Bihar News

Patna DRM Office
पटना DRM ऑफिस में रेलवे नौकरी का झांसा, फर्जी कागजात के साथ दो आरोपी पकड़े गए

पटना, एजेंसियां। पटना के खगौल थाना क्षेत्र स्थित DRM कार्यालय में रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के साथ दो आरोपियों को पकड़ा है। आरोप है कि दोनों लोगों को रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा देकर फर्जी कागजात के जरिए विश्वास में लेने की कोशिश कर रहे थे। बिहार गृह विभाग और पटना पुलिस की ओर से 19 अगस्त की कार्रवाई की जानकारी साझा की गई है।   DRM ऑफिस में पहुंचकर कर रहे थे नौकरी का सौदा   पुलिस के अनुसार, आरोपी रेलवे में नौकरी दिलाने का दावा करते हुए DRM कार्यालय परिसर तक पहुंचे थे। वहां उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगने के बाद पुलिस को सूचना दी गई और दोनों को पकड़ लिया गया।   फर्जी दस्तावेज बरामद   पुलिस की कार्रवाई में आरोपियों के पास से नौकरी से संबंधित फर्जी कागजात मिलने की बात सामने आई है। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को प्रभावित करने के लिए किए जाने का आरोप है।   नौकरी के नाम पर ठगी की जांच   पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने कितने लोगों को रेलवे में नौकरी दिलाने का झांसा दिया और इस फर्जीवाड़े में उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति या गिरोह भी शामिल है या नहीं। बरामद दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।   बेरोजगार युवाओं से सावधान रहने की अपील   रेलवे में भर्ती की प्रक्रिया निर्धारित आधिकारिक माध्यमों से होती है। ऐसे में नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे या निजी दस्तावेज मांगने वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

anjali kumari अगस्त 20, 2026 0
Bihar government schools to get libraries with diverse books, digital resources and new librarian appointments
बिहार के 43 हजार सरकारी स्कूलों में खुलेंगी लाइब्रेरी, लाइब्रेरियन की होगी बहाली; 100 तरह की किताबों से बढ़ेगा पढ़ने का शौक

पटना: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी पहल की तैयारी है। राज्य के 43 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में लाइब्रेरी विकसित की जाएंगी। इसके लिए सरकार ने 134 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। योजना के तहत स्कूलों में किताबों की सुविधा बढ़ाने के साथ खाली पड़े लाइब्रेरियन के पदों पर बहाली भी की जाएगी। नई लाइब्रेरी में केवल पाठ्यक्रम से जुड़ी किताबें ही नहीं होंगी, बल्कि साहित्य, कहानियों और बाल साहित्य की किताबें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा लाइब्रेरी को डिजिटल रूप देने की भी योजना है, ताकि विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ने की सुविधा मिल सके। मिडिल स्कूलों में होगी लाइब्रेरियन की नियुक्ति राज्य के सरकारी स्कूलों में फिलहाल करीब 2 हजार लाइब्रेरियन कार्यरत हैं। बड़ी संख्या में स्कूलों में ये पद खाली हैं। योजना के तहत जिन मिडिल स्कूलों में लाइब्रेरी खोली जाएगी, वहां किताबों की व्यवस्था और संचालन के लिए लाइब्रेरियन की नियुक्ति की जाएगी। वहीं, प्राइमरी स्कूलों में अलग से लाइब्रेरियन नियुक्त करने के बजाय हेडमास्टर और शिक्षकों को लाइब्रेरी की जिम्मेदारी दी जाएगी। बच्चों को कक्षा के अनुसार किताबें उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। पहले से मौजूद लाइब्रेरी भी होंगी अपग्रेड इस योजना के तहत जिन सरकारी स्कूलों में पहले से लाइब्रेरी मौजूद हैं, उन्हें भी बेहतर सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया जाएगा। नए लाइब्रेरी भवनों के निर्माण की जिम्मेदारी बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना निर्माण निगम को दी जाएगी। पूरी योजना केंद्र सरकार के समग्र शिक्षा अभियान के तहत लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई के साथ बच्चों में किताबें पढ़ने की आदत और रुचि को बढ़ावा देना है। 100 तरह की किताबों से सजेगी स्कूल लाइब्रेरी स्कूल लाइब्रेरी में विद्यार्थियों की उम्र और जरूरत के हिसाब से करीब 100 तरह की किताबें उपलब्ध कराने की योजना है। इनमें पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकों के अलावा साहित्य और मनोरंजन की सामग्री भी शामिल होगी। हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास और राजनीति शास्त्र जैसे विषयों से संबंधित किताबों के साथ बच्चों के लिए कहानियां और बाल साहित्य भी रखा जाएगा। विद्यार्थियों को मुंशी प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, फणीश्वरनाथ रेणु, राहुल सांकृत्यायन, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और अमृतलाल नागर जैसे प्रमुख साहित्यकारों की रचनाएं पढ़ने का अवसर मिलेगा। डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी मिलेगी सरकार की योजना लाइब्रेरी को केवल किताबों तक सीमित रखने की नहीं है। स्कूलों में मैनुअल लाइब्रेरी के साथ डिजिटल सुविधा विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा। इससे विद्यार्थी जरूरत के अनुसार ऑनलाइन किताबें और अध्ययन सामग्री भी पढ़ सकेंगे। इस पहल से राज्य के हजारों सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर ही किताबों की बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, लाइब्रेरियन के पदों पर होने वाली बहाली शिक्षा क्षेत्र में नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Bihar government changes fertilizer sale rules to improve availability and stop forced product tagging for farmers
बिहार में खाद बिक्री के नियम बदले, किसानों को अब आसानी से मिलेगा उर्वरक; टैगिंग पर भी रोक

पटना: बिहार में किसानों को खाद की उपलब्धता आसान बनाने के लिए राज्य सरकार ने उर्वरक की बिक्री और वितरण व्यवस्था में बदलाव किया है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को उर्वरक कंपनियों, एजेंसियों, थोक और खुदरा विक्रेताओं के साथ बैठक कर कई अहम निर्देश जारी किए। नए नियमों के तहत अब खुदरा उर्वरक विक्रेता थोक बिक्री का लाइसेंस और थोक विक्रेता खुदरा बिक्री का लाइसेंस ले सकेंगे। सरकार का कहना है कि इससे खाद की सप्लाई और वितरण व्यवस्था मजबूत होगी और किसानों को निर्धारित कीमत पर उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। खुदरा और थोक विक्रेताओं को मिल सकेगा दोनों लाइसेंस मीठापुर स्थित कृषि भवन में हुई बैठक में कृषि मंत्री ने कहा कि अच्छे और सक्रिय उर्वरक विक्रेताओं की पहचान कर उन्हें लाइसेंस प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए कंपनियों से ऐसे विक्रेताओं की सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है। सरकार का मानना है कि बिक्री के दोनों लाइसेंस उपलब्ध होने से उर्वरक की आपूर्ति श्रृंखला अधिक प्रभावी होगी और किसानों को खाद के लिए ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ेगा। खाद की टैगिंग पर पूरी तरह रोक सरकार ने उर्वरक कंपनियों को टैगिंग नहीं करने का स्पष्ट निर्देश दिया है। यानी किसानों या विक्रेताओं पर किसी दूसरे उत्पाद के साथ खाद खरीदने का दबाव नहीं बनाया जा सकेगा। मंत्री ने यह भी कहा कि उर्वरक प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस में दर्ज उत्पादों के अलावा जिंक, जाइम जैसे टैग्ड उत्पादों की बिक्री नहीं होनी चाहिए। यदि कोई कंपनी होलसेलर या रिटेलर को टैगिंग वाले उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसी स्थिति में संबंधित कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। निर्धारित कीमत से ज्यादा पर खाद बेचने पर कार्रवाई कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में उर्वरक की कमी नहीं है। उनके अनुसार, बिहार में यूरिया मांग से अधिक मात्रा में उपलब्ध है और दूसरे जरूरी उर्वरक भी पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं। उन्होंने साफ किया कि निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद की बिक्री बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसी विक्रेता द्वारा मनमानी कीमत वसूलने या वितरण में गड़बड़ी करने की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही करने वाले विक्रेताओं का लाइसेंस होगा रद्द सरकार ने निष्क्रिय और नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं पर भी सख्ती का संकेत दिया है। विभाग के अनुसार, यदि कोई विक्रेता लाइसेंस लेने के बाद खाद वितरण में अनियमितता करता है या तय नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। इससे खाद की कालाबाजारी और मनमाने तरीके से वितरण पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी। खाद की गुणवत्ता जांच भी होगी मजबूत सरकार ने उर्वरक की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने का फैसला किया है। इसके लिए खाद के नमूनों की जांच व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। संबंधित कंपनियों और विक्रेताओं को नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 5 सितंबर तक 15 दिनों का समय दिया गया है। तय समय के बाद नियमों का उल्लंघन मिलने पर लाइसेंस रद्द करने समेत अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसानों के लिए क्या बदलेगा? खाद की उपलब्धता आसान बनाने की कोशिश होगी। खुदरा और थोक विक्रेताओं को दोनों तरह के लाइसेंस मिल सकेंगे। खाद को दूसरे उत्पादों के साथ खरीदने की बाध्यता पर रोक रहेगी। निर्धारित कीमत से ज्यादा पर उर्वरक बेचने पर कार्रवाई होगी। खाद की गुणवत्ता की जांच को और मजबूत किया जाएगा। नियम तोड़ने वाले विक्रेताओं का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Bihar Governor Syed Ata Hasnain directs prior information before transfer and posting of Lok Bhavan staff
बिहार में राज्यपाल की नाराजगी के बाद लोकभवन में ट्रांसफर-पोस्टिंग पर रोक, पहले देनी होगी जानकारी

