नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना अपनी मानवरहित युद्ध क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सितंबर के तीसरे सप्ताह में राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जहां देश में विकसित अत्याधुनिक अनमैन्ड सिस्टम और ड्रोन तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में वन-वे अटैक ड्रोन, लंबी दूरी के लोइटरिंग म्यूनिशन, स्वार्म ड्रोन और कार्गो यूएवी समेत कई प्रणालियों को वायुसेना के सामने प्रदर्शित किए जाने की संभावना है। पोखरण का यह कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि फायरिंग रेंज पाकिस्तान सीमा से करीब 270 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में यहां स्वदेशी ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों का परीक्षण और प्रदर्शन भारत की बदलती युद्ध रणनीति और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम संकेत माना जा रहा है। स्वदेशी मानवरहित तकनीक पर वायुसेना का बढ़ता फोकस आधुनिक युद्ध में ड्रोन अब केवल निगरानी तक सीमित नहीं रह गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में हुए संघर्षों ने दिखाया है कि कम लागत वाले ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और स्वार्म तकनीक युद्ध के मैदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भारतीय वायुसेना भी इसी बदलते युद्ध परिदृश्य को देखते हुए लंबी दूरी तक काम करने वाले मानवरहित सिस्टम में रुचि दिखा रही है। कार्यक्रम में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों और स्टार्टअप्स को अपने स्वदेशी उत्पादों की क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। 1,000 किलोमीटर से अधिक रेंज वाले ड्रोन पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, वायुसेना ऐसे ड्रोन सिस्टम को देखने में रुचि रखती है जिनकी ऑपरेशनल रेंज 1,000 किलोमीटर से अधिक हो और जो ऑपरेटर को वास्तविक समय में वीडियो फीड उपलब्ध करा सकें। इसके अलावा 300 किलोमीटर से अधिक रेंज वाले स्वार्म ड्रोन सिस्टम भी चर्चा के केंद्र में हैं। स्वार्म ड्रोन तकनीक में बड़ी संख्या में ड्रोन को समन्वित तरीके से संचालित किया जा सकता है, जिससे निगरानी और सैन्य अभियानों में नई क्षमताएं विकसित हो सकती हैं। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के खिलाफ भी तैयारी आधुनिक युद्ध में जैमर और स्पूफिंग सिस्टम बड़ी चुनौती बन चुके हैं। ऐसे में वायुसेना ऐसे मानवरहित प्लेटफॉर्म की तलाश कर रही है जो इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़े खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम हों। यानी भविष्य की ड्रोन क्षमता सिर्फ हमला करने तक सीमित नहीं होगी। निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और लक्ष्य की पहचान जैसी भूमिकाओं में भी इन प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। लॉजिस्टिक्स में भी काम आएंगे कार्गो यूएवी पोखरण में केवल लड़ाकू ड्रोन ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स के लिए इस्तेमाल होने वाले मानवरहित हवाई वाहनों का भी प्रदर्शन होने की संभावना है। ऐसे यूएवी दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैनिकों तक जरूरी सामान पहुंचाने, मेडिकल सप्लाई ले जाने और जरूरत पड़ने पर घायल सैनिकों को निकालने जैसे मिशनों में उपयोगी साबित हो सकते हैं। पाकिस्तान सीमा के करीब परीक्षण क्यों अहम? पोखरण की भौगोलिक स्थिति इस कार्यक्रम को रणनीतिक रूप से खास बनाती है। पाकिस्तान सीमा के अपेक्षाकृत करीब होने के कारण यहां प्रदर्शित तकनीकों का परीक्षण भारतीय परिस्थितियों और संभावित ऑपरेशनल जरूरतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, केवल किसी सिस्टम के प्रदर्शन या परीक्षण को किसी विशेष सैन्य कार्रवाई की तैयारी के रूप में देखना उचित नहीं होगा। यह कार्यक्रम व्यापक रूप से भारतीय वायुसेना की भविष्य की मानवरहित और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को परखने तथा उद्योग से तकनीकी समाधान हासिल करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। भारत के लिए बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमता का संकेत ड्रोन और यूएवी के क्षेत्र में घरेलू कंपनियों और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है। यदि इन प्रणालियों को परीक्षणों के बाद वायुसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप चुना जाता है, तो इससे घरेलू रक्षा उद्योग को भी बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है। पोखरण में होने वाला यह कार्यक्रम इसलिए सिर्फ ड्रोन प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह संकेत देता है कि भारतीय वायुसेना भविष्य के युद्धक्षेत्र में लंबी दूरी, स्वार्म तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और मानवरहित लॉजिस्टिक्स जैसी क्षमताओं को कितनी गंभीरता से देख रही है।
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के सबसे महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों में शामिल Su-30MKI को आने वाले वर्षों में और अधिक आधुनिक तथा स्वदेशी तकनीक से लैस करने की तैयारी तेज हो गई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड अपने नासिक स्थित संयंत्र में Su-30MKI के निर्माण को फिर से गति देने जा रहा है। योजना के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में पहला नया विमान भारतीय वायुसेना को सौंपे जाने की संभावना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नासिक संयंत्र में वर्ष 2029 तक कुल 12 नए Su-30MKI लड़ाकू विमान तैयार किए जाने की योजना है। इन विमानों में इस्तेमाल होने वाले करीब 50 प्रतिशत कलपुर्जे और उपकरण भारत में निर्मित होने की योजना है। इससे Su-30MKI कार्यक्रम में घरेलू रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। 12 नए Su-30MKI के लिए करीब 11 हजार करोड़ रुपये का करार भारतीय वायुसेना ने दुर्घटनाओं में खोए 12 Su-30MKI विमानों की भरपाई के लिए नए विमान हासिल करने का फैसला किया था। इसके लिए दिसंबर 2024 में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ करीब 11,000 करोड़ रुपये का करार किया गया। इस समझौते के तहत नासिक संयंत्र में 12 नए Su-30MKI तैयार किए जाने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन विमानों में लगाए जाने वाले करीब आधे कलपुर्जों का निर्माण भारत में किया जाएगा। पहले विमान की आपूर्ति वर्ष 2027-28 में होने की संभावना है, जबकि 12 विमानों की पूरी खेप वर्ष 2029 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। पुराने Su-30MKI बेड़े का भी होगा बड़ा आधुनिकीकरण HAL की योजना सिर्फ नए लड़ाकू विमान बनाने तक सीमित नहीं है। भारतीय वायुसेना के मौजूदा Su-30MKI बेड़े को भी बड़े स्तर पर उन्नत करने की तैयारी है। इस आधुनिकीकरण कार्यक्रम पर करीब 60,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कार्यक्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ की भूमिका भी होगी। इसके अलावा भारतीय निजी कंपनियों से भी कई उपकरण और प्रणालियां हासिल की जाएंगी। इस अपग्रेड कार्यक्रम का उद्देश्य Su-30MKI की निगरानी, लक्ष्य पहचान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और हथियार प्रणाली से जुड़ी क्षमताओं को आधुनिक बनाना है। दो चरणों में होगा अपग्रेडेशन Su-30MKI के आधुनिकीकरण का काम दो प्रमुख चरणों में किए जाने की योजना है। पहले चरण में विमानों में आधुनिक एवियोनिक्स और नए रडार लगाए जाएंगे। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली को भी मजबूत किया जाएगा। नई प्रणाली विमान की ओर आने वाले खतरों की पहचान करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें बाधित करने में मदद करेगी। विमानों में अत्याधुनिक इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक प्रणाली भी लगाए जाने की योजना है। इससे विमान बिना पारंपरिक रडार पर पूरी तरह निर्भर हुए हवाई लक्ष्यों की पहचान और निगरानी करने में सक्षम होगा। दूसरे चरण में फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम समेत अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों को आधुनिक बनाया जाएगा। इससे पुराने हो रहे Su-30MKI विमानों की परिचालन क्षमता और सेवा अवधि को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। डीआरडीओ और निजी क्षेत्र की भी होगी भूमिका इस आधुनिकीकरण कार्यक्रम में स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने पर विशेष जोर रहेगा। डीआरडीओ के साथ-साथ भारतीय निजी कंपनियों को भी उपकरण और प्रणालियों की आपूर्ति में शामिल किए जाने की योजना है। इससे न केवल Su-30MKI को आधुनिक बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में घरेलू कंपनियों की भूमिका भी बढ़ेगी। लंबे समय में इसका असर देश की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला और आत्मनिर्भरता पर पड़ सकता है। Su-30MKI की क्या है खासियत? Su-30MKI एक भारी और लंबी दूरी तक प्रभावी ढंग से काम करने वाला बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है। इसका अधिकतम टेकऑफ वजन करीब 38,800 किलोग्राम बताया जाता है। विमान में लगभग 9,640 किलोग्राम ईंधन और करीब 8,000 किलोग्राम तक हथियार ले जाने की क्षमता बताई जाती है। इसकी भारी हथियार क्षमता के कारण इसे विभिन्न प्रकार के हवाई और जमीनी अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। यह ब्रह्मोस जैसी भारी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को ले जाने में भी सक्षम है। भारतीय वायुसेना के बेड़े में Su-30MKI की संख्या और भूमिका को देखते हुए इसका आधुनिकीकरण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम Su-30MKI का नया निर्माण और पुराने बेड़े का व्यापक आधुनिकीकरण भारत की रक्षा उत्पादन नीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। नए विमानों में 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल की योजना और अपग्रेड कार्यक्रम में भारतीय कंपनियों की भागीदारी से घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आने वाले वर्षों में यदि स्वदेशी रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, एवियोनिक्स और फ्लाइट कंट्रोल तकनीक को सफलतापूर्वक Su-30MKI में शामिल किया जाता है, तो यह विमान भारतीय वायुसेना के लिए और अधिक सक्षम प्लेटफॉर्म बन सकता है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि नासिक संयंत्र से पहला नया Su-30MKI निर्धारित समय के अनुसार कब भारतीय वायुसेना को मिलता है और आधुनिकीकरण कार्यक्रम को किस गति से आगे बढ़ाया जाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय वायुसेना की AFCAT 2/2026 परीक्षा आज, 8 अगस्त 2026 को आयोजित की जा रही है। इस भर्ती अभियान के जरिए फ्लाइंग ब्रांच और ग्राउंड ड्यूटी (टेक्निकल एवं नॉन-टेक्निकल) ब्रांच में कुल 379 पदों पर अधिकारियों की भर्ती की जाएगी। परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड पहले ही जारी किए जा चुके हैं। 379 पदों पर होगी भर्ती AFCAT 02/2026 के तहत भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ब्रांच के साथ ग्राउंड ड्यूटी की टेक्निकल और नॉन-टेक्निकल शाखाओं में भर्ती होगी। चयनित उम्मीदवारों को जुलाई 2027 से शुरू होने वाले पाठ्यक्रमों के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह भर्ती पुरुष और महिला दोनों उम्मीदवारों के लिए है। इसके अलावा अधिसूचना में NCC स्पेशल एंट्री और GATE स्कोर एंट्री का भी प्रावधान है। सुबह 8 बजे से रिपोर्टिंग भारतीय वायुसेना के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार उम्मीदवारों को सुबह 8 बजे रिपोर्ट करना है। परीक्षा केंद्र का गेट सुबह 9:30 बजे बंद हो जाएगा। इसके बाद एडमिट कार्ड और पहचान पत्र का सत्यापन, बायोमेट्रिक और फोटो कैप्चर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। AFCAT परीक्षा सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक आयोजित होगी। 100 सवाल, 300 अंकों की परीक्षा AFCAT की लिखित परीक्षा में कुल 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्न होंगे। परीक्षा के लिए 2 घंटे का समय दिया जाएगा और अधिकतम 300 अंक होंगे। प्रश्नपत्र में सामान्य जागरूकता, अंग्रेजी भाषा, संख्यात्मक क्षमता, रीजनिंग और मिलिट्री एप्टीट्यूड से सवाल पूछे जाएंगे। परीक्षा अंग्रेजी भाषा में होगी। एडमिट कार्ड और पहचान पत्र जरूरी परीक्षा केंद्र पर उम्मीदवारों को प्रिंटेड एडमिट कार्ड और वैध फोटो पहचान पत्र लेकर पहुंचना होगा। एडमिट कार्ड में नाम, जन्मतिथि और परीक्षा केंद्र समेत सभी विवरण जांचने की सलाह दी गई है। लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को आगे एयर फोर्स सिलेक्शन बोर्ड (AFSB) की चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा। अंतिम चयन निर्धारित पात्रता, चयन प्रक्रिया और मेरिट के आधार पर किया जाएगा।
मुंबई, एजेंसियां। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के महत्वपूर्ण अभियान पर आधारित वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ आज, 7 अगस्त 2026 से Netflix पर स्ट्रीम हो रही है। यह सीरीज 1999 के कारगिल युद्ध की पृष्ठभूमि में भारतीय वायुसेना के उस अभियान को सामने लाती है, जिसने युद्ध के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। 1999 के कारगिल युद्ध पर आधारित कहानी ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की कहानी 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के अभियान पर केंद्रित है। ऑपरेशन सफेद सागर भारतीय वायुसेना की ओर से कारगिल संघर्ष के दौरान चलाया गया महत्वपूर्ण हवाई अभियान था। सीरीज के जरिए युद्ध के दौरान सामने आई चुनौतियों, रणनीति और वायुसेना के जवानों के साहस को नाटकीय अंदाज में दिखाने की कोशिश की गई है। आज से Netflix पर उपलब्ध सीरीज का डिजिटल प्रीमियर 7 अगस्त 2026 को Netflix पर हुआ है। यानी दर्शक आज से ही इसे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं। Netflix की ओर से भी 7 अगस्त की स्ट्रीमिंग को लेकर प्रचार किया गया है। कारगिल युद्ध और भारतीय सशस्त्र बलों की वीरगाथाओं में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए यह सीरीज खास आकर्षण बन सकती है। जिमी शेरगिल समेत नजर आएंगे कई कलाकार सीरीज की चर्चा इसके विषय के साथ-साथ कलाकारों को लेकर भी है। इसमें जिमी शेरगिल और सिद्धार्थ जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आते हैं। कहानी में वायुसेना के अधिकारियों और जवानों के नजरिए से युद्ध की परिस्थितियों को दिखाने पर जोर दिया गया है। मेकर्स ने युद्ध के दौरान होने वाले हवाई अभियानों, रणनीतिक फैसलों और जवानों की चुनौतियों को मनोरंजक कहानी के साथ जोड़ने की कोशिश की है। देशभक्ति और युद्ध ड्रामा का मेल ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ केवल युद्ध के दृश्यों तक सीमित नहीं है। इसका फोकस उन लोगों की भूमिका और संघर्ष पर भी है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा के लिए काम किया। कारगिल युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि इसे सामान्य युद्ध-आधारित मनोरंजन से अलग बनाती है। सीरीज में सैन्य रणनीति, साहस, भावनात्मक संघर्ष और देशभक्ति को कहानी के प्रमुख हिस्से के तौर पर पेश किया गया है। दर्शकों के लिए आज से नई OTT पेशकश अगस्त के पहले सप्ताह में Netflix पर आने वाली प्रमुख रिलीज में ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को शामिल किया गया है। 7 अगस्त को इसके साथ कई अन्य फिल्में और सीरीज भी अलग-अलग OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई हैं। ऐसे में इस सप्ताहांत युद्ध, इतिहास और देशभक्ति से जुड़ा कंटेंट देखने वाले दर्शकों के लिए ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ प्रमुख विकल्पों में शामिल हो सकती है।
