राष्ट्रीय

Su-30MKI Upgrade: HAL to Build 12 New Fighter Jets

Su-30MKI को मिलेगा स्वदेशी ताकत का नया दम, HAL बनाएगा 12 नए लड़ाकू विमान; 2029 तक पूरा होगा पहला चरण

surbhi अगस्त 10, 2026 0
Indian Air Force Su-30MKI fighter jet as HAL prepares new aircraft and major indigenous upgrades.
Su-30MKI Indigenous Upgrade and HAL Production

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों में शामिल Su-30MKI को आने वाले वर्षों में और अधिक आधुनिक तथा स्वदेशी तकनीक से लैस करने की तैयारी तेज हो गई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड अपने नासिक स्थित संयंत्र में Su-30MKI के निर्माण को फिर से गति देने जा रहा है। योजना के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में पहला नया विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने की संभावना है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नासिक संयंत्र में वर्ष 2029 तक कुल 12 नए Su-30MKI लड़ाकू विमान तैयार किए जाने की योजना है। इन विमानों में इस्तेमाल होने वाले करीब 50 प्रतिशत कलपुर्जे और उपकरण भारत में निर्मित होने की योजना है। इससे Su-30MKI कार्यक्रम में घरेलू रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

12 नए Su-30MKI के लिए करीब 11 हजार करोड़ रुपये का करार

भारतीय वायुसेना ने दुर्घटनाओं में खोए 12 Su-30MKI विमानों की भरपाई के लिए नए विमान हासिल करने का फैसला किया था। इसके लिए दिसंबर 2024 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ करीब 11,000 करोड़ रुपये का करार किया गया।

इस समझौते के तहत नासिक संयंत्र में 12 नए Su-30MKI तैयार किए जाने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन विमानों में लगाए जाने वाले करीब आधे कलपुर्जों का निर्माण भारत में किया जाएगा।

पहले विमान की आपूर्ति वर्ष 2027-28 में होने की संभावना है, जबकि 12 विमानों की पूरी खेप वर्ष 2029 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

पुराने Su-30MKI बेड़े का भी होगा बड़ा आधुनिकीकरण

HAL की योजना सिर्फ नए लड़ाकू विमान बनाने तक सीमित नहीं है। भारतीय वायुसेना के मौजूदा Su-30MKI बेड़े को भी बड़े स्तर पर उन्नत करने की तैयारी है।

इस आधुनिकीकरण कार्यक्रम पर करीब 60,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कार्यक्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ की भूमिका भी होगी। इसके अलावा भारतीय निजी कंपनियों से भी कई उपकरण और प्रणालियां हासिल की जाएंगी।

इस अपग्रेड कार्यक्रम का उद्देश्य Su-30MKI की निगरानी, लक्ष्य पहचान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और हथियार प्रणाली से जुड़ी क्षमताओं को आधुनिक बनाना है।

दो चरणों में होगा अपग्रेडेशन

Su-30MKI के आधुनिकीकरण का काम दो प्रमुख चरणों में किए जाने की योजना है।

पहले चरण में विमानों में आधुनिक एवियोनिक्स और नए रडार लगाए जाएंगे। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली को भी मजबूत किया जाएगा। नई प्रणाली विमान की ओर आने वाले खतरों की पहचान करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बाधित करने में मदद करेगी।

विमानों में अत्याधुनिक इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक प्रणाली भी लगाए जाने की योजना है। इससे विमान बिना पारंपरिक रडार पर पूरी तरह निर्भर हुए हवाई लक्ष्यों की पहचान और निगरानी करने में सक्षम होगा।

दूसरे चरण में फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम समेत अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों को आधुनिक बनाया जाएगा। इससे पुराने हो रहे Su-30MKI विमानों की परिचालन क्षमता और सेवा अवधि को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

डीआरडीओ और निजी क्षेत्र की भी होगी भूमिका

इस आधुनिकीकरण कार्यक्रम में स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा। डीआरडीओ के साथ-साथ भारतीय निजी कंपनियों को भी उपकरण और प्रणालियों की आपूर्ति में शामिल किए जाने की योजना है।

इससे न केवल Su-30MKI को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में घरेलू कंपनियों की भूमिका भी बढ़ेगी। लंबे समय में इसका असर देश की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला और आत्मनिर्भरता पर पड़ सकता है।

Su-30MKI की क्या है खासियत?

