दुनिया

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का मुख्यालय और वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साइबर जोखिमों पर रिपोर्ट
आईएमएफ की चेतावनी: वित्तीय क्षेत्र में AI के बढ़ते इस्तेमाल से बढ़ सकते हैं साइबर जोखिम, मजबूत नियमन की जरूरत

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि वित्तीय क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता उपयोग जहां बैंकिंग और भुगतान सेवाओं को अधिक कुशल बना रहा है, वहीं इससे साइबर सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के लिए नए जोखिम भी पैदा हो रहे हैं। आईएमएफ ने कहा कि यदि AI से जुड़े जोखिमों के लिए समय रहते प्रभावी नियामकीय ढांचा नहीं बनाया गया, तो भविष्य में इसका असर पूरे वैश्विक वित्तीय तंत्र पर पड़ सकता है।   बैंकिंग और भुगतान प्रणाली पर बढ़ सकता है खतरा   आईएमएफ की रिपोर्ट के अनुसार, AI की मदद से साइबर हमलावर पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से सुरक्षा कमजोरियों का पता लगा सकते हैं और बड़े पैमाने पर हमले कर सकते हैं। बैंक, भुगतान नेटवर्क, क्लाउड सेवाएं और साझा डिजिटल अवसंरचना ऐसे हमलों से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। संस्था ने आगाह किया कि यदि एक ही तकनीकी प्लेटफॉर्म पर निर्भर कई वित्तीय संस्थानों पर एक साथ हमला हुआ, तो यह वित्तीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।   वैश्विक सहयोग और कड़े नियमन पर जोर   आईएमएफ ने सरकारों, केंद्रीय बैंकों और वित्तीय नियामकों से AI आधारित जोखिमों के लिए स्पष्ट नियम बनाने, साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक-निजी सहयोग बढ़ाने की अपील की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि AI के लाभ तभी सुरक्षित रहेंगे, जब इसके साथ मजबूत निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित नियमन भी विकसित किया जाए।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) मुख्यालय और अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड, जिन्होंने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया है
यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरें यथावत रखीं, अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले फैसले पर

फ्रैंकफर्ट, एजेंसियां। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। बैंक ने कहा कि यूरोजोन में महंगाई धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है, लेकिन वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए फिलहाल सतर्क रुख अपनाना जरूरी है। ECB के इस फैसले के बाद अब वैश्विक वित्तीय बाजारों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति बैठक पर टिक गई है।   महंगाई और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाने की चुनौती   ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने कहा कि बैंक आगे भी आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर ही ब्याज दरों को लेकर निर्णय लेगा। उन्होंने माना कि यूरोप में महंगाई पहले की तुलना में कम हुई है, लेकिन वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और व्यापारिक अनिश्चितताएं अभी भी जोखिम बनी हुई हैं। इसलिए जल्दबाजी में किसी नीति बदलाव की संभावना नहीं है।   फेड के फैसले का वैश्विक बाजारों पर रहेगा असर   विश्लेषकों का मानना है कि अब निवेशकों का पूरा ध्यान अगले सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है। यदि फेड ब्याज दरों में बदलाव करता है या भविष्य की नीति को लेकर कोई बड़ा संकेत देता है, तो उसका असर वैश्विक शेयर बाजारों, बॉन्ड यील्ड, डॉलर और उभरते बाजारों की मुद्राओं पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में ईसीबी के स्थिर रुख के बाद वित्तीय बाजार फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने सऊदी अरब के साथ परमाणु समझौते के लिए इजरायल से संबंध सामान्य करने की शर्त रखी है
ट्रंप ने सऊदी अरब के सामने रखी नई शर्त, इजरायल से संबंध सामान्य होने पर ही मिलेगा परमाणु समझौता

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ प्रस्तावित असैन्य परमाणु समझौते को लेकर नई शर्त रख दी है। ट्रंप ने कहा कि यह समझौता तभी लागू होगा, जब सऊदी अरब इजरायल के साथ राजनयिक संबंध सामान्य करेगा और अब्राहम समझौते (Abraham Accords) में शामिल होगा। इस बयान के बाद मध्य पूर्व की कूटनीति में नई हलचल शुरू हो गई है।   सऊदी अरब के सामने बड़ी कूटनीतिक चुनौती   सऊदी अरब लंबे समय से कहता रहा है कि वह फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र की दिशा में ठोस प्रगति के बिना इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित नहीं करेगा। ऐसे में ट्रंप की नई शर्त ने प्रस्तावित परमाणु समझौते के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्हाइट हाउस ने भी स्पष्ट किया है कि यदि सऊदी अरब अब्राहम समझौते में शामिल नहीं होता, तो यह परमाणु समझौता आगे नहीं बढ़ेगा।   मध्य पूर्व की राजनीति पर पड़ सकता है बड़ा असर   विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम मध्य पूर्व की रणनीतिक राजनीति को नया मोड़ दे सकता है। इजरायल ने इस शर्त का स्वागत किया है, जबकि सऊदी अरब की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य होते हैं तो यह क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और अमेरिका की पश्चिम एशिया नीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा। हालांकि फिलिस्तीन मुद्दे को लेकर सऊदी रुख में बदलाव की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में तेल टैंकरों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमले
हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में नए हमलों का दावा किया, वैश्विक समुद्री व्यापार पर बढ़ी चिंता

