झारखंड

Hazaribagh Treasury Scam: 12 साल में 29 करोड़ की फर्जी निकासी, छह पर चार्जशीट

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
Hazaribagh Treasury Scam
Hazaribagh Treasury Scam

हजारीबाग। हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले में सीआईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मास्टरमाइंड आरक्षी शंभु कुमार समेत छह आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच करीब 12 वर्षों तक पुलिसकर्मियों के वेतन मद में फर्जी टेंपररी आईडी बनाकर लगभग 29 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई। इस राशि को 24 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।

 

छह आरोपी चार्जशीट में शामिल


सीआईडी की चार्जशीट में आरक्षी शंभु कुमार, उसकी पत्नी काजल कुमारी, आरक्षी रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज सिंह, उसकी पत्नी खुशबू कुमारी, रिश्तेदार सौरभ कुमार और आरक्षी धीरेंद्र सिंह को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, तीनों आरक्षी हजारीबाग एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में तैनात थे और पूरे फर्जीवाड़े में उनकी अहम भूमिका रही।

 

24 खातों में पहुंची करोड़ों की रकम


जांच में सामने आया है कि अवैध रूप से निकाली गई राशि 24 बैंक खातों में भेजी गई। फिलहाल सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित खाताधारकों को इन ट्रांजेक्शनों की जानकारी थी या नहीं। अब तक एजेंसी करीब 1.60 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज करा चुकी है।

 

जमीन, मकान और जेवरात में किया निवेश


सीआईडी के अनुसार, आरोपियों ने अवैध कमाई का इस्तेमाल जमीन और मकान खरीदने, जेवरात लेने और ऐशो-आराम की जिंदगी जीने में किया। जांच में यह भी सामने आया है कि जिन लोगों के खातों में रकम ट्रांसफर की गई, उन्हें आरोपियों की ओर से कमीशन भी दिया जाता था।

 

15.41 करोड़ की शिकायत से खुला मामला


इस घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब शुरुआती जांच में आठ वर्षों के दौरान हजारीबाग जिला कोषागार से दो बैंक खातों में 15.41 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का मामला सामने आया। इसके बाद लोहसिंघना थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच सीआईडी को सौंपी गई। विस्तृत जांच के दौरान घोटाले का दायरा बढ़कर 29 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में आगे बढ़ेगी।

