CID Investigation

JPSC Exam Irregularities
JPSC परीक्षा अनियमितता मामला: उप परीक्षा नियंत्रक समेत 5 आरोपी गिरफ्तार, CID की बड़ी कार्रवाई

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी (CID) ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, TSR Data Processing Private Limited के निदेशक रामवीर सिंह, मो. उस्मान, मो. एबाद और अभय कुमार तिवारी शामिल हैं। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।   21 जुलाई को हुई थी छापेमारी   राज्य सरकार के निर्देश पर 21 जुलाई को सीआईडी की विशेष टीम ने रांची पुलिस के सहयोग से JPSC कार्यालय, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TSR Data Processing Private Limited के कार्यालय समेत राज्य के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान जांच टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और अन्य सामग्री जब्त की, जिनके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया।   साक्ष्यों के आधार पर दर्ज हुआ मामला   सीआईडी के अनुसार, शिकायतों और प्रारंभिक जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर 22 जुलाई 2026 को CID थाना कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया गया। इसके बाद पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्य गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त पाए गए।   जांच जारी, और हो सकती है कार्रवाई   सीआईडी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और पूरे मामले की गहन पड़ताल की जा रही है। यदि जांच के दौरान अन्य व्यक्तियों की भूमिका या नए साक्ष्य सामने आते हैं, तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे तथा अतिरिक्त गिरफ्तारियों की संभावना बनी हुई है।

anjali kumari जुलाई 23, 2026 0
JPSC controversy
JPSC विवाद के बीच CID की कार्रवाई तेज, परीक्षा गड़बड़ी मामले में जांच जारी

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) को लेकर उठे विवाद के बीच जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज हो गई है। परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद CID और रांची पुलिस की टीम जांच में जुटी है। मामले को लेकर आयोग के रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य जानकारियों की जांच की जा रही है।   JPSC कार्यालय पहुंची जांच टीम, दस्तावेजों की हुई पड़ताल   सूत्रों के अनुसार, जांच टीम ने JPSC कार्यालय पहुंचकर परीक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि परीक्षा संचालन, उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया में कहीं कोई गड़बड़ी हुई या नहीं।   14वीं PT परीक्षा के रिजल्ट पर उठे थे सवाल   JPSC की 14वीं PT परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे। अभ्यर्थियों ने परीक्षा में कथित अनियमितता और कुछ केंद्रों से जुड़ी शिकायतों को लेकर जांच की मांग की थी। इसके बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच की जिम्मेदारी CID को सौंपी।   JPSC अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल   JPSC विवाद के बीच आयोग के अध्यक्ष एल. खियांग्ते के इस्तीफे के बाद मामला और चर्चा में आ गया है। विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।   अभ्यर्थियों को जांच रिपोर्ट का इंतजार   JPSC अभ्यर्थियों का कहना है कि जांच जल्द पूरी होनी चाहिए ताकि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर स्थिति साफ हो सके। वहीं, सरकार और जांच एजेंसियों की ओर से कहा गया है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।   सरकार ने दिए निष्पक्ष जांच के संकेत   राज्य सरकार का कहना है कि भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

anjali kumari जुलाई 22, 2026 0
JPSC Controversy
जेपीएससी विवाद पर गरजे सीएम हेमंत सोरेन, दोषियों पर सख्त कार्रवाई का ऐलान

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में सीआईडी की कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। कैबिनेट बैठक के बाद प्रोजेक्ट भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी दोषी को बख्शने वाली नहीं है और जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।   मुख्यमंत्री ने कहा कि देश इस समय कई गंभीर चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में हर घटना को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ देखने की जरूरत है। दिल्ली में विपक्ष के प्रदर्शन और राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को राजनीतिक दृष्टिकोण से ऊपर उठकर समाधान की दिशा में काम करना चाहिए।   जेपीएससी विवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है और उसका उद्देश्य शहर से लेकर गांव तक हर वर्ग के लोगों के हित में काम करना है। छात्र, किसान, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है।   वहीं, प्रदेश भाजपा ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने आरोप लगाया कि जेपीएससी के साथ-साथ जेएसएससी की कई परीक्षाओं में भी अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन और भाजपा के दबाव के बाद सरकार सीआईडी जांच का सहारा ले रही है, लेकिन यह कार्रवाई केवल दिखावा है।   भाजपा ने छात्रों को न्याय दिलाने की मांग करते हुए 22 जुलाई को जेपीएससी कार्यालय के घेराव का ऐलान किया है। पार्टी ने सभी भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग दोहराई है।

anjali kumari जुलाई 22, 2026 0
Kuber Portal Scam
'कुबेर' पोर्टल घोटाले का मास्टरमाइंड CID के शिकंजे में

