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Kosi Express AC Coach Fire in Bihar

बिहार में ‘बर्निंग ट्रेन’ बनने से बची कोसी एक्सप्रेस, AC कोच में लगी आग; यात्रियों में मची भगदड़

surbhi अगस्त 12, 2026 0
Kosi Express AC coach catches fire near Simri Bakhtiyarpur station in Bihar, causing panic among passengers.
Kosi Express AC Coach Fire in Bihar

बिहार में बुधवार सुबह एक बड़ा रेल हादसा टल गया। पूर्णिया कोर्ट से सहरसा होते हुए हटिया जा रही कोसी एक्सप्रेस के थर्ड एसी इकोनॉमी कोच में अचानक आग लगने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। घटना सोनवर्षा कचहरी और सिमरी बख्तियारपुर के बीच की है। ट्रेन जब तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही थी, तभी एक कोच के पहिये के पास आग की लपटें और धुआं दिखाई दिया।

घटना कोसी एक्सप्रेस के थर्ड एसी इकोनॉमी कोच M-2 में हुई। सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन से पहले फाटक संख्या 19 पर तैनात गेटमैन की नजर कोच से निकल रहे धुएं और पहिये के पास दिखाई दे रही आग की लपटों पर पड़ी। उन्होंने बिना देर किए इसकी सूचना स्टेशन मास्टर को दी।

स्टेशन पहुंचते ही यात्रियों में मची भगदड़

सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया गया। सुबह करीब 5:30 बजे कोसी एक्सप्रेस सिमरी बख्तियारपुर स्टेशन पहुंची। ट्रेन के रुकते ही आग और धुएं को देखकर कई यात्री घबराकर कोच से बाहर निकलने लगे। कुछ ही देर में स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, समय रहते आग का पता चल जाना इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण रहा। यदि आग तेजी से फैलती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी।

रेलवे कर्मचारियों ने तुरंत संभाला मोर्चा

ट्रेन के स्टेशन पर रुकने के बाद स्टेशन मास्टर, आरपीएफ जवान, लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड ने अग्निशमन यंत्रों की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया। हालांकि आग पर तत्काल पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका।

इसके बाद करीब 5:35 बजे अग्निशमन विभाग को सूचना दी गई। लगभग 10 मिनट बाद दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। करीब 5:57 बजे आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया।

जांच के बाद ट्रेन को आगे किया गया रवाना

आग बुझने के बाद रेलवे अधिकारियों ने कोच और ट्रेन की स्थिति की जांच की। करीब 6 बजे चालक, सहायक चालक, स्टेशन मास्टर और गार्ड ने ट्रेन को आगे-पीछे कर आवश्यक निरीक्षण किया। जांच के दौरान स्थिति सामान्य पाए जाने के बाद करीब 6:13 बजे कोसी एक्सप्रेस को आगे के लिए रवाना कर दिया गया।

घटना की जानकारी मिलने के बाद आरपीएफ इंस्पेक्टर धनंजय कुमार समेत अन्य रेलवे अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है।

समय पर सूचना मिलने से टला बड़ा हादसा

इस घटना में सबसे बड़ी राहत यह रही कि ट्रेन के स्टेशन पहुंचने से पहले ही गेटमैन ने धुआं और आग की लपटें देख लीं। तत्काल सूचना मिलने के कारण रेलवे कर्मचारियों को कार्रवाई के लिए पर्याप्त समय मिला और आग को फैलने से पहले नियंत्रित कर लिया गया।

कोसी एक्सप्रेस में आग की घटना ने एक बार फिर चलती ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था और समय पर आग की पहचान के महत्व को सामने ला दिया है। फिलहाल यात्रियों को राहत मिली है, जबकि रेलवे की जांच के बाद ही आग लगने के वास्तविक कारणों की स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में वज्रपात का कहर: तीन जिलों में 9 लोगों की मौत, CM सम्राट चौधरी ने 4-4 लाख रुपये मुआवजे का किया ऐलान

