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IAF to Test Indigenous Drones at Pokhran

पाकिस्तान सीमा के करीब गरजेंगे स्वदेशी ड्रोन और यूएवी, पोखरण में भारतीय वायुसेना का बड़ा परीक्षण; स्वार्म ड्रोन पर खास नजर

surbhi अगस्त 12, 2026 0
Indian Air Force to evaluate indigenous drones, UAVs, loitering munitions and swarm drone systems at Pokhran firing range.
Indian Air Force Pokhran Drone Testing 2026

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना अपनी मानवरहित युद्ध क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सितंबर के तीसरे सप्ताह में राजस्थान के पोखरण फायरिंग रेंज में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जहां देश में विकसित अत्याधुनिक अनमैन्ड सिस्टम और ड्रोन तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस कार्यक्रम में वन-वे अटैक ड्रोन, लंबी दूरी के लोइटरिंग म्यूनिशन, स्वार्म ड्रोन और कार्गो यूएवी समेत कई प्रणालियों को वायुसेना के सामने प्रदर्शित किए जाने की संभावना है।

पोखरण का यह कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि फायरिंग रेंज पाकिस्तान सीमा से करीब 270 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऐसे में यहां स्वदेशी ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों का परीक्षण और प्रदर्शन भारत की बदलती युद्ध रणनीति और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम संकेत माना जा रहा है।

स्वदेशी मानवरहित तकनीक पर वायुसेना का बढ़ता फोकस

आधुनिक युद्ध में ड्रोन अब केवल निगरानी तक सीमित नहीं रह गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में हुए संघर्षों ने दिखाया है कि कम लागत वाले ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और स्वार्म तकनीक युद्ध के मैदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

भारतीय वायुसेना भी इसी बदलते युद्ध परिदृश्य को देखते हुए लंबी दूरी तक काम करने वाले मानवरहित सिस्टम में रुचि दिखा रही है। कार्यक्रम में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों और स्टार्टअप्स को अपने स्वदेशी उत्पादों की क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

1,000 किलोमीटर से अधिक रेंज वाले ड्रोन पर नजर

रिपोर्ट के मुताबिक, वायुसेना ऐसे ड्रोन सिस्टम को देखने में रुचि रखती है जिनकी ऑपरेशनल रेंज 1,000 किलोमीटर से अधिक हो और जो ऑपरेटर को वास्तविक समय में वीडियो फीड उपलब्ध करा सकें।

इसके अलावा 300 किलोमीटर से अधिक रेंज वाले स्वार्म ड्रोन सिस्टम भी चर्चा के केंद्र में हैं। स्वार्म ड्रोन तकनीक में बड़ी संख्या में ड्रोन को समन्वित तरीके से संचालित किया जा सकता है, जिससे निगरानी और सैन्य अभियानों में नई क्षमताएं विकसित हो सकती हैं।

इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के खिलाफ भी तैयारी

आधुनिक युद्ध में जैमर और स्पूफिंग सिस्टम बड़ी चुनौती बन चुके हैं। ऐसे में वायुसेना ऐसे मानवरहित प्लेटफॉर्म की तलाश कर रही है जो इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़े खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम हों।

यानी भविष्य की ड्रोन क्षमता सिर्फ हमला करने तक सीमित नहीं होगी। निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और लक्ष्य की पहचान जैसी भूमिकाओं में भी इन प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ सकता है।

लॉजिस्टिक्स में भी काम आएंगे कार्गो यूएवी

पोखरण में केवल लड़ाकू ड्रोन ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स के लिए इस्तेमाल होने वाले मानवरहित हवाई वाहनों का भी प्रदर्शन होने की संभावना है।

ऐसे यूएवी दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैनिकों तक जरूरी सामान पहुंचाने, मेडिकल सप्लाई ले जाने और जरूरत पड़ने पर घायल सैनिकों को निकालने जैसे मिशनों में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

पाकिस्तान सीमा के करीब परीक्षण क्यों अहम?

पोखरण की भौगोलिक स्थिति इस कार्यक्रम को रणनीतिक रूप से खास बनाती है। पाकिस्तान सीमा के अपेक्षाकृत करीब होने के कारण यहां प्रदर्शित तकनीकों का परीक्षण भारतीय परिस्थितियों और संभावित ऑपरेशनल जरूरतों के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकता है।

हालांकि, केवल किसी सिस्टम के प्रदर्शन या परीक्षण को किसी विशेष सैन्य कार्रवाई की तैयारी के रूप में देखना उचित नहीं होगा। यह कार्यक्रम व्यापक रूप से भारतीय वायुसेना की भविष्य की मानवरहित और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को परखने तथा उद्योग से तकनीकी समाधान हासिल करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

भारत के लिए बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमता का संकेत

ड्रोन और यूएवी के क्षेत्र में घरेलू कंपनियों और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है। यदि इन प्रणालियों को परीक्षणों के बाद वायुसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप चुना जाता है, तो इससे घरेलू रक्षा उद्योग को भी बड़ा प्रोत्साहन मिल सकता है।

