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पंजाब के तीन जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट

पंजाब में आज भारी बारिश का अलर्ट, तीन जिलों में बरसेंगे बादल; 13 अगस्त से फिर बदलेगा मौसम

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
पंजाब में भारी बारिश के अलर्ट के बीच बारिश का मौसम
पंजाब के पठानकोट, होशियारपुर और रूपनगर में भारी बारिश का अलर्ट

पटियाला, एजेंसियां। पंजाब में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता दिख रहा है। मौसम विभाग ने सोमवार को राज्य के तीन जिलों पठानकोट, होशियारपुर और रूपनगर में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं कई अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।

 

तीन जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

 

मौसम विभाग के अनुसार पठानकोट, होशियारपुर और रूपनगर में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा गुरदासपुर, अमृतसर, नवांशहर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला, मोहाली, तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, मोगा, बठिंडा, बरनाला, मानसा और संगरूर में हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है।

 

दो दिन मिलेगी राहत

 

मौसम विभाग के मुताबिक 11 और 12 अगस्त को पंजाब में भारी बारिश से राहत मिलने की संभावना है। हालांकि इस दौरान कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद 13 अगस्त से मौसम फिर करवट लेगा और राज्य में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया जा सकता है।

 

रविवार को बढ़ा तापमान

 

रविवार को पंजाब में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहा, जिसके कारण दिन के तापमान में औसतन 3.2 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रूपनगर में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस रहा, जो राज्य में सबसे अधिक था।

अमृतसर में 31.3, लुधियाना में 35.4, पटियाला में 35.1, पठानकोट में 35.5, बठिंडा में 32 और एसबीएस नगर में 33.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

बारिश के चलते आने वाले दिनों में तापमान में उतार-चढ़ाव के साथ लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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भारतीय रेलवे की नई ट्रेन सेवाएं और ट्रेनों के रूट विस्तार
रेलवे ने दो नई ट्रेनों को दी मंजूरी, यूपी और गुजरात के यात्रियों को बड़ी राहत; 4 ट्रेनों का रूट बढ़ा, 7 के नए ठहराव

