Bhiwandi Building Collapse: महाराष्ट्र के भिवंडी में चार मंजिला कोहिनूर बिल्डिंग ढहने से हुई 10 लोगों की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। भिवंडी-निजामपुर नगर निगम (BNCMC) की शिकायत के आधार पर बिल्डिंग मालिक और मरम्मत कार्य कर रहे ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। दोनों पर बिना अनुमति निर्माण और घटिया मरम्मत कार्य कराने के आरोप लगाए गए हैं। बिल्डिंग मालिक और ठेकेदार बने आरोपी पुलिस के अनुसार, बिल्डिंग मालिक बिलाल अहमद अबूबकर खान पर आवश्यक अनुमति के बिना निर्माण और मरम्मत कराने का आरोप है। वहीं, बिल्डिंग के पिलरों की मरम्मत का काम कर रहे ठेकेदार अशोक को भी आरोपी बनाया गया है। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं तथा महाराष्ट्र रीजनल एंड टाउन प्लानिंग (MRTP) एक्ट की धारा 52 और 53 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि निर्माण और मरम्मत कार्य में सुरक्षा मानकों का कितना उल्लंघन हुआ। नगर निगम की शिकायत पर दर्ज हुआ केस इस मामले में शिकायत भिवंडी-निजामपुर नगर निगम के अनधिकृत निर्माण विभाग के प्रभारी सहायक आयुक्त फैजल अब्दुल कय्यूम टाटली ने दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इमारत में बिना वैधानिक अनुमति के मरम्मत और निर्माण कार्य कराया जा रहा था, जिससे यह हादसा हुआ। हादसे में 10 लोगों की मौत, 3 घायल इस दर्दनाक हादसे में 10 लोगों की जान चली गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। मृतकों में क्रिस कुमार, रंजीत सिंह, मिराज रसूल शेख, संतोष कुमार पांडे, शमीम अंसारी, राकेश पासवान, अशोक पासवान, मुकेश पासवान, श्यामजी मुराहू पाल और राधेश्याम कमलेश कुशवाहा शामिल हैं। वहीं, अभय कुमार यादव, दीपक कुमार यादव और संगीता प्रजापति घायल हुए हैं, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। पहले ही खतरनाक घोषित की जा चुकी थी इमारत यह हादसा 30 जुलाई की रात करीब 11:30 बजे भिवंडी के बालाजी नगर स्थित गंगारामवाड़ी इलाके में हुआ, जब चार मंजिला कोहिनूर बिल्डिंग का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था। अधिकारियों के अनुसार, इमारत में 48 कमरे थे और स्थानीय नगर निगम ने इसे पहले ही खतरनाक (डेंजरस) भवन घोषित किया था। इसके बावजूद इमारत में लोग रह रहे थे और मरम्मत कार्य जारी था। अवैध निर्माण पर उठे सवाल हादसे के बाद शहर में अवैध निर्माण, जर्जर इमारतों और नगर निगम की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल शांतिनगर पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हादसे के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है तथा क्या सुरक्षा नियमों की अनदेखी की गई थी।
मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री आयशा खान उस समय चर्चा में आ गईं जब उन्हें मुंबई में हुए छात्र समर्थन प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में ले लिया। अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना स्पष्ट कारण बताए पुलिस वाहन में बैठाया गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर अपनी आपबीती बताई और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। NEET और छात्र मुद्दों के समर्थन में प्रदर्शन में पहुंचीं थीं आयशा खान रिपोर्टों के अनुसार, आयशा खान छात्रों से जुड़े मुद्दों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। यह प्रदर्शन NEET सहित शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर किया जा रहा था। कई अन्य कलाकारों ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी है। अभिनेत्री ने पुलिस कार्रवाई पर जताई नाराजगी आयशा खान ने दावा किया कि वह केवल प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थीं और उन्होंने किसी तरह की हिंसा या कानून तोड़ने वाली गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि उन्हें हिरासत में लेने का कारण स्पष्ट नहीं बताया गया। कुछ घंटों बाद हुई रिहाई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आयशा खान को कुछ समय बाद पुलिस ने रिहा कर दिया। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई है। उनके समर्थकों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन की ओर से प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई है। 'धुरंधर' और बिग बॉस 17 से मिली पहचान आयशा खान को टीवी रियलिटी शो बिग बॉस 17 से व्यापक पहचान मिली थी। इसके बाद वह फिल्मों और म्यूजिक प्रोजेक्ट्स में नजर आईं। हाल में वह फिल्म 'धुरंधर' से भी चर्चा में रहीं। छात्र आंदोलन और बॉलीवुड हस्तियों की भागीदारी चर्चा में छात्रों से जुड़े मुद्दों पर अब कई फिल्मी हस्तियां अपनी राय रख रही हैं। आयशा खान की हिरासत की घटना के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल लोगों के साथ प्रशासन का रवैया कैसा होना चाहिए।
मुंबई, एजेंसियां। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में हाल के दिनों में हुए विभिन्न प्रदर्शनों को लेकर पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, पिछले पांच दिनों में प्रदर्शन और उससे जुड़ी घटनाओं को लेकर 13 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जबकि करीब 400 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। प्रदर्शन के दौरान नियमों के उल्लंघन का आरोप मुंबई पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनों के दौरान तय नियमों का उल्लंघन किया गया। कई जगहों पर बिना अनुमति भीड़ जुटाने, यातायात बाधित करने और सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्था फैलाने के आरोप में कार्रवाई की गई है। पुलिस ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। कई इलाकों में बढ़ाई गई सुरक्षा प्रदर्शनों को देखते हुए मुंबई के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रमुख सरकारी कार्यालयों, रेलवे स्टेशनों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी नजर रखने की बात कही है, ताकि अफवाहों और भड़काऊ संदेशों को फैलने से रोका जा सके। पुलिस ने की शांति बनाए रखने की अपील मुंबई पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रदर्शन में शामिल होने से पहले प्रशासन की अनुमति और नियमों का पालन करें। अधिकारियों ने कहा कि आम लोगों की सुरक्षा और शहर की सामान्य व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। विपक्ष ने कार्रवाई पर उठाए सवाल वहीं, कुछ विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों पर अत्यधिक सख्ती नहीं होनी चाहिए और सरकार को प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बातचीत करनी चाहिए। दूसरी ओर, प्रशासन ने कहा है कि कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ की जा रही है जिन्होंने कानून का उल्लंघन किया है। मुंबई में स्थिति पर प्रशासन की नजर फिलहाल मुंबई में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। पुलिस और प्रशासन लगातार हालात की निगरानी कर रहे हैं और अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की हिंसा या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
