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Railways Clear Slums Near Bandra Station

मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर रेलवे का बड़ा एक्शन, 18% अवैध झोपड़ियां हटाई गईं; आज भी जारी रहेगा अभियान

surbhi मई 20, 2026 0
Railway officials removing illegal slums near Bandra Terminus during anti-encroachment drive in Mumbai
Bandra Terminus Encroachment Removal Drive

Western Railway ने Bandra Terminus के पास अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। Bombay High Court के निर्देशों के बाद शुरू किए गए इस अभियान के पहले दिन करीब 18 प्रतिशत अवैध झोपड़ियों को हटाया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।

23 मई तक चलेगा अभियान

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी Vineet Abhishek ने बताया कि यह पांच दिवसीय अभियान 23 मई तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य लगभग 5,300 वर्ग मीटर रेलवे भूमि को खाली कराना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

रेलवे के अनुसार बांद्रा टर्मिनस के पुनर्विकास के तहत यहां एलिवेटेड रोड, बहुमंजिला इमारतें, आधुनिक प्लेटफॉर्म और रखरखाव सुविधाओं से युक्त एकीकृत परिसर विकसित करने की योजना है।

रेलवे भूमि पर बनी थीं 500 झोपड़ियां

अधिकारियों के मुताबिक गरीब नगर इलाके में रेलवे की जमीन पर करीब 500 अवैध झोपड़ियां बनी हुई थीं। अभियान के पहले दिन इनमें से लगभग 15 से 18 प्रतिशत झोपड़ियों को खाली कराया गया।

रेलवे ने कहा कि कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नागरिक प्रशासन, पुलिस और रेलवे सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीम तैनात की गई है।

2017 से चल रही थी कानूनी प्रक्रिया

पश्चिम रेलवे के बयान के अनुसार इस मामले में सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत कार्रवाई 2017 से पहले शुरू की गई थी और 27 नवंबर 2017 को बेदखली के आदेश पारित किए गए थे।

रेलवे ने बताया कि इस मामले में लगभग नौ वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया चली, जिसमें Bombay High Court और Supreme Court of India में सुनवाई भी शामिल रही।

हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से मिली अनुमति

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 29 अप्रैल 2026 को दिए गए अपने आदेश में चिन्हित पात्र संरचनाओं को संरक्षण देते हुए अवैध अतिक्रमण हटाने की अनुमति दी थी। बाद में इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में भी बरकरार रखा गया।

रेलवे का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए की जा रही है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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NIA Pahalgam Terror Attack
NIA ने पहलगाम आतंकी हमले की सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज़ सईद को बनाया आरोपी

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज़ मोहम्मद सईद को सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी बनाया है। एजेंसी ने उसे हमले की सीमा पार से रची गई साजिश का मुख्य मास्टरमाइंड बताया है।   सीमा पार साजिश का आरोप   NIA के अनुसार, चार्जशीट में हाफिज़ सईद पर प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट के जरिए पहलगाम हमले की साजिश रचने और आतंकियों को निर्देश देने का आरोप लगाया गया है। एजेंसी ने अदालत के समक्ष सीमा पार आतंकी नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य भी पेश किए हैं।   26 लोगों की हुई थी मौत   यह आतंकी हमला अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ था, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। NIA का कहना है कि जांच में पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क और हमले में शामिल आतंकियों के बीच स्पष्ट संबंध सामने आए हैं।   जांच जारी   NIA ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी भी जारी है और आतंकी साजिश से जुड़े अन्य आरोपियों एवं सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि आतंकवाद से जुड़े पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

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BSNL ने लॉन्च किया 'यात्रा सिम', 196 रुपये में 15 दिन तक अनलिमिटेड कॉलिंग और 2GB डेटा प्रतिदिन

नई दिल्ली, एजेंसियां। सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL ने अमरनाथ यात्रा सहित अन्य धार्मिक यात्राओं पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष 'यात्रा सिम' लॉन्च किया है। महज 196 रुपये की कीमत वाले इस सिम में यात्रियों को 15 दिनों की वैधता, किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिलिंग, प्रतिदिन 2GB हाई-स्पीड डेटा और 100 SMS प्रतिदिन की सुविधा मिलेगी। कंपनी का उद्देश्य दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में भी यात्रियों को बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है।   इन केंद्रों से खरीद सकेंगे यात्रा सिम BSNL के अनुसार, यह विशेष सिम जम्मू-कश्मीर में स्थित विभिन्न टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर, BSNL कस्टमर केयर सेंटर और अमरनाथ यात्रा के प्रमुख बेस कैंपों पर उपलब्ध कराया गया है। श्रद्धालु इसे लखनपुर बेस कैंप, भगवती नगर (जम्मू), बालटाल, पहलगाम और श्रीनगर के नौगाम स्थित टूरिस्ट रिसेप्शन सेंटर से खरीद सकते हैं।   सिम लेने के लिए यात्रियों को आधार कार्ड या पासपोर्ट जैसे पहचान पत्र, पते का प्रमाण, एक पासपोर्ट आकार का फोटो और आधिकारिक यात्रा पंजीकरण पर्ची (रजिस्ट्रेशन स्लिप) की फोटोकॉपी जमा करनी होगी।   ग्रामीण नेटवर्क और 5G विस्तार पर भी जोर BSNL का कहना है कि कंपनी केवल यात्रा सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में अपने नेटवर्क को मजबूत बनाने पर भी तेजी से काम कर रही है। खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर करने के लिए नेटवर्क विस्तार किया जा रहा है। इसके साथ ही BSNL ने पुणे, बेंगलुरु, पांडिचेरी, विशाखापट्टनम, ग्वालियर और चंडीगढ़ सहित कई शहरों में 5G नेटवर्क की टेस्टिंग भी शुरू कर दी है। कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले समय में ग्राहकों के लिए और भी नए मोबाइल व ब्रॉडबैंड प्लान पेश किए जाएंगे। BSNL का यह 'यात्रा सिम' खासतौर पर उन श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जिन्हें यात्रा के दौरान विश्वसनीय नेटवर्क और अपने परिजनों से लगातार संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता होती है।

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