पोखरण में होने वाला यह कार्यक्रम इसलिए सिर्फ ड्रोन प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह संकेत देता है कि भारतीय वायुसेना भविष्य के युद्धक्षेत्र में लंबी दूरी, स्वार्म तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और मानवरहित लॉजिस्टिक्स जैसी क्षमताओं को कितनी गंभीरता से देख रही है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

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100% टैरिफ की धमकी के बीच भारत को अमेरिका से राहत के संकेत, नवारो बोले- ट्रंप और मोदी मिलकर सुलझा लेंगे मामला

नई दिल्ली: रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों और भारी टैरिफ के बीच भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर एक अहम बयान सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की आशंका के बीच व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने भरोसा जताया है कि ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे को आपसी बातचीत से सुलझा सकते हैं। नवारो का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से संबंधित विधेयक को अमेरिकी सीनेट से मंजूरी मिल चुकी है। प्रस्तावित कानून में भारत और चीन समेत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। ट्रंप-मोदी के रिश्तों पर नवारो को भरोसा भारत पर संभावित टैरिफ को लेकर पूछे गए सवाल पर पीटर नवारो ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे कामकाजी संबंध हैं और दोनों नेता इस मुद्दे को मिलकर सुलझा लेंगे। नवारो ने इस मामले में खुद हस्तक्षेप करने से भी दूरी बनाई। उनके बयान को भारत-अमेरिका के बीच जारी व्यापारिक तनाव के बावजूद शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर बातचीत की गुंजाइश के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। रूस से तेल खरीदने पर क्यों बढ़ा टैरिफ का खतरा? अमेरिका रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए उसकी ऊर्जा अर्थव्यवस्था को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है। प्रस्तावित प्रतिबंध कानून के तहत रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का रास्ता तैयार किया गया है। भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। ऐसे में प्रस्तावित अमेरिकी कार्रवाई का सीधा असर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है। भारत के लिए चुनौती यह है कि रूस से मिलने वाला कच्चा तेल उसकी ऊर्जा जरूरतों और आयात लागत के लिहाज से महत्वपूर्ण है। वहीं अमेरिका रूस के साथ कारोबार करने वाले देशों पर दबाव बढ़ाकर मॉस्को की ऊर्जा आय को प्रभावित करना चाहता है। 100% टैरिफ की चर्चा, लेकिन अभी लागू नहीं हुआ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी सीनेट से विधेयक पारित होने का मतलब यह नहीं है कि भारत पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। विधेयक को कानून बनने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से भी मंजूरी मिलनी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और अन्य कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसलिए फिलहाल इसे संभावित टैरिफ का खतरा कहना ज्यादा उचित है, न कि लागू हो चुका शुल्क। भारत और चीन समेत कई देश निशाने पर प्रस्तावित व्यवस्था का असर केवल भारत तक सीमित नहीं होगा। रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों में चीन भी शामिल है। यदि अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान आगे बढ़ता है, तो इससे अमेरिका और इन देशों के बीच व्यापारिक संबंधों पर व्यापक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि अमेरिकी प्रशासन प्रस्तावित कानून को किस तरह आगे बढ़ाता है और भारत के साथ बातचीत में क्या विकल्प निकलते हैं। आगे क्या होगा? फिलहाल भारत के सामने तीन महत्वपूर्ण मोर्चे हैं—रूस से ऊर्जा आयात, अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंध और संभावित अतिरिक्त टैरिफ से घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला असर। पीटर नवारो का बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते और टैरिफ को लेकर बातचीत पहले से ही महत्वपूर्ण दौर में है। इसलिए ट्रंप और मोदी के बीच सीधी बातचीत आने वाले समय में इस विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंध कानून अंतिम रूप में किस तरह लागू होगा और भारत पर इसका वास्तविक प्रभाव कितना होगा। इसलिए फिलहाल 100 प्रतिशत टैरिफ को संभावित जोखिम के रूप में देखना चाहिए, न कि अंतिम फैसला।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
Houthi rebels allegedly attack cargo ship Tihama twice in the Red Sea, killing six people including three Pakistani crew members.