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना (IAF) की ताकत बढ़ाने वाली 114 राफेल मल्टीरोल फाइटर जेट की बहुचर्चित मेगा डील निर्णायक चरण में पहुंच गई है। फ्रांस ने भारत को इस सौदे के लिए अपना विस्तृत तकनीकी और व्यावसायिक प्रस्ताव (Technical & Commercial Proposal) सौंप दिया है। प्रस्ताव में बड़ी संख्या में राफेल विमानों का निर्माण भारत में करने की योजना भी शामिल है, जिससे रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारत द्वारा भेजे गए लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) के जवाब में फ्रांस ने अपनी पेशकश भेज दी है। अब रक्षा मंत्रालय का खरीद विभाग और भारतीय वायुसेना इस प्रस्ताव का विस्तृत तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन कर रहे हैं। 114 में से 94 राफेल भारत में बनेंगे प्रस्ताव के अनुसार, 114 में से 94 राफेल लड़ाकू विमान भारत में ही निर्मित किए जाएंगे। इसके लिए फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनी दसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) अपने साझेदार MBDA, Safran और Thales के साथ भारतीय कंपनियों के सहयोग से उत्पादन करेगी। इससे भारत में अत्याधुनिक रक्षा तकनीक, विनिर्माण क्षमता और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है। स्वदेशी हथियारों से लैस होंगे राफेल भारत फ्रांस के उस प्रस्ताव का भी अध्ययन कर रहा है, जिसमें राफेल विमानों में स्वदेशी हथियारों और उपकरणों को शामिल करने की बात कही गई है। इन विमानों में भारत की विकसित 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल सहित अन्य स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के एकीकरण पर भी विचार किया जा रहा है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को नई तकनीकी क्षमता मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी। भारतीय उद्योग को मिल सकता है बड़ा फायदा इस मेगा डील में स्वदेशीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। अनुमान है कि इस परियोजना से भारतीय उद्योग को करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का अवसर मिल सकता है। टाटा समूह, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) सहित कई भारतीय रक्षा कंपनियों को उत्पादन, कंपोनेंट निर्माण और सप्लाई चेन में भागीदारी मिलने की संभावना है। सरकार-से-सरकार (G2G) मॉडल पर होगी खरीद भारत ने इसी वर्ष मई में फ्रांस को सरकार-से-सरकार (Government-to-Government) मॉडल के तहत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए आधिकारिक अनुरोध भेजा था। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना के लिए राफेल विमान का चयन पहली बार वर्ष 2012 में वैश्विक प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के बाद किया गया था। यदि यह नया समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण और देश की रक्षा तैयारियों के लिए सबसे बड़े सौदों में से एक होगा।
नई दिल्ली: पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल (रिटायर्ड) अनिल चौहान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 10 मई 2025 की घटनाओं का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने जिस तेजी से भारत से सीजफायर की गुहार लगाई, वह उसकी सैन्य स्थिति के तेजी से कमजोर होने का संकेत था। उनके अनुसार, भारतीय सेना ने तब तक अपने सैन्य अभियान का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं किया था, लेकिन पाकिस्तान बातचीत के लिए मजबूर हो गया। द प्रिंट के एक कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल चौहान ने कहा कि 9 मई तक पाकिस्तान की ओर से भारत को 48 घंटे में सबक सिखाने जैसे दावे किए जा रहे थे। लेकिन 10 मई की सुबह हालात पूरी तरह बदल गए और पाकिस्तान ने भारत से संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई। "हमारे प्लान का आधा भी पूरा नहीं हुआ था" जनरल अनिल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से सीजफायर का प्रस्ताव उनके लिए भी अप्रत्याशित था। उन्होंने कहा, "10 मई की सबसे बड़ी हैरानी यह थी कि पाकिस्तान ने खुद फोन कर बातचीत की इच्छा जताई। उस समय तक हमने अपने सैन्य अभियान का आधा हिस्सा भी पूरा नहीं किया था।" उनके मुताबिक, पाकिस्तान ने लगभग आठ घंटे के भीतर ही बातचीत का रास्ता चुन लिया, जबकि भारतीय सेना अपने अगले चरण की कार्रवाई की तैयारी कर चुकी थी। भारत ने तुरंत सीजफायर क्यों नहीं माना? पूर्व CDS के अनुसार, भारत चाहता था कि सीजफायर से पहले उसके सभी रणनीतिक सैन्य उद्देश्य पूरे हो जाएं। भारतीय सशस्त्र बलों की योजना थी कि पाकिस्तान के ऐसे सभी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जाए, जहां से भविष्य में भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना हो। इसलिए भारत ने पाकिस्तान के प्रस्ताव के बावजूद कुछ समय तक सैन्य अभियान जारी रखा। पाकिस्तान क्यों हुआ मजबूर? जनरल चौहान ने बताया कि 10 मई की सुबह भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के सरगोधा और नूर खान एयरबेस समेत कई महत्वपूर्ण एयरबेस पर सटीक हमले किए। इन हमलों के कारण: पाकिस्तान के कई एयरबेस गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। एयरस्ट्रिप प्रभावित होने से लड़ाकू विमानों का संचालन मुश्किल हो गया। पाकिस्तानी वायुसेना की परिचालन क्षमता पर बड़ा असर पड़ा। पाकिस्तान को यह एहसास हो गया कि यदि भारतीय कार्रवाई जारी रही तो उसकी सैन्य स्थिति और कमजोर हो जाएगी। जनरल चौहान के अनुसार, पाकिस्तान की सेना को यह भ्रम था कि उसने रातभर भारत को भारी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन भारतीय वायुसेना की कार्रवाई ने पूरे समीकरण बदल दिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को लगा कि अब बातचीत ही सबसे बेहतर विकल्प है, क्योंकि सैन्य स्थिति उसके नियंत्रण से बाहर जाती दिख रही थी। डीजीएमओ हॉटलाइन के जरिए हुआ संपर्क पूर्व CDS ने बताया कि पाकिस्तान ने डीजीएमओ (Director General of Military Operations) हॉटलाइन के माध्यम से भारत से संपर्क किया। उनके अनुसार, जब यह बातचीत शुरू हुई, तब भी भारतीय सैन्य कार्रवाई पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी और भारतीय सेना अपने अभियान पर आगे बढ़ रही थी। ऑपरेशन सिंदूर क्यों शुरू किया गया? भारत ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के जवाब में 6-7 मई 2025 की रात ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस आतंकी हमले में: 26 लोगों की हत्या की गई थी। मृतकों में 25 पर्यटक शामिल थे। आतंकियों ने कथित तौर पर धर्म पूछकर लोगों को निशाना बनाया। जांच में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) की भूमिका सामने आई। इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए। जब पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, तब भारत ने जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ाया। पूर्व CDS के अनुसार, इसी दौरान पाकिस्तान की वायुसेना को भारी दबाव का सामना करना पड़ा और अंततः उसने सीजफायर की पहल की।