Su-30MKI एक भारी और लंबी दूरी तक प्रभावी ढंग से काम करने वाला बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है। इसका अधिकतम टेकऑफ वजन करीब 38,800 किलोग्राम बताया जाता है। विमान में लगभग 9,640 किलोग्राम ईंधन और करीब 8,000 किलोग्राम तक हथियार ले जाने की क्षमता बताई जाती है।

इसकी भारी हथियार क्षमता के कारण इसे विभिन्न प्रकार के हवाई और जमीनी अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह ब्रह्मोस जैसी भारी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को ले जाने में भी सक्षम है।

भारतीय वायुसेना के बेड़े में Su-30MKI की संख्या और भूमिका को देखते हुए इसका आधुनिकीकरण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम

Su-30MKI का नया निर्माण और पुराने बेड़े का व्यापक आधुनिकीकरण भारत की रक्षा उत्पादन नीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। नए विमानों में 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल की योजना और अपग्रेड कार्यक्रम में भारतीय कंपनियों की भागीदारी से घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आने वाले वर्षों में यदि स्वदेशी रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, एवियोनिक्स और फ्लाइट कंट्रोल तकनीक को सफलतापूर्वक Su-30MKI में शामिल किया जाता है, तो यह विमान भारतीय वायुसेना के लिए और अधिक सक्षम प्लेटफॉर्म बन सकता है।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नासिक संयंत्र से पहला नया Su-30MKI निर्धारित समय के अनुसार कब भारतीय वायुसेना को मिलता है और आधुनिकीकरण कार्यक्रम को किस गति से आगे बढ़ाया जाता है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

राष्ट्रीय

View more
Supriya Sule and Prime Minister Narendra Modi amid political discussions over FCRA Bill and delimitation proposals.
FCRA विधेयक पर बढ़ी सियासी हलचल, सुप्रिया सुले की पीएम मोदी से मुलाकात पर नजर; DMK-NCP (SP) को साधने की कोशिश

