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ओंकारेश्वर में बड़ा हादसा टला, नर्मदा में डूब रहे छह कांवड़ियों को गोताखोरों ने बचाया

anjali kumari अगस्त 10, 2026 0
Kanwariyas Rescued
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ओंकारेश्वर, एजेंसियां। मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में सोमवार को बड़ा हादसा टल गया। नावघाटखेड़ी स्थित नर्मदा घाट पर अलग-अलग दो घटनाओं में गहरे और तेज बहाव वाले पानी में डूब रहे छह कांवड़ यात्रियों को स्थानीय गोताखोरों ने सुरक्षित बचा लिया। समय रहते रेस्क्यू होने से छह लोगों की जान बच गई।

 

स्नान के दौरान गहरे पानी में पहुंचे कांवड़िए

 

श्रावण माह में नर्मदा स्नान और कांवड़ यात्रा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु नावघाटखेड़ी घाट पहुंच रहे हैं। सोमवार दोपहर करीब 12 बजे इंदौर से आए दो कांवड़िए स्नान के दौरान गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे।

 

घाट पर मौजूद गोताखोर बाबूलाल मंगले ने तुरंत नदी में छलांग लगाई और ट्यूब की मदद से दोनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

 

कुछ देर बाद चार और कांवड़िए डूबने लगे

 

पहली घटना के कुछ ही देर बाद इंदौर के चार अन्य कांवड़िए भी स्नान करते समय गहरे पानी में पहुंच गए। तेज बहाव के कारण वे डूबने लगे। स्थानीय गोताखोरों ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया और चारों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

 

इस तरह कुछ ही समय के अंतराल में दो अलग-अलग घटनाओं में छह कांवड़ यात्रियों की जान बचाई गई।

 

तेज बहाव और अचानक बढ़ती गहराई बनी खतरे की वजह

 

गोताखोर बाबूलाल मंगले ने बताया कि श्रद्धालुओं को लगातार गहरे पानी में नहीं जाने की चेतावनी दी जाती है, लेकिन कई लोग उत्साह में नदी के अंदर तक चले जाते हैं। नर्मदा में कई जगह अचानक गहराई बढ़ जाती है और तेज बहाव के कारण संतुलन बिगड़ने पर लोग डूबने लगते हैं।

 

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि नर्मदा में स्नान करते समय निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में ही रहें और गहरे पानी में जाने से बचें।

 

स्थानीय गोताखोरों के लिए सुरक्षा व्यवस्था की मांग

 

ओंकारेश्वर, खेड़ीघाट और नावघाटखेड़ी क्षेत्र के स्थानीय गोताखोर लंबे समय से नर्मदा में डूबने वाले लोगों की जान बचाते आ रहे हैं। कई बार उन्हें बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के ही तेज बहाव में उतरना पड़ता है।

 

वरिष्ठ पत्रकार हरिश्चंद्र शर्मा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से स्थानीय गोताखोरों के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग की है। उन्होंने गोताखोरों को लाइफ जैकेट, रस्सियां, मोटरबोट और अन्य जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने के साथ नियमित प्रशिक्षण और जीवन बीमा की व्यवस्था करने की मांग की।

 

इसके अलावा घाटों पर गहरे पानी की सीमा चिन्हित करने, चेतावनी बोर्ड लगाने और पर्याप्त प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती की जरूरत भी बताई गई है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Indian Air Force Su-30MKI fighter jet as HAL prepares new aircraft and major indigenous upgrades.
Su-30MKI को मिलेगा स्वदेशी ताकत का नया दम, HAL बनाएगा 12 नए लड़ाकू विमान; 2029 तक पूरा होगा पहला चरण