रांची। झारखंड के बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की अपराध अन्वेषण विभाग (CID) ने पशुपालन विभाग के खाते से करोड़ों रुपये की अवैध वेतन निकासी मामले में मुख्य आरोपी और प्रधान लिपिक मुनिंद्र कुमार के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच एजेंसी के अनुसार, मुनिंद्र ने सरकारी वित्तीय प्रबंधन प्रणाली 'कुबेर' पोर्टल की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर सुनियोजित तरीके से फर्जीवाड़ा किया और सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया।   फर्जी आईडी और बिल बनाकर किया करोड़ों का गबन CID की जांच में सामने आया है कि मुनिंद्र कुमार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच कांके स्थित पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान में लेखापाल रहते हुए मूल वेतन संबंधी आंकड़ों में हेरफेर की। उसने पूर्व कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों और यहां तक कि मृत कर्मचारियों के नाम पर भी फर्जी आईडी तैयार कीं। इन फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर नकली वेतन बिल बनाए गए और उन्हें कोषागार से स्वीकृत कराकर करोड़ों रुपये अपने तथा अपने करीबी लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर करा दिए।   कई थानों के मामलों की जांच CID के जिम्मे यह मामला सबसे पहले रांची के कोतवाली थाना में दर्ज हुआ था, जहां से आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया। बाद में रामगढ़ और खेलगांव थानों में दर्ज संबंधित मामलों को भी CID ने अपने हाथ में ले लिया। जांच एजेंसी का कहना है कि घोटाले का दायरा बड़ा है और इसकी तह तक पहुंचने के लिए अनुसंधान अभी जारी है।   तकनीकी खामियों का उठाया फायदा चार्जशीट में CID ने अदालत को बताया है कि आरोपी ने 'कुबेर' पोर्टल की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाकर सरकारी भुगतान प्रणाली से छेड़छाड़ की। बताया गया कि फ्रोजन सीमेन बैंक, होटवार में पदस्थापना के दौरान भी उसने इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि आगे की जांच में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

anjali kumari जुलाई 21, 2026 0
Hazaribagh Treasury Scam
Hazaribagh Treasury Scam: 12 साल में 29 करोड़ की फर्जी निकासी, छह पर चार्जशीट

हजारीबाग। हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले में सीआईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मास्टरमाइंड आरक्षी शंभु कुमार समेत छह आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2014 से 2026 के बीच करीब 12 वर्षों तक पुलिसकर्मियों के वेतन मद में फर्जी टेंपररी आईडी बनाकर लगभग 29 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई। इस राशि को 24 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।   छह आरोपी चार्जशीट में शामिल सीआईडी की चार्जशीट में आरक्षी शंभु कुमार, उसकी पत्नी काजल कुमारी, आरक्षी रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज सिंह, उसकी पत्नी खुशबू कुमारी, रिश्तेदार सौरभ कुमार और आरक्षी धीरेंद्र सिंह को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, तीनों आरक्षी हजारीबाग एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में तैनात थे और पूरे फर्जीवाड़े में उनकी अहम भूमिका रही।   24 खातों में पहुंची करोड़ों की रकम जांच में सामने आया है कि अवैध रूप से निकाली गई राशि 24 बैंक खातों में भेजी गई। फिलहाल सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित खाताधारकों को इन ट्रांजेक्शनों की जानकारी थी या नहीं। अब तक एजेंसी करीब 1.60 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज करा चुकी है।   जमीन, मकान और जेवरात में किया निवेश सीआईडी के अनुसार, आरोपियों ने अवैध कमाई का इस्तेमाल जमीन और मकान खरीदने, जेवरात लेने और ऐशो-आराम की जिंदगी जीने में किया। जांच में यह भी सामने आया है कि जिन लोगों के खातों में रकम ट्रांसफर की गई, उन्हें आरोपियों की ओर से कमीशन भी दिया जाता था।   15.41 करोड़ की शिकायत से खुला मामला इस घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब शुरुआती जांच में आठ वर्षों के दौरान हजारीबाग जिला कोषागार से दो बैंक खातों में 15.41 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का मामला सामने आया। इसके बाद लोहसिंघना थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच सीआईडी को सौंपी गई। विस्तृत जांच के दौरान घोटाले का दायरा बढ़कर 29 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में आगे बढ़ेगी।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
Medical Seat Allotment
मेडिकल सीट आवंटन और काउंसलिंग प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप, CID की टीम ने खंगाले दस्तावेज

