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CBI Arrests Army Colonel in Scam Case

सेना के टेंडर घोटाले में CBI का बड़ा एक्शन, कोलकाता में तैनात कर्नल हिमांशु बाली गिरफ्तार

surbhi मई 20, 2026 0
CBI officials investigating alleged Army tender corruption case linked to Colonel Himanshu Bali in Kolkata
CBI Arrests Colonel Himanshu Bali

Central Bureau of Investigation (CBI) ने सेना के टेंडरों में कथित रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए Colonel Himanshu Bali को गिरफ्तार किया है। कर्नल हिमांशु बाली Fort William स्थित पूर्वी कमान में सेना आयुध कोर में तैनात थे।

सूत्रों के मुताबिक, कर्नल बाली पर करीब 50 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। सीबीआई की एफआईआर में दावा किया गया है कि उन्होंने कानपुर की एक निजी कंपनी को सेना के टेंडर दिलाने में अनुचित लाभ पहुंचाया और इसके बदले रिश्वत स्वीकार की।

क्या है पूरा मामला?

सीबीआई के अनुसार यह मामला भारतीय सेना की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि कर्नल हिमांशु बाली ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया।

जांच एजेंसी ने मामले में छापेमारी और शुरुआती जांच के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की। फिलहाल सीबीआई यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में अन्य अधिकारी या निजी कंपनियां भी शामिल थीं या नहीं।

सेना में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा संदेश

विशेषज्ञों के मुताबिक सेना जैसे संवेदनशील संस्थान में किसी वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी बेहद गंभीर मामला माना जाता है। यह कार्रवाई रक्षा संस्थानों में पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख का संकेत मानी जा रही है।

पूछताछ जारी

सीबीआई ने कर्नल हिमांशु बाली से पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि आगे की पूछताछ में टेंडर घोटाले से जुड़े और अहम खुलासे हो सकते हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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चढ़ावा चोरी मामले के बीच राम जन्मभूमि ट्रस्ट की अहम बैठक, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर मंथन

अयोध्या, एजेंसियां। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावा चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण में आठ लोगों की गिरफ्तारी और ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों पर लगे आरोपों के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने की। अस्वस्थ होने के बावजूद उन्होंने बैठक में हिस्सा लिया और घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पर भरोसा भी जताया।   बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र के त्यागपत्रों पर विचार करना है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने बैठक की शुरुआत करते हुए दोनों के इस्तीफों पर चर्चा का प्रस्ताव रखा। ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें राजा अयोध्या विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद एक पद रिक्त है।   बैठक में ट्रस्ट के कई प्रमुख सदस्य मौजूद हैं  जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, युगपुरुष स्वामी परमानंद, कृष्णमोहन और स्वामी गोविंद देव गिरी बैठक में शामिल हुए, जबकि नृपेंद्र मिश्र और वरिष्ठ अधिवक्ता के. पारासरन वर्चुअल माध्यम से जुड़े। उत्तर प्रदेश सरकार के अपर प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए। संजय प्रसाद को एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी है, जिस पर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है।   क्या है मामला? गौरतलब है कि 5 जून को पहली बार चढ़ावा चोरी का मामला सामने आया था। इसके बाद 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया और अब तक जांच के दौरान आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

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देशभर में मॉनसून ने पकड़ी रफ्तार, कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली, एजेंसियां। जून महीने में कमजोर रहने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने 11 जुलाई तक दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके साथ ही तेज हवाएं, गरज-चमक और बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।   उत्तर भारत से लेकर पश्चिमी तट तक बारिश का असर आईएमडी के मुताबिक, अगले तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर अरब सागर, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ेगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जून में मॉनसून ट्रफ के हिमालय की तलहटी की ओर खिसकने से बारिश में कमी आई थी, लेकिन अब इसके दोबारा सक्रिय होने से बारिश का दौर तेज होगा। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में भारी बारिश के कारण अलकनंदा नदी चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गई है।   मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत में भी भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़, पश्चिम और पूर्वी मध्य प्रदेश, विदर्भ, झारखंड, बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भी अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश की संभावना जताई है। वहीं, कोंकण-गोवा, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र और सौराष्ट्र-कच्छ में 6 और 7 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। केरल, तटीय कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में भी भारी बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है।   मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का मिजाज अधिक अनिश्चित होता जा रहा है। कम समय में अत्यधिक बारिश से बाढ़ और लंबे समय तक बारिश की कमी से सूखे जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने और खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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Prime Minister Narendra Modi departs for Indonesia on a two-day official visit to hold bilateral talks and strengthen strategic, defence and economic ties.

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भारी बारिश से मुंबई-पुणे कनेक्टिविटी ठप, एक्सप्रेसवे और पुराना हाईवे बंद; लोगों से यात्रा टालने की अपील

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चंदा चोरी मामला: राम मंदिर ट्रस्ट की आज अहम बैठक, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर हो सकता है फैसला

अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार (6 जुलाई) को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन मामले की जांच के बीच आयोजित इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के भविष्य को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, दोनों के इस्तीफों के साथ-साथ विशेष जांच दल (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। बैठक ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के मठ मणिराम छावनी में आयोजित होगी। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने सभी नियमित और पदेन सदस्यों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। वर्चुअली शामिल हो सकते हैं अध्यक्ष सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में उनके वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होने की संभावना है। वहीं वरिष्ठ ट्रस्टी के. परासरन भी स्वास्थ्य कारणों से वर्चुअल माध्यम से बैठक में भाग ले सकते हैं। बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा? बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर विचार किया जा सकता है— महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के सौंपे गए इस्तीफे। दान राशि के कथित गबन मामले में SIT की अंतरिम जांच रिपोर्ट। ट्रस्ट के प्रशासनिक और भविष्य के निर्णयों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे। ट्रस्ट के नियम क्या कहते हैं? श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बायलॉज के अनुसार— कोई भी ट्रस्टी कम से कम एक महीने का लिखित नोटिस देकर इस्तीफा दे सकता है। ट्रस्ट अगली बैठक में उसे स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय लेता है। यदि किसी ट्रस्टी पर ट्रस्ट के हितों के खिलाफ काम करने का आरोप हो, तो उसे हटाने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। किसी भी ट्रस्टी को हटाने से पहले कारण बताओ नोटिस देना और अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य है। वर्तमान में ट्रस्ट के 12 सदस्य निर्णय प्रक्रिया में शामिल हैं। किसी प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए कम से कम 8 सदस्यों का समर्थन आवश्यक होगा। VHP ने क्या कहा? इस मामले पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि कथित दान गबन विवाद से करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और उसके प्रशासनिक फैसलों के लिए वीएचपी जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अपने नियमों और प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। सभी की नजर बैठक के फैसले पर राम मंदिर ट्रस्ट की यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दान राशि के कथित गबन मामले को लेकर जांच जारी है। ऐसे में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर ट्रस्ट क्या फैसला लेता है और SIT की अंतरिम रिपोर्ट पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। बैठक के बाद ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।  

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