मुंबई, एजेंसियां। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीजन का प्रीमियर एपिसोड बॉलीवुड सितारों से सजा रहा। शो में आमिर खान, सनी देओल और प्रीति जिंटा अमिताभ बच्चन के साथ नजर आए। इस दौरान प्रीति जिंटा ने साल 2003 की फिल्म ‘अरमान’ में अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का एक मजेदार किस्सा सुनाया, जिसे सुनकर सेट से जुड़ी पुरानी यादें ताजा हो गईं।
प्रीति जिंटा ने बताया कि वह अमिताभ बच्चन के साथ ज्यादा से ज्यादा स्क्रीन शेयर करना चाहती थीं। ‘अरमान’ की शूटिंग के दौरान उन्होंने फिल्म के निर्देशक से एक ऐसा सीन रखने की गुजारिश की, जिसमें वह अमिताभ बच्चन के साथ नजर आ सकें।
प्रीति ने मजाकिया अंदाज में बताया कि उनकी इच्छा पूरी करने के लिए फिल्म में ऐसा सीन तैयार किया गया, जिसमें अमिताभ बच्चन के किरदार की मौत हो जाती है और उन्हें उनके सामने मृत व्यक्ति की तरह अभिनय करना था।
प्रीति ने बताया कि उस सीन को शूट करना उनके लिए उम्मीद से कहीं ज्यादा मुश्किल था। उन्हें बिल्कुल स्थिर रहकर मृत व्यक्ति की तरह अभिनय करना था, लेकिन अंदर से वह इतनी घबराई हुई थीं कि उनके लिए अपनी हंसी और शरीर की हलचल को नियंत्रित करना चुनौती बन गया था।
अभिनेत्री ने बताया कि वह इस सीन को लेकर काफी नर्वस थीं क्योंकि मृत व्यक्ति की तरह अभिनय करना उनके लिए आसान नहीं था। इसी अनुभव को उन्होंने KBC 18 के मंच पर बेहद हल्के-फुल्के अंदाज में साझा किया।
‘अरमान’ में अमिताभ बच्चन और प्रीति जिंटा के अलावा अनिल कपूर और ग्रेसी सिंह भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में थे। फिल्म के दौरान अमिताभ के साथ काम करने का अनुभव प्रीति के लिए खास रहा।
KBC 18 में जब यह किस्सा सामने आया तो शो का माहौल भी काफी मजेदार हो गया। अमिताभ बच्चन के साथ पुराने अनुभवों को याद करते हुए प्रीति ने फिल्म की शूटिंग से जुड़ी कई भावनाएं साझा कीं।
KBC 18 के पहले एपिसोड में आमिर खान, सनी देओल और प्रीति जिंटा ने हिस्सा लिया। तीनों कलाकार अपनी आगामी फिल्म ‘बटवारा’ के प्रचार के लिए शो में पहुंचे थे। इस दौरान अमिताभ बच्चन के साथ सितारों की बातचीत और पुराने किस्सों ने एपिसोड को खास बना दिया।
शो के प्रीमियर में सितारों ने सवालों के जवाब देने के साथ अपनी फिल्मी जिंदगी से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव भी साझा किए। प्रीति जिंटा का ‘अरमान’ से जुड़ा किस्सा इसी बातचीत का खास आकर्षण रहा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अभिनेत्री तब्बू को AI के जरिए उनकी पहचान के कथित गलत इस्तेमाल के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने तब्बू के नाम, तस्वीर, आवाज, समानता और व्यक्तित्व से जुड़े अन्य पहलुओं के अनधिकृत इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाई है। कोर्ट ने डिजिटल प्लेटफॉर्मों को उनकी पहचान का इस्तेमाल करने वाले आपत्तिजनक और AI से तैयार किए गए कंटेंट को हटाने या उस तक पहुंच रोकने का निर्देश दिया है। 