नई दिल्ली, एजेंसियां। रेल यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। रेलवे बोर्ड ने उत्तर प्रदेश और गुजरात में दो नई दैनिक ट्रेन सेवाओं को मंजूरी दी है। इसके साथ ही चार मौजूदा ट्रेनों के मार्ग का विस्तार किया गया है और सात ट्रेनों के अतिरिक्त ठहराव को भी मंजूरी दी गई है। इन फैसलों से उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।   कासगंज-ऐशबाग एक्सप्रेस     रेलवे बोर्ड ने 15312/15311 कासगंज-ऐशबाग एक्सप्रेस को मंजूरी दी है। यह ट्रेन प्रतिदिन चलेगी।   कासगंज से ऐशबाग: ट्रेन नंबर 15312 कासगंज से सुबह 4:20 बजे रवाना होगी और दोपहर 1 बजे ऐशबाग पहुंचेगी। ऐशबाग से कासगंज: वापसी में ट्रेन नंबर 15311 ऐशबाग से दोपहर 2 बजे चलेगी और रात 10:40 बजे कासगंज पहुंचेगी। इसके प्रमुख ठहराव उझानी, बदायूं, बरेली, इज्जतनगर, पीलीभीत, पूरनपुर, मैलानी, गोला गोकर्णनाथ, लखीमपुर, सीतापुर, सिधौली और मोहिबुल्लापुर होंगे। इस ट्रेन से कासगंज, बदायूं, बरेली, पीलीभीत और लखीमपुर क्षेत्र के यात्रियों को लखनऊ आने-जाने में अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।   वलसाड-सूरत MEMU     दूसरी नई ट्रेन 69149 वलसाड-सूरत MEMU है। इसे भी दैनिक सेवा के तौर पर मंजूरी दी गई है।   यह ट्रेन वलसाड से दोपहर 1:20 बजे रवाना होकर शाम 4:40 बजे सूरत पहुंचेगी। इस ट्रेन के ठहराव डूंगरी, जोरावासन, बिलिमोरा, अमलसाड, अंछेली, वेदछा, गांधी स्मृति, नवसारी, मारोली, सचिन, भेस्तान और उधना में होंगे। इससे वलसाड से सूरत के बीच रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों और छोटे कारोबारियों को सीधी रेल सुविधा मिलेगी।   वाराणसी सिटी-गोरखपुर एक्सप्रेस अब नेपालगंज रोड तक     रेलवे ने 15132/15131 वाराणसी सिटी-गोरखपुर एक्सप्रेस का मार्ग बढ़ाकर नेपालगंज रोड तक करने को मंजूरी दी है।   अब 15132 वाराणसी सिटी से रात 10:35 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 11:20 बजे नेपालगंज रोड पहुंचेगी। वापसी में 15131 नेपालगंज रोड से शाम 4:15 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 5:30 बजे वाराणसी सिटी पहुंचेगी। विस्तारित मार्ग पर नखहा जंगल, पेपेगंज, कैंपियरगंज, आनंद नगर, सिद्धार्थ नगर, शोहरतगढ़, बढ़नी, तुलसीपुर, बलरामपुर, गोंडा, पयागपुर, बहराइच और रिसिया में ठहराव दिए जाएंगे।   रीवा-जबलपुर एक्सप्रेस का मदन महल तक विस्तार     22189/22190 रीवा-जबलपुर एक्सप्रेस को अब मदन महल तक बढ़ाया गया है।   नई व्यवस्था के तहत 22190 रीवा-मदन महल एक्सप्रेस सुबह 5:45 बजे रीवा से चलेगी और 10:07 बजे मदन महल पहुंचेगी। जबलपुर में इसका ठहराव सुबह 9:46 से 9:51 बजे तक रहेगा। वापसी में 22189 मदन महल-रीवा एक्सप्रेस शाम 5 बजे मदन महल से चलेगी और रात 9:22 बजे रीवा पहुंचेगी।   अंबिकापुर-जबलपुर एक्सप्रेस भी मदन महल तक     रेलवे ने 11265/11266 जबलपुर-अंबिकापुर एक्सप्रेस को भी मदन महल तक बढ़ाने की मंजूरी दी है।   11266 अंबिकापुर-मदन महल एक्सप्रेस सुबह 6:15 बजे अंबिकापुर से चलेगी और दोपहर 3:20 बजे मदन महल पहुंचेगी। जबलपुर में इसका ठहराव दोपहर 2:55 से 3 बजे तक रहेगा। वापसी में 11265 मदन महल-अंबिकापुर एक्सप्रेस दोपहर 12:25 बजे मदन महल से चलेगी और रात 11 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी।   सात ट्रेनों के नए ठहराव भी मंजूर     रेलवे बोर्ड ने सात ट्रेनों के लिए नए स्टेशन पर ठहराव की भी मंजूरी दी है। इनमें शामिल हैं:   15093/15094 अछनेरा-टनकपुर एक्सप्रेस — बनबसा 12221/12222 पुणे-हावड़ा दुरंतो एक्सप्रेस — अकोला 55331/55332 कासगंज-अछनेरा पैसेंजर — गढ़ी बेरी 12933/12934 बांद्रा टर्मिनस-वटवा कर्णावती एक्सप्रेस — नवसारी 14319/14320 इंदौर-बरेली एक्सप्रेस — डिबाई 20161/20162 पुणे-जबलपुर एक्सप्रेस — खंडवा 63387/63388 जमालपुर-गया MEMU — पवई ब्रह्मस्थान   यात्रियों को क्या फायदा होगा     रेलवे के इन फैसलों से कई छोटे शहर और प्रमुख रेल नेटवर्क से बेहतर तरीके से जुड़ेंगे। खास तौर पर कासगंज-बदायूं-बरेली-पीलीभीत-लखनऊ, वलसाड-सूरत, वाराणसी-नेपालगंज रोड और रीवा-जबलपुर-मदन महल रूट के यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।   रेलवे के अनुसार नई ट्रेन सेवाओं, रूट विस्तार और नए ठहराव की अलग-अलग अधिसूचना संबंधित रेलवे जोन द्वारा जारी की जाएगी। इसलिए वास्तविक परिचालन तिथि और अंतिम समय-सारणी के लिए संबंधित जोन की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
Abhishek Banerjee

अभिषेक बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, आंख के इलाज के लिए तीन हफ्ते विदेश जाने की मिली अनुमति

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लोकसभा ने हंगामे के बीच ट्रिब्यूनल सुधार विधेयक 2026 को दी मंजूरी, बिना चर्चा के हुआ पारित

Supreme Court Reaction
SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट में रुख, कहा- अवधारणा लागू नहीं होनी चाहिए