पटना: बिहार में राजभवन और राज्य सरकार के बीच अधिकारियों-कर्मचारियों के तबादले और नई पोस्टिंग को लेकर मामला सामने आया है। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने लोकभवन में तैनात कर्मचारियों के ट्रांसफर और नई नियुक्तियों को लेकर आपत्ति जताई है। राज्यपाल सचिवालय ने निर्देश दिया है कि लोकभवन में किसी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला करने अथवा नए कर्मचारी की पोस्टिंग से पहले इसकी जानकारी राज्यपाल को दी जाए। राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ गई है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किन अधिकारियों या कर्मचारियों के तबादले को लेकर यह आपत्ति जताई गई है। बिना जानकारी ट्रांसफर-पोस्टिंग पर राज्यपाल सचिवालय की आपत्ति राज्यपाल सचिवालय के मुताबिक, उसके संज्ञान में आया है कि लोकभवन में तैनात कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को दूसरे विभागों में भेजा जा रहा है। वहीं, कुछ नए अधिकारियों और कर्मचारियों को लोकभवन में नियुक्त किया जा रहा है। सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि लोकभवन से जुड़े ऐसे किसी भी तबादले या नई पोस्टिंग से पहले संबंधित प्रस्ताव उचित माध्यम से राज्यपाल के सामने रखा जाना चाहिए। यानी आगे से लोकभवन में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति या तबादले की प्रक्रिया में राज्यपाल सचिवालय को पहले जानकारी देना जरूरी होगा। किन अधिकारियों के तबादले से जुड़ा है मामला? फिलहाल यह तस्वीर साफ नहीं है कि राज्यपाल की नाराजगी किस खास अधिकारी या कर्मचारी के तबादले को लेकर है। हाल के महीनों में लोकभवन में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति और तबादले हुए हैं। 3 अगस्त को बिहार सचिवालय आशुलिपिक सेवा के अधिकारी संजय सिंह को लोकभवन में तैनात करने का आदेश जारी हुआ था। इससे पहले जुलाई में लोकभवन में तैनात प्रधान आप्त सचिव नीरू पाठक को हटाकर मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय में आप्त सचिव बनाया गया था। इसी दिन आशुलिपिक गोपाल कुमार का भी लोकभवन से तबादला कर मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय में पदस्थापन किया गया था। जून में भी हुआ था अधिकारियों का फेरबदल लोकभवन में अधिकारियों की तैनाती में बदलाव जून महीने में भी हुआ था। 18 जून को आशुलिपिक सेवा की अधिकारी अंजु कुमारी और सत्यप्रकाश कुमार को मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय से स्थानांतरित कर राज्यपाल सचिवालय में तैनात किया गया था। वहीं, 17 जून को राज्यपाल सचिवालय में अपर सचिव के पद पर तैनात आईएएस अधिकारी नंदलाल आर्या का तबादला कर उन्हें बक्सर का बंदोबस्त पदाधिकारी बनाया गया था। इसके अलावा 1 जून को आईएएस अधिकारी संजय कुमार को ग्रामीण कार्य विभाग से स्थानांतरित कर लोकभवन में अपर सचिव के पद पर तैनात किया गया था। कई नियुक्तियों में राज्यपाल की अनुमति का भी जिक्र इस पूरे मामले में एक अहम पहलू यह भी है कि सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी कई अधिसूचनाओं में अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियां राज्यपाल की अनुमति से किए जाने का उल्लेख है। ऐसे में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राज्यपाल सचिवालय की मौजूदा आपत्ति किन तबादलों या नियुक्तियों से जुड़ी है। यही वजह है कि पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मार्च में बिहार के राज्यपाल बने थे सैयद अता हसनैन सैयद अता हसनैन ने 14 मार्च 2026 को बिहार के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। वह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल हैं और सेना में करीब चार दशक तक अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। लोकभवन में ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर राज्यपाल सचिवालय के नए निर्देश के बाद अब नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि लोकभवन में अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति व तबादले की प्रक्रिया में क्या बदलाव किया जाता है।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
EOU raids three premises linked to Bihar Open Schooling Board deputy director in disproportionate assets case
बिहार मुक्त विद्यालयी बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर के 3 ठिकानों पर EOU रेड, 3.34 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति का मामला

पटना: बिहार में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने भ्रष्टाचार के एक मामले में बड़ी कार्रवाई की है। बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर अजय कुमार सिंह के तीन ठिकानों पर EOU की टीम ने छापेमारी की है। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की जा रही है। EOU की टीम ने गुरुवार को पटना और बेगूसराय में अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। जांच के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य जरूरी सामान की पड़ताल की जा रही है। 3.34 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति का आरोप जानकारी के अनुसार, अजय कुमार सिंह के खिलाफ EOU थाने में आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था। जांच में 3 करोड़ 34 लाख 78 हजार 300 रुपये की ऐसी संपत्ति के साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है, जिसे उनकी ज्ञात आय से अधिक बताया जा रहा है। यह राशि उनकी आय की तुलना में करीब 90.04 प्रतिशत अधिक बताई गई है। इसी आधार पर EOU ने आगे की जांच और छापेमारी की कार्रवाई शुरू की है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस डिप्टी डायरेक्टर के खिलाफ मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(2) के साथ धारा 13(1)(बी) के तहत दर्ज किया गया है। EOU की टीम छापेमारी के दौरान संपत्ति के कागजात और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। टीम बेसमेंट और पार्किंग समेत संबंधित परिसरों के अलग-अलग हिस्सों में भी तलाशी ले रही है। इन तीन ठिकानों पर चल रही छापेमारी EOU की कार्रवाई पटना और बेगूसराय स्थित तीन परिसरों में चल रही है। इनमें पटना के चंद्रतारा भवन, बीबी कॉम्प्लेक्स, आकाशवाणी रोड, खाजपुरा स्थित आवास और मीठापुर स्थित बिहार ओपन स्कूलिंग एंड एग्जामिनेशन बोर्ड कार्यालय शामिल हैं। इसके अलावा बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के परोरा गांव स्थित पैतृक आवास पर भी टीम पहुंची है। जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर फिलहाल EOU की टीम तीनों ठिकानों पर दस्तावेजों और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। तलाशी के दौरान सामने आने वाली संपत्ति और अन्य सामग्री का सत्यापन किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद ही बरामदगी और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की विस्तृत जानकारी सामने आएगी। इसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Bihar government tells Supreme Court four AK-47 rounds were fired during Siwan student protest
सीवान में AK-47 से चली थीं 4 गोलियां, सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार का बड़ा खुलासा; जानें फायरिंग की वजह

पटना/सीवान: बिहार के सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस फायरिंग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। राज्य सरकार ने अदालत में दाखिल हलफनामे में माना है कि प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी ने AK-47 से चार राउंड फायर किए थे। हालांकि सरकार का कहना है कि सभी गोलियां हवा में चलाई गई थीं और इस फायरिंग में किसी प्रदर्शनकारी के घायल होने की जानकारी नहीं है। सरकार ने यह भी बताया कि AK-47 से गोली चलाने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। भीड़ में फंस गया था पुलिसकर्मी, तभी हुई फायरिंग राज्य सरकार के मुताबिक, 25 जुलाई को सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान स्थिति बिगड़ गई थी। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच फंस गया। सरकार का दावा है कि भीड़ से खुद को निकालने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी ने AK-47 से चार राउंड हवा में फायर किए। सरकार के अनुसार, इन गोलियों से किसी प्रदर्शनकारी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। तीन प्रदर्शनकारियों के घायल होने पर सरकार ने क्या कहा? सीवान में प्रदर्शन के दौरान तीन लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी। इस पर बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इन लोगों को AK-47 से चली गोलियों से चोट नहीं लगी थी। सरकार के अनुसार, हाथी चौक के पास भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान एक सहायक उपनिरीक्षक ने 9 एमएम पिस्टल से दो राउंड फायर किए थे। इसी दौरान तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। इस तरह सरकार ने AK-47 से हुई फायरिंग और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की दोनों घटनाओं को अलग-अलग बताया है। प्रदर्शन में AK-47 के इस्तेमाल पर उठे सवाल राज्य सरकार ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि AK-47 प्लाटून स्तर का हथियार है और सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति, जैसे प्रदर्शन या आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। सरकार के मुताबिक, इस संबंध में बिहार के डीजीपी की ओर से भी निर्देश जारी किए गए हैं। फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मी को निलंबित करने के साथ उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। गोली किस हथियार से चली, जांच में जुटी एजेंसियां फायरिंग की घटना को लेकर जांच अभी जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि गोली किस हथियार से चली, फायरिंग कितनी दूरी से हुई और गोली चलाने का कोण क्या था। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनास्थल पर वास्तव में क्या हुआ था और फायरिंग की परिस्थितियां क्या थीं। कई जिलों में हिंसक हुआ था छात्र आंदोलन बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपने जवाब में बताया कि छात्र आंदोलन के दौरान पटना, जहानाबाद, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी, औरंगाबाद, कटिहार, किशनगंज और सीवान समेत कई जिलों में प्रदर्शन हिंसक हुए थे। सरकार के मुताबिक, छपरा में शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में भीड़ उग्र हो गई। इस दौरान पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। इसमें दो बीडीओ, तीन पुलिस इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 11 सिपाहियों के घायल होने की जानकारी दी गई है। सरकार ने यह भी दावा किया कि एक बीडीओ की आंख को गंभीर नुकसान पहुंचा, जबकि दूसरे अधिकारी को भी चोट लगी। बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों पर कार्रवाई नहीं सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने छात्रों पर कार्रवाई को लेकर भी अपना पक्ष रखा। सरकार के अनुसार, जिन प्रदर्शनकारी छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ दंडात्मक पुलिस कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं, आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए 18 साल से कम उम्र के ऐसे बच्चों, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था, उन्हें साधारण बॉन्ड भरने के बाद रिहा कर दिया गया। सीवान में AK-47 से चार राउंड फायरिंग की सरकार की स्वीकारोक्ति के बाद मामला और गंभीर हो गया है। फिलहाल सरकार का दावा है कि फायरिंग हवा में की गई थी और प्रदर्शनकारियों को AK-47 की गोली नहीं लगी। अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Bihar supply officials protest over resources and workload for issuing 11 lakh new ration cards
बिहार में 11 लाख नए राशन कार्ड पर संकट? अधिकारी आंदोलन पर, हड़ताल हुई तो अटक सकता है काम

