहले भी हुई है चर्चा   भारत में बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। विशेषज्ञों का एक वर्ग उम्र सीमा और पैरेंटल कंट्रोल जैसे उपायों की बात करता है, जबकि कुछ लोग पूरी तरह प्रतिबंध के बजाय डिजिटल शिक्षा और सुरक्षित ऑनलाइन वातावरण बनाने पर जोर देते हैं।   सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ रही जिम्मेदारी   दुनियाभर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से बच्चों की सुरक्षा के लिए उम्र सत्यापन, कंटेंट नियंत्रण और बेहतर सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग बढ़ रही है। कई देशों में बच्चों के ऑनलाइन अधिकारों और सुरक्षा को लेकर नए नियमों पर चर्चा चल रही है।  

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कोलकाता में NGT ईस्टर्न जोन बेंच को फिर से सक्रिय करने के लिए प्रधानमंत्री से अपील करते पर्यावरण कार्यकर्ता सुभाष दत्ता
कोलकाता में NGT ईस्टर्न बेंच को लेकर मांग तेज, पर्यावरण कार्यकर्ता ने PM से हस्तक्षेप की अपील

कोलकाता, एजेंसियां। पर्यावरण कार्यकर्ता सुभाष दत्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोलकाता स्थित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की ईस्टर्न जोन बेंच को फिर से नियमित रूप से सक्रिय करने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि नियमित बेंच के अभाव में पूर्वी भारत के कई महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मामलों की सुनवाई में देरी हो रही है।   पूर्वी भारत के पर्यावरण मामलों पर पड़ रहा असर   सुभाष दत्ता ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि कोलकाता की NGT ईस्टर्न जोन बेंच पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर राज्यों और अंडमान-निकोबार क्षेत्र से जुड़े पर्यावरण मामलों के निपटारे के लिए महत्वपूर्ण है। नियमित व्यवस्था नहीं होने से कई मामलों में सुनवाई प्रभावित हो रही है।   पर्यावरण विवादों के जल्द समाधान की मांग   पर्यावरण कार्यकर्ता का कहना है कि प्रदूषण, नदियों की सुरक्षा, औद्योगिक गतिविधियों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों में समय पर न्याय जरूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस दिशा में जल्द कदम उठाने की अपील की है।   NGT की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण   नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल पर्यावरण से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाला विशेष न्यायिक निकाय है। इसकी क्षेत्रीय बेंचों का उद्देश्य स्थानीय पर्यावरण विवादों का तेजी से निपटारा करना है। कोलकाता की ईस्टर्न जोन बेंच पूर्वी राज्यों के लिए अहम मानी जाती है।   कोलकाता बेंच को लेकर पहले भी उठ चुकी हैं मांगें   NGT की क्षेत्रीय बेंचों में लंबित मामलों और पर्याप्त न्यायिक सदस्यों की उपलब्धता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। पर्यावरण संगठनों का कहना है कि मजबूत व्यवस्था के बिना पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में देरी हो सकती है।   अब केंद्र के फैसले पर नजर   सुभाष दत्ता की अपील के बाद अब नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित बेंच के संचालन से पूर्वी भारत के पर्यावरण संबंधी मामलों की सुनवाई को गति मिल सकती है।  

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NEET-UG विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों के भविष्य और देश की एकता का दिया हवाला

Breaking News: NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई अनियमितताओं को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना त्यागपत्र भेजते हुए कहा कि उनका यह फैसला देश की एकता, छात्रों के भविष्य और लोकतांत्रिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर लिया गया है। अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि जंतर-मंतर और देशभर में बने हालात का फायदा कोई राष्ट्रविरोधी ताकत न उठा सके, देश की एकता बनी रहे और छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों में न उलझे, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया है। 'युवाओं का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न फंसे' धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वे हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों और युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते रहे हैं। पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से वे बेहद व्यथित थे। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि देश की युवाशक्ति को भ्रमित होने से बचाना उनकी प्राथमिकता है। उनका मानना है कि छात्र आंदोलन का लाभ राष्ट्रविरोधी तत्वों को नहीं मिलना चाहिए और विद्यार्थियों को विरोध-प्रदर्शन के बजाय अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देना चाहिए। NEET-UG परीक्षा पर दी सफाई इस्तीफे के साथ धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। 3 मई 2026: परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने जांच CBI को सौंपी। परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया गया। भविष्य में NEET-UG को Computer-Based Test (CBT) मोड में आयोजित करने की घोषणा की गई। 21 जून 2026: देशभर में 20 लाख से अधिक छात्रों के लिए पुनः परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई। 16 जुलाई 2026: संशोधित परीक्षा परिणाम घोषित किए गए, जिसमें बड़ी संख्या में मेधावी छात्रों ने सफलता हासिल की। 'कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह किया' धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की थी और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो। हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और स्थिति को और जटिल बनाने का प्रयास किया, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा। प्रधानमंत्री और सहयोगियों का जताया आभार अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व, मार्गदर्शन और विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पद छोड़ने के बावजूद राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और वे भविष्य में भी देश, ओडिशा की जनता तथा युवाओं के हित में कार्य करते रहेंगे।    

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