नई दिल्ली, एजेंसियां। अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा लागू करने के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख स्पष्ट किया है। केंद्र ने अदालत से कहा कि SC/ST समुदायों के लिए आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं किया जाना चाहिए। सरकार ने कहा कि मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए SC/ST आरक्षण की तुलना अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण से नहीं की जा सकती।   सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने क्या कहा   केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में कहा कि SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू करना उचित नहीं होगा। सरकार का तर्क है कि SC/ST समुदायों को ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और छुआछूत जैसी समस्याओं के कारण अलग संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की गई है।   केंद्र ने यह भी स्पष्ट किया कि SC/ST आरक्षण का उद्देश्य केवल आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करना नहीं है, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़ी असमानताओं को दूर करना भी है।   क्यों उठा क्रीमी लेयर का मुद्दा   SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2024 के सात जजों की संविधान पीठ के फैसले के बाद फिर चर्चा में आया था। उस फैसले में अदालत ने SC/ST के भीतर अधिक वंचित समूहों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाने के लिए उप-वर्गीकरण की अनुमति दी थी।   इसी फैसले में न्यायमूर्ति बीआर गवई ने SC/ST समुदायों में क्रीमी लेयर की पहचान करने की जरूरत पर टिप्पणी की थी। हालांकि यह टिप्पणी सभी न्यायाधीशों की ओर से समान रूप से व्यक्त राय नहीं थी।   केंद्र ने OBC से अलग बताया SC/ST आरक्षण   केंद्र ने अदालत के सामने यह अंतर भी रखा कि OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर का सिद्धांत पहले से लागू है, लेकिन SC/ST के मामले में परिस्थितियां अलग हैं। सरकार के अनुसार SC/ST समुदायों के लिए आरक्षण का आधार सामाजिक भेदभाव और ऐतिहासिक वंचना से जुड़ा है। इसलिए केवल परिवार की आर्थिक या सामाजिक स्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति को आरक्षण के लाभ से बाहर करना उचित नहीं माना जाना चाहिए।   फैसले का क्या होगा असर   यदि सुप्रीम कोर्ट केंद्र के इस रुख को स्वीकार करता है तो SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने को लेकर चल रही बहस को महत्वपूर्ण दिशा मिल सकती है। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि SC/ST आरक्षण के लाभार्थियों को निर्धारित करने में सामाजिक पिछड़ेपन और अन्य संवैधानिक मानकों की भूमिका किस तरह तय की जाएगी।   फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर अंतिम फैसला आना बाकी है। इसलिए केंद्र का रुख अदालत का अंतिम निर्णय नहीं है और SC/ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू होगी या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण सुप्रीम कोर्ट के फैसले से होगा।

abhishek singh अगस्त 11, 2026 0
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Shivraj Singh Chouhan
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 6,000 से अधिक छात्रों के लिए जारी की ₹21.35 करोड़ की छात्रवृत्ति

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के कृषि विद्यार्थियों के लिए बड़ी छात्रवृत्ति राशि जारी की है। राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) के माध्यम से 6,000 से अधिक विद्यार्थियों को कुल 21.35 करोड़ रुपये से ज्यादा की छात्रवृत्ति और फेलोशिप सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई।   DBT के जरिए सीधे छात्रों के खाते में पहुंची राशि   कृषि मंत्री ने यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से जारी की। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से कृषि विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्राप्त करने में अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। नई व्यवस्था के तहत पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति की राशि नियमित रूप से सीधे उनके बैंक खातों में उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।   कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने पर सरकार का जोर   कृषि क्षेत्र में उच्च शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति और फेलोशिप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए ऐसी सहायता उच्च शिक्षा जारी रखने में मददगार हो सकती है। कृषि शिक्षा के जरिए नई तकनीक, शोध और आधुनिक खेती की जानकारी हासिल करने वाले युवाओं को आगे बढ़ाने पर भी सरकार जोर दे रही है।   6 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को मिला लाभ   इस पहल के तहत देशभर के 6,000 से अधिक कृषि विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं। सरकार की ओर से जारी राशि का कुल मूल्य 21.35 करोड़ रुपये से अधिक है। सरकार का कहना है कि छात्रवृत्ति की राशि सीधे विद्यार्थियों के खाते में पहुंचने से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक होगी। कृषि क्षेत्र में पढ़ाई और शोध कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह आर्थिक सहायता आगे की शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

abhishek singh अगस्त 11, 2026 0
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