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है और अब उसके अंतिम चार दिनों में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक यानी एफसीआरए विधेयक और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनाने की कोशिशें तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी क्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाली हैं। उनके साथ पार्टी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी रहेगा। बैठक को महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ संसद में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों के संदर्भ में भी अहम माना जा रहा है। एफसीआरए विधेयक पर एनसीपी (एसपी) का स्पष्ट विरोध सुप्रिया सुले ने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर अपनी पार्टी की आपत्ति स्पष्ट कर दी है। उनका कहना है कि एनसीपी (एसपी) इस विधेयक का वर्तमान रूप में समर्थन नहीं करती। पार्टी की मांग है कि विधेयक को या तो वापस लिया जाए या फिर इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजकर विस्तृत जांच और चर्चा कराई जाए। इस रुख से संकेत मिलता है कि सरकार को विधेयक को लेकर विपक्षी दलों के बीच सहमति बनाने के लिए राजनीतिक स्तर पर बातचीत करनी पड़ सकती है। परिसीमन विधेयक पर सुले ने साधी सावधानी परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन को लेकर सुप्रिया सुले ने फिलहाल कोई अंतिम रुख जाहिर नहीं किया है। उनका कहना है कि संबंधित विधेयक अभी सामने नहीं आया है और इसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। महिला आरक्षण से जुड़े परिसीमन प्रस्ताव को राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है। सुले ने संकेत दिया है कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेने से पहले वह इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों से बातचीत करेंगी। इस प्रस्ताव को संसद में पारित कराने के लिए सरकार को व्यापक राजनीतिक समर्थन की आवश्यकता होगी, क्योंकि संविधान संशोधन के लिए विशेष बहुमत की जरूरत पड़ती है। सरकार के लिए डीएमके और एनसीपी (एसपी) क्यों अहम? संसद के मौजूदा सत्र के अंतिम सप्ताह में एफसीआरए संशोधन विधेयक को सोमवार के लोकसभा एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है। इससे राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हुई है कि सरकार फिलहाल इस मुद्दे पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश कर सकती है। डीएमके और एनसीपी (एसपी) जैसी पार्टियां एफसीआरए विधेयक के मौजूदा प्रावधानों पर सवाल उठा रही हैं। वहीं, परिसीमन जैसे संवैधानिक मुद्दे पर सरकार को अधिक व्यापक समर्थन की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में दोनों दलों के साथ संवाद को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक पर नजर सोमवार को लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक भी होने वाली है। इसी बैठक में आने वाले दिनों के विधायी एजेंडे और विभिन्न विधेयकों पर चर्चा के लिए समय तय किया जाता है। अगर सरकार एफसीआरए विधेयक को मौजूदा मानसून सत्र में पारित कराने के लिए आगे बढ़ती है, तो उसके लिए चर्चा और मतदान का समय निर्धारित करना जरूरी होगा। फिलहाल सोमवार के लोकसभा एजेंडे में चार विधेयकों का उल्लेख है, लेकिन एफसीआरए संशोधन विधेयक इसमें शामिल नहीं है। इस वजह से यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में सरकार इस विधेयक को सदन में लाती है या नहीं। एफसीआरए विधेयक को लेकर विपक्ष की आपत्ति क्या है? एफसीआरए यानी विदेशी अंशदान विनियमन कानून का उद्देश्य भारत में विदेशों से मिलने वाले धन और चंदे को नियंत्रित करना तथा उसके इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। मौजूदा कानून के तहत विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए पंजीकरण और नियामकीय प्रावधान लागू होते हैं। प्रस्तावित संशोधनों में एफसीआरए पंजीकरण समाप्त होने या संस्था द्वारा पंजीकरण वापस करने की स्थिति में विदेशी अंशदान और उससे जुड़े मामलों के प्रबंधन के लिए एक विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव है। विपक्ष को आशंका है कि नए प्रावधानों से गैर सरकारी संगठनों और सामुदायिक संगठनों की कार्यप्रणाली पर अतिरिक्त नियंत्रण बढ़ सकता है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी विधेयक को लेकर आपत्ति जताई है। विपक्ष की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि प्रस्तावित बदलावों का असर कुछ सामाजिक और धार्मिक संगठनों पर पड़ सकता है। हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों और आशंकाओं पर सरकार का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। चार दिन में तय होगी विधेयक की दिशा संसद का मानसून सत्र अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। ऐसे में एफसीआरए विधेयक को लेकर सरकार की रणनीति और विपक्षी दलों के रुख पर लगातार नजर रहेगी। सुप्रिया सुले की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रस्तावित मुलाकात को इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले चार दिनों में बातचीत, बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के फैसले और सदन के एजेंडे से स्पष्ट होगा कि एफसीआरए विधेयक पर सरकार आगे बढ़ती है या इसे आगे की चर्चा के लिए टाल दिया जाता है। साथ ही परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिशें भी संसद के अंतिम दिनों की बड़ी राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहेंगी।  

surbhi अगस्त 10, 2026 0
Indian Parliament building as government prepares Kerala name change and NCDC funding bills amid opposition protests.

शाह के बयान पर विपक्ष अड़ा, आज ‘केरलम’ नाम और एनसीडीसी फंडिंग पर 2 बड़े विधेयक; संसद में फिर टकराव के आसार

Indian Air Force Su-30MKI fighter jet as HAL prepares new aircraft and major indigenous upgrades.

Su-30MKI को मिलेगा स्वदेशी ताकत का नया दम, HAL बनाएगा 12 नए लड़ाकू विमान; 2029 तक पूरा होगा पहला चरण

Uttarakhand earthquake

उत्तराखंड में दो बार कांपी धरती, उत्तरकाशी में 4.2 और टिहरी में 2.0 तीव्रता का भूकंप

Delhi-Meerut Expressway
कांवड़ यात्रा के चलते दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भीषण जाम, कई किमी तक वाहनों की कतार

