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ट्रंप प्रशासन के खिलाफ चार मानवाधिकार संगठनों ने दायर किया मुकदमा, ICC पर प्रतिबंधों को दी चुनौती

anjali kumari अगस्त 12, 2026 0
Trump Administration
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वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका में चार प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। संगठनों ने ट्रंप प्रशासन द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के अधिकारियों और उससे जुड़े लोगों पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती दी है। मुकदमा 11 अगस्त 2026 को दायर किया गया।

 

किन संगठनों ने किया मुकदमा?

 

इस मामले में ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch), ओपन सोसाइटी इंस्टीट्यूट, अमेरिकन फ्रेंड्स सर्विस कमेटी और सेंटर फॉर कॉन्स्टिट्यूशनल राइट्स शामिल हैं। इन संगठनों का कहना है कि ICC के साथ काम करने वाले लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने से मानवाधिकारों के लिए काम करने की उनकी क्षमता प्रभावित हो रही है।

 

ट्रंप के किस फैसले को दी गई चुनौती?

 

मामला ट्रंप प्रशासन के उस कार्यकारी आदेश से जुड़ा है, जिसके तहत ICC के उन अधिकारियों और सहयोगियों पर प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था की गई है जो अमेरिका या इजरायली अधिकारियों से जुड़े मामलों की जांच करते हैं।

 

मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इन प्रतिबंधों के कारण ICC से जुड़े लोगों के साथ सहयोग करना और मानवाधिकार मामलों पर काम करना मुश्किल हो गया है।

 

संगठनों ने संविधान के अधिकारों का दिया हवाला

 

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रतिबंधों का असर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक अधिकारों पर पड़ता है। उनका दावा है कि सरकार की कार्रवाई मानवाधिकार संगठनों और उनके कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय न्याय एवं जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर काम करने से रोकने वाला प्रभाव पैदा कर रही है।

 

ICC को लेकर अमेरिका-ट्रंप प्रशासन का रुख

 

ट्रंप प्रशासन लंबे समय से ICC की उस भूमिका का विरोध करता रहा है जिसमें अदालत अमेरिकी या इजरायली अधिकारियों से जुड़े मामलों की जांच करती है। प्रशासन का तर्क रहा है कि ICC को अमेरिकी नागरिकों पर अधिकार क्षेत्र हासिल नहीं है और उसके कदम अमेरिकी संप्रभुता के लिए खतरा हैं।

 

ताजा मुकदमा ऐसे समय आया है जब ICC और ट्रंप प्रशासन के बीच टकराव को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो रही है। अब अदालत में यह तय होगा कि लगाए गए प्रतिबंध अमेरिकी संविधान के तहत संगठनों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं या नहीं।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Houthi rebels allegedly attack cargo ship Tihama twice in the Red Sea, killing six people including three Pakistani crew members.
लाल सागर में हूती विद्रोहियों का कार्गो जहाज पर डबल अटैक, 3 पाकिस्तानियों समेत 6 की मौत; बचावकर्मी भी मारे गए

नई दिल्ली: लाल सागर के बेहद संवेदनशील बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में एक कमर्शियल कार्गो जहाज पर हुए दोहरे हमले ने समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ा दी है। यमन सरकार के अनुसार, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने खाद्य सामग्री ले जा रहे मालवाहक जहाज ‘तिहामा’ को दो बार निशाना बनाया। हमले में कम से कम छह लोगों की मौत हुई है, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में जहाज के चालक दल के चार सदस्य और बचाव अभियान में शामिल दो कर्मी शामिल हैं। चालक दल के मृतकों में तीन पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक बताए गए हैं। जहाज पर दागी गईं तीन बैलिस्टिक मिसाइलें यमन के परिवहन मंत्रालय के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने तिहामा जहाज पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई और चालक दल के कई सदस्य इसकी चपेट में आ गए। पहले हमले में चार चालक दल सदस्यों की मौत हुई। इनमें तीन पाकिस्तान और एक इंडोनेशिया के नागरिक थे। चार अन्य चालक दल सदस्य और एक बचावकर्मी घायल हुए। हमले के बाद जहाज पर फंसे लोगों को बचाने के लिए खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया था। बचाव अभियान के दौरान फिर हुआ हमला यमन के अधिकारियों के अनुसार, सबसे गंभीर चिंता की बात यह रही कि राहत और बचाव अभियान शुरू होने के दौरान ही जहाज को दोबारा निशाना बनाया गया। दूसरे हमले में बचाव अभियान में शामिल लोगों को भी नुकसान पहुंचा। यमनी तटरक्षक बल ने बाद में पुष्टि की कि मरने वालों में दो बचावकर्मी भी शामिल हैं। इसके बाद मृतकों की कुल संख्या छह हो गई। यह घटनाक्रम लाल सागर में काम कर रहे व्यापारिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा करता है। जाजान की अरामको रिफाइनरी को भी निशाना बनाने का दावा इसी बीच हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जाजान स्थित अरामको रिफाइनरी पर भी ड्रोन हमले का दावा किया है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी के अनुसार, यह हमला सादा और हज्जा प्रांतों में कथित सऊदी ड्रोन हमलों के जवाब में किया गया। हूती पक्ष ने दावा किया कि हमले के बाद रिफाइनरी में आग लग गई। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने भी रिफाइनरी में आग लगने की पुष्टि की, हालांकि अधिकारियों के अनुसार आग पर बाद में काबू पा लिया गया। लाल सागर में क्यों बढ़ी चिंता? बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां किसी व्यावसायिक जहाज पर हमला केवल जहाज में मौजूद चालक दल की सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक समुद्री व्यापार, बीमा लागत और माल ढुलाई पर भी पड़ सकता है। लगातार हमलों के कारण इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए सुरक्षा जोखिम बढ़ता है और कंपनियों को वैकल्पिक समुद्री मार्गों पर विचार करना पड़ सकता है। मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की भी परीक्षा हूती हमलों के बीच हाल में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जाजान पर हमले के बाद इस समझौते की प्रभावशीलता को लेकर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, किसी सैन्य समझौते की वास्तविक क्षमता का आकलन केवल एक घटना के आधार पर करना जल्दबाजी होगी। फिर भी लाल सागर और सऊदी क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे हमले क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती जरूर हैं। समुद्री सुरक्षा के सामने बड़ी चुनौती   तिहामा जहाज पर दो बार हुआ हमला इस बात को रेखांकित करता है कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान भी जोखिम से मुक्त नहीं हैं। खासकर तब, जब हमलावर दूसरे हमले के जरिए बचाव अभियान को भी निशाना बनाने की क्षमता रखते हों। लाल सागर में बढ़ता तनाव आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बना रह सकता है।  

