Jharkhand Politics

Congress leader Amba Prasad addressing press conference amid rebellion in Jharkhand politics controversy
झारखंड में कांग्रेस में बगावत: अंबा प्रसाद ने खोला मोर्चा, पार्टी नेतृत्व और गठबंधन सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

पिता योगेंद्र साव के निष्कासन से भड़कीं अंबा, बोलीं– एकतरफा कार्रवाई, न्याय के लिए जाएंगी केंद्रीय नेतृत्व के पास झारखंड की राजनीति में इन दिनों घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस की पूर्व विधायक और राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने पार्टी के खिलाफ खुलकर बगावती रुख अपना लिया है। उन्होंने न केवल प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व बल्कि राज्य की गठबंधन सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। यह विवाद तब और बढ़ गया जब उनके पिता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। “कार्रवाई पूरी तरह एकतरफा” अंबा प्रसाद ने प्रेस वार्ता में कहा कि उनके पिता के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से एकतरफा और दबाव में ली गई है। उनका आरोप है कि न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही पक्ष रखने का मौका मिला। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें चेतावनी दिए जाने की बात कही गई थी। 3 साल के लिए पार्टी से बाहर योगेंद्र साव झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 20 मार्च को योगेंद्र साव को अनुशासनहीनता के आरोप में तीन वर्षों के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। पार्टी के अनुसार, उन्होंने सोशल मीडिया और फेसबुक लाइव के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गठबंधन सरकार के खिलाफ बयानबाजी की, जो संगठनात्मक नियमों के खिलाफ है। घर तोड़े जाने से बढ़ा विवाद अंबा प्रसाद ने बड़कागांव स्थित चट्टी बरियातू कोल माइंस परियोजना क्षेत्र में उनके आवास को बुलडोजर से गिराए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इस कार्रवाई को “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि बिना उचित मुआवजा और न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुए उनके घर को ध्वस्त किया गया, जिससे परिवार को गहरा आघात पहुंचा है। जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल उन्होंने यह भी सवाल खड़ा किया कि मामले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। अंबा प्रसाद ने कांग्रेस नेतृत्व, गठबंधन सरकार, पुलिस-प्रशासन और NTPC Limited पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका परिवार लंबे समय से टारगेट किया जा रहा है। “धमकियां मिलीं, करियर खत्म करने की कोशिश” अंबा प्रसाद ने दावा किया कि उनके पिता को लगातार धमकियां दी गईं और उनका राजनीतिक करियर खत्म करने की साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि निष्कासन का फैसला दबाव में लिया गया है। केंद्रीय नेतृत्व से करेंगी न्याय की मांग उन्होंने साफ किया कि इस पूरे मामले को लेकर वे कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के पास जाएंगी और न्याय की मांग करेंगी।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
MLA Satyendra Tiwari Opposes Rehabilitation Plan in Jharkhand
मंडल डैम विस्थापन पर घमासान: विधायक सत्येंद्र तिवारी ने पुनर्वास योजना का किया विरोध

विधानसभा में उठा बड़ा मुद्दा झारखंड के गढ़वा जिले से जुड़ा मंडल डैम विस्थापन का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है। क्षेत्रीय विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने बजट सत्र के आखिरी दिन ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए पुनर्वास योजना पर गंभीर आपत्ति जताई। जंगल उजाड़कर बसाने की योजना पर सवाल विधायक ने सरकार की उस योजना का विरोध किया, जिसमें बलीगढ़, बिरापुर और विश्रामपुर जैसे गांवों के बीच स्थित जंगल क्षेत्र में विस्थापित परिवारों को बसाने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत करीब 780 विस्थापित परिवारों को बसाया जाना प्रस्तावित है। 5000 ग्रामीणों की आजीविका पर खतरा सत्येंद्र तिवारी ने सदन में कहा कि इस फैसले से आसपास के करीब 5000 ग्रामीणों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। इन गांवों के लोग जंगल पर निर्भर हैं और महुआ फूल, तेंदूपत्ता, पत्तल-दोना, लाह और जड़ी-बूटियों से अपनी आजीविका चलाते हैं। जंगल क्षेत्र में बसावट होने से उनके जीवन पर सीधा असर पड़ेगा। पर्यावरण संतुलन बिगड़ने की आशंका विधायक ने यह भी चेतावनी दी कि जंगल क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों को बसाने से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है। जनसंख्या का दबाव बढ़ेगा और प्राकृतिक संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा, जिससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नुकसान हो सकता है। वैकल्पिक स्थान पर पुनर्वास की मांग उन्होंने सरकार से मांग की कि विस्थापित परिवारों को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर बसाया जाए, ताकि स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रह सकें। सड़क और पुल निर्माण की भी उठाई मांग इसके अलावा विधायक ने गैर-सरकारी संकल्प के तहत सिरोई पंचायत के ढोटी गांव तक लगभग 7 किलोमीटर पक्की सड़क और पुलिया निर्माण की मांग भी विधानसभा में रखी। इस पर संबंधित मंत्री ने सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
हेमंत सोरेन और नवीन जायसवाल नवदंपति के साथ मुलाकात करते हुए
विधायक नवीन जायसवाल के घर पहुंचे सीएम हेमंत सोरेन, नवदंपति को दिया आशीर्वाद