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Anjali Kumari Anjali123

झारखंड

View more
MS Dhoni Birthday
45 के हुए 'कैप्टन कूल' एमएस धोनी

रांची। भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शामिल महेंद्र सिंह धोनी मंगलवार यानी आज अपना 45वां जन्मदिन मना रहे हैं। 7 जुलाई 1981 को झारखंड की राजधानी रांची में जन्मे धोनी का सफर भारतीय रेलवे में टिकट कलेक्टर (Ticket Collector) की नौकरी से शुरू होकर विश्व क्रिकेट के सबसे सम्मानित खिलाड़ियों में शामिल होने तक पहुंचा। शांत स्वभाव, बेहतरीन नेतृत्व क्षमता और दबाव में मैच फिनिश करने की कला के कारण उन्हें दुनिया भर में 'कैप्टन कूल' के नाम से जाना जाता है। उनके जन्मदिन पर देश-विदेश से फैंस, पूर्व और वर्तमान क्रिकेटरों ने शुभकामनाएं दीं।   सीएसके ने खास अंदाज में दी बधाई धोनी की आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। फ्रेंचाइजी ने लिखा कि धोनी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक ऐसी विरासत हैं जो हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।   कप्तानी में भारत ने रचा इतिहास धोनी विश्व क्रिकेट के इकलौते कप्तान हैं, जिन्होंने भारत को 2007 टी20 विश्व कप, 2011 वनडे विश्व कप और 2013 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब दिलाया। उनकी कप्तानी में भारत दिसंबर 2009 में पहली बार टेस्ट क्रिकेट की नंबर-1 टीम भी बना। 2007 में युवा टीम के साथ टी20 विश्व कप जीतकर उन्होंने भारतीय क्रिकेट में नए युग की शुरुआत की, जबकि 2011 विश्व कप फाइनल में उनकी विजयी पारी आज भी क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार लम्हों में गिनी जाती है।   टिकट कलेक्टर से 'कैप्टन कूल' बनने तक का सफर धोनी ने वर्ष 2004 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। शुरुआती दौर में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने पहचान दिलाई, लेकिन समय के साथ उन्होंने खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फिनिशरों में स्थापित किया। विकेटकीपर के रूप में उनकी तेज स्टंपिंग, सटीक निर्णय और शांत नेतृत्व शैली ने उन्हें महान खिलाड़ियों की श्रेणी में पहुंचा दिया। 15 अगस्त 2020 को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया, लेकिन आईपीएल में उनका प्रभाव आज भी कायम है।   आईपीएल और कारोबार में भी सफलता धोनी की कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स ने पांच बार आईपीएल खिताब जीता। आईपीएल में उन्होंने 278 से अधिक मैच खेलकर 5,400 से ज्यादा रन बनाए हैं। क्रिकेट के अलावा वे कई बड़ी कंपनियों के ब्रांड एंबेसडर हैं और कई स्टार्टअप्स में निवेश भी कर चुके हैं। उनकी अनुमानित कुल संपत्ति 1000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जाती है। रांची में उनका आलीशान फार्महाउस, होटल और लग्जरी कारों व बाइकों का शानदार कलेक्शन भी चर्चा में रहता है।   आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा महेंद्र सिंह धोनी केवल एक सफल क्रिकेटर नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य, नेतृत्व और सादगी की मिसाल हैं। सीमित संसाधनों से निकलकर विश्व क्रिकेट के शिखर तक पहुंचने की उनकी कहानी आज भी लाखों युवाओं को अपने सपनों के लिए मेहनत करने की प्रेरणा देती है। उनके नाम दर्ज उपलब्धियां भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेंगी।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
Hemant Soren Review Meeting

सीएम हेमंत सोरेन ने पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग की समीक्षा बैठक में दिए कई अहम निर्देश

Building Collapse News

Dhanbad: 4 दिन पहले बने स्कूल शौचालय का छज्जा गिरने से एक छात्र घायल

Hazaribagh Treasury Scam

Hazaribagh Treasury Scam: 12 साल में 29 करोड़ की फर्जी निकासी, छह पर चार्जशीट

JTET Language Dispute
जेटेट भाषा विवाद को लेकर अब सीएम के फैसले पर है नजर

रांची। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को शामिल किए जाने का विवाद अभी भी सुलझ नहीं सका है। सात सदस्यीय उच्चस्तरीय मंत्री समूह ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंप दी है। रिपोर्ट में चार मंत्रियों ने इन भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने का विरोध किया, जबकि तीन मंत्रियों ने समर्थन किया। अब इस मामले में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे।   सात सदस्यीय कमेटी में बंटी राय कमेटी में झामुमो के सुदिव्य कुमार, योगेंद्र प्रसाद महतो और हफीजुल हसन अंसारी के साथ कांग्रेस की शिल्पी नेहा तिर्की ने भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को शामिल करने का विरोध किया। वहीं कांग्रेस के राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पांडेय सिंह और राजद के संजय प्रसाद यादव इन भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में रहे। खास बात यह रही कि कांग्रेस की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने अपनी ही पार्टी के दो मंत्रियों से अलग राय रखी।   तीन बैठकों के बाद भी नहीं बनी सहमति मुख्यमंत्री के निर्देश पर मई में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई थी। शुरुआती दो बैठकों में सहमति नहीं बनने के बाद अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समाज से एक-एक मंत्री को जोड़कर कमेटी का विस्तार किया गया। तीन दौर की बैठकों में भी भाषाओं को लेकर आम सहमति नहीं बन सकी।   समर्थन और विरोध के तर्क समर्थन करने वाले मंत्रियों का कहना है कि पलामू, गढ़वा, लातेहार, देवघर, गोड्डा और साहिबगंज जैसे जिलों में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका बोलने वालों की बड़ी आबादी है। उनका तर्क है कि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए और जब बांग्ला व ओड़िया जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा का दर्जा मिला है, तो इन भाषाओं को बाहर रखना उचित नहीं होगा।   वहीं विरोध करने वाले मंत्रियों का कहना है कि भोजपुरी, मगही और अंगिका झारखंड की मूल क्षेत्रीय भाषाएं नहीं हैं। उनका तर्क है कि राज्य की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाई पहचान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा भी इन भाषाओं को प्रशासनिक सेवा परीक्षा में शामिल नहीं किए जाने का हवाला दिया गया। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री के अंतिम फैसले पर टिकी है।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
Radhakrishna Kishore