Mouni Roy Viral Video: अभिनेत्री मौनी रॉय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह पपाराजी पर नाराज़ होती दिखाई दे रही हैं। घटना उस समय हुई जब मौनी रॉय अभिनेत्री अनुषा दांडेकर के साथ मुंबई के एक रेस्टोरेंट से बाहर निकलकर अपनी कार में बैठ रही थीं। इसी दौरान पपाराजी लगातार उनकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करते रहे, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कार के अंदर तक पहुंची रिकॉर्डिंग, नाराज़ हुईं मौनी वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पहले अनुषा दांडेकर कार में बैठती हैं और उसके बाद मौनी रॉय वहां पहुंचती हैं। चारों ओर मौजूद फोटोग्राफर लगातार कैमरे उनकी ओर किए हुए थे। वीडियो के अनुसार, रिकॉर्डिंग कार के काफी करीब तक जारी रही, जिससे मौनी स्पष्ट रूप से असहज नजर आईं। शुरुआत में उन्होंने खुद को शांत रखने की कोशिश की, लेकिन जब रिकॉर्डिंग नहीं रुकी तो उन्होंने नाराज़गी जताते हुए कहा, "बंद करो... बंद करो इसे।" उनके चेहरे पर गुस्सा और असहजता साफ दिखाई दे रही थी। अनुषा दांडेकर ने शांत कराया माहौल स्थिति बिगड़ती देख अनुषा दांडेकर ने बीच-बचाव किया। उन्होंने पपाराजी से रिकॉर्डिंग रोकने का इशारा किया और साथ ही मौनी रॉय को भी शांत करने की कोशिश की। इसके बाद मामला धीरे-धीरे सामान्य हुआ और दोनों वहां से रवाना हो गईं। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि निजी स्पेस का सम्मान किया जाना चाहिए, जबकि कुछ लोगों ने मौनी के गुस्से पर अलग-अलग राय व्यक्त की है। हालांकि, वीडियो के आधार पर उनकी नाराज़गी के पीछे किसी व्यक्तिगत कारण की पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर चल रही अटकलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। हाल ही में निजी जिंदगी भी रही चर्चा में हाल के दिनों में मौनी रॉय अपनी निजी जिंदगी को लेकर भी सुर्खियों में रही हैं। उनके और पति सूरज नांबियार के अलग होने की खबरों ने काफी चर्चा बटोरी थी। इसके अलावा, उन्होंने हाल ही में अपने बारे में फैली कुछ अफवाहों पर भी खुलकर प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि उनके बारे में कई गलत बातें कही गईं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। प्राइवेसी बनाम पपाराजी कल्चर पर फिर छिड़ी बहस इस घटना के बाद एक बार फिर सेलिब्रिटीज़ की निजता और पपाराजी कल्चर को लेकर बहस तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर कवरेज की सीमा क्या होनी चाहिए और क्या कलाकारों की निजी जगह का सम्मान किया जाना चाहिए। यह चर्चा सोशल मीडिया पर लगातार जारी है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार को कंपनियों से वसूले गए करीब 81 अरब डॉलर (लगभग 6.7 लाख करोड़ रुपये) वापस करने पड़े हैं। अदालत ने ट्रंप प्रशासन की विवादित टैरिफ व्यवस्था को कानून के अनुरूप नहीं माना था। मई-जून में लौटाए गए 71 अरब डॉलर मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अमेरिकी सरकार ने मई और जून के दौरान लगभग 71 अरब डॉलर कंपनियों को वापस कर दिए हैं। शेष राशि का भुगतान भी चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। क्यों लगा था टैरिफ? राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत, चीन, यूरोप सहित कई देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। सरकार का तर्क था कि इससे विदेशी सामान महंगे होंगे, अमेरिकी उत्पादों की मांग बढ़ेगी और घरेलू उद्योग को लाभ मिलेगा। हालांकि, कई बड़ी कंपनियों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने इस वर्ष फरवरी में सुनाए गए फैसले में कहा कि संबंधित टैरिफ नियम कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थे। इसके बाद सरकार को कंपनियों से वसूली गई राशि ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया गया। नए टैरिफ की तैयारी में ट्रंप अदालती फैसले के बावजूद ट्रंप प्रशासन नए आयात शुल्क लागू करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा टैरिफ व्यवस्था समाप्त होने के बाद कई देशों के आयात पर 10% से 12.5% तक नया शुल्क लगाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इसका असर भारत, चीन, जापान, ब्रिटेन और ताइवान जैसे देशों के निर्यात पर पड़ सकता है। ब्राजील और यूरोप को भी चेतावनी रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ब्राजील पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। साथ ही उन्होंने कहा है कि यदि यूरोपीय देश अमेरिकी टेक कंपनियों पर नए कर लागू करते हैं, तो अमेरिका उनके उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाने पर विचार कर सकता है। वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका नई टैरिफ नीति लागू करता है, तो वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर इसका असर पड़ सकता है। साथ ही अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
