झारखंड

छाताबाद भू-धंसान: पुनर्वास की मांग को इरफान अंसारी का समर्थन

छाताबाद में भू-धंसान के बाद बढ़ा आक्रोश, पुनर्वास की मांग को मंत्री इरफान अंसारी का समर्थन

ranjan kumar tiwari अगस्त 10, 2026 0
छाताबाद में भू-धंसान प्रभावित ग्रामीणों के आंदोलन को मंत्री इरफान अंसारी का समर्थन
छाताबाद भू-धंसान के बाद पुनर्वास और रोजगार की मांग को समर्थन

धनबाद। कतरास के छाताबाद में भू-धंसान की घटना के बाद ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। घर और जमीन पर मंडरा रहे खतरे के बीच ग्रामीण पुनर्वास और रोजगार की मांग को लेकर STG-DECO आउटसोर्सिंग के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। ग्रामीणों ने अपने आंदोलन को ‘आशियाना बचाओ आंदोलन’ नाम दिया है। सोमवार को झारखंड सरकार के मंत्री इरफान अंसारी भी धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों की मांगों का समर्थन किया।

 

भू-धंसान से 15 घर हुए जमींदोज

 

छाताबाद में हाल के दिनों में भू-धंसान की घटना से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बताया जा रहा है कि इस घटना में करीब 15 घर जमींदोज हो चुके हैं। इलाके में जगह-जगह जमीन में दरारें पड़ने से ग्रामीणों में भय का माहौल है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला खनन और आउटसोर्सिंग परियोजनाओं के कारण क्षेत्र में भू-धंसान का खतरा लगातार बढ़ रहा है। प्रभावित परिवार अब सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास, रोजगार और उचित राहत की मांग कर रहे हैं।

 

मंत्री ने सुनी ग्रामीणों की समस्याएं

 

धरना स्थल पर पहुंचे मंत्री इरफान अंसारी ने आंदोलनकारी ग्रामीणों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के साथ किसी भी तरह की नाइंसाफी नहीं होने दी जाएगी।

मंत्री ने BCCL और CIL प्रबंधन से प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कंपनियों की प्राथमिकता सिर्फ कोयला उत्पादन नहीं होनी चाहिए, बल्कि खनन से प्रभावित लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास भी उनकी जिम्मेदारी है।

 

‘पहले सुरक्षा, फिर पुनर्वास और रोजगार’

 

इरफान अंसारी ने कहा कि जिस इलाके में भू-धंसान का खतरा है, वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित पुनर्वास के साथ चिकित्सा सुविधा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने स्थानीय विधायक और सांसद पर भी ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर पर्याप्त पहल नहीं करने का आरोप लगाया। मंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों की आवाज को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

 

मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान

 

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी प्राथमिकता अपने घर और जान-माल की सुरक्षा है। उनकी मांग है कि प्रभावित परिवारों का सुरक्षित पुनर्वास किया जाए और उन्हें रोजगार की व्यवस्था दी जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक ‘आशियाना बचाओ आंदोलन’ जारी रहेगा।

अब मंत्री के हस्तक्षेप के बाद ग्रामीणों और BCCL प्रबंधन के बीच क्या समाधान निकलता है, इस पर सभी की नजर है।

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

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हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

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पूर्वी सिंहभूम में छात्र आंदोलन का असर, आज सुबह 10:30 बजे तक बंद रहेंगे सभी स्कूल

जमशेदपुर: झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन और उससे उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए पूर्वी सिंहभूम जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 10 अगस्त की सुबह 10:30 बजे तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है. विद्यार्थियों की सुरक्षा और जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने यह फैसला लिया है. जिला शिक्षा पदाधिकारी निशु कुमारी ने रविवार को जिले के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों के प्राचार्य और प्रधानाध्यापकों को इस संबंध में पत्र जारी किया. पत्र में स्पष्ट किया गया है कि छात्र आंदोलन को देखते हुए निर्धारित अवधि तक स्कूलों में विद्यार्थियों की उपस्थिति नहीं होगी. सुरक्षा को देखते हुए लिया गया फैसला जिला शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया गया है. 10 अगस्त को सुबह 10:30 बजे तक जिले के सभी स्कूल बंद रहेंगे. यह आदेश सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी विद्यालयों पर भी लागू होगा. स्कूल प्रबंधन को दिए गये निर्देश जिला शिक्षा पदाधिकारी ने सभी स्कूलों के प्राचार्य और प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया है कि आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें. निर्धारित अवधि के बाद भी विद्यार्थियों के लिए पठन-पाठन और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन को लेकर विभागीय निर्देशों का पालन करना होगा. छात्र आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. विद्यार्थियों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए आगे के निर्णय लिए जा सकते हैं.  