रांची। झारखंड के सबसे बड़े सरकारी चिकित्सा संस्थान रिम्स में मेडिकल सीट आवंटन और नामांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच अब तेज हो गई है। शिकायतों के आधार पर झारखंड सीआईडी की एक विशेष टीम बुधवार को रिम्स पहुंची और डीन कार्यालय सहित कई महत्वपूर्ण विभागों के दस्तावेजों की जांच शुरू की।   सूत्रों के अनुसार, जांच का केंद्र पिछले शैक्षणिक सत्र में हुए एडमिशन और उससे जुड़ी काउंसलिंग प्रक्रिया है। आरोप है कि कुछ छात्रों को नियमों की अनदेखी कर दाखिला दिया गया, जबकि पात्र अभ्यर्थियों को अवसर नहीं मिला। इसके अलावा कुछ मामलों में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की भी शिकायत सामने आई है।   नामांकन और टेंडर प्रक्रियाएं भी जांच के दायरे में सीआईडी अधिकारियों ने बताया कि जांच केवल एडमिशन तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थान में टेंडर से जुड़ी प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जा रही है। टीम विभिन्न अभिलेखों, आवेदन पत्रों, काउंसलिंग रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों का मिलान कर रही है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की पुष्टि की जा सके।   स्वास्थ्य मंत्री ने दी थी कार्रवाई की जानकारी मामले को लेकर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी  ने कहा कि उन्हें काउंसलिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी और फर्जी दस्तावेजों के उपयोग की शिकायतें मिली थीं। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया की जांच कराने की सिफारिश की थी। मंत्री ने कहा कि यदि जांच में किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सरकार मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और योग्य छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।   जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें सीआईडी की प्रारंभिक जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। फिलहाल रिम्स प्रशासन और मेडिकल शिक्षा से जुड़े सभी पक्षों की नजर इस महत्वपूर्ण जांच पर टिकी हुई है।

anjali kumari जून 25, 2026 0
CID officials investigate a job scam case linked to TMC leader Abhishek Banerjee’s aide Sumit Roy in West Bengal.
कैश फॉर जॉब स्कैम: अभिषेक बनर्जी के पीए सुमित रॉय पर FIR, CID ने जारी किया लुकआउट नोटिस; कालीघाट आवास पर छापेमारी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले के बाद अब सरकारी नौकरियों के नाम पर कथित वसूली और धोखाधड़ी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार जांच की आंच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय तक पहुंच गई है। मेदिनीपुर के पूर्व विधायक Sujay Hazra से पूछताछ के बाद डेबरा थाने में सुमित रॉय के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की कथित ठगी मामला डेबरा निवासी प्रसेनजीत रॉय की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न सरकारी विभागों में 12 पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर प्रति उम्मीदवार साढ़े तीन लाख रुपये की मांग की गई थी। पीड़ितों का दावा है कि विश्वास जीतने के लिए उन्हें एक होटल में ‘आशिक’ नामक व्यक्ति से मिलवाया गया, जिसने खुद को राज्य सचिवालय नबान्न का कर्मचारी बताया। इसके बाद उम्मीदवारों को कथित तौर पर विकास भवन और खाद्य भवन ले जाकर मेडिकल परीक्षण भी कराया गया। 'अभिषेक बनर्जी के पीए को पैसे देने होंगे' कहकर मांगी गई अतिरिक्त रकम शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बाद में उनसे यह कहकर और धन की मांग की गई कि रकम अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय तक पहुंचानी है। इसके बाद उम्मीदवारों को कथित तौर पर असली नियुक्ति पत्र के बजाय रंगीन जेरॉक्स प्रतियां थमा दी गईं। जब अभ्यर्थियों को नौकरी नहीं मिली और उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। CID ने जारी किया लुकआउट सर्कुलर मामले की गंभीरता को देखते हुए Criminal Investigation Department, West Bengal (CID) ने सुमित रॉय के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सुमित रॉय के मोबाइल फोन की आखिरी टावर लोकेशन Kalighat स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास के आसपास मिली थी। इसके बाद सालबनी थाने की पुलिस केंद्रीय बलों के साथ कालीघाट स्थित आवास पर पहुंची और लंबी प्रतीक्षा के बाद ताला तोड़कर परिसर के भीतर प्रवेश किया। सुमित रॉय वहां नहीं मिला। ससुराल में भी छापेमारी, आरोपी अब भी फरार पुलिस ने हुगली जिले के Serampore स्थित सुमित रॉय की ससुराल में भी छापेमारी की, लेकिन वहां भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित नौकरी घोटाले में कितने लोगों से धन वसूला गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल सुमित रॉय के खिलाफ FIR और CID की कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है, जबकि पार्टी की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी की तलाश जारी है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Abhishek Banerjee speaks to media after police search at his Kolkata residence as Mamata Banerjee arrives
अभिषेक बनर्जी के घर तड़के पुलिस की छापेमारी, ममता बनर्जी पहुंचीं; बोले- “क्या मैंने कुछ छिपाया है?”

