रांची। राजधानी रांची में हाइड्रोपोनिक गांजा की तस्करी और बिक्री के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। नामकुम थाना क्षेत्र में पुलिस ने छापेमारी कर दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से हाइड्रोपोनिक गांजा की 8 पुड़िया, कुल करीब 10.70 ग्राम गांजा, 66,800 रुपये नकद, एक मोटरसाइकिल और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
रांची ग्रामीण एसपी गौरव गोस्वामी ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि नामकुम थाना क्षेत्र के खोजाटोली आर्मी ग्राउंड के पास कुछ लोग मोटरसाइकिल और स्कूटी से हाइड्रोपोनिक गांजा बेचने पहुंचने वाले हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम गठित कर मौके पर छापेमारी की गई।
पुलिस के पहुंचते ही वहां मौजूद कुछ लोग भागने लगे। एक युवक स्कूटी से फरार हो गया, जबकि तीन अन्य मोटरसाइकिल छोड़कर भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर दो युवकों को पकड़ लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राज कुमार राम और बंटी कुमार थापा के रूप में हुई है। दोनों रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं।
तलाशी के दौरान राज कुमार राम के पास से चार जिपर वाली प्लास्टिक पुड़िया में गांजा और 66,800 रुपये नकद बरामद हुए। वहीं बंटी कुमार थापा के पास से भी चार जिपर वाली प्लास्टिक पुड़िया में गांजा मिला।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर हाइड्रोपोनिक गांजा थाईलैंड से पार्सल के जरिए मंगाते थे। इसके बाद रांची के अलग-अलग इलाकों में इसे पैडलर्स के माध्यम से बेचने का काम किया जाता था।
पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले की जांच के दौरान अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी पड़ताल की जा रही है।
गिरफ्तार आरोपी बंटी कुमार थापा का पूर्व आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। मामले में नामकुम थाना कांड संख्या 214/26 दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ NDPS Act की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
इधर, रांची के पिठौरिया थाना क्षेत्र में भी पुलिस ने मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री के खिलाफ छापेमारी की। कुड़रिया निवासी 33 वर्षीय भादो मुंडा के घर से 26 पुड़िया में करीब 80 ग्राम गांजा बरामद किया गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
वहीं, पिठौरिया बाजारटांड़ निवासी प्रदीप भगत के घर से करीब 300 ग्राम गांजा बरामद होने की बात सामने आई है। दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों ने सोमवार को झारखंड विधानसभा घेराव का ऐलान किया। रविवार को सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच हुई वार्ता विफल रहने के बाद छात्रों ने अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने का फैसला किया। सुबह से ही बड़ी संख्या में छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और आसपास के इलाकों से विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। 500 से ज्यादा छात्र हिरासत में विधानसभा घेराव की कोशिश के दौरान रांची में 500 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर कैंप जेल भेजना शुरू किया। पुरानी विधानसभा के पास सरदार पटेल की प्रतिमा के नजदीक भी बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर उतर आए। विधानसभा के आसपास कड़ी सुरक्षा छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने विधानसभा और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कई जगह बैरिकेडिंग की गई है। जगन्नाथपुर मंदिर के पास पुलिस बल के साथ टीयर गैस और वाटर कैनन भी तैनात किए गए हैं। एसडीएम सौरभ कुमार ने कहा कि प्रशासन को उम्मीद है कि छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों को रोका जाएगा। CM आवास के बाहर BJP नेताओं का प्रदर्शन छात्रों की मांगों के समर्थन में भाजपा नेताओं ने भी मुख्यमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, आदित्य साहू, सीपी सिंह, नवीन जायसवाल समेत कई भाजपा नेता और विधायक धरने पर बैठे। कुछ भाजपा नेताओं को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई है। अनशनकारी छात्रों का मेडिकल चेकअप आंदोलन के दौरान भूख हड़ताल कर रहे छात्रों का मेडिकल चेकअप भी कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार छात्रों की स्थिति फिलहाल स्थिर है, हालांकि लगातार अनशन के कारण उनकी सेहत में कुछ गिरावट आई है। डॉक्टरों ने तत्काल अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं बताई। दूसरे राज्यों से भी पहुंचे छात्र आंदोलनकारी छात्रों के मुताबिक, झारखंड के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से भी छात्र रांची पहुंचे हैं। कई छात्र रात में ही अलग-अलग रास्तों से राजधानी पहुंचे और विधानसभा के आसपास जमा होने लगे। क्या हैं छात्रों की मांगें? JPSC-JSSC आंदोलनकारी छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस और सकारात्मक फैसला नहीं लेती, आंदोलन जारी रहेगा। सरकार से वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा तनाव रविवार को सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद छात्रों ने विधानसभा घेराव का निर्णय लिया। सोमवार को प्रदर्शन के मद्देनजर रांची में प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट है।