यरुशलम: Benjamin Netanyahu ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इजरायल दोबारा सैन्य कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनाव को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी है। तुर्की की सरकारी समाचार एजेंसी अनादोलु के अनुसार, एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी सुरक्षा के मामले में किसी अन्य देश पर निर्भर नहीं रहेगा और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। 'जरूरत पड़ी तो तीसरी बार भी करेंगे कार्रवाई' नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ पहले की गई सैन्य कार्रवाइयों ने इजरायल को संभावित परमाणु खतरे से बचाया। उन्होंने कहा कि यदि इजरायल की सुरक्षा को फिर से खतरा महसूस हुआ, तो ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेगा और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार रहेगा। अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच बढ़ा तनाव नेतन्याहू का बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और परमाणु मुद्दों पर सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं। दोनों पक्ष संघर्षविराम को व्यापक राजनीतिक समझौते में बदलने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। इन वार्ताओं में क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों में संभावित राहत और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। इजरायल ने दोहराया अपना रुख इजरायल पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि वह ऐसे किसी भी समझौते से स्वयं को बाध्य नहीं मानेगा, जो उसकी दृष्टि में ईरान की सैन्य या परमाणु क्षमताओं को बढ़ावा देता हो। इजरायली नेतृत्व का कहना है कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और आवश्यकता पड़ने पर वह एकतरफा कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। ट्रंप ने संयम बरतने की अपील की वहीं, Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि पश्चिम एशिया में दोबारा सैन्य तनाव बढ़ना किसी के हित में नहीं होगा और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मुंबई,एजेंसियां। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बुधवार को हुई भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। लगातार हो रही बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे सड़क यातायात बाधित रहा और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अंधेरी सबवे में करीब पांच फीट पानी भर जाने के कारण प्रशासन को एहतियातन इसे यातायात के लिए बंद करना पड़ा। लोकल ट्रेन सेवा पर पड़ा असर भारी बारिश का असर मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा पर भी देखने को मिला। वेस्टर्न, सेंट्रल और हार्बर लाइन की कई ट्रेनें देरी से चलीं। हार्बर लाइन पर ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) वायर में तकनीकी खराबी आने से कई लोकल ट्रेनें बीच रास्ते में ही रुक गईं। सुबह के व्यस्त समय में आई इस समस्या से हजारों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। रेलवे की तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत कार्य शुरू किया, जिसके बाद धीरे-धीरे सेवाएं सामान्य करने का प्रयास किया गया। बालकनी गिरने से व्यक्ति की मौत दक्षिण मुंबई के बाबुलनाथ रोड स्थित MHADA की 'सूर्यप्रकाश' इमारत में मंगलवार देर रात तीसरी मंजिल की बालकनी का एक हिस्सा अचानक गिर गया। हादसे में 51 वर्षीय संतोष रामचंद्र भारस्कर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद फायर ब्रिगेड, पुलिस, एम्बुलेंस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची तथा सुरक्षा के मद्देनजर आवश्यक कदम उठाए गए। कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने मुंबई, ठाणे, पालघर, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग ने अगले चार से पांच दिनों तक भारी बारिश, तेज हवाओं और कुछ स्थानों पर बिजली गिरने की चेतावनी दी है। प्रशासन ने नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। वहीं, रेलवे, नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रखा गया है।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के संसदीय दल की बैठक में पार्टी के छह सांसदों के शामिल नहीं होने से पार्टी में नई टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि ये सांसद जल्द ही मुख्यमंत्री Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम सकते हैं। बैठक से गायब रहे 6 सांसद शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में पार्टी के छह सांसद अनुपस्थित रहे। इससे यह संकेत मिला है कि पार्टी के भीतर असंतोष गहरा गया है और बागी सांसद अलग रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं। अनुपस्थित सांसदों के नाम: Sanjay Jadhav (परभणी) Bhausaheb Wakchaure (शिरडी) Sanjay Deshmukh (यवतमाल) Nagesh Patil Ashtikar (हिंगोली) Omraje Nimbalkar (धाराशिव) Sanjay Patil (मुंबई नॉर्थ ईस्ट) ‘गद्दारों की सदस्यता समाप्त करेंगे’ : संजय राउत बैठक के बाद शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने कहा कि पार्टी का व्हिप जारी होने के बावजूद छह सांसद बैठक में नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा, "जो सांसद पार्टी के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें हम गद्दार मानते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।" बागी सांसदों को भेजा जाएगा नोटिस पार्टी सांसद Arvind Sawant ने कहा कि अनुपस्थित सांसदों को आज ही कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे पूछा जाएगा कि वे पार्टी बैठक में क्यों नहीं आए। ‘बेईमानी और धोखेबाजी कर रहे हैं’ संजय राउत ने बागी सांसदों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी के साथ धोखा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, "पार्टी के व्हिप का उल्लंघन अनुशासनहीनता है। ये लोग बेईमानी और धोखेबाजी कर रहे हैं।" बीजेपी और शिंदे पर लगाया खरीद-फरोख्त का आरोप संजय राउत ने आरोप लगाया कि Bharatiya Janata Party और एकनाथ शिंदे गंदी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि बागी सांसदों को 50-50 करोड़ रुपये का लालच देकर खरीदा जा रहा है। राउत ने कहा, "जो जाना चाहते हैं, वे इस्तीफा देकर जाएं। वे शिवसेना के नाम और चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए हैं, इसलिए जनता के साथ धोखेबाजी स्वीकार नहीं की जाएगी।" एक और टूट की ओर बढ़ रही शिवसेना (यूबीटी) छह सांसदों की गैरमौजूदगी और पार्टी नेतृत्व के तीखे बयानों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) में बड़ी टूट की संभावना बढ़ गई है। यदि ये सांसद अलग समूह बनाते हैं या शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