भारतीय वायुसेना का एक विशेष दल बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘एक्स पिच ब्लैक 2026’ में हिस्सा लेने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन से रवाना हुआ यह दल अब ऑस्ट्रेलिया के डार्विन स्थित रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (RAAF) बेस पर आयोजित अभ्यास में भाग ले रहा है। यह सैन्य अभ्यास 7 अगस्त तक चलेगा, जिसमें 19 देशों की वायु सेनाएं शामिल हैं। राफेल समेत कई आधुनिक विमान दिखाएंगे दम इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना अपने अत्याधुनिक लड़ाकू और रणनीतिक विमानों के साथ हिस्सा ले रही है। इनमें शामिल हैं: राफेल लड़ाकू विमान – आधुनिक हथियारों और उन्नत तकनीक से लैस भारत के प्रमुख फाइटर जेट। सी-17 ग्लोबमास्टर-III – भारी सैन्य उपकरण और सैनिकों के रणनीतिक परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाला विमान। आईएल-78 एयर टैंकर – हवा में उड़ान के दौरान लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने की क्षमता वाला विशेष विमान। इनके साथ भारतीय दल में अनुभवी पायलट, इंजीनियर, तकनीशियन और सैन्य रणनीतिक विशेषज्ञ भी शामिल हैं। इंडो-पैसिफिक में बढ़ेगा रक्षा सहयोग ‘एक्स पिच ब्लैक’ दुनिया के सबसे बड़े और जटिल बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यासों में गिना जाता है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना, संयुक्त सैन्य अभियानों का अभ्यास करना और आधुनिक युद्ध तकनीकों का आदान-प्रदान करना है। साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है। कलाईकुंडा एयरबेस की अहम भूमिका इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में पश्चिम बंगाल का कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारतीय दल इसी सामरिक एयरबेस से उड़ान भरकर ऑस्ट्रेलिया पहुंचा है। कलाईकुंडा भारतीय वायुसेना के प्रमुख रणनीतिक ठिकानों में शामिल है और अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों के संचालन के लिए जाना जाता है। चौथी बार ‘पिच ब्लैक’ में भारत की भागीदारी भारतीय वायुसेना इससे पहले 2018, 2022 और 2024 में भी ‘एक्स पिच ब्लैक’ युद्धाभ्यास का हिस्सा रह चुकी है। वर्ष 2026 में लगातार चौथी बार इस अभ्यास में शामिल होकर भारत अपनी बढ़ती सैन्य क्षमता, वैश्विक साझेदारी और परिचालन दक्षता का प्रदर्शन कर रहा है। भारतीय वायुसेना की यह भागीदारी न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सैन्य ताकत को प्रदर्शित करेगी, बल्कि मित्र देशों के साथ सामरिक सहयोग को भी नई मजबूती देगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय वायुसेना ने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए ऑस्ट्रेलिया में शुरू होने वाले बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यास 'एक्सरसाइज पिच ब्लैक 2026' में हिस्सा लेने के लिए अपना दल भेज दिया है। भारतीय दल में राफेल लड़ाकू विमान, C-17 ग्लोबमास्टर III रणनीतिक परिवहन विमान और 120 से ज्यादा वायु योद्धा शामिल हैं। पहली बार राफेल की भागीदारी 'पिच ब्लैक 2026' में भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमानों की पहली भागीदारी खास आकर्षण का केंद्र है। यह अभ्यास भारत की लंबी दूरी की हवाई संचालन क्षमता और आधुनिक युद्धक तकनीक को प्रदर्शित करने का अवसर देगा। 20 जुलाई से शुरू होगा बड़ा हवाई अभ्यास ऑस्ट्रेलिया की रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स द्वारा आयोजित यह अभ्यास 20 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक चलेगा। इसमें भारत समेत करीब 20 देशों की वायु सेनाएं हिस्सा ले रही हैं। अभ्यास का आयोजन ऑस्ट्रेलिया के डार्विन, टिंडल और एम्बरली एयर बेस पर किया जाएगा। क्या है एक्सरसाइज पिच ब्लैक? 'पिच ब्लैक' दुनिया के प्रमुख बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यासों में से एक है। इसमें भाग लेने वाली वायु सेनाएं हवाई युद्ध रणनीति, रात में उड़ान, लंबी दूरी के मिशन और संयुक्त ऑपरेशन का अभ्यास करती हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और युद्धक क्षमता को मजबूत करना है। भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा संबंधों को मिलेगी मजबूती इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना की भागीदारी भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे अभ्यासों से भारतीय पायलटों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के युद्ध अभ्यासों का अनुभव मिलता है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी मजबूत होती है।
भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) में शामिल होने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। अग्निवीर वायु इनटेक 02/2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार 6 जुलाई 2026 से 26 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवार भारतीय वायु सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। क्या होता है Agniveer Vayu Intake? भारतीय वायु सेना में अग्निवीर वायु की भर्ती अलग-अलग बैचों में की जाती है। इन्हीं भर्ती सत्रों को Intake कहा जाता है। यानी Intake 02/2027 वर्ष 2027 के लिए आयोजित होने वाला भर्ती बैच है। महत्वपूर्ण तिथियां कार्यक्रम तिथि आवेदन शुरू 6 जुलाई 2026 आवेदन की अंतिम तिथि 26 जुलाई 2026 शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 26 जुलाई 2026 ऑनलाइन परीक्षा 22–23 सितंबर 2026 एग्जाम सिटी स्लिप परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड परीक्षा से 24–48 घंटे पहले कौन कर सकता है आवेदन? साइंस स्ट्रीम के उम्मीदवारों के लिए: 10+2 में गणित, भौतिकी और अंग्रेजी विषय होना अनिवार्य। कुल कम से कम 50% अंक तथा अंग्रेजी में 50% अंक जरूरी। संबंधित ट्रेड में 3 वर्षीय इंजीनियरिंग डिप्लोमा या 2 वर्षीय वोकेशनल कोर्स करने वाले उम्मीदवार भी पात्र हैं। अन्य स्ट्रीम के उम्मीदवारों के लिए: 10+2 में न्यूनतम 50% कुल अंक और अंग्रेजी में 50% अंक आवश्यक। दो वर्षीय वोकेशनल कोर्स करने वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकते हैं। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 17.5 वर्ष अधिकतम आयु: 22 वर्ष उम्मीदवार का जन्म 1 जुलाई 2005 से 1 जनवरी 2010 के बीच होना चाहिए। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी। कैसे करें ऑनलाइन आवेदन? आवेदन के लिए इन आसान चरणों का पालन करें: भारतीय वायु सेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Agniveer Vayu Intake 02/2027 भर्ती लिंक पर क्लिक करें। नया उम्मीदवार होने पर पहले रजिस्ट्रेशन करें। लॉगिन कर आवेदन फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरें। फोटो, हस्ताक्षर और आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। ऑनलाइन आवेदन शुल्क का भुगतान करें। सभी जानकारी जांचने के बाद फॉर्म सबमिट करें। भविष्य के लिए आवेदन फॉर्म का प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। आवेदन शुल्क सभी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 550 रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त लागू GST भी देना होगा। शुल्क का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, IMPS, मोबाइल वॉलेट या अन्य ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के परिणाम को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। आजसू पार्टी ने परीक्षा परिणाम की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सरकार और आयोग से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि जारी किए गए परिणाम में आयोग के किसी अधिकारी या सदस्य के हस्ताक्षर नहीं हैं, जिससे पूरे चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लंबोदर महतो ने उठाए गंभीर सवाल पूर्व विधायक और आजसू नेता लंबोदर महतो ने रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि जेपीएससी पहले भी कई बार विवादों में रहा है। ऐसे में इस बार बिना किसी सक्षम अधिकारी या आयोग के सदस्य के हस्ताक्षर के परीक्षा परिणाम जारी होना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया अभ्यर्थियों के बीच भ्रम और अविश्वास पैदा करती है। सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब लंबोदर महतो ने कहा कि सरकार और जेपीएससी को जल्द से जल्द यह स्पष्ट करना चाहिए कि बिना हस्ताक्षर के परिणाम कैसे जारी किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की कार्यप्रणाली में लगातार कमियां सामने आ रही हैं, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। आंदोलन की चेतावनी आजसू पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और आयोग जल्द इस मामले पर संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि इस मुद्दे पर पूरे राज्य के अभ्यर्थियों को साथ लेकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। आजसू ने सरकार से मांग की