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों में शामिल Su-30MKI को आने वाले वर्षों में और अधिक आधुनिक तथा स्वदेशी तकनीक से लैस करने की तैयारी तेज हो गई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड अपने नासिक स्थित संयंत्र में Su-30MKI के निर्माण को फिर से गति देने जा रहा है। योजना के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में पहला नया विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने की संभावना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नासिक संयंत्र में वर्ष 2029 तक कुल 12 नए Su-30MKI लड़ाकू विमान तैयार किए जाने की योजना है। इन विमानों में इस्तेमाल होने वाले करीब 50 प्रतिशत कलपुर्जे और उपकरण भारत में निर्मित होने की योजना है। इससे Su-30MKI कार्यक्रम में घरेलू रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 12 नए Su-30MKI के लिए करीब 11 हजार करोड़ रुपये का करार भारतीय वायुसेना ने दुर्घटनाओं में खोए 12 Su-30MKI विमानों की भरपाई के लिए नए विमान हासिल करने का फैसला किया था। इसके लिए दिसंबर 2024 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ करीब 11,000 करोड़ रुपये का करार किया गया। इस समझौते के तहत नासिक संयंत्र में 12 नए Su-30MKI तैयार किए जाने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन विमानों में लगाए जाने वाले करीब आधे कलपुर्जों का निर्माण भारत में किया जाएगा। पहले विमान की आपूर्ति वर्ष 2027-28 में होने की संभावना है, जबकि 12 विमानों की पूरी खेप वर्ष 2029 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। पुराने Su-30MKI बेड़े का भी होगा बड़ा आधुनिकीकरण HAL की योजना सिर्फ नए लड़ाकू विमान बनाने तक सीमित नहीं है। भारतीय वायुसेना के मौजूदा Su-30MKI बेड़े को भी बड़े स्तर पर उन्नत करने की तैयारी है। इस आधुनिकीकरण कार्यक्रम पर करीब 60,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कार्यक्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ की भूमिका भी होगी। इसके अलावा भारतीय निजी कंपनियों से भी कई उपकरण और प्रणालियां हासिल की जाएंगी। इस अपग्रेड कार्यक्रम का उद्देश्य Su-30MKI की निगरानी, लक्ष्य पहचान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और हथियार प्रणाली से जुड़ी क्षमताओं को आधुनिक बनाना है। दो चरणों में होगा अपग्रेडेशन Su-30MKI के आधुनिकीकरण का काम दो प्रमुख चरणों में किए जाने की योजना है। पहले चरण में विमानों में आधुनिक एवियोनिक्स और नए रडार लगाए जाएंगे। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली को भी मजबूत किया जाएगा। नई प्रणाली विमान की ओर आने वाले खतरों की पहचान करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बाधित करने में मदद करेगी। विमानों में अत्याधुनिक इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक प्रणाली भी लगाए जाने की योजना है। इससे विमान बिना पारंपरिक रडार पर पूरी तरह निर्भर हुए हवाई लक्ष्यों की पहचान और निगरानी करने में सक्षम होगा। दूसरे चरण में फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम समेत अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों को आधुनिक बनाया जाएगा। इससे पुराने हो रहे Su-30MKI विमानों की परिचालन क्षमता और सेवा अवधि को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। डीआरडीओ और निजी क्षेत्र की भी होगी भूमिका इस आधुनिकीकरण कार्यक्रम में स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा। डीआरडीओ के साथ-साथ भारतीय निजी कंपनियों को भी उपकरण और प्रणालियों की आपूर्ति में शामिल किए जाने की योजना है। इससे न केवल Su-30MKI को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में घरेलू कंपनियों की भूमिका भी बढ़ेगी। लंबे समय में इसका असर देश की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला और आत्मनिर्भरता पर पड़ सकता है। Su-30MKI की क्या है खासियत? Su-30MKI एक भारी और लंबी दूरी तक प्रभावी ढंग से काम करने वाला बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है। इसका अधिकतम टेकऑफ वजन करीब 38,800 किलोग्राम बताया जाता है। विमान में लगभग 9,640 किलोग्राम ईंधन और करीब 8,000 किलोग्राम तक हथियार ले जाने की क्षमता बताई जाती है। इसकी भारी हथियार क्षमता के कारण इसे विभिन्न प्रकार के हवाई और जमीनी अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह ब्रह्मोस जैसी भारी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को ले जाने में भी सक्षम है। भारतीय वायुसेना के बेड़े में Su-30MKI की संख्या और भूमिका को देखते हुए इसका आधुनिकीकरण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम Su-30MKI का नया निर्माण और पुराने बेड़े का व्यापक आधुनिकीकरण भारत की रक्षा उत्पादन नीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। नए विमानों में 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल की योजना और अपग्रेड कार्यक्रम में भारतीय कंपनियों की भागीदारी से घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में यदि स्वदेशी रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, एवियोनिक्स और फ्लाइट कंट्रोल तकनीक को सफलतापूर्वक Su-30MKI में शामिल किया जाता है, तो यह विमान भारतीय वायुसेना के लिए और अधिक सक्षम प्लेटफॉर्म बन सकता है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नासिक संयंत्र से पहला नया Su-30MKI निर्धारित समय के अनुसार कब भारतीय वायुसेना को मिलता है और आधुनिकीकरण कार्यक्रम को किस गति से आगे बढ़ाया जाता है।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
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