पटना: बिहार में मानसून के बीच मौसम के अचानक बदले मिजाज ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। राज्य के बांका, लखीसराय और पटना जिलों में आकाशीय बिजली गिरने से कुल 9 लोगों की मौत हो गई। लगातार हो रही वज्रपात की घटनाओं के बीच इन हादसों ने ग्रामीण और खुले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की और सभी मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान देने का निर्देश दिया है। बांका में 5, लखीसराय में 3 और पटना में एक मौत मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, वज्रपात की सबसे अधिक घटनाएं बांका जिले में हुईं, जहां 5 लोगों की जान चली गई। इसके अलावा लखीसराय में 3 और पटना में एक व्यक्ति की मौत हुई है। आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं के बाद संबंधित इलाकों में शोक का माहौल है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मृतकों के परिजनों को मिलेंगे 4-4 लाख रुपये मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वज्रपात में जान गंवाने वाले सभी लोगों के आश्रितों को तत्काल चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। सरकार की ओर से संबंधित अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाने में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को राहत और सहायता से जुड़ी कार्रवाई तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया गया है। खराब मौसम में घर से बाहर नहीं निकलने की अपील घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री ने लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब मौसम खराब हो और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका हो, तब लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। खासकर खेतों, खुले मैदानों और अन्य खुले स्थानों में मौजूद लोगों को मौसम में बदलाव के संकेत मिलते ही सुरक्षित स्थान पर चले जाने की सलाह दी गई है। पेड़ और बिजली के खंभों से रहें दूर वज्रपात के दौरान पेड़ के नीचे खड़ा होना बेहद जोखिमपूर्ण हो सकता है। प्रशासन की ओर से लोगों को पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले स्थानों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। मानसून के दौरान बिहार में वज्रपात की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग की चेतावनियों पर नजर रखना और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है। 9 मौतों के बाद फिर बढ़ी चिंता बिहार में एक ही दिन में तीन जिलों में 9 लोगों की मौत ने मानसून के दौरान वज्रपात से होने वाले नुकसान को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बारिश कमजोर होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर गरज-चमक वाले बादल बन रहे हैं, जिससे अचानक बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में किसानों, मजदूरों और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मौसम खराब होते ही सुरक्षित स्थान पर पहुंचना जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। खबर का सार कुल मौतें: 9 बांका: 5 मौतें लखीसराय: 3 मौतें पटना: 1 मौत मुआवजा: प्रत्येक मृतक के आश्रित को 4 लाख रुपये मुख्यमंत्री की अपील: खराब मौसम में अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थान पर रहें।

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Bihar approves 598 new urban health centers offering affordable OPD care and free medicines across urban areas.
बिहार में 2 रुपये के पर्चे पर ओपीडी इलाज, मुफ्त दवाएं भी मिलेंगी; 598 नए शहरी हेल्थ सेंटरों से किसे होगा फायदा?