रांची। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का भव्य आगाज हुआ। दो दिवसीय यह महोत्सव 9 और 10 अगस्त को आयोजित किया जा रहा है। आयोजन में झारखंड के अलग-अलग जनजातीय समुदायों के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से कलाकार और सांस्कृतिक दल पहुंचे हैं। महोत्सव में आदिवासी कला, संस्कृति, परंपरा, संगीत और लोकनृत्य की झलक देखने को मिल रही है। 5 हजार कलाकार देंगे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस वर्ष के आदिवासी महोत्सव को बड़े स्तर पर आयोजित किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 5 हजार कलाकार महोत्सव में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। अलग-अलग राज्यों और जनजातीय समुदायों के कलाकार पारंपरिक गीत-संगीत, नृत्य और वाद्ययंत्रों के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत कर रहे हैं। महोत्सव की शुरुआत से पहले रांची में 'रीझ रंग रसिका' रैली भी निकाली गई। इस रैली में झारखंड के 32 अलग-अलग जनजातीय वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। रैली के दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर कलाकारों ने सांस्कृतिक रंग बिखेरा। कला-संस्कृति के साथ आदिवासी जीवन की झलक महोत्सव में केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि आदिवासी जीवन और परंपराओं से जुड़े विभिन्न आयोजन भी आकर्षण का केंद्र हैं। पारंपरिक खान-पान, कला एवं हस्तशिल्प, फैशन शो और फिल्म स्क्रीनिंग जैसे कार्यक्रमों को भी महोत्सव का हिस्सा बनाया गया है। इससे आगंतुकों को देश की विविध आदिवासी संस्कृतियों को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है। रांची में सुरक्षा और यातायात की विशेष व्यवस्था महोत्सव को देखते हुए रांची में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। जेल चौक से मोरहाबादी की ओर वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है और लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग तथा पार्किंग की व्यवस्था की गई है। आयोजन स्थल के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती और जांच व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। दो दिवसीय यह आयोजन झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को राष्ट्रीय मंच देने के साथ-साथ देश के अलग-अलग हिस्सों की जनजातीय परंपराओं को एक मंच पर लाने का प्रयास है। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर रांची में आयोजित यह महोत्सव कलाकारों और दर्शकों के लिए प्रमुख आकर्षण बना हुआ है।
रांची। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) के आयोजन में लगातार हो रही देरी पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। राज्य में करीब नौ साल से JTET परीक्षा आयोजित नहीं होने के मामले में अदालत ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को शोकॉज नोटिस जारी किया है। नौ साल से परीक्षा का इंतजार JTET का आयोजन लंबे समय से नहीं होने के कारण शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड गठन के बाद अब तक JTET का आयोजन केवल दो बार हुआ है और 2016 के बाद परीक्षा नहीं हुई। इस देरी का सीधा असर शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है। अभ्यर्थी लगातार परीक्षा आयोजित कराने की मांग कर रहे हैं। हाईकोर्ट ने मांगा जवाब मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से JTET को लेकर देरी का कारण और परीक्षा आयोजित करने की स्थिति स्पष्ट करने को कहा। शिक्षा सचिव से इस संबंध में जवाब मांगा गया है। इससे पहले हाईकोर्ट ने सरकार को मार्च 2026 तक JTET आयोजित कराने का निर्देश दिया था और JTET होने तक नई सहायक शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने का आदेश भी दिया था। भाषा विवाद से भी अटकी प्रक्रिया JTET 2026 की प्रक्रिया में भोजपुरी, अंगिका और मगही जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने को लेकर भी विवाद सामने आया है। इसी भाषा विवाद के कारण परीक्षा की नियमावली और आवेदन प्रक्रिया प्रभावित होने की रिपोर्टें सामने आई थीं। अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शिक्षा विभाग को परीक्षा में देरी को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा। अभ्यर्थियों की नजर अदालत के अगले आदेश और सरकार की कार्रवाई पर है।