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JPSC Exam Scam: गिरफ्तार अभय तिवारी का दावा- खियांग्ते ने 2 करोड़ लेकर TDPL को दिया काम, 20% हिस्सेदारी का भी आरोप

रांची: JPSC परीक्षा में कथित घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले में नए और गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं. परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TDPL के मार्केटिंग मैनेजर और गिरफ्तार आरोपी अभय तिवारी ने सीआईडी को दिए बयान में तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल खियांग्ते पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अभय के मुताबिक, TDPL को JPSC का काम दिलाने के एवज में खियांग्ते को कथित तौर पर दो करोड़ रुपये नकद देने की बात तय हुई थी. इसके अलावा JPSC से कंपनी को मिलने वाले भुगतान में 20 फीसदी हिस्सेदारी की भी बात सामने आने का दावा किया गया है. हालांकि, ये आरोप फिलहाल जांच एजेंसी के सामने दिए गये बयान का हिस्सा हैं. इनकी स्वतंत्र पुष्टि और आरोपों की सत्यता की जांच सीआईडी कर रही है. धर्मेंद्र के जरिए हुई खियांग्ते से पहचान सीआईडी के अनुसार, अभय तिवारी ने पूछताछ में बताया कि उसकी खियांग्ते से पहचान धर्मेंद्र के माध्यम से हुई थी. धर्मेंद्र तत्कालीन JPSC अध्यक्ष के कंप्यूटर कोषांग में कार्यरत था और इस मामले में उसे भी गिरफ्तार किया जा चुका है. अभय के बयान के मुताबिक, जून महीने में उसने TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और सत्यपाल की मुलाकात धर्मेंद्र से करायी. इसके बाद TDPL के निदेशकों, बोकारो के सानंद प्रकाश और एल खियांग्ते के बीच होटल रेडिशन ब्ल्यू के रेस्टोरेंट में बैठक हुई. होटल में बैठक के बाद JPSC में हुआ प्रेजेंटेशन बताया गया है कि होटल में मुलाकात के दो दिन बाद TDPL की ओर से JPSC कार्यालय में प्रेजेंटेशन दिया गया. इस दौरान आयोग के सदस्य और परीक्षा उपनियंत्रक भी मौजूद थीं. प्रेजेंटेशन के बाद खियांग्ते ने कंपनी का प्रस्ताव उपपरीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को सौंपा और TDPL के निदेशक रामवीर सिंह को धर्मेंद्र के संपर्क में रहने को कहा. चार शर्तों पर सहमति का दावा अभय तिवारी ने सीआईडी को बताया कि प्रेजेंटेशन के बाद मोरहाबादी मैदान में TDPL निदेशक रामवीर सिंह और धर्मेंद्र के बीच बातचीत हुई. इस दौरान कथित तौर पर चार शर्तें रखी गयीं. इनमें तत्कालीन अध्यक्ष को दो करोड़ रुपये, धर्मेंद्र को 25 लाख रुपये देने, कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने और JPSC से कंपनी को मिलने वाले भुगतान में 20 फीसदी हिस्सेदारी देने की बात शामिल होने का दावा किया गया है. अभय के अनुसार, TDPL के निदेशक ने इन शर्तों पर सहमति जतायी. इसके बाद धर्मेंद्र के माध्यम से उनकी एल खियांग्ते से मुलाकात करायी गयी. आरोप है कि इसके बाद जून में ही JPSC ने TDPL के साथ करार कर सभी परीक्षाओं के संचालन का कार्यादेश दे दिया. अभय के बयान के बाद सीआईडी की छापेमारी अभय तिवारी के पूछताछ में सामने आये तथ्यों के आधार पर सीआईडी ने सानंद प्रकाश, धर्मेंद्र समेत कई लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की. इस दौरान धर्मेंद्र को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में धर्मेंद्र से भी कई अहम जानकारियां मिलने की बात सामने आयी है. इसके बाद जांच एजेंसी ने JPSC के तीन सदस्यों डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद को पूछताछ के लिए समन किया है. तीन सदस्यों से अलग-अलग पूछताछ सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा संचालन से जुड़ी कथित गड़बड़ियों में आयोग के सदस्यों की क्या भूमिका थी और अभय तिवारी ने पूछताछ में जो आरोप लगाये हैं, उनमें कितनी सच्चाई है. इसी को लेकर तीनों सदस्यों से अलग-अलग पूछताछ की जायेगी. जांच एजेंसी अब TDPL, JPSC अधिकारियों, गिरफ्तार आरोपियों और अभ्यर्थियों से जुड़े तथ्यों को आपस में जोड़कर पूरे मामले की कड़ी तलाशने में जुटी है.  

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