पटना: बिहार में नए राशन कार्ड बनाने के बड़े अभियान को लेकर अब विभागीय अधिकारियों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। राज्य में 11,04,425 नए राशन कार्ड जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने इस लक्ष्य और इसे पूरा करने के लिए उपलब्ध कराए गए संसाधनों पर सवाल उठाए हैं। संघ का कहना है कि अधिकारियों को पर्याप्त संसाधन दिए बिना इतना बड़ा लक्ष्य सौंप दिया गया है। इसी के विरोध में आपूर्ति विभाग से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी 20 से 26 अगस्त तक काला बिल्ला लगाकर विरोध करेंगे। अगर मांगों पर सहमति नहीं बनी तो आंदोलन आगे बढ़ाने की चेतावनी दी गई है। 20 अगस्त से शुरू हुआ विरोध बिहार आपूर्ति सेवा संघ के मुताबिक, पहले चरण में 20 से 26 अगस्त तक अधिकारी और कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर काम करेंगे। इस दौरान विभागीय काम पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा। अगर सरकार की ओर से मांगों पर कोई समाधान नहीं निकलता है तो संघ सामूहिक अवकाश का कदम उठा सकता है। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो पूर्ण हड़ताल की चेतावनी दी गई है। संघ ने आंदोलन की जानकारी खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के साथ मुख्य सचिव और संबंधित मंत्री को भी दी है। 11.04 लाख राशन कार्ड का लक्ष्य क्यों बना विवाद? आपूर्ति सेवा संघ के अध्यक्ष श्रीराम मिश्रा ने दावा किया है कि नए राशन कार्ड का लक्ष्य जमीनी सर्वे के बजाय एक गणितीय गणना के आधार पर तय किया गया है। संघ के अनुसार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बिहार में लाभुकों की अधिकतम सीमा करीब 8.71 करोड़ है। इनमें लगभग 8.24 करोड़ लोग पहले से योजना के दायरे में हैं। इस हिसाब से करीब 46.93 लाख लाभुकों की जगह बचती है। इसी संख्या को औसत परिवार के आकार 4.25 से विभाजित करने पर करीब 11.04 लाख नए राशन कार्ड का आंकड़ा निकाला गया है। अधिकारियों का सवाल है कि पुराने जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर तय सीमा को आज की वास्तविक स्थिति से कैसे जोड़ा जा सकता है। कंप्यूटर-स्कैनर से लेकर इंटरनेट तक की कमी का आरोप संघ ने राशन कार्ड अभियान के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी आरोप लगाया है। उसका कहना है कि कई आपूर्ति कार्यालयों में पर्याप्त कंप्यूटर, स्कैनर और इंटरनेट सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा आवेदनों की जांच और फील्ड वेरिफिकेशन के लिए पर्याप्त सरकारी वाहन नहीं मिलने की बात भी कही गई है। संघ का दावा है कि दस्तावेजों की जांच, प्रिंटिंग और फील्ड विजिट जैसे कामों में अधिकारियों को अपने स्तर पर खर्च करना पड़ रहा है। इसके लिए प्रति कार्ड करीब 250 से 300 रुपये तक का खर्च आने का दावा किया गया है। कॉल और GPS को लेकर भी नाराजगी आपूर्ति अधिकारियों ने अधिकारियों की निगरानी को लेकर की गई कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई है। संघ के मुताबिक, 17 जुलाई को CUG नंबर पर कॉल रिसीव नहीं होने या GPS की लाइव लोकेशन उपलब्ध नहीं होने के आधार पर कई अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटा गया। संघ का कहना है कि फील्ड में काम करने के दौरान नेटवर्क और तकनीकी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में पहले पर्याप्त तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए और उसके बाद जवाबदेही तय होनी चाहिए। अभी बंद नहीं होंगे राशन कार्ड से जुड़े काम फिलहाल 20 से 26 अगस्त तक के काला बिल्ला विरोध के दौरान सामान्य कामकाज जारी रखने की बात कही गई है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि बिहार में राशन कार्ड बनना बंद हो गया है। हालांकि, अगर आंदोलन आगे बढ़कर सामूहिक अवकाश या पूर्ण हड़ताल में बदलता है तो नए राशन कार्ड के आवेदन, दस्तावेजों की जांच, फील्ड वेरिफिकेशन और मंजूरी की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और आपूर्ति सेवा संघ के बीच बातचीत से विवाद का समाधान निकलता है या आंदोलन आगे बढ़ता है। फिलहाल 11 लाख से ज्यादा नए राशन कार्ड बनाने के लक्ष्य के बीच अधिकारियों का विरोध सरकार के लिए नई चुनौती बन गया है।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Traffic diversions and scheduled power cuts affect several areas across Patna on August 20
पटना में आज ट्रैफिक रहेगा डायवर्ट, ऑटो-ई-रिक्शा की नो एंट्री; 35 इलाकों में बिजली कटौती, निकलने से पहले जानें रूट

पटना: राजधानी पटना में गुरुवार यानी 20 अगस्त को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक और बिजली से जुड़ी जरूरी जानकारी जान लेना बेहतर होगा। गांधी मैदान और आसपास के इलाकों में एक बड़े सरकारी कार्यक्रम को देखते हुए ऑटो, ई-रिक्शा और व्यावसायिक वाहनों के परिचालन पर अस्थायी रोक रहेगी। वहीं, शहर के कई हिस्सों में बिजली के प्रोजेक्ट कार्य के चलते अलग-अलग समय पर बिजली आपूर्ति भी बाधित हो सकती है। बापू सभागार में ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यक्रम को देखते हुए सुबह से ही गांधी मैदान इलाके में ट्रैफिक व्यवस्था बदली रहेगी। कार्यक्रम सुबह 11 बजे शुरू होना है और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर सुबह 9 बजे से कार्यक्रम खत्म होने तक कुछ वाहनों को प्रतिबंधित किया गया है। गांधी मैदान के आसपास इन वाहनों पर रहेगी रोक गांधी मैदान के चारों तरफ ऑटो, ई-रिक्शा और व्यावसायिक वाहनों के परिचालन पर रोक रहेगी। इसके अलावा बुद्धमार्ग-छज्जूबाग से टीएन बनर्जी पथ तक भी इन वाहनों को जाने की अनुमति नहीं होगी। पुलिस लाइन गेट नंबर-1 से बैंक रोड और बुद्धमार्ग में पुलिस लाइन तिराहा से कोतवाली टी तक भी ऑटो और ई-रिक्शा का परिचालन प्रतिबंधित रहेगा। इसलिए अगर आपका काम गांधी मैदान, बापू सभागार, बुद्धमार्ग या आसपास के इलाके में है तो यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलना बेहतर होगा। इन रूटों पर बदलेगा ऑटो-ई-रिक्शा का रास्ता ट्रैफिक पुलिस ने कई प्रमुख रास्तों पर वाहनों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है। दानापुर से राजापुर पुल की ओर आने वाले ऑटो-ई-रिक्शा पुलिस लाइन तिराहा से वापस दानापुर की तरफ भेजे जाएंगे। अशोक राजपथ और गायघाट की ओर से आने वाले वाहन करगिल चौक से पश्चिम डबल डेकर के पश्चिमी छोर के पास यू-टर्न लेकर वापस गायघाट की ओर जाएंगे। भट्टाचार्य चौराहा से गांधी मैदान की तरफ ऑटो और ई-रिक्शा का परिचालन बंद रहेगा। गांधी मैदान और बाकरगंज की दिशा में भी इन वाहनों को प्रवेश नहीं मिलेगा। ऐसे में यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों या रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। पटना के 35 इलाकों में बिजली कटौती ट्रैफिक बदलाव के साथ गुरुवार को पटना के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित होगी। प्रोजेक्ट कार्य के कारण 11 केवी के सात फीडरों को अलग-अलग समय पर बंद रखा जाएगा। सुबह 8 से 9 बजे तक यूनिवर्सिटी फीडर बंद रहने के कारण माखनियां कुआं, खुदा बख्श लाइब्रेरी और अशोक राजपथ से जुड़े इलाकों में बिजली प्रभावित हो सकती है। सुबह 8 से 10 बजे तक ईस्ट फीडर बंद रहेगा। इस दौरान संबंधित इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित रहने की संभावना है। सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक लोहियापथ और उत्तरी जयप्रकाश नगर फीडर बंद रहने से लोहियापथ, शर्मा पथ, रूपसपुर भट्टा, चमरटोली, महुआ बाग, झंडी रोड और उत्तरी जयप्रकाश नगर के रोड नंबर 1 से 4 तक बिजली प्रभावित रहेगी। सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक रेडिएंट और त्रिभुवन फीडर से जुड़े इलाकों में बिजली कटौती होगी। इनमें कश्यप ग्रीन सिटी, कोथवां गांव, राजदेव इनक्लेव, त्रिभुवन स्कूल, विजय यादव पथ, यशोदा कॉलोनी और विद्युत नगर समेत आसपास के इलाके शामिल हैं। घर से निकलने से पहले यह जरूर देख लें गुरुवार को पटना में एक साथ ट्रैफिक डायवर्जन और बिजली कटौती के कारण लोगों को परेशानी हो सकती है। खासकर गांधी मैदान और आसपास जाने वाले लोगों को बदले हुए रूट का ध्यान रखना चाहिए। वहीं, जिन इलाकों में बिजली कटौती का समय तय है, वहां लोग मोबाइल चार्जिंग, पानी की मोटर और दूसरे जरूरी काम पहले ही निपटा लें। ट्रैफिक वाले इलाकों में जाने वालों के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलना भी बेहतर रहेगा।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Nalanda school mid-day meal incident leaves 34 children ill after detergent allegedly mixed into food
नालंदा में मिड-डे मील में बड़ी लापरवाही, नमक की जगह डिटर्जेंट! 34 बच्चे बीमार, HM सस्पेंड