रांची। रांची में आयोजित एक आशीर्वाद समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ हटिया विधायक नवीन जायसवाल के आवास पहुंचे। यह आयोजन विधायक की पुत्री माही जायसवाल के विवाह उपरांत रखा गया था। मुख्यमंत्री ने समारोह में शामिल होकर नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया और उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की। परिवार से की मुलाकात इस दौरान हेमंत सोरेन ने विधायक नवीन जायसवाल और उनके परिवार से मुलाकात कर खुशी जाहिर की। कार्यक्रम में आत्मीयता और पारिवारिक अपनापन देखने को मिला। समारोह का माहौल सादगी, खुशी और गर्मजोशी से भरा रहा, जहां मौजूद सभी लोगों ने नवदंपति को दीं शुभकामनाएं।

Ranjan Kumar Tiwari मार्च 18, 2026 0
Jharkhand Assembly session with MLAs debating and passing University Bill amid protests
झारखंड विधानसभा में यूनिवर्सिटी बिल पास, VC चयन में CM की भूमिका तय, सदन में हंगामे के बीच अहम फैसले

रांची में झारखंड विधानसभा के सत्र के दौरान मंगलवार को झारखंड स्टेट यूनिवर्सिटी बिल 2026 को बहस के बाद पास कर दिया गया। इस दौरान कई विधायकों ने संशोधन के सुझाव दिए, लेकिन सरकार ने मूल प्रावधानों को बरकरार रखते हुए बिल को मंजूरी दिलाई। सत्र के दौरान शिक्षा, पेयजल और प्रशासन से जुड़े कई अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यूनिवर्सिटी बिल को मिली मंजूरी यह बिल सदन में सुदीव्य कुमार सोनू ने पेश किया। उन्होंने बताया कि इसका पहले वाला संस्करण पिछले साल अगस्त में पेश किया गया था, जिसे वापस लेकर संशोधित रूप में दोबारा लाया गया। बिल पास होने के साथ ही राज्य के विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव तय हो गया है। VC चयन में अब CM की भी भूमिका नए कानून के अनुसार: विश्वविद्यालयों के कुलपति (VC) का चयन अब राज्यपाल और मुख्यमंत्री मिलकर करेंगे अभी तक यह अधिकार केवल राज्यपाल (कुलाधिपति) के पास था सरकार का कहना है कि दो संवैधानिक पदों की संयुक्त भागीदारी से बेहतर और संतुलित निर्णय संभव होगा। विपक्ष के सुझाव, लेकिन नहीं हुए स्वीकार बहस के दौरान कई विधायकों ने अहम सुझाव दिए: राज सिन्हा ने यूनिवर्सिटी कैंपस में प्लेसमेंट एजेंसी खोलने का प्रस्ताव रखा अमित यादव ने VC चयन प्रक्रिया से मुख्यमंत्री की भूमिका हटाने की मांग की हालांकि, सरकार ने इन सभी सुझावों को खारिज कर दिया। हर घर पानी की तैयारी, लाखों चापाकल होंगे दुरुस्त सत्र के दौरान पेयजल संकट का मुद्दा भी उठा। मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि: गर्मी को देखते हुए हर घर तक पानी पहुंचाने की तैयारी की जा रही है राज्य में 1,44,906 चापाकलों की मरम्मत का आदेश दिया गया है संथाल परगना में पानी की समस्या पर चिंता विधायक हेमलाल मुर्मू ने संथाल परगना क्षेत्र में खराब चापाकलों और सूखे की समस्या उठाई। इस पर मंत्री ने स्वीकार किया कि: कई चापाकल 10 साल पुराने हो चुके हैं भूजल स्तर गिरने से पानी की समस्या बढ़ी है वैकल्पिक जल आपूर्ति योजना पर काम चल रहा है सदन में हंगामा, असंसदीय भाषा पर विवाद सत्र के दौरान विपक्षी विधायकों ने सदन में इस्तेमाल की गई कथित असंसदीय भाषा को लेकर विरोध जताया। नीरा यादव ने इस मुद्दे को उठाया उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही देखने आने वाले छात्रों पर इसका गलत असर पड़ता है स्पीकर और मंत्री ने जताया खेद रबीन्द्र नाथ महतो ने कहा कि आपत्तिजनक शब्दों को रिकॉर्ड से हटा दिया गया है। वहीं संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। BDO की कमी जल्द होगी दूर मंत्री दीपिका पांडेय ने बताया कि: राज्य के 264 ब्लॉकों में से 218 में BDO तैनात हैं बाकी 46 ब्लॉकों में सर्किल ऑफिसर अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं अगले 15-20 दिनों में सभी खाली पद भर दिए जाएंगे

surbhi मार्च 18, 2026 0
Jharkhand Assembly debate on DJ ban during festivals with leaders addressing media
‘डीजे हर हाल में बजेगा’-झारखंड विधानसभा में गूंजा बयान, त्योहारों को लेकर सियासत तेज

