झारखंड

JPSC-JSSC विवाद: बाबूलाल का हमला, बोले- CBI जांच से क्यों भाग रही सरकार?

anjali kumari अगस्त 12, 2026 0
JPSC JSSC Controversy
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रांची। झारखंड में JPSC-JSSC प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों से जांच कराने से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें संरक्षण देने की कोशिश कर रही है, ताकि जांच की आंच ऊपर तक न पहुंच सके।

 

ED की ECIR के बाद पूर्व मुख्य सचिव की गिरफ्तारी पर सवाल

 

बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि सरकार अब तक छात्रों से JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली की ED से जांच कराने की बात कहती रही है। लेकिन ED की ओर से ECIR दर्ज किए जाने के बाद पूर्व मुख्य सचिव और JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया।

 

उन्होंने कहा कि एल. ख्यांग्ते को CID पहले ही चार बार पूछताछ के लिए बुला चुकी थी। मरांडी ने दावा किया कि कुछ वर्ष पहले इसी तरह ACB ने विनय चौबे को ED की जांच से बचाने के लिए गिरफ्तार किया था।

 

राज्य की एजेंसियों की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

 

नेता प्रतिपक्ष ने JPSC और JSSC में कथित तौर पर नौकरी बेचने के मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के करीबी बताए जाने वाले विनोद सिंह, मुख्य सचिव अविनाश कुमार के सहयोगी धर्मेंद्र और पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांग्ते जैसे नामों के सामने आने के बाद राज्य की जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

 

मरांडी ने JSSC-CGL मामले में हुई CID जांच का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस मामले में भी छात्रों ने जांच की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए थे।

 

‘CBI जांच से क्यों भाग रही सरकार?’

 

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार आरोपियों को गिरफ्तार कर केंद्रीय एजेंसियों की जांच की पहुंच को सीमित करना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि अगर JPSC-JSSC की कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष CBI जांच होती है, तो उसकी आंच मुख्यमंत्री तक भी पहुंच सकती है।

 

मरांडी ने इसी आशंका को सरकार के CBI जांच से बचने की वजह बताया। हालांकि, ये सभी आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।

 

11 अगस्त को विधानसभा में CM ने क्या कहा?

 

JPSC-JSSC विवाद के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 11 अगस्त को विधानसभा में सरकार का रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा कि सरकार 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने के लिए तैयार है। इसके अलावा जिन परीक्षाओं के आयोजन में TDPL एजेंसी की भूमिका रही है, उनकी भी जांच कराने की बात कही।

 

मुख्यमंत्री ने भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए IIT, IIM और XLRI जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों से सलाह लेने की बात कही। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाया जाएगा।

 

छात्रों की मांग पर अब भी कायम है गतिरोध

 

वहीं, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा परिणाम रद्द करना और TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की जांच CBI से कराने की मांग शामिल है।

 

ऐसे में सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच गतिरोध बना हुआ है। अब बाबूलाल मरांडी के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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रांची। झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पित्रोदा ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में बयान देते हुए कहा कि छात्र दुश्मन नहीं हैं, बल्कि वे देश का भविष्य हैं। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग की तस्वीरों और वीडियो पर चिंता जताई।   लाठी, आंसू गैस और वाटर कैनन के इस्तेमाल पर सवाल   रांची में JPSC-JSSC सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने विधानसभा की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसी कार्रवाई की तस्वीरों और वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए सैम पित्रोदा ने कहा कि उन्हें ये दृश्य बेहद परेशान करने वाले लगे। उन्होंने छात्रों की मांगों को सुनने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया।   ‘छात्रों को दुश्मन की तरह नहीं देखना चाहिए’   पित्रोदा ने छात्रों के आंदोलन को लोकतांत्रिक तरीके से सुनने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक युवाओं की शिकायतों को दबाने के बजाय सुधार, जवाबदेही और संवेदनशीलता के साथ उनसे बातचीत की जानी चाहिए। उन्होंने आंदोलनकारियों के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद को लेकर आंदोलन लगातार तेज हो रहा है।   18वें दिन भी जारी है छात्र आंदोलन   JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन 18वें दिन भी जारी है। आंदोलन का नेतृत्व JPSC-JSSC Reforms Manch कर रहा है। वहीं, पुलिस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को भाजपा ने झारखंड बंद का आह्वान किया। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षा विवाद में पूर्व JPSC अध्यक्ष की गिरफ्तारी और ED की जांच के कारण मामला अब राजनीतिक और जांच एजेंसियों के स्तर पर भी चर्चा में है।   सरकार से बातचीत और समाधान की मांग   सैम पित्रोदा के बयान के बाद छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। आंदोलनकारी अभ्यर्थी अपनी मांगों पर सरकार से स्पष्ट कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं। फिलहाल राज्य सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच समाधान के लिए बातचीत और आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। इस पूरे विवाद में पुलिस कार्रवाई, भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और अभ्यर्थियों की मांगें प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