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल, अभिषेक बनर्जी के आवास पर घंटों चली तलाशी पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर पुलिस ने कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई के बाद टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी भी तुरंत अपने भतीजे के घर पहुंचीं, जिससे राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी और निजी सहायक माने जाने वाले सुमित रॉय से जुड़े एक मामले के सिलसिले में की गई। सुबह 3 बजे शुरू हुई कार्रवाई जानकारी के मुताबिक, शनिवार तड़के करीब 3 बजे पश्चिम मेदिनीपुर के शालबनी थाना की टीम कोलकाता पुलिस और केंद्रीय बलों की मौजूदगी में अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंची। पुलिसकर्मियों ने घर के विभिन्न हिस्सों की जांच की और करीब चार घंटे से अधिक समय तक तलाशी अभियान जारी रखा। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी और घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। तलाशी के बाद अभिषेक बनर्जी का पलटवार तलाशी पूरी होने के बाद मीडिया से बातचीत में अभिषेक बनर्जी ने जांच एजेंसियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कुछ छिपाया गया होता तो एजेंसियां खुद बता सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने घर का ताला तोड़कर प्रवेश किया और सभी कमरों की जांच की। साथ ही उन्होंने यह भी खारिज कर दिया कि उनके सहयोगी को घर में छिपाकर रखा गया था। ममता बनर्जी की अचानक एंट्री तलाशी अभियान की खबर फैलते ही टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी सीधे अभिषेक बनर्जी के आवास पहुंचीं। बताया जा रहा है कि उन्होंने कुछ समय तक वहां मौजूद रहकर स्थिति की जानकारी ली। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी की यह त्वरित प्रतिक्रिया इस मामले की संवेदनशीलता और पार्टी के भीतर इसके राजनीतिक प्रभाव को दर्शाती है। टीएमसी ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि विपक्षी ताकतें जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर टीएमसी नेताओं को निशाना बना रही हैं। सीआईडी जांच और कानूनी दबाव भी जारी यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अभिषेक बनर्जी हाल ही में विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले में सीआईडी के समक्ष कई घंटों तक पूछताछ का सामना कर चुके हैं। इस मामले में उन्हें अदालत से अंतरिम राहत मिली हुई है, लेकिन जांच अभी भी जारी है। सीआईडी अधिकारियों ने उन्हें आगे की पूछताछ के लिए फिर से बुलाने के संकेत दिए हैं। मदन मित्रा पर भी ईडी की कार्रवाई इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने टीएमसी विधायक मदन मित्रा से जुड़े कई ठिकानों पर भी छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित नगर निकाय भर्ती घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ी बताई जा रही है। जांच एजेंसियों का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच की जा रही है। पार्टी के भीतर भी बढ़ रहा दबाव टीएमसी पहले से ही आंतरिक मतभेदों और राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। हाल के दिनों में पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा अभिषेक बनर्जी पर सार्वजनिक टिप्पणी किए जाने के बाद संगठन के भीतर असहज स्थिति बनी हुई है। हालांकि बाद में दोनों नेताओं ने विवाद को कम करने की कोशिश की, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी पर कानूनी और राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। आगे क्या? अभिषेक बनर्जी के घर पर हुई तलाशी, ईडी की समानांतर कार्रवाई और जारी जांचों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।  

surbhi जून 13, 2026 0
Abhishek Banerjee
हस्ताक्षर जालसाजी केस: अभिषेक बनर्जी के जवाब से खुश नहीं CID, दोबारा पेश होने का दिया आदेश