वायरल वीडियो मामले में KEM अस्पताल की प्रारंभिक जांच पूरी, छात्रा ने मांगी लिखित माफी स्टैंड-अप कॉमेडियन प्राणित मोरे से जुड़े चर्चित ‘370 रुपये बिरयानी’ विवाद में नया मोड़ सामने आया है। मुंबई के KEM अस्पताल की प्रारंभिक जांच में MBBS छात्रा सेजल पवार की टिप्पणियों को "आपत्तिजनक और असंवेदनशील" पाया गया है। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि छात्रा का व्यवहार एक मेडिकल छात्र से अपेक्षित संवेदनशीलता, गरिमा और पेशेवर जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं था। जांच के दौरान सेजल पवार ने लिखित रूप से माफी मांगते हुए स्वीकार किया कि उनकी कुछ टिप्पणियां अनुचित थीं और उनसे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। अस्पताल प्रशासन अब मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रहा है, जिसमें अस्थायी निलंबन जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। माता-पिता को बुलाया गया, काउंसलिंग की तैयारी KEM अस्पताल के डीन डॉ. हरीश एम. पाठक ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को लेकर कई शिकायतें मिलने के बाद एक प्रारंभिक तथ्य-जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने वीडियो की समीक्षा करने के साथ छात्रा से बातचीत भी की। अस्पताल प्रशासन ने छात्रा के माता-पिता को भी बुलाया है और उनकी मौजूदगी में काउंसलिंग कराने की तैयारी की जा रही है। साथ ही सोशल मीडिया पर प्रसारित आपत्तिजनक वीडियो क्लिप्स को हटाने के लिए संबंधित एजेंसियों और प्लेटफॉर्म्स से संपर्क करने पर भी विचार किया जा रहा है। महाराष्ट्र साइबर पुलिस की जांच तेज मामले में महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने प्राणित मोरे, सेजल पवार और एक अन्य युवक हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच एजेंसियां वायरल वीडियो की फोरेंसिक जांच कराने की तैयारी में हैं और जल्द ही संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान प्राणित मोरे के पुराने शो और ऑनलाइन कंटेंट की भी समीक्षा की जाएगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं पहले भी इसी तरह की विवादित सामग्री तो प्रस्तुत नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री फडणवीस बोले- मनोरंजन के नाम पर मर्यादा जरूरी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार स्टैंड-अप कॉमेडी या कलाकारों के खिलाफ नहीं है, लेकिन मनोरंजन के नाम पर सामाजिक मर्यादा और शालीनता की सीमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दूसरों की गरिमा और अधिकारों को प्रभावित करने लगती है, तब उस पर सवाल उठना स्वाभाविक है। मेडिकल समुदाय ने भी जताई नाराजगी मामले को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की सार्वजनिक स्वास्थ्य समिति में भी चर्चा हुई। समिति के अध्यक्ष हरीश भंडिग्रे ने कहा कि शरीर और अंगदान जैसे संवेदनशील विषयों पर की गई टिप्पणियां समाज में गलत संदेश देती हैं और जागरूकता अभियानों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। वहीं महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) की KEM इकाई ने स्पष्ट किया कि सेजल पवार संगठन की सदस्य नहीं हैं। संगठन ने उनकी टिप्पणियों को अनुचित बताया, लेकिन साथ ही सोशल मीडिया पर छात्रा के खिलाफ हो रही व्यक्तिगत ट्रोलिंग और अपमानजनक टिप्पणियों का भी विरोध किया। क्या है पूरा विवाद? विवाद उस समय शुरू हुआ जब स्टैंड-अप कॉमेडियन प्राणित मोरे के एक शो के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। एक वीडियो में सेजल पवार कथित तौर पर शवदान करने वाले पुरुषों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करती नजर आईं। वहीं दूसरे वीडियो में हिमांशु जांगड़ा द्वारा डेट पर 370 रुपये की बिरयानी खिलाने के बदले शारीरिक संबंधों को लेकर विवादित टिप्पणी की गई थी। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, जिसके बाद पुलिस और अस्पताल प्रशासन दोनों ने जांच शुरू कर दी। आगे क्या? फिलहाल KEM अस्पताल की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट के आधार पर छात्रा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। दूसरी ओर साइबर पुलिस की जांच भी जारी है, जिससे मामले में कानूनी कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी।
मुंबई, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच मुंबई के लोगों को महंगाई का एक और झटका लगा है। मुंबई और मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में सीएनजी की कीमतों में दो रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें 29 मई 2026 की मध्यरात्रि से लागू हो चुकी हैं। इसके बाद सीएनजी का खुदरा मूल्य 84 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 86 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है। 17 दिनों में दूसरी बार है यह पिछले 17 दिनों में दूसरी बार है जब सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 14 मई को भी कीमतों में दो रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि की गई थी। लगातार बढ़ती कीमतों का असर निजी वाहन चालकों, ऑटो-रिक्शा और टैक्सी संचालकों के साथ-साथ व्यावसायिक परिवहन सेवाओं पर पड़ने की आशंका है। मुंबई में सीएनजी आपूर्ति करने वाली महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने संशोधित दरें लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। कंपनी मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण, रायगढ़, रत्नागिरी, लातूर और अन्य क्षेत्रों में सीएनजी की आपूर्ति करती है। इस बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हाल ही में पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था। वर्तमान में मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है, वहां बढ़ी अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसी का असर भारत समेत कई देशों में ईंधन कीमतों पर देखने को मिल रहा है