झारखंड में रामनवमी, सरहूल और ईद जैसे प्रमुख त्योहारों पर डीजे बजाने को लेकर सियासत गरमा गई है। विधानसभा के बाहर दिए गए एक बयान ने इस मुद्दे को और तूल दे दिया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। “डीजे हर हाल में बजेगा” - मंत्री का बड़ा बयान राज्य के स्वास्थ्य एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री इरफान अंसारी ने साफ शब्दों में कहा कि झारखंड में त्योहारों के दौरान डीजे बजेगा और हर साल बजेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने कभी डीजे पर पूरी तरह रोक लगाने की बात नहीं कही, बल्कि इसके संभावित दुष्परिणामों को लेकर लोगों को जागरूक करने की कोशिश की गई थी। मंत्री ने यह भी बताया कि जुलूसों के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सिविल सर्जनों को साथ रहने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट के आदेश बनाम राजनीतिक बयानबाजी सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि वह कोर्ट के निर्देशों का पालन कर रही है, जबकि विपक्ष इसे आम लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता में दखल बता रहा है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफिजुल हसन ने भी साफ किया कि सरकार किसी भी त्योहार के खिलाफ नहीं है और केवल नियमों का पालन करवा रही है। विपक्ष का विरोध, जुलूस निकालने की चेतावनी विधायक निर्मल महतो, मनीष प्रसाद और रौशन लाल चौधरी समेत कई नेताओं ने जुलूस पर किसी भी तरह की रोक का विरोध किया है। उनका कहना है कि: रामनवमी और अन्य त्योहारों के जुलूस हर हाल में निकलेंगे सरकार को अनुमति देनी ही होगी यदि अनुमति नहीं मिली, तो भी जुलूस निकाला जाएगा   “धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश”-सरकार का पलटवार मंत्री दीपिका सिंह पांडेय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा अफवाह और धार्मिक उन्माद फैलाकर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को नियमों पर आपत्ति है, तो वह संबंधित संस्थाओं से अनुमति ले सकता है। बाबूलाल मरांडी का बड़ा बयान प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि किसी भी धार्मिक आयोजन पर रोक लगाना गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर जुलूस निकालना सभी का अधिकार है और किसी भी डर या दबाव में इसे रोका नहीं जाना चाहिए। “सरकार लोगों को कर रही परेशान”-नीरा यादव विधायक नीरा यादव ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसे फैसले ले रही है, जिससे आम लोगों को परेशानी हो। उन्होंने कहा कि सभी लोग मिलकर त्योहार मनाएंगे और डीजे भी बजाएंगे। मुद्दा बना राजनीतिक टकराव का कारण यह विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक या कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। सत्ता पक्ष कोर्ट के आदेश और सुरक्षा व्यवस्था की बात कर रहा है विपक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ रहा है

surbhi मार्च 18, 2026 0
Former minister aiming bow and arrow at workers near coal mining site in Hazaribagh
तीर-धनुष लेकर पूर्व मंत्री का हमला! कोयला परियोजना में वर्करों पर निशाना, हजारीबाग में मचा हड़कंप

झारखंड के हजारीबाग जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां पूर्व मंत्री पर कोयला खनन परियोजना में काम कर रहे मजदूरों पर तीर-धनुष से हमला करने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है और मामला राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ता नजर आ रहा है। कोयला परियोजना में अचानक हमला, मजदूरों में अफरा-तफरी यह पूरा मामला हजारीबाग के केरेडारी क्षेत्र स्थित चट्टी बरियातू कोल परियोजना का बताया जा रहा है। यहां काम कर रहे मजदूरों पर अचानक हमला कर दिया गया, जिससे वहां मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। पूर्व मंत्री पर लगे गंभीर आरोप इस हमले का आरोप झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पर लगाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह पहाड़ी के ऊपर खड़े होकर हाथ में तीर-धनुष लिए कंपनी के वर्करों और वाहनों की ओर निशाना साधते नजर आए। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। कोयला खनन के विरोध से जुड़ा मामला बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद इलाके में चल रहे कोयला खनन कार्य को लेकर है। स्थानीय स्तर पर इस परियोजना का विरोध किया जा रहा था और उसी क्रम में यह घटना सामने आई। रिपोर्ट्स के अनुसार, संबंधित परियोजना एनटीपीसी से जुड़ी बताई जा रही है, जहां खनन कार्य जारी है। तीर चलाने से मची दहशत प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूर्व मंत्री पहाड़ की चोटी पर चढ़ गए और वहां से नीचे काम कर रहे मजदूरों की ओर तीर चलाया। इस दौरान मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां कंपनी के कर्मचारियों का दावा है कि इससे पहले भी उन्हें काम बंद करने के लिए धमकाया गया था। आरोप है कि यह घटना उसी विवाद का हिस्सा हो सकती है। जांच के बाद होगी कार्रवाई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजनीति में भी गरमाया मुद्दा यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं और कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई है। विवादों से रहा है पुराना नाता पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पहले भी अपने बयानों और गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। लेकिन इस बार तीर-धनुष से हमले के आरोप ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया है।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
Dhanbad Municipal Corporation building with Deputy Mayor election candidates Arun Chauhan and Menka Singh.
धनबाद डिप्टी मेयर चुनाव में सियासी जंग तेज: अरुण चौहान बनाम मेनका सिंह, किसके पक्ष में जाएगा ‘नंबर गेम’?