कोलकाता, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी को हस्ताक्षर जालसाजी मामले में एक बार फिर पश्चिम बंगाल सीआईडी ने तलब किया है। गुरुवार को भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में उनसे करीब साढ़े पांच घंटे तक पूछताछ की गई, लेकिन जांच एजेंसी उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं हुई। अधिकारियों के अनुसार, कई महत्वपूर्ण सवालों पर अभिषेक ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी, जिसके चलते उन्हें 14 जून को दोपहर 12 बजे दोबारा पेश होने का नोटिस जारी किया गया है।   जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप सूत्रों के मुताबिक, सीआईडी अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से सवाल किए, लेकिन कई बार अभिषेक बनर्जी ने "मुझे नहीं पता", "मैं नहीं कह सकता" या "इस बारे में जानकारी नहीं है" जैसे जवाब दिए। जांच एजेंसी का मानना है कि उनके बयानों में विसंगतियां हैं और कई अहम सवालों के संतोषजनक उत्तर नहीं मिले। इसी कारण जांच को आगे बढ़ाने के लिए दोबारा पूछताछ आवश्यक समझी गई।   कोर्ट की राहत के बाद हुए थे पेश सीआईडी ने इससे पहले भी अभिषेक बनर्जी को तीन बार समन भेजा था, लेकिन वे पेश नहीं हुए थे। मामला बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत से राहत मिलने के बाद अभिषेक दिल्ली से कोलकाता लौटे और सीधे सीआईडी मुख्यालय पहुंचे, जहां उनसे लंबी पूछताछ की गई। पूछताछ समाप्त होने के बाद उन्होंने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया और बिना कोई बयान दिए वहां से रवाना हो गए।   पूछताछ के बाद ममता बनर्जी से की मुलाकात पूछताछ के बाद अभिषेक बनर्जी देर रात मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंचे। वहां टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक हुई। हालांकि बैठक के विषय में किसी नेता ने आधिकारिक जानकारी नहीं दी। पार्टी नेताओं ने केवल इतना कहा कि मामला जांच के अधीन है और इस पर सार्वजनिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। अब सभी की नजर 14 जून को होने वाली अगली पूछताछ पर टिकी है, जहां सीआईडी उनसे दोबारा अहम सवाल पूछेगी।

anjali kumari जून 12, 2026 0
TMC leader Abhishek Banerjee faces CID notice in alleged forged signature investigation in West Bengal.
फर्जी हस्ताक्षर मामले में अभिषेक बनर्जी को तीसरा समन, CID ने कोलकाता आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपा

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को तीसरा समन जारी किया है। जांच एजेंसी की टीम ने उनके कोलकाता स्थित आवास पर पहुंचकर नोटिस सौंपा। सूत्रों के अनुसार, CID एक ऐसे मामले की जांच कर रही है, जिसमें विधानसभा से जुड़े एक दस्तावेज पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि संबंधित दस्तावेज में कुछ हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता संदिग्ध है। मामले की जांच जारी है और एजेंसी विभिन्न पक्षों से पूछताछ कर रही है। क्या है पूरा मामला? विवाद उस समय शुरू हुआ जब विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े एक दस्तावेज को लेकर सवाल उठे। कुछ विधायकों ने दावा किया कि दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इसके बाद मामले की शिकायत जांच एजेंसियों तक पहुंची और CID ने जांच शुरू की। जांच के दौरान कुछ विधायकों के बयान दर्ज किए गए हैं। एजेंसी दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है। CID ने जारी किया तीसरा नोटिस जांच एजेंसी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को पहले भी पूछताछ के लिए नोटिस भेजे गए थे। निर्धारित तिथि पर उपस्थित न होने के बाद अब उन्हें तीसरा नोटिस जारी किया गया है। CID अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए उनका बयान महत्वपूर्ण हो सकता है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक इस नए समन पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विवाद भी तेज मामले को लेकर राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल इस घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि जांच को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है। आगे क्या? अब सभी की नजर इस बात पर है कि अभिषेक बनर्जी जांच एजेंसी के समक्ष कब पेश होते हैं और CID की जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल एजेंसी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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