Western Railway ने मुंबई के Bandra East स्थित गरीब नगर इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई तेज कर दी है। रेलवे के अनुसार, अभियान का करीब 85 फीसदी काम पूरा हो चुका है। कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों के विरोध ने हिंसक रूप ले लिया। पुलिस पर पथराव और बुलडोजर रोकने की कोशिश के बाद इलाके में तनाव बढ़ गया। घटना में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बुलडोजर रोकने की कोशिश, पुलिस पर पथराव मंगलवार को करीब 150 लोगों की भीड़ ने डिमोलिशन टीम और पुलिस पर हमला कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की और सीमेंट ब्लॉक फेंककर बुलडोजर रोकने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसके बाद इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए। सरकारी वकील ने अदालत में कहा कि हिंसा अचानक भड़का विरोध नहीं था, बल्कि एक “पूर्व-नियोजित साजिश” का हिस्सा प्रतीत होती है। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों पर गंभीर धाराएं लगाने की बात कही है, जिनमें हत्या के प्रयास से जुड़ी धारा भी शामिल है। रेलवे की कार्रवाई क्यों जरूरी? पश्चिम रेलवे के अनुसार, बांद्रा स्टेशन के पूर्वी हिस्से में स्थित करीब 500 अवैध संरचनाओं को हटाया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि अब तक लगभग 5,000 वर्ग मीटर जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है। इस भूमि का उपयोग 5वीं और 6वीं रेल लाइन के विस्तार और Bandra Terminus के विकास के लिए किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना मुंबई की रेल कनेक्टिविटी और यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मस्जिद गिराने को लेकर विवाद कार्रवाई के दौरान एक स्थानीय मस्जिद को गिराए जाने का मुद्दा भी विवाद का कारण बन गया है। प्रतिवादियों के वकीलों ने दावा किया कि धार्मिक स्थल को बिना उचित दस्तावेजी प्रक्रिया के हटाया गया। उनका कहना है कि Bombay High Court के मूल आदेश में धार्मिक स्थलों को हटाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। वहीं, प्रभावित परिवारों ने ईद से ठीक पहले की गई इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि त्योहार से पहले बड़ी संख्या में परिवारों को बेघर कर दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश पर चल रही कार्रवाई रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के तहत की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, पात्र परिवारों को पहले ही पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। सूत्रों के अनुसार, अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई 23 मई तक जारी रह सकती है। इलाके में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
ठाणे रेलवे स्टेशन के पास स्थित गामदेवी मार्केट कॉम्प्लेक्स में गुरुवार तड़के भीषण आग लगने से दो लोगों की मौत हो गई। हादसे में एक फायरमैन और एक सिक्योरिटी गार्ड ने जान गंवा दी, जबकि दो अन्य दमकलकर्मी घायल हो गए हैं। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई दुकानों को भारी नुकसान पहुंचा। सुबह 3:45 बजे लगी आग अधिकारियों के मुताबिक, आग गुरुवार सुबह करीब 3:45 बजे गामदेवी मार्केट कॉम्प्लेक्स में लगी। आग लगते ही दमकल विभाग ने “ब्रिगेड कॉल” घोषित कर दी, जिसका मतलब है कि हालात पर काबू पाने के लिए विभाग के अधिकतम संसाधनों को मौके पर भेजा गया। मार्केट कॉम्प्लेक्स में कपड़ों की दुकानों के अलावा सब्जी और फल मंडी भी मौजूद थी। आग की ऊंची लपटें और घना धुआं दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में आग ने बाजार के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में दो की मौत, दो घायल प्रशांत रोडे ने बताया कि हादसे में एक फायरमैन और एक सुरक्षा गार्ड की मौत हुई है। वहीं, क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ (RDMC) के प्रमुख यासीन तड़वी के अनुसार, दो अन्य दमकलकर्मी घायल हुए हैं और उनका इलाज जारी है। अधिकारियों ने बताया कि आग “मेजर फायर” श्रेणी की थी, जिसने पूरे बाजार क्षेत्र को प्रभावित किया। कपड़ों की दुकानों से तेजी से फैली आग दमकल विभाग को आग बुझाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बाजार की कई दुकानों में बड़ी मात्रा में कपड़े और अन्य ज्वलनशील सामान रखा हुआ था, जिसकी वजह से आग तेजी से फैलती चली गई। आग की वजह से कई दुकानों का सामान जलकर खाक हो गया। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। राहत और बचाव अभियान जारी दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। पुलिस और प्रशासन ने इलाके को घेरकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
Western Railway ने Bandra Terminus के पास अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। Bombay High Court के निर्देशों के बाद शुरू किए गए इस अभियान के पहले दिन करीब 18 प्रतिशत अवैध झोपड़ियों को हटाया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। 23 मई तक चलेगा अभियान पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी Vineet Abhishek ने बताया कि यह पांच दिवसीय अभियान 23 मई तक चलेगा। अभियान का उद्देश्य लगभग 5,300 वर्ग मीटर रेलवे भूमि को खाली कराना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। रेलवे के अनुसार बांद्रा टर्मिनस के पुनर्विकास के तहत यहां एलिवेटेड रोड, बहुमंजिला इमारतें, आधुनिक प्लेटफॉर्म और रखरखाव सुविधाओं से युक्त एकीकृत परिसर विकसित करने की योजना है। रेलवे भूमि पर बनी थीं 500 झोपड़ियां अधिकारियों के मुताबिक गरीब नगर इलाके में रेलवे की जमीन पर करीब 500 अवैध झोपड़ियां बनी हुई थीं। अभियान के पहले दिन इनमें से लगभग 15 से 18 प्रतिशत झोपड़ियों को खाली कराया गया। रेलवे ने कहा कि कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नागरिक प्रशासन, पुलिस और रेलवे सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त टीम तैनात की गई है। 2017 से चल रही थी कानूनी प्रक्रिया पश्चिम रेलवे के बयान के अनुसार इस मामले में सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत कार्रवाई 2017 से पहले शुरू की गई थी और 27 नवंबर 2017 को बेदखली के आदेश पारित किए गए थे। रेलवे ने बताया कि इस मामले में लगभग नौ वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया चली, जिसमें Bombay High Court और Supreme Court of India में सुनवाई भी शामिल रही। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से मिली अनुमति रेलवे अधिकारियों के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट ने 29 अप्रैल 2026 को दिए गए अपने आदेश में चिन्हित पात्र संरचनाओं को संरक्षण देते हुए अवैध अतिक्रमण हटाने की अनुमति दी थी। बाद में इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में भी बरकरार रखा गया। रेलवे का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए की जा रही है।
महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को अब रोजमर्रा के नाश्ते पर भी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। सोना-चांदी, पेट्रोल-डीजल और दूध की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब Mumbai और आसपास के इलाकों में ब्रेड और पाव की कीमतें भी बढ़ा दी गई हैं। कई बड़ी कंपनियों ने 16 मई 2026 से नई दरें लागू कर दी हैं, जिससे लाखों कामकाजी लोगों, छात्रों और मजदूरों की जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है। नई कीमतों के तहत अलग-अलग प्रकार की ब्रेड पर ₹2 से ₹5 तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका असर खासतौर पर वड़ा-पाव, सैंडविच और ब्रेड आधारित नाश्ते पर दिखाई देगा, जो मुंबई की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा माने जाते हैं। आखिर क्यों बढ़ गए ब्रेड और पाव के दाम? बेकरी उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। प्लास्टिक पैकेजिंग महंगी हुई ब्रेड की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक कच्चा माल विदेशों से आयात किया जाता है। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कमजोरी के कारण आयात लागत काफी बढ़ गई है। इससे पैकेजिंग खर्च में बड़ा इजाफा हुआ है। ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ी हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर अब खाद्य उत्पादों पर भी दिखने लगा है। ट्रकों के भाड़े में बढ़ोतरी होने से कच्चे माल को बेकरियों तक पहुंचाना और तैयार ब्रेड को दुकानों तक सप्लाई करना महंगा हो गया है। प्रिजर्वेटिव्स और दूध की कीमतें बढ़ीं ब्रेड को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रिजर्वेटिव्स की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इसके अलावा दूध कंपनियों द्वारा हाल में किए गए रेट बढ़ोतरी के फैसले ने भी बेकरी उत्पादों की लागत बढ़ा दी है। मुंबई में ब्रेड-पाव का नया रेट कार्ड ब्रेड की वैरायटी पुरानी कीमत नई कीमत 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड ₹35 ₹40 ब्राउन ब्रेड ₹45 ₹50 होल व्हीट ब्रेड ₹55 ₹60 मल्टिग्रेन ब्रेड ₹60 ₹65 स्मॉल ब्राउन लोफ ₹28 ₹30 व्हाइट लोफ ₹20 ₹22 आम लोगों पर क्या होगा असर? ब्रेड और पाव की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे आम लोगों के रसोई बजट पर पड़ेगा। मुंबई जैसे शहरों में लाखों लोग सुबह के नाश्ते और फास्ट फूड के लिए ब्रेड और पाव पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में वड़ा-पाव, सैंडविच और पाव-भाजी जैसे लोकप्रिय खाद्य पदार्थों की कीमतें भी आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईंधन और आयात लागत में कमी नहीं आई, तो आने वाले समय में अन्य बेकरी उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।
Blinkit एजेंट के साथ विवाद पर 10 दिन बाद सामने आईं एक्ट्रेस फिल्म Uri: The Surgical Strike में नजर आ चुकीं Riva Arora ने एक डिलीवरी एजेंट पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक्ट्रेस ने दावा किया कि Blinkit के एक डिलीवरी एजेंट ने उनके और उनके परिवार के साथ बदसलूकी की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। यह घटना 26 अप्रैल की बताई जा रही है, लेकिन अब जाकर उन्होंने इस मामले पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। घर के बाहर शुरू हुआ विवाद रीवा अरोड़ा के मुताबिक, घटना दोपहर करीब 3:30 बजे की है, जब Blinkit का डिलीवरी एजेंट उनके घर ऑर्डर लेकर पहुंचा। उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही एजेंट का व्यवहार रूखा और अनुचित था। एक्ट्रेस ने कहा कि जब उन्होंने एजेंट के रवैये पर प्रतिक्रिया दी तो मामला शांत होने के बजाय और बिगड़ गया। उनकी मां निशा अरोड़ा ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि एजेंट लगातार बदतमीजी करता रहा। लिफ्ट में भी जारी रही अभद्रता रीवा ने बताया कि जब उनकी बहन की मुलाकात एजेंट से लिफ्ट में हुई, तब भी वह आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करता रहा। परिवार ने कई बार उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने अपनी हरकतें बंद नहीं कीं। एक्ट्रेस के अनुसार, “यह सिर्फ एक बार की टिप्पणी नहीं थी। वह लगातार हमारे लिए अपमानजनक और अभद्र शब्दों का इस्तेमाल कर रहा था।” मामला बढ़ने पर पुलिस को बुलाया गया रीवा अरोड़ा ने कहा कि बहस पहले घर के दरवाजे पर शुरू हुई और बाद में नीचे तक पहुंच गई। जब एजेंट वहां से जाने की कोशिश करने लगा, तब परिवार ने उसे रोक लिया और तुरंत पुलिस को सूचना दी। उन्होंने बताया कि Mumbai Police मौके पर जल्दी पहुंची और तुरंत कार्रवाई की। फिलहाल मामला संबंधित अधिकारियों के जरिए देखा जा रहा है। Blinkit से भी की गई शिकायत एक्ट्रेस ने यह भी पुष्टि की कि इस मामले में Blinkit के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। उन्होंने कहा कि कंपनी स्तर पर जवाबदेही तय होना भी जरूरी है और वे अब कंपनी की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही हैं। कई फिल्मों में नजर आ चुकी हैं रीवा अरोड़ा Riva Arora ने कम उम्र में ही कई बड़ी फिल्मों में काम किया है। वह Bharat और Gunjan Saxena: The Kargil Girl जैसी फिल्मों में भी दिखाई दे चुकी हैं।
मुंबई, एजेंसियां। मुंबई के मीरा रोड के नया नगर इलाके में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां एक युवक ने दो सुरक्षाकर्मियों पर चाकू से हमला कर दिया। आरोपी ने पहले गार्डों से उनका नाम और धर्म पूछा, फिर उन्हें कलमा पढ़ने को कहा। मना करने पर उसने दोनों पर ताबड़तोड़ चाकू से वार कर दिया। घटना रविवार सुबह करीब 4 बजे की बताई जा रही है। घायल सुरक्षाकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। सीसीटीवी के आधार पर आरोपी गिरफ्तार पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपी को कुछ ही घंटों में गिरफ्तार कर लिया। उसकी पहचान 31 वर्षीय जुबैर अंसारी के रूप में हुई है। सीसीटीवी फुटेज की मदद से उसकी लोकेशन ट्रेस कर गिरफ्तारी की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हमला एक निर्माणाधीन इमारत में ड्यूटी कर रहे गार्डों पर किया गया। ATS कर रही गहन जांच, संदिग्ध नोट बरामद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Mumbai ATS को सौंप दी गई है। आरोपी के पास से एक नोट बरामद हुआ है, जिसमें ‘लोन वुल्फ’, ‘जिहाद’, ‘गाजा’ और अन्य उग्र विचारों का जिक्र पाया गया है। जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि हमला किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा था या आरोपी ने इसे अकेले अंजाम दिया। डिजिटल गतिविधियों और संपर्कों की जांच जारी एजेंसियां आरोपी के मोबाइल, ब्राउजिंग हिस्ट्री और संपर्कों की जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किसी संगठन से जुड़ा था या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। घटना से इलाके में दहशत का माहौल इस वारदात के बाद इलाके में डर का माहौल है। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। जांच पूरी होने के बाद ही हमले के असली मकसद का खुलासा हो पाएगा।