है कि परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और अभ्यर्थियों की सभी शंकाओं का समयबद्ध समाधान किया जाए। पार्टी का कहना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद (Defence Acquisition Council-DAC) की बैठक में करीब ₹52 हजार करोड़ के अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दे दी गई। इन प्रस्तावों को एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) प्रदान किया गया है, जिसके बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की निगरानी, मारक क्षमता और रक्षा तंत्र पहले से अधिक मजबूत होगा। इन हथियारों की खरीद को मिली मंजूरी DAC ने कई अहम रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी है, जिनमें शामिल हैं— आकाश तरंग (AKASH TARANG) एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मैन-पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS) टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन सिस्टम क्या होता है AoN? रक्षा खरीद प्रक्रिया में Acceptance of Necessity (AoN) पहला आधिकारिक चरण होता है। इसका अर्थ है कि सरकार ने संबंधित सैन्य उपकरण की आवश्यकता को मंजूरी दे दी है। इसके बाद टेंडर, तकनीकी मूल्यांकन और खरीद अनुबंध जैसी प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। भारतीय सेना को मिलेगी नई तकनीकी ताकत रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आकाश तरंग प्रणाली दुश्मन के ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम होगी। वहीं MPATGM पैदल सैनिकों को दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने की क्षमता देगा। MRSAM मध्यम दूरी से आने वाले लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और मिसाइल जैसे हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगा। V-SHORADS कम दूरी की हवाई सुरक्षा को मजबूत करेगा, जबकि टैंकों के लिए स्वीकृत एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम एंटी-टैंक मिसाइलों से बेहतर सुरक्षा देगा। इसके अलावा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन कम लागत में अधिक प्रभावी हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। नौसेना के लिए भी कई आधुनिक प्रणालियां मंजूर भारतीय नौसेना के लिए भी कई नई रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी मिली है। इनमें शामिल हैं— मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (MIGM) नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (NSUAS) इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी (LBTF) रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये प्रणालियां समुद्री निगरानी, युद्ध क्षमता और नौसैनिक प्लेटफॉर्म के आधुनिकीकरण को नई मजबूती देंगी। वायुसेना को मिलेगा हाई-एल्टीट्यूड सर्विलांस सिस्टम भारतीय वायुसेना के लिए फिक्स्ड विंग हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (FW-HAPS) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। यह प्रणाली इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस (ISR), दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों में वायुसेना की क्षमता बढ़ाएगी। नई सैन्य नेतृत्व टीम की पहली DAC बैठक यह रक्षा खरीद परिषद की पहली बैठक थी, जिसमें नए सैन्य नेतृत्व ने भाग लिया। बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणी, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और हाल ही में पदभार संभालने वाले थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ मौजूद रहे। रक्षा बजट में पहले ही हुआ है बड़ा इजाफा केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक है। इसमें ₹2.19 लाख करोड़ पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिनका उपयोग लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, पनडुब्बियां, मिसाइल, तोप, स्मार्ट हथियार और विभिन्न मानव रहित प्रणालियों की खरीद पर किया जाएगा.
India Operation Amistad Venezuela: वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने बड़ा मानवीय राहत अभियान शुरू किया है। ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के तहत भारतीय वायुसेना के दो C-17 विमान 35 टन से अधिक राहत सामग्री, दवाइयां, मेडिकल उपकरण और सेना की विशेष मेडिकल टीम लेकर वेनेजुएला के लिए रवाना हुए हैं। भारत ने शुरू किया ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के बाद भारत ने त्वरित मानवीय सहायता मिशन शुरू किया है, जिसे ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ नाम दिया गया है। स्पेनिश भाषा में Amistad का अर्थ ‘दोस्ती’ होता है। यह नाम भारत और वेनेजुएला के बीच सहयोग और मानवीय संबंधों को दर्शाता है। C-17 विमानों से भेजी गई राहत सामग्री भारतीय वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर विमान हिंडन एयरबेस से वेनेजुएला के लिए रवाना हुए। इनमें शामिल हैं: 35 टन से अधिक राहत सामग्री दवाइयां और चिकित्सा उपकरण आपातकालीन राहत सामग्री दो BHISHM क्यूब्स (पोर्टेबल मोबाइल अस्पताल) जयशंकर ने दी जानकारी विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक्स पर लिखा: “ऑपरेशन अमिस्ताद जारी है। भारतीय वायुसेना के दो C-17 विमान वेनेजुएला के लिए रवाना हुए हैं। इनमें भूकंप राहत के लिए जरूरी सहायता, भारतीय सेना की फील्ड हॉस्पिटल यूनिट और 35 टन से अधिक राहत सामग्री शामिल है।” क्या हैं BHISHM क्यूब्स? BHISHM (भारत हेल्थ इनिशिएटिव फॉर सहयोग, हित और मैत्री) क्यूब्स भारत की स्वदेशी तकनीक से विकसित पोर्टेबल मोबाइल अस्पताल हैं। इन्हें युद्ध, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं में ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर तेजी से चिकित्सा सहायता पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। मरून कैप में रवाना हुए भारतीय जवान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल यूनिट से 41 सदस्यीय मेडिकल दल वेनेजुएला भेजा गया है। इसमें 9 मेडिकल अधिकारी शामिल हैं। यह टीम मरून बेरेट (Maroon Cap) में रवाना हुई, जो भारतीय सेना की एयरबोर्न और विशेष बलों की पहचान मानी जाती है। वेनेजुएला में तबाही का मंजर बुधवार को वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए। इन्हें देश में एक सदी के सबसे बड़े भूकंपों में गिना जा रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान काराकस और ला ग्वायरा में हुआ, जहां कई इमारतें ढह गईं और हजारों लोग बेघर हो गए। मौत और घायल आंकड़ा संख्या मृतक 235+ घायल 1500+ लापता हजारों आपात स्थिति घोषित वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश में पूर्ण आपात स्थिति घोषित कर दी है। सरकार ने पुनर्निर्माण के लिए शुरुआती तौर पर 20 करोड़ डॉलर के फंड की घोषणा की है। दुनिया भर से मिल रही मदद भारत के अलावा अमेरिका, ब्राजील, अर्जेंटीना, चिली, मैक्सिको और बोलीविया समेत कई देशों ने भी वेनेजुएला को राहत सहायता देने की घोषणा की है।