बिहार के शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य में 598 नए शहरी स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन को मंजूरी दी गई है। इनमें 164 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानी UPHC और 434 शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर यानी UHWC शामिल हैं। इन केंद्रों का खास फोकस शहरी गरीब, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और स्लम बस्तियों में रहने वाली आबादी तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर रहेगा। नई व्यवस्था के तहत मरीजों को ओपीडी में इलाज के लिए सिर्फ 2 रुपये का पर्चा शुल्क देना होगा, जबकि निर्धारित स्वास्थ्य सेवाएं और दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी। 2 रुपये में ओपीडी इलाज की सुविधा नए शहरी स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए दूर बड़े अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। ओपीडी में इलाज के लिए 2 रुपये का पर्चा शुल्क निर्धारित किया गया है। स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन का समय भी अलग-अलग तय किया गया है: शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC): सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (UHWC): सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक इस समय-सारिणी से कामकाजी लोगों को भी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं लेने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। 598 नए केंद्रों को मिली मंजूरी राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन यानी NUHM के तहत बिहार में प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। केंद्र की मंजूरी के बाद राज्य में 598 शहरी स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन किया जाएगा। इनमें 164 UPHC और 434 UHWC होंगे। इन केंद्रों का उद्देश्य शहरी आबादी को घर के आसपास प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और छोटे स्वास्थ्य मामलों के लिए बड़े अस्पतालों पर निर्भरता कम करना है। इलाज के साथ मिलेंगी 12 तरह की स्वास्थ्य सेवाएं इन केंद्रों पर केवल सामान्य बीमारियों का इलाज ही नहीं होगा, बल्कि कई प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध कराने की योजना है। इनमें ओपीडी, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन, स्वास्थ्य परामर्श, संचारी रोगों की जांच, गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग और मुफ्त दवा वितरण जैसी सेवाएं शामिल हैं। कुल मिलाकर 12 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। स्लम बस्तियों पर रहेगा खास फोकस सरकार का विशेष ध्यान शहरी स्लम और आर्थिक रूप से कमजोर आबादी तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर है। जरूरत वाले क्षेत्रों में किराये के भवनों में स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए जा सकते हैं। इसके अलावा दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य शिविर और आयुष्मान आरोग्य शिविर लगाए जाने की व्यवस्था भी की जाएगी। शहरी आशा कार्यकर्ताओं और महिला स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका भी इस अभियान में महत्वपूर्ण रहेगी। पटना में 11 जन सेवा केंद्र बनेंगे हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पटना के लोगों को भी इस योजना से विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल के तहत शहर में पहले से संचालित 11 जन सेवा केंद्रों को शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में संचालित किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इन 11 केंद्रों के संचालन को भी मंजूरी मिल चुकी है। इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में भी स्वास्थ्य केंद्र युवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। शहरी निकाय क्षेत्र में आने वाले 19 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों और 14 राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेजों में शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित किए जाएंगे। इन केंद्रों से कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों को भी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। किन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा? इस योजना का सबसे बड़ा लाभ शहरी गरीब परिवारों, स्लम बस्तियों में रहने वाले लोगों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, विद्यार्थियों और आसपास के शहरी इलाकों में रहने वाली आम आबादी को मिलने की उम्मीद है। घर के नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध होने से छोटी बीमारियों, नियमित जांच, टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लोगों को दूर अस्पताल जाने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि अलग-अलग केंद्रों पर सेवाओं की उपलब्धता और संचालन की स्थिति स्थानीय स्तर पर लागू व्यवस्था के अनुसार हो सकती है। इसलिए मरीजों को संबंधित स्वास्थ्य केंद्र से उपलब्ध सेवाओं और समय की जानकारी की पुष्टि कर लेनी चाहिए। कुल मिलाकर 598 नए शहरी स्वास्थ्य केंद्रों की मंजूरी बिहार की शहरी स्वास्थ्य व्यवस्था के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि इन केंद्रों का संचालन तय योजना के अनुसार होता है, तो खासकर गरीब और स्लम आबादी को कम लागत में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उनके घर के करीब मिल सकेंगी।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
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बिहार के शिक्षकों के लिए बड़ी खबर: पटना में 20% और मोकामा में 10% HRA, जुलाई वेतन में लागू होगी संशोधित दर