स्पोर्ट्स बाइक सेगमेंट में अपनी अलग पहचान रखने वाली KTM Duke 390 अब नए विकल्प के साथ बाजार में उपलब्ध है। कंपनी ने अपने लोकप्रिय मॉडल में 350cc वेरिएंट जोड़कर ग्राहकों को एक किफायती विकल्प दिया है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि 350cc और 399cc में से कौन सा वर्जन खरीदना ज्यादा समझदारी भरा फैसला होगा। 350cc vs 399cc: पावर और कीमत का खेल स्टैंडर्ड 399cc Duke 390 जहां करीब 46 हॉर्सपावर देता है, वहीं नया 350cc वेरिएंट लगभग 41.5 हॉर्सपावर जेनरेट करता है। पावर में अंतर मामूली लग सकता है, लेकिन कीमत में बड़ा फर्क देखने को मिलता है। 399cc मॉडल की एक्स-शोरूम कीमत करीब ₹3.39 लाख है, जबकि 350cc वेरिएंट लगभग ₹2.77 लाख के आसपास उपलब्ध हो सकता है। यही वजह है कि 350cc मॉडल “वैल्यू फॉर मनी” के रूप में उभरकर सामने आता है। अगर प्रति हॉर्सपावर लागत देखें, तो 350cc वर्जन ज्यादा किफायती साबित होता है। इसके साथ ही कम इंजन कैपेसिटी का फायदा टैक्स, इंश्योरेंस और मेंटेनेंस लागत में भी मिलता है, जो लंबे समय में आपकी जेब पर कम दबाव डालता है। फीचर्स में नहीं हुआ समझौता कीमत कम होने के बावजूद कंपनी ने फीचर्स, सस्पेंशन और ब्रेकिंग सिस्टम में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब यह है कि आपको 350cc वेरिएंट में भी लगभग वही प्रीमियम राइडिंग एक्सपीरियंस मिलेगा, जिसके लिए Duke 390 जानी जाती है। इंजन में क्या बदलाव किए गए? 350cc वेरिएंट के लिए कंपनी ने पूरी तरह नया इंजन विकसित नहीं किया, बल्कि मौजूदा इंजन को री-ट्यून किया है। स्ट्रोक की लंबाई कम करके इंजन कैपेसिटी घटाई गई है, जबकि इसका बेस आर्किटेक्चर पहले जैसा ही रखा गया है। इसका फायदा यह है कि बाइक की हाई-रेविंग नेचर काफी हद तक बरकरार रहती है। हालांकि, टॉप पावर और टॉर्क में हल्की कमी महसूस हो सकती है, खासकर हाई RPM पर। किसके लिए कौन सा वेरिएंट बेहतर? 350cc वेरिएंट चुनें अगर: आप बजट में KTM का अनुभव चाहते हैं बाइक का इस्तेमाल रोजमर्रा के काम के लिए करना है कम लागत और बेहतर माइलेज प्राथमिकता है 399cc वेरिएंट चुनें अगर: आपको ज्यादा पावर और स्पोर्टी परफॉर्मेंस चाहिए हाईवे राइडिंग और स्पीड आपके लिए ज्यादा मायने रखती है बजट आपके लिए बड़ी चिंता नहीं है
मुंबई के मीरा रोड में सनसनीखेज वारदात महाराष्ट्र के मीरा रोड में रविवार तड़के एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। एक युवक ने दो सिक्योरिटी गार्डों से पहले उनका धर्म पूछा, फिर उनसे कलमा पढ़ने को कहा। जब दोनों गार्ड ऐसा नहीं कर सके, तो आरोपी ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। इस हमले में एक गार्ड गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि दूसरे को मामूली चोटें आईं। आरोपी की पहचान, 90 मिनट में गिरफ्तारी पुलिस ने आरोपी की पहचान 31 वर्षीय जैब जुबैर अंसारी के रूप में की है। घटना सुबह करीब 4 बजे मीरा रोड ईस्ट के एक निर्माणाधीन भवन में हुई। सीसीटीवी फुटेज की मदद से पुलिस ने महज डेढ़ घंटे के भीतर आरोपी को उसके किराए के घर से गिरफ्तार कर लिया। कैसे हुआ हमला? घटना के समय राजकुमार मिश्रा और सुब्रतो सेन ड्यूटी पर तैनात थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी उनके पास पहुंचा और नाम तथा धर्म पूछा। इसके बाद उसने पूछा कि क्या वे कलमा पढ़ सकते हैं। दोनों ने मना किया, जिसके बाद उसने चाकू निकालकर हमला कर दिया। एक गार्ड गंभीर रूप से घायल हमले में राजकुमार मिश्रा के पेट और आंतों में गंभीर चोटें आईं। वहीं, सुब्रतो सेन की पीठ पर चोट लगी। सुब्रतो किसी तरह सुरक्षा केबिन में छिप गए और तुरंत पुलिस को सूचना दी। दोनों घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है। ISIS वीडियो देखने की बात आई सामने जांच में पता चला है कि आरोपी कथित तौर पर ISIS से जुड़े प्रचार वीडियो देखता था। इसी वजह से मामले को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) को जांच सौंप दी गई है। हालांकि, अभी तक किसी आतंकी संगठन से सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिका में पढ़ चुका है आरोपी सूत्रों के मुताबिक, जैब जुबैर अंसारी 2019 तक अमेरिका में पढ़ाई कर चुका है। भारत लौटने के बाद वह मीरा रोड में किराए के मकान में अकेला रह रहा था। कुछ महीने पहले तक वह एक कोचिंग सेंटर में केमिस्ट्री और मैथ्स पढ़ाता था। पुलिस ने अफवाहों से बचने की अपील की महाराष्ट्र पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इस घटना को लेकर किसी भी तरह की अफवाह या अपुष्ट जानकारी साझा न करें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुंबई: Mumbai में Lenskart के एक शोरूम में उस समय हंगामा हो गया, जब बीजेपी से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्टोर में पहुंचकर कर्मचारियों के साथ बहस की और धार्मिक प्रतीकों को लेकर विरोध जताया। क्या हुआ शोरूम में? बताया जा रहा है कि Nazia Elahi Khan के नेतृत्व में कुछ लोग स्टोर में पहुंचे और: कर्मचारियों को तिलक लगाया कलाई पर कलावा बांधा “जय श्री राम” के नारे लगाए इस दौरान उन्होंने स्टोर मैनेजमेंट से कथित तौर पर हिंदू प्रतीकों पर रोक को लेकर सवाल किए। विवाद की जड़ क्या है? यह विवाद एक कथित ग्रूमिंग पॉलिसी दस्तावेज के वायरल होने के बाद शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि: बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक है जबकि हिजाब की अनुमति दी गई है इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर कंपनी के खिलाफ विरोध शुरू हो गया। कंपनी ने दी सफाई, बदले नियम विवाद बढ़ने के बाद Peyush Bansal की कंपनी Lenskart ने सफाई दी कि: वायरल दस्तावेज पुराना है मौजूदा नीति अलग है इसके बाद कंपनी ने नया ‘इन-स्टोर स्टाइल गाइड’ जारी किया, जिसमें अब कर्मचारियों को: बिंदी, तिलक, सिंदूर कलावा, मंगलसूत्र, कड़ा हिजाब और पगड़ी जैसे सभी धार्मिक प्रतीक पहनने की अनुमति दे दी गई है। कंपनी ने मांगी माफी कंपनी ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उसे इसका खेद है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वह सभी धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान करती है। विवाद अभी भी जारी नए नियम लागू होने के बावजूद यह मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। अलग-अलग संगठनों की ओर से कंपनी के खिलाफ विरोध जारी है।