रांची। NEET UG Re-Exam 2026 को लेकर देशभर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। पिछले पेपर लीक विवाद के बाद आयोजित हो रही दोबारा परीक्षा के लिए प्रश्न पत्रों की ढुलाई वायुसेना के विशेष विमानों के जरिए की जा रही है। रांची, पटना और छत्तीसगढ़ के जगदलपुर समेत कई शहरों में प्रश्न पत्र कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचाए गए। रांची एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट वायुसेना का विशेष विमान रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उतरा। विमान से नीट यूजी के प्रश्न पत्र उतारने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। एयरपोर्ट परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया। विमान से करीब दर्जनभर ट्रॉलियों के माध्यम से प्रश्न पत्रों को कार्गो क्षेत्र तक पहुंचाया गया। इसके बाद डाक विभाग के विशेष वाहनों से इन्हें विभिन्न परीक्षा केंद्रों के लिए रवाना किया गया। प्रत्येक वाहन के साथ पुलिस की तीन-तीन एस्कॉर्ट गाड़ियां सुरक्षा में तैनात थीं। 21 जून को होगी परीक्षा, रांची में 21 परीक्षा केंद्र 21 जून को आयोजित होने वाली NEET UG Re-Exam के लिए रांची जिले में कुल 21 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। प्रशासन ने परीक्षा के दिन सभी केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू करने का निर्णय लिया है, ताकि परीक्षा निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर एयरपोर्ट से लेकर स्ट्रॉन्ग रूम तक सुरक्षा एजेंसियों की पैनी निगरानी रही। किसी भी अनधिकृत व्यक्ति की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगाई गई और प्रश्न पत्रों को सीधे सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम में पहुंचाया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता और सुरक्षा के सभी मानकों का सख्ती से पालन किया गया। पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा पिछले पेपर लीक विवाद के बाद इस बार NEET UG Re-Exam की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व बनाया गया है। प्रश्न पत्रों की ढुलाई से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखना और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करना है।
एयरबेस के भीतर हुआ हादसा, जांच शुरू असम के जोरहाट स्थित भारतीय वायुसेना (IAF) के एयरबेस पर शुक्रवार को एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान एयरबेस के भीतर सुरक्षित लैंडिंग के बाद अचानक आग की चपेट में आ गया, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के तुरंत बाद एयरबेस की आपातकालीन और अग्निशमन टीमों को मौके पर भेजा गया। आग पर काबू पाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। पायलट और क्रू की स्थिति पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार फिलहाल भारतीय वायुसेना की ओर से विमान के प्रकार, हादसे के कारण और पायलट या अन्य क्रू सदस्यों की स्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, विमान रनवे पर उतरने के बाद किसी तकनीकी गड़बड़ी का शिकार हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई। हालांकि दुर्घटना की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वायुसेना ने शुरू की जांच हादसे के बाद भारतीय वायुसेना ने घटना की जांच शुरू कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञ विमान के ब्लैक बॉक्स और अन्य उपकरणों की जांच कर रहे हैं ताकि दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। जोरहाट एयरबेस भारतीय वायुसेना का एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र है और पूर्वोत्तर क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जाता है। अधिकृत जानकारी आने के बाद ही नुकसान और हादसे की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की तलाश के बीच रूस ने एक बार फिर बड़ा रक्षा प्रस्ताव पेश किया है। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने कहा है कि रूस भारत को अत्याधुनिक Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने के साथ-साथ इसके संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग के लिए भी तैयार है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। भारत के लिए फिर खुला Su-57 कार्यक्रम का दरवाजा सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच (SPIEF) के दौरान पुतिन ने कहा कि रूस ने पहले भी भारत को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में साझेदारी का प्रस्ताव दिया था। उनके अनुसार, उस समय भारत ने परियोजना की प्रगति देखने के बाद निर्णय लेने का विकल्प चुना था। पुतिन ने कहा कि रूस ने बाद में इस विमान को अपने दम पर विकसित किया, लेकिन आज भी भारत के साथ संयुक्त उत्पादन, तकनीकी सहयोग और विमान आपूर्ति के लिए तैयार है। Su-57 को बताया दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया कि Sukhoi Su-57 आधुनिक सैन्य विमानन तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है और यह दुनिया के सबसे सक्षम पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में शामिल है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि भारत रुचि दिखाता है तो रूस तकनीक साझा करने और उत्पादन सहयोग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी बातचीत के लिए तैयार रहेगा। भारतीय वायुसेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रस्ताव? भारत अभी तक किसी भी फिफ्थ-जनरेशन स्टेल्थ फाइटर का संचालन नहीं करता। दूसरी ओर, भारत का स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) कार्यक्रम विकास चरण में है और इसके अगले दशक में सेवा में आने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच, क्षेत्रीय स्तर पर वायु शक्ति का संतुलन भी तेजी से बदल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान चीन के Shenyang J-35A स्टेल्थ फाइटर को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भारतीय वायुसेना के लिए अंतरिम समाधान की आवश्यकता पर चर्चा तेज हुई है। Su-57 की प्रमुख क्षमताएं Su-57 रूस का सबसे उन्नत लड़ाकू विमान माना जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं: स्टेल्थ तकनीक आधारित डिजाइन सुपरसोनिक गति पर लंबी दूरी की उड़ान उन्नत रडार और सेंसर प्रणाली हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों प्रकार के मिशन की क्षमता इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और नेटवर्क-केंद्रित संचालन की सुविधा आधुनिक मिसाइल और हथियार प्रणाली के साथ एकीकरण भारत ने 2018 में क्यों छोड़ा था कार्यक्रम? भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) परियोजना का हिस्सा था। हालांकि 2018 में भारत इससे अलग हो गया था। उस समय सामने आए प्रमुख कारणों में शामिल थे: स्टेल्थ क्षमता को लेकर चिंताएं तकनीकी प्रदर्शन पर सवाल विकास लागत और समयसीमा तकनीक हस्तांतरण से जुड़े मुद्दे अब पुतिन का ताजा प्रस्ताव इन पुराने मतभेदों को दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। भारत के सामने क्या विकल्प हैं? भारत के पास फिलहाल तीन प्रमुख रास्ते हैं: स्वदेशी AMCA कार्यक्रम पर पूरी तरह निर्भर रहना। अंतरिम समाधान के रूप में विदेशी फिफ्थ-जनरेशन फाइटर खरीदना। रूस के साथ Su-57 के संयुक्त उत्पादन या तकनीकी सहयोग मॉडल पर विचार करना। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निर्णय में लागत, तकनीक हस्तांतरण, परिचालन जरूरतें और दीर्घकालिक रणनीतिक हित महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। क्या भारत Su-57 खरीदेगा? फिलहाल भारत सरकार या भारतीय वायुसेना की ओर से Su-57 खरीदने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। रूस के नए प्रस्ताव ने इस विषय पर चर्चा को फिर से तेज कर दिया है और आने वाले महीनों में इस पर रणनीतिक स्तर पर विचार-विमर्श बढ़ सकता है।