गाजियाबाद, एजेंसियां। सावन के दूसरे सोमवार और 11 अगस्त को महाशिवरात्रि के मद्देनजर कांवड़ियों की संख्या बढ़ने से गाजियाबाद और दिल्ली-NCR की प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित हो गया है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सोमवार सुबह वाहनों की रफ्तार थम गई। गाजियाबाद से नोएडा जाने वाले मार्ग पर कई किलोमीटर तक वाहनों की कतारें देखने को मिलीं।   कांवड़ियों की वापसी से थमा एक्सप्रेसवे का ट्रैफिक   कंधों पर गंगाजल लेकर बड़ी संख्या में कांवड़िए अपने-अपने गंतव्य और शिवालयों की ओर लौट रहे हैं। कांवड़ियों की आवाजाही बढ़ने के साथ दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की एक लेन में यातायात काफी धीमा हो गया। कई स्थानों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए, जिससे वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।   जीटी रोड और मेरठ रोड पर भी जाम   गाजियाबाद में डाक कांवड़ियों की बढ़ती संख्या के कारण जीटी रोड पर अप्सरा बॉर्डर से मोहन नगर और मेरठ तिराहे तक यातायात प्रभावित रहा। मेरठ रोड पर भी वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। जाम के कारण लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग रहा है।   कांवड़ मार्गों पर लगाए गए सेवा शिविर   कांवड़ियों की सुविधा के लिए यात्रा मार्गों पर जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में शिवभक्तों के लिए भोजन, पानी, शरबत और विश्राम की व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और स्थानीय लोग कांवड़ियों की सेवा में जुटे हैं।   डाक कांवड़िए तेजी से बढ़ रहे आगे   हाईवे पर डाक कांवड़िए तेजी से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि सामान्य कांवड़ लेकर चल रहे शिवभक्त भजन-कीर्तन करते हुए यात्रा पूरी कर रहे हैं। महाशिवरात्रि पर शिवालयों में गंगाजल चढ़ाए जाने से पहले कांवड़ियों की आवाजाही और बढ़ने की संभावना है।

anjali kumari अगस्त 10, 2026 0
Heavy rain Bhopal

भोपाल में बारिश का कहर, आज सभी स्कूल बंद; नर्सरी से 12वीं तक के छात्रों की छुट्टी

Parliament Monsoon Session

संसद का मानसून सत्र: आज भी हंगामे के आसार, कई अहम विधेयकों पर अटकी सहमति

Today Horoscope

Today Horoscope: आज का राशिफल 10 अगस्त 2026, सोमवार

Important Events
Important Events: 10 अगस्त की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