नालंदा: बिहार के नालंदा जिले से स्कूल के मिड-डे मील को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नूरसराय प्रखंड के परासी मध्य विद्यालय में बच्चों को परोसे गए भोजन में नमक की जगह कथित तौर पर डिटर्जेंट पाउडर मिला दिया गया। खाना खाने के बाद 34 बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया गया है, जबकि तीन रसोइयों को काम से हटा दिया गया है। अब जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने का भी निर्देश दिया गया है। तीन रसोइयों को हटाया गया, प्रधानाध्यापक सस्पेंड जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने के बाद विद्यालय की तीन रसोइयों मंटू देवी, शारदा देवी और निपु देवी को कार्यमुक्त कर दिया गया है। वहीं, विद्यालय के प्रधानाध्यापक शैलेन्द्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि बच्चों की सेहत से जुड़ी इस गंभीर लापरवाही को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अब दोषियों पर दर्ज होगी FIR मामले को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया है। यानी कार्रवाई अब विभागीय जांच तक सीमित नहीं रहेगी। जांच के दौरान जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की जांच के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि भोजन में डिटर्जेंट कैसे पहुंचा और इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है। बीआरपी और भोजन सप्लाई करने वाली संस्था से जवाब मिड-डे मील की निगरानी से जुड़े प्रखंड साधनसेवी महेश प्रसाद से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके अलावा भोजन की आपूर्ति करने वाली एकता शक्ति फाउंडेशन के परियोजना प्रबंधक से भी जवाब तलब किया गया है। विभाग ने साफ किया है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर संस्था के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर उसका निबंधन रद्द करने की कार्रवाई भी हो सकती है। वहीं, मिड-डे मील के डीपीओ के खिलाफ भी आरोप पत्र गठित कर विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। भोजन परोसने से पहले चखना जरूरी, फिर भी कैसे हुई चूक? मिड-डे मील के नियमों के मुताबिक बच्चों को भोजन परोसने से पहले शिक्षक को खाना चखकर उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा की जांच करनी होती है। इसके बाद ही बच्चों को भोजन दिया जाना चाहिए। नालंदा की घटना ने इसी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर भोजन की सही तरीके से जांच की गई होती तो डिटर्जेंट जैसी चीज का पता पहले ही चल सकता था। तीन महीने में सामने आईं 22 घटनाएं बिहार में मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर पिछले कुछ समय में कई शिकायतें सामने आई हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तीन महीनों में 22 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अरवल में 75 स्कूलों के मिड-डे मील में कीड़े मिलने की शिकायत के बाद भोजन वितरण रोकना पड़ा था। मधेपुरा में भोजन में छिपकली मिलने के बाद करीब 70 बच्चों के बीमार होने का मामला सामने आया था। खगड़िया और सहरसा से भी भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में नालंदा की घटना ने स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग ने दिया सख्त कार्रवाई का संकेत नालंदा की घटना के बाद शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि मिड-डे मील में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना विभाग की जिम्मेदारी है। फिलहाल प्रधानाध्यापक के निलंबन, तीन रसोइयों को हटाने और संबंधित अधिकारियों व आपूर्ति संस्था से जवाब मांगने के बाद अब FIR की कार्रवाई पर नजर है। जांच पूरी होने के बाद यह साफ होगा कि इस मामले में और किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Shivanand Tiwari reacts to HD Kumaraswamy's remarks on Sonia Gandhi amid political controversy in Bihar
सोनिया गांधी पर कुमारस्वामी की टिप्पणी से गरमाई सियासत, शिवानंद तिवारी ने पूछा- ‘क्या सत्ता संकट में है?’

पटना: सोनिया गांधी को लेकर केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी की टिप्पणी पर बिहार में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद शिवानंद तिवारी ने कुमारस्वामी के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर सत्ता पक्ष के एक मंत्री को विपक्ष की नेता के मूल को लेकर सवाल उठाने की जरूरत क्यों पड़ी। शिवानंद तिवारी ने कहा कि सोनिया गांधी के इटली मूल को लेकर पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं, लेकिन ऐसे सवालों का राजनीतिक परिणाम हमेशा उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने इसी संदर्भ में सवाल किया कि क्या सरकार किसी राजनीतिक संकट का सामना कर रही है? कुमारस्वामी के बयान पर तिवारी का पलटवार शिवानंद तिवारी के मुताबिक, कुमारस्वामी ने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए उनके इटली मूल का जिक्र किया था। तिवारी ने कहा कि कुमारस्वामी को यह भी याद रखना चाहिए कि 2018 में कांग्रेस के समर्थन से ही वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने कहा कि उस समय भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के बीच गठबंधन हुआ था और कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने थे। तिवारी ने यह भी याद दिलाया कि एचडी कुमारस्वामी के पिता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा भी कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने थे। ‘कुमारस्वामी को भारतीय परंपरा की जानकारी नहीं’ सोनिया गांधी के विदेशी मूल पर सवाल उठाए जाने को लेकर शिवानंद तिवारी ने भारतीय पारिवारिक परंपराओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में विवाह के बाद महिला की पहचान उसके पति के परिवार से जुड़ती है। तिवारी ने कहा कि सोनिया गांधी का जन्म इटली में हुआ, लेकिन भारतीय से विवाह के बाद वह भारत की बहू बनीं। उन्होंने इसी संदर्भ में 2004 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय जनता ने सोनिया गांधी के नेतृत्व वाले गठबंधन को सत्ता की जिम्मेदारी दी थी। पीएम पद छोड़ने का भी किया जिक्र शिवानंद तिवारी ने सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री पद से जुड़े फैसले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2004 में गठबंधन को बहुमत मिलने के बाद सोनिया गांधी के पास प्रधानमंत्री बनने का अवसर था, लेकिन उन्होंने खुद यह पद स्वीकार नहीं किया और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया। तिवारी ने कहा कि जिस पद को हासिल करने के लिए राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय तक संघर्ष होता रहा, सोनिया गांधी ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। ‘सत्ता के लोग विपक्ष से सवाल करने लगें तो...’ शिवानंद तिवारी ने कुमारस्वामी की टिप्पणी को राजनीतिक रूप से अपरिपक्व बताया। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर सवाल विपक्ष की ओर से सरकार से किए जाते हैं, लेकिन जब सत्ता में बैठे लोग विपक्ष से सवाल करने लगें तो इसे अलग नजरिए से देखा जा सकता है। उन्होंने इसी आधार पर सवाल उठाया कि क्या सरकार के सामने कोई राजनीतिक संकट है? हालांकि, सत्ता में संकट होने का यह दावा शिवानंद तिवारी की राजनीतिक टिप्पणी है। इसे सरकार की स्थिति को लेकर किसी आधिकारिक पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जा सकता।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Gopalganj police station officer arrested over alleged bribery, extortion and illegal detention complaints
गोपालगंज में थानेदार पर घूसखोरी का आरोप, SP ने कराई गिरफ्तारी; 36 घंटे तक हिरासत में रखने का भी मामला

गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज जिले में पुलिस महकमे से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। जादोपुर थाने के तत्कालीन थानेदार अनिल राम पर रिश्वतखोरी, जबरन वसूली और लोगों को कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने के आरोप लगे हैं। शिकायत मिलने के बाद गोपालगंज एसपी विनय तिवारी ने मामले की जांच के निर्देश दिए। जांच में कई गंभीर आरोपों के समर्थन में साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने थानेदार समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। बिना FIR लोगों को हिरासत में रखने का आरोप शुरुआती जांच में सामने आया कि जादोपुर थाने में कुछ लोगों को कथित तौर पर बिना FIR, आधिकारिक रिकॉर्ड या पर्याप्त कानूनी आधार के घंटों तक हिरासत में रखा गया। एक मामले में एक व्यक्ति को करीब 36 घंटे तक थाने में रखे जाने का आरोप है। जांच के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि हिरासत में लिए गए लोगों या उनके परिवारों को कथित तौर पर झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती थी। इसके बदले रिहाई या केस से नाम हटाने के लिए पैसे मांगने की बात जांच में सामने आई। एसपी तक पहुंची शिकायत, DSP को सौंपी जांच गोपालगंज एसपी विनय तिवारी को 16 अगस्त को जादोपुर थाने में कथित वसूली के मामले की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने DSP मुख्यालय को पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया। जांच के दौरान अधिकारियों ने कथित तौर पर कई मामलों में पैसों की मांग और लेनदेन से जुड़े सबूत जुटाए। थानेदार और एक कथित बिचौलिये के बीच हुई बार-बार की फोन बातचीत को भी जांच का हिस्सा बनाया गया। 50 हजार से लेकर 75 हजार रुपये तक मांगने का आरोप जांच में एक व्यक्ति से कथित बिचौलिये के माध्यम से 50 हजार रुपये मांगने का आरोप सामने आया। एक अन्य मामले में एक महिला और उसकी नाबालिग बेटी को छोड़ने के बदले 75 हजार रुपये लिए जाने की बात सामने आई। इसके अलावा एक युवक का नाम केस से हटाने के लिए कथित तौर पर 55 हजार रुपये की मांग किए जाने का भी आरोप है। जांच टीम को तत्कालीन SHO अनिल राम और कथित बिचौलिये के बीच कई बार हुई फोन बातचीत के साक्ष्य भी मिले। थानेदार समेत 4 लोगों पर FIR DSP की जांच के आधार पर 18 अगस्त को जादोपुर थाने के तत्कालीन SHO समेत चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने तत्कालीन थानेदार अनिल राम, कथित बिचौलिये राजू यादव और गांव के चौकीदार राकेश कुमार व महंथ कुमार यादव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, थानेदार और दोनों चौकीदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित भी किया गया। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का संदेश मामले के बाद गोपालगंज पुलिस प्रशासन ने भ्रष्टाचार, अधिकारों के कथित दुरुपयोग और गैर-कानूनी हिरासत के मामलों में सख्त रुख अपनाने की बात कही है। एसपी विनय तिवारी ने पुलिसकर्मियों और बिचौलियों को चेतावनी दी है कि किसी मामले की जांच में अनुचित हस्तक्षेप करने या गवाहों को डराने-धमकाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में भी यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि शिकायत मिलने पर अपने ही विभाग के अधिकारियों के खिलाफ भी जांच और कानूनी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
RJD Raj Bhavan march in Patna sees police barricading, water cannon action and Tejashwi Yadav detention
पटना में RJD के राजभवन मार्च पर बवाल, वाटर कैनन से लेकर तेजस्वी यादव की हिरासत तक जानिए पूरा घटनाक्रम

पटना: बिहार में छात्रों, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और कथित पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर RJD के राजभवन मार्च के दौरान बुधवार को पटना में जमकर हंगामा हुआ। जेपी गोलंबर से शुरू हुआ मार्च डाक बंगला चौराहे तक पहुंचा, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पुलिस ने प्रिवेंटिव डिटेंशन में लिया। बाद में उन्हें सचिवालय थाने ले जाया गया। हालांकि, कुछ समय बाद उन्हें छोड़ दिया गया। बैरिकेडिंग पर बढ़ा तनाव, पुलिस ने चलाया वाटर कैनन RJD कार्यकर्ताओं का मार्च डाक बंगला चौराहे की ओर बढ़ रहा था। यहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। बैरिकेडिंग के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारी लगातार आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जबकि पुलिस उन्हें प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर जाने से रोक रही थी। तेजस्वी यादव को लिया गया हिरासत में मार्च के दौरान पुलिस ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को प्रिवेंटिव डिटेंशन में लिया। उन्हें सचिवालय थाने ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक, राजभवन का इलाका प्रतिबंधित क्षेत्र है और प्रदर्शनकारी वहां जाने की कोशिश कर रहे थे। बाद में तेजस्वी यादव को हिरासत से रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई के बावजूद RJD नेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन जारी रहा। AK-47 के कटआउट लेकर पहुंचे RJD कार्यकर्ता मार्च के दौरान कुछ RJD कार्यकर्ता AK-47 जैसे दिखने वाले कटआउट लेकर भी पहुंचे। इसके जरिए सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी द्वारा कथित तौर पर AK-47 से हवाई फायरिंग किए जाने की घटना का विरोध किया गया। इस घटना का एक वीडियो सामने आने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को निलंबित किए जाने की बात सामने आई थी। RJD नेताओं ने इसी मुद्दे को लेकर सरकार से जवाब मांगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मीसा भारती ने DM-SP पर कार्रवाई की मांग की RJD सांसद मीसा भारती ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन के दौरान AK-47 के इस्तेमाल की बात स्वीकार की है। मीसा भारती ने संबंधित जिले के DM और SP के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें तत्काल निलंबित करने की मांग उठाई। राज्यपाल के सचिव को सौंपा ज्ञापन तेजस्वी यादव की हिरासत के बाद RJD का एक प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा। इसमें मनोज झा, सुधाकर सिंह, अब्दुल वारिस सिद्दीकी समेत पार्टी के कई नेता शामिल थे। राज्यपाल की गैरमौजूदगी में प्रतिनिधिमंडल ने उनके सचिव को ज्ञापन सौंपा। इसमें परीक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक, रोजगार और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई समेत कई मुद्दे उठाए गए। RJD नेताओं ने इन मामलों में सरकार से जवाब और उचित कार्रवाई की मांग की।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Proposed 336 km six-lane Buxar Bhagalpur Expressway connecting 13 districts across Bihar
बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे से बदलेगी बिहार की सड़क कनेक्टिविटी, 13 जिलों से होकर गुजरेगा 336 KM का हाईवे

पटना: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली एक बड़ी परियोजना को मंजूरी मिली है। बक्सर से भागलपुर तक 336 किलोमीटर लंबा 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बिहार के 13 जिलों को जोड़ेगा और इसके बनने से लंबी दूरी के सफर का समय काफी कम होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में परियोजना को मंजूरी दी गई। यह एक्सप्रेसवे दक्षिण बिहार के कई जिलों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के साथ व्यापार, उद्योग और माल ढुलाई के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किन 13 जिलों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे? बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे बिहार के बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर से होकर गुजरेगा। इससे इन जिलों के बीच आवागमन आसान होगा। बक्सर में एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है। इसके बाद दिल्ली और लखनऊ की तरफ से आने वाले वाहनों को पटना के भीड़भाड़ वाले रास्तों से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है। बक्सर से भागलपुर का सफर होगा काफी तेज फिलहाल बक्सर से भागलपुर पहुंचने में सड़क की स्थिति और ट्रैफिक के आधार पर करीब 10 से 12 घंटे तक लग सकते हैं। एक्सप्रेसवे बनने के बाद यह यात्रा करीब 4 से 5 घंटे में पूरी होने की उम्मीद है। इसका फायदा आम यात्रियों के साथ-साथ मालवाहक वाहनों को भी मिलेगा। लंबी दूरी की यात्रा में समय और ईंधन दोनों की बचत हो सकती है। सोन, पुनपुन, फल्गु और किऊल नदी पर बनेंगे पुल प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के रास्ते में कई नदियां आएंगी। इन्हें पार करने के लिए बड़े पुल और जरूरत के अनुसार एलिवेटेड स्ट्रक्चर बनाए जाने की योजना है। सोन, पुनपुन, फल्गु और किऊल जैसी नदियों पर बनने वाले पुल इस परियोजना के अहम हिस्से होंगे। ग्रीनफील्ड और एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे क्यों खास? यह परियोजना ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगी। इसका मतलब है कि इसे किसी मौजूदा सड़क को चौड़ा करके नहीं, बल्कि नए मार्ग पर विकसित किया जाएगा। साथ ही एक्सप्रेसवे एक्सेस कंट्रोल्ड होगा। आम सड़क की तरह गांव, बाजार या स्थानीय रास्तों से सीधे वाहन इसमें प्रवेश नहीं कर सकेंगे। इसके लिए निर्धारित एंट्री और एग्जिट प्वाइंट बनाए जाएंगे। योजना के अनुसार करीब 10 प्रमुख प्रवेश और निकास बिंदु बनाए जाने हैं। न चौराहे होंगे, न ट्रैफिक सिग्नल एक्सप्रेसवे पर सामान्य सड़कों की तरह जगह-जगह चौराहे और ट्रैफिक सिग्नल नहीं होंगे। रेलवे क्रॉसिंग की जरूरत भी नहीं होगी। स्थानीय सड़कों और आबादी वाले इलाकों को जोड़ने के लिए इंटरचेंज, फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जाएंगे। इससे मुख्य एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार बनाए रखने में मदद मिलेगी। कई प्रमुख सड़कों से जुड़ेगा एक्सप्रेसवे बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे को बिहार की कई महत्वपूर्ण सड़कों से जोड़ने की योजना है। इनमें मोकामा-मिर्जाचौकी एनएच-33 ग्रीनफील्ड फोरलेन, सुल्तानगंज-अगुवानी फोरलेन अप्रोच रोड, मुंगेर-सबौर गंगा पथ और एनएच-80 शामिल हैं। इन कनेक्शनों से दक्षिण और पूर्वी बिहार के अलग-अलग हिस्सों के बीच सड़क नेटवर्क और मजबूत होने की उम्मीद है। एक्सप्रेसवे के आसपास बनेंगे इंडस्ट्रियल हब सरकार की योजना इस परियोजना को केवल बेहतर सड़क तक सीमित रखने की नहीं है। एक्सप्रेसवे के आसपास बड़े लैंड बैंक, इंडस्ट्रियल हब, इकोनॉमिक जोन और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करने की योजना है। इससे नए उद्योगों के लिए बेहतर आधार तैयार हो सकता है और बिहार में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। व्यापार और रोजगार के लिए भी अहम परियोजना एक्सप्रेसवे बनने के बाद कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही तेज हो सकती है। उद्योगों को दूसरे राज्यों के बाजारों तक पहुंचने में भी सुविधा मिलेगी। इसके आसपास औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियां बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। ऐसे में इस परियोजना को बिहार के सड़क ढांचे के साथ-साथ आर्थिक विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। PPP मॉडल पर विकसित करने की तैयारी बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित करने की योजना है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब डीपीआर कंसल्टेंट और ट्रांजेक्शन एडवाइजर की नियुक्ति जैसी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जाएंगी। फिलहाल परियोजना शुरुआती चरण में है। डीपीआर और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निर्माण की समयसीमा को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Bihar farmers to get interest relief on agricultural loans up to ₹3 lakh under new government scheme
बिहार के किसानों को बड़ी राहत, 3 लाख तक के कृषि लोन पर ब्याज घटकर 3% तक