लाल सागर में हूती विद्रोहियों का कार्गो जहाज पर डबल अटैक, 3 पाकिस्तानियों समेत 6 की मौत; बचावकर्मी भी मारे गए

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पाकिस्तान सीमा के करीब गरजेंगे स्वदेशी ड्रोन और यूएवी, पोखरण में भारतीय वायुसेना का बड़ा परीक्षण; स्वार्म ड्रोन पर खास नजर

हंगरी के नए राष्ट्रपति एंड्रास बाका

हंगरी की संसद ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट प्रमुख एंड्रास बाका को नया राष्ट्रपति चुना

लेबनान की संसद ने मृत्युदंड खत्म करने का कानून पारित किया
लेबनान ने खत्म की मृत्युदंड की सजा, सभी डेथ सेंटेंस उम्रकैद में बदले; अरब दुनिया में बना पहला देश

बेरूत, एजेंसियां। लेबनान की संसद ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए मृत्युदंड को समाप्त करने का कानून पारित कर दिया। नए कानून के तहत देश में मौजूद सभी मृत्युदंड की सजाओं को उम्रकैद में बदल दिया जाएगा। इस फैसले के साथ लेबनान मृत्युदंड खत्म करने वाला पहला अरब देश बन गया है।   22 साल से नहीं हुई थी कोई फांसी     लेबनान में मृत्युदंड कानूनी रूप से मौजूद था, लेकिन 2004 के बाद से किसी व्यक्ति को फांसी नहीं दी गई थी। यानी देश में करीब 22 वर्षों से मृत्युदंड पर व्यवहारिक रोक थी। हालांकि अदालतें गंभीर अपराधों में मौत की सजा सुनाती रही थीं।   अब संसद के नए कानून ने इस व्यवस्था को स्थायी रूप से बदल दिया है। मौत की सजा पाए लोगों को उम्रकैद और कठोर श्रम की सजा में बदले जाने का प्रावधान किया गया है।   मानवाधिकार संगठनों ने फैसले का स्वागत किया     लेबनान के इस फैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे मानवाधिकारों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है। यूरोपीय संघ ने भी कानून को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।   मृत्युदंड के विरोध में लंबे समय से काम करने वाले संगठनों का कहना है कि इस फैसले से गलत तरीके से दोषी ठहराए गए लोगों के जीवन को बचाने का अवसर रहेगा।   अरब दुनिया में ऐतिहासिक फैसला     लेबनान का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अरब दुनिया के किसी देश ने इससे पहले मृत्युदंड को पूरी तरह समाप्त नहीं किया था। हालांकि मध्य-पूर्व में तुर्की पहले ही मृत्युदंड समाप्त कर चुका है, लेकिन वह अरब देश नहीं है।   लेबनान की संसद का यह फैसला देश की न्याय व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, सरकार के सामने अब जेलों में बढ़ने वाले कैदियों के दबाव और उम्रकैद की सजा को लागू करने की व्यवस्था मजबूत करने की चुनौती भी होगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
कांगो में तेजी से फैलते इबोला प्रकोप की स्थिति

कांगो में इबोला का प्रकोप बेकाबू, मृतकों की संख्या 2,000 के पार; 4,381 मामले सामने आए

चीन के लॉन्ग मार्च-7A रॉकेट का प्रक्षेपण विफल

चीन का अंतरिक्ष मिशन नाकाम, लॉन्च के कुछ सेकंड बाद रॉकेट में आई खराबी; संचार उपग्रह भी हुआ नष्ट

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पूर्व सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद को युद्ध अपराध मामले में मौत की सजा, अदालत ने अनुपस्थिति में सुनाया फैसला

उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव
उत्तर कोरिया ने फिर दागी बैलिस्टिक मिसाइल, अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास से पहले बढ़ा तनाव

सियोल, एजेंसियां। उत्तर कोरिया ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को पूर्वी तट से समुद्र की ओर एक संदिग्ध बैलिस्टिक मिसाइल दागी। दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार, मिसाइल को वॉनसान क्षेत्र से लॉन्च किया गया और यह करीब 700 किलोमीटर तक उड़कर पूर्वी सागर में गिरी। यह इस साल उत्तर कोरिया का 11वां संदिग्ध मिसाइल परीक्षण बताया जा रहा है।   अमेरिका-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास से पहले परीक्षण   उत्तर कोरिया का यह मिसाइल परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया 17 अगस्त से 27 अगस्त तक ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ संयुक्त सैन्य अभ्यास करने की तैयारी में हैं। प्योंगयांग लंबे समय से इन अभ्यासों का विरोध करता रहा है और इन्हें अपने खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी बताता है।   दक्षिण कोरिया और जापान ने जताई नाराजगी   मिसाइल लॉन्च के बाद दक्षिण कोरिया ने आपातकालीन सुरक्षा बैठक बुलाई। राष्ट्रपति कार्यालय ने उत्तर कोरिया से उकसावे वाली गतिविधियां तुरंत रोकने की अपील की। जापान ने भी मिसाइल परीक्षण की कड़ी निंदा करते हुए औपचारिक विरोध दर्ज कराया है।   क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी   विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर कोरिया के लगातार मिसाइल परीक्षणों से कोरियाई प्रायद्वीप और जापान के आसपास सुरक्षा तनाव बढ़ रहा है। दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानते हैं। अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड ने शुरुआती आकलन में कहा कि लॉन्च से अमेरिकी सेना या उसके सहयोगियों के लिए तत्काल खतरा सामने नहीं आया है। हालांकि, लगातार मिसाइल परीक्षणों के कारण आने वाले दिनों में क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
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