  नगर निगम में बढ़ी राजनीतिक हलचल झारखंड के Dhanbad नगर निगम में डिप्टी मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हाल ही में हुए नगर निगम चुनाव के बाद अब उप महापौर की कुर्सी को लेकर पार्षदों के बीच जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने की राजनीति शुरू हो गई है। शुक्रवार को महापौर Sanjeev Singh के सिंह मेंशन स्थित आवास पर आयोजित एक अभिनंदन समारोह में 40 से अधिक पार्षदों की मौजूदगी ने इस चुनाव को और दिलचस्प बना दिया।   अरुण चौहान के नाम का प्रस्ताव समारोह के दौरान कई पार्षदों ने डिप्टी मेयर पद के लिए Arun Chauhan का नाम प्रस्तावित किया। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को कार्यक्रम में मौजूद कई पार्षदों का समर्थन भी मिला। मेयर संजीव सिंह ने सभी पार्षदों का स्वागत करते हुए उन्हें चुनाव में जीत की बधाई दी और शहर के विकास कार्यों में मिलकर काम करने की अपील की।   मेयर ने दिया भरोसा मेयर संजीव सिंह ने पार्षदों को आश्वस्त किया कि वे उनकी भावनाओं और इच्छाओं का सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्षद जिस भी उम्मीदवार को डिप्टी मेयर चुनेंगे, उसे उनका पूरा समर्थन मिलेगा। उन्होंने पार्षदों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शहर के विकास के लिए एकजुट होकर काम करें, ताकि धनबाद को नई दिशा और गति मिल सके।   महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी गरमाया डिप्टी मेयर की दौड़ में अब महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी तेजी से उभर रहा है। इसी कड़ी में Menka Singh भी मैदान में उतर आई हैं। हाल ही में उन्होंने पार्षदों के लिए एक अभिनंदन समारोह आयोजित किया था, जिसमें उन्होंने ‘आधी आबादी’ के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए समर्थन का दावा किया।   जीत के लिए 28 पार्षदों का समर्थन जरूरी डिप्टी मेयर बनने के लिए कम से कम 28 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्षदों की गोलबंदी और तेज होगी और यह चुनाव पूरी तरह ‘नंबर गेम’ पर निर्भर करेगा।   आगे और बढ़ेगी सियासी गर्मी फिलहाल नगर निगम में डिप्टी मेयर पद को लेकर माहौल गर्म है। अरुण चौहान और मेनका सिंह के बीच मुकाबला रोचक होता जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पार्षदों का बहुमत किसके पक्ष में जाता है और आखिरकार उप महापौर की कुर्सी किसे मिलती है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
Jharkhand Vidhan Sabha building in Ranchi during political protest over Nal-Jal scheme issue.
झारखंड विधानसभा के बाहर भाजपा का हंगामा: नल-जल योजना में भ्रष्टाचार का आरोप, हेमंत सरकार के खिलाफ नारेबाजी

  सदन शुरू होने से पहले गरमाया सियासी माहौल झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 14वें दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। मुख्य विपक्षी दल Bharatiya Janata Party के विधायकों ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया और राज्य की Hemant Soren सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायक हाथों में भगवा रंग की तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। उनका आरोप था कि राज्य में जल प्रबंधन की स्थिति बेहद खराब है और सरकार लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने में विफल रही है।   नल-जल योजना पर लगाए गंभीर आरोप भाजपा विधायकों ने सरकार की नल-जल योजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि राज्य में “घर-घर नल” लगाने का वादा किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को पानी नहीं मिल रहा है। विधायकों का दावा है कि योजना कागजों पर तो बड़ी दिखती है, लेकिन हकीकत में कई जगहों पर नल लगे होने के बावजूद पानी नहीं पहुंच रहा है।   पोस्टरों के जरिए सरकार पर साधा निशाना प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने पोस्टरों और नारों के माध्यम से भी सरकार पर निशाना साधा। पोस्टरों पर लिखे नारों में शामिल थे- “हेमंत सरकार पानी दो, पानी दो!” “नल-जल योजना हुई फेल, जिम्मेदार को भेजो जेल।” “नल में जल नहीं, जल में है घोटाला। पानी के नाम पर भ्रष्टाचार का बोलबाला।” इन नारों के जरिए विपक्ष ने सरकार पर पानी की समस्या को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।   सदन के भीतर भी मुद्दा उठाने की तैयारी भाजपा विधायकों ने कहा कि नल-जल योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। विपक्षी दल ने यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे को विधानसभा के भीतर जोर-शोर से उठाया जाएगा और सरकार से जवाब मांगा जाएगा।   पानी की समस्या को लेकर बढ़ा सियासी दबाव राज्य में कई इलाकों में पेयजल की समस्या को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में नल-जल योजना को लेकर उठे सवालों ने झारखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार विपक्ष के इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और विधानसभा के अंदर इस मुद्दे पर क्या बहस होती है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
BJP MLAs protest in Jharkhand Assembly over DJ ban during Ram Navami processions.
रामनवमी में DJ प्रतिबंध पर झारखंड विधानसभा में हंगामा, सत्ता और विपक्ष आमने-सामने