पटना: बिहार के किसानों के लिए कृषि ऋण को लेकर राहत की खबर है। राज्य सरकार ने 3 लाख रुपये तक के कृषि लोन पर अतिरिक्त ब्याज अनुदान देने की व्यवस्था की है। केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान के अलावा बिहार सरकार 1 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान देगी। इससे पात्र किसानों के लिए कृषि ऋण की प्रभावी ब्याज दर करीब 3 प्रतिशत तक आ सकती है। इस योजना को लागू करने के लिए बिहार के कृषि विभाग और नाबार्ड (NABARD) के बीच समझौता हुआ है। कृषि मंत्री विजय सिन्हा की मौजूदगी में दोनों पक्षों के अधिकारियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। सामान्य कृषि लोन पर कितना ब्याज लगता है? कृषि ऋण पर सामान्य तौर पर करीब 7 प्रतिशत ब्याज दर लागू होती है। केंद्र की ओर से 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिलने के बाद बिहार सरकार की तरफ से 1 प्रतिशत अतिरिक्त राहत दी जाएगी। इस तरह पात्र किसानों के लिए 3 लाख रुपये तक के ऋण पर ब्याज का प्रभावी बोझ करीब 3 प्रतिशत तक रह सकता है। हालांकि, इसका लाभ लेने के लिए किसानों को निर्धारित समय के भीतर अपना कर्ज चुकाना जरूरी होगा। KCC और फसल ऋण लेने वाले किसानों को भी लाभ इस ब्याज राहत योजना के दायरे में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), फसल ऋण और अन्य अल्पावधि कृषि उत्पादन ऋण शामिल हैं। योजना का लाभ केवल बड़े या जमीन के मालिक किसानों तक सीमित नहीं है। लघु और सीमांत किसानों के अलावा पात्र बटाईदार, मौखिक पट्टेदार और संयुक्त देयता समूह (JLG) के सदस्य भी इसके दायरे में आ सकते हैं। अलग-अलग तरह की फसलों के लिए लिए गए पात्र अल्पावधि कृषि ऋण को भी योजना में शामिल किया गया है। 3 लाख से ज्यादा कर्ज लेने पर क्या होगा? अगर किसी किसान ने 3 लाख रुपये से अधिक का कृषि ऋण लिया है, तो ब्याज अनुदान का लाभ अधिकतम 3 लाख रुपये की राशि तक ही मिलेगा। इसके ऊपर की ऋण राशि पर यह अतिरिक्त ब्याज राहत लागू नहीं होगी। यानी 4 लाख रुपये के कृषि ऋण पर भी अनुदान की गणना अधिकतम 3 लाख रुपये की पात्र राशि पर ही की जाएगी। समय पर कर्ज चुकाना जरूरी इस योजना का लाभ लेने के लिए समय पर ऋण भुगतान महत्वपूर्ण है। निर्धारित समय सीमा के अंदर कर्ज चुकाने वाले पात्र किसानों को ही ब्याज अनुदान का फायदा मिलेगा। इसलिए किसानों के लिए समय पर ऋण भुगतान करना योजना का अहम हिस्सा है। सरकार ने क्यों शुरू की यह व्यवस्था? वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार सरकार ने इस योजना के तहत 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। सरकार का उद्देश्य किसानों को साहूकारों या अनौपचारिक स्रोतों के बजाय संस्थागत माध्यम से कृषि ऋण लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही सरकार खेती के लिए लिए जाने वाले कर्ज का ब्याज बोझ कम करना चाहती है, ताकि किसान कम लागत में कृषि गतिविधियों को जारी रख सकें। समय पर भुगतान करने वाले किसानों को ब्याज में राहत देकर नियमित ऋण चुकाने की प्रवृत्ति को भी बढ़ावा देने की कोशिश की गई है।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Bihar weather alert warns of heavy rain, thunderstorms, lightning and strong winds across 11 districts
बिहार के 11 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बिगड़ेगा मौसम; 21 अगस्त तक एडवाइजरी

बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय नजर आ रहा है। राज्य के कई हिस्सों में रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है, जबकि कई जिलों में दिनभर बादल छाए हुए हैं। इसी बीच मौसम विभाग ने बुधवार को 11 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में भारी बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की अपील की है। किसानों को विशेष रूप से सलाह दी गई है कि गरज-चमक और बिजली गिरने की आशंका के दौरान खेतों में काम करने से बचें। इन 11 जिलों में ऑरेंज अलर्ट बुधवार को पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, बक्सर, भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इनमें औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत अधिक रहने का अनुमान है। मौसम खराब होने के दौरान तेज हवाओं और आकाशीय बिजली को लेकर भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। बिहार में अब भी 41 फीसदी कम बारिश बारिश का दौर जारी रहने के बावजूद बिहार में इस मानसून अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक 387.7 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा 687.7 मिलीमीटर होना चाहिए था। इस लिहाज से राज्य में अब तक करीब 41 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, आने वाले दिनों में मानसूनी गतिविधियां बढ़ने की संभावना से बारिश की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है। 20 अगस्त को इन जिलों में भी ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार 20 अगस्त को भी कई जिलों में भारी बारिश का खतरा रहेगा। इस दिन पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, बक्सर, भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, कैमूर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान कुछ इलाकों में तेज बारिश के साथ बिजली गिरने और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है। 21 अगस्त को ज्यादातर जिलों में येलो अलर्ट 21 अगस्त को मौसम विभाग ने खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, बांका और जमुई को छोड़कर राज्य के बाकी अधिकांश जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, अररिया और किशनगंज में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इन क्षेत्रों में तेज हवा और आकाशीय बिजली को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है। बंगाल की खाड़ी का सिस्टम बढ़ा रहा बारिश मौसम में बदलाव के पीछे बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके प्रभाव से पूर्वी भारत में मानसूनी गतिविधियां सक्रिय हैं। बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी वाली हवाएं बिहार की ओर पहुंच रही हैं। मानसून ट्रफ और इन नम हवाओं के प्रभाव से राज्य में आने वाले दिनों में भी रुक-रुककर बारिश जारी रहने की संभावना है। लोगों के लिए जरूरी सावधानी भारी बारिश, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली के दौरान खुले मैदान, पेड़, बिजली के खंभों और ऊंची संरचनाओं के नीचे खड़े होने से बचें। किसान खराब मौसम में खेतों में काम करने से बचें और स्थानीय प्रशासन व मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
Security agencies question Mohammad Zafar's family in Purnia during investigation into alleged terror network links
पूर्णिया में आतंकी नेटवर्क की जांच पहुंची गांव तक, मोहम्मद जफर के परिवार से तीन घंटे पूछताछ