भारत ने अपनी वायु शक्ति को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए फ्रांस को औपचारिक अनुरोध पत्र (Letter of Request) भेज दिया है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की यह डील भारत के इतिहास के सबसे बड़े सैन्य विमान अधिग्रहण कार्यक्रमों में से एक मानी जा रही है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय के अधिग्रहण विंग ने पिछले सप्ताह फ्रांसीसी सरकार को प्रस्ताव भेजा है। अब अगले दो से तीन महीनों के भीतर फ्रांस की ओर से जवाब मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी होने के बाद अगले एक साल के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। 'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बड़ा बढ़ावा इस परियोजना की सबसे अहम विशेषता यह है कि 114 में से 94 राफेल विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय साझेदार के साथ मिलकर इन विमानों का उत्पादन करेगी। अगर यह योजना तय रूप में लागू होती है, तो यह पहली बार होगा जब राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण फ्रांस के बाहर किया जाएगा। इससे भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र और 'मेक इन इंडिया' अभियान को बड़ा बल मिलने की उम्मीद है। मोदी की फ्रांस यात्रा में हो सकती है अहम चर्चा सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून के मध्य तक फ्रांस का दौरा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान राफेल सौदा दोनों देशों के बीच प्रमुख चर्चा का विषय रहेगा। भारतीय वायु सेना लंबे समय से लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी का सामना कर रही है। ऐसे में उन्नत 4.5 पीढ़ी के राफेल विमानों की बड़ी संख्या में खरीद को वायु सेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 176 तक पहुंच जाएगी राफेल विमानों की संख्या भारतीय वायु सेना और नौसेना पहले ही कुल 62 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं। प्रस्तावित 114 नए विमानों के शामिल होने के बाद देश के पास राफेल विमानों की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने 31 अतिरिक्त राफेल मरीन विमानों में भी रुचि दिखाई है। यदि यह खरीद भी आगे बढ़ती है, तो भविष्य में भारत के पास राफेल विमानों की कुल संख्या 200 के पार पहुंच सकती है। 2028 से शुरू हो सकती है डिलीवरी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नौसेना के लिए राफेल मरीन विमानों की डिलीवरी वर्ष 2028 से शुरू होने की संभावना है। इसके बाद वायु सेना के लिए भी विमानों की आपूर्ति शुरू होगी। अनुमान है कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के लगभग साढ़े तीन साल बाद भारतीय वायु सेना को नए राफेल विमान मिलने शुरू हो जाएंगे। इस बीच, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह फ्रांस के दौरे पर हैं। उनके डसॉल्ट एविएशन की उत्पादन इकाइयों का दौरा करने की भी संभावना है, जहां राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण किया जाता है।
फ्रांसीसी लड़ाकू विमान Dassault Mirage 2000 एक बार फिर वैश्विक सैन्य चर्चाओं के केंद्र में है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के लावन द्वीप स्थित तेल रिफाइनरी पर मिराज-2000-9 फाइटर जेट से हमला किया। हालांकि इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि मिराज-2000 की सटीक हमला क्षमता और गहरी घुसपैठ की ताकत ने इसे दुनिया के सबसे भरोसेमंद मल्टीरोल फाइटर जेट्स में शामिल कर दिया है। ईरान हमले की रिपोर्ट से बढ़ी चर्चा रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल में हुए संघर्ष के दौरान UAE के मिराज-2000-9 विमानों ने ईरान के लावन द्वीप पर स्थित ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया। इसके कुछ घंटों बाद ईरान समर्थित जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आईं। विशेषज्ञों का मानना है कि मिराज-2000-9, मूल मिराज-2000 का सबसे उन्नत एक्सपोर्ट संस्करण है, जिसे खास तौर पर United Arab Emirates के लिए विकसित किया गया था। इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, सटीक टारगेटिंग सिस्टम, लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम शामिल हैं। क्यों इतना खतरनाक माना जाता है मिराज-2000 Dassault Aviation द्वारा विकसित यह चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान कई भूमिकाओं में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह हवाई वर्चस्व, गहरे हमले, टोही मिशन और परमाणु हथियार ले जाने जैसी क्षमताओं के लिए जाना जाता है। मिराज-2000 की सबसे बड़ी ताकत उसकी सटीकता और विश्वसनीयता मानी जाती है। यही वजह है कि कई देशों की वायुसेनाओं ने दशकों तक इस पर भरोसा बनाए रखा है। भारत की परमाणु रणनीति में अहम भूमिका भारतीय वायुसेना के लिए Indian Air Force का मिराज-2000 बेड़ा लंबे समय तक रणनीतिक ताकत का अहम हिस्सा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक भारत ने अपने परमाणु ट्रायड के वायु-आधारित हिस्से में मिराज-2000 विमानों को विशेष भूमिका दी थी। ग्वालियर के महाराजपुर एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात मिराज-2000 विमानों को परमाणु हथियार ले जाने और जवाबी हमले की क्षमता से लैस किया गया था। भारत की “नो फर्स्ट यूज” नीति के तहत यदि देश पर परमाणु हमला होता है, तो यह विमान जवाबी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम माने जाते हैं। कारगिल युद्ध में साबित की ताकत 1999 के Kargil War के दौरान मिराज-2000 ने भारतीय सेना को बड़ी रणनीतिक बढ़त दिलाई थी। पहाड़ी इलाकों में सटीक बमबारी और दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में इसकी भूमिका बेहद अहम रही थी। उसी दौर में भारत ने इन विमानों को परमाणु हमले की क्षमता से लैस करने की प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दिया था। अब राफेल संभाल रहा बड़ी जिम्मेदारी हालांकि समय के साथ मिराज-2000 बेड़ा पुराना हो रहा है। अब Dassault Rafale जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की नई रणनीतिक ताकत बन रहे हैं। माना जाता है कि भविष्य में वायु-आधारित परमाणु हमले की प्राथमिक जिम्मेदारी धीरे-धीरे राफेल बेड़े को सौंपी जा रही है। यूक्रेन भी हुआ मिराज का फैन रूस-यूक्रेन युद्ध में भी मिराज-2000 की क्षमताओं की खूब चर्चा हो रही है। Ukraine को फ्रांस से मिले मिराज-2000-5 विमानों ने रूसी क्रूज मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। सैन्य रिपोर्टों के मुताबिक इन विमानों ने Kh-101 क्रूज मिसाइलों और शाहेद ड्रोन जैसे खतरनाक लक्ष्यों को रोकने में बेहद प्रभावी प्रदर्शन किया है। आधुनिक पश्चिमी हथियारों के साथ इसकी अनुकूलता और तेज इंटरसेप्शन क्षमता इसे आज भी बेहद खतरनाक लड़ाकू विमान बनाती है।
Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना की बहादुरी और देश की आतंकवाद विरोधी नीति की सराहना की है. पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख, मजबूत इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले नेटवर्क के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारत हर आतंकी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है. भारतीय सेना के शौर्य को किया सलाम पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्भुत साहस, सटीक रणनीति और मजबूत समन्वय का परिचय दिया. उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वालों को भारतीय सुरक्षा बलों ने करारा जवाब दिया. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि पूरा देश भारतीय जवानों की वीरता और समर्पण को सलाम करता है. उन्होंने कहा कि इस अभियान ने दुनिया को भारतीय सेना की तैयारी, पेशेवर क्षमता और तीनों सेनाओं के मजबूत तालमेल की ताकत दिखायी. आत्मनिर्भर भारत की ताकत भी दिखी पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती क्षमता को भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य तकनीक, स्वदेशी रक्षा उपकरण और बेहतर समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभायी. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों के बीच बढ़ती एकजुटता और सामरिक क्षमता आज देश की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है. क्यों शुरू किया गया था ऑपरेशन सिंदूर? ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया सैन्य अभियान था. यह ऑपरेशन 7 मई से 10 मई 2025 के बीच पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकवादी ठिकानों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर अंजाम दिया गया था. यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गयी थी. उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक शामिल थे. आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को साफ संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत पूरी मजबूती और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ता रहेगा.