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कांगो में तेजी से फैलते इबोला प्रकोप की स्थिति
कांगो में इबोला का प्रकोप बेकाबू, मृतकों की संख्या 2,000 के पार; 4,381 मामले सामने आए

किन्शासा, एजेंसियां। लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (DRC) में इबोला का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में इबोला से 2,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुल 4,381 मामले दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए यह स्थिति बेहद गंभीर है और इसे अब तक के सबसे तेजी से बढ़ने वाले इबोला प्रकोपों में से एक बताया जा रहा है।   पांच प्रांतों तक फैला संक्रमण     इबोला के मामले अब कांगो के पांच प्रांतों में सामने आ चुके हैं। पूर्वी कांगो का इतुरी प्रांत संक्रमण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित लोगों की पहचान, उपचार और उनके संपर्क में आए लोगों की निगरानी करने में जुटे हैं।     बुंडिबुग्यो वायरस से फैला प्रकोप     मौजूदा प्रकोप बुंडिबुग्यो वायरस के कारण है। कांगो ने 15 मई 2026 को इस प्रकोप की आधिकारिक पुष्टि की थी। WHO ने इसके बाद इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य आपात स्थिति माना था।   इस वायरस को लेकर चिंता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि मौजूदा इबोला टीके और उपचार मुख्य रूप से जाइरे स्ट्रेन के लिए विकसित किए गए हैं, जबकि वर्तमान प्रकोप बुंडिबुग्यो स्ट्रेन से जुड़ा है।   WHO और Africa CDC ने तेज कार्रवाई की अपील की     WHO और Africa CDC ने कांगो में संक्रमण को रोकने के लिए तत्काल और समुदाय-केंद्रित कार्रवाई तेज करने की अपील की है। स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमित लोगों की पहचान, संपर्कों की निगरानी, संक्रमण नियंत्रण और समुदायों के बीच जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।   मौजूदा स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता संक्रमण की तेज रफ्तार और नए क्षेत्रों में इसके फैलने को लेकर है। राहत एवं स्वास्थ्य टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रही हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
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कोलंबिया में 7.4 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही
कोलंबिया में 7.4 तीव्रता के भूकंप से भारी तबाही, 250 से ज्यादा लोगों की मौत; हजारों लापता

बोगोटा, एजेंसियां। कोलंबिया में आए 7.4 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने पश्चिमी हिस्से में भारी तबाही मचा दी है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, भूकंप से 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। हजारों लोगों के अब भी लापता होने की खबर है। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है।   कई इलाकों में इमारतें ढहीं     भूकंप का सबसे ज्यादा असर कोलंबिया के पश्चिमी हिस्से में देखने को मिला है। काली और पेरेरा समेत कई इलाकों में इमारतों और अन्य ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई जगह मकान और इमारतें ढहने के बाद लोग मलबे के नीचे फंस गए। भूकंप के झटके इतने शक्तिशाली थे कि उनका असर देश के बड़े हिस्से में महसूस किया गया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, पड़ोसी इक्वाडोर में भी लोगों ने झटके महसूस किए।     हजारों लोगों की तलाश में जुटी टीमें     भूकंप के बाद सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है। बचाव दल और स्थानीय लोग लगातार मलबा हटाकर लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। रिपोर्टों में 2,700 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, हालांकि आंकड़ा लगातार बदल रहा है। बचावकर्मी रात-दिन अभियान चला रहे हैं क्योंकि मलबे में फंसे लोगों के जीवित मिलने की उम्मीद अभी बनी हुई है। घायलों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।     मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ने की आशंका     ताजा रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 250 के पार पहुंचने की जानकारी है और घायलों की संख्या भी एक हजार से अधिक बताई जा रही है। राहत एवं बचाव कार्य अभी जारी होने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या आगे बढ़ सकती है।   कोलंबिया में प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान तेज कर दिया है। फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बचाने, घायलों को चिकित्सा सुविधा देने और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाने की है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
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