मेरठ में कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामले में मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों की जांच अब पूर्णिया के मीरगंज गांव तक पहुंच गई है। मंगलवार को रौटा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल की टीम जफर के पैतृक घर पहुंची और परिवार के सदस्यों से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। जांच एजेंसियां जफर की पढ़ाई, उसके संपर्कों, हाल की गतिविधियों, यात्रा और कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारियां जुटा रही हैं। हालांकि, जफर पर लगाए गए आरोपों और उसकी कथित भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। परिवार से पूछताछ, शिक्षा और संपर्कों पर फोकस सुरक्षा एजेंसियों ने जफर के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से उसकी पढ़ाई, मदरसे से जुड़े काम, शादी और घर से बाहर रहने के बारे में जानकारी ली। पूछताछ में यह जानने की कोशिश की गई कि जफर ने किन जगहों पर पढ़ाई की, किन लोगों के संपर्क में रहा और हाल के दिनों में उसकी गतिविधियां क्या थीं। परिवार से उसके घर से निकलने के बाद की पूरी यात्रा की जानकारी भी मांगी गई। पहले मधेपुरा, फिर पहुंचा मेरठ परिजनों के अनुसार जफर करीब 25 दिन पहले घर से निकला था। वह पहले मधेपुरा गया और इसके बाद मेरठ पहुंचा, जहां यूपी एटीएस ने उसे गिरफ्तार किया। अब जांच एजेंसियां मधेपुरा में उसके ठहरने की जगह और वहां बने संभावित संपर्कों की जानकारी जुटा रही हैं। इसके साथ ही मेरठ में उसकी गतिविधियों और संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है। मई में हुई थी शादी परिवार के मुताबिक जफर की शादी इसी साल मई में किशनगंज जिले के बहादुरगंज क्षेत्र में हुई थी। परिजनों का कहना है कि शादी के बाद वह पहली बार घर से बाहर निकला था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि घर से निकलने के बाद उसकी यात्रा का उद्देश्य क्या था और इस दौरान वह किन लोगों के संपर्क में आया। मदरसे में पढ़ाई और बच्चों को पढ़ाने का काम उपलब्ध जानकारी के अनुसार जफर ने शुरुआती पढ़ाई मीरगंज के एक मदरसे से की थी। इसके बाद उसने बुलंदशहर में रहकर मौलवी की शिक्षा पूरी की। बाद में वह पूर्णिया लौटा और माधोपाड़ा स्थित एक मदरसे में बच्चों को पढ़ाने का काम करने लगा। एजेंसियां उसके शैक्षणिक और सामाजिक संपर्कों से संबंधित जानकारी भी जुटा रही हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की शिक्षा, भाषा या धार्मिक संस्थान से जुड़ाव मात्र से उसकी आपराधिक गतिविधि में भूमिका साबित नहीं होती। इस मामले में निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा। पासपोर्ट और यात्रा रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में जफर के नाम पर पासपोर्ट होने की जानकारी सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां इससे जुड़े दस्तावेज और यात्रा रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। जांच में यह देखा जा रहा है कि पासपोर्ट कब बना, किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ और क्या इससे जुड़ी कोई विदेश यात्रा दर्ज है। एनआईए इनपुट पर गिरफ्तारी का दावा रिपोर्ट के अनुसार एनआईए के इनपुट के आधार पर यूपी एटीएस ने जफर को मेरठ से गिरफ्तार किया। उस पर कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ाव और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के आरोप लगाए गए हैं। आरोप यह भी है कि वह कथित तौर पर चंदा जुटाने और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पाकिस्तान में मौजूद संदिग्ध आतंकी हैंडलर्स तक धन पहुंचाने की कोशिश से जुड़ा था। इन आरोपों की पुष्टि जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया से ही होगी। फिलहाल पूर्णिया में हुई पूछताछ को इसी जांच की अगली कड़ी माना जा रहा है। एजेंसियां मधेपुरा से मेरठ तक जफर की यात्रा, उसके संपर्कों और कथित वित्तीय गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
Tejashwi Yadav Protest
तेजस्वी यादव आज करेंगे राजभवन मार्च, छात्रों के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन

पटना। बिहार में छात्रों और युवाओं के मुद्दों को लेकर सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव आज, 19 अगस्त को राजधानी पटना में राजभवन मार्च करेंगे। मार्च में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, नियमित भर्ती, बेरोजगारी और छात्रों की अन्य मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। तेजस्वी यादव और RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ छात्र संगठनों और युवाओं से मार्च में शामिल होने की अपील की है। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर तैयारियां की गई हैं।   गांधी मैदान से राजभवन तक मार्च   राजभवन मार्च की शुरुआत सुबह करीब 10 बजे गांधी मैदान से होने की जानकारी दी गई है। प्रदर्शनकारी विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए राजभवन की ओर बढ़ेंगे। मार्च के मद्देनजर पटना में ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है और प्रशासन की ओर से एडवाइजरी जारी की गई है।   इन रास्तों से गुजरेगा मार्च   प्रस्तावित रूट के अनुसार मार्च जेपी गोलंबर, डाकबंगला चौराहा, तारामंडल, इनकम टैक्स गोलंबर, पटना वीमेंस कॉलेज, बिहार म्यूजियम, विश्वसरैया भवन, पंचमुखी हनुमान मंदिर और बेली रोड होते हुए लोकभवन की ओर जाएगा।   प्रदर्शन को देखते हुए इन इलाकों में यातायात प्रभावित होने की संभावना है।   गर्दनीबाग में अभ्यर्थियों से मिले थे तेजस्वी   राजभवन मार्च से एक दिन पहले मंगलवार को तेजस्वी यादव ने गर्दनीबाग धरना स्थल पर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात की थी। उन्होंने छात्रों की मांगों का समर्थन किया और सरकार से उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।   तेजस्वी ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है और सरकार को छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए।   लालू यादव बोले- 'यूथ का फ्यूचर मत खाओ'   मार्च को लेकर लालू प्रसाद यादव ने भी सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 'दाल-भात खाओ, बट यूथ का फ्यूचर मत खाओ।' उन्होंने छात्रों और युवाओं से 19 अगस्त को पटना में एकजुट होने की अपील भी की। लालू ने पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रिया और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा।   सीवान में फायरिंग के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा   तेजस्वी यादव ने सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर AK-47 से फायरिंग के मामले को लेकर भी सरकार से कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने हथियार जारी करने, पुलिसकर्मी की तैनाती, फायरिंग के आदेश, इस्तेमाल हुए कारतूस, बैलिस्टिक जांच और कमांड-चेन की जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाए हैं।   उन्होंने मांग की है कि जांच सिर्फ फायरिंग करने वाले जवान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि हथियार किसके आदेश पर जारी किया गया और पूरी प्रक्रिया में किस-किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी।   छात्रों और युवाओं के मुद्दे होंगे केंद्र में   राजभवन मार्च के जरिए RJD परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, भर्ती प्रक्रिया में नियमितता, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को उठाने की तैयारी में है। मार्च को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यातायात प्रबंधन के भी इंतजाम किए हैं।

anjali kumari अगस्त 19, 2026 0
Prashant Kishor meets Bihar DGP after becoming Bankipur MLA to raise traffic, vendor extortion and drug concerns
बांकीपुर के विधायक बनते ही एक्शन में प्रशांत किशोर, DGP से मिले; ट्रैफिक, वेंडरों से कथित वसूली और नशे का मुद्दा उठाया

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव जीतकर विधायक बने प्रशांत किशोर ने शपथ लेने के अगले ही दिन क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं को लेकर सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। उन्होंने बिहार के डीजीपी विनय कुमार से मुलाकात कर बांकीपुर से जुड़े तीन अहम मुद्दे पुलिस प्रशासन के सामने रखे। प्रशांत किशोर ने ट्रैफिक व्यवस्था, वेंडरों से कथित वसूली और युवाओं में नशीले पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर तत्काल कार्रवाई की जरूरत बताई। उनका कहना है कि इन समस्याओं का समाधान केवल तात्कालिक कार्रवाई से नहीं, बल्कि लंबे समय की ठोस योजना से होना चाहिए। ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने पर जोर डीजीपी के साथ बैठक में बांकीपुर की यातायात व्यवस्था प्रमुख मुद्दों में रही। प्रशांत किशोर ने कहा कि पटना के महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्रों में शामिल बांकीपुर में लगातार बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी है। उन्होंने ट्रैफिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने और आने वाले वर्षों में स्थायी सुधार की दिशा में काम करने पर जोर दिया। वेंडरों से कथित वसूली का मामला उठाया प्रशांत किशोर ने क्षेत्र में अनियमित वेंडिंग व्यवस्था के साथ-साथ पुलिसकर्मियों द्वारा वेंडरों से कथित तौर पर पैसे लिए जाने की शिकायत भी डीजीपी के सामने रखी। उन्होंने इस मामले में उचित कार्रवाई और वेंडिंग व्यवस्था को व्यवस्थित करने की जरूरत बताई। प्रशांत किशोर के अनुसार, इस मुद्दे पर सरकार के साथ भी बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। युवाओं में नशे की समस्या पर चिंता बैठक में युवाओं और बच्चों के बीच नशीले पदार्थों के इस्तेमाल की शिकायत भी उठाई गई। प्रशांत किशोर ने पुलिस निगरानी मजबूत करने और ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि युवाओं को नशे से दूर रखना केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। विधायक बनने के बाद स्थानीय मुद्दों पर फोकस बांकीपुर उपचुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर ने क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं को अपनी प्राथमिकता में शामिल किया है। रोजगार को लेकर भी वह पहले ही बड़ा दावा कर चुके हैं। उन्होंने बांकीपुर के कम से कम 10 हजार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार दिलाने में मदद करने की बात कही है। अब देखना होगा कि डीजीपी के साथ हुई बैठक के बाद इन तीनों मुद्दों पर प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और बांकीपुर के लोगों को इसका कितना लाभ मिलता है।  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
Jitan Ram Manjhi responds to Tejashwi Yadav during a political exchange in Bihar
जीतन राम मांझी का तेजस्वी यादव पर पलटवार, बोले- ‘इतना जल्दी नहीं मरूंगा’, ‘कुछ न कुछ पदार्थ लिए हुए हैं’