  झारखंड में रामनवमी जुलूस के दौरान चलंत डीजे बजाने पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर मंगलवार को विधानसभा के भीतर और बाहर जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दल भाजपा के विधायकों ने इस फैसले के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया, जबकि सरकार ने साफ कहा कि यह कदम अदालत के आदेशों के पालन के तहत उठाया गया है।   विधानसभा परिसर में भाजपा का प्रदर्शन रामनवमी जुलूस में डीजे पर रोक को लेकर भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में विरोध जताया। उनका आरोप है कि सरकार हिंदू त्योहारों के समय अनावश्यक पाबंदियां लगाकर लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रही है। भाजपा विधायक रोशनलाल ने कहा कि रामनवमी करोड़ों हिंदुओं की आस्था का पर्व है और जुलूस में डीजे पर प्रतिबंध लगाना अनुचित है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए। भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि हर बार हिंदू त्योहारों के समय ही इस तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं, जो तुष्टिकरण की राजनीति को दर्शाता है।   सदन के अंदर भी गूंजे नारे विपक्ष का विरोध केवल विधानसभा परिसर तक सीमित नहीं रहा। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराने लगे। इस दौरान भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर रामनवमी के जुलूस में डीजे नहीं बजाने दिया जाएगा तो क्या हिंदुओं को धर्म परिवर्तन करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हजारीबाग में प्रशासन लोगों को जुलूस के दौरान डीजे बजाने से रोकने के लिए दबाव बना रहा है।   हजारीबाग की रामनवमी का दिया हवाला भाजपा विधायकों ने कहा कि हजारीबाग की रामनवमी देशभर में अपनी भव्यता और परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां कई दिनों तक धार्मिक जुलूस, अखाड़ा प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। ऐसे में डीजे पर प्रतिबंध लगाने से इस परंपरा पर असर पड़ेगा।   सरकार ने कहा-सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया। कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि प्रशासन केवल न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेश के अनुसार रात 10 बजे के बाद तेज ध्वनि वाले डीजे और लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति नहीं है। इसलिए प्रशासन इसी नियम का पालन सुनिश्चित करा रहा है।   ‘यह किसी धर्म विशेष का मुद्दा नहीं’ संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी सदन में कहा कि यह मामला किसी धर्म विशेष से जुड़ा नहीं है। उन्होंने बताया कि अदालत के निर्देश के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक तेज ध्वनि वाले साउंड सिस्टम पर प्रतिबंध लागू है और सरकार केवल उसी का पालन कर रही है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम रंग देकर समाज का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है।   सड़क से सदन तक बढ़ा विवाद रामनवमी जैसे धार्मिक और आस्था से जुड़े पर्व के दौरान डीजे प्रतिबंध का मामला अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। सड़क से लेकर विधानसभा तक उठ रही आवाजों के बीच यह मुद्दा फिलहाल शांत होता नहीं दिख रहा है और आने वाले दिनों में इस पर सियासत और तेज होने की संभावना है।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
Jharkhand High Court building in Ranchi after ordering CBI probe in ED vs Ranchi Police case.
ED बनाम रांची पुलिस मामला: हाईकोर्ट ने दिए CBI जांच के निर्देश

  झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और रांची पुलिस से जुड़े विवादित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की अदालत ने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने CBI को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करने का आदेश भी दिया है। इस मामले में अदालत ने 24 फरवरी को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे बुधवार को सुनाया गया।   क्या है पूरा मामला यह मामला रांची के एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026 से जुड़ा है। इसमें संतोष कुमार ने ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। FIR दर्ज होने के बाद रांची पुलिस ने ED कार्यालय में छापेमारी भी की थी। पुलिस की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। ED ने अदालत से प्राथमिकी को रद्द करने और पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग की थी। इसके साथ ही शिकायतकर्ता संतोष कुमार के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने का आग्रह किया गया था।   23 करोड़ के गबन का आरोप दरअसल, संतोष कुमार पर करीब 23 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन का आरोप है, जो कथित पेयजल घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है। ED ने इस मामले में उनके खिलाफ ECIR दर्ज कर जांच शुरू की थी। ED के अनुसार, 12 जनवरी 2026 को संतोष कुमार खुद पूछताछ के लिए ED कार्यालय पहुंचे थे। पूछताछ के दौरान वे अचानक उत्तेजित हो गए और पास में रखा जग उठाकर अपने सिर पर मार लिया, जिससे उन्हें हल्की चोट आई। बाद में उन्होंने ED अधिकारियों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में मामला दर्ज कराया।   कोर्ट में किसने रखा पक्ष मामले की सुनवाई के दौरान ED की ओर से एस.वी. राजू, अधिवक्ता ए.के. दास और सौरभ कुमार ने दलीलें पेश कीं। वहीं राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एस. नागामुथु, महाधिवक्ता राजीव रंजन और अधिवक्ता दीपांकर ने पक्ष रखा। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने अदालत में दलीलें दीं। अहम बात: हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब पूरे मामले की जांच CBI करेगी और नई प्राथमिकी दर्ज कर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