612 ईसापूर्व – असीरियाई सम्राज्य के राजा शिनशारिसकुन की हत्या हुई, निनेवह नगर का पतन हुआ। 1500 – पुर्तगाली समुद्र जहाज के कैप्टन डियागो डियाज मैडागास्कर को देखने वाले पहले यूरोपीय बने। 1511 – पुर्तगाजी सैनिकों ने मलेशियाई राज्य मलक्का के एक हिस्से पर कब्जा किया। 1664 – ओटोमन सम्राज्य और आॅस्ट्रिया ने शांति के लिए वसवार की संधि पर हस्ताक्षर किए। 1675 – इंग्लैड के राजा चार्ल्स ने ग्रीनविच वेघशाला की आधारशिला रखी।  1678 – हालैंड और फ्रांस के बीच निजम्गेन शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। 1741 -  कोलहेल की लड़ाई: त्रावणकोर के राजा ने डच ईस्ट इंडिया कंपनी के नौसैनिक अभियान को हराया। 1755 -  अकादमी का निष्कासन फंड़ी अभियान की खाड़ी के साथ शुरू किया गया। 1759 – कर्लोस तृतीय स्पेन का सम्राट बना। 1776 – अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा करने वाले दस्तावेज की प्रति औपचारिक रूप से लंदन पहुंचे। 1787 – तुर्की ने रूस के खिलाफ युद्ध की घोषणा की। 1793 – पेरिस में लूव्र संग्रहालय का उद्घाटन हुआ। 200 साल पुराने पश्चिमी कला इतिहास इस संग्रहालय में दर्ज है और इनमें से एक है मोनालीसा। 1808 -  कार्ल वॉन डोबेलेन के अंतर्गत सैनिकों ने काहोजोकी में एक रूसी हमले को हराया। 1809 – इक्वाडोर ने स्पेन से स्वतंत्रता हासिल की। 1821 – मिसौरी अमेरिका का 24वां राज्य बना। 1822 – सीरिया में विनाशकारी भूकंप से 20,000 लोगों की मौत हुई। 1826 -  पहली काउस्ज़ रेगुटा यूनाइटेड किंगडम में आइल ऑफ विट पर आयोजित की गयी। 1829 - फिनसेराहॉर्न की पहली चढ़ाई की गयी, बर्नानी आल्प्स की सर्वोच्च शिखर है। 1831 – कैरेबियाई द्वीप समूह बारबाडोस में चक्रवाती तूफान से डेढ़ हजार लोगों की मौत हुई। 1846 – अमेरिकी कांग्रेस ने स्मिथसोनिया इंस्टीट्यूट स्थापित करने के विधेयक को मंजूरी दी। 1877 - बिग होल नदी: कर्नल जॉन गिबोन नेज-पेर्स ने इंडियनों की हत्या करवाई। 1920 - प्रथम विश्व युद्ध में पराजित होने के बाद उसमानी शासन ने सीवरेस समझौते पर हस्ताक्षर किये। 1926 – इटली और स्पेन के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। 1939 - डिर्क जन डे गेयर नीदरलैंड के प्रधान मंत्री बने। 1945 - द्वितीय विश्व युद्ध में जापान की पराजय के बाद कोरिया का उत्तरी भाग रुस की लाल सेना के अधिकार में चला गया और कुछ दिनों बाद कोरिया का दक्षिणी भाग अमरीका के अधिकार में चला गया। 1962 – बच्‍चों के च‍हेता स्‍पाइडरमैन कॉमिक बुक अमेजिंग फैंटेसी में नजर आया था। 1966 – अमरीका के अंतरिक्ष अधिकारियों ने केप केनेडी से अंतरिक्ष में रॉकेट उतारने की लिए उपयुक्त स्थान का चित्र लेने हेतु पहला अंतरिक्ष यान भेजा। जो 29 अक्तूबर को चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त होकर तबाह हो गया। 1979 – उपग्रह एसएलवी-3 का प्रक्षेपण किया गया। 1990 – पंद्रह महीने की यात्रा के बाद मगैलन अंतरिक्ष यान शुक्र पर पहुंचा था। शुक्र पर उतरने से पहले कुछ देर तक के लिए उसका संपर्क कैलिफ़ोर्निया स्थित संचालन केंद्र से टूट गया था। 1999 - चेचेन्या में इस्लामिक भूरा ने दागिस्तान को स्वतंत्र घोषित किया। 2000 - श्रीलंका में सिरीमावो भंडारनायके का प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा, आर. विक्रमानयके श्रीलंका के नये प्रधानमंत्री नियुक्त, जिनेवा में आत्मनिर्णय के अधिकार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन। 2001 - अमेरिकी प्रक्षेपास्त्र प्रणाली को रूस का सशर्त समर्थन। 2003 – यूरी मालेनचेंको पहले ऐसे व्यक्ति बने जिन्होंने अंतरिक्ष में शादी रचाई थी। 2003 – इंग्लैंड में अब तक का सबसे अधिक तापमान 38.5 डिग्री सेलसियस रिकॉर्ड किया गया। 2004 - संयुक्त राष्ट्र और सूडान के बीच दारफुर कार्ययोजना पर हस्ताक्षर। 2006 - तमिल विद्रोहियों पर फ़ौजी कार्रवाई में श्रीलंका में 50 नागरिक मारे गये। 2008 - अमरनाथ ज़मीन सुलझाने के लिए सर्वदलीय प्रतिनीधिमण्डल की बैठक में उच्च न्यायालय के वर्ष 2005 के आदेश को लागू करने पर सहमति बनी।  2008 - चेन्नई के एक लैब में एंटी एड्स बैक्सीन का सफल परीक्षण किया गया। 2019 - रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह ने एकल पुरुष सरकारी कर्मचारियों के लिए चाइल्‍ड केयर लीव (सीसीएल) के लाभों में विस्तार और रक्षा बलों की महिला अधिकारियों के मामले में सीसीएल प्रावधानों में कुछ और छूट देने को स्‍वीकृति दी । 