पुणे: Pune Airport पर शुक्रवार देर रात अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब भारतीय वायुसेना के एक लड़ाकू विमान की लैंडिंग के दौरान तकनीकी समस्या आ गई। इस “हार्ड लैंडिंग” के चलते रनवे पूरी तरह ब्लॉक हो गया और एयरपोर्ट पर सभी फ्लाइट ऑपरेशन तत्काल प्रभाव से रोक दिए गए। घटना रात करीब 10:25 बजे की बताई जा रही है। वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक, विमान को उतारते समय अचानक खराबी आई, जिससे सामान्य लैंडिंग संभव नहीं हो सकी और विमान ने कड़ी लैंडिंग की। इस वजह से रनवे पर रुकावट पैदा हो गई और उसे अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। राहत की बात यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में विमान में मौजूद सभी एयरक्रू पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसी के घायल होने या किसी नागरिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने की कोई सूचना नहीं है। एयरपोर्ट और वायुसेना की टीमें तुरंत हरकत में आ गईं और रनवे को साफ करने का काम शुरू कर दिया गया। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के अनुसार, स्थिति को सामान्य करने में करीब 4 से 5 घंटे का समय लग सकता है। इस दौरान कई उड़ानों में देरी हुई, जबकि कुछ फ्लाइट्स को डायवर्ट या रद्द भी करना पड़ा, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उड्डयन राज्य मंत्री Murlidhar Mohol ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि सभी एयरलाइंस को समय रहते सूचित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि वे लगातार एयरपोर्ट डायरेक्टर और वायुसेना अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि जल्द से जल्द सेवाएं बहाल की जा सकें। फिलहाल प्राथमिक जांच में तकनीकी खराबी को इस घटना की वजह माना जा रहा है, लेकिन विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही असली कारण सामने आएगा। इस घटना ने एक बार फिर एयरपोर्ट संचालन में सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों पर ध्यान खींचा है।
Rafale Deal Update: भारत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील में अब एक अहम शर्त जोड़ने जा रहा है-इन विमानों में स्वदेशी मिसाइलों और हथियार प्रणालियों का एकीकरण (integration) अनिवार्य होगा। ICD क्या है और क्यों जरूरी? डील में Interface Control Document (ICD) अनिवार्य किया जाएगा यह एक तकनीकी डॉक्यूमेंट है जो तय करता है: कौन-सा सिस्टम किससे कैसे जुड़ेगा मिसाइल, रडार और अन्य सिस्टम कैसे काम करेंगे इससे भारतीय हथियारों को राफेल में जोड़ना आसान होगा मेगा डील की बड़ी बातें कुल लागत: ₹3.25 लाख करोड़ (लगभग) 114 राफेल जेट खरीदे जाएंगे 18 जेट सीधे फ्रांस से तैयार हालत में 96 जेट भारत में ही बनाए जाएंगे 25% से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल ‘Buy & Make’ मॉडल यह डील Buy and Make कैटेगरी में होगी मतलब: कुछ जेट बाहर से आएंगे बाकी भारत में बनेंगे (Make in India को बढ़ावा) सोर्स कोड पर क्या विवाद? रिपोर्ट्स: फ्रांस की कंपनी Dassault ने सोर्स कोड देने से मना किया सरकार का जवाब: कोई भी देश अपना मालिकाना सॉफ्टवेयर कोड शेयर नहीं करता यह सामान्य प्रैक्टिस है सोर्स कोड कंट्रोल करता है: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर हथियार लॉन्च सिस्टम रडार भारत की रणनीति क्या है? विदेशी निर्भरता कम करने पर जोर फोकस: तेजस Mk1A AMCA (5th Gen Fighter) लंबी दूरी की स्वदेशी मिसाइलें इसका मतलब आसान भाषा में भारत चाहता है कि राफेल सिर्फ खरीदा न जाए, बल्कि उसमें भारतीय हथियार भी आसानी से लगाए जा सकें ताकि भविष्य में अपग्रेड और ऑपरेशन पर पूरा कंट्रोल रहे
भारत की महत्वाकांक्षी राफेल फाइटर जेट डील एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह प्रगति नहीं, बल्कि ठहराव है। 12 फरवरी 2026 को रक्षा मंत्रालय की Defence Acquisition Council (DAC) से मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद थी कि प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ेगी, खासकर तब जब 17 फरवरी को Emmanuel Macron भारत दौरे पर आए। माना जा रहा था कि इस दौरान बड़ा ऐलान हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ-और अब करीब दो महीने बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ी है। इस देरी की सबसे बड़ी वजह तकनीकी और रणनीतिक मतभेद बताए जा रहे हैं, जिसमें रूस की भूमिका अहम बनकर उभरी है। भारत के सामने चुनौती स्पष्ट है-वायुसेना के पास मौजूदा समय में केवल 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि न्यूनतम आवश्यकता 42 की है। इस कमी को पूरा करने के लिए भारत 114 नए Dassault Rafale लड़ाकू विमान खरीदने की योजना पर काम कर रहा है। इससे पहले ही भारतीय वायुसेना के पास राफेल के दो स्क्वाड्रन मौजूद हैं और नौसेना के लिए 26 मरीन राफेल की डील भी हो चुकी है। क्या है डील का पूरा ढांचा? प्रस्तावित डील के तहत 114 विमानों में से 18 सीधे फ्रांस से तैयार हालत (फ्लाइ-अवे) में मिलेंगे, जबकि 96 विमानों का निर्माण भारत में होगा। इसमें लोकल मैन्युफैक्चरिंग और “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा देने के लिए 50–60 प्रतिशत तक स्वदेशी कंपोनेंट शामिल करने की योजना है। इस डील की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो भारत के सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी डील में से एक हो सकती है। कहां फंसा है पेंच? असल विवाद “सोर्स कोड” और हथियार एकीकरण (integration) को लेकर है। भारत चाहता है कि वह राफेल में अपनी स्वदेशी मिसाइलें और हथियार बिना किसी अतिरिक्त अनुमति के इस्तेमाल कर सके। इसमें सबसे अहम है BrahMos missile, जो भारत और Russia की संयुक्त परियोजना है। यहीं से फ्रांस की चिंता शुरू होती है। राफेल के सॉफ्टवेयर और सिस्टम में बदलाव के लिए संवेदनशील सोर्स कोड साझा करना पड़ सकता है। फ्रांस को आशंका है कि इस प्रक्रिया में यह तकनीक अप्रत्यक्ष रूप से रूस तक पहुंच सकती है, जो उसके लिए रणनीतिक जोखिम है। खासकर तब, जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच Russia-Ukraine War के कारण संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं और NATO के सदस्य देश फ्रांस रूस को प्रतिद्वंद्वी मानते हैं। भारत की स्थिति क्या है? भारत का तर्क साफ है-वह अपने हथियारों और मिसाइल सिस्टम को किसी भी प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता चाहता है, ताकि लागत कम रहे और रणनीतिक स्वायत्तता बनी रहे। भारत का यह भी रिकॉर्ड रहा है कि उसने किसी भी रक्षा सौदे में तकनीक लीक नहीं की है। क्या है आगे का रास्ता? यह डील भारत और फ्रांस दोनों के लिए बेहद अहम है। जहां भारत को तत्काल फाइटर जेट्स की जरूरत है, वहीं फ्रांस के लिए यह एक बड़ा रक्षा निर्यात सौदा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि समाधान “विश्वास और संतुलन” के बीच ही निकलेगा-संभवतः फ्रांस सीमित एक्सेस या नियंत्रित तकनीकी साझा करने का विकल्प दे सकता है, जबकि भारत तकनीक की सुरक्षा को लेकर आश्वासन देगा। फिलहाल, राफेल डील सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक साझेदारियों के बीच संतुलन की परीक्षा बन चुकी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।