surbhi मार्च 11, 2026 0
Jharkhand Assembly on land allotment for MLAs and ex-MLAs in Greater Ranchi area
झारखंड में विधायकों और पूर्व विधायकों को जमीन देने की प्रक्रिया तेज, तीन दिन में खुलेगा रजिस्ट्री पोर्टल

  झारखंड में विधायकों और पूर्व विधायकों को ग्रेटर रांची क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने की योजना अब आगे बढ़ती नजर आ रही है। राज्य सरकार ने इस लंबे समय से लंबित प्रक्रिया को गति देते हुए जल्द जमीन की रजिस्ट्री कराने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि अगले तीन दिनों के भीतर रजिस्ट्री के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया जाएगा, जिससे संबंधित विधायक और पूर्व विधायक अपनी जमीन की रजिस्ट्री करा सकेंगे।   विधानसभा में उठा मुद्दा मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे को झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के विधायक मथुरा महतो ने सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि विधायकों और पूर्व विधायकों से जमीन आवंटन के लिए राशि पहले ही जमा कर ली गई है, लेकिन इसके बावजूद रजिस्ट्री की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले में जल्द कार्रवाई करते हुए प्रक्रिया पूरी की जाए ताकि संबंधित लोगों को राहत मिल सके।   भाजपा विधायक ने प्रशासन पर लगाए आरोप इस पर भाजपा विधायक सी.पी. सिंह ने रांची जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जमीन के लिए ली गई राशि सहकारी लिमिटेड के खाते में जमा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर देरी के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। सी.पी. सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर रांची के उपायुक्त से भी बातचीत की थी। उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि विधानसभा के मौजूदा सत्र के दौरान एक सप्ताह के भीतर रजिस्ट्री पोर्टल शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन करीब 20 दिन बीत जाने के बाद भी पोर्टल शुरू नहीं होने से विधायकों और पूर्व विधायकों में नाराजगी बढ़ रही है।   मंत्री ने सदन में दिया भरोसा मामले की गंभीरता को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में स्पष्ट किया कि अब इस प्रक्रिया में और देरी नहीं होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले तीन दिनों के भीतर जमीन की रजिस्ट्री के लिए पोर्टल खोल दिया जाएगा और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने विधायकों और पूर्व विधायकों के लिए ग्रेटर रांची क्षेत्र में जमीन चिन्हित कर ली है। पोर्टल शुरू होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी, जिससे लंबे समय से लंबित मांग का समाधान हो सकेगा।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
Jharkhand Assembly building as budget session resumes after Holi break amid political tension
झारखंड विधानसभा का बजट सत्र आज से फिर शुरू, विपक्ष के रुख और डिग्री विवाद पर टिकी सबकी नजर

  होली अवकाश के बाद फिर शुरू होगी सदन की कार्यवाही होली की लंबी छुट्टियों के बाद सोमवार, 9 मार्च से झारखंड विधानसभा का बजट सत्र एक बार फिर शुरू हो रहा है। सत्र के शेष दिनों की कार्यवाही को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस बार सदन में सबसे ज्यादा नजर विपक्ष के रुख पर टिकी हुई है कि वह सरकार को घेरने के लिए कितना आक्रामक तेवर अपनाता है।   भाजपा विधायक की डिग्री का मुद्दा चर्चा में विधानसभा सत्र से पहले राजनीतिक गलियारों में भाजपा विधायक नवीन जायसवाल की डिग्री को लेकर विवाद सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि सत्ता पक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। इसके जरिए विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की गई है, जिससे सदन में बहस तेज होने की संभावना है।   पहले चरण में शांत रहा था विपक्ष बजट सत्र के पहले चरण में विपक्ष का रवैया अपेक्षाकृत शांत रहा था। सदन के अंदर सरकार के खिलाफ विपक्ष की ओर से ज्यादा तीखी प्रतिक्रिया या जोरदार विरोध देखने को नहीं मिला था। इस स्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।   विपक्ष के पास मुद्दों की कमी की चर्चा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए ठोस मुद्दों की कमी नजर आ रही है। यही कारण है कि सदन में उसकी सक्रियता सीमित दिखाई दे रही है।   सत्ता पक्ष ने साधा विपक्ष पर निशाना वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के कुछ विधायकों का कहना है कि विपक्ष पूरी तरह सुस्त पड़ गया है। उनका दावा है कि सरकार सदन में उठने वाले हर सवाल का जवाब देने के लिए पहले से तैयार रहती है। ऐसे में विपक्ष को नए मुद्दे खोजने और सरकार को घेरने का ज्यादा मौका नहीं मिल पा रहा है।   सत्र के दौरान तेज हो सकती है राजनीतिक बहस राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बजट सत्र के बाकी दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। खासकर डिग्री विवाद और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर सदन में माहौल गर्म रहने की संभावना जताई जा रही है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
JMM leaders meet injured villagers in Garhwa after Mandal Dam rehabilitation clash with police
मंडल डैम पुनर्वास विवाद: गढ़वा में पुलिस-ग्रामीण झड़प के बाद JMM प्रतिनिधिमंडल ने घायलों से की मुलाकात

  गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले में मंडल डैम परियोजना के विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर शनिवार को पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़प हो गई। इस घटना में कई ग्रामीण घायल हो गए। घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) जिला कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल घायलों से मिलने उनके गांव पहुंचा और पूरे मामले की जानकारी ली।   स्थल निरीक्षण के दौरान हुआ विवाद जानकारी के अनुसार, यह घटना रंका प्रखंड के विश्रामपुर क्षेत्र स्थित बरवाही गांव की है। यहां मंडल डैम के विस्थापितों के लिए प्रस्तावित पुनर्वास योजना के तहत प्रशासनिक टीम स्थल निरीक्षण करने पहुंची थी। निरीक्षण के लिए उपायुक्त दिनेश यादव और पुलिस अधीक्षक अमन कुमार का काफिला गांव में पहुंचा था। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने प्रशासनिक वाहनों के काफिले को रोक दिया। इसी दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच कहासुनी बढ़ गई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए।   JMM ने प्रशासन पर लगाया आरोप घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा की जिला कमेटी ने इस पूरे मामले को प्रशासन की “बर्बर कार्रवाई” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि विस्थापितों की समस्याओं को सुनने के बजाय प्रशासन ने बल प्रयोग किया, जिससे कई आदिवासी ग्रामीण घायल हो गए।   घायलों से मिलने पहुंचा प्रतिनिधिमंडल घटना की जानकारी मिलने के बाद JMM जिला कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल बरवाही गांव पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोगों से मुलाकात कर उनकी स्थिति का जायजा लिया और पूरी घटना की जानकारी ली। इस टीम में पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रौशन कुमार पाठक, सचिव शरीफ अंसारी, युवा अध्यक्ष संजय सिंह, उपाध्यक्ष फरीद खान, मनोज तिवारी, सुनील गौत्तम, बीरेंद्र साव और धर्मेंद्र कुमार दुबे शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने घटना में घायल महिला मरियम तिर्की से भी मुलाकात की और उनसे पूरी घटना के बारे में विस्तार से जानकारी ली।   पुनर्वास को लेकर पहले से नाराज हैं ग्रामीण स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडल डैम परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी मांगों पर उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं, इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों और राजनीतिक दलों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
Nitish Kumar and Hemant Soren political developments in Bihar and Jharkhand
नीतीश के राजनीतिक घटनाक्रम से झारखंड में हलचल, हेमंत सोरेन की रणनीति पर मंथन

  Bihar Politics: बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच झारखंड की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। इन घटनाक्रमों के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के भीतर चिंता का माहौल बताया जा रहा है। पार्टी को आशंका है कि यदि वह एनडीए (NDA) में शामिल होती है तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बिहार की मौजूदा परिस्थितियों ने झारखंड में भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी वजह से झामुमो अब अपने राजनीतिक कदमों को लेकर सतर्क नजर आ रही है। बिहार की सियासत से झारखंड में बढ़ी हलचल पिछले कुछ दिनों से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा भविष्य में एनडीए का हिस्सा बन सकता है। हालांकि बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम और नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद झामुमो के भीतर इस फैसले को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि झामुमो नेतृत्व अब इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर एनडीए में शामिल हुए तो पार्टी की राजनीतिक स्वतंत्रता और नेतृत्व की स्थिति पर क्या असर पड़ेगा। नीतीश कुमार के उदाहरण से बढ़ी चिंता झामुमो के रणनीतिकारों के बीच यह चर्चा है कि करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति में प्रभाव रखने वाले नेता नीतीश कुमार को भी अब राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा हो रही है। पार्टी के भीतर इसे एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। कुछ नेताओं का मानना है कि अगर इतने अनुभवी नेता भी अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं बचा पाए तो एनडीए में जाने के बाद छोटे सहयोगी दलों की स्थिति कमजोर हो सकती है। भाजपा पर ‘राजनीतिक दबाव’ का आरोप झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने बिहार के घटनाक्रम को लेकर भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह एक तरह का राजनीतिक दबाव है। उनका कहना है कि इस तरह की परिस्थितियों से क्षेत्रीय दलों को सावधान रहना चाहिए। पार्टी में टूट का भी डर झामुमो के अंदर यह आशंका भी जताई जा रही है कि अगर पार्टी एनडीए में शामिल होती है तो भविष्य में आंतरिक मतभेद या टूट की स्थिति बन सकती है। पार्टी के कुछ नेता अन्य राज्यों में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों—जैसे महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के विभाजन—का उदाहरण भी दे रहे हैं। कांग्रेस और राजद से रिश्ते मजबूत करने की रणनीति इन राजनीतिक परिस्थितियों के बीच यह भी संकेत मिल रहे हैं कि झामुमो फिलहाल एनडीए में जाने के बजाय कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ अपने संबंध मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार और झारखंड की सियासत आने वाले समय में नए समीकरणों के साथ आगे बढ़ सकती है।  

surbhi मार्च 6, 2026 0
Jharkhand Deputy Mayor Election
झारखंड में डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा की नजर, जानिए नगर निकायों में कैसे होता है

डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा की नजर, जानिए नगर निकायों में कैसे होता है चुनाव झारखंड में नगर निकाय चुनाव में महापौर और पार्षद के परिणाम आने के बाद अब डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के पदों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी इन पदों पर अपने समर्थित उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए संगठन स्तर पर रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी का लक्ष्य है कि राज्य के सभी 48 नगर निकायों में डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष की कुर्सी पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी काबिज हों। इसके लिए महापौर, अध्यक्ष और पार्षद के रूप में निर्वाचित भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं की पहचान की जा रही है, ताकि चुनाव के दौरान उन्हें समर्थन मिल सके। भाजपा को जीत की उम्मीद प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक का कहना है कि महापौर और पार्षद चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को अन्य दलों की तुलना में बेहतर सफलता मिली है। उनका दावा है कि राज्य के नौ नगर निगमों में से पांच में भाजपा समर्थित उम्मीदवार महापौर बने हैं। ऐसे में पार्टी को भरोसा है कि जहां महापौर उनके समर्थन से चुने गए हैं, वहां डिप्टी मेयर भी भाजपा समर्थित ही होगा। वहीं जिन निकायों में महापौर या अध्यक्ष भाजपा के नहीं हैं, वहां भी पार्टी अपने समर्थकों को डिप्टी मेयर या उपाध्यक्ष बनाने का प्रयास करेगी। नगर निकाय चुनाव में उम्मीद से कम सफलता हालांकि भाजपा को इस बार शहरी क्षेत्रों में उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। राज्य के 48 नगर निकायों में महापौर और अध्यक्ष पदों पर भाजपा समर्थित करीब 16 उम्मीदवार ही जीत दर्ज कर सके। नौ नगर निगमों में से रांची, आदित्यपुर और मेदिनीनगर में भाजपा समर्थित प्रत्याशी जीतने में सफल रहे। नगर परिषद की 20 सीटों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को तीन सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस समर्थित दो, झामुमो समर्थित चार और 11 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। नगर पंचायतों में भाजपा का पलड़ा भारी नगर पंचायतों में भाजपा समर्थित उम्मीदवार अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखे। यहां छह सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीते, जबकि झामुमो समर्थित चार और आठ निर्दलीय प्रत्याशी विजयी हुए। एक सीट पर भाकपा माले समर्थित उम्मीदवार धनवार से अध्यक्ष पद पर चुने गए। रांची में महापौर पद पर भाजपा समर्थित प्रत्याशी रोशनी खलखो ने जीत दर्ज की, हालांकि गिरिडीह और देवघर जैसे महत्वपूर्ण नगर निगम भाजपा के हाथ से निकल गए। गिरिडीह नगर निगम में पहली बार झारखंड मुक्ति मोर्चा ने जीत हासिल की, जबकि देवघर में भी झामुमो समर्थित उम्मीदवार को सफलता मिली। पार्षद निभाते हैं अहम भूमिका डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के चुनाव में निर्वाचित पार्षदों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। उदाहरण के तौर पर रांची नगर निगम में 53 वार्ड हैं और सभी वार्डों से चुने गए पार्षद ही डिप्टी मेयर के चुनाव में मतदान करेंगे। जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलेंगे, वही डिप्टी मेयर चुना जाएगा। 10 से 20 मार्च तक पूरी होगी प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार सभी 48 नगर निकायों में डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 10 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च तक पूरी कर ली जाएगी। आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद के मुताबिक सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के लिए तिथिवार कार्यक्रम तय कर दिया गया है। ऐसे होता है डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष का चुनाव नगर निगमों में डिप्टी मेयर और नगर परिषद व नगर पंचायतों में उपाध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से होता है। इसमें आम मतदाता हिस्सा नहीं लेते, बल्कि केवल निर्वाचित वार्ड पार्षद ही मतदान करते हैं। मेयर या अध्यक्ष इस चुनाव में हिस्सा नहीं लेते। पार्षदों में से कोई भी उम्मीदवार डिप्टी मेयर या उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ सकता है और इस पद के लिए किसी प्रकार का आरक्षण भी नहीं होता। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पहले सभी वार्ड पार्षदों का शपथ ग्रहण कराया जाता है। इसके बाद डिप्टी मेयर या उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन और मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाती है।  

surbhi मार्च 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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surbhi मार्च 31, 2026 0