सना, एजेंसियां। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में दो सऊदी तेल टैंकरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा किया है। हूती समूह का कहना है कि यह कार्रवाई उनके घोषित समुद्री नाकेबंदी अभियान का हिस्सा है। इस घटना के बाद लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई है।   तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर बढ़ा खतरा   हमलों के बाद कई तेल टैंकरों ने अपना मार्ग बदल लिया है, जबकि कुछ जहाजों ने लाल सागर के रास्ते यात्रा टाल दी। बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हमले जारी रहे तो जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा सफर तय करना पड़ सकता है, जिससे माल ढुलाई की लागत और समय दोनों बढ़ेंगे।   मध्य पूर्व संकट और गहरा, वैश्विक बाजारों पर असर   इस घटनाक्रम के बीच अमेरिका ने ईरान समर्थित हूती हमलों के लिए तेहरान को जिम्मेदार ठहराया है और कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। वहीं संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने क्षेत्र में तनाव कम करने की अपील की है। लाल सागर में बढ़ते खतरे का असर वैश्विक तेल बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समुद्री मार्गों में बाधा बढ़ी तो वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
यूरोपीय संघ द्वारा रूस पर यूक्रेन युद्ध को लेकर 21वां कड़ा प्रतिबंध पैकेज लागू
रूस पर यूरोपीय संघ का नया आर्थिक प्रहार, यूक्रेन युद्ध को लेकर 21वां प्रतिबंध पैकेज लागू

ब्रसेल्स, एजेंसियां। यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोपीय संघ (EU) ने रूस के खिलाफ 21वां प्रतिबंध पैकेज लागू कर दिया है। इस नए पैकेज के तहत रूस के वित्तीय, ऊर्जा और सैन्य क्षेत्रों को निशाना बनाया गया है। यूरोपीय संघ का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस की युद्ध क्षमता को कमजोर करना और उस पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाना है।   बैंकों, ऊर्जा कंपनियों और 'शैडो फ्लीट' पर कड़ी कार्रवाई   नए प्रतिबंधों के तहत 218 नए व्यक्तियों और संस्थाओं को प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया है। इनमें 94 रूसी बैंक, मॉस्को स्टॉक एक्सचेंज, कई क्रिप्टो ऑपरेटर, तेल कंपनियां और रूस की तथाकथित 'शैडो फ्लीट' से जुड़े जहाज शामिल हैं। इसके अलावा कई बैंकों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली SWIFT से अलग करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है। यूरोपीय संघ का मानना है कि इससे रूस की वित्तीय गतिविधियों और युद्ध के लिए धन जुटाने की क्षमता पर असर पड़ेगा।   यूक्रेन के समर्थन का दोहराया संकल्प   यूरोपीय संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक रूस यूक्रेन के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बंद नहीं करता, तब तक आर्थिक और वित्तीय दबाव जारी रहेगा। दूसरी ओर रूस ने इन प्रतिबंधों को राजनीतिक कदम बताते हुए कहा है कि वह अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक जवाबी कदम उठाएगा। इस बीच नए प्रतिबंधों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार और यूरोप-रूस संबंधों पर भी दुनिया की नजर बनी हुई है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस मध्य पूर्व संकट पर चेतावनी देते हुए
मध्य पूर्व संकट गहराया, संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने क्षेत्रीय तनाव को ‘नियंत्रण से बाहर’ होने की चेतावनी दी

न्यूयॉर्क,एजेंसियां। मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव और बढ़ती हिंसा को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने गंभीर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि क्षेत्र की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है और यदि सभी पक्षों ने संयम नहीं बरता तो हालात पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ता संघर्ष न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की शांति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।   ईरान, अमेरिका और क्षेत्रीय संघर्षों ने बढ़ाई चिंता   संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा चुनौतियां तथा विभिन्न क्षेत्रीय समूहों की सैन्य गतिविधियों ने संकट को और गहरा कर दिया है। गुटेरेस ने सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाई रोकने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े सैन्य टकराव का असर ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है।   कूटनीतिक समाधान पर जोर, दुनिया की नजर अगले कदमों पर   संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि इस संकट का समाधान सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। संगठन ने संबंधित देशों से वार्ता की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और तनाव कम करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। इस बीच तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता ने दुनिया भर की सरकारों और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जिन्होंने भारत और 60 अन्य देशों पर नया आयात शुल्क लगाया है
अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों पर लगाया नया आयात शुल्क, भारतीय उत्पादों पर 10% टैरिफ लागू

वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित 60 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लागू करने का ऐलान किया है। नए आदेश के तहत भारत से अमेरिका जाने वाले अधिकांश उत्पादों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। यह फैसला अमेरिकी व्यापार कानून के Section 301 के तहत लिया गया है और शुक्रवार से प्रभावी हो गया।   भारत को 12.5% के बजाय 10% टैरिफ, नीति बदलाव का मिला लाभ   अमेरिका ने शुरुआत में भारत पर 12.5% शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन भारत द्वारा फोर्स्ड लेबर (जबरन श्रम) से बने उत्पादों के आयात पर रोक संबंधी नीति में बदलाव करने के बाद टैरिफ दर घटाकर 10% कर दी गई। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जिन देशों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं, उन्हें कम दर पर शुल्क लगाया गया है।   व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है असर   विशेषज्ञों का मानना है कि नए टैरिफ का असर भारत के कुछ निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है, हालांकि 10% की दर अन्य कई देशों की तुलना में कम है। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी अब दोनों देशों की बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस फैसले के बाद वैश्विक व्यापार जगत की नजर दोनों देशों के अगले कदमों पर टिकी हुई है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 24, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0