पतरातू में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का बड़ा भरोसा, बोले- विस्थापितों का मुद्दा कैबिनेट में उठेगा, मिलेगा न्याय

Jharkhand PSC controversy

जेपीएससी की विवादित परीक्षाकी सीबीआई जांच एवं पूरी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो: आजसू

Jharkhand ATS

झारखंड में ISIS-अलकायदा से जुड़े 61 संदिग्ध एटीएस के रडार पर, कार्रवाई की तैयारी तेज

vegetable vendors protest
मोरहाबादी साप्ताहिक बाजार बंद होने पर भड़के सब्जी विक्रेता, नगर निगम कार्यालय पहुंचकर किया प्रदर्शन

रांची। राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में करीब 40 वर्षों से लगने वाले साप्ताहिक सब्जी बाजार को बंद किए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। सोमवार को भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में सब्जी और फल विक्रेता रांची नगर निगम कार्यालय पहुंचे और धरना देकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बाजार बंद करने से हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।   मोरहाबादी मैदान में प्रत्येक बुधवार और शनिवार को लगने वाले इस बाजार में रांची समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 1600 से अधिक विक्रेता अपनी उपज बेचने पहुंचते थे। शनिवार को नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने बाजार नहीं लगने दिया, जिसके बाद विक्रेताओं में नाराजगी बढ़ गई।   प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शन के दौरान विक्रेताओं ने मांग की कि या तो बाजार को पहले की तरह संचालित किया जाए या फिर जल्द से जल्द उनके लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि वर्षों से यही बाजार उनकी आय का प्रमुख स्रोत रहा है और अचानक बंद होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। वहीं, नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने निगम के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि बाजार का दायरा लगातार बढ़ने से आसपास की सड़कें अतिक्रमित हो रही थीं और पूरे क्षेत्र में गंभीर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही थी। इसका असर स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और आम राहगीरों पर पड़ रहा था।   नगर आयुक्त ने कहा नगर आयुक्त ने कहा कि निगम विक्रेताओं की आजीविका और शहर की यातायात व्यवस्था, दोनों को ध्यान में रखते हुए समाधान तलाश रहा है। प्रशासन इस दिशा में मंथन कर रहा है ताकि विक्रेताओं को वैकल्पिक व्यवस्था मिल सके और शहरवासियों को भी जाम की समस्या से राहत मिले। फिलहाल नगर निगम और सब्जी विक्रेताओं के बीच किसी सहमति पर बात नहीं बन सकी है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इस विवाद का स्थायी और संतुलित समाधान कब तक निकालता है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
Khelgaon Shooting Range

खेलगांव शूटिंग रेंज पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, खिलाड़ियों से मिले

CP Singh

वित्त मंत्री की सुरक्षा विवाद पर गरमाई सियासत, सीपी सिंह बोले- दोबारा सुरक्षा लें तो लोग हंसेंगे

Ranchi vendor market

रांची के वेंडर मार्केट में नियमों की अनदेखी, अवैध किरायेदारी पर निगम का शिकंजा

0 Comments

Top week

Bihar Assistant Professor
जॉब्स

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?