मुंबई: भारतीय संगीत जगत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज नाम, Asha Bhosle अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, जिससे पूरे देश के साथ-साथ फिल्म और संगीत उद्योग में शोक की लहर दौड़ गई है। “सुरों की मल्लिका” के नाम से मशहूर इस महान गायिका के जाने से एक ऐसा युग समाप्त हो गया है, जिसकी भरपाई शायद ही कभी हो सके। बताया जा रहा है कि शनिवार शाम उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद Breach Candy Hospital में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ती चली गई और रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। सोमवार को उनके पार्थिव शरीर को मुंबई के लोअर परेल स्थित उनके आवास ‘कासा ग्रांडे’ में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जहां रात से ही फिल्मी सितारों, संगीतकारों और प्रशंसकों का तांता लगा हुआ है। घर के अंदर और बाहर का माहौल बेहद गमगीन है–हर आंख नम है और हर चेहरा अपनी प्रिय ‘ताई’ को खोने का दर्द बयां कर रहा है। अंतिम दर्शन के लिए कई जानी-मानी हस्तियां पहुंचीं। Jackie Shroff भावुक नजर आए और हाथ जोड़कर नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। वहीं Vidya Balan और Urmila Matondkar ने भी पहुंचकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। संगीत जगत से Vishal Dadlani और Salim Merchant सहित कई कलाकारों ने अपनी श्रद्धांजलि दी। इस महान गायिका की अंतिम यात्रा आज दोपहर बाद उनके निवास से निकाली जाएगी। फूलों से सजी एम्बुलेंस में उनका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाया जाएगा। शाम 4 बजे Shivaji Park में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनकी अतुलनीय उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें राजकीय सम्मान के साथ विदाई दिए जाने की भी संभावना है। आशा भोसले ने अपने लंबे करियर में हजारों गाने गाए और कई पीढ़ियों को अपनी आवाज का दीवाना बनाया। उनका जाना केवल एक कलाकार का निधन नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की एक पूरी विरासत का अंत है।
कोर्ट ने कहा – पहली नजर में पिता को नहीं थी जानकारी मुंबई की एक अदालत ने सड़क हादसे से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार कारोबारी को जमानत दे दी है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि शुरुआती तौर पर ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि पिता को अपने नाबालिग बेटे के कार लेकर बाहर जाने की जानकारी थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश R M Jadhav ने बुधवार को कारोबारी को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी। अदालत ने यह फैसला मुख्य रूप से बिल्डिंग के चौकीदार के बयान के आधार पर सुनाया। 5 फरवरी को हुआ था घातक सड़क हादसा यह दुर्घटना 5 फरवरी को मुंबई के घाटकोपर इलाके में Somaiya College के पास हुई थी। पुलिस के मुताबिक, कारोबारी का नाबालिग बेटा Kia Seltos चला रहा था, तभी उसकी कार एक स्कूटर से टकरा गई। इस हादसे में स्कूटर सवार ध्रुमिल पटेल की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी मीनल, जो पीछे बैठी थीं, गंभीर रूप से घायल हो गईं। पिता को 10 फरवरी को किया गया था गिरफ्तार दुर्घटना के बाद पुलिस ने 10 फरवरी को कारोबारी को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ Bharatiya Nyaya Sanhita के तहत लापरवाही से वाहन चलाने, गैर-इरादतन हत्या, दूसरों की जान को खतरे में डालने और Motor Vehicles Act की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। बचाव पक्ष ने कहा – पिता मौके पर मौजूद नहीं थे कारोबारी के वकील मनीष सिंह ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल घटना के समय न तो मौके पर मौजूद थे और न ही वाहन चला रहे थे। बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपी को इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि उनका नाबालिग बेटा उस दिन कार लेकर बाहर गया था, इसलिए उन्हें दुर्घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अभियोजन और पीड़ित पक्ष ने किया विरोध सरकारी वकील पी.बी. बंकर ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को पता था कि उसका बेटा नाबालिग है और उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है, फिर भी उसे कार चलाने की अनुमति दी गई। वहीं पीड़ित परिवार की ओर से पेश वकील रूबेन मस्कारेनहास ने अदालत को बताया कि नाबालिग का एक इंस्टाग्राम अकाउंट था, जिसमें लापरवाही से कार चलाने के वीडियो और स्टंट पोस्ट किए गए थे। उनका दावा था कि पिता को इस बारे में जानकारी थी, फिर भी उन्होंने बेटे को एसयूवी चलाने से नहीं रोका। चौकीदार के बयान पर अदालत ने दिया राहत सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बिल्डिंग के चौकीदार के बयान को महत्वपूर्ण माना। चौकीदार के अनुसार, हादसे वाले दिन रात करीब 10:15 बजे नाबालिग लड़का उसके पास आया और कार की चाबी मांगी। चूंकि वह आरोपी का बेटा था, इसलिए बिना सवाल किए उसने चाबी दे दी। बाद में जब पिता नीचे आए और पार्किंग में कार नहीं मिली, तो उन्होंने चौकीदार से पूछताछ की, तब उन्हें पता चला कि कार बेटा लेकर गया है। कोर्ट ने लगाई कुछ शर्तें अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह साबित नहीं होता कि आरोपी को उस समय बेटे के कार ले जाने की जानकारी थी। हालांकि जमानत देते समय अदालत ने कारोबारी को निर्देश दिया कि वह कोर्ट की अनुमति के बिना मुंबई नहीं छोड़ेंगे और मामले के गवाहों को प्रभावित करने की कोई कोशिश नहीं करेंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।