बिहार की राजनीति में बुधवार को एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई। गया में पर्वत पुरुष दशरथ मांझी की श्रद्धांजलि सभा के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी को श्रद्धांजलि दिए जाने के बाद मांझी ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वह अभी इतनी जल्दी मरने वाले नहीं हैं और बिहार की जनता के लिए उन्हें अभी कई काम करने हैं। मांझी ने तेजस्वी यादव के बयान पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि ऐसी बातें करने से लगता है कि उन्होंने “कुछ न कुछ पदार्थ लिया हुआ है।” उनके इस बयान के बाद बिहार में सियासी घमासान और तेज होने के आसार हैं। ‘इतना जल्दी हम मरने वाले नहीं हैं’ जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्हें अभी बिहार और यहां की जनता के लिए बहुत काम करना है। उन्होंने कहा कि जनता की दुआएं उनके साथ हैं और वह सक्रिय राजनीति में बने रहकर जनहित के मुद्दों पर काम करते रहेंगे। मांझी ने तेजस्वी यादव द्वारा श्रद्धांजलि दिए जाने को लेकर कहा कि उन्हें अभी श्रद्धांजलि देने की जरूरत नहीं है। उनका कहना था कि वह पूरी तरह सक्रिय हैं और आने वाले समय में भी जनता के बीच रहकर काम करेंगे। तेजस्वी के बयान पर तीखा तंज मांझी ने तेजस्वी यादव की टिप्पणी पर व्यक्तिगत तंज भी किया। उन्होंने कहा कि सामान्य व्यक्ति इस तरह की बातें नहीं करता और तेजस्वी के बयान से उन्हें लगा कि उन्होंने “कुछ न कुछ पदार्थ लिया हुआ है।” मांझी की यह टिप्पणी अब राजनीतिक विवाद का नया मुद्दा बन सकती है। बिहार में पहले से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी जारी है और इस नए विवाद के बाद दोनों पक्षों के बीच जुबानी टकराव बढ़ने की संभावना है। तेजस्वी के पुराने कार्यकाल पर भी निशाना केंद्रीय मंत्री ने तेजस्वी यादव के साथ काम करने के अपने अनुभव का जिक्र करते हुए उनके पुराने कार्यकाल पर भी सवाल उठाए। मांझी ने शिक्षा और विकास के मुद्दे पर पुराने दौर की तुलना मौजूदा सरकार से की। उन्होंने कहा कि पहले “चरवाहा विद्यालय” की चर्चा होती थी, जबकि अब राज्य में डिग्री कॉलेज और उच्च शिक्षा से जुड़े संस्थानों पर काम हो रहा है। मांझी ने बिहार में विकास योजनाओं और नए शैक्षणिक संस्थानों को सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश किया। गया की विकास परियोजनाओं का किया जिक्र मांझी ने गया और बोधगया से जुड़ी प्रस्तावित विकास परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने विष्णुपद मंदिर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर से जुड़े काम का जिक्र करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को लेकर 20 अगस्त को दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक होनी है। उनके मुताबिक, इन योजनाओं से गया और बोधगया में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है और क्षेत्र के विकास को नई गति मिल सकती है। ‘डबल इंजन सरकार’ को बताया विकास की वजह जीतन राम मांझी ने केंद्र और बिहार में एनडीए सरकार को विकास की रफ्तार बढ़ाने वाला बताया। उनका कहना था कि केंद्र और राज्य में समान गठबंधन होने से बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में आसानी होती है। इस पूरे घटनाक्रम में खास बात यह है कि तेजस्वी यादव की श्रद्धांजलि वाली टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद अब व्यक्तिगत बयानबाजी से आगे बढ़कर बिहार के विकास मॉडल और पिछली सरकारों के कामकाज की तुलना तक पहुंच गया है।  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
Patna traffic restrictions announced ahead of RJD Lok Bhavan March on August 19, affecting major city routes
लोकभवन मार्च को लेकर पटना में ट्रैफिक व्यवस्था बदली, कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों की नो एंट्री

पटना में बुधवार, 19 अगस्त को राष्ट्रीय जनता दल के लोकभवन मार्च को देखते हुए शहर की यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। गांधी मैदान से प्रस्तावित मार्च के कारण सुबह 9 बजे से कार्यक्रम समाप्त होने तक कई प्रमुख मार्गों पर वाहनों के परिचालन पर रोक या डायवर्जन लागू रहेगा। ट्रैफिक पुलिस ने शहर में संभावित जाम और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए विशेष व्यवस्था की है। पुलिस ने वाहन चालकों और आम लोगों से अपील की है कि वे जरूरी यात्रा के लिए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें। पटना जंक्शन से डाकबंगला जाने वाले वाहन होंगे डायवर्ट ट्रैफिक प्लान के अनुसार पटना जंक्शन की ओर से डाकबंगला चौराहा जाने वाले वाहनों का परिचालन प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा जाएगा। इसी तरह इनकम टैक्स चौराहा से मंदिरी नाला की तरफ जाने वाले मार्ग पर भी यातायात को डायवर्ट किया गया है। गांधी मैदान के आसपास ऑटो और ई-रिक्शा पर रोक लोकभवन मार्च के दौरान गांधी मैदान के चारों तरफ व्यावसायिक वाहनों के परिचालन पर विशेष प्रतिबंध रहेगा। इसमें ऑटो और ई-रिक्शा भी शामिल हैं। दानापुर से राजापुर पुल की ओर आने वाले ऑटो और ई-रिक्शा को पुलिस लाइन तिराहा से वापस दानापुर की तरफ भेजा जाएगा। वहीं गायघाट की ओर से आने वाले ऑटो को कारगिल चौक से डबल डेकर के पश्चिमी छोर की ओर मोड़कर वापस भेजने की व्यवस्था की गई है। इन मार्गों पर भी ऑटो-ई-रिक्शा का परिचालन बंद ट्रैफिक पुलिस के अनुसार कुछ अन्य प्रमुख मार्गों पर भी ऑटो और ई-रिक्शा के परिचालन पर रोक रहेगी। इनमें एग्जिबिशन रोड पर भट्टाचार्य चौराहा से उत्तर की ओर का हिस्सा, बुद्धमार्ग और छज्जूबाग क्षेत्र, टीएन बनर्जी पथ, पुलिस लाइन से बैंक रोड तथा बुद्ध मार्ग पुलिस लाइन तिराहा से कोतवाली टी तक का मार्ग शामिल है। मार्च के दौरान इन क्षेत्रों में यातायात दबाव बढ़ने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने पहले से वैकल्पिक व्यवस्था की है। सुबह 9 बजे से लागू रहेगा विशेष ट्रैफिक प्लान विशेष ट्रैफिक व्यवस्था बुधवार सुबह 9 बजे से शुरू होगी और लोकभवन मार्च समाप्त होने तक लागू रहेगी। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में जाना जरूरी नहीं है तो मार्च के दौरान उन मार्गों से बचें। जरूरी यात्रा करने वाले लोग पहले से अपने वैकल्पिक रास्ते की योजना बना लें। सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम लोकभवन मार्च को लेकर पटना पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है। गांधी मैदान के जेपी गोलंबर से सचिवालय तक करीब 1,000 पुलिस पदाधिकारियों और जवानों की तैनाती की गई है। संवेदनशील स्थानों पर वाटर कैनन और टियर गैस टीम भी तैनात रहेगी। सभी संबंधित थानों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। नेहरू पथ, हार्डिंग रोड, बोरिंग कैनाल रोड समेत शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। यात्रियों के लिए जरूरी सलाह लोकभवन मार्च के कारण पटना के कई प्रमुख हिस्सों में ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है। खासकर पटना जंक्शन, डाकबंगला, गांधी मैदान, इनकम टैक्स चौराहा और आसपास के क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है। सबसे बेहतर होगा कि यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग चुनें और स्थानीय ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें।  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
BPSC TRE 4
बिहार में 32,388 शिक्षक पदों की भर्ती का नोटिफिकेशन आज आने की उम्मीद, अभ्यर्थियों की नजरें टिकीं

पटना, एजेंसियां। बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए आज बड़ा अपडेट सामने आया है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की ओर से 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती का विज्ञापन 18 अगस्त की शाम तक जारी किए जाने की उम्मीद जताई गई है। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि शिक्षा विभाग की ओर से भेजी गई अधियाचना पर आयोग की तैयारी पूरी हो चुकी है।   32,388 पदों पर होगी भर्ती   TRE-4 भर्ती में कुल 32,388 शिक्षकों की नियुक्ति की जानी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सबसे ज्यादा 16,101 पद कक्षा 11वीं और 12वीं के शिक्षकों के लिए हैं। पदों का संभावित ब्योरा इस प्रकार है: कक्षा 1 से 5 — 3,847 पद कक्षा 6 से 8 — 8,563 पद कक्षा 9 से 10 — 3,877 पद कक्षा 11 से 12 — 16,101 पद कुल — 32,388 पद नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थी   TRE-4 के विज्ञापन में लगातार देरी को लेकर शिक्षक अभ्यर्थियों में काफी नाराजगी है। छात्र संगठनों ने 18 अगस्त से पटना में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने का ऐलान किया था। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में भर्ती विज्ञापन जारी करना और परीक्षा की स्पष्ट तारीख घोषित करना शामिल है।   BPSC की ओर से पहले ही फर्जी शिक्षक भर्ती नोटिस को लेकर अभ्यर्थियों को सावधान किया जा चुका है। आयोग ने कहा है कि भर्ती से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा किया जाए।   परीक्षा पैटर्न में बदलाव की भी चर्चा   TRE-4 को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव की जानकारी भी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक इस बार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा का प्रावधान किया जा सकता है। पिछली TRE परीक्षाओं में एक ही लिखित परीक्षा के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी की जाती थी। हालांकि, अंतिम परीक्षा पैटर्न और अन्य शर्तों की पुष्टि आधिकारिक विज्ञापन जारी होने के बाद ही होगी।   अब अभ्यर्थियों की नजरें BPSC के आधिकारिक विज्ञापन पर टिकी हैं। यदि आज विज्ञापन जारी होता है तो आवेदन की तारीख, पात्रता, परीक्षा पैटर्न, शुल्क और परीक्षा कार्यक्रम की पूरी जानकारी उसी में स्पष्ट होगी।

anjali kumari अगस्त 18, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

JPSC-JSSC aspirants demand permission for hospitalized student leader Devendra Nath Mahto to join protest
झारखंड

अस्पताल में भर्ती देवेंद्र नाथ महतो को धरना स्थल आने की अनुमति देने की मांग, 12वें दिन भी भूख हड़ताल जारी

kalpana अगस्त 14, 2026 0