150 से ज्यादा URL हटाने का निर्देश अदालत ने 150 से अधिक URL को हटाने या उन तक पहुंच निष्क्रिय करने का निर्देश दिया है। इन URL में कथित तौर पर तब्बू की पहचान, तस्वीर और अन्य व्यक्तिगत विशेषताओं का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया था। कोर्ट के निर्देश का दायरा प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्मों तक है। रिपोर्टों के अनुसार Google, Meta, X और Reddit समेत संबंधित प्लेटफॉर्मों को अदालत के आदेश के अनुसार कार्रवाई करनी होगी। AI से बनाए गए आपत्तिजनक कंटेंट पर कार्रवाई मामले में तब्बू की पहचान का इस्तेमाल कर बनाए गए AI-generated और आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर भी चिंता जताई गई थी। अदालत ने ऐसे कंटेंट को हटाने और भविष्य में उनकी पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल रोकने के लिए अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है। अदालत का यह कदम खास तौर पर ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब AI और डीपफेक तकनीक के जरिए सार्वजनिक हस्तियों की तस्वीर, आवाज और वीडियो को उनकी अनुमति के बिना बदला या इस्तेमाल किया जा रहा है। तब्बू ने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा की मांग की थी तब्बू ने अदालत का रुख करते हुए अपने नाम, तस्वीर, आवाज, समानता और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा की मांग की थी। उनकी याचिका में AI आधारित पहचान की नकल और डिजिटल माध्यमों पर अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर कार्रवाई की मांग की गई थी। अदालत की अंतरिम सुरक्षा का उद्देश्य तब्बू की पहचान और प्रतिष्ठा के अनधिकृत व्यावसायिक या अन्य इस्तेमाल को रोकना है। AI डीपफेक के खिलाफ बढ़ रही कानूनी कार्रवाई तब्बू का मामला बॉलीवुड हस्तियों द्वारा AI और डीपफेक के गलत इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी संरक्षण मांगने की बढ़ती प्रवृत्ति का एक और उदाहरण है। इससे पहले भी कई सार्वजनिक हस्तियां अपनी आवाज, तस्वीर और डिजिटल पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर अदालतों का रुख कर चुकी हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के इस आदेश से मनोरंजन जगत में AI से जुड़े व्यक्तित्व अधिकारों और डिजिटल पहचान की सुरक्षा को लेकर चल रही कानूनी बहस को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मुंबई, एजेंसियां। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीजन का प्रीमियर एपिसोड बॉलीवुड सितारों से सजा रहा। शो में आमिर खान, सनी देओल और प्रीति जिंटा अमिताभ बच्चन के साथ नजर आए। इस दौरान प्रीति जिंटा ने साल 2003 की फिल्म ‘अरमान’ में अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का एक मजेदार किस्सा सुनाया, जिसे सुनकर सेट से जुड़ी पुरानी यादें ताजा हो गईं। अमिताभ के साथ सीन करने के लिए प्रीति ने की थी खास गुजारिश प्रीति जिंटा ने बताया कि वह अमिताभ बच्चन के साथ ज्यादा से ज्यादा स्क्रीन शेयर करना चाहती थीं। ‘अरमान’ की शूटिंग के दौरान उन्होंने फिल्म के निर्देशक से एक ऐसा सीन रखने की गुजारिश की, जिसमें वह अमिताभ बच्चन के साथ नजर आ सकें। प्रीति ने मजाकिया अंदाज में बताया कि उनकी इच्छा पूरी करने के लिए फिल्म में ऐसा सीन तैयार किया गया, जिसमें अमिताभ बच्चन के किरदार की मौत हो जाती है और उन्हें उनके सामने मृत व्यक्ति की तरह अभिनय करना था। ‘मरा हुआ’ अभिनय करना प्रीति के लिए आसान नहीं था प्रीति ने बताया कि उस सीन को शूट करना उनके लिए उम्मीद से कहीं ज्यादा मुश्किल था। उन्हें बिल्कुल स्थिर रहकर मृत व्यक्ति की तरह अभिनय करना था, लेकिन अंदर से वह इतनी घबराई हुई थीं कि उनके लिए अपनी हंसी और शरीर की