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Dhanbad MP Dhulu Mahato meeting Railway Minister Ashwini Vaishnaw over the demand for a railway overbridge in Baghmara
बाघमारा ओवरब्रिज की मांग को लेकर रेल मंत्री से मिले सांसद ढुलू महतो, सौंपा मांग पत्र

धनबाद: बाघमारा में रेलवे ओवरब्रिज निर्माण की मांग को लेकर बाघमारा बचाओ नागरिक संघर्ष समिति ने दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की. धनबाद सांसद ढुलू महतो के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने रेल मंत्री को मांग पत्र सौंपकर क्षेत्र की वर्षों पुरानी समस्या का जल्द समाधान कराने की मांग की. प्रतिनिधिमंडल ने रेल मंत्री को बताया कि बाघमारा क्षेत्र में रेलवे फाटक की सुविधा नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों को रोजाना आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है. रेलवे लाइन के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और कई बार लोगों को लंबे समय तक जाम में फंसे रहना पड़ता है. विद्यार्थियों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी समिति के सदस्यों ने कहा कि रेलवे ओवरब्रिज नहीं होने का सबसे ज्यादा असर विद्यार्थियों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों और व्यवसायियों पर पड़ रहा है. रोजमर्रा के काम के लिए आने-जाने वाले लोगों को जाम और लंबे इंतजार का सामना करना पड़ता है. प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि बाघमारा में रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण हो जाता है, तो क्षेत्र की यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार होगा और हजारों लोगों को राहत मिलेगी. एक साल से आंदोलन कर रही संघर्ष समिति बाघमारा बचाओ नागरिक संघर्ष समिति के सदस्यों ने बताया कि रेलवे ओवरब्रिज की मांग को लेकर पिछले करीब एक वर्ष से लगातार आंदोलन किया जा रहा है. समिति की ओर से धरना-प्रदर्शन, जनसंपर्क अभियान और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर इस मुद्दे को सरकार तक पहुंचाया जाता रहा है. समिति का कहना है कि ओवरब्रिज निर्माण केवल किसी एक इलाके की मांग नहीं, बल्कि पूरे बाघमारा क्षेत्र के लोगों की जरूरत है. सांसद ढुलू महतो की पहल से बढ़ी उम्मीद प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि धनबाद सांसद ढुलू महतो ने भी इस समस्या को गंभीरता से लिया है और केंद्र सरकार के स्तर पर पहल शुरू की है. रेल मंत्री से मुलाकात और मांग पत्र सौंपे जाने के बाद क्षेत्र के लोगों में ओवरब्रिज निर्माण को लेकर उम्मीद जगी है. समिति ने सांसद के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि जब तक बाघमारा में रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. समिति ने कहा कि क्षेत्र की जनता की एकजुटता ही इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है. प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल रेल मंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में जोगिंदर सिंह, अखिलेश सिंह, संजय चंद्रवंशी, बैजनाथ प्रसाद, सुरेश साहू, ज्ञानेश उर्फ रामू साहू, रवींद्र पांडेय और सज्जन खंडेलवाल शामिल थे.  

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