2019 - उत्तर प्रदेश के "वृक्षारोपण महाकुंभ" अभियान ने 22 करोड़ से अधिक पौधे लगाने के बाद विश्व रिकॉर्ड बनाया। 2020 - इंडोनेशिया के माउंट सिनाबुंग ज्वालामुखी में पुनः विस्फोट हुआ। 2020 - भारतीय रेलवे का स्वच्छता सप्ताह ( 10 से 15 अगस्त 2020 के बीच ) प्रारम्भ हुआ। 2021 - लोकसभा ने 127 वें संविधान संशोधन विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से पारित किया। 2022 - एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 8वीं बार CM के रूप में शपथ ली। तेजस्‍वी बने डिप्‍टी सीएम। 2022 - इसरो (ISRO) ने श्रीहरिकोटा से क्रू एस्केप सिस्टम (CES) के लो एल्टीट्यूड एस्केप मोटर का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। 2022 - प्रधानमंत्री ने पानीपत में 2जी इथेनॉल संयंत्र राष्ट्र को समर्पित किया। 2023 - PM मोदी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करने पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी लोकसभा से सस्पेंड हुए। 2023 - लोकसभा में विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव गिरा। 2023 - ऋषिकेश - हल्द्वानी में 31 सेंटीमीटर बारिश ने ली 9 लोगों की जान, 200 को रेस्क्यू किया गया। 2024 - जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में 2 जवान शहीद हुए।   10 अगस्त को जन्मे व्यक्ति   1860 - विष्णुनारायण भातखंडे - 'हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत' के विद्वान। 1894 - वी. वी. गिरि भारत के चौथे राष्ट्रपति। 1916 - प्रेम अदीब - भारतीय सिनेमा के अभिनेता थे। 1931 - किरीट जोशी एक भारतीय दार्शनिक थे व श्री अरबिंदो और मीरा अल्फसा के शिष्य।  1938 - फतेह सिंह राठौर एक भारतीय बाघ संरक्षणवादी थे।  1963 – चंबल के बीहड़ो से सियासी गलियारों तक पहूंचने वाली फूलन देवी। 1975 - हेमन्त सोरेन भारतीय राज्य झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके । 1986 - सौरव घोषाल - भारत के सुपरस्टार कहलाते (अर्जुन अवॉर्डी) हैं।   10 अगस्त को हुए निधन   1977 - श्यामलाल गुप्त पार्षद', झण्डा गीत के रचयिता , भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक सेनानी, पत्रकार, समाजसेवी एवं अध्यापक थे। । 1980 - सरस्वती देवी - भारत की पहली महिला संगीतकार थीं। 1986 - अरुण कुमार श्रीधर वैद्य - भारतीय सेना के 13वें थल सेनाध्यक्ष थे। 1995 -हरिशंकर परसाई, प्रसिद्ध लेखक और व्यंग्यकार । 1999 - पद्म भूषण आचार्य बलदेव उपाध्याय, भारतीय संस्कृत विद्वान। 2015 -  सुनील दास भारतीय अभिव्यंजनावादी चित्रकार थे। 2018 - अनंत बजाज एक भारतीय बिजनेस मैग्नेट और बजाज इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक थे। 2019 - प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी दयानिधि नायक का निधन हो गया। 2021 - ‘सुडोकू के गॉडफादर’ के रूप में प्रसिद्ध जापान के ‘माकी काजी’ का 69 वर्ष की आयु में निधन हुआ। 2021 - बालाजी ताम्बे - भारत के प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य तथा आध्यात्मिक गुरु थे। 2022 - अमेरिकी सेलिस्‍ट अब्दुल वाडुड (75) का निधन हुआ। 2022 - पुर्तगाली फुटबॉल खिलाड़ी फर्नांडो चलाना (63) का निधन हुआ। 2024 - भारत के पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह (93) का निधन हुआ। 2024 - रूसी एथलीट गैलिना ज़ायबिना (93) का निधन हुआ।   10 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   मेला श्री गोगा जी मेड़ी प्रारम्भ। श्री वी. वी. गिरि जयन्ती। श्री हेमन्त सोरेन जन्म दिवस। डेंगू निरोधक (रोकथाम) दिवस। विश्व जैविक ईंधन दिवस। विश्व सिंह / शेर दिवस (World Lion Day)।   कृपया ध्यान दें    यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इंद्रधनुष की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

anjali kumari अगस्त 10, 2026 0
Vedic Almanac

Vedic Almanac: l वैदिक पंचांग l 10 अगस्त 2026, सोमवार

जम्मू के फ्लाईओवर पर छात्रों से भरी मिनीबस पलटने का हादसा

जम्मू फ्लाईओवर पर छात्रों से भरी मिनीबस पलटी, 29 घायल; 3 की हालत गंभीर

Amarnath Yatra

अमरनाथ यात्रा 9 अगस्त से स्थगित, बारिश से क्षतिग्रस्त ट्रैक की होगी मरम्मत

0 Comments

Top week

French Rafale multirole fighter jet during flight as France submits a 114-aircraft proposal to strengthen the Indian Air Force.
राष्ट्रीय

भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?