बिहार के शिक्षकों के लिए आवास भत्ते यानी HRA को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया गया है। पटना जिले में अलग-अलग नगर निकाय और क्षेत्र की श्रेणी के आधार पर शिक्षकों को अलग-अलग दर से आवास भत्ता देने का प्रावधान किया गया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना), पटना की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक पटना नगर निगम क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों को मूल वेतन का 20 प्रतिशत HRA मिलेगा, जबकि मोकामा नगर परिषद क्षेत्र में 10 प्रतिशत की दर लागू होगी। अन्य चिन्हित नगर निकाय क्षेत्रों में HRA की दर 7.5 प्रतिशत रखी गई है। वहीं कुछ क्षेत्रों से 8 किलोमीटर की परिधि में आने वाले विद्यालयों के शिक्षकों के लिए 5 प्रतिशत HRA का प्रावधान किया गया है। चार श्रेणियों में निर्धारित की गई HRA की दर जिला शिक्षा कार्यालय के निर्देश के अनुसार आवास भत्ते के लिए क्षेत्रों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। इसमें पटना नगर निगम क्षेत्र, वर्गीकृत शहर, अवर्गीकृत शहर और ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। शिक्षकों के वेतन भुगतान के दौरान उनकी पदस्थापना वाली जगह के आधार पर निर्धारित दर से HRA का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है। पटना नगर निगम क्षेत्र में 20% HRA पटना नगर निगम क्षेत्र में पदस्थापित शिक्षकों को मूल वेतन की 20 प्रतिशत दर से आवास भत्ता दिया जाएगा। यह पटना जिले में बताई गई दरों में सबसे अधिक है। मोकामा नगर परिषद क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों के लिए HRA की दर 10 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इसके अलावा मनरे, बिहटा, विक्रम, पालीगंज, नौबतपुर, मसौढ़ी, पुनपुन, फतुहा, खुशरूपुर, बाढ़ और बख्तियारपुर नगर निकायों को अवर्गीकृत क्षेत्र की श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में शिक्षकों को 7.5 प्रतिशत की दर से HRA मिलेगा। 8 किलोमीटर की परिधि वाले विद्यालयों के लिए भी नियम निर्देश में नगर निकाय क्षेत्र के बाहर स्थित विद्यालयों के लिए भी HRA का प्रावधान स्पष्ट किया गया है। अवर्गीकृत शहर से 8 किलोमीटर की परिधि के भीतर स्थित विद्यालयों में पदस्थापित शिक्षकों को 5 प्रतिशत की दर से आवास भत्ता दिए जाने की बात कही गई है। वहीं पटना नगर निगम और मोकामा नगर परिषद की 8 किलोमीटर की परिधि में आने वाले विद्यालयों के लिए क्रमशः 20 प्रतिशत और 10 प्रतिशत की HRA दर लागू होगी। हालांकि इसके लिए संबंधित कार्यालय से आवश्यक स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा। जुलाई 2026 की अनुपस्थिति विवरणी में होगा संशोधन जिला शिक्षा कार्यालय ने संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रधानों को जुलाई 2026 की अनुपस्थिति विवरणी में संशोधित HRA दर को शामिल करने का निर्देश दिया है। यानी जुलाई महीने के वेतन से जुड़े दस्तावेज तैयार करते समय शिक्षकों की पदस्थापना वाली जगह के अनुसार HRA की सही दर दर्ज करनी होगी। यदि किसी विद्यालय में HRA की स्वीकृति अभी तक नहीं मिली है तो संबंधित अधिकारियों को जल्द से जल्द स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है, ताकि पात्र शिक्षकों को निर्धारित दर के अनुसार आवास भत्ते का भुगतान किया जा सके। प्रधानाध्यापक और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी करेंगे अनुपालन निर्देश के पालन की जिम्मेदारी संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों, प्रधानाध्यापकों और अन्य अधिकारियों को दी गई है। अनुपस्थिति विवरणी में संशोधन करते समय विद्यालय के नगर निकाय क्षेत्र, वार्ड नंबर और लागू HRA श्रेणी की जानकारी भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। इस आदेश से पटना जिले के उन शिक्षकों को सीधा लाभ मिल सकता है जिनके लिए अब तक HRA की सही दर लागू नहीं हुई थी या जिनके भत्ते में संशोधन लंबित था। हालांकि शिक्षकों को अपनी पदस्थापना वाली जगह की श्रेणी और लागू HRA दर की पुष्टि विद्यालय या संबंधित प्रखंड शिक्षा कार्यालय से कर लेनी चाहिए। शिक्षकों के लिए HRA की प्रमुख दरें पटना नगर निगम क्षेत्र: मूल वेतन का 20% मोकामा नगर परिषद क्षेत्र: मूल वेतन का 10% अन्य चिन्हित अवर्गीकृत नगर निकाय: 7.5% अवर्गीकृत शहर से 8 किलोमीटर की परिधि: 5% पटना नगर निगम/मोकामा की 8 किलोमीटर परिधि: क्रमशः 20% और 10% यह संशोधित व्यवस्था शिक्षकों के मासिक वेतन में HRA के रूप में मिलने वाली राशि को प्रभावित करेगी। इसलिए शिक्षकों के लिए जरूरी है कि वे अपने विद्यालय का क्षेत्र, नगर निकाय श्रेणी और वेतन विवरण में लागू HRA की दर की जांच जरूर करें।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
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