हलचल को नियंत्रित करना चुनौती बन गया था। अभिनेत्री ने बताया कि वह इस सीन को लेकर काफी नर्वस थीं क्योंकि मृत व्यक्ति की तरह अभिनय करना उनके लिए आसान नहीं था। इसी अनुभव को उन्होंने KBC 18 के मंच पर बेहद हल्के-फुल्के अंदाज में साझा किया। अमिताभ बच्चन और प्रीति जिंटा की पुरानी यादें ‘अरमान’ में अमिताभ बच्चन और प्रीति जिंटा के अलावा अनिल कपूर और ग्रेसी सिंह भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में थे। फिल्म के दौरान अमिताभ के साथ काम करने का अनुभव प्रीति के लिए खास रहा। KBC 18 में जब यह किस्सा सामने आया तो शो का माहौल भी काफी मजेदार हो गया। अमिताभ बच्चन के साथ पुराने अनुभवों को याद करते हुए प्रीति ने फिल्म की शूटिंग से जुड़ी कई भावनाएं साझा कीं। KBC 18 के प्रीमियर में सितारों की महफिल KBC 18 के पहले एपिसोड में आमिर खान, सनी देओल और प्रीति जिंटा ने हिस्सा लिया। तीनों कलाकार अपनी आगामी फिल्म ‘बटवारा’ के प्रचार के लिए शो में पहुंचे थे। इस दौरान अमिताभ बच्चन के साथ सितारों की बातचीत और पुराने किस्सों ने एपिसोड को खास बना दिया। शो के प्रीमियर में सितारों ने सवालों के जवाब देने के साथ अपनी फिल्मी जिंदगी से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव भी साझा किए। प्रीति जिंटा का ‘अरमान’ से जुड़ा किस्सा इसी बातचीत का खास आकर्षण रहा।
मुंबई, एजेंसियां। अरशद वारसी और बरुन सोबती की लोकप्रिय क्राइम-थ्रिलर वेब सीरीज ‘असुर’ के तीसरे सीजन को लेकर फैंस के लिए बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीरीज के तीसरे सीजन की शूटिंग सितंबर 2026 से शुरू हो सकती है। मेकर्स ने नए सीजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। तीसरे सीजन में होगा बड़ा बदलाव ‘असुर 3’ में इस बार पर्दे के पीछे भी बदलाव देखने को मिलेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले दो सीजन का निर्देशन करने वाले ओनी सेन की जगह सीरीज के क्रिएटर गौरव शुक्ला तीसरे सीजन की कमान संभाल सकते हैं। ऐसे में नए सीजन में कहानी के साथ-साथ निर्देशन का अंदाज भी अलग देखने को मिल सकता है। श्वेता बसु प्रसाद की हो सकती है नई एंट्री कास्ट को लेकर भी बड़ा अपडेट सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेत्री श्वेता बसु प्रसाद ‘असुर 3’ में नई एंट्री के तौर पर नजर आ सकती हैं। हालांकि, उनकी भूमिका को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। नई अभिनेत्री की एंट्री से सीरीज की कहानी में नया ट्विस्ट देखने को मिल सकता है। फिर CBI अफसर के किरदार में अरशद वारसी ‘असुर’ के दोनों सीजन में अरशद वारसी के किरदार को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। तीसरे सीजन में भी उनके वापस लौटने की उम्मीद है। वह एक बार फिर CBI अधिकारी के किरदार में नजर आ सकते हैं। बरुन सोबती के साथ उनकी जोड़ी भी सीरीज की अहम खासियत रही है। 2020 में आया था पहला सीजन ‘असुर’ का पहला सीजन साल 2020 में रिलीज हुआ था। अपनी क्राइम, साइकोलॉजी और पौराणिक संदर्भों से जुड़ी कहानी के कारण इसने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। इसके बाद दूसरा सीजन आया और अब फैंस लंबे समय से तीसरे सीजन का इंतजार कर रहे हैं। अरशद वारसी भी पहले ‘असुर 3’ पर काम शुरू होने की पुष्टि कर चुके हैं। अब सितंबर से शूटिंग शुरू होने की खबर के बाद